बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से साझा करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है।
बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें

ऑफिस या जिंदगी की परेशानियां किसी करीबी से शेयर करने पर मन हल्का होता है। लेकिन अगर हर बातचीत में सिर्फ अपनी शिकायतें और परेशानियां बताई जाएं, तो सामने वाला भी थकने लगता है। मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, अपनी बात कहने की एक सीमा होनी चाहिए। लगातार शिकायतें रिश्ते में कड़वाहट और दूरी ला सकती हैं। थेरेपिस्ट स्टेफनी महलेक के मुताबिक, अच्छी बातचीत दोनों तरफ से होती है। अगर आप लगातार बोलते रहें, सामने वाले के सवाल आपको दखल लगें और उसकी सलाह भी न सुनें, तो बातचीत एकतरफा हो जाती है। अपनी बात कहने के बाद रुकें और पूछें- “तुम इस बारे में क्या सोचते हो?” इससे सामने वाले को भी अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। 10 मिनट शिकायत के लिए काफी मनोवैज्ञानिक जेनी मार्टिन के मुताबिक, परेशानी बताने की बातचीत की शुरुआत और अंत होना चाहिए। इसके लिए करीब 10 मिनट की सीमा तय कर सकते हैं। समय पूरा होने के बाद विषय बदलें और सामने वाले की बातें भी सुनें। अगर वह बातचीत को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है और आप बार-बार नई शिकायत शुरू कर देते हैं, तो यह रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। बात के बाद तनाव बढ़े तो रुकें थेरेपिस्ट मैट कार्टराइट के मुताबिक, भड़ास निकालने का मकसद मन हल्का करना है। अगर बात करने के बाद गुस्सा और बेचैनी कम होने के बजाय बढ़ जाए, तो दोनों लोग मिलकर नकारात्मक सोच में फंस रहे हो सकते हैं। ऐसा लगे तो बातचीत रोकें, गहरी सांस लें और कुछ देर टहलने निकल जाएं। हर किसी से निजी बातें शेयर न करें रिश्ता जितना करीबी हो, निजी बातें भी उतनी ही साझा करें। किसी नए सहकर्मी या परिचित से बहुत निजी विवाद और गहरी शिकायतें साझा करना उसे असहज कर सकता है। बात शुरू करने से पहले सोचें कि सामने वाला आपके कितना करीब है और उस पर कितना भरोसा है। दोस्त दूरी बनाने लगे तो संकेत समझें अगर दोस्त अब गहरी बातें करने के बजाय सिर्फ काम या मौसम की बात करने लगे, अकेले मिलने के बजाय ग्रुप में मिलना पसंद करे या फोन टालने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह लगातार शिकायतों से बच रहा है। अगली बार मिलें तो बिना शिकायत के उसकी जिंदगी, खुशियों और हालचाल के बारे में पूछें। रिश्ते में सिर्फ अपनी परेशानी सुनाने के बजाय सामने वाले को सुनना भी उतना ही जरूरी है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक

अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। अमीर लोग अपने घर और जमीन को तुरंत भव्य दिखाने के लिए ओक, पाम और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। कैलिफोर्निया की नापा वैली में हाल ही में 50 फीट ऊंचे और करीब 100 टन वजनी 100 साल पुराने ओक के पेड़ को क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों से जमीन से निकाला गया। इसकी जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए और फिर इसे ट्रकों से दूसरी जगह ले जाया गया। बरगद के 2 पेड़ों के लिए 4.5 करोड़ रुपए पाम बीच में एक अरबपति ने अपने लॉन के लिए बरगद के दो पेड़ 4.5 करोड़ रुपए में खरीदे। वहीं, एक अफ्रीकी इमली का पेड़ भी करीब 4.5 करोड़ रुपए में बिका। अमीर लोग पौधों के बड़ा होने का सालों इंतजार नहीं करना चाहते। इसलिए वे पहले से बड़े पेड़ खरीदकर अपनी संपत्ति को तुरंत भव्य और पुराना लुक दे रहे हैं। पेड़ों को लेकर पड़ोसियों में भी होड़ यह क्रेज अब सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। रोड आइलैंड में ओरेकल के लैरी एलिसन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन की संपत्तियों के बीच लैंडस्केपिंग को लेकर होड़ की चर्चा है। श्वार्जमैन ने अपनी हवेली को पड़ोसियों की नजरों से छिपाने के लिए चारों ओर 18 फीट ऊंचे 100 से ज्यादा सजावटी पेड़ लगवाए। इन पर 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। पेड़ पहुंचाने के लिए हाईवे बंद कराने पड़ते हैं 50 फीट तक ऊंचे और 100 टन वजनी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं है। कई बार इन्हें ले जाने के लिए हाईवे बंद कराने और बिजली के तार हटाने पड़ते हैं। बड़े पेड़ों की बढ़ती मांग से इस कारोबार को भी बढ़ावा मिला है। कुछ नर्सरी मालिक तो अरबपति ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक बनवा रहे हैं, ताकि वे हेलिकॉप्टर से आकर अपनी पसंद के पेड़ चुन सकें।
अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक

अमेरिका में अरबपतियों के बीच अब 100 साल पुराने और पूरी तरह विकसित पेड़ लगवाने का क्रेज बढ़ रहा है। महंगी घड़ियां, प्राइवेट जेट और सुपरकार के बाद बड़े पेड़ नया स्टेटस सिंबल बन रहे हैं। अमीर लोग अपने घर और जमीन को तुरंत भव्य दिखाने के लिए ओक, पाम और बरगद जैसे बड़े पेड़ों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। कैलिफोर्निया की नापा वैली में हाल ही में 50 फीट ऊंचे और करीब 100 टन वजनी 100 साल पुराने ओक के पेड़ को क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों से जमीन से निकाला गया। इसकी जड़ों को सुरक्षित रखने के लिए खास इंतजाम किए गए और फिर इसे ट्रकों से दूसरी जगह ले जाया गया। बरगद के 2 पेड़ों के लिए 4.5 करोड़ रुपए पाम बीच में एक अरबपति ने अपने लॉन के लिए बरगद के दो पेड़ 4.5 करोड़ रुपए में खरीदे। वहीं, एक अफ्रीकी इमली का पेड़ भी करीब 4.5 करोड़ रुपए में बिका। अमीर लोग पौधों के बड़ा होने का सालों इंतजार नहीं करना चाहते। इसलिए वे पहले से बड़े पेड़ खरीदकर अपनी संपत्ति को तुरंत भव्य और पुराना लुक दे रहे हैं। पेड़ों को लेकर पड़ोसियों में भी होड़ यह क्रेज अब सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है। रोड आइलैंड में ओरेकल के लैरी एलिसन और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन की संपत्तियों के बीच लैंडस्केपिंग को लेकर होड़ की चर्चा है। श्वार्जमैन ने अपनी हवेली को पड़ोसियों की नजरों से छिपाने के लिए चारों ओर 18 फीट ऊंचे 100 से ज्यादा सजावटी पेड़ लगवाए। इन पर 9 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। पेड़ पहुंचाने के लिए हाईवे बंद कराने पड़ते हैं 50 फीट तक ऊंचे और 100 टन वजनी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान नहीं है। कई बार इन्हें ले जाने के लिए हाईवे बंद कराने और बिजली के तार हटाने पड़ते हैं। बड़े पेड़ों की बढ़ती मांग से इस कारोबार को भी बढ़ावा मिला है। कुछ नर्सरी मालिक तो अरबपति ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक बनवा रहे हैं, ताकि वे हेलिकॉप्टर से आकर अपनी पसंद के पेड़ चुन सकें। —————————— ये खबर भी पढ़ें… ओपनएआई का 100 साल पुरानी गणित पहेली सुलझाने का दावा:दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में से 1 हल किया; 88 घंटे में जवाब ढूंढा ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक ने गणित की दुनिया की सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक नेवियर–स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। इसे सुलझाने में सिर्फ 88 घंटे लगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा

अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। EB-5 वीजा के लिए आवेदन करने वालों में भारतीय चीन से आगे निकल गए हैं। पिछले तीन साल में 12,900 भारतीयों ने EB-5 के लिए आवेदन किया, जबकि चीन से 9,875 आवेदन आए। EB-5 अमेरिका का इन्वेस्टमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन प्रोग्राम है। इसके तहत अमेरिका में निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मिलता है। इसके लिए करीब 7.5 करोड़ रुपए का निवेश करना होता है। ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता है EB-5 EB-5 वीजा अमेरिका में निवेश करने पर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता खोलता है। H-1B वीजा को लेकर सख्ती बढ़ने के बीच कुछ भारतीयों की दिलचस्पी EB-5 में बढ़ी है। हालांकि, EB-5 मिलने से सीधे अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती। पहले ग्रीन कार्ड के लिए पात्रता हासिल करनी होती है। अमेरिका में रहने के लिए आवेदक को EB-5 के सभी नियम और इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। प्रोफेसर-स्कॉलर का EB-1 कोटा समय से पहले खत्म अमेरिका में EB-1 वीजा का कोटा इस साल तय समय से पहले ही पूरा हो गया। इस कैटेगरी में हर साल करीब 7 हजार वीजा उपलब्ध होते हैं। इस बार यह कोटा 1 सितंबर को ही खत्म हो गया, जबकि इसकी आखिरी तारीख 30 सितंबर थी। EB-1 में प्रोफेसर, वैज्ञानिक और रिसर्च स्कॉलर जैसे लोग आवेदन कर सकते हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए 165 आवेदन, 1 को ही जारी ट्रम्प ने 2025 में गोल्ड कार्ड स्कीम लेकर आए थे। इसे उन्होंने EB-5 के विकल्प के तौर पर पेश किया था। इसका मकसद अमीर विदेशी नागरिकों को निवेश के बदले अमेरिका में स्थायी निवास का रास्ता देना था। गोल्ड कार्ड को अब तक ज्यादा सफलता नहीं मिली है। अप्रैल 2026 में वित्त मंत्री लटनिक ने बताया था कि गोल्ड कार्ड में 338 लोगों ने रुचि दिखाई, 165 ने आवेदन फीस भरी और सिर्फ एक व्यक्ति को गोल्ड कार्ड मिला। यही वजह है कि EB-5 में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी है। ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अमेरिका में लगभग साढ़े 9 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होती है। ट्रम्प के गोल्ड कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी कानूनी मान्यता पर है। ट्रम्प ने इसे राष्ट्रपति के तौर पर मिली शक्ति का इस्तेमाल करके शुरू किया है। ऐसे में डर है कि जब ट्रम्प सत्ता से बाहर हो जाएंगे तो नए राष्ट्रपति इस गोल्ड कार्ड को खत्म कर सकते हैं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा: ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:अजय देवगन के सामने जयदीप अहलावत और प्रकाश राज, इस बार दिमागी खेल से आगे बढ़ी कहानी

अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ (दृश्यम 3) का ऑफिशियल ट्रेलर बुधवार को रिलीज हो गया है। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कहानी में 2 अक्टूबर की तारीख एक बार फिर अहम है। दृश्यम 3 को ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का आखिरी चैप्टर बताया गया है। इसमें विजय सालगांवकर एक बार फिर अपने परिवार के डार्क सीक्रेट को कानून से बचाने की कोशिश करते नजर आएंगे। ट्रेलर की अवधि 2 मिनट 52 सेकंड है। फिल्म में अजय देवगन विजय, तब्बू IG मीरा देशमुख और श्रिया सरन नंदिनी के किरदार में लौट रही हैं। इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जो विजय के खिलाफ जांच को और मजबूत करते हैं। विजय के सामने नई चुनौती ट्रेलर में दिखाया गया है कि मामला अब सिर्फ दिमागी खेल नहीं रहा, बल्कि विजय और पुलिस के बीच अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। अधिकारियों के पास ऐसा मजबूत सबूत होने का दावा है, जो विजय की बनाई हुई कहानी और उसके अलिबी को तोड़ सकता है। जयदीप अहलावत फिल्म में क्राइम ब्रांच के SP की भूमिका में हैं। वह विजय को कमतर आंकने के बजाय उसकी समझ और चालाकी को पहचानता है। इसी बदलाव के बीच विजय का सामना पहले से ज्यादा खतरनाक चुनौती से होता है। ट्रेलर में SP विजय के लिए कहता है, “अनपढ़ है, बेवकूफ नहीं।” वहीं एक अन्य डायलॉग में विजय को “गोवा का सबसे बड़ा हार्ड-वर्किंग क्रिमिनल” कहा गया है। कहानी में दिमागी खेल से आगे बढ़कर किस्मत की भूमिका भी सामने आती है। ट्रेलर में कहा गया है, “अब ये खेल दिमाग का नहीं नसीब का बन चुका है।” विजय का परिवार उसके फैसलों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विजय कहता है, “फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है।” ट्रेलर का अंत इस चुनौती के साथ होता है, “तुम सोच भी नहीं सकते कि वो साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है।” फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है और इसे स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। अजय देवगन ने फिल्म को लेकर कहा है, “जो कहानी 2 अक्टूबर से शुरू हुई थी… वो खत्म भी 2 अक्टूबर को होगी।”
‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:विजय के खिलाफ मिला ऐसा सबूत, जो सालों से बनाई कहानी को कर सकता है खत्म

अजय देवगन स्टारर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ (दृश्यम 3) का ऑफिशियल ट्रेलर बुधवार को रिलीज हो गया। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। कहानी में 2 अक्टूबर की तारीख एक बार फिर अहम है। दृश्यम 3 को ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का आखिरी चैप्टर बताया गया है। इसमें अजय देवगन का किरदार विजय सालगांवकर एक बार फिर अपने परिवार के डार्क सीक्रेट को कानून से बचाने की कोशिश करते नजर आएंगे। ट्रेलर 2 मिनट 52 सेकंड लंबा है। फिल्म में अजय देवगन विजय, तब्बू IG मीरा देशमुख और श्रिया सरन नंदिनी के किरदार में लौट रही हैं। इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जो विजय के खिलाफ जांच को और मजबूत करते हैं। विजय के सामने नई चुनौती ट्रेलर में दिखाया गया है कि मामला अब सिर्फ दिमागी खेल नहीं रहा, बल्कि विजय और पुलिस के बीच अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। ट्रेलर में अजय देवगन कहते हैं, “उनके बहुत ही मजबूत सबूत हैं। जयदीप अहलावत फिल्म में क्राइम ब्रांच के SP की भूमिका में हैं। वह विजय को कमतर आंकने के बजाय उसकी समझ और चालाकी को पहचानते हैं। इसी बदलाव के बीच विजय का सामना पहले से ज्यादा खतरनाक चुनौती से होता है। ट्रेलर में प्रकाश राज का किरदार विजय के लिए कहता है, “अनपढ़ है, बेवकूफ नहीं। इसे मैं हल्के में लेने की कोशिश नहीं करूंगा।” वहीं एक अन्य डायलॉग में विजय को “गोवा का सबसे बड़ा हार्ड-वर्किंग क्रिमिनल” कहा गया है। कहानी में दिमागी खेल से आगे बढ़कर किस्मत की भूमिका भी सामने आती है। ट्रेलर में कहा गया है, “अब ये खेल दिमाग का नहीं नसीब का बन चुका है।” विजय का परिवार उसके फैसलों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। विजय कहता है, “फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है।” ट्रेलर का अंत इस चुनौती के साथ होता है, “तुम सोच भी नहीं सकते कि वो साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है।” फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है और इसे स्टार स्टूडियोज और पैनोरमा स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया है।
जयपुर में बॉबी देओल का आलीशान 'आश्रम':वेबसीरीज के सीजन-4 की शूटिंग शुरू, लग्जरी होटल में सेट, दीवारों पर 'बाबा निराला' की PHOTOS

बॉबी देओल स्टारर चर्चित वेब सीरीज ‘आश्रम’ के चौथे सीजन की शूटिंग जयपुर में हो रही है। सीरीज का सेट जयपुर के कूकस में लग्जरी होटल शिव विलास में बनाया गया है। डायरेक्टर प्रकाश झा की इस सीरज में इन दिनों त्रिधा चौधरी और चंदन रॉय सान्याल सहित दूसरे कलाकारों के अहम सीन शूट किए जा रहे हैं। जल्द ही बॉबी देओल भी यूनिट को जॉइन करेंगे। सबसे पहले देखिए- लोकेशन की PHOTOS जयपुर के कलाकारों को भी मिला मौका ‘आश्रम 4’ की शूटिंग के लिए जयपुर और आसपास के बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकारों के ऑडिशन भी लिए गए। इनमें से कई कलाकारों को बाबा निराला के शिष्यों और अनुयायियों की भूमिका में शामिल किया गया है। स्थानीय कलाकारों के लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि सीरीज की कहानी में आश्रम के अनुयायियों और उसके आसपास के माहौल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक साथ नजर आएंगे बाबा निराला और भोपा स्वामी ‘आश्रम’ की कहानी में बाबा निराला के सबसे खास सहयोगी भोपा स्वामी का किरदार निभाने वाले चंदन रॉय सान्याल भी चौथे सीजन में नजर आएंगे। त्रिधा चौधरी भी बबीता की भूमिका में नजर आएंगी। दोनों आर्टिस्ट फिलहाल जयपुर में शूट कर रहे हैं। सीरीज में अदिति पोहनकर पम्मी, त्रिधा चौधरी बबीता, दर्शन कुमार उजागर सिंह, अनुप्रिया गोयनका डॉ. नताशा, सचिन श्रॉफ हुकुम सिंह, प्रीति सूद साध्वी माता की भूमिका में है। चौथे सीजन में कुछ नए कलाकारों की एंट्री भी हुई है। इनमें नीतू चंद्रा श्रीवास्तव, पंखुड़ी गिडवानी, अरमान पारिख, ध्रुव चौधरी और अक्षय ओबेरॉय के नाम शामिल हैं।
नेपाल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट:हिमालयी इलाकों में बर्फबारी की संभावना; बाढ़ से अब तक 1,377 की मौत, 5,326 लापता

नेपाल में बुधवार को भारी बारिश और आंधी का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी के पहाड़ी और तराई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं, हिमालयी इलाकों में बर्फबारी और बिजली गिरने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के हिमालयी इलाकों में बारिश या बर्फबारी के साथ गरज-चमक हो सकती है। लुंबिनी, कर्णाली के कुछ हिमालयी इलाकों में भी बर्फबारी का अनुमान है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़ में अब तक 1,377 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,326 लोग लापता हैं। बाढ़ में 6,827 लोग घायल हुए हैं और 7,570 घर टूटे या क्षतिग्रस्त हुए हैं। नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
पिथौरागढ़ में भारत के बनाए पुल पर नेपाल की आपत्ति:कहा- बोर्ड पर नाम बदलें, यह हमारा इलाका; पुल चालू होने से बचेगा 200km का सफर

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला के पास काली नदी पर बने भारत-नेपाल मोटर पुल के स्वागत बोर्ड को लेकर दोनों देशों की सीमा पर विवाद खड़ा हो गया है। पुल के नेपाल वाले हिस्से में लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाली पक्ष का कहना है कि नेपाल की जमीन पर लगे बोर्ड में भारतीय पता नहीं, बल्कि नेपाल के संबंधित क्षेत्र का नाम होना चाहिए। 32.98 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का पूरा खर्च भारत ने उठाया है, जबकि इसका दूसरा छोर नेपाल में है। आपत्ति के बाद भारत की तरफ से नाम ढक दिया गया है। पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए अब तक कोई मोटर पुल नहीं होने के कारण लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा और आवाजाही के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विवाद से जुड़ी दो तस्वीरें- 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. उद्घाटन से पहले बोर्ड पर विवाद- पिथौरागढ़ के धारचूला में छारछुम के पास काली नदी पर भारत और नेपाल को जोड़ने वाला मोटर पुल बनकर तैयार है। संचालन शुरू होने से पहले नेपाल की ओर लगाए गए स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेपाली हिस्से में लगे बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई है। 2. नेपाली हिस्से में भारतीय गांव का नाम लिखने पर आपत्ति- नेपाल की ओर लगे ‘वेलकम टू नेपाल’ बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा गया है। नेपाल के स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बोर्ड पर नेपाली क्षेत्र का नाम लिखने की मांग की है। नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगरपालिका-8, असिगड़ा, दार्चुला बताया गया है। मामले की जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय और जिला प्रशासन को भी दी गई है। 3. आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष ने सुधार का दिया आश्वासन- स्थानीय स्तर पर आपत्ति के बाद भारतीय पक्ष की ओर से बोर्ड में सुधार का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, नेपाल की ओर लगे बोर्ड में भारतीय गांव के नाम को ढक दिया गया है। वहां नेपाल के स्थानीय क्षेत्र का नाम दर्ज करते हुए नया बोर्ड लगाए जाने की तैयारी है। 4. 2022 में शिलान्यास, ₹32.98 करोड़ की लागत- मल्ला छारछुम में काली नदी पर बने इस करीब 110 मीटर लंबे मोटर पुल का शिलान्यास सितंबर 2022 में किया गया था। इसकी निर्माण लागत 32 करोड़ 98 लाख रुपए है। भारत सरकार के अनुसार, फरवरी 2022 में भारत और नेपाल के बीच महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल बनाने के लिए समझौता हुआ था। परियोजना का वित्तीय सहयोग भारत सरकार की अनुदान सहायता के तहत किया गया है। 5. 200 KM का चक्कर बचेगा, व्यापार को भी बढ़ावा- पिथौरागढ़ जिले में भारत-नेपाल के बीच मोटर पुल नहीं होने के कारण वाहनों से नेपाल जाने के लिए लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा। इससे यात्रा का समय और खर्च कम होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिथौरागढ़ की नेपाल से करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए जिले में 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी हैं। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… टनल के अंदर चार मंजिला बिल्डिंग, बिना ऑक्सीजन फंसे मजदूर:माउंट एवरेस्ट विजेता रेस्क्यू में जुटे; कहीं बिना सिर की बॉडी, कहीं सिर्फ पैर मिला ‘मैं टनल में रेस्क्यू के लिए घुसा, तो दलदल में धंसने लगा। जितना हिलता, उतना ही धंसता गया। फिर समझ आया कि यहां जमीन ही निगल रही है। मैं कमर तक धंसा था। निकलने में करीब 1 घंटे लग गए। रसुवा की इस टनल में जो देखा, ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।’ ये बता रहे माउंटेन गाइड विक्रम कर्के रसुवा की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा हैं। वे चिलिमे, त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3 A टनल के रेस्क्यू में शामिल हैं, जहां 100 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए नेपाल और भारतीय सेना समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमें जुटी हैं। टनल के अंदर का हाल बताते हुए विक्रम कहते हैं, ‘मशीनों के बिना यहां फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल है। विक्रम ने हमें रेस्क्यू की पूरी कहानी बताई…(पढ़ें पूरी खबर)







