आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।
आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।
ईरान जंग में ट्रम्प अपने 5 मकसद से कितने दूर:पहले ही दिन खामेनेई की हत्या, मिसाइल इंडस्ट्री तबाह की, लेकिन परमाणु खतरा बरकरार

अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया। इसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने 8 मिनट का वीडियो जारी करके जंग के टारगेट बताए। उन्होंने कहा कि उनका मकसद अमेरिकी लोगों की रक्षा करना और ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करना है। अब ट्रम्प के बताए टारगेट्स के मुताबिक समझते हैं कि अमेरिका को जंग में अब तक कितनी कामयाबी मिली है। उसे क्या हासिल हुआ है और क्या अब भी अधूरा है। 1. मिसाइल और हथियार इंडस्ट्री खत्म करना अमेरिका और इजराइल का अहम मकसद था कि ईरान की मिसाइल ताकत को कमजोर कर दिया जाए, ताकि वह दूर तक हमला न कर सके। इसके लिए दोनों देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकाने (लॉन्चर), मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों, मिसाइल स्टोर करने के गोदाम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमले किए। इन हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी नुकसान हुआ है। कई लॉन्चर और फैक्ट्रियां नष्ट हो चुकी हैं। इससे उसकी नई मिसाइल बनाने की रफ्तार धीमी पड़ी है। लेकिन अभी भी ईरान के पास काफी मिसाइलें बची हुई हैं और वह हमले कर रहा है। ईरान ने अपनी मिसाइलें अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखी हैं। कई ठिकाने जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) हैं, जिन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है। कुछ मोबाइल लॉन्चर होते हैं, जिन्हें जल्दी-जल्दी जगह बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान अब सिर्फ मिसाइलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में ड्रोन (मानवरहित विमान) का भी इस्तेमाल कर रहा है। 2. नौसेना को खत्म करना अमेरिका और इजराइल का टारगेट था कि ईरान की नौसेना को कमजोर या लगभग खत्म कर दिया जाए, ताकि वह समुद्र के रास्ते कोई बड़ा हमला या बाधा न डाल सके। इसके लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां, नौसैनिक ठिकाने और बंदरगाह और हथियार और मिसाइल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर श्रीलंका के पास मौजूद ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 80 लोगों की मौत हुई। यह हमला इसलिए अहम था क्योंकि यह जहाज लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम था और हाल ही में भारत के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में भी शामिल हुआ था। इन हमलों से ईरान के कई बड़े जहाज और संसाधन नष्ट हो गए। समुद्र में उसकी ताकत पहले से कमजोर हो गई। लंबी दूरी पर ऑपरेशन करने की क्षमता घट गई। हालांकि वह अब भी समुद्र में खतरा पैदा करने की क्षमता रखता है। ईरान के पास छोटी-छोटी तेज नावें (स्पीड बोट्स) हैं, जिनका इस्तेमाल वह अब भी कर सकता है। वह समुद्र में बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने जैसी रणनीति अपना सकता है जो होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में छोटी ताकत भी बड़ा असर डाल सकती है। 3. ईरान समर्थित मिलिशिया को कमजोर करना अमेरिका और इजराइल चाहते थे कि ईरान जिन हथियारबंद ग्रुप्स को समर्थन देता है, उन्हें कमजोर कर दिया जाए। ये ग्रुप्स अलग-अलग देशों में ईरान के लिए काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर हमले भी करते हैं। इसलिए इन्हें ‘प्रॉक्सी’ ताकत कहा जाता है। जंग के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया। इजराइल ने खास तौर पर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए। कई कमांडरों और लड़ाकों को मार गिराया। इससे इनकी ताकत कमजोर हुई, लेकिन उनका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका के लिए असल चुनौती यह है कि ये मिलिशिया किसी एक देश या एक जगह तक सीमित नहीं हैं। इराक, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों के अलग-अलग इलाकों में इनके नेटवर्क फैले हुए हैं। इनके पास स्थानीय सपोर्ट भी होता है और अपनी अलग व्यवस्था भी होती है। ऊपर से ईरान इनकी मदद करता रहता है, जिससे ये जल्दी संभल जाते हैं। इसी वजह से, हमलों के बावजूद ये पूरी तरह खत्म नहीं हुए। इराक में अब भी कुछ गुट अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमले कर रहे हैं। हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले हुए हैं, लेकिन वह अब भी एक मजबूत ताकत बना हुआ है और पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 4. ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा मकसद यह था कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार न बना सके। ट्रम्प बार-बार कह चुके हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु बम नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने पिछले साल ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। फिर भी अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुछ समृद्ध यूरेनियम अब भी मौजूद है। यह यूरेनियम जमीन के नीचे गहरी सुरंगों या बंकर जैसे ठिकानों में छिपा हो सकता है, जहां तक हवाई हमलों का असर पूरी तरह नहीं होता। अगर इन्हें पूरी तरह नष्ट करना हो, तो जमीन पर सेना भेजनी पड़ सकती है, जो बेहद जोखिम भरा कदम होगा और जंग को और बड़ा बना सकता है। 5. ईरान में सत्ता परिवर्तन ट्रम्प ने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उठने की अपील भी की थी। लेकिन अभी तक ऐसा कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं हुआ है। हालांकि ट्रम्प का दावा है कि उन्होंने रेजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन कर दिया है, क्योंकि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। लेकिन जमीन पर अलग स्थिति दिखाई देती है। अब नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई बने हैं, जो सख्त रुख वाले माने जाते हैं और सेना के ताकतवर हिस्से के करीब हैं। कुल मिलाकर, ईरान की सरकार अब भी पहले जैसी ही है। ईरान की सरकार अब भी धार्मिक और कड़े नियंत्रण वाली है। अमेरिका के खिलाफ उसका रुख भी पहले जैसा ही है। ——————————— ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान पर 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं: 2 साल में बनता है 34 करोड़ का यह हथियार, जंग खिंची तो स्टॉक खत्म होने की आशंका ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसे अमेरिकी हथियारों के जखीरे का अहम हथियार माना जाता है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। अनुमान है
अक्षय खन्ना का साउथ फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू:धुरंधर 2 के बाद 'महाकाली' फिल्म में दिखेंगे; शुक्राचार्य के रोल में फोटो वायरल

फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ के बाद अब अक्षय खन्ना साउथ सिनेमा में दिखाई देंगे। वे निर्देशक प्रशांत वर्मा की फिल्म ‘महाकाली’ में नजर आएंगे। हाल ही में फिल्म के सेट से अक्षय खन्ना की एक बिहाइंड-द-सीन (BTS) फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इसे खुद निर्देशक प्रशांत वर्मा ने शेयर किया है। फोटो के साथ उन्होंने अक्षय खन्ना के लिए एक खास मैसेज भी लिखा है। ‘असुर गुरु शुक्राचार्य’ के रोल में दिखेंगे अक्षय फिल्म ‘महाकाली’ के जरिए अक्षय खन्ना तेलुगू सिनेमा में अपना डेब्यू कर रहे हैं। यह फिल्म प्रशांत वर्मा के ‘सिनेमैटिक यूनिवर्स’ (PVCU) का एक अहम हिस्सा होगी। इससे पहले फिल्म का फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया गया था, जिसमें अक्षय खन्ना ‘असुर गुरु शुक्राचार्य’ के रहस्यमयी किरदार में नजर आए थे। निर्देशक प्रशांत वर्मा ने लिखा इमोशनल नोट प्रशांत वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर अक्षय खन्ना के साथ फोटो शेयर करते हुए एक्टर की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, “एक सच्चे अभिनेता यह साबित करते हैं कि असली टैलेंट को दिखावे की जरूरत नहीं होती। अक्षय की पर्दे पर मौजूदगी, दमदार अभिनय और उनका क्लास हमेशा अलग दिखता है। आपके साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है।” प्रशांत ने आगे बताया कि वे दुनिया को यह दिखाने के लिए बेताब हैं कि उन्होंने साथ मिलकर क्या बनाया है। उन्होंने पोस्ट में ‘महाकाली’ और ‘जय हनुमान’ जैसे हैशटैग्स का भी इस्तेमाल किया। 30 साल बाद सनी देओल के साथ दिखेंगे साउथ के साथ-साथ अक्षय खन्ना बॉलीवुड में भी एक बड़े प्रोजेक्ट ‘इक्का’ का हिस्सा हैं। इस क्राइम ड्रामा फिल्म में वे सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म के टीजर में सनी देओल एक वकील के किरदार में दिख रहे हैं, जबकि अक्षय खन्ना की एंट्री पुलिस वालों के साथ होती है। बता दें कि अक्षय खन्ना और सनी देओल आखिरी बार साल 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ में साथ नजर आए थे। करीब 30 साल बाद इन दोनों एक्टर्स अब साथ दिखेंगे।
अक्षय खन्ना का साउथ फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू:धुरंधर 2 के बाद 'महाकाली' फिल्म में दिखेंगे; शुक्राचार्य के रोल में फोटो वायरल

फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ के बाद अब अक्षय खन्ना साउथ सिनेमा में दिखाई देंगे। वे निर्देशक प्रशांत वर्मा की फिल्म ‘महाकाली’ में नजर आएंगे। हाल ही में फिल्म के सेट से अक्षय खन्ना की एक बिहाइंड-द-सीन (BTS) फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इसे खुद निर्देशक प्रशांत वर्मा ने शेयर किया है। फोटो के साथ उन्होंने अक्षय खन्ना के लिए एक खास मैसेज भी लिखा है। ‘असुर गुरु शुक्राचार्य’ के रोल में दिखेंगे अक्षय फिल्म ‘महाकाली’ के जरिए अक्षय खन्ना तेलुगू सिनेमा में अपना डेब्यू कर रहे हैं। यह फिल्म प्रशांत वर्मा के ‘सिनेमैटिक यूनिवर्स’ (PVCU) का एक अहम हिस्सा होगी। इससे पहले फिल्म का फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया गया था, जिसमें अक्षय खन्ना ‘असुर गुरु शुक्राचार्य’ के रहस्यमयी किरदार में नजर आए थे। निर्देशक प्रशांत वर्मा ने लिखा इमोशनल नोट प्रशांत वर्मा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर अक्षय खन्ना के साथ फोटो शेयर करते हुए एक्टर की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, “एक सच्चे अभिनेता यह साबित करते हैं कि असली टैलेंट को दिखावे की जरूरत नहीं होती। अक्षय की पर्दे पर मौजूदगी, दमदार अभिनय और उनका क्लास हमेशा अलग दिखता है। आपके साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है।” प्रशांत ने आगे बताया कि वे दुनिया को यह दिखाने के लिए बेताब हैं कि उन्होंने साथ मिलकर क्या बनाया है। उन्होंने पोस्ट में ‘महाकाली’ और ‘जय हनुमान’ जैसे हैशटैग्स का भी इस्तेमाल किया। 30 साल बाद सनी देओल के साथ दिखेंगे साउथ के साथ-साथ अक्षय खन्ना बॉलीवुड में भी एक बड़े प्रोजेक्ट ‘इक्का’ का हिस्सा हैं। इस क्राइम ड्रामा फिल्म में वे सनी देओल के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म के टीजर में सनी देओल एक वकील के किरदार में दिख रहे हैं, जबकि अक्षय खन्ना की एंट्री पुलिस वालों के साथ होती है। बता दें कि अक्षय खन्ना और सनी देओल आखिरी बार साल 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ में साथ नजर आए थे। करीब 30 साल बाद इन दोनों एक्टर्स अब साथ दिखेंगे।
धुरंधर 2 की सफलता से इंडस्ट्री में खलबली मची:बॉलीवुड से साउथ तक आधा दर्जन फिल्मों ने बदली रिलीज डेट, अक्षय की भूत बंगला भी टली

‘धुरंधर 2’ की बॉक्स ऑफिस सुनामी ने बॉलीवुड से साउथ तक पूरा रिलीज कैलेंडर उलट-पलट दिया है। अब अक्षय कुमार जैसे स्टार की फिल्म ‘भूत बंगला’ ने भी रिलीज डेट आगे खिसका ली है। रणवीर सिंह की फिल्म के चक्कर में बॉलीवुड ही नहीं, साउथ और हॉलीवुड की फिल्में भी रिलीज डेट बदल चुकी हैं। ‘धुरंधर 2’ की रिलीज डेट जिस दिन अनाउंस हुई थी, उसी दिन से बाकी फिल्मों के शेड्यूल बिगड़ने लगे थे। अब ‘धुरंधर 2’ की सुनामी का लेटेस्ट शिकार बनी है अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’। अक्षय और प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूत बंगला’ 10 अप्रैल को रिलीज होने के लिए शेड्यूल थी। कुछ समय पहले ही फिल्म का टीजर आया था, जिसे जनता से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला था। लेकिन अब वैरायटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने ‘धुरंधर 2’ के चलते फिल्म की रिलीज एक हफ्ता आगे बढ़ा दी है। अब ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होगी। ‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस दबदबा ‘धुरंधर 2’ अभी भी थिएटर्स में दमदार बिजनेस कर रही है। इसका बॉक्स ऑफिस ट्रेंड बता रहा है कि कम से कम और दो हफ्ते तक यह तगड़ी कमाई करती रहेगी। ऐसे में स्क्रीन शेयरिंग, हाइप और कमाई के मामले में ‘भूत बंगला’ को मुश्किल सामना करना पड़ सकता है, इसलिए इसे टाल दिया गया है। ‘धुरंधर 2’ से बिगड़े शेड्यूल 19 मार्च को ‘धुरंधर 2’ के आने से पहले कई फिल्मों की रिलीज डेट पहले ही बदल चुकी थी। * तेलुगु स्टार अदिवि शेष की एक्शन ड्रामा ‘डकैत’ भी इससे प्रभावित होकर अपनी रिलीज डेट आगे बढ़ाई। * ‘धमाल 4’ अब 4 जुलाई तक चला गया। * हॉलीवुड की प्रोजेक्ट ‘हेल मैरी’ एक हफ्ता टलकर 26 मार्च को रिलीज हुई। * तेलुगु इंडस्ट्री की ‘पेद्दी’ अब 30 अप्रैल और ‘द पैराडाइस’ 21 अगस्त को आएंगी। कुल मिलाकर ‘धुरंधर 2’ अब तक आधा दर्जन फिल्मों की रिलीज डेट बदलवा चुकी है। ‘धुरंधर 2’ रोजाना भारी कलेक्शन कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार फिल्म 10 दिनों से रोजाना ₹40 करोड़+ नेट कलेक्शन कर रही है। अगर यह इसी तरह चलती रही, तो आधे अप्रैल तक इसका कब्जा बना रहेगा।
फिल्म इंडस्ट्री को लेकर तनुश्री दत्ता का गंभीर दावा:कहा-शोबिज में कई कलाकारों का इस्तेमाल हो जाता है; कुछ तो प्रॉस्टिट्यूशन में चले जाते हैं

एक्ट्रेस तनुश्री दत्ता ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री (शोबिज) में नए कलाकारों के शोषण को लेकर गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि मनोरंजन जगत में कई नए लोगों के साथ शोषण होता है और कुछ को तो देह व्यापार तक धकेल दिया जाता है। यूट्यूब चैनल मेरी सहेली के साथ बातचीत में तनुश्री ने कहा कि इंडस्ट्री में आने वाले कई नए लोगों को पहले तारीफों और बड़े वादों से आकर्षित किया जाता है। उन्होंने कहा, “किसी को कहा जाता है कि आप हीरोइन बनेंगे या बड़े स्टार बनेंगे, लेकिन कई बार यही बातें आगे चलकर एक जाल की शुरुआत बन जाती हैं।” तनुश्री के अनुसार, कई लोग पहले नए कलाकारों की तारीफ करते हैं और फिर उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने के लिए कहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में कलाकारों को बहुत संयम और सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ता है। ‘यहां लालच का तरीका अलग होता है’- तनुश्री तनुश्री ने कहा कि बचपन में माता-पिता जो सावधान रहने की सीख देते हैं, वह बड़े होने के बाद भी लागू होती है। उन्होंने कहा कि जैसे बच्चों को अनजान लोगों के साथ न जाने की सलाह दी जाती है, वैसे ही इंडस्ट्री में भी सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि यहां लालच अलग तरीके से दिया जाता है। उनके मुताबिक कई लोग कलाकारों की महत्वाकांक्षा, उम्मीदों और सपनों का इस्तेमाल करते हैं। तनुश्री ने कहा कि वह इन मुद्दों पर इसलिए बोलती हैं ताकि इंडस्ट्री में आने वाले नए लोगों को चेतावनी मिल सके। एक्ट्रेस ने यह भी कहा, “बहुत सारे लड़के-लड़कियां यहां आते हैं। उनका इस्तेमाल किया जाता है और उनका शोषण होता है, फिर उन्हें छोड़ दिया जाता है। कुछ लोग बाद में प्रॉस्टिट्यूशन में चले जाते हैं, क्योंकि उनके साथ इतना ज्यादा शोषण हो चुका होता है कि लोग उन्हें उस धंधे में धकेल देते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग इतने ज्यादा मानसिक रूप से टूट जाते हैं कि अपने शहर वापस चले जाते हैं। और ये कहानियां कभी बाहर नहीं आतीं। बाहर सिर्फ सक्सेस की स्टोरीज ही दिखाई जाती हैं।” तनुश्री ने यह भी बताया कि उन्होंने एक एक्ट्रेस से दोस्ती खत्म कर दी थी, क्योंकि उस बातचीत में इंडस्ट्री में समझौते को सही ठहराने जैसी बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि अगर किसी से निजी रिश्ते में रहना उनकी इच्छा है तो वह अलग बात है, लेकिन वह अपनी जिंदगी का सौदा नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, “मैं उस धंधे में नहीं हूं। मैं एक कलाकार हूं।”
धुरंधर 2 से क्लैश का इंडस्ट्री में डर:टॉक्सिक के बाद अदिवी शेष की डकैत की भी रिलीज टली, 19 मार्च की जगह 10 अप्रैल को आएगी

रणवीर सिंह स्टारर मोस्ट अवेटेड फिल्म धुरंधरः द रिवेंज 19 मार्च को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। पहले केजीएफ स्टार यश की फिल्म टॉक्सिक भी 19 मार्च को ही रिलीज होनी थी, लेकिन रिलीज से 2 हफ्ते पहले ही मेकर्स ने इसे पोस्टपोन कर दिया है। इसके बाद अब अदिवी शेष की फिल्म डकैल भी पोस्टपोन हो चुकी है। एक्टर अदिवी शेष ने रिलीज डेट बदले जाने की घोषणा सोशल मीडिया के जरिए की है। उन्होंने फिल्म का नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें रिलीज डेट 19 मार्च नहीं 10 अप्रैल लिखी है। इसके साथ एक्टर ने कैप्शन में लिखा, गोल्डफिश 10 अप्रैल को, वर्ल्डवाइड सिनेमाघरों में। डकैत। अब भूत बंगला से होगा डकैत का क्लैश रिलीज डेट टाले जाने के बावजूद फिल्म को क्लैश से राहत नहीं मिली है। अब इस फिल्म का क्लैश धुरंधर 2 से नहीं बल्कि अक्षय कुमार स्टारर हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला से होगा। श्रुति हासन को किया था मृणाल ठाकुर ने रिप्लेस फिल्म डकैत में पहले श्रुति हासन लीड रोल निभाने वाली थीं, हालांकि क्रिएटिव डिफरेंस के चलते उन्होंने फिल्म छोड़ दी। उनके प्रोजेक्ट से हटने के बाद मृणाल ठाकुर ने उन्हें रिप्लेस किया था। यश की टॉक्सिक की भी रिलीज टली केजीएफ स्टार यश और कियारा आडवाणी की मोस्ट अवेडेट फिल्म टॉक्सिक पहले 19 मार्च को रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि रिलीज से ठीक पहले मेकर्स ने इसे पोस्टपोन कर दिया है। हालांकि इसका कारण क्लैश नहीं बताया गया। मेकर्स की मानें तो इजरायल, अमेरिका और ईरान में चल रही जंग के चलते इसकी रिलीज टाली जा रही है। मेकर्स चाहते हैं कि फिल्म को वर्ल्डवाइड बड़े स्कैल में रिलीज किया जाए, लेकिन अगर इसे 19 मार्च को रिलीज किया जाता तो कई देशों में फिल्म रिलीज नहीं हो पाती। अब ये फिल्म 4 जून को वर्ल्डवाइड रिलीज होगी।
AI क्रांतिः तैयार सॉफ्टवेयर का दौर खत्म:भारतीय आईटी इंडस्ट्री के अरबों डॉलर बिजनेस मॉडल को बदल रहे, डेटा और एआई एजेंट का जमाना

ग्लोबल टेक इंडस्ट्री एक निर्णायक मोड़ पर हैं, जहां पुराने अरबों डॉलर के बिजनेस मॉडल तेजी से ध्वस्त हो रहे हैं। क्लाउड, एआई और ऑटोमेशन ने पारंपरिक आईटी सर्विसेज, महंगे सॉफ्टवेयर लाइसेंस और लंबी अवधि के मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स को चुनौती दी है। अब कोडिंग, टेस्टिंग और सपोर्ट जैसे काम एआई टूल्स के जरिए तेजी से और कम लागत में किए जा रहे हैं। इससे आईटी कंपनियों के राजस्व पर दबाव पड़ रहा है। टेक जगत में इस बदलाव को सासपोकैलिप्स कहा जा रहा है, जो पारंपरिक सॉफ्टवेयर-एज-अ-सर्विस कंपनियों के लिए किसी प्रलय से कम नहीं है। इसकी दहशत में भारत समेत दुनियाभर के आईटी कंपनियों के शेयर टूट रहे हैं। भारत में एक माह में आईटी इंडेक्स 14% से अधिक टूट चुका है, जो हालिया वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट है। खास बात यह है कि इसकी अगुवाई भारतीय मूल के दिग्गज कर रहे हैं। जानते हैं ऐसे कुछ मार्केट लीडर्स के बारे में राहुल पाटील: 11 विभागों का काम एआई करेगा; आईटी के शेयर गिरे एन्थ्रोपिक में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर राहुल पाटील ने एआई मॉडल क्लाउड को चैटबॉट से आगे बढ़ाकर एक ऑटोनॉमस एआई वर्कफ्लो टूल क्लाउड कोवर्क में बदल दिया। इसमें 11 ऐसे प्लग-इन हैं जो अलग-अलग विभागों (लीगल, सेल्स, मार्केटिंग, डेटा आदि) के काम कर सकते हैं। इसकी लॉन्चिंग के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। राहुल ने कंप्यूटर साइंस में बीई बेंगलुरु से किया। अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटर साइंस में मास्टर किया। राहुल पाटील इससे पहले ओरेकल क्लाउड, अमेजन बेव सर्विसेज, स्ट्राइप और माइक्रोसॉफ्ट में अहम ओहदों पर रह चुके हैं। श्रीधर रामास्वामी: डेटा सॉल्यूशंस से सेल्सफोर्स, ओरेकल को कड़ी चुनौती स्नोफ्लेक सीईओ श्रीधर रामास्वामी के नेतृत्व में कंपनियों को अलग-अलग स्रोतों (एप्स, वेबसाइट) से डेटा जोड़ने, स्टोर करने और उसी डेटा पर एप्लिकेशन बनाने की सुविधा देता है। कंपनियां अब तैयार सॉफ्टवेयर (जैसे पारंपरिक सीआरएम) खरीदने के बजाय डेटा पर आधारित कस्टम सॉल्यूशंस बना रही हैं। स्नोफ्लेक का मॉडल एमेजन एडब्ल्यूएस, माइक्रोसॉफ्ट एज्योर व गूगल क्लाउड तीनों पर काम करता है। इससे सेल्सफोर्स, ओरेकल जैसे एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनियों को चुनौती मिली है। रामास्वामी आईआईटी मद्रास से बीटेक और अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी से पीएचडी हैं। गूगल में लंबे समय तक सीनियर वीपी रहे। 2024 में स्नोफ्लेक के सीईओ बनें। अरविंद कृष्णा: डेटा सुरक्षा के साथ कस्टम मॉडल बनाने की सुविधा दी आईबीएम सीईओ अरविंद कृष्णा कंपनी को पारंपरिक हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर दिग्गज से एआई और हाइब्रिड क्लाउड-फोकस्ड टेक कंपनी में बदल रहे हैं। वॉटसनएक्स प्लेटफॉर्म एंटरप्राइज एआई टूल्स का व्यापक इकोसिस्टम है। ये कंपनियों को एआई मॉडल बनाने, ट्रेन करने और सुरक्षित तरीके से लागू करने की सुविधा देता है। क्या बदलाव आया? मैनुअल कोडिंग, लंबी डेवलपमेंट प्रक्रिया कम हो रही है। कंपनियां अपने डेटा पर कस्टम एआई मॉडल तैयार कर सकती हैं। बैंकिंग, हेल्थकेयर, सरकारी संस्थान सुरक्षित तरीके से एआई अपना सकते हैं। कृष्णा ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग व यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय से पीएचडी। 1990 में आईबीएम से जुड़े। 2020 में सीईओ बने। रेवती अद्वैती: इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस से सॉफ्टवेयर कंपनियों को कड़ी चुनौती फ्लेक्स की सीईओ रेवती अद्वैती मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से आगे बढ़ाकर इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन प्रोवाइडर में बदल रही हैं। इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन सिस्टम, हेल्थकेयर उपकरण जैसे प्रोडक्ट में सॉफ्टवेयर और एआई क्षमताएं जोड़ी जा रही हैं, जिससे डिवाइस खुद डेटा प्रोसेस कर सके। निर्णय लेने में सक्षम हो। क्या बदलाव आया? स्टैंडअलोन सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती। ग्राहक अलग-अलग समाधान खरीदने के बजाय इंटीग्रेटेड एंड-टू-एंड सिस्टम को प्राथमिकता दे रहे हैं। रेवती ने बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग और अमेरिका के थंडरबर्ड स्कूल से एमबीए किया। हनीवेल में सीनियर नेतृत्व भूमिकाओं के बाद 2019 में फ्लेक्स की सीईओ बनीं।









