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वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… 3 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहीं थाई राजकुमारी बज्रकिटियाभा का निधन
थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकिटियाभा का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। थाई शाही परिवार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि लगातार चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती रही और गुरुवार शाम बैंकॉक के चुलालॉन्गकॉर्न अस्पताल में उनका निधन हो गया। राजकुमारी बज्रकिटियाभा दिसंबर 2022 में अपने कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश हो गई थीं। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में मायकोप्लाज्मा संक्रमण हुआ था, जिससे गंभीर अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हुई और वह कोमा में चली गईं। 7 दिसंबर 1978 को जन्मीं बज्रकिटियाभा, थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से दो स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल कीं। संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के साथ काम करने के बाद उन्होंने थाईलैंड में अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार और महिला कैदियों के अधिकारों के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में वह संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की ‘रूल ऑफ लॉ’ एम्बेसडर भी रहीं। 2021 में राजा वजिरालोंगकोर्न ने उन्हें अपनी निजी सुरक्षा इकाई का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया और जनरल का दर्जा दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक छवि के कारण उन्हें थाई राजशाही के संभावित उत्तराधिकारियों में भी देखा जाता था। राजा ने अब तक अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। ऐसे में राजकुमारी बज्रकिटियाभा के निधन ने थाई राजपरिवार में उत्तराधिकार को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। कई राजभक्त उन्हें भविष्य में रानी या रीजेंट की भूमिका निभाने वाली संभावित शख्सियत मानते थे। उ. कोरिया में ड्रोन भेजने पर द. कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 साल अतिरिक्त जेल
दक्षिण कोरिया की सियोल जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजकर तनाव भड़काने के मामले में 30 साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि इस अभियान का मकसद उत्तर कोरिया को उकसाकर आपात स्थिति पैदा करना और बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था। अदालत ने यून सुक योल, पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, डिफेंस काउंटर इंटेलिजेंस कमांड के पूर्व प्रमुख यो इन-ह्युंग और ड्रोन ऑपरेशन कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने सैन्य अभियान की आड़ में उत्तर कोरिया को उकसाया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग में प्रचार सामग्री गिराने के लिए ड्रोन भेजे गए थे। अदालत के अनुसार यह कार्रवाई यून सुक योल के निर्देश पर हुई थी और उन्हें उम्मीद थी कि उत्तर कोरिया जवाबी प्रतिक्रिया देगा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह अभियान दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की तैयारी का हिस्सा था। यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करते हुए कहा था कि देश को “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” से बचाने की जरूरत है, लेकिन भारी जनविरोध के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। यून सुक योल पहले ही विद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सत्ता के दुरुपयोग और गिरफ्तारी में बाधा डालने के मामले में पांच साल की अलग सजा भी मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि ड्रोन अभियान उत्तर कोरिया द्वारा कचरे से भरे गुब्बारे भेजने की कार्रवाई का जवाब था। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही माना। इस मामले ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया था। बाद में हुए चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्युंग सत्ता में आए और देश में राजनीतिक नेतृत्व बदल गया।

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