Friday, 02 Oct 2026 | 12:39 PM

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PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

PoK में पाकिस्तानी फोर्स ने लोगों पर गोलियां चलाईं:पाकिस्तान सरकार के खिलाफ 40 हजार प्रदर्शनकारी जुटे थे; कई लोग घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में रविवार को जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन रैली पर पाकिस्तानी फोर्स ने गोलियां चला दीं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, JAAC ने दावा किया कि अब्बासपुर के सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 40 हजार लोग जुटे थे। संगठन का आरोप है कि डुडियाल के AMB इलाके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बिना उकसावे के गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हालांकि, घायलों की आधिकारिक संख्या या पाकिस्तान प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। JAAC का कहना है कि यह प्रदर्शन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ है। साथ ही, यह आंदोलन JAAC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर चल रहा है। संगठन ने गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है। कई इलाकों से पहुंचे लोग, विदेश में भी प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, डेरा इस्माइल खान में चल रहे धरना स्थल पर भी कई अलग-अलग इलाकों से लोगों के काफिले लगातार पहुंचते रहे। प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी बताई गई। JAAC ने कहा कि रावलाकोट और चक की महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारी प्रशासन के दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। वहीं, JAAC की अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। JAAC का कहना है कि शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद पूरे PoJK में तनाव बढ़ गया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर ‘रीलिज शौकत मीर’ अभियान चलाया, जिसके तहत लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान ‘लॉन्ग लिव कश्मीर’ और ‘लॉन्ग लिव द पीपल’ जैसे नारे लगाए गए। खबर लागातर अपडेट हो रही है…

भारत-A ने श्रीलंका-A को 10 विकेट से हराया:बरार ने दूसरे टेस्ट में 10 विकेट लिए, सुदर्शन के 168 रन; 1-0 से सीरीज जीती

भारत-A ने श्रीलंका-A को 10 विकेट से हराया:बरार ने दूसरे टेस्ट में 10 विकेट लिए, सुदर्शन के 168 रन; 1-0 से सीरीज जीती

भारत-A ने श्रीलंका-A को दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट में 10 विकेट से हराकर दो मैचों की सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। रविवार को गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में मुकाबले के चौथे और आखिरी दिन तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने दूसरी पारी में 6 विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट पूरे किए। पहली पारी में 168 रन बनाने वाले साई सुदर्शन ने दूसरी पारी में भी नाबाद 25 रन बनाए। सीरीज का पहला मुकाबला ड्रॉ रहा था। इससे पहले भारत-A ने अफगानिस्तान-A और श्रीलंका-A वाली वनडे ट्राई सीरीज भी जीती थी। टॉप परफॉर्मर गुरनूर बरार की फोटोज… भारत ने 177 रन की बढ़त लेकर पारी घोषित की भारत-A ने चौथे दिन 541/8 से आगे खेलना शुरू किया। सिर्फ 9 गेंद खेलने के बाद यश ठाकुर के आउट होते ही टीम ने 543/9 पर पारी घोषित कर दी। सारांश जैन 70 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि चोटिल ऋतुराज गायकवाड़ बल्लेबाजी के लिए नहीं आए। पहली पारी के आधार पर भारत-A को 177 रन की बढ़त मिली। श्रीलंका-A ने पहली पारी में 366 रन बनाए थे। गुरनूर ने नई गेंद से विकेट लिए श्रीलंका-A की शुरुआत बेहद खराब रही। बरार ने शुरुआती तीन ओवर में सोहन डी लिवेरा और नुवानिडु फर्नांडो को आउट किया। वहीं आकिब नबी ने पवन्था वीरसिंघे का विकेट लिया। मेजबान टीम सिर्फ 9 रन पर 3 विकेट गंवा चुकी थी। अशेन बंडारा की फिफ्टी शुरुआती झटकों के बाद अशेन बंडारा ने तेज बल्लेबाजी की। उन्होंने गुरनूर के एक ओवर में लगातार तीन चौके लगाए और सिर्फ 47 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। कप्तान सहान अराच्चिगे ने भी कुछ अच्छे शॉट खेले, लेकिन यश ठाकुर ने उन्हें आउट कर दिया। लंच तक श्रीलंका-A का स्कोर 115/4 था। दूसरे सेशन में गुरनूर ने खत्म किया मैच लंच के बाद गुरनूर बरार ने फिर विकेट लिए। उन्होंने अंजला बंडारा और अशेन बंडारा (87) को आउट कर दिया। केशारा नुवांथा (26) और दिलुम सुदीरा (21) ने कुछ संघर्ष किया, लेकिन लगातार अंतराल पर विकेट गिरते रहे। सारांश जैन ने भी 2 विकेट लिए। आखिर में गुरनूर ने सुदीरा और दुलाज समुधिता को आउट कर दूसरी पारी 68 रन पर 6 विकेट लिए। पहली पारी में उन्होंने 4 विकेट लिए थे। बरार ने मैच में 145 रन देकर 10 विकेट लिए। श्रीलंका-A दूसरी पारी में 209 रन ही बना सकी। 33 रन का टारगेट 6.2 ओवर में हासिल भारत-A को जीत के लिए सिर्फ 33 रन चाहिए थे। साई सुदर्शन ने 22 गेंदों में नाबाद 25 रन बनाए और चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। अमन मोखाडे 11 रन बनाकर नाबाद लौटे। भारत-A ने 6.2 ओवर में बिना विकेट खोए लक्ष्य हासिल कर 10 विकेट से मुकाबला और 1-0 से सीरीज अपने नाम कर ली।

फीफा वर्ल्ड-कप का दिलचस्प आंकड़ा:हैरी केन-हालेंड के बिना 30% मैच भी नहीं जीत पा रहीं उनकी टीमें; मेसी-रोनाल्डो की टीमें उनके बिना भी मजबूत

फीफा वर्ल्ड-कप का दिलचस्प आंकड़ा:हैरी केन-हालेंड के बिना 30% मैच भी नहीं जीत पा रहीं उनकी टीमें; मेसी-रोनाल्डो की टीमें उनके बिना भी मजबूत

2026 फीफा पुरुष वर्ल्ड कप में सुपरस्टार खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हैं। अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी 4 मैचों में 7 गोल कर गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं, लेकिन इस टूर्नामेंट में सिर्फ गोलों की नहीं, एक और दिलचस्प कहानी सामने आई है। 2022 वर्ल्ड कप के बाद ये अब तक के आंकड़े बताते हैं कि हर टीम अपने स्टार खिलाड़ी पर बराबर निर्भर नहीं है। आइए जानते हैं किस टीम की जीत अपने सबसे बड़े सितारे पर ज्यादा टिकी है और कौन सी टीम उनके बिना भी ताकतवर है… नॉर्वे नॉर्वे के स्टार प्लेयर अर्लिंग हालेंड के साथ टीम 69% मैच जीतती है, लेकिन उनके बिना जीत का प्रतिशत सिर्फ 25% रह जाता है। हालेंड ने 30 मैचों में 39 गोल किए हैं और 2022 के बाद नॉर्वे के 40% गोल अकेले उनके नाम हैं। टीम ने उनके साथ 74 गोल किए, जबकि उनके बिना सिर्फ 21 गोल ही कर सकी। इंग्लैंड इंग्लैंड की कहानी अलग है। हैरी केन के मैदान पर रहने पर टीम 76% मैच जीतती है, जबकि उनके बिना यह आंकड़ा सिर्फ 29% रह जाता है। 2022 के बाद इंग्लैंड ने केन के साथ 73 गोल किए, जबकि उनके बिना सिर्फ 19 गोल कर पाया। केन अकेले टीम के 32% गोल कर चुके हैं। साफ है कि इंग्लैंड का हमला काफी हद तक अपने कप्तान पर टिका है। अर्जेंटीना अब बात लियोनेल मेसी की। वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के 10 में से 7 गोल मेसी ने किए हैं। इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि मेसी के साथ और उनके बिना भी अर्जेंटीना की जीत का प्रतिशत 83 है। मेसी ने 30 मैचों में 25 गोल और नौ असिस्ट किए हैं, लेकिन टीम उनके बिना भी लगातार मैच जीतने में सफल रही है। यानी अर्जेंटीना सिर्फ एक खिलाड़ी के भरोसे नहीं चलती। ब्राजील ब्राजील के लिए विनिसियस जूनियर वर्ल्ड फुटबॉल के बड़े सितारे हैं, लेकिन राष्ट्रीय टीम के साथ उनके आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। दिलचस्प बात यह है कि ब्राजील उनके बिना 63% और उनके साथ सिर्फ 44% मैच जीता है। यानी क्लब फुटबॉल जैसा असर वह अभी तक राष्ट्रीय टीम में नहीं छोड़ पाए हैं। स्पेन स्पेन के लामिने यमाल भविष्य के बड़े खिलाड़ी माने जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल स्पेन उनके बिना भी मजबूत है। टीम उनके बिना 75% व उनके साथ 71% मैच जीतती है। यमाल ने अब तक स्पेन के कुल गोलों में सिर्फ 6% योगदान दिया है। यमाल के खेलने पर स्पेन ने 59 गोल किए, जबकि उनके बिना टीम ने 54 गोल किए। फ्रांस फ्रांस किलियन एमबापे के साथ 71% मैच जीतता है, जबकि बिना उनके जीत प्रतिशत 50% रह जाता है। एमबापे ने 24 गोल और 17 असिस्ट किए हैं। हालांकि फ्रांस के पास डेम्बेले, माइकल ओलिसे, देजिरे डुए और ब्रैडली बारकोला जैसे कई आक्रामक खिलाड़ी हैं, इसलिए टीम पूरी तरह सिर्फ एमबापे पर निर्भर नहीं दिखती। पुर्तगाल पुर्तगाल में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। टीम के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 35 मैचों में 27 गोल किए हैं, लेकिन टीम की जीत का प्रतिशत उनके साथ 67% और बिना उनके 63% है। यानी रोनाल्डो अहम हैं, लेकिन पुर्तगाल के पास दूसरे मैच विजेता खिलाड़ी भी मौजूद हैं।

नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार

नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार

सेलीना जेटली करीब 15 साल बाद बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं। वह निर्देशक राम कमल मुखर्जी की अगली बायोपिक में सिस्टर निवेदिता (मार्गरेट नोबल) का किरदार निभाएंगी। अपने एक इंटरव्यू में सेलिना ने कहा कि यह फिल्म उनके करियर के सबसे खास अनुभवों में से एक है। उन्होंने बताया कि राम कमल मुखर्जी के साथ काम करना उनके लिए अलग अनुभव रहा और इस किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी जैसा है। सेलिना कहती है…‘सिस्टर निवेदिता मुझे सबसे ज्यादा इसलिए प्रभावित करती हैं, क्योंकि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ था, फिर भी उन्होंने अपना जीवन भारत, इसकी संस्कृति, आध्यात्मिक विचारधारा और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।’ कौन हैं सिस्टर निवेदिता सिस्टर निवेदिता स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या थीं, जिन्होंने अपना जीवन भारत की शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्रजागरण को समर्पित कर दिया। महिला शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है।

अल्ट्रा-रिच का ट्रेंड:अमीर लोग दर्जनों-सैकड़ों बच्चे पैदा करने को ‘प्रोजेक्ट’ मान रहे; यह वंश बचाने नहीं, शक्ति-प्रभाव का नया प्रतीक बना

अल्ट्रा-रिच का ट्रेंड:अमीर लोग दर्जनों-सैकड़ों बच्चे पैदा करने को ‘प्रोजेक्ट’ मान रहे; यह वंश बचाने नहीं, शक्ति-प्रभाव का नया प्रतीक बना

Hindi News International Wealthy People Are Treating Having Dozens And Hundreds Of Children As A ‘project’; It’s Not About Preserving Lineage, But Rather About Becoming A New Symbol Of Power And Influence. द न्यू यॉर्क टाइम्स. वॉशिंगटन8 मिनट पहले कॉपी लिंक मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। – प्रतीकात्मक फोटो विकसित देशों में जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। बहुत से लोग कहते हैं कि वे एक बच्चे का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, एक छोटा-सा वर्ग अति धनी लोगों का है, जो तकनीक और लगभग असीम संसाधनों के दम पर ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। यानी बच्चों की संख्या का ही ताकत, विरासत, प्रभाव और भविष्य पर कब्जे का प्रतीक बन जाना। यह कहानी असमानता का सबसे ठोस रूप भी दिखाती है। एक ओर लोग आईवीएफ के लिए कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ अरबपति दो करोड़ रु. या इससे ज्यादा खर्च कर सरोगेसी और डोनर एग्स से ‘ऑर्डर’ की तरह बच्चे बनवा रहे हैं। इसमें सबसे चर्चित नामों में इलॉन मस्क हैं। उनके 14 बच्चे हैं। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव का दावा है कि उनके स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। अमेरिकी बीमा उद्योगपति ग्रेग लिंडबर्ग ने ‘बेबी प्रोजेक्ट’ चलाया। इसमें मॉडल्स को धोखे से एग डोनेशन के लिए फंसाने के आरोप भी लगे। उनके 12 बच्चों की बात सामने आई है। वहीं, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने एक समय अपने डीएनए को ‘फैलाने’ की सनक तक जाहिर की थी। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की आर्ली रसेल कहती हैं, ‘अरबपति एक साथ कई सरोगेट्स के जरिए ‘बैच’ में बच्चे पैदा करवा सकते हैं। आईवीएफ तकनीक अब सिर्फ संतान पाने का जरिया नहीं है। यह लिंग चयन, बीमारी और कुछ जीन संबंधी गुणों को चुनने का औजार बन चुकी है। इसका खर्च अरबपति ही उठा सकते हैं।’ मनोवैज्ञानिक ​कहते हैं कि जैसे पुराने समय के राजा अपनी वंशावली को शक्ति का स्रोत मानते थे, वैसे ही आज के कुछ टेक-किंग्स अपने खून को भविष्य की पूंजी मान रहे हैं। फर्क बस इतना है कि अब तलवार की जगह तकनीक है। नतीजा: ‘परिवार’ की भावना और सोच ही खतरे में पड़ी अमेरिकी लेखिका अन्ना लोई सुसमैन के अनुसार, अरबपतियों की इस सनक की शिकार कुछ महिलाएं और बच्चे हैं। सरोगेट माताओं के शोषण, सहमति उल्लंघन, बच्चों की देखभाल पर सवाल उठे हैं। कई मामलों में बच्चे ननों के भरोसे, दूसरे देशों में पले-बढ़े, जबकि पिता के लिए वे सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए। समाजशास्त्री इवा इलूज चेतावनी देती हैं, ‘अगर इस पर सख्ती और नैतिक चर्चा नहीं हुई, तो परिवार की नींव ही हिल जाएगी।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण सुबह उठते ही थकान, सुस्ती और भारीपन महसूस होना एक आम समस्या बन गई है। कई बार भरपूर नींद लेने के बाद भी शरीर में वो ऊर्जा नहीं होती, हमें आपके लिए जरूरी होती है। अगर आप भी सुबह-सुबह चाय या फूला के साथ अपनी नींद भटकते हैं, तो आपकी इस आदत को बदलने का समय आ गया है। अपनी सुबह की शुरुआत कैफीन के बजाय आप खीरा और पुदीना के सेवन से करें। इसे खाली पेट पीने से शरीर में सुस्ती नहीं रहेगी। बल्कि आपको ऊर्जावान ऊर्जा भी प्राप्त होगी। खीरा और पुदीना का संयोजन क्यों है खास? खेड़ा और पुदीना, दोनों ही आपके ठंडे तासीर और ताजगी देने वाले गुणों के लिए जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो यह एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक बन जाता है जो शरीर के अंदर से साफ और एनर्जेटिक काम करता है। पोटेशियम में लगभग 95% पानी होता है, जो शरीर को तुरंत नष्ट कर देता है। इसके अलावा, विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के चयापचय को बढ़ावा देते हैं। वहीं पुदीन की मित्र एंटीऑक्सीडेंट और मेन्थॉल सेपरेटिटी होती हैं। यह केवल आपके पाचन तंत्र को स्थापित नहीं करता है, बल्कि मानसिक थकान को कम करके मूड को तुरंत ताजा करने का काम करता है। खाली पेट खेडा-पुदीना के बेमिसाल फायदे सुबह-सुबह खाली पेट इस खाद्य पदार्थ को पीने से शरीर की कोशिकाओं की तुरंत बिक्री हो जाती है, जिससे गरीबी दूर हो जाती है और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं।रात भर में शरीर में जमा हुआ विकिरण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में यह पेय बहुत ही लाभकारी है। अगर आपको सुबह पेट साफ नहीं है या गैस-एसिडिटी की समस्या है तो यह आपके लिए जरूरी है। यह पाचन अग्नि को शांत करता है और ब्लोटिंग से राहत देता है।प्रतिदिन पीने से खून साफ ​​होता है। जिससे चेहरे के कील-मुंहसे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है। सबसे पहले मिठाई को अच्छे से ढोकर छोटे से मिश्रण में काट लें। अब एक जरूरी या ज्यूसर में कटे हुए टुकड़े, पुदीने की सब्जियां और एक कप पानी के ढांचे को अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। यह एक अच्छा लेंस में से एक है। इसमें नींबू का रस, काला नमक और संबंधित जीरा पाउडर मिलाकर अच्छे से मिलाएं। नोट – आप इसे सुबह खाली पेट पीएं और इसे कम से कम 30 से 45 मिनट बाद तक पिएं।

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीति की प्रभावशाली आवाज टकर कार्लसन फिर चर्चा में हैं। कभी उनकी लोकप्रियता फिल्मी सितारों जैसी थी। अब वे राष्ट्रपति ट्रम्प से मतभेद और नई राजनीतिक पार्टी के विचार को लेकर सुर्खियों में हैं। कार्लसन लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और मीडिया की सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी आवाजों में गिने जाते हैं। इमिग्रेशन विरोध, श्वेत पहचान और राष्ट्रवादी मुद्दों पर उनके आक्रामक विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वे वर्षों तक रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रबल समर्थक रहे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रम्प ने अपने चुनावी वादों के विपरीत कदम उठाया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट पर यह स्वीकार भी किया कि ट्रम्प को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में तीसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार सामने रखकर हलचल पैदा कर दी। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर भी सवाल उठा चुके हैं। ट्रम्प द्वारा अल्लाह शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में प्रस्तुत करने की भी उन्होंने आलोचना की। गौरतलब है कि अमेरिका में मुख्य रूप से दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था (टू-पार्टी सिस्टम) है, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहता है। 58 वर्षीय कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन मीडिया जगत से जुड़े रहे। इतिहास में स्नातक करने के बाद टकर ने पत्रिकाओं और अखबारों में काम किया तथा 1995 में पीबीएस से टीवी करियर की शुरुआत की। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ से मिली। यह शो औसतन करीब 30 लाख दर्शकों तक पहुंचता था और कार्लसन अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके नाम वाली टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रम्प से जुड़े उत्पादों से भी अधिक बताई गई। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक 2020-21 के दौरान कंजरवेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा प्रभाव रखने वाला शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति था। हालांकि उनकी पहचान विवादों से भी जुड़ी रही। उन्होंने इमिग्रेशन, नस्ल और पहचान की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। वे बार-बार यह दावा करते रहे कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन विवादों के चलते डिज्नी और लेक्सस जैसी कंपनियों ने उनके शो से विज्ञापन हटा लिए थे। 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद उन्होंने अपना स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया। आज भी वे अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादास्पद आवाजों में शामिल हैं।

सवाल पूछना अधिकार, पर मकसद सच की तलाश होना चाहिए:इंसान की बड़ी क्षमता उसका दिमाग और दिमाग का सबसे असरदार औजार- एक अच्छा सवाल

सवाल पूछना अधिकार, पर मकसद सच की तलाश होना चाहिए:इंसान की बड़ी क्षमता उसका दिमाग और दिमाग का सबसे असरदार औजार- एक अच्छा सवाल

भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत हमेशा यह रही है कि उसने सवाल पूछने से कभी डरना नहीं सीखा। उपनिषदों में शिष्य गुरु से बेझिझक प्रश्न करता है। बुद्ध सदियों से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती देते हैं। चार्वाक ईश्वर और वेदों तक पर सवाल उठाते हैं। कबीर धर्म और समाज में फैले पाखंड पर खुलकर चोट करते हैं। भारतीय दर्शन की लगभग हर परंपरा का आधार संवाद, तर्क और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है। इंसान की सबसे बड़ी कुव्वत उसका दिमाग है और दिमाग का सबसे असरदार औजार है- एक अच्छा सवाल। इंसान और बाकी तमाम जीव-जंतुओं के बीच सबसे बड़ा फर्क सिर्फ यह नहीं है कि इंसान दो पैरों पर चलता है, औजार बनाता है या आसमान छूती इमारतें खड़ी कर लेता है। असली फर्क यह है कि इंसान सवाल पूछता है। वह सिर्फ यह नहीं देखता कि सूरज हर सुबह निकलता है; वह जानना चाहता है कि सूरज उगता हुआ दिखाई क्यों देता है। वह किसी बात को महज इसलिए सच नहीं मान लेता कि सब उसे सच मानते हैं; वह पूछता है आखिर यह सच क्यों है, और यही जिज्ञासा, यही सवाल करने की बेचैनी इंसान को इंसान बनाती है। किसी छोटे बच्चे को देखिए। दुनिया में आने के कुछ ही सालों में वह सवालों की चलती-फिरती मशीन बन जाता है। यह क्या है? वह कौन है? ऐसा क्यों है? वैसा क्यों नहीं है? अगर हम गौर से देखें, तो समझ आएगा कि जिज्ञासा इंसान की सबसे स्वाभाविक फितरत है। इतिहास गवाह है कि जिस समाज ने सवालों को दबाया, वह ठहर गया; और जिसने सवालों का इस्तकबाल किया, वह आगे बढ़ता गया। जरा सोचिए, विज्ञान की पूरी इमारत किस बुनियाद पर खड़ी है? किसी दिन न्यूटन के दिमाग में यह सवाल कौंधा कि पेड़ से गिरता हुआ सेब हमेशा नीचे ही क्यों आता है, ऊपर क्यों नहीं चला जाता। अगर कुछ सवाल कभी न पूछे गए होते तो शायद हम आज भी अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के जंगल में भटक रहे होते। विज्ञान जवाबों नहीं, सवालों से जन्म लेता है। सवाल सिर्फ विज्ञान के दायरे तक ही नहीं रहते हैं। अदब, फन और फलसफा भी सवालों की कोख से ही जन्म लेते हैं। एक शायर जब पूछता है कि इंसान दु:खी क्यों है, मोहब्बत क्या है, तन्हाई क्यों है, इंसाफ किसे कहते हैं, तब शायरी पैदा होती है। एक लेखक जब अपने समाज से सवाल करता है, एक फिल्मकार जब अपने दौर की उलझनों, नाइंसाफियों और विसंगतियों पर उंगली रखता है, तब मायने रखने वाला सिनेमा बनता है। कला का काम तैयार जवाब बांटना नहीं, ऐसे सवाल पैदा करना है जो हमें अपने बारे में कुछ नया सोचने पर मजबूर कर दें। मुझे तब फिक्र होती है, जब लोग किसी फिल्म, किताब या खयाल से असहमत होने के बजाय उसे चुप करा देना चाहते हैं। किसी सवाल को सिर्फ इसलिए दबा देना कि वह असुविधाजनक है, किसी आत्मविश्वास से भरे समाज की निशानी नहीं हो सकती। अगर कोई बच्चा पूछ ले कि यह नियम क्यों है, तो उसे चुप करा दिया जाता है। अगर कोई नौजवान जानना चाहे कि यह परंपरा किस बुनियाद पर बनी है, तो उससे कहा जाता है, बहुत सवाल मत करो। अगर कोई नागरिक सरकार से पूछ ले कि यह फैसला क्यों लिया गया, तो उसे विरोधी मान लिया जाता है। जबकि सच यह है कि सवाल पूछना विरोध नहीं, बल्कि समाज में अपनी हिस्सेदारी निभाने का तरीका है। जो शख्स सवाल पूछ रहा है, वह बता रहा है कि उसे समाज की फिक्र है। धर्म और आस्था के मामले में भी यही बात लागू होती है। आस्था का सम्मान करने का यह हरगिज मतलब नहीं कि इंसान अपनी सोचने-समझने की ताकत पर ताला लगा दे। पर सवाल पूछना और हर बात का विरोध करना एक ही चीज नहीं हैं। कुछ लोग समझते हैं हर बात में नुक्स निकालना ही अक्लमंदी की निशानी है। ऐसा नहीं है। सवाल पूछने का मकसद सच तक पहुंचना होना चाहिए। अगर आपका इरादा सामने वाले को नीचा दिखाना भर है, तो वह जिज्ञासा नहीं, अहंकार है, लेकिन अगर आपकी कोशिश समझने की है, सीखने की है, सच के थोड़ा और करीब जाने की है, तो आपका सवाल पूछना एक रचनात्मक सरोकार बन जाता है। बौद्धिक ईमानदारी की पहली शर्त यही है कि इंसान जो सवाल दूसरों से पूछता है, उसे अपने आप से भी पूछे। हम अक्सर दूसरों के खयालों को कसौटी पर कसते हैं, लेकिन अपने यकीनों की जांच नहीं करते। हमें खुद से भी यह पूछने का हौसला होना चाहिए कि मैं जो मानता हूं, उसे मानने की बुनियाद क्या है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कोई राय सिर्फ इसलिए अपना ली क्योंकि मेरे आसपास के ज्यादातर लोग उसे सही मानते हैं? अपने ही विश्वासों से सवाल करना आसान नहीं होता, लेकिन यही मानसिक परिपक्वता की सबसे बड़ी निशानी है। आज के दौर में, जब जानकारी पहले से कहीं ज्यादा और कहीं तेजी से हमारे सामने आती है, तब सवाल पूछने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इंटरनेट पर हर रोज लाखों दावे किए जाते हैं। हर विचार के हक में भी दलीलें मिल जाती हैं और उसके खिलाफ भी। ऐसे में आंख मूंदकर किसी बात को सच मान लेना खतरनाक हो सकता है। हमें पूछना होगा- इसका स्रोत क्या है? इसका सबूत क्या है? इसकी दलील क्या है? यही आलोचनात्मक सोच हमें भ्रम, अफवाह और प्रचार के जाल से बचाती है।सवाल पूछना सिर्फ हमारा अधिकार नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है। जो समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे सोचने की अपनी ताकत खो देता है, और जो इंसान सवाल पूछना छोड़ देता है, वह सीखना भी छोड़ देता है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए टेस्ट टीम का ऐलान करते हुए बड़ा फैसला लिया है। शान मसूद को टेस्ट कप्तानी से हटा दिया गया है। बाबर आजम को दूसरी बार टीम की कमान सौंपी गई है। पाकिस्तान इस महीने के अंत में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगा। शान मसूद को खराब प्रदर्शन के बाद हटाया गया है। पाकिस्तान लगातार अपने पिछले सात टेस्ट मैच भी हार चुका है, जो टीम के इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे लंबी हार की श्रृंखला है। करीब 3 साल पहले बाबर की जगह टेस्ट कप्तान बनाए गए शान मसूद ने 16 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिसमें से टीम को 12 हार का सामना करना पड़ा। टेस्ट इतिहास में कोई भी कप्तान अपने शुरुआती 16 टेस्ट में 12 मैच नहीं हारा था। PCB ने इस पोस्ट के जरिए टेस्ट टीम का ऐलान किया… आकिब जावेद ने बोले- कप्तान मैच खत्म नहीं करा पाए पाकिस्तान के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद ने कहा- ‘टीम बार-बार जीते हुए मैच गंवा रही है। शान मसूद की कप्तानी में लीडरशिप नजर नहीं आती है। जावेद ने कहा, ‘शान का व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन कप्तान के रूप में वे टीम को नतीजे नहीं दिला सके। कप्तान की जिम्मेदारी सिर्फ टॉस तक सीमित नहीं होती, बल्कि मैच को खत्म करना, डीआरएस लेना और टीम को सही दिशा देना भी उसकी जिम्मेदारी है।’ मसूद की कप्तानी गई, टीम में रहेंगे जावेद ने साफ किया है कि कप्तानी से हटाए जाने के बाद शान मसूद टेस्ट टीम का हिस्सा रहेंगे। जावेद ने कहा- कप्तान बदलने का फैसला शान मसूद के बल्लेबाजी प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। कप्तान बनने के बाद उनका बल्लेबाजी औसत पहले से बेहतर हुआ और उन्होंने इस दौरान दो शतक तथा सात अर्धशतक लगाए। बाबर आजम दूसरी बार कप्तान बने बाबर आजम दूसरी बार पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कप्तानी संभालेंगे। इससे पहले उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने 20 टेस्ट में 10 जीत दर्ज की थीं। उनकी कप्तानी में टीम ने दक्षिण अफ्रीका को घरेलू सीरीज में 2-0 से हराया था, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका में भी टेस्ट सीरीज जीती थी। हालांकि उनके कार्यकाल में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 3-0 की ऐतिहासिक हार भी मिली थी। ——————————————————-

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर आजम एक बार फिर पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बनाए गए हैं। उन्हें दूसरी बार टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई है। जबकि, शान मसूद को टीम के खराब प्रदर्शन के कारण कप्तानी से हटा दिया गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने रविवार को टेस्ट टीम का ऐलान किया। PCB के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद ने कहा- ‘टीम बार-बार जीते हुए मैच गंवा रही है। शान मसूद की कप्तानी में लीडरशिप नजर नहीं आती है। पाकिस्तानी टीम इस महीने के अंत में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। पहला मैच 25 से तारोबा में और दूसरा मैच 2 अगस्त से पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला जाएगा। इसके बाद पाकिस्तानी टीम इंग्लैंड दौरे पर जाएगी। PCB ने इस पोस्ट के जरिए टेस्ट टीम का ऐलान किया… मसूद की कप्तानी गई, टीम में रहेंगे कप्तानी से हटाने के बाद शान मसूद टेस्ट टीम का हिस्सा हैं। आकिब जावेद ने कहा, ‘शान का व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन कप्तान के रूप में वे टीम को नतीजे नहीं दिला सके। कप्तान की जिम्मेदारी सिर्फ टॉस तक सीमित नहीं होती, बल्कि मैच को खत्म करना, DRS लेना और टीम को सही दिशा देना भी उसकी जिम्मेदारी है।’ बता दें कि कप्तान बनने के बाद उनका बैटिंग औसत पहले से बेहतर हुआ। उन्होंने दो शतक तथा सात अर्धशतक लगाए। मसूद खराब प्रदर्शन के बाद हटाए गए शान मसूद की कप्तानी में पाकिस्तान लगातार अपने पिछले सात टेस्ट मैच भी हार चुका है। जो टीम के इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे लंबी हार की श्रृंखला है। करीब 3 साल पहले टेस्ट कप्तान बनाए गए शान मसूद ने 16 मैचों में कप्तानी की, जिसमें से टीम को 12 हार का सामना करना पड़ा। टेस्ट इतिहास में कोई भी कप्तान अपने शुरुआती 16 टेस्ट में 12 मैच नहीं हारा है। बाबर आजम दूसरी बार कप्तानी करेंगे बाबर आजम दूसरी बार पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कप्तानी संभालेंगे। इससे पहले उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने 20 टेस्ट में 10 जीत दर्ज की थीं। उनकी कप्तानी में टीम ने दक्षिण अफ्रीका को घरेलू सीरीज में 2-0 से हराया था, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका में भी टेस्ट सीरीज जीती थी। हालांकि उनके कार्यकाल में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 3-0 की ऐतिहासिक हार भी मिली थी। ——————————————————-