हवा में प्लेन की खिड़की टूटी,पैसेंजर का सिर-कंधे बाहर निकले:आसपास बैठे पैसेंजर्स ने अंदर खींचा, मैसिडोनिया के आकाश में हादसा

ग्रीस के थेसालोनिकी से जर्मनी के मेमिंगेन जा रहे प्लेन की उड़ान के दौरान खिड़की अलग हो गई। इसके बाद कैबिन में अचानक दबाव कम हो गया और 61 साल के पैसेंजर का सिर और कंधे खिड़की से बाहर निकल गए। पैसेंजर ने सीट बेल्ट नहीं खोली थी, इसलिए वह पूरी तरह बाहर नहीं फिंका। पास बैठे दूसरे पैसेंजर्स ने तुरंत उसे पकड़कर वापस प्लेन के अंदर खींच लिया। घटना के समय प्लेन 30 हजार फीट की उंचाई पर उड़ रहा था। विमान कंपनी रायनएयर ने बताया कि पैसेंजर को कुछ चोटें आई है। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसकी हालत ठीक है। यह घटना मैसिडोनिया के ऊपर हुई। घायल यात्री सर्बिया का यूरिस्ट है। उसे जलने जैसी चोटें आई हैं। प्लेन ने सुबह 5.55 मिनट पर (ग्रीस के समय के अनुसार) ग्रीस से उड़ान भरी थी। घटना के 2 फोटो: टायर फटने जैसी आवाज आई घटना के समय प्लेन में मौजूद रही महिला ने रेडियो थेसालोनिकी को बताया कि घटना के समय ज्यादातर पैसेंजर सो रहे थे। तभी टायर फटने जैसी तेज आवाज आई। इसके तुरंत बाद लोगों की चीखें सुनाई दीं। उन्होंने कहा, हमें तुरंत समझ आ गया कि विमान के अंदर दबाव कम हो गया है। कुछ पल के लिए मुझे लगा कि किसी ने गलती से इमरजेंसी दरवाजा खोल दिया है।” महिला के मुताबिक, इसके बाद ऑक्सीजन मास्क नीचे आ गए और केबिन में तेज गंध फैल गई। उन्होंने देखा कि एक यात्री का सिर और कंधे खिड़की से बाहर थे। उसने सीट बेल्ट नहीं खोला था। इसके बाद आसपास बैठे लोगों ने उसे पकड़कर वापस अंदर खींच लिया। इंजन के टुकड़े से खिड़की टूटने का अंदेशा ग्रीक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विमान के इंजन से अलग हुए किसी मलबे के टुकड़े की वजह से खिड़की टूट गई। हालांकि, इस कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रायनएयर ने बयान जारी कर कहा कि उड़ान भरने के कुछ देर बाद यात्री वाली खिड़की अलग होने के कारण विमान को वापस थेसालोनिकी लौटना पड़ा। विमान ने सामान्य तरीके से लैंडिंग की और सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल पहुंचाया गया। एयरलाइन ने बताया कि बाकी यात्रियों को मेमिंगेन पहुंचाने के लिए एक दूसरा विमान भेजा गया। घटना की जांच जारी है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें: एअर इंडिया फ्लाइट का इंजन बंद, पायलट का इमरजेंसी कॉल:मुंबई से बेंगलुरु जा रही थी, 20 मिनट में लौटी; टेकऑफ के दौरान चिंगारी भी दिखी मुंबई मुंबई से बेंगलुरु जा रही एअर इंडिया की एअरबस A320 Neo फ्लाइट AI2812 बुधवार-गुरुवार की देर रात उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद मुंबई एयरपोर्ट लौट आई। अधिकारियों ने बताया कि हवा में एक इंजन बंद होने पर पायलट ने रेडियो पर ‘PAN PAN’ कॉल दी, जिसके बाद फ्लाइट को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित लैंड कराया गया। पढ़ें पूरी खबर…
फेरारी इटली की मशहूर कार कंपनी:दो बार गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुकी है, आज टॉप सुपर-कार ब्रांड में शामिल है

अगर आपके पास करोड़ों रुपए हैं, तो भी आप शोरूम जाकर अपनी पसंद की फेरारी कार नहीं खरीद सकते। इसके कुछ स्पेशल और लिमिटेड एडिशन मॉडल्स जैसे- फेरारी ला-फेरारी या हालिया पुरोसांग्वे एसयूवी को खरीदने के लिए पहले आपको अपना बैकग्राउंड बताना होगा। यहां तक कि हो सकता है कि कंपनी खुद तय करे कि वह आपको गाड़ी बेचेगी या नहीं। फेरारी को लेकर दीवानगी का आलम यह है कि अगर आज आप कोई कार बुक करते हैं तो 2028 या 2029 में वह आपको मिल पाएगी। फेरारी रफ्तार और लग्जरी का ऐसा संगम है जो इसे सुपर-कार बनाती है। हालांकि फेरारी के इतिहास में दो ऐसे संकट भी आए जब कंपनी दिवालिया होने के करीब पहुंच कर अस्तित्व के लिए जूझती नजर आई। 1969 में यह दिवालिया होने के कगार पर थी, लेकिन तब फिएट ने हिस्सेदारी खरीदकर इसे बचा लिया। असली चुनौती 1988 में इसके संस्थापक एंजो फेरारी के निधन के बाद आई। 80 के दशक के अंत में सट्टेबाजों की वजह से कारों की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ गई थीं। इसे कलेक्टर बबल कहा गया। जब 90 के दशक में वैश्विक मंदी आई और यह बुलबुला फूटा, तो 1991 के पीक के मुकाबले 1993 तक इसकी बिक्री आधी रह गई। कारें अपनी साख खोने लगी थीं। 8.50 लाख करोड़ रुपए की कंपनी है फेरारी आज फेरारी दुनिया के सबसे मजबूत ऑटोमोटिव और सुपर-कार ब्रांड्स में से एक है। ब्रांड्स फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार इसे दुनिया के सिर्फ 12 ब्रांड को मिलने वाली AAA+ रेटिंग हासिल है। आज यह करीब 8.50 लाख करोड़ रु. मूल्य की कंपनी है। वर्तमान में इसके दुनियाभर में करीब 5,718 कर्मचारी हैं। अगर भारत की बात करें तो यहां फेरारी की एक्स-शोरूम कीमत ₹3.76 करोड़ से शुरू होकर ₹10.37 करोड़ रु. तक जाती है। नई फेरारी कार के लिए ग्राहकों को दो साल तक की वेटिंग रहती है। देश में पूरा कोटा सोल्ड-आउट रहता है। शुरुआत – गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर ने रखी थी फेरारी की नींव इटली के मोदेना शहर में जन्मे और गाड़ियों के टेस्ट ड्राइवर एंजो फरारी ने 1939 में ऑटो एवियो कोस्त्रुजियोनी नाम से कंपनी शुरू की थी, लेकिन दूसरा विश्व युद्ध शुरू होने के कारण करीब 8 साल तक काम बंद रहा। इसके बाद 1947 में उन्होंने फेरारी नाम से पहली कार सड़क पर उतारी। कार रेसिंग उनका जुनून था। नए कदम – लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी उतरी कंपनी कंपनी लाइफस्टाइल और फैशन के क्षेत्र में भी धूम मचा रही है। हाल ही में मिलान फैशन वीक में फेरारी कलेक्शन पेश किया गया। कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में कदम रख रही है, जिसके लिए मारानेलो में एक नई ‘ई-बिल्डिंग’ शुरू की गई है। इसके अलावा, मरीन इंजीनियरिंग और सेलिंग की दुनिया में भी प्रवेश की तैयारी कर रही है। यूं संकट में फंसी थी रेसिंग पर फोकस, ग्राहकों की अनदेखी – एंजो फेरारी का जुनून सिर्फ रेसिंग और फॉर्मूला वन जीतना था। इस रवैये के कारण उन्होंने कभी ग्राहकों की पसंद, आराम या लग्जरी को प्राथमिकता नहीं दी। लीडरशिप का अड़ियल रवैया, आंतरिक कलह – 1961 में एंजो की पत्नी ने प्रबंधन के कामों में दखल देना शुरू किया। जब अधिकारियों ने विरोध किया, तो एंजो ने कई प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया। आर्थिक मंदी और कलेक्टर बबल का फूटना – 80 के दशक के अंत में लोग ये कारें निवेश के तौर पर खरीदते थे। 90 के दशक में मंदी की वजह से बिक्री आधी रह गई और कंपनी गहरे वित्तीय घाटे में डूब गई। भविष्य की रणनीति का अभाव – एंजो की मृत्यु के बाद फिएट के अधिकारियों ने कमान संभाली, लेकिन उनके पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी। इस तरह की वापसी लुका डि मोंटेजेमोलो की लीडरशिप – 1991 में लुका डि मोंटेजेमोलो फेरारी के चेयरमैन बने। सबसे पहले कारों की क्वालिटी को सुधारा। सुनिश्चित किया कि फेरारी सड़क पर भी आरामदायक और भरोसेमंद हो। ब्रांड लाइसेंसिंग का विस्तार – मोंटेजेमोलो ने लग्जरी कपड़े, घड़ियां, परफ्यूम और अन्य लाइफस्टाइल उत्पादों के लिए अपने मशहूर ‘प्रान्सिंग हॉर्स’ लोगो को लाइसेंस पर देकर करोड़ों रुपए कमाए। एक्सक्लूसिविटी बरकरार रखना – लुका की रणनीति स्पष्ट थी- ‘हमेशा बाजार की मांग से एक कार कम बनाओ। इस कृत्रिम कमी ने अमीरों के बीच फेरारी का आकर्षण कई गुना बढ़ा दिया पर्सनलाइजेशन – 1993 में ‘फेरारी चैलेंज’ शुरू किया, जो फेरारी मालिकों के लिए एक एमेच्योर रेसिंग सीरीज थी। कई भारी पर्सनलाइजेशन के विकल्प दिए। ऐसे पड़ा नाम – कंपनी का नाम इसके संस्थापक एंजो फेरारी के सरनेम पर रखा गया है। रेसिंग शौकीन एंजो ने खुद ही यह नाम तय किया था। सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी – लैंबॉर्गिनी, मैकलारेन, पॉर्श, एस्टन मार्टिन और बुगाटी दुनियाभर में इसके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों में हैं। – 3.5 लाख कारें ही बनाई हैं फेरारी ने आज तक। – 60 से ज्यादा देशों में व्यापार करती है कंपनी दुनियाभर में। – 179 अधिकृत डीलर हैं दुनियाभर में फेरारी के। -13,640 कारें बिकी कंपनी की 2025 में विभिन्न देशों में।
स्पेन के जंगल में आग, 12 की मौत, VIDEO:4 लोग कार में जिंदा जले, 19 अब भी लापता; इलेक्ट्रिक वायर से आग की आशंका

स्पेन के दक्षिणी हिस्से में एंडालूसिया में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग में 12 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 19 लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह स्पेन के सबसे बड़ी जंगलों की आग की घटनाओं में से एक है। रॉयटर्स के मुताबिक, एक गाड़ी में चार लोग जिंदा जल गए। उनकी कार का स्टीयरिंग व्हील दाईं ओर था, जिससे वे ब्रिटिश लग रहे थे। वहीं, अपनी कारें छोड़ भागने की कोशिश कर रहे 7 लोग भी मृत पाए गए। अधिकारियों ने बताया कि वे निर्धारित निकासी मार्ग की बजाय दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे और वहीं उनकी मौत हो गई। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर बताया कि बिजली की गिरी हुई वायर से आग लगी, जो तेजी से जंगल में फैल गई। दूसरी तरफ बिजली कंपनी एंडेसा के प्रवक्ता ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि जांच में जिस केबल की बात हो रही है, उसमें बिजली का प्रवाह ही नहीं था। इसलिए आग की असली वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। भीषण आग की 4 तस्वीरें यूरोप में हीटवेव से जंगल की आग का खतरा बढ़ा इस साल यूरोप में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव ने जंगल की आग का खतरा काफी बढ़ा दिया है। फ्रांस की सिविल प्रोटेक्शन एजेंसी के प्रमुख जूलियन मेरियन ने कहा कि 2026 का वाइल्डफायर सीजन असामान्य रूप से तेज शुरुआत के साथ आया है। उनके मुताबिक सर्दियों और वसंत में हुई अच्छी बारिश से उगी घनी वेजिटेशन अब लगातार पड़ रही गर्मी में सूख चुकी है और आग के लिए ईंधन का काम कर रही है। फ्रांस में इस साल अब तक 8,000 से ज्यादा आग की घटनाओं में लगभग 100 वर्ग मील क्षेत्र जल चुका है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। फ्रांस-स्पेन सीमा पर पाइरेनीज क्षेत्र में लगी आग के कारण 10 हजार से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। वहीं स्पेन के मलागा क्षेत्र के बेनहावीस कस्बे में भी जंगल की आग के कारण करीब एक हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। खबर लगातर अपडेट हो रही है…
कीर्तन से कोचेला तक; दिलजीत के स्टार बनने का सफर:कभी डॉक्टर की फीस के पैसे नहीं थे, आज 380 करोड़ के मालिक हैं दिलजीत दोसांझ

साल 2024, दिलजीत दोसांझ ने ‘दिल लुमिनाटी’ नाम से वर्ल्ड टूर शुरू किया। भारत में आयोजित उनके इस टूर के टिकट कई शहरों में कुछ ही मिनटों में बिक गए। हालत यह हो गई कि अलग से शो तक जोड़ने पड़े। दिलजीत भले ही आज देश और दुनिया में पंजाबी संगीत का ग्लोबल चेहरा बन गए हों, लेकिन शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था। हाल ही में एक पॉडकास्ट ‘Q with tom power’ में बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब था- इतना कि अगर कोई बीमार पड़ जाए तो डॉक्टर को देने तक के पैसे नहीं होते थे। इसलिए बचपन से ही एक लक्ष्य था कि अमीर और मशहूर बनना है। हाल ही में इंस्टाग्राम लाइव के दौरान उन्होंने बताया एक समय ऐसा भी आया जब वे जिंदगी खत्म करने के बारे में सोचने लगे थे। इसकी प्लानिंग भी कर ली थी, लेकिन मां से मिलने के बाद उन्होंने विचार त्याग दिया। फैंस प्यार से उन्हें अर्बन पेंडू भी बुलाते हैं। अर्बन का हिंदी मतलब है शहरी और पेंडू का मतलब गांव से है यानी फैंस उन्हें शहरी और देहाती का मिश्रण मानते हैं। दिलजीत फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। वे बताते हैं कि उनका दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है। उन्हें खाना बनाने का भी शौक है। इसे कोविड के दौरान सीखा। इसके कई वीडियो पंजाबी कॉमेंट्री के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर चुके हैं। फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने बताया दिलजीत सिर्फ अच्छे अभिनेता या बेहतरीन गायक ही नहीं हैं, बल्कि उनके अंदर एक गहरी आध्यात्मिकता भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जन्म के समय उनका नाम ‘दलजीत’ रखा गया था, लेकिन जब पहला एलबम रिकॉर्ड हुआ तो टी-सीरीज की सहायक कंपनी फाइनटोन के राजिंदर सिंह के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘दिलजीत’ कर लिया। दलजीत का जन्म 6 जनवरी 1984 में पंजाब के परिवार में हुआ, परिवार में पत्नी- संदीप कौर और एक बेटा है, संपत्ति करीब 380 करोड़ रु. अनुमानित है। चर्चा में क्यों – हाल ही में उनकी फिल्म ‘सतलुज’ ओटीटी पर रिलीज हुई थी, जिसे हटा दिया गया है। इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। पंजाब रोडवेज में ड्राइवर थे पिता दिलजीत के पिता बलबीर सिंह पंजाब रोडवेज में ड्राइवर थे, जिन्हें 5 हजार रु. वेतन मिलता था। ऐसे में उन्होंने दिलजीत को बेहतर शिक्षा के लिए मामा के घर लुधियाना भेज दिया। मामा जाने-माने कीर्तनकार थे। यहीं से दिलजीत में संगीत के प्रति रुझान जागा। पढ़ाई में दिलजीत का मन नहीं लगता था, ऐसे में दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। वॉर्नर म्यूजिक ने इनके साथ की है पार्टनरशिप – 2011 में उनका ‘लक 28 कुड़ी दा’ गाना बीबीसी एशियन डाउनलोड चार्ट में लगातार दो हफ्ते टॉप पर रहने वाला पहला गैर-बॉलीवुड पंजाबी गाना था। – वे पहले पंजाबी कलाकार हैं, जिनके साथ ग्लोबल म्यूजिक लेबल्स वॉर्नर म्यूजिक ने इंटरनेशनल पार्टनरशिप की है। – 2024 में जिमी फैलन के ‘द टुनाइट शो’ में परफॉर्म किया था। गुरुद्वारे में कीर्तन से ग्लोबल स्टार तक स्कूल के दिनों से ही दिलजीत ने गुरुद्वारों में कीर्तन करना शुरू कर दिया था। उनका पहला एलबम ‘इश्क दा उड़ा अड़ा’ 2004 में आया। 2009 में हनी सिंह के साथ आए एल्बम ‘द नेक्स्ट लेवल’ ने उन्हें यूके, अमेरिका और कनाडा के पंजाबी समूह में फेमस कर दिया। 2016 में ‘उड़ता पंजाब’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया बच्चों और बुजुर्गों के लिए फाउंडेशन बनाया है – वंचित बच्चों और बुजुर्गों की मदद के लिए 2013 में अपने जन्मदिन पर सांझ फाउंडेशन नाम से एनजीओ शुरू किया था। – दिलजीत को महंगे स्नीकर्स और जूतों का बेहद शौक है। उनके पास दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे ब्रांड्स का एक बड़ा कलेक्शन है। ‘कोचेला’ में परफॉर्म करने वाले पहले पंजाबी सिंगर – फोर्ब्स इंडिया की सेलिब्रिटी 100 सूची में कई बार शामिल किए जा चुके हैं। – कैलिफोर्निया के प्रसिद्ध म्यूजिक एंड आर्ट्स फेस्टिवल ‘कोचेला’ में प्रस्तुति देने वाले वे पहले पंजाबी सिंगर हैं। – क्लोदिंग ब्रांड ‘अर्बन पेंडू’ लॉन्च किया है। खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ाने के लग चुके हैं आरोप – 2020 में कांग्रेस सांसद रवनीत बिट्टू ने उनके गाने रंगरूट और जैज बी के ‘पुत जट्टा दां’ को खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने वाला कहा था। – 2025 में एफडब्ल्यूआईसीई ने फिल्म ‘सरदार जी 3’ में पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर को कास्ट करने पर उन्हें बैन कर दिया था।
पाचन उपचार: एसिडिटी और गैस से संबंधित परेशानियाँ? तो रामबाण इलाज हैं रसोई में राखें ये चीजें; इन 5 का प्रयोग करें

10 जुलाई 2026 को 16:40 IST पर अद्यतन किया गया पाचन के उपाय: आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल में बाहर का खाना और गलत खान-पान के साथ-साथ देर तक छुपे काम करने की आदतें पेट से जुड़ी बातें आम हो गई हैं। एसिडिटी, गैस और पेट की जलन जैसी एलर्जी से बचने के लिए हमारी रसोई में ही मौजूद हैं कई आसान उपाय। आइए जानते हैं 5 ऐसी आदतों के बारे में जो पाचन तंत्र को ठीक करने में सहायक को बनाए रखने में मदद करती हैं। अनुसरण करना : सौंफ खाना खाने के बाद सौंफ़ खाने से सेहत के लिए बढ़िया है। इसके गुण पेट की सामग्रियों को आराम पहुंचाते हैं और गैस बनने से असुविधा होती है। आप खाने के बाद 1 बड़ा सौंफ़ चौबा सकते हैं। छवि: फ्रीपिक जीरा जीरा एंजाइम्स को सक्रिय करने का काम करता है, जिससे खाना जल्दी पचता है और एसिडिटी का खतरा कम होता है। जीरे को पानी में डूबकर उसका सेवन पेट के लिए पसंद है। छवि: फ्रीपिक अँग्रेज़ पेट की सूजन को कम करने और पाचन क्रिया को तेज करने में मदद मिलती है। पाचन तंत्र धीमा होने से अक्सर जलन और एसिडिटी की समस्या होती है। इसमें अदरक वाली चाय, गर्म पानी में रेस्तरां या भोजन शामिल कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक ऍमएलएम इलायची प्लांटर दूर नहीं होता, बल्कि पाचन को भी नुकसान पहुंचाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण पेट की सूजन को कम करते हैं। खाने के बाद 1- 2 इलायची चबाना या इसे चाय और दूध के ढांचे में नारियल प्रभावशाली होता है। छवि: फ्रीपिक तुलसी तुलसी को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। विशेष भोजन से पेट की जलन शांत होती है और सूजन में राहत मिलती है। आप सुबह खाली पेट तुलसी के पत्ते के पत्ते या तुलसी की चाय का सेवन कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 10 जुलाई 2026 16:40 IST पर
मूवी रिव्यू: इक्का:सनी देओल ने पूरी जान लगा दी, लेकिन 'ढाई किलो का हाथ' भी कमजोर स्क्रिप्ट के आगे बेबस नजर आता है

कोर्टरूम ड्रामा हमेशा से दर्शकों की पसंद रहे हैं। सनी देओल और अक्षय खन्ना जैसे दमदार कलाकारों की मौजूदगी से ‘इक्का’ से उम्मीद बढ़ती है। फिल्म शुरुआत में बांधे रखती है, लेकिन आगे बढ़ते-बढ़ते अपनी ही उलझनों में फंस जाती है। आखिर तक यह कोर्टरूम ड्रामा से ज्यादा मेलोड्रामा बन जाती है। सिनेमाघरों की बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म की लंबाई 2 घंटे 20 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए हैं। फिल्म की कहानी कैसी है? अर्जुन मेहरा (सनी देओल) ऐसे वकील हैं, जिन्होंने अपने करियर में कभी ऐसे शख्स का केस नहीं लड़ा, जिसे वह गलत मानते हों। लेकिन हालात उन्हें शौर्यमान (अक्षय खन्ना) का बचाव करने के लिए मजबूर कर देते हैं। शौर्यमान पर एक युवती पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। यहीं से कहानी कानून, नैतिकता और इंसाफ के बीच की लड़ाई दिखाने की कोशिश करती है। शुरुआत दिलचस्प है और कई सवाल खड़े करती है। लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म बार-बार नए ट्विस्ट और खुलासों का सहारा लेती है। कई मोड़ कहानी से ज्यादा पटकथा की मजबूरी लगते हैं। क्लाइमैक्स तक फिल्म जरूरत से ज्यादा समझाने लगती है और यहीं इसका असर कमजोर पड़ जाता है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? ‘इक्का’ देखने की सबसे बड़ी वजह सनी देओल हैं। लंबे समय बाद उन्हें सिर्फ गुस्से वाले हीरो नहीं, बल्कि भीतर से उलझे किरदार में देखा जाता है। कोर्टरूम में उनके कई सीन प्रभाव छोड़ते हैं और साफ दिखता है कि उन्होंने किरदार पर मेहनत की है। अक्षय खन्ना अपने खास अंदाज में नजर आते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी किरदार को मजबूत बनाती है, लेकिन कई जगह उनका प्रदर्शन एक जैसा लगता है। तिलोत्तमा शोम संयमित अभिनय करती हैं और कई दृश्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। दिया मिर्जा और संजीदा शेख के हिस्से सीमित दृश्य हैं, इसलिए वे ज्यादा असर नहीं छोड़ पातीं। निर्देशन और तकनीकी पक्ष कैसा है? सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा के पास अच्छा विषय था, लेकिन उसे परदे पर उतारते समय वह संतुलन नहीं बना पाए। कोर्टरूम की बहसें असर छोड़ सकती थीं, लेकिन जरूरत से ज्यादा बैकग्राउंड म्यूजिक, लंबे संवाद और भावनात्मक दृश्यों ने उनका प्रभाव कम कर दिया। सबसे ज्यादा निराश फिल्म की पटकथा करती है। हर थोड़ी देर में नया गवाह, नया सबूत और नया खुलासा आता है। कुछ समय बाद ये ट्विस्ट चौंकाने के बजाय थकाने लगते हैं। फिल्म लंबी महसूस होती है और कई दृश्य आसानी से छोटे किए जा सकते थे। म्यूजिक कैसा है? फिल्म का संगीत कहानी के साथ ज्यादा देर तक नहीं चलता। बैकग्राउंड स्कोर कई जगह जरूरत से ज्यादा ऊंचा है। कोर्टरूम सीन्स में सिर्फ कलाकारों की परफॉर्मेंस पर भरोसा किया जाता, तो असर ज्यादा होता। कहां रह गई कमी? ‘इक्का’ की सबसे बड़ी दिक्कत इसकी कहानी नहीं, बल्कि उसे कहने का तरीका है। फिल्म दर्शकों पर भरोसा करने के बजाय हर बात समझाने लगती है। हर भावनात्मक पल को ज्यादा भावुक और हर ट्विस्ट को जरूरत से ज्यादा खींचा गया है। नतीजा यह होता है कि जिस कहानी में कानून और इंसाफ की गहरी बहस हो सकती थी, वह धीरे-धीरे मेलोड्रामा में बदल जाती है। फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं? ‘इक्का’ में दमदार कलाकार हैं, अच्छा विषय है और कुछ कोर्टरूम सीन्स प्रभाव छोड़ते हैं। लेकिन कमजोर पटकथा, जरूरत से ज्यादा मेलोड्रामा और लंबा क्लाइमैक्स फिल्म को उस मुकाम तक नहीं पहुंचने देते, जहां यह पहुंच सकती थी। सनी देओल पूरी ईमानदारी से फिल्म को संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस बार उनका ‘ढाई किलो का हाथ’ भी कमजोर स्क्रिप्ट के आगे बेबस नजर आता है।
‘द इंडिया स्टोरी’ में दिखेगा थाली का जहर:कैंसर की ट्रेन से कोर्टरूम तक असल घटनाओं से प्रेरित है फिल्म

श्रेयस तलपदे और काजल अग्रवाल स्टारर ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। निर्देशक चेतन डीके और राइटर-प्रोड्यूसर सागर शिंदे की यह फिल्म मिलावटी खान-पान, पेस्टिसाइड्स और कैंसर के बढ़ते खतरे जैसे गंभीर मुद्दों को सस्पेंस, ड्रामा और क्राइम के साथ पेश करेगी। निर्देशक का दावा है कि फिल्म में दर्शकों को ओरिजिनल क्राउड और रियल लोकेशंस दिखाई देंगी, क्योंकि उनका उद्देश्य कहानी को अधिकतम वास्तविकता के साथ परदे पर उतारना था। एक बच्ची की मौत की खबर से कहानी की प्रेरणा आई निर्देशक चेतन डीके बताते हैं कि ‘मैं पहले किसी भारतीय क्रांतिकारी पर फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन इसी दौरान सागर शिंदे के करीबी दोस्त की छह-सात साल की बेटी की पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरी टीम को झकझोर दिया।’ रिचर्स के दौरान ही एक ‘कैंसर ट्रेन’ के बारे में भी पता चला फिल्म के लिए की गई रिसर्च में लगभग ढाई से तीन साल लगे। रिसर्च के दौरान ही पता चला कि पंजाब के भटिंडा में एक ट्रेन को लोग ‘कैंसर ट्रेन’ के नाम से जानते हैं, क्योंकि वहां प्रदूषण और रसायनों के असर से लोग कैंसर का शिकार हो गए। हमारी फिल्म ऐसे ही गंभीर मुद्दों के इर्द-गिर्द है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट बना फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर, पुणे, मुंबई, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य स्थानों पर की गई। चेतन डीके का कहना है कि ‘मैंने अधिकांश सीन्स को वास्तविक लोकेशंस पर शूट किया और केवल कुछ सीन्स में ही क्रोमा का उपयोग किया। कुल मिलाकर फिल्म की शूटिंग 60 से 65 दिनों में पूरी हुई, जबकि पूरा शूटिंग शेड्यूल लगभग आठ से नौ महीने तक चला। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट तैयार किया गया, जहां 12 दिनों तक कोर्टरूम सीक्वेंस फिल्माए गए। यह पूरे इंडिया की फिल्म है, इसलिए हमने टाइटल ‘द इंडियन स्टोरी’ रखा है। इसका टैगलाइन ‘स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ है।’ कम्प्यूटर जनरेटेड नहीं, असली क्राउड के साथ हुई पूरी शूटिंग निर्देशक के अनुसार ‘फिल्म में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 80 कैरेक्टर हैं। कुछ क्राउड सीन 2-3 तीन हजार लोगों के साथ शूट किए गए हैं। कुल 8 से 10 हजार असल क्राउड हायर हुआ था। क्राउड को कोर्ट, ट्रेन के सीन से लेकर पंजाब, हिमाचल, हैदराबाद, कोलकाता गुजरात, केरला आदि में दिखाया गया है। क्लाइमैक्स की शूटिंग में 10-12 दिन लगे हैं। इसकी शूटिंग कोल्हापुर में हुई है।’ मध्य प्रदेश से लेकर साउथ तक जाकर की गई रिसर्च निर्देशक चेतन के मुताबिक…‘ मध्य प्रदेश से लेकर केरल के कासरगोड गांव और तमिलनाडु तक कई जगहों के मामलों का अध्ययन किया गया। कुछ इलाकों में वर्षों से केमिकल छिड़काव के कारण बच्चों के जन्म से ही विकलांग होने और कैंसर के मामलों में वृद्धि भी देखने को मिली। जब हमें पता चला कि बाजार में ऐसे उत्पाद भी बिक रहे हैं, जिनमें असली दूध की मात्रा नगण्य है, तब लगा कि यह विषय सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी है।’ सैनिक के रोल में दिखेंगे श्रेयस, काजल बनी हैं वकील फिल्म की कहानी एक ऐसे सैनिक की है, जिसकी बेटी पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मर जाती है। इसके बाद वह किसान, कंपनियों और सिस्टम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ता है। श्रेयस इसमें सैनिक बने हैं, वहीं काजल अग्रवाल उस वकील का किरदार निभा रही हैं, जो अदालत में उनका साथ देती है। मुरली शर्मा एक ईमानदार अधिकारी और मनीष वाधवा विपक्षी वकील बने हैं।’
चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी की कीमतों में आज 10 जुलाई को मामूली गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 1,780 रुपए घटकर 2,22,014 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 1,43,656 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 159 रुपए बढ़कर 1,43,815 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 9 जुलाई को यह 1,43,656 लाख पर था। सोना के दाम इस महीने 2,183 रुपए बढ़ें हैं, जबकि चांदी की कीमत 3,416 रुपए गिरी है। 1 जुलाई को सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.25 लाख/किलो थी।
चांदी आज ₹1,780 सस्ती हुई, इस महीने ₹3,416 गिरी:सोना सिर्फ ₹159 चढ़ा, जुलाई में ₹2,183 महंगा हुआ; जानें अपने शहर के दाम

चांदी की कीमतों में आज 10 जुलाई को मामूली गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 1,780 रुपए घटकर 2,22,014 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 1,43,656 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 159 रुपए बढ़कर 1,43,815 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले 9 जुलाई को यह 1,43,656 लाख पर था। सोना के दाम इस महीने 2,183 रुपए बढ़ें हैं, जबकि चांदी की कीमत 3,416 रुपए गिरी है। 1 जुलाई को सोना ₹1.42 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.25 लाख/किलो थी।
विंबलडन मैच देखने पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा:पति निक जोनास को वीडियो कॉल पर कराया लाइव टूर, मैच के दौरान दिखा स्टाइलिश लुक

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा गुरुवार को विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट का मुकाबला देखने पहुंचीं। वे महिला सिंगल्स के सेमीफाइनल मैच के दौरान फ्रंट रो में बैठी नजर आईं, जहां कोको गॉफ और कैरोलिना मुचोवा के बीच मुकाबला चल रहा था। प्रियंका ने स्टेडियम से ही अपने पति और अमेरिकी सिंगर निक जोनास को फेसटाइम पर वीडियो कॉल किया और उन्हें विंबलडन का लाइव टूर कराया। सोशल मीडिया पर उनके इस वीडियो कॉल और स्टाइलिश लुक की काफी चर्चा हो रही है। इस मैच के दौरान प्रियंका के साथ कई हॉलीवुड हस्तियां भी मौजूद थीं। देखें प्रियंका की तस्वीरें निक जोनास को वीडियो कॉल कर दिखाया मैच मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रियंका चोपड़ा जैसे ही स्टैंड्स की तरफ बढ़ रही थीं, उन्होंने वहां मौजूद हॉलीवुड एक्ट्रेस सिंथिया एरिवो से मुलाकात की और उनका अभिवादन किया। इसके बाद वे अपनी सीट पर बैठ गईं और उनका पूरा ध्यान मैच पर ही था। मुकाबला देखने के दौरान ही उन्होंने अपना फोन निकाला और पति निक जोनास को फेसटाइम कॉल मिला दिया। उन्होंने निक को वहां का माहौल दिखाया और मैच से जुड़े लाइव अपडेट्स दिए। इस दौरान वे मैच के रोमांचक मोमेंट्स पर काफी उत्साहित होकर रिएक्शन देती दिखीं। कई बड़ी हस्तियों के साथ आईं नजर स्टेडियम में प्रियंका चोपड़ा के साथ कई अन्य जानी-मानी हस्तियां भी मैच का लुत्फ उठा रही थीं। उनके साथ लेडी हेलेन टेलर, एक्ट्रेस लिली जेम्स, पूर्व रॉयल बैले प्रिंसिपल डार्सी बसेल, एक्ट्रेस अन्ना मैक्सवेल मार्टिन और ब्रॉडकास्टर एमिली मैतलीस जैसी हस्तियां मौजूद थीं। प्रियंका इस खास खेल आयोजन में बेहद स्टाइलिश आउटफिट में पहुंची थीं, जिसकी तस्वीरें इंटरनेट पर सामने आई हैं। विंबलडन से प्रियंका का पुराना जुड़ाव प्रियंका चोपड़ा के लिए विंबलडन जाना कोई नया अनुभव नहीं है। वे पहले भी इस प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट का हिस्सा बनती रही हैं। 2023 में वे निक जोनास के साथ ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोकेट क्लब पहुंची थीं, जहां दोनों रॉयल बॉक्स में बैठे नजर आए थे। प्रियंका ने साल 2021 में पहली बार अकेले विंबलडन में शिरकत की थी, जब वे विमेंस सिंगल्स का फाइनल मुकाबला देखने स्टेडियम पहुंची थीं।








