Tuesday, 06 Oct 2026 | 10:12 PM

Trending :

EXCLUSIVE

FIFA वर्ल्ड कप के तीसरे दिन 5 मुकाबले:28 साल बाद ब्राजील-मोरक्को की भिड़ंत; तुर्की से कभी नहीं जीती ऑस्ट्रेलिया

FIFA वर्ल्ड कप के तीसरे दिन 5 मुकाबले:28 साल बाद ब्राजील-मोरक्को की भिड़ंत; तुर्की से कभी नहीं जीती ऑस्ट्रेलिया

FIFA वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे दिन शनिवार को 5 मुकाबले खेले जाएंगे। दिन का पहला मैच कतर और स्विट्जरलैंड के बीच खेला जाएगा। मैच सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे से शुरू होगा। दूसरा मुकाबला ब्राजील और मोरक्को के बीच सुबह 4:30 बजे से न्यू यॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। तीसरा मैच सुबह 6:30 बजे से हैती और स्कॉटलैंड के बीच मियामी स्टेडियम में होगा। चौथा मैच सुबह 9:30 बजे से ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के बीच सिएटल स्टेडियम में, जबकि 5वां मुकाबला जर्मनी और कुरासाओ के बीच ह्यूस्टन स्टेडियम में रात 10:30 बजे से खेला जाएगा। मैच-5: वर्ल्ड कप में पहली बार कतर और स्विट्जरलैंड की भिड़ंत ग्रुप-B में शामिल कतर और स्विट्जरलैंड के बीच अब तक सिर्फ 1 इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया है, जिसमें कतर ने 1-0 से जीत दर्ज की थी। हालांकि, FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमें पहली बार एक-दूसरे से भिड़ेंगी। कतर की टीम एशिया कप चैंपियन होने के हौसले के साथ उतरेगी और उसे अपने विंगर एडमिल्सन जूनियर से बेहतर खेल की उम्मीद होगी। वहीं, स्विट्जरलैंड की मजबूत यूरोपियन टीम अपने स्टार खिलाड़ी ग्रेनिट जाका के अनुभव के दम पर मैच जीतने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: कतर: अबुनाद, उई, मिगुएल, खुखी, अल-अमीन, अब्दुलसलाम, फाथी, लाये, अब्दुलरीसाग, अफीफ, जूनियर। स्विट्जरलैंड: कोबेल, विडमर, एलवेदी, अकांजी, रोड्रिगेज, एबिशर, जाका, फ्रायलर, एनडॉय, मनजांबी, अमदौनी। मैच-6: 1998 वर्ल्ड कप में ब्राजील ने मोरक्को को हराया था ग्रुप-C में शामिल पांच बार की चैंपियन ब्राजील और मोरक्को के बीच अब तक कुल 3 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से 2 मैच ब्राजील ने जीते हैं और एक में उसे हार मिली है। FIFA वर्ल्ड कप में दोनों टीमें 28 साल बाद आमने-सामने होंगी। इससे पहले दोनों की भिड़ंत साल 1998 के वर्ल्ड कप में हुई थी, जहां ब्राजील ने मोरक्को को 3-0 से मात दी थी। नेमार की गैरमौजूदगी में ब्राजील की नजरें विनिसियस जूनियर और राफिन्हा पर टिकी होंगी। दूसरी ओर, मोरक्को की टीम अपने स्टार खिलाड़ी अचरफ हकीमी और ब्राहिम डियाज के दम पर ब्राजील को कड़ी चुनौती देगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: ब्राजील: एलिसन, डैनिलो, मार्विनहोस, गैब्रियल, सैंड्रो, कैसीमिरो, गुइमारेस, राफिन्हा, पाकेता, विनीसियस जूनियर, कुन्हा। मोरक्को: बोनो, हकीमी, डियोप, रियाद, मजरौई, अमराबत, एल आयनाउई, औनाही, डियाज, सैबारी, एल खन्नौस। मैच-7: हैती और स्कॉटलैंड के बीच कड़ा मुकाबला ग्रुप-F में शामिल हैती और स्कॉटलैंड के बीच अब तक कुल 2 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से स्कॉटलैंड ने 1 मैच जीता है, जबकि 1 मुकाबला ड्रॉ रहा है। FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी, जहां हैती की टीम स्कॉटलैंड के खिलाफ अपनी पहली जीत की तलाश में उतरेगी। हैती: प्लेसाइड, आर्कस, अदे, डेलक्रोइक्स, एक्सपीरियंस, डीडसन, जीन जैक्स, बेलेगार्डे, प्रोविडेंस, इसिडोर, नाजोन। स्कॉटलैंड: गन, हिकी, हेनली, सुतार, रॉबर्टसन, डोक, मैकटॉमिने, फर्गुसन, मैकगिन, एडम्स, शेंकलैंड। मैच-8: ऑस्ट्रेलिया से नहीं हारी तुर्की ग्रुप-D में शामिल ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के बीच अब तक कुल 2 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में तुर्की का पलड़ा भारी है, जिसने दोनों ही मैचों में ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी है। FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमें पहली बार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान पर उतरेंगी। ऑस्ट्रेलिया: रयान, इटालियानो, सिर्काती, सुतार, हेरिंगटन, बोस, मेटकाफ, इरविन, ओ’नील, लेकी, टूरे। तुर्की: चाकिर, चेलिक, डेमिरल, बरदाकची, एल्माली, चालहानोग्लू, युकसेक, गुलर, कोकचू, यिलमाज, गुल। मैच-9: जर्मनी के खिलाफ ऐतिहासिक डेब्यू करेगी कुरासाओ की टीम ग्रुप-E में शामिल 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी और कैरेबियाई देश कुरासाओ के बीच यह पहला मुकाबला होगा। कुरासाओ इतिहास में पहली बार FIFA वर्ल्ड कप खेल रही है। जर्मनी को फ्लोरियन विर्ट्ज और जमाल मुसियाला जैसे युवा सितारों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जर्मनी: नोयर, किमिच, ताह, रुडिगर, रॉम, गोरेट्जका, पावलोविच, विर्ट्ज, मुसियाला, हावर्ट्ज, उंडाव। कुरासाओ: रूम, ब्रेनेट, गारी, ओबिस्पो, फ्लोरानस, एल. बकुना, जे. बकुना, गोरे, चोंग, कस्तानीर, मार्गरीथा। ——————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… टाइटल जीतने का सबसे बड़ा दावेदार स्पेन फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत हो चुकी है। दुनिया की 48 बेस्ट टीमें खिताब के लिए भिड़ रही हैं। ऑप्टा सुपरकंप्यूटर और EPSN ने एनालिसिस किया और कहा कि इस वर्ल्ड कप की सबसे बड़ा दावेदार स्पेन है। पढ़ें पूरी खबर

FIFA वर्ल्ड कप के तीसरे दिन 5 मुकाबले:28 साल बाद ब्राजील-मोरक्को की भिड़ंत; तुर्की से कभी नहीं जीती ऑस्ट्रेलिया

FIFA वर्ल्ड कप के तीसरे दिन 5 मुकाबले:28 साल बाद ब्राजील-मोरक्को की भिड़ंत; तुर्की से कभी नहीं जीती ऑस्ट्रेलिया

FIFA वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे दिन शनिवार को 5 मुकाबले खेले जाएंगे। दिन का पहला मैच कतर और स्विट्जरलैंड के बीच खेला जाएगा। मैच सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे से शुरू होगा। दूसरा मुकाबला ब्राजील और मोरक्को के बीच सुबह 4:30 बजे से न्यू यॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा। तीसरा मैच सुबह 6:30 बजे से हैती और स्कॉटलैंड के बीच मियामी स्टेडियम में होगा। चौथा मैच सुबह 9:30 बजे से ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के बीच सिएटल स्टेडियम में, जबकि 5वां मुकाबला जर्मनी और कुरासाओ के बीच ह्यूस्टन स्टेडियम में रात 10:30 बजे से खेला जाएगा। मैच-5: वर्ल्ड कप में पहली बार कतर और स्विट्जरलैंड की भिड़ंत ग्रुप-B में शामिल कतर और स्विट्जरलैंड के बीच अब तक सिर्फ 1 इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया है, जिसमें कतर ने 1-0 से जीत दर्ज की थी। हालांकि, FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमें पहली बार एक-दूसरे से भिड़ेंगी। कतर की टीम एशिया कप चैंपियन होने के हौसले के साथ उतरेगी और उसे अपने विंगर एडमिल्सन जूनियर से बेहतर खेल की उम्मीद होगी। वहीं, स्विट्जरलैंड की मजबूत यूरोपियन टीम अपने स्टार खिलाड़ी ग्रेनिट जाका के अनुभव के दम पर मैच जीतने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: कतर: अबुनाद, उई, मिगुएल, खुखी, अल-अमीन, अब्दुलसलाम, फाथी, लाये, अब्दुलरीसाग, अफीफ, जूनियर। स्विट्जरलैंड: कोबेल, विडमर, एलवेदी, अकांजी, रोड्रिगेज, एबिशर, जाका, फ्रायलर, एनडॉय, मनजांबी, अमदौनी। मैच-6: 1998 वर्ल्ड कप में ब्राजील ने मोरक्को को हराया था ग्रुप-C में शामिल पांच बार की चैंपियन ब्राजील और मोरक्को के बीच अब तक कुल 3 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से 2 मैच ब्राजील ने जीते हैं और एक में उसे हार मिली है। FIFA वर्ल्ड कप में दोनों टीमें 28 साल बाद आमने-सामने होंगी। इससे पहले दोनों की भिड़ंत साल 1998 के वर्ल्ड कप में हुई थी, जहां ब्राजील ने मोरक्को को 3-0 से मात दी थी। नेमार की गैरमौजूदगी में ब्राजील की नजरें विनिसियस जूनियर और राफिन्हा पर टिकी होंगी। दूसरी ओर, मोरक्को की टीम अपने स्टार खिलाड़ी अचरफ हकीमी और ब्राहिम डियाज के दम पर ब्राजील को कड़ी चुनौती देगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: ब्राजील: एलिसन, डैनिलो, मार्विनहोस, गैब्रियल, सैंड्रो, कैसीमिरो, गुइमारेस, राफिन्हा, पाकेता, विनीसियस जूनियर, कुन्हा। मोरक्को: बोनो, हकीमी, डियोप, रियाद, मजरौई, अमराबत, एल आयनाउई, औनाही, डियाज, सैबारी, एल खन्नौस। मैच-7: हैती और स्कॉटलैंड के बीच कड़ा मुकाबला ग्रुप-F में शामिल हैती और स्कॉटलैंड के बीच अब तक कुल 2 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। इनमें से स्कॉटलैंड ने 1 मैच जीता है, जबकि 1 मुकाबला ड्रॉ रहा है। FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी, जहां हैती की टीम स्कॉटलैंड के खिलाफ अपनी पहली जीत की तलाश में उतरेगी। हैती: प्लेसाइड, आर्कस, अदे, डेलक्रोइक्स, एक्सपीरियंस, डीडसन, जीन जैक्स, बेलेगार्डे, प्रोविडेंस, इसिडोर, नाजोन। स्कॉटलैंड: गन, हिकी, हेनली, सुतार, रॉबर्टसन, डोक, मैकटॉमिने, फर्गुसन, मैकगिन, एडम्स, शेंकलैंड। मैच-8: ऑस्ट्रेलिया से नहीं हारी तुर्की ग्रुप-D में शामिल ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के बीच अब तक कुल 2 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में तुर्की का पलड़ा भारी है, जिसने दोनों ही मैचों में ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी है। FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में दोनों टीमें पहली बार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान पर उतरेंगी। ऑस्ट्रेलिया: रयान, इटालियानो, सिर्काती, सुतार, हेरिंगटन, बोस, मेटकाफ, इरविन, ओ’नील, लेकी, टूरे। तुर्की: चाकिर, चेलिक, डेमिरल, बरदाकची, एल्माली, चालहानोग्लू, युकसेक, गुलर, कोकचू, यिलमाज, गुल। मैच-9: जर्मनी के खिलाफ ऐतिहासिक डेब्यू करेगी कुरासाओ की टीम ग्रुप-E में शामिल 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी और कैरेबियाई देश कुरासाओ के बीच यह पहला मुकाबला होगा। कुरासाओ इतिहास में पहली बार FIFA वर्ल्ड कप खेल रही है। जर्मनी को फ्लोरियन विर्ट्ज और जमाल मुसियाला जैसे युवा सितारों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जर्मनी: नोयर, किमिच, ताह, रुडिगर, रॉम, गोरेट्जका, पावलोविच, विर्ट्ज, मुसियाला, हावर्ट्ज, उंडाव। कुरासाओ: रूम, ब्रेनेट, गारी, ओबिस्पो, फ्लोरानस, एल. बकुना, जे. बकुना, गोरे, चोंग, कस्तानीर, मार्गरीथा। ——————————————– फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… टाइटल जीतने का सबसे बड़ा दावेदार स्पेन फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत हो चुकी है। दुनिया की 48 बेस्ट टीमें खिताब के लिए भिड़ रही हैं। ऑप्टा सुपरकंप्यूटर और EPSN ने एनालिसिस किया और कहा कि इस वर्ल्ड कप की सबसे बड़ा दावेदार स्पेन है। पढ़ें पूरी खबर

हरियाणवी सॉन्ग 'कॉलेज वाली छोरी' पर विवाद:कंडक्टर बोले- लड़कियों के लिए गलत शब्द कहे; एक्टर ने कहा- फेमस हुआ, इसलिए कॉन्ट्रोवर्सी कर रहे

हरियाणवी सॉन्ग 'कॉलेज वाली छोरी' पर विवाद:कंडक्टर बोले- लड़कियों के लिए गलत शब्द कहे; एक्टर ने कहा- फेमस हुआ, इसलिए कॉन्ट्रोवर्सी कर रहे

हरियाणवी सॉन्ग “कॉलेज वाली छोरी” को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हरियाणा रोडवेज के हिसार डिपो के कंडक्टरों ने सॉन्ग पर आपत्ति जताते हुए सिटी थाना हिसार में लिखित शिकायत दी है। शिकायत की एक कॉपी हरियाणा राज्य महिला आयोग को भी भेजी गई है। कंडक्टरों का आरोप है कि सॉन्ग में उनकी नौकरी और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को लेकर आपत्तिजनक व भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे उनकी सामाजिक छवि प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यह गाना समाज में गलत संदेश दे रहा है। इस सॉन्ग को सोमबीर खटक ने गाया है, जबकि इसमें नवीन नारू और सोनिका सिंह ने एक्टिंग की है। गाना नवीन नारू के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है, जिसे अब तक एक लाख से अधिक बार देखा और सुना जा चुका है। विवाद बढ़ने के बाद नवीन नारू ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, “यह केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया हरियाणवी सॉन्ग है। किसी वर्ग, पेशे या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा कोई इरादा नहीं था। सॉन्ग फेमस हो गया है, इसलिए कुछ लोग इसे लेकर विवाद खड़ा कर रहे हैं।” पहले जानिए कंडक्टरों ने शिकायत में क्या कहा… कंडक्टरों की सामाजिक छवि खराब हुई हरियाणा रोडवेज हिसार डिपो के कंडक्टरों ने अपनी शिकायत में कहा है कि यूट्यूब पर रिलीज हुए हरियाणवी सॉन्ग “कॉलेज वाली छोरी” में कंडक्टर के पद को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उनकी बहन-बेटियां भी कॉलेजों में पढ़ती हैं और सॉन्ग में छात्राओं के बारे में भी गलत तरीके से पेश किया। उनकी सामाजिक छवि प्रभावित हुई है। सॉन्ग बनाने वालों पर कार्रवाई की जाए कंडक्टरों का आरोप है कि इस सॉन्ग से समाज में रोडवेज कर्मचारियों और कॉलेज छात्राओं को लेकर गलत संदेश जा रहा है। इससे इस गाने को यूट्यूब से हटाने तथा इसके लेखक, निर्देशक और सिंगर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि ऐसे गानों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आम लोगों के मन में रोडवेज कर्मचारियों के प्रति गलत धारणा बन सकती है। इसलिए प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर उनकी साफ-सुथरी छवि की रक्षा करनी चाहिए। अध्यक्ष बोले- सॉन्ग में भिवानी डिपो की बस दिखाई सांझा संघर्ष समिति हिसार के बैनर तले विभिन्न यूनियनों के आठ पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से यह शिकायत दी है। समिति के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने बताया कि सॉन्ग में भिवानी डिपो की बस दिखाई गई है। इस संबंध में भिवानी डिपो के जनरल मैनेजर (GM) से भी संपर्क किया जाएगा। कंडक्टरों की छवि को लेकर अलग-अलग जिलों में भी शिकायतें दी जा रही हैं। ——————————————-इन लिरिक्स पर हो रहा विवाद स्लाइड—————————- सॉन्ग में एक्टिव करने वाले नवीन नारू ने क्या कहा, जानिए सॉन्ग केवल मनोरंजन के लिए बनाया सॉन्ग में एक्टिंग करने वाले नवीन नारू ने कहा- पारिवारिक परिस्थितियों के चलते मैं कुछ सालों से इंडस्ट्री से दूर था। अब दोबारा वापसी के बाद मेरा यह सॉन्ग काफी फेमस हुआ और लोग इस पर बड़ी संख्या में रील बना रहे हैं। कुछ लोगों को सॉन्ग की लोकप्रियता रास नहीं आ रही और वे रोडवेज कर्मचारियों के माध्यम से इसे विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। सॉन्ग की शूटिंग हिसार में हुई थी। सोनिका सिंह ने कॉलेज छात्रा की भूमिका निभाई है। पूछा- एक कंडक्टर क्या प्यार नहीं कर सकता नारू ने कहा- हरियाणा में किसी लड़की से प्रेम होने को आम बोलचाल में “सेट होना” कहा जाता है। यदि यही सॉन्ग उत्तर प्रदेश की बोली में बनाया जाता तो उसे “कॉलेज वाली छोरी ने प्यार हो गया कंडक्टर तै” के रूप में गाया जाता। यह पूरी तरह मनोरंजन के लिए बनाया गया गाना है और इसमें किसी वर्ग को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं किया गया। क्या एक कंडक्टर प्यार नहीं कर सकता? इससे पहले भी कई सॉन्ग आए हैं, जिनमें “भाभी तू पटोला” और “बन जा तू मेरी सॉलिड बॉडी” जैसे बोल रहे हैं। बॉलीवुड में भी “चोली के पीछे क्या है” जैसे सॉन्ग आए, लेकिन क्या उनसे कभी माहौल खराब हुआ? विरोध करने वालों को कॉलेजों का माहौल दिखाना चाहिए नवीन नारू ने कहा- जो लोग यह कह रहे हैं कि इस सॉन्ग से माहौल खराब हो रहा है, उन्हें पहले कॉलेजों का वास्तविक माहौल भी देखना चाहिए। कॉलेजों में क्या स्थिति है, यह किसी से छिपी नहीं है। हरियाणवी इंडस्ट्री के कुछ लोग जानबूझकर इस सॉन्ग का विरोध करवा रहे हैं। कुछ कंडक्टरों के साथ इंडस्ट्री के लोगों की अच्छी पहचान है। कोई धरने पर नहीं बैठा। कुछ लोग अपने निजी कार्यों के लिए बैठे हुए थे और वहीं से विरोध की बात सामने आई। नवीन नारू ने कहा कि हमारे परिवार में भी तीन से चार लोग कंडक्टर हैं। उन्होंने इस सॉन्ग की सराहना की है। यदि किसी को सॉन्ग के किसी हिस्से पर आपत्ति है तो वह स्पष्ट रूप से बताए कि उसमें आपत्तिजनक क्या है। ——————–कौन हैं नवीन नारू स्लाइड————————————

लॉकअप तक क्यों पहुंचा नेटफ्लिक्स?:भारत के सबसे बड़े OTT की सबसे बड़ी बेचैनी, दबाव और बदलते बाजार की कहानी

लॉकअप तक क्यों पहुंचा नेटफ्लिक्स?:भारत के सबसे बड़े OTT की सबसे बड़ी बेचैनी, दबाव और बदलते बाजार की कहानी

भारत में नेटफ्लिक्स के पास बड़े सितारे, बड़े बजट और वैश्विक पहचान है। फिर भी वह अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार और दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना पाया। सवाल सिर्फ फ्लॉप शो का नहीं, दर्शकों से जुड़ाव का भी है। जहां दूसरे प्लेटफॉर्म ऐसे किरदार और कहानियां बनाने में सफल रहे जो लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए, वहीं नेटफ्लिक्स के कई चर्चित प्रोजेक्ट रिलीज के कुछ समय बाद भुला दिए गए। अब सवाल यह है कि भारतीय बाजार में नेटफ्लिक्स कहां चूक गया और ‘लॉकअप’ उसके लिए कितना बड़ा इम्तिहान साबित होगा। इसे समझने के लिए हमने डायरेक्टर विवेक शर्मा, लेखक धीरज मिश्रा और ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन से बातचीत की । नेटफ्लिक्स की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ फ्लॉप शो नहीं, भारतीय दर्शकों से दूरी भी है भारत में नेटफ्लिक्स की आलोचना अक्सर इस बात पर होती है कि उसके कई बड़े प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। लेकिन समस्या सिर्फ फ्लॉप शो या कमजोर व्यूअरशिप की नहीं है। सवाल यह है कि क्या नेटफ्लिक्स भारतीय दर्शकों के साथ वैसा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव बना पाया है, जैसा उसके प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म बना चुके हैं। आज भारतीय मनोरंजन बाजार में सफलता सिर्फ व्यूअरशिप से तय नहीं होती। सफलता तब मानी जाती है जब किरदार लोगों की बातचीत का हिस्सा बन जाएं, संवाद सोशल मीडिया से निकलकर आम बोलचाल तक पहुंच जाएं और दर्शक अगले सीजन का इंतजार करें। यहीं नेटफ्लिक्स संघर्ष करता दिखाई देता है। फिल्म निर्देशक विवेक शर्मा का कहना है कि शुरुआत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से उम्मीद थी कि वे नए फिल्ममेकरों, नई कहानियों और अलग कंटेंट के लिए मंच बनेंगे। लेकिन समय के साथ कई प्लेटफॉर्म उसी व्यवस्था का हिस्सा बन गए, जिससे बदलाव की उम्मीद थी। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स ने बड़े सितारों और बड़े बैनरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया, जबकि नए विचारों और प्रतिभाओं को अपेक्षित जगह नहीं मिली। अमेजन ने किरदार बनाए, नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट अगर भारतीय ओटीटी बाजार का सबसे बड़ा विजेता चुना जाए तो अमेजन प्राइम वीडियो आगे दिखाई देता है। वजह सिर्फ अच्छी सीरीज नहीं, बल्कि मजबूत फ्रेंचाइजी का निर्माण है। कालीन भैया, गुड्डू पंडित, श्रीकांत तिवारी, हाथीराम चौधरी और सचिव जी अब सिर्फ किरदार नहीं रहे, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। ऑरमैक्स मीडिया के अनुसार शाहिद कपूर और विजय सेतुपति की ‘फर्जी’ 3.71 करोड़ दर्शकों के साथ भारत की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली एसवीओडी सीरीज बनी थी। वहीं ‘मिर्जापुर’ और ‘पंचायत’ आज भी दर्शकों की बातचीत का हिस्सा हैं। ‘मिर्जापुर’ सिर्फ एक सीरीज नहीं है। उस पर फिल्म भी बन रही है। उसके किरदारों की अलग पहचान है और उसकी दुनिया दर्शकों के दिमाग में आज भी जीवित है। विवेक शर्मा कहते हैं कि बड़े कलाकार किसी भी प्रोजेक्ट को शुरुआती चर्चा दिला सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक वही कंटेंट टिकता है जिसमें नई सोच, मजबूत कहानी और याद रह जाने वाले किरदार हों। उनके मुताबिक दर्शक अब सिर्फ स्टार्स नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट चाहते हैं जो उन्हें नया अनुभव दे सके। यही वह क्षेत्र है जहां अमेजन प्राइम और दूसरे प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स से आगे दिखाई देते हैं। बड़े सितारों पर दांव, लेकिन याद क्या रह गया? नेटफ्लिक्स ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग हर बड़े कलाकार के साथ काम किया। सैफ अली खान, जयदीप अहलावत, माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, करीना कपूर खान, राजकुमार राव, विजय वर्मा और बॉबी देओल जैसे नाम उसकी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन बड़े नामों के बावजूद कितने प्रोजेक्ट लंबे समय तक दर्शकों के बीच टिक पाए। सैफ अली खान के हालिया प्रोजेक्ट ‘कर्तव्य’ और ‘ज्वेल थीफ’ को रिलीज से पहले काफी चर्चा मिली। ट्रेलर लॉन्च हुए, इंटरव्यू हुए और सोशल मीडिया अभियान भी चले। लेकिन रिलीज के बाद वे वैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना सके, जैसी उनके स्तर के प्रोजेक्ट से उम्मीद थी। इसी तरह माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की ‘मां-बहन’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई, लेकिन वह कुछ हफ्तों में ठंडी पड़ गई। विवेक शर्मा का कहना है कि समस्या कलाकारों में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो बार-बार सुरक्षित विकल्प चुनती है। उनके मुताबिक हाल के वर्षों में बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़े कलाकारों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उन्हें जिस तरह प्रस्तुत किया गया उसमें नवीनता और रचनात्मक गहराई की कमी दिखी। कंटेंट का संकट या विजन का संकट? नेटफ्लिक्स की चुनौतियों को सिर्फ कमजोर प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं देखा जा सकता। सवाल यह भी है कि क्या प्लेटफॉर्म के पास भारतीय बाजार के लिए स्पष्ट कंटेंट विजन है। विवेक शर्मा का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या यही है। उनके मुताबिक कई बार फैसले रचनात्मकता के बजाय रिश्तों, लॉबी और स्थापित समूहों के प्रभाव में लिए जाते हैं। एक ही बैनर या प्रोडक्शन हाउस को बार-बार बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं, जबकि नए लोगों और नए विचारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। विवेक शर्मा कहते हैं कि कई ऐसे लोग कंटेंट से जुड़े फैसले ले रहे हैं जिन्होंने खुद रचनात्मक स्तर पर बड़ी सफलता हासिल नहीं की। ऐसे माहौल में नए विचारों और ताजा कंटेंट का आना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स को गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है। उसे तय करना होगा कि वह सिर्फ बड़े नामों का प्लेटफॉर्म बनना चाहता है या नई प्रतिभाओं और नई कहानियों का मंच भी। भारत बदल गया, क्या नेटफ्लिक्स भी बदला? ऑरमैक्स की 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में ओटीटी दर्शकों की संख्या 60 करोड़ से ज्यादा पहुंच चुकी है। अब यह बाजार सिर्फ महानगरों और अंग्रेजी भाषी दर्शकों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहर, कस्बे, परिवार और क्षेत्रीय दर्शक इसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। लेखक धीरज मिश्रा का मानना है कि नेटफ्लिक्स आम भारतीय दर्शकों की नब्ज पकड़ने में देर कर गया। उनके मुताबिक शुरुआती दौर में प्लेटफॉर्म के शो तकनीकी रूप से मजबूत थे और महानगरों के दर्शकों को पसंद आए, लेकिन बड़े दर्शक वर्ग से उनका जुड़ाव सीमित रहा। धीरज मिश्रा कहते हैं कि इसी दौरान दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसे शो और फिल्में लेकर आए जिनकी कहानियां और किरदार आम भारतीय दर्शकों के ज्यादा करीब थे। इसी वजह से उन्होंने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

भारत के खिलाफ पहली बार वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान:कोहली-हार्दिक के बिना उतरेगी इंडिया, धर्मशाला में आज बारिश के 55% चांस

भारत के खिलाफ पहली बार वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान:कोहली-हार्दिक के बिना उतरेगी इंडिया, धर्मशाला में आज बारिश के 55% चांस

भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला आज खेला जाएगा। मैच धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा। भारत और अफगानिस्तान के बीच पहली बार वनडे सीरीज खेली जाएगा। इससे पहले दोनों टीमें वर्ल्ड कप और एशिया कप में आमने-सामने हुई थीं। विराट कोहली और हार्दिक पंड्या चोट के कारण बाहर हो गए हैं। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज को आराम दिया गया है। ऐसे में प्रिंस यादव और गुरनूर बरार में से एक को डेब्यू का मौका मिल सकता है। धर्मशाला में मौसम मैच पर असर डाल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को बारिश की संभावना 55% है। भारत-अफगानिस्तान में 4 वनडे, इंडिया 3 जीती भारत और अफगानिस्तान के बीच 4 वनडे मैच खेले गए हैं। भारत ने तीन मैच जीते हैं, जबकि एक मुकाबला टाई रहा है। अफगानिस्तान अभी तक भारत के खिलाफ वनडे में जीत दर्ज नहीं कर सका है। दोनों टीमों की पिछली भिड़ंत 2023 वनडे वर्ल्ड कप में दिल्ली में हुई थी, जहां भारत ने 8 विकेट से एकतरफा जीत दर्ज की थी। भारत की नजर शुभमन-रोहित पर अफगानिस्तान की ताकत जादरान-राशिद HPCA में बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों को मदद धर्मशाला का HPCA स्टेडियम समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है। यहां गेंद तेजी से बल्ले पर आती है और आउटफील्ड भी तेज रहती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और अतिरिक्त उछाल मिलती है, जबकि बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। इस मैदान पर अब तक 9 वनडे खेले गए हैं, जिनमें 5 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती है। यहां पहली पारी का औसत स्कोर करीब 253 रन है। 2023 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 388 रन बनाकर यहां का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था। श्रेयस 3 हजार वनडे रन से 23 रन दूर पॉसिबल प्लेइंग-11 भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव/गुरनूर बरार। अफगानिस्तान: इब्राहिम जादरान, रहमानुल्लाह गुरबाज, सेदिकुल्लाह अटल, रहमत शाह, हश्मतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), अजमतुल्लाह उमरजई, मोहम्मद नबी/इकराम अलिखिल , राशिद खान, मोहम्मद सलीम, अल्लाह गजनफर, जिया-उर-रहमान।

लॉकअप तक क्यों पहुंचा नेटफ्लिक्स?:भारत के सबसे बड़े OTT की सबसे बड़ी बेचैनी, दबाव और बदलते बाजार की कहानी

लॉकअप तक क्यों पहुंचा नेटफ्लिक्स?:भारत के सबसे बड़े OTT की सबसे बड़ी बेचैनी, दबाव और बदलते बाजार की कहानी

भारत में नेटफ्लिक्स के पास बड़े सितारे, बड़े बजट और वैश्विक पहचान है। फिर भी वह अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार और दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना पाया। सवाल सिर्फ फ्लॉप शो का नहीं, दर्शकों से जुड़ाव का भी है। जहां दूसरे प्लेटफॉर्म ऐसे किरदार और कहानियां बनाने में सफल रहे जो लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए, वहीं नेटफ्लिक्स के कई चर्चित प्रोजेक्ट रिलीज के कुछ समय बाद भुला दिए गए। अब सवाल यह है कि भारतीय बाजार में नेटफ्लिक्स कहां चूक गया और ‘लॉकअप’ उसके लिए कितना बड़ा इम्तिहान साबित होगा। इसे समझने के लिए हमने डायरेक्टर विवेक शर्मा, लेखक धीरज मिश्रा और ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन से बातचीत की । नेटफ्लिक्स की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ फ्लॉप शो नहीं, भारतीय दर्शकों से दूरी भी है भारत में नेटफ्लिक्स की आलोचना अक्सर इस बात पर होती है कि उसके कई बड़े प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। लेकिन समस्या सिर्फ फ्लॉप शो या कमजोर व्यूअरशिप की नहीं है। सवाल यह है कि क्या नेटफ्लिक्स भारतीय दर्शकों के साथ वैसा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव बना पाया है, जैसा उसके प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म बना चुके हैं। आज भारतीय मनोरंजन बाजार में सफलता सिर्फ व्यूअरशिप से तय नहीं होती। सफलता तब मानी जाती है जब किरदार लोगों की बातचीत का हिस्सा बन जाएं, संवाद सोशल मीडिया से निकलकर आम बोलचाल तक पहुंच जाएं और दर्शक अगले सीजन का इंतजार करें। यहीं नेटफ्लिक्स संघर्ष करता दिखाई देता है। फिल्म निर्देशक विवेक शर्मा का कहना है कि शुरुआत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से उम्मीद थी कि वे नए फिल्ममेकरों, नई कहानियों और अलग कंटेंट के लिए मंच बनेंगे। लेकिन समय के साथ कई प्लेटफॉर्म उसी व्यवस्था का हिस्सा बन गए, जिससे बदलाव की उम्मीद थी। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स ने बड़े सितारों और बड़े बैनरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया, जबकि नए विचारों और प्रतिभाओं को अपेक्षित जगह नहीं मिली। अमेजन ने किरदार बनाए, नेटफ्लिक्स ने प्रोजेक्ट अगर भारतीय ओटीटी बाजार का सबसे बड़ा विजेता चुना जाए तो अमेजन प्राइम वीडियो आगे दिखाई देता है। वजह सिर्फ अच्छी सीरीज नहीं, बल्कि मजबूत फ्रेंचाइजी का निर्माण है। कालीन भैया, गुड्डू पंडित, श्रीकांत तिवारी, हाथीराम चौधरी और सचिव जी अब सिर्फ किरदार नहीं रहे, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। ऑरमैक्स मीडिया के अनुसार शाहिद कपूर और विजय सेतुपति की ‘फर्जी’ 3.71 करोड़ दर्शकों के साथ भारत की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली एसवीओडी सीरीज बनी थी। वहीं ‘मिर्जापुर’ और ‘पंचायत’ आज भी दर्शकों की बातचीत का हिस्सा हैं। ‘मिर्जापुर’ सिर्फ एक सीरीज नहीं है। उस पर फिल्म भी बन रही है। उसके किरदारों की अलग पहचान है और उसकी दुनिया दर्शकों के दिमाग में आज भी जीवित है। विवेक शर्मा कहते हैं कि बड़े कलाकार किसी भी प्रोजेक्ट को शुरुआती चर्चा दिला सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक वही कंटेंट टिकता है जिसमें नई सोच, मजबूत कहानी और याद रह जाने वाले किरदार हों। उनके मुताबिक दर्शक अब सिर्फ स्टार्स नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट चाहते हैं जो उन्हें नया अनुभव दे सके। यही वह क्षेत्र है जहां अमेजन प्राइम और दूसरे प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स से आगे दिखाई देते हैं। बड़े सितारों पर दांव, लेकिन याद क्या रह गया? नेटफ्लिक्स ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग हर बड़े कलाकार के साथ काम किया। सैफ अली खान, जयदीप अहलावत, माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, करीना कपूर खान, राजकुमार राव, विजय वर्मा और बॉबी देओल जैसे नाम उसकी रणनीति का हिस्सा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन बड़े नामों के बावजूद कितने प्रोजेक्ट लंबे समय तक दर्शकों के बीच टिक पाए। सैफ अली खान के हालिया प्रोजेक्ट ‘कर्तव्य’ और ‘ज्वेल थीफ’ को रिलीज से पहले काफी चर्चा मिली। ट्रेलर लॉन्च हुए, इंटरव्यू हुए और सोशल मीडिया अभियान भी चले। लेकिन रिलीज के बाद वे वैसा सांस्कृतिक प्रभाव नहीं बना सके, जैसी उनके स्तर के प्रोजेक्ट से उम्मीद थी। इसी तरह माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की ‘मां-बहन’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई, लेकिन वह कुछ हफ्तों में ठंडी पड़ गई। विवेक शर्मा का कहना है कि समस्या कलाकारों में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो बार-बार सुरक्षित विकल्प चुनती है। उनके मुताबिक हाल के वर्षों में बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़े कलाकारों का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उन्हें जिस तरह प्रस्तुत किया गया उसमें नवीनता और रचनात्मक गहराई की कमी दिखी। कंटेंट का संकट या विजन का संकट? नेटफ्लिक्स की चुनौतियों को सिर्फ कमजोर प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं देखा जा सकता। सवाल यह भी है कि क्या प्लेटफॉर्म के पास भारतीय बाजार के लिए स्पष्ट कंटेंट विजन है। विवेक शर्मा का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या यही है। उनके मुताबिक कई बार फैसले रचनात्मकता के बजाय रिश्तों, लॉबी और स्थापित समूहों के प्रभाव में लिए जाते हैं। एक ही बैनर या प्रोडक्शन हाउस को बार-बार बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं, जबकि नए लोगों और नए विचारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। विवेक शर्मा कहते हैं कि कई ऐसे लोग कंटेंट से जुड़े फैसले ले रहे हैं जिन्होंने खुद रचनात्मक स्तर पर बड़ी सफलता हासिल नहीं की। ऐसे माहौल में नए विचारों और ताजा कंटेंट का आना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक नेटफ्लिक्स को गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है। उसे तय करना होगा कि वह सिर्फ बड़े नामों का प्लेटफॉर्म बनना चाहता है या नई प्रतिभाओं और नई कहानियों का मंच भी। भारत बदल गया, क्या नेटफ्लिक्स भी बदला? ऑरमैक्स की 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में ओटीटी दर्शकों की संख्या 60 करोड़ से ज्यादा पहुंच चुकी है। अब यह बाजार सिर्फ महानगरों और अंग्रेजी भाषी दर्शकों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहर, कस्बे, परिवार और क्षेत्रीय दर्शक इसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। लेखक धीरज मिश्रा का मानना है कि नेटफ्लिक्स आम भारतीय दर्शकों की नब्ज पकड़ने में देर कर गया। उनके मुताबिक शुरुआती दौर में प्लेटफॉर्म के शो तकनीकी रूप से मजबूत थे और महानगरों के दर्शकों को पसंद आए, लेकिन बड़े दर्शक वर्ग से उनका जुड़ाव सीमित रहा। धीरज मिश्रा कहते हैं कि इसी दौरान दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसे शो और फिल्में लेकर आए जिनकी कहानियां और किरदार आम भारतीय दर्शकों के ज्यादा करीब थे। इसी वजह से उन्होंने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

‘भगवंत मान को दोबारा सीएम बनाएं’: अरविंद केजरीवाल ने कहा, पंजाब में नवंबर में चुनाव संभव | भारत समाचार

CBSE Class 10 Result 2026 LIVE: CBSE Second Board Examination Result Today at cbseresults.nic.in, Get Latest Updates Here

आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 22:03 IST केजरीवाल ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि चुनाव समय से पहले हो सकते हैं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से समय से पहले चुनाव के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल | फाइल फोटो आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को दावा किया कि पंजाब विधानसभा चुनाव निर्धारित समय फरवरी 2027 के बजाय इस साल नवंबर में हो सकते हैं। बठिंडा में एक रोड शो को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि चुनाव पहले हो सकते हैं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से समय से पहले चुनाव के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। केजरीवाल ने कहा, “मुझे बताया गया है कि चुनाव नवंबर (2026) में होंगे, फरवरी (2027) में नहीं। इसलिए, अब केवल चार महीने बचे हैं। हमें काम पर लगना चाहिए और भगवंत मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाना चाहिए।” पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अगले चुनाव के लिए पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करते हुए केजरीवाल ने समर्थकों से कहा, “हमें भगवंत मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाना है।” उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे हैं और आप कार्यकर्ताओं से अपने संपर्क प्रयासों को तेज करने को कहा। केजरीवाल ने हालिया निकाय चुनावों में आप के मजबूत प्रदर्शन के लिए भी मतदाताओं को धन्यवाद दिया, जहां पार्टी ने आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के 1,977 वार्डों में से 958 पर जीत हासिल की। उन्होंने दावा किया कि लोग पिछले चार वर्षों में आप सरकार के काम से संतुष्ट हैं और मान के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई आरोप सामने नहीं आया। केजरीवाल ने कहा, “आप पंजाब में चार साल से सरकार चला रही है और लोग उसके शासन से खुश हैं।” उन्होंने इसकी तुलना प्रतिद्वंद्वी दलों के शासन से करते हुए कहा कि जब वे अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में पहुंचते थे तो उनके खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ जाता था। दिल्ली के पूर्व सीएम ने टिप्पणी की, “हम काम करने के लिए राजनीति में आए हैं। मैं लोगों के चेहरों पर मुस्कान देखता हूं और अच्छा महसूस करता हूं कि चार साल बाद लोग हमारे काम को पसंद कर रहे हैं।” आप नेता ने यह भी दावा किया कि आप सरकार ने पिछले चार वर्षों में विभिन्न वर्गों के लोगों के लिए कई पहल कीं। “आप मुफ्त बिजली, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान कर रही है, जबकि 1,000 रुपये और 1,500 रुपये (एससी महिलाओं के लिए) की वित्तीय सहायता जुलाई से महिलाओं के खातों में जाएगी। केजरीवाल ने कहा, ”अब, आपको भगवंत मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाना चाहिए ताकि बाकी काम पूरे हो सकें।” (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें जगह : पंजाब, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘भगवंत मान को दोबारा सीएम बनाएं’: अरविंद केजरीवाल का कहना है कि पंजाब में नवंबर में चुनाव होने की संभावना है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पंजाब विधानसभा चुनाव(टी)अरविंद केजरीवाल(टी)भगवंत मान(टी)आम आदमी पार्टी(टी)पंजाब निकाय चुनाव(टी)बठिंडा रोड शो(टी)मुफ्त बिजली योजना(टी)स्वास्थ्य कवर पंजाब

दही खाने के टिप्स: रात में दही खाना चाहिए या नहीं? जानें इसके फायदे और नुकसान

तस्वीर का विवरण

आयुर्वेद के अनुसार रात के समय दही खाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि दही में तासीर की विशेषता होती है, जिससे कुछ लोगों को कफ, बलगम या पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं। छवि: सोशल मीडिया हालाँकि आधुनिक विज्ञान के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को दही से कोई परेशानी नहीं है, तो वह सीमित मात्रा में रात में भी दही खा सकता है। छवि: सोशल मीडिया दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स के लिए मछलियां होती हैं। इससे खाना आसानी से पचता है। इसमें कैल्शियम और फास्फोरस का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। छवि: फ्रीपिक रात के भोजन में दही शामिल करने से शरीर को प्रोटीन मिलता है, जिसका मिश्रण आपके लिए अच्छा होता है। गर्मियों के मौसम में दही से शरीर को ठंडक मिलती है और एसिडिटी से राहत मिल सकती है। छवि: एआई जिन लोगों को अक्सर सर्दी, खांसी या एलर्जी रहती है, उन्हें रात में दही से परेशानी बढ़ सकती है। दही की अपवित्र तासीर के कारण कुछ लोगों में बलगम बनने की संभावना बढ़ सकती है। छवि: फ्रीपिक कच्चे पाचन वाले लोगों को रात में दही खाने से गैस, पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है। दही को सीधे-सीधे कारखानों से निकाला जाता है। दही में काली मिर्च, इसके अलावा जीरा या थोड़ा सा सेंधा नमक भी मौजूद है। छवि: फ्रीपिक बहुत अधिक मात्रा में दही खाने से परहेज। सूजन-जुकाम या गले की समस्या रात में होने वाली दही से नहीं। दही की जगह छाछ या प्रभाव रायता भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। छवि: सोशल मीडिया अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)दही खाने का सही समय(टी)दही खाने के टिप्स(टी)दही खाने का सही समय(टी)दही(टी)दही के स्वास्थ्य लाभ(टी)दही खाने के नुकसान

मदर शिप पर लौटें? कैसे टीएमसी संकट और पवार के खेल ने कांग्रेस के लिए ‘घर वापसी’ की बात छेड़ दी | भारत समाचार

CBSE Class 10 Result 2026 LIVE: CBSE Second Board Examination Result Today at cbseresults.nic.in, Get Latest Updates Here

आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 19:32 IST इस नए सिरे से अटकलों का प्राथमिक उत्प्रेरक तृणमूल कांग्रेस पर गहराता अस्तित्व का संकट है जैसे-जैसे कांग्रेस सफलतापूर्वक खुद को विपक्षी गुट के निर्विवाद केंद्र के रूप में फिर से स्थापित कर रही है, स्टैंडअलोन क्षेत्रीय दलों की सौदेबाजी की शक्ति धीरे-धीरे कम हो रही है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई भारत के विपक्षी खेमे के भीतर एक नाटकीय एकजुटता की फुसफुसाहट तेज हो गई है, जिससे व्यापक अटकलें शुरू हो गई हैं कि क्या ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) जैसी क्षेत्रीय शाखाएं अंततः कांग्रेस में लौट आएंगी। राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल गया है, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में टीएमसी के पुराने समर्थकों में आए अभूतपूर्व आंतरिक संकट और राष्ट्रीय स्तर पर एक पुनर्जीवित कांग्रेस को आगे बढ़ाने की रणनीतिक वास्तविकताओं से प्रेरित है। दशकों तक, बनर्जी और पवार दोनों ने वैचारिक और नेतृत्व घर्षण के कारण सबसे पुरानी पार्टी से अलग होने के बाद शक्तिशाली प्रांतीय साम्राज्य बनाए। हालाँकि, राजनीतिक परिदृश्य एक दुर्जेय सत्तारूढ़ गठबंधन का मुकाबला करने के लिए पूर्ण संरचनात्मक एकता की मांग कर रहा है, औपचारिक विलय या उच्च एकीकृत संस्थागत घर वापसी के विचार को अब केवल राजनीतिक कल्पना के रूप में खारिज नहीं किया जाता है। तृणमूल का इम्तिहान इस नए सिरे से अटकलों का प्राथमिक उत्प्रेरक तृणमूल कांग्रेस पर गहराता अस्तित्व का संकट है। पार्टी वर्तमान में एक कड़वे पीढ़ीगत युद्ध से खंडित हो गई है, जिसमें अनुभवी वफादार राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी के ऊपर से नीचे, कॉर्पोरेट-शैली के कामकाज के खिलाफ खुलेआम विद्रोह कर रहे हैं। आंतरिक विद्रोह इतने चरम पर पहुंच गया है कि वरिष्ठ नेताओं ने कथित तौर पर ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया है, जिससे उन्हें बुनियादी कैडर और अपने भतीजे के नेतृत्व के बीच चयन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषक टीएमसी की मौजूदा उथल-पुथल और ऐतिहासिक “जी-23” विद्रोह के बीच सीधी समानताएं खींच रहे हैं, जिसने कभी कांग्रेस को परेशान किया था। जिस तरह सोनिया गांधी ने दिग्गज दिग्गजों की शिकायतों पर परिवार की वफादारी को प्राथमिकता दी, उसी तरह ममता बनर्जी राजनीतिक व्यावहारिकता पर खून को हावी होने देना चाहती हैं। इस आंतरिक टूट-फूट ने टीएमसी के आंतरिक स्थायित्व को कमजोर कर दिया है, जिससे व्यापक विपक्षी गठबंधन के भीतर बैकचैनल चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस के साथ अंततः अभिसरण वह संरचनात्मक स्थिरता प्रदान कर सकता है जिसकी क्षेत्रीय संगठन को अपने आंतरिक पतन से बचने के लिए सख्त जरूरत है। शरद पवार की दीर्घकालिक उत्तराधिकार रणनीति इसके साथ ही, अनुभवी रणनीतिकार शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गुट को अपने स्वयं के संरचनात्मक गणित का सामना करना पड़ रहा है। अपने (दिवंगत) भतीजे अजीत पवार के साथ कड़वे विभाजन के बाद, वरिष्ठ पवार ने सफलतापूर्वक अपना जमीनी समर्थन मजबूत कर लिया है, फिर भी उनके गुट का दीर्घकालिक संस्थागत अस्तित्व एक व्यापक राष्ट्रीय आधार पर टिका हुआ है। टीएमसी के विपरीत, वर्तमान कांग्रेस नेतृत्व के साथ पवार के रिश्ते असाधारण रूप से मधुर हो गए हैं, दोनों पार्टियां एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रही हैं। अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है कि दीर्घकालिक राजनीतिक इंजीनियरिंग में माहिर पवार, कांग्रेस के साथ क्रमिक संस्थागत एकीकरण को अपनी राजनीतिक विरासत की रक्षा करने और अपने चुने हुए उत्तराधिकारी सुप्रिया सुले के लिए सत्ता का सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने का एक सुरक्षित तरीका मानते हैं। अपने वफादार महाराष्ट्र आधार को भव्य पुरानी पार्टी में वापस मिलाकर, वह राष्ट्रीय नेतृत्व मैट्रिक्स के भीतर सुले की स्थिति को मजबूत करते हुए भविष्य में क्षेत्रीय अवैध शिकार से अपने गुट को प्रभावी ढंग से बचाएंगे। पूर्ण एकीकरण में संरचनात्मक बाधाएँ एकीकृत मोर्चे के स्पष्ट रणनीतिक लाभों के बावजूद, भारी तार्किक और भावनात्मक बाधाएँ बनी हुई हैं। अलग-अलग क्षेत्रीय मशीनरी को वापस कांग्रेस में विलय करने के लिए राज्य-स्तरीय नेतृत्व, स्थानीय टिकट वितरण और अत्यधिक स्वतंत्र क्षेत्रीय अहंकारों के समायोजन के संबंध में जटिल समीकरणों को हल करने की आवश्यकता है। अपनी घरेलू कमजोरियों के बावजूद, ममता बनर्जी एक कद्दावर, स्वतंत्र नेता बनी हुई हैं, जो नई दिल्ली को अपनी अंतिम वीटो शक्ति सौंपने का विरोध कर सकती हैं। हालाँकि, जैसे-जैसे कांग्रेस सफलतापूर्वक खुद को विपक्षी गुट के निर्विवाद केंद्र के रूप में फिर से स्थापित कर रही है, स्टैंडअलोन क्षेत्रीय दलों की सौदेबाजी की शक्ति धीरे-धीरे कम हो रही है। चाहे ये अटकलें-भारी बातचीत एक ऐतिहासिक औपचारिक विलय या अत्यधिक परिष्कृत, स्थायी संघीय व्यवस्था में परिणत हो, राजनीतिक हलकों में गूंजने वाला संदेश स्पष्ट है: खंडित विपक्षी शाखाओं का युग समाप्त हो रहा है, और मूल पार्टी में वापसी जल्द ही सरासर राजनीतिक अस्तित्व का कार्य बन सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पथिकृत सेन गुप्ता पथिकृत सेन गुप्ता News18.com के वरिष्ठ एसोसिएट संपादक हैं और लंबी कहानी को छोटा करना पसंद करते हैं। वह राजनीति, खेल, वैश्विक मामलों, अंतरिक्ष, मनोरंजन और भोजन पर छिटपुट रूप से लिखते हैं। वह …और पढ़ें न्यूज़ इंडिया मदर शिप पर लौटें? कैसे टीएमसी संकट और पवार के खेल ने कांग्रेस के लिए ‘घर वापसी’ की बात छेड़ दी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस(टी)शरद पवार(टी)एनसीपी(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी

वैभव के बाद अब छोटे भाई आशीर्वाद भी चर्चा में:10 साल की उम्र में पहला शतक; पिता बोले- प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें

वैभव के बाद अब छोटे भाई आशीर्वाद भी चर्चा में:10 साल की उम्र में पहला शतक; पिता बोले- प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें

15 साल के वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी भी चर्चा में हैं। 10 साल के आशीर्वाद ने समस्तीपुर में खेले गए एक लोकल प्रैक्टिस मैच में शतक जड़ दिया। क्रिकेट अकादमी ताजपुर की ओर से खेलते हुए उन्होंने 87 गेंदों पर 103 रन बनाए। आशीर्वाद ने 20 चौके और एक छक्का भी लगाया। उनका स्ट्राइक रेट 118.39 रहा। राइट हैंड बल्लेबाज आशीर्वाद की इस पारी की जानकारी सबसे पहले उनके बड़े भाई उज्ज्वल सूर्यवंशी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए शेयर की। उन्होंने शतक का फोटो, वीडियो और स्कोरकार्ड पोस्ट किया। उज्ज्वल ने पोस्ट के साथ हार्ट इमोजी भी शेयर की। पिता ने कहा- आशीर्वाद पर भी प्यार बनाए रखें आशीर्वाद के शतक के बाद पिता संजीव सूर्यवंशी ने भी सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा, मेरे छोटे बेटे आशीर्वाद सूर्यवंशी ने आज प्रैक्टिस मैच में अपना पहला शतक बनाया। आप सभी से अनुरोध है कि आशीर्वाद पर भी अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें। संजीव इससे पहले भी कह चुके हैं कि वे आशीर्वाद को भी आने वाले दो साल में वैभव की तरह एक बेहतरीन क्रिकेटर बनाना चाहते हैं। वैभव की तरह बैटिंग करते हैं आशीर्वाद आशीर्वाद सूर्यवंशी बिहार में क्रिकेट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। वे बड़े भाई वैभव की तरह अटैकिंग बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। आशीर्वाद की शतकीय पारी की बदौलत क्रिकेट अकादमी ताजपुर ने 29.5 ओवर में 4 विकेट पर 234 रन बनाए। टीम के लिए शिवम राज ने 75 गेंदों में 52 रन का योगदान दिया। शतक पूरा करने के बाद आशीर्वाद ने हेलमेट उतारकर जश्न मनाया। उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। वैभव सबसे कम उम्र में भारतीय टीम में चुने गए आशीर्वाद के बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी इस समय भारतीय क्रिकेट का चर्चित नाम हैं। 6 जून को उनका चयन आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज तथा एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में हुआ। 15 साल 71 दिन की उम्र में टीम इंडिया में जगह बनाकर वे भारत के लिए चुने जाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए। वैभव ने इस मामले में शेफाली वर्मा और सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शेफाली पहली बार 15 साल 220 दिन की उम्र में भारतीय टीम में चुनी गई थीं, जबकि सचिन को 16 साल 194 दिन की उम्र में राष्ट्रीय टीम में मौका मिला था। IPL में जीती ऑरेंज कैप वैभव इस समय श्रीलंका-A दौरे पर भारतीय टीम के साथ हैं। उन्होंने अब तक दो मैचों में 58 रन बनाए हैं। इससे पहले IPL 2026 में उन्होंने 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। वैभव को मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर, सुपर स्ट्राइकर और सबसे ज्यादा छक्के लगाने का पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने इसी सीजन 36 गेंदों पर शतक जड़कर नया रिकॉर्ड बनाया था। वैभव तीन भाइयों में मंझले हैं वैभव सूर्यवंशी तीन भाइयों में मंझले हैं। उनके बड़े भाई का नाम उज्ज्वल सूर्यवंशी है, जबकि सबसे छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी हैं। पिता संजीव सूर्यवंशी और मां आरती सूर्यवंशी ने दोनों बेटों के क्रिकेट करियर में अहम भूमिका निभाई है।