Thursday, 16 Apr 2026 | 03:34 AM

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बड़े डायरेक्टर्स को लगा था धुरंधर-2 सोमवार को बैठ जाएगी:फिल्म मेकर कुणाल कोहली का दावा, कहा- इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया

बड़े डायरेक्टर्स को लगा था धुरंधर-2 सोमवार को बैठ जाएगी:फिल्म मेकर कुणाल कोहली का दावा, कहा- इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है। इसी बीच फिल्म मेकर कुणाल कोहली ने धुरंधर 2 पर एक बड़ा खुलासा किया है। कुणाल ने बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले इंडस्ट्री के कई बड़े निर्देशकों का मानना था कि यह फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। कुणाल कोहली ने स्क्रीन से बातचीत में कहा कि जब फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन्होंने कई बड़े निर्देशकों से बात की थी। कुणाल के मुताबिक, इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया था। मैंने जिन बड़े डायरेक्टर्स से बात की, उनका कहना था कि फिल्म सोमवार को बैठ जाएगी। लेकिन सोमवार को फिल्म बैठने के बजाय और ज्यादा चलने लगी। कुणाल ने आगे कहा कि किसी फिल्म की सफलता के लिए इंडस्ट्री का सपोर्ट होना जरूरी नहीं है, दर्शक खुद तय करते हैं कि फिल्म कैसी है। ‘फेक कलेक्शन’ पर कुणाल का तंज कुणाल ने फिल्म के ‘जेनुइन कलेक्शन’ की तारीफ करते हुए उन फिल्मों पर निशाना साधा जो आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करती हैं। उन्होंने कहा, कुछ फिल्में फेक कलेक्शन दिखाती हैं, फिर भी अपने पूरे लाइफटाइम में 100 करोड़ नहीं जुटा पातीं। वहीं, धुरंधर 2 ने बिना किसी दिखावे के एक दिन में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की है। उन्होंने आदित्य धर, रणवीर सिंह और जियो स्टूडियोज को भारतीय सिनेमा की असली क्षमता दिखाने के लिए बधाई दी। हीरो को ‘मर्द’ होना चाहिए कुणाल कोहली ने फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदी फिल्मों के हीरो को ‘मर्द’ दिखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें विदेशी विषयों से प्रभावित होने के बजाय देसी कहानियां बनानी चाहिए। हमारे हीरो को खोया हुआ या कंफ्यूज लड़का नहीं होना चाहिए। जैसा ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर’ में दिखाया गया, हीरो वैसा ही होना चाहिए। कुणाल ने ‘बॉर्डर 2’ का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह फिल्म 300 करोड़ पार कर गई थी, तब भी लोगों ने उसकी आलोचना की थी, जबकि वह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी।

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

पिछले माह होंडा के चीफ मिबे तोशिहिरो ने‎एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कंपनी 1957 ‎के बाद पहली बार घाटा उठाने की ओर बढ़ रही ‎‎है। उन्होंने नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए ‎अपनी और अपने डिप्टी की तनख्वाह में‎ 30% कटौती की जानकारी दी। हालांकि होंडा ‎‎गंभीर मुश्किलों का सामना कर रही अकेली ‎‎जापानी कार कंपनी नहीं है। पिछले सप्ताह मिबे‎ने आगाह किया कि जापान की ऑटोमोबाइल ‎‎इंडस्ट्री अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। ‎‎अमेरिका में आयातित कारों पर 25% टैरिफ‎ से इंडस्ट्री का मुनाफा घटा है। सबसे अधिक ‎‎असर चीनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने डाला है।‎ बिक्री के हिसाब से दुनिया की छठी बड़ी ‎‎कंपनी निसान में लगातार दूसरे साल कटौती‎ चल रही है। 2028 तक सात फैक्ट्रियां बंद ‎करने की योजना है। 2019 में दुनियाभर में‎ कारों की बिक्री में जापानी कार कंपनियों का ‎‎हिस्सा 31% था। यह पिछले साल गिरकर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎26% हो गया। वहीं दक्षिण पूर्व एशिया में‎ मार्केट शेयर 2023 के 68% से गिरकर‎ 2025 में 57% रह गया। पड़ोस में बढ़ रही ईवी‎ पिछले साल ग्लोबल कार मार्केट में हाईब्रिड‎ सहित 26% इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई‎ थी। यह 2019 से 3% अधिक है। जापान के पड़ोस में बिक्री अधिक है। पिछले साल ‎एशिया में बिकी एक तिहाई कारें इलेक्ट्रिक हैं।‎

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

पिछले माह होंडा के चीफ मिबे तोशिहिरो ने‎एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कंपनी 1957 ‎के बाद पहली बार घाटा उठाने की ओर बढ़ रही ‎‎है। उन्होंने नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए ‎अपनी और अपने डिप्टी की तनख्वाह में‎ 30% कटौती की जानकारी दी। हालांकि होंडा ‎‎गंभीर मुश्किलों का सामना कर रही अकेली ‎‎जापानी कार कंपनी नहीं है। पिछले सप्ताह मिबे‎ने आगाह किया कि जापान की ऑटोमोबाइल ‎‎इंडस्ट्री अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। ‎‎अमेरिका में आयातित कारों पर 25% टैरिफ‎ से इंडस्ट्री का मुनाफा घटा है। सबसे अधिक ‎‎असर चीनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने डाला है।‎ बिक्री के हिसाब से दुनिया की छठी बड़ी ‎‎कंपनी निसान में लगातार दूसरे साल कटौती‎ चल रही है। 2028 तक सात फैक्ट्रियां बंद ‎करने की योजना है। 2019 में दुनियाभर में‎ कारों की बिक्री में जापानी कार कंपनियों का ‎‎हिस्सा 31% था। यह पिछले साल गिरकर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎26% हो गया। वहीं दक्षिण पूर्व एशिया में‎ मार्केट शेयर 2023 के 68% से गिरकर‎ 2025 में 57% रह गया। पड़ोस में बढ़ रही ईवी‎ पिछले साल ग्लोबल कार मार्केट में हाईब्रिड‎ सहित 26% इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई‎ थी। यह 2019 से 3% अधिक है। जापान के पड़ोस में बिक्री अधिक है। पिछले साल ‎एशिया में बिकी एक तिहाई कारें इलेक्ट्रिक हैं।‎

जाकिर खान बोले- धुरंधर से इंडस्ट्री की जली:भड़कीं अमीषा पटेल बोलीं- नेगेटिविटी मत फैलाओ, शाहरुख-सलमान के पास ज्यादा सुपरहिट, डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी लगाई फटकार

जाकिर खान बोले- धुरंधर से इंडस्ट्री की जली:भड़कीं अमीषा पटेल बोलीं- नेगेटिविटी मत फैलाओ, शाहरुख-सलमान के पास ज्यादा सुपरहिट, डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी लगाई फटकार

स्टैंड-अप कॉमेडियन जाकिर खान के फिल्म इंडस्ट्री पर दिए गए एक बयान पर एक्ट्रेस अमीषा पटेल और जवान डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद भड़क गए हैं। दरअसल, हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड होस्ट करते हुए जाकिर खान ने कहा था कि धुरंधर 2 की फिल्म इंडस्ट्री के लोग कितनी भी तारीफ करें, लेकिन असल में उनकी फिल्म से जली है। अमीषा पटेल ने जाकिर खान के इस बयान पर जवाब देते हुए ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा है, ‘नेगेटिविटी फैलाना बंद करो। फिल्म इंडस्ट्री ने धुरंधर को हमेशा महत्व और सम्मान दिया है। शाहरुख खान, सलमान खान, सनी देओल, ऋतिक रोशन, अजय देवगन जैसे सुपरस्टार्स ने सिर्फ एक नहीं बल्कि 25 से ज्यादा मेगा हिट फिल्में दी हैं और आगे भी देते रहेंगे। चिल करो, गदर तो सबने कई सालों से पहले ही मचा रखी है और आगे भी मचाते रहेंगे।’ पठान और फाइटर जैसी फिल्में बना चुके डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी जाकिर खान के बयान की निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘जुहू-बांद्रा के लोगों ने पिछले 50 सालों में सभी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उनके कॉन्ट्रीब्यूशन को कम आंकने के लिए बहुत बड़ा बेवकूफ होना पड़ेगा।’ क्या था जाकिर खान का बयान स्क्रीन अवॉर्ड में जाकिर खान ने फिल्म इंडस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा था, लोग कितना भी धुरंधर 2 को बधाई देते हुए पोस्ट डाल दें, रील डाल दें या पब्लिक इंटरव्यू में ये कह दें कि ये उनकी पसंदीदा फिल्म है, लेकिन सच तो ये है दोस्तों कि धुरंधर से सबकी जली तो है। देखिए बम फिल्म में फूटे ल्यारी में, पर धुआं हुआ है जुहू से बांद्रा में। जुहू-बांद्रा से जाकिर का मतलब था, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग। जो ज्यादातर उसी जगह रहते हैं।

जाकिर खान बोले- धुरंधर से इंडस्ट्री की जली:भड़कीं अमीषा पटेल बोलीं- नेगेटिविटी मत फैलाओ, शाहरुख-सलमान के पास ज्यादा सुपरहिट, डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी लगाई फटकार

जाकिर खान बोले- धुरंधर से इंडस्ट्री की जली:भड़कीं अमीषा पटेल बोलीं- नेगेटिविटी मत फैलाओ, शाहरुख-सलमान के पास ज्यादा सुपरहिट, डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी लगाई फटकार

स्टैंड-अप कॉमेडियन जाकिर खान के फिल्म इंडस्ट्री पर दिए गए एक बयान पर एक्ट्रेस अमीषा पटेल और जवान डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद भड़क गए हैं। दरअसल, हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड होस्ट करते हुए जाकिर खान ने कहा था कि धुरंधर 2 की फिल्म इंडस्ट्री के लोग कितनी भी तारीफ करें, लेकिन असल में उनकी फिल्म से जली है। अमीषा पटेल ने जाकिर खान के इस बयान पर जवाब देते हुए ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा है, ‘नेगेटिविटी फैलाना बंद करो। फिल्म इंडस्ट्री ने धुरंधर को हमेशा महत्व और सम्मान दिया है। शाहरुख खान, सलमान खान, सनी देओल, ऋतिक रोशन, अजय देवगन जैसे सुपरस्टार्स ने सिर्फ एक नहीं बल्कि 25 से ज्यादा मेगा हिट फिल्में दी हैं और आगे भी देते रहेंगे। चिल करो, गदर तो सबने कई सालों से पहले ही मचा रखी है और आगे भी मचाते रहेंगे।’ पठान और फाइटर जैसी फिल्में बना चुके डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने भी जाकिर खान के बयान की निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘जुहू-बांद्रा के लोगों ने पिछले 50 सालों में सभी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उनके कॉन्ट्रीब्यूशन को कम आंकने के लिए बहुत बड़ा बेवकूफ होना पड़ेगा।’ क्या था जाकिर खान का बयान स्क्रीन अवॉर्ड में जाकिर खान ने फिल्म इंडस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा था, लोग कितना भी धुरंधर 2 को बधाई देते हुए पोस्ट डाल दें, रील डाल दें या पब्लिक इंटरव्यू में ये कह दें कि ये उनकी पसंदीदा फिल्म है, लेकिन सच तो ये है दोस्तों कि धुरंधर से सबकी जली तो है। देखिए बम फिल्म में फूटे ल्यारी में, पर धुआं हुआ है जुहू से बांद्रा में। जुहू-बांद्रा से जाकिर का मतलब था, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग। जो ज्यादातर उसी जगह रहते हैं।

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।

ईरान जंग में ट्रम्प अपने 5 मकसद से कितने दूर:पहले ही दिन खामेनेई की हत्या, मिसाइल इंडस्ट्री तबाह की, लेकिन परमाणु खतरा बरकरार

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अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया। इसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने 8 मिनट का वीडियो जारी करके जंग के टारगेट बताए। उन्होंने कहा कि उनका मकसद अमेरिकी लोगों की रक्षा करना और ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करना है। अब ट्रम्प के बताए टारगेट्स के मुताबिक समझते हैं कि अमेरिका को जंग में अब तक कितनी कामयाबी मिली है। उसे क्या हासिल हुआ है और क्या अब भी अधूरा है। 1. मिसाइल और हथियार इंडस्ट्री खत्म करना अमेरिका और इजराइल का अहम मकसद था कि ईरान की मिसाइल ताकत को कमजोर कर दिया जाए, ताकि वह दूर तक हमला न कर सके। इसके लिए दोनों देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकाने (लॉन्चर), मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों, मिसाइल स्टोर करने के गोदाम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमले किए। इन हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी नुकसान हुआ है। कई लॉन्चर और फैक्ट्रियां नष्ट हो चुकी हैं। इससे उसकी नई मिसाइल बनाने की रफ्तार धीमी पड़ी है। लेकिन अभी भी ईरान के पास काफी मिसाइलें बची हुई हैं और वह हमले कर रहा है। ईरान ने अपनी मिसाइलें अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखी हैं। कई ठिकाने जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) हैं, जिन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है। कुछ मोबाइल लॉन्चर होते हैं, जिन्हें जल्दी-जल्दी जगह बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान अब सिर्फ मिसाइलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में ड्रोन (मानवरहित विमान) का भी इस्तेमाल कर रहा है। 2. नौसेना को खत्म करना अमेरिका और इजराइल का टारगेट था कि ईरान की नौसेना को कमजोर या लगभग खत्म कर दिया जाए, ताकि वह समुद्र के रास्ते कोई बड़ा हमला या बाधा न डाल सके। इसके लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां, नौसैनिक ठिकाने और बंदरगाह और हथियार और मिसाइल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर श्रीलंका के पास मौजूद ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 80 लोगों की मौत हुई। यह हमला इसलिए अहम था क्योंकि यह जहाज लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम था और हाल ही में भारत के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में भी शामिल हुआ था। इन हमलों से ईरान के कई बड़े जहाज और संसाधन नष्ट हो गए। समुद्र में उसकी ताकत पहले से कमजोर हो गई। लंबी दूरी पर ऑपरेशन करने की क्षमता घट गई। हालांकि वह अब भी समुद्र में खतरा पैदा करने की क्षमता रखता है। ईरान के पास छोटी-छोटी तेज नावें (स्पीड बोट्स) हैं, जिनका इस्तेमाल वह अब भी कर सकता है। वह समुद्र में बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने जैसी रणनीति अपना सकता है जो होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में छोटी ताकत भी बड़ा असर डाल सकती है। 3. ईरान समर्थित मिलिशिया को कमजोर करना अमेरिका और इजराइल चाहते थे कि ईरान जिन हथियारबंद ग्रुप्स को समर्थन देता है, उन्हें कमजोर कर दिया जाए। ये ग्रुप्स अलग-अलग देशों में ईरान के लिए काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर हमले भी करते हैं। इसलिए इन्हें ‘प्रॉक्सी’ ताकत कहा जाता है। जंग के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया। इजराइल ने खास तौर पर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए। कई कमांडरों और लड़ाकों को मार गिराया। इससे इनकी ताकत कमजोर हुई, लेकिन उनका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका के लिए असल चुनौती यह है कि ये मिलिशिया किसी एक देश या एक जगह तक सीमित नहीं हैं। इराक, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों के अलग-अलग इलाकों में इनके नेटवर्क फैले हुए हैं। इनके पास स्थानीय सपोर्ट भी होता है और अपनी अलग व्यवस्था भी होती है। ऊपर से ईरान इनकी मदद करता रहता है, जिससे ये जल्दी संभल जाते हैं। इसी वजह से, हमलों के बावजूद ये पूरी तरह खत्म नहीं हुए। इराक में अब भी कुछ गुट अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमले कर रहे हैं। हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले हुए हैं, लेकिन वह अब भी एक मजबूत ताकत बना हुआ है और पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 4. ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा मकसद यह था कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार न बना सके। ट्रम्प बार-बार कह चुके हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु बम नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने पिछले साल ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। फिर भी अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुछ समृद्ध यूरेनियम अब भी मौजूद है। यह यूरेनियम जमीन के नीचे गहरी सुरंगों या बंकर जैसे ठिकानों में छिपा हो सकता है, जहां तक हवाई हमलों का असर पूरी तरह नहीं होता। अगर इन्हें पूरी तरह नष्ट करना हो, तो जमीन पर सेना भेजनी पड़ सकती है, जो बेहद जोखिम भरा कदम होगा और जंग को और बड़ा बना सकता है। 5. ईरान में सत्ता परिवर्तन ट्रम्प ने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उठने की अपील भी की थी। लेकिन अभी तक ऐसा कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं हुआ है। हालांकि ट्रम्प का दावा है कि उन्होंने रेजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन कर दिया है, क्योंकि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। लेकिन जमीन पर अलग स्थिति दिखाई देती है। अब नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई बने हैं, जो सख्त रुख वाले माने जाते हैं और सेना के ताकतवर हिस्से के करीब हैं। कुल मिलाकर, ईरान की सरकार अब भी पहले जैसी ही है। ईरान की सरकार अब भी धार्मिक और कड़े नियंत्रण वाली है। अमेरिका के खिलाफ उसका रुख भी पहले जैसा ही है। ——————————— ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान पर 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं: 2 साल में बनता है 34 करोड़ का यह हथियार, जंग खिंची तो स्टॉक खत्म होने की आशंका ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसे अमेरिकी हथियारों के जखीरे का अहम हथियार माना जाता है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। अनुमान है

अक्षय खन्ना का साउथ फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू:धुरंधर 2 के बाद 'महाकाली' फिल्म में दिखेंगे; शुक्राचार्य के रोल में फोटो वायरल

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अक्षय खन्ना का साउथ फिल्म इंडस्ट्री में डेब्यू:धुरंधर 2 के बाद 'महाकाली' फिल्म में दिखेंगे; शुक्राचार्य के रोल में फोटो वायरल

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