Monday, 21 Sep 2026 | 10:22 PM

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ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान में उड़ान भरते ही विमान का टायर फटा:बोइंग 737 के इंजन में भी खराबी आई; मशहद एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई

ईरान की सेपेहरान एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक टायर फट गया। इसके बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिग करानी पड़ी। RT के मुताबिक, विमान के इंजन में भी खराबी आ गई थी। इसके बाद पायलट ने विमान को वापस मशहद एयरपोर्ट लाने का फैसला किया। यह विमान मशहद से केरमानशाह जा रहा था। घटना के दौरान विमान के अंदर बैठे यात्री काफी घबरा गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया:मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी, लोगों से सुरक्षित जगह जाने को कहा

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म ने यह अलर्ट जारी किया था। इसमें खतरे की वजह नहीं बताई गई। लोगों से कहा गया कि वे भीड़ और खुले इलाकों में जाने से बचें और तुरंत किसी सुरक्षित जगह चले जाएं। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि खतरा टल गया है। हालांकि, लोगों से भीड़ से दूर रहने और किसी घटना की वीडियो या फोटो नहीं बनाने की अपील की गई। मंगलवार सुबह जेद्दा और ताइफ में भी ऐसे ही इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। इन्हें भी कुछ देर बाद हटा लिया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

मन्नत बेचने की बात पर शाहरुख बोले:नई गैलरी से अब और भी चमकूंगा, ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म

मन्नत बेचने की बात पर शाहरुख बोले:नई गैलरी से अब और भी चमकूंगा, ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म

शाहरुख खान ने मंगलवार को #AskSRK सेशन में फैंस के कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने 300 करोड़ रुपए की कीमत वाले अपने घर ‘मन्नत’ के रेनोवेशन और नई गैलरी को लेकर अपडेट दिया। एक फैन ने मजाक में मन्नत बेचने की बात कही तो शाहरुख ने कहा कि नई गैलरी बन रही है और अब वह वहीं से फैंस को नजर आएंगे। उन्होंने फिल्म ‘किंग’ की रिलीज डेट भी कन्फर्म की और बताया कि फिल्म 24 दिसंबर को ही सिनेमाघरों में आएगी। फैन ने कहा- मन्नत बेच दीजिए, शाहरुख ने दिया मजेदार जवाब शाहरुख खान सोशल मीडिया के जरिए फैंस से जुड़े रहते हैं। मंगलवार को उन्होंने एक्स पर #AskSRK सेशन किया। एक फैन ने उनकी चर्चित बालकनी को लेकर मजाकिया अंदाज में लिखा कि अगर वह वहां आकर फैंस का अभिवादन नहीं कर रहे हैं तो मन्नत बेच देनी चाहिए। शाहरुख के जन्मदिन और दूसरे खास मौकों पर फैंस उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में जुटते हैं। अभिनेता भी मन्नत की बालकनी से हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करते रहे हैं। बोले- नई गैलरी बना रहा हूं, अब और भी चमकूंगा फैन के कमेंट पर शाहरुख ने अपने अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह मन्नत में नई गैलरी बनवा रहे हैं और अब उसी गैलरी से फैंस को नजर आएंगे। शाहरुख ने लिखा, ‘अब नई गैलरी बना रहा हूं ना तो और भी चमकूंगा नई गैलरी पर। साथ ही, उम्मीद है कि मेरे पास पकड़ने के लिए कुछ सहारा भी होगा।’ रेनोवेशन के चलते 60वें जन्मदिन पर बालकनी में नहीं आए थे मन्नत में लंबे समय से रेनोवेशन का काम चल रहा है। इसी वजह से शाहरुख अपने 60वें जन्मदिन पर घर की बालकनी में आकर फैंस का अभिवादन नहीं कर पाए थे। उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फैंस से माफी भी मांगी थी। अभिनेता के मुताबिक, रेनोवेशन के दौरान उनके लिए नई गैलरी तैयार की जा रही है। ‘किंग’ की रिलीज डेट नहीं बदली, 24 दिसंबर को आएगी फिल्म #AskSRK सेशन में शाहरुख ने अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ को लेकर फैंस को अपडेट दिया। उन्होंने साफ किया कि फिल्म 24 दिसंबर 2026 को ही रिलीज होगी। इसकी रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक फैन ने फिल्म के ट्रेलर और दूसरे अपडेट्स को लेकर सवाल किया तो शाहरुख ने कहा कि फिल्म की रिलीज में करीब 100 दिन बाकी हैं। उन्होंने बताया कि फिल्म से जुड़े सभी जरूरी अपडेट 24 दिसंबर से पहले सामने आएंगे। बोले- सिद्धार्थ आनंद फिल्म को बेहतरीन बनाने में लगे हैं शाहरुख ने फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की तारीफ करते हुए कहा कि टीम फिल्म को बेहतर बनाने के लिए समय ले रही है। उनका कहना था कि वे ऐसा काम करना चाहते हैं जिसे देखकर दर्शकों को खुशी हो और उन्हें ‘किंग’ पर गर्व महसूस हो। उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ बातचीत होगी, ट्रेलर बाद में आएगा। यानी फैंस को फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। ‘किंग’ में नजर आएंगे ये कलाकार सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही ‘किंग’ में शाहरुख खान लीड रोल में हैं। फिल्म में सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, जयदीप अहलावत, अभय वर्मा, राघव जुयाल और अरशद वारसी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और मार्फ्लिक्स पिक्चर्स कर रहे हैं। ‘किंग’ 24 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

रिपोर्ट-हूती हमले के बाद सऊदी ने इजराइल से मदद मांगी:अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत; दोस्त पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया

रिपोर्ट-हूती हमले के बाद सऊदी ने इजराइल से मदद मांगी:अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत; दोस्त पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया

यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बड़े इलाके पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद सऊदी अरब बड़े संकट में है।यरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हूती सैन्य कार्रवाई से निपटने के लिए इजराइल से खुफिया मदद मांगी है। यह बातचीत अमेरिका की मध्यस्थता में हुई। खास बात यह है कि सऊदी अरब इजराइल को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता। उसके इजराइल के साथ राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। इसके बावजूद रियाद ने इजराइल से मदद मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के मक्का रक्षा गठबंधन के साथी पाकिस्तान ने यमन में लड़ने के लिए अपनी सेना या सैन्य संसाधन भेजने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी। अमेरिका और ब्रिटेन ने भी नहीं की सऊदी की मदद यमन में हूती विद्रोहियों के हमले और तेजी से बढ़ते कब्जे ने सऊदी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब मदद के लिए अपने सहयोगी देशों से संपर्क कर रहा है। पाकिस्तान के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन ने भी यमन में हूती संगठन के खिलाफ सीधे हमले करने से इनकार कर दिया है। अमेरिका ने खुफिया मदद देने की पेशकश की है, जबकि ब्रिटेन सैन्य सलाहकार देने की बात कह रहा है। ऐसे में सऊदी अरब ने अब इजराइल से भी मदद मांगी है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

सूरज पंचोली बोले- कभी दिशा सालियान से नहीं मिला:उनकी मौत में मेरा नाम घसीटना गलत; एक्टर सुशांत की मैनेजर थीं दिशा

Sooraj Pancholi Statement | Disha Salian Death Controversy Mumbai

एक्टर सूरज पंचोली ने एक्टर सुशांत सिंह की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में खुद का नाम जोड़े जाने पर सफाई दी है। इंस्टाग्राम पर एक लंबा बयान जारी कर सूरज ने कहा कि वे जीवन में कभी भी दिशा सालियान या शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे से न तो सीधे मिले हैं और न ही अप्रत्यक्ष रूप से। सूरज ने अपना नाम इस केस में घसीटे जाने को गलत बताते हुए कहा कि 4-5 साल पहले सीबीआई और पुलिस उनका बयान दर्ज कर चुकी है। फिर भी अगर जांच एजेंसियां पूछताछ करना चाहें तो वे पूरे सहयोग के लिए तैयार हैं। इन्स्टाग्राम पोस्ट में सूरज ने जताई नाराजगी सूरज पंचोली ने अपनी इन्स्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि बीते कुछ सालों से कई मीडिया रिपोर्ट्स और बयानों में लगातार उनका नाम दिशा सालियान की मौत से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि वे हर रिपोर्ट का जवाब नहीं देना चाहते थे, लेकिन बार-बार एक ही बात होने पर बोलना जरूरी हो गया था। सूरज ने कहा कि बिना किसी सबूत या तथ्यों के उनका नाम इस मामले में घसीटना बहुत परेशान करने वाला और गलत है। उन्होंने अपील की कि बिना पुख्ता सबूतों के किसी की मौत को जरिया बनाकर दूसरे इंसान की छवि खराब नहीं की जानी चाहिए। ‘हेडलाइन और टीवी डिबेट सबूत नहीं’ सूरज पंचोली ने लोगों और मीडिया से अपील की कि वे अफवाहों के आधार पर राय न बनाएं। उन्होंने लिखा, “न्यूज या सोशल मीडिया पर जो कुछ भी दिख रहा है, उस पर तुरंत भरोसा मत करिए। टीवी पर हेडलाइन, डिबेट या किसी का बयान सबूत नहीं होता।” सूरज ने कहा कि टीवी पर चर्चा में आने वाले हर नाम के पीछे एक असली इंसान और उसका परिवार होता है। वे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच का समर्थन करते हैं और उन्हें देश के कानून और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है। 2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत दिशा की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने से हुई थी। घटना के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने अपार्टमेंट में मृत मिले थे। दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने मौत को सुसाइड बताया था। वहीं दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। इसमें भी आत्महत्या की बात कही गई थी। पिता की शिकायत पर CBI ने दर्ज की FIR इस मामले में हाल ही में तब नया मोड़ आया जब सीबीआई ने दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत और उनके दर्ज कराए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की। सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा के मुताबिक, एफआईआर और शिकायत में आदित्य ठाकरे, रोहन राय, रिया चक्रवर्ती और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का नाम शामिल है। इसी नए घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सूरज पंचोली का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया था। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… आदित्य ठाकरे बोले-दिशा सालियान मौत से मेरा कोई लेना-देना नहीं:मैं आरोपों का जवाब क्यों दूं शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने नई दिल्ली में गुरुवार को एक्टर सुशांत सिंह की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़े आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, तो मैं इन आरोपों पर जवाब क्यों दूं।” पूरी खबर पढ़ें… ‘मुझे नहीं लगता कि वो सुसाइड था’, एक्टर शिशिर शर्मा बोले- सुशांत सिंह राजपूत ऐसे इंसान नहीं थे जो आत्महत्या जैसा कदम उठाएं फिल्म ‘छिछोरे’ में सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम कर चुके एक्टर शिशिर शर्मा ने उनकी मौत को लेकर कहा कि उन्हें लगता है कि सुशांत ने सुसाइड किया है। शिशिर शर्मा ने बताया कि उनकी और सुशांत की पहचान टीवी के दिनों से थी। जब वह ‘यहां मैं घर घर खेली’ में काम कर रहे थे और सुशांत ‘पवित्र रिश्ता’ में थे, तब दोनों पास में शूटिंग करते थे और लंच ब्रेक में साथ खाना खाते थे। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। दोनों दोस्त एक ही यूनिवर्सिटी से थे मलाइका चित्रे एक फार्मास्यूटिकल्स कंपनी में ऑपरेशंस स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करती थीं। वहीं नवम कौल सॉफ्टवेयर कंपनी ब्लूमबर्ग में फाइनेंशियल डेटा एनालिस्ट थे। दोनों ने न्यू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और लगभग एक ही समय में ग्रेजुएशन किया था। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

न्यूयॉर्क में भारतीय मूल की महिला को ट्रेन ने कुचला:दोस्त के साथ ट्रेक पर बैठी थी; ट्रेन ऑपरेटर बोला- महिला हंस रही थी

अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक हादसे में भारतीय मूल की महिला और उसके नेपाली-अमेरिकी दोस्त की मौत हो गई। दोनों की उम्र 24 साल थी। वे लोअर मैनहट्टन के एक सबवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर बैठे थे। इसी दौरान वहां से गुजर रही ट्रेन ने दोनों को कुचल दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दोनों ट्रेन आने से कुछ सेकंड पहले ट्रैक पर शांति से बैठे दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने महिला को हंसते हुए देखा था। वह दोस्त को अपनी तरफ खींच रही थी। ट्रेन ऑपरेटर बोला- इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की थी यह घटना स्प्रिंग स्ट्रीट सबवे स्टेशन की है। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (NYPD) के मुताबिक, न्यू जर्सी के डेटन की रहने वाली मलाइका चित्रे और सेरेविल के रहने वाले नवम कौल रात करीब 3:15 बजे ट्रैक पर थे। इसी दौरान ट्रेन ने दोनों को टक्कर मार दी। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना का वीडियो बना ली। ट्रेन ऑपरेटर ने बताया कि उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ट्रेन को समय रहते रोका नहीं जा सका। पुलिस के मुताबिक, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुताबिक, हादसे के बाद ट्रेन में मौजूद करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ट्रैक पर क्यों बैठे, इसकी जांच जारी अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मलाइका और नवम आधी रात को रेलवे ट्रैक पर क्यों बैठे थे। इस मामले की जांच जारी है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि कहीं दोनों ने शराब या कोई दूसरी नशे की चीज तो नहीं ली थी। इससे संभव है कि उन्हें खतरे का अंदाजा समय रहते नहीं हुआ हो। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि, जांचकर्ताओं ने आत्महत्या की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। नवम के दोस्त बोले- गलत कदम की कोई वजह नहीं थी नवम कौल के दोस्तों और जानने वालों ने उन्हें मिलनसार और खुशमिजाज इंसान बताया। लोगों के मुताबिक, वह अपने समुदाय में काफी पसंद किए जाते थे। नवम के एक दोस्त की मां ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि दोनों एक ही माहौल में बड़े हुए थे। वे एक ही दोस्तों के ग्रुप और साउथ एशियन कम्युनिटी का हिस्सा थे। सभी साथ में घूमते और त्योहार मनाते थे। उनके मुताबिक, नवम की जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जिससे लगे कि वह कोई गलत या बेवकूफी भरा कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवम नेपाली मूल के थे। उनके माता-पिता करीब 30 साल पहले नेपाल से अमेरिका आकर बस गए थे। मलाइका की पड़ोसी बोले- वह बहुत होशियार और समझदार थीं मलाइका के परिवार के घर के पास रहने वाले एक पड़ोसी ने बताया कि वह बहुत होशियार और समझदार छात्रा थीं। पड़ोसी ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि मलाइका की मौत की खबर सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि आखिर दोनों रेलवे ट्रैक पर क्यों थे। NYPD के मुताबिक, दोनों की मौत के मामले में जांच अभी जारी है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर पढ़ें…

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बना

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बना

यमन के लाल सागर तट पर पिछले हफ्ते हूती लड़ाकों के काफिले में टोयोटा हिलक्स पिकअप बड़ी संख्या में नजर आईं। इन पर मशीनगन और रॉकेट लगे थे। टोयोटा हिलक्स पिछले करीब 45 साल से दुनिया के अलग-अलग संघर्षों में विद्रोहियों और आतंकी संगठनों के बीच इस्तेमाल होती रही है। इसकी कम कीमत, मजबूत बनावट और आसानी से हथियार लगाने की वजह से यह आम गाड़ी युद्ध के मैदान में बेहद काम की साबित हुई है। हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर नियंत्रण हासिल किया। टोयोटा हिलक्स आम नागरिकों की पिकअप से बदलकर विद्रोही युद्ध का प्रतीक बन चुकी है। IS से लेकर हूती लड़ाकों तक, कई सशस्त्र गुट इन्हें मोबाइल हथियार मंच की तरह इस्तेमाल करते हैं। अगर दुनिया भर के विद्रोहियों और गुरिल्लाओं की आम राइफल कलाश्निकोव पैटर्न की असॉल्ट राइफल है, तो उनकी पसंदीदा गाड़ी टोयोटा हिलक्स हो सकती है। यमन के हूती लड़ाकों से लेकर इराक में IS और अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज तक, हिलक्स संघर्ष वाले इलाकों में आम नजर आती है। फोर्ड, शेवरले और निसान जैसी कंपनियों की पिकअप भी इसी तरह इस्तेमाल होती हैं। इन पिकअप पर मशीनगन, ऑटोकैनन, एंटी-टैंक मिसाइल और दूसरे घातक हथियार लगाए जाते हैं। इस वजह से ये गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों की पसंद बन गई हैं। आधुनिक देशों की सेनाएं अपने सैनिकों को बचाने वाले अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहन बनाने पर लाखों खर्च करती हैं। इसके उलट विद्रोही, आतंकी, गुरिल्ला या लड़ाके साधारण टोयोटा से जंग में पहुंच जाते हैं। इन गाड़ियों पर मशीनगन या रॉकेट लॉन्चर लगाया जाता है। ये वाहन शहरों में चलने वाली आम गाड़ियों जैसे दिखते हैं। हिलक्स की लोकप्रियता की वजह हिलक्स जैसी गाड़ियों का युद्ध में इस्तेमाल नया नहीं है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज ने उत्तरी अफ्रीका में धुरी राष्ट्रों की पंक्तियों के पीछे हमलों के लिए जीप और हल्के ट्रकों का इस्तेमाल किया था। गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों में हिलक्स की लोकप्रियता की जड़ें 1980 के दशक के आखिर तक जाती हैं। उस समय लीबिया-चाड युद्ध अपने अंतिम चरण में था। सहारा के दक्षिण में स्थित देश चाड, मुअम्मर गद्दाफी के लीबिया से एक दशक से युद्ध लड़ रहा था। उसके पूर्व उपनिवेशवादी देश फ्रांस ने चाड को 400 हिलक्स और लैंड क्रूजर पिकअप दीं। इन वाहनों के साथ एंटी-टैंक और एंटी-एयर मिसाइलें भी दी गई थीं। फ्रांसीसी हवाई मदद के साथ इन टोयोटा वाहनों ने चाड को लीबिया के खिलाफ कई बड़ी सैन्य जीत दिलाईं। बाद में इस युद्ध को ‘टोयोटा वॉर’ नाम दिया गया। इस युद्ध ने दिखाया कि सही इस्तेमाल होने पर टोयोटा एक प्रभावी हथियार बन सकती है। इन वाहनों की रफ्तार और तेजी से दिशा बदलने की क्षमता ने उन्हें दुश्मन की गोलीबारी से बचने में मदद की। वे धीमे लीबियाई टैंकों के चारों ओर तेजी से घूमकर अचानक हमला कर सकती थीं। टोयोटा पिकअप सस्ती और टिकाऊ थीं। बुनियादी औजारों वाले लगभग किसी भी मैकेनिक से इनकी मरम्मत कराई जा सकती थी। दुनिया भर में आम नागरिकों के बीच लोकप्रिय होने के कारण इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते थे। हथियारों के विपरीत, टोयोटा हिलक्स या फोर्ड F-150 को विद्रोही गुटों तक पहुंचाने के लिए निर्यात पाबंदियों से नहीं गुजरना पड़ता। 1987 का युद्ध टोयोटा और विद्रोही गुटों की कहानी की शुरुआत भर था। समय के साथ अफगानिस्तान के पहाड़ों, इराक के रेगिस्तान और सोमालिया की सड़कों पर हिलक्स और दूसरी पिकअप आम दिखने लगीं। इन गाड़ियों को एक खास नाम भी मिला—‘टेक्निकल्स’। यह शब्द 1990 के दशक की शुरुआत में सोमालिया में सामने आया। उस समय सहायता एजेंसियां अपने कर्मचारियों और सामान की सुरक्षा के लिए स्थानीय सशस्त्र गुटों को पैसे देती थीं। इसे ‘टेक्निकल असिस्टेंस’ यानी तकनीकी सहायता कहा जाता था। बाद में हथियारों से लैस इन पिकअप के लिए ‘टेक्निकल्स’ नाम चलन में आ गया। विद्रोही गुटों को इतनी टोयोटा कैसे मिलती हैं इराक के कब्जे वाले शहरों में काली हिलक्स के साथ IS लड़ाके नजर आए। हूती लड़ाके भी यमन के लाल सागर तट पर ऐसी पिकअप तेजी से चलाते दिखे। सवाल यह है कि गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों को इतनी बड़ी संख्या में ये वाहन मिलते कैसे हैं। 2015 में IS के चरम पर पहुंचने के दौरान अमेरिकी आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने टोयोटा से इस बारे में जवाब मांगा था। वे जानना चाहते थे कि आतंकी संगठन इतनी हिलक्स और लैंड क्रूजर कैसे हासिल कर रहा है। टोयोटा ने विद्रोहियों को वाहन बेचने से इनकार किया था। कंपनी ने 2015 में कहा था, “हमारी सख्त नीति है कि हम ऐसे संभावित खरीदारों को वाहन नहीं बेचते, जो उनका इस्तेमाल या उनमें बदलाव अर्धसैनिक या आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।” टोयोटा के आंकड़ों के मुताबिक, इराक में हिलक्स और लैंड क्रूजर की बिक्री 2011 में 6,000 से बढ़कर 2013 में 18,000 हो गई थी। 2014 में यह बिक्री घटकर 13,000 रह गई। ABC न्यूज ने इन आंकड़ों की रिपोर्ट की थी। यह आंकड़े उस समय के हैं, जब IS ने सीरिया से इराक में बड़ा हमला शुरू किया था। यह हमला राजधानी बगदाद के बाहरी इलाकों तक पहुंच गया था। टोयोटा सीधे आतंकियों को वाहन न भी बेचती हो, फिर भी गैर-सरकारी गुटों के पास इन्हें हासिल करने के अपने तरीके हैं। दुनिया भर में हिलक्स की लोकप्रियता के कारण पुरानी गाड़ियां खुले बाजार में हमेशा उपलब्ध रहती हैं। कंपनी ने 2014 में कहा था, “हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि ये वाहन गुप्त रास्तों से आते हैं और लोगों के बीच खरीदे-बेचे जाते हैं। खासकर पुराने वाहनों का ऐसा अनौपचारिक कारोबार किसी वाहन निर्माता के लिए ट्रैक करना बहुत मुश्किल है।” एक मामले में अमेरिका के एक प्लंबर की फोर्ड पिकअप IS लड़ाकों को बेच दी गई थी। उसके दरवाजे पर प्लंबर का नाम और फोन नंबर लिखा हुआ था। वह फोर्ड सीरिया में IS के लिए इस्तेमाल होती रही। गाड़ी पर वही पहचान संबंधी जानकारी लगी थी। बाद में अमेरिकी न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया। गैर-सरकारी सशस्त्र गुट बिचौलियों की मदद भी ले सकते हैं। ये बिचौलिए स्थानीय और विदेशी बाजारों से वाहन खरीदते हैं। इसके बाद कंपनी की नीतियों से

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बनी

टोयोटा हिलक्स हूती विद्रोहियों की पसंदीदा गाड़ी बनी:इस पर मशीनगन-रॉकेट लगाना आसान, 45 साल से दुनिया भर के आतंकियों की पहचान बनी

यमन में हूती विद्रोहियों के काफिले में एक खास तरह की पिकअप गाड़ियां लगातार चर्चा में हैं। हूती लड़ाके मशीनगन और रॉकेट से लेस टोयोटा हिलक्स समेत कई पिकअप गाड़ियों में नजर आए हैं। आम दिखने वाली ये गाड़ियां करीब 45 साल से दुनिया के अलग-अलग संघर्षों में विद्रोहियों और आतंकियों की पसंद बनी हुई हैं। इसकी कम कीमत, मजबूत बनावट और आसानी से हथियार लगाने की वजह से यह आम गाड़ी युद्ध के मैदान में बेहद काम की साबित हुई है। इन पिकअप पर मशीनगन, ऑटोकैनन, एंटी-टैंक मिसाइल और दूसरे घातक हथियार लगाए जाते हैं। ये वाहन शहरों में चलने वाली आम गाड़ियों जैसे दिखते हैं। हिलक्स की लोकप्रियता की वजह हिलक्स जैसी गाड़ियों का युद्ध में इस्तेमाल नया नहीं है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज ने उत्तरी अफ्रीका में धुरी राष्ट्रों की पंक्तियों के पीछे हमलों के लिए जीप और हल्के ट्रकों का इस्तेमाल किया था। गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों में हिलक्स की लोकप्रियता की जड़ें 1980 के दशक के आखिर तक जाती हैं। उस समय लीबिया-चाड युद्ध अपने अंतिम चरण में था। सहारा के दक्षिण में स्थित देश चाड, मुअम्मर गद्दाफी के लीबिया से एक दशक से युद्ध लड़ रहा था। उसके पूर्व उपनिवेशवादी देश फ्रांस ने चाड को 400 हिलक्स और लैंड क्रूजर पिकअप दीं। इन वाहनों के साथ एंटी-टैंक और एंटी-एयर मिसाइलें भी दी गई थीं। फ्रांसीसी हवाई मदद के साथ इन टोयोटा वाहनों ने चाड को लीबिया के खिलाफ कई बड़ी सैन्य जीत दिलाईं। बाद में इस युद्ध को ‘टोयोटा वॉर’ नाम दिया गया। इस युद्ध ने दिखाया कि सही इस्तेमाल होने पर टोयोटा एक प्रभावी हथियार बन सकती है। इन वाहनों की रफ्तार और तेजी से दिशा बदलने की क्षमता ने उन्हें दुश्मन की गोलीबारी से बचने में मदद की। वे धीमे लीबियाई टैंकों के चारों ओर तेजी से घूमकर अचानक हमला कर सकती थीं। टोयोटा पिकअप सस्ती और टिकाऊ थीं। बुनियादी औजारों वाले लगभग किसी भी मैकेनिक से इनकी मरम्मत कराई जा सकती थी। दुनिया भर में आम नागरिकों के बीच लोकप्रिय होने के कारण इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से मिल जाते थे। हथियारों के विपरीत, टोयोटा हिलक्स या फोर्ड F-150 को विद्रोही गुटों तक पहुंचाने के लिए निर्यात पाबंदियों से नहीं गुजरना पड़ता। 1987 का युद्ध टोयोटा और विद्रोही गुटों की कहानी की शुरुआत भर था। समय के साथ अफगानिस्तान के पहाड़ों, इराक के रेगिस्तान और सोमालिया की सड़कों पर हिलक्स और दूसरी पिकअप आम दिखने लगीं। इन गाड़ियों को एक खास नाम भी मिला—‘टेक्निकल्स’। यह शब्द 1990 के दशक की शुरुआत में सोमालिया में सामने आया। उस समय सहायता एजेंसियां अपने कर्मचारियों और सामान की सुरक्षा के लिए स्थानीय सशस्त्र गुटों को पैसे देती थीं। इसे ‘टेक्निकल असिस्टेंस’ यानी तकनीकी सहायता कहा जाता था। बाद में हथियारों से लैस इन पिकअप के लिए ‘टेक्निकल्स’ नाम चलन में आ गया। विद्रोही गुटों को इतनी टोयोटा कैसे मिलती हैं इराक के कब्जे वाले शहरों में काली हिलक्स के साथ IS लड़ाके नजर आए। हूती लड़ाके भी यमन के लाल सागर तट पर ऐसी पिकअप तेजी से चलाते दिखे। सवाल यह है कि गैर-सरकारी सशस्त्र गुटों को इतनी बड़ी संख्या में ये वाहन मिलते कैसे हैं। 2015 में IS के चरम पर पहुंचने के दौरान अमेरिकी आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने टोयोटा से इस बारे में जवाब मांगा था। वे जानना चाहते थे कि आतंकी संगठन इतनी हिलक्स और लैंड क्रूजर कैसे हासिल कर रहा है। टोयोटा ने विद्रोहियों को वाहन बेचने से इनकार किया था। कंपनी ने 2015 में कहा था, “हमारी सख्त नीति है कि हम ऐसे संभावित खरीदारों को वाहन नहीं बेचते, जो उनका इस्तेमाल या उनमें बदलाव अर्धसैनिक या आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।” टोयोटा के आंकड़ों के मुताबिक, इराक में हिलक्स और लैंड क्रूजर की बिक्री 2011 में 6,000 से बढ़कर 2013 में 18,000 हो गई थी। 2014 में यह बिक्री घटकर 13,000 रह गई। ABC न्यूज ने इन आंकड़ों की रिपोर्ट की थी। यह आंकड़े उस समय के हैं, जब IS ने सीरिया से इराक में बड़ा हमला शुरू किया था। यह हमला राजधानी बगदाद के बाहरी इलाकों तक पहुंच गया था। टोयोटा सीधे आतंकियों को वाहन न भी बेचती हो, फिर भी गैर-सरकारी गुटों के पास इन्हें हासिल करने के अपने तरीके हैं। दुनिया भर में हिलक्स की लोकप्रियता के कारण पुरानी गाड़ियां खुले बाजार में हमेशा उपलब्ध रहती हैं। कंपनी ने 2014 में कहा था, “हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि ये वाहन गुप्त रास्तों से आते हैं और लोगों के बीच खरीदे-बेचे जाते हैं। खासकर पुराने वाहनों का ऐसा अनौपचारिक कारोबार किसी वाहन निर्माता के लिए ट्रैक करना बहुत मुश्किल है।” एक मामले में अमेरिका के एक प्लंबर की फोर्ड पिकअप IS लड़ाकों को बेच दी गई थी। उसके दरवाजे पर प्लंबर का नाम और फोन नंबर लिखा हुआ था। वह फोर्ड सीरिया में IS के लिए इस्तेमाल होती रही। गाड़ी पर वही पहचान संबंधी जानकारी लगी थी। बाद में अमेरिकी न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया। गैर-सरकारी सशस्त्र गुट बिचौलियों की मदद भी ले सकते हैं। ये बिचौलिए स्थानीय और विदेशी बाजारों से वाहन खरीदते हैं। इसके बाद कंपनी की नीतियों से बचने के लिए गाड़ियां अंतिम इस्तेमाल करने वालों तक पहुंचाई जाती हैं। बड़े संघर्ष शुरू होने से पहले वाहनों की बिक्री में अचानक बढ़ोतरी इसी प्रक्रिया का संकेत हो सकती है। टोयोटा के आंकड़ों में 2013 में इराक में IS के बड़े हमले से पहले बिक्री में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। यमन के लाल सागर तट पर हिलक्स के बड़े बेड़े के साथ आगे बढ़ रहे हूती लड़ाकों को ये वाहन कैसे मिले, यह सवाल अब भी बना हुआ है। उन्होंने ये गाड़ियां पुरानी खरीदीं, बिचौलियों के जरिए शोरूम से लीं, विदेश से तस्करी कराईं या चुराईं—यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन जिस भी तरीके से ये हासिल की गई हों, साधारण और कम साजोसामान वाली हिलक्स विद्रोही गुटों के बीच अब भी बेहद पसंदीदा वाहन बनी हुई है।

स्वीपर की नौकरी तक नहीं मिलेगी:राखी सावंत पर भड़कीं कंगना रनोट, नरेंद्र मोदी पर दिए विवादित बयान पर जमकर लगाई फटकार

स्वीपर की नौकरी तक नहीं मिलेगी:राखी सावंत पर भड़कीं कंगना रनोट, नरेंद्र मोदी पर दिए विवादित बयान पर जमकर लगाई फटकार

एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट, राखी सावंत के बयान पर भड़क गई हैं। राखी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक आपत्तिजनक कमेंट किया, जिस पर कंगना ने उन्हें फटकारते हुए कहा है कि ऐसे बयान देने वालों को कोई स्वीपर की नौकरी तक नहीं देगा। कंगना रनोट ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, “सिर्फ यही (राखी) नहीं, बल्कि ज्यादातर नाकाम और जलने वाले लोग किसी कामयाब महिला के कैरेक्टर पर कीचड़ उछालकर अपनी जलन, ईर्ष्या, नाकामी और घटिया सोच को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। लेकिन अब बहुत हो गया। ऐसी बार-बार और जानबूझकर की जाने वाली चरित्र हत्या और पब्लिक में बदनाम करने की कोशिशों को सहना बंद करना होगा। खुद को बेवजह अपमानित और आहत महसूस करना बंद करो और हर बात पर सफाई देना भी बंद करो।” आगे कंगना ने लिखा, “सफलता के लिए तुम भले ही अपना सबकुछ दांव पर लगा दो, लेकिन असली मजेदार बात तो ये है कि किसी को तुमसे कुछ चाहिए ही नहीं। तुम्हारे किए हुए सारे एहसान और सिफारिशें जोड़ लो, फिर भी तुम्हें स्वीपर की नौकरी तक नहीं मिलेगी क्योंकि उस नौकरी में भी थोड़ी काबिलियत और टैलेंट की जरूरत होती है। इसलिए ज्यादा खुशफहमी में मत रहो। एहसान करो या एहसान मत करो, तुम कहीं नहीं पहुंचने वालीं। अब चुपचाप बैठो, मेरी रील्स देखो और रोते रहो।” क्या था नरेंद्र मोदी पर राखी का बयान राखी सावंत ने हाल ही में कहा था कि वो प्रधानमंत्री के लिए वो कर सकती हैं, जो राखी सावंत और स्मृति ईरानी करती हैं। राखी सावंत ने हाल ही में मोहसिन खान के पॉडकास्ट एम.के.टॉक्स में कहा, “मोदी जी इधर-उधर क्यों देख रहे हैं? कंगना से उन्हें हड्डियों के अलावा और क्या मिलेगा? मोदी जी, स्मृति, कंगना और इन सभी महिलाओं ने आपको ऐसा क्या दिया कि आपने उन्हें मंत्री बना दिया? तो जो भी उन्होंने आपको दिया है, मैं भी आपको दे सकती हूं।” कंगना-राखी का पहले भी हुआ विवाद राखी सावंत और कंगना रनौत के बीच विवाद काफी पुराना है। दोनों के बीच पहली बार तब तकरार देखने को मिली थी, जब कंगना ने एक पुराने बयान में खुद की तुलना राखी सावंत से करने से इनकार किया था। दरअसल, उस समय कंगना से मीका सिंह के साथ किसिंग सीन को लेकर सवाल किया गया था। कंगना ने कथित तौर पर कहा था कि वह राखी सावंत नहीं हैं, जो इस तरह का सीन करेंगी। कंगना का यह बयान राखी को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसके बाद राखी ने कंगना को जवाब देते हुए कहा था कि अगर कंगना को इतनी ही पब्लिसिटी चाहिए थी, तो वह मीका को किस कर लेतीं, लेकिन उनका नाम लेकर पब्लिसिटी लेने की जरूरत नहीं थी। साल 2020 में कंगना और महाराष्ट्र सरकार के बीच विवाद के दौरान भी राखी सावंत ने कंगना पर निशाना साधा था। इसके बाद भी दोनों के बीच समय-समय पर बयानबाजी होती रही। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट के समय भी राखी ने कंगना के बयानों की आलोचना की थी।