Tuesday, 22 Sep 2026 | 06:55 AM

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मुंबई का आइकॉनिक गैटी गैलेक्सी थिएटर बंद:हनुमान अंश की स्क्रीनिंग से पहले केबल जले, हंगामे के बाद पुलिस का एक्शन, दावा- मैनेजमेंट के खिलाफ FIR

मुंबई का आइकॉनिक गैटी गैलेक्सी थिएटर बंद:हनुमान अंश की स्क्रीनिंग से पहले केबल जले, हंगामे के बाद पुलिस का एक्शन, दावा- मैनेजमेंट के खिलाफ FIR

मुंबई के बांद्रा स्थित आइकॉनिक गैटी गैलेक्सी थिएटर को पुलिस ने सोमवार को बंद करा दिया। थिएटर में हनुमान अंश लगी थी, लेकिन शो के पहले ही केबल वायर जलने से दर्शकों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसी थिएटर में लगे मिर्जापुर के पोस्टर भी फाड़े गए। पुलिस के पहुंचने के बाद दस्तावेजों की जांच में लाइसेंस से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई। सोमवार को हनुमान अंश दिखाई जा रही थी। कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता ये फिल्म देखने पहुंचे थे, लेकिन केबल जलने से शो शुरू नहीं हो सका। वहां पहुंचे लोगों ने फिल्म शुरू न होने पर विरोध में जमकर हंगामा किया। वहां मौजूद स्टाफ से बहस बढ़ने के बाद उन्होंने कथित तौर पर मिर्जापुर: द मूवी के पोस्टर फाड़ दिए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि थिएटर का लाइसेंस 2021-22 में ही खत्म हो चुका है। तब से लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाया गया है। इसके बाद नियमों का पालन नहीं होने के कारण थिएटर मैनेजमेंट को परिसर बंद करने और शो रोकने का निर्देश दिया गया। बांद्रा पुलिस ने थिएटर के मालिक, मैनेजर और सिनेमा चलाने वाली कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत केस दर्ज किया है। थिएटर के बाहर 12 नोटिस चिपकाए गए थिएटर की दीवारों के बाहर 12 नोटिस चिपकाए गए हैं। इनमें शो बंद होने की जानकारी दी गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मिड-डे से कहा, “थिएटर के पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसलिए हमने मैनेजमेंट को इसे तुरंत बंद करने का आदेश दिया।” एक अन्य अधिकारी ने बताया, “हर थिएटर को चलाने के लिए एंटरटेनमेंट लाइसेंस जरूरी है। यह लाइसेंस फोर्ट में क्रॉफर्ड मार्केट के पास स्थित मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर से जारी होता है। गैटी-गैलेक्सी का लाइसेंस 2021-22 से रिन्यू नहीं हुआ था।” थिएटर मालिक मनोज देसाई बोले- लाइसेंस से जुड़ी खबरें फर्जी थिएटर के मालिक और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज देसाई ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में लाइसेंस रिन्यू न करवाने के दावों का खंडन किया है। उन्होंने टेक्निकल सुधार के चलते थिएटर बंद होने की बात कही है। उनके अनुसार, थिएटर के अंदर कुछ केबल जल गई थीं। इन्हें बदलने के लिए दक्षिण मुंबई के लोहार चॉल से नई केबल मंगाई गई है। मैनेजमेंट का कहना है कि समस्या ठीक होते ही शोज दोबारा शुरू कर दिए जाएंगे। 1972 में शुरू हुआ था गैटी-गैलेक्सी मुंबई के सबसे पहचान वाले सिनेमाघरों में शामिल गैटी-गैलेक्सी की शुरुआत 1972 में हुई थी। शुरुआत में यहां तीन स्क्रीन थीं, गैटी, गैलेक्सी और जेमिनी। बाद में चार और स्क्रीन,ग्लैमर, जेम, गॉसिप और ग्रेस जोड़ी गईं। इन सातों स्क्रीन को मिलाकर यह कॉम्प्लेक्स G7 के नाम से मशहूर हुआ। मुंबई के सिंगल स्क्रीन और मास ऑडियंस वाले सिनेमाघरों में गैटी-गैलेक्सी की खास पहचान रही है। 7 स्क्रीन से रोज 17-18 लाख रुपए तक के नुकसान का अनुमान ट्रेड एनालिस्ट गिरीश वानखेड़े ने थिएटर के संभावित नुकसान का आकलन किया। उन्होंने बताया कि गैटी-गैलेक्सी में करीब 7 स्क्रीन हैं। एक स्क्रीन से एक शो में औसतन 1 से 1.5 लाख रुपए की कमाई हो सकती है। इसमें थिएटर का हिस्सा करीब 50 हजार रुपए होता है। वानखेड़े के मुताबिक, एक दिन में हर स्क्रीन पर करीब 2.5 लाख रुपए का नुकसान हो सकता है। 7 स्क्रीन के हिसाब से यह नुकसान रोज करीब 17 से 18 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि अगर थिएटर 7 दिन बंद रहता है, तो नुकसान 1 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। उनके मुताबिक, यह बंदी हफ्ते के ऐसे समय में हुई है, जब टॉक्सिक और मिर्जापुर: द मूवी जैसी मास-ओरिएंटेड फिल्में चल रही हैं। गिरीश वानखेड़े ने कहा कि गैटी ऐसे थिएटरों में शामिल है, जहां ओवर-द-टॉप पॉटबॉयलर और मास फिल्मों को अच्छी भीड़ मिलती है। इसलिए थिएटर मालिक एक अहम कारोबारी दौर का नुकसान उठा रहे हैं। पहली फिल्म थी ‘सीता और गीता’ गैटी-गैलेक्सी में पहली फिल्म रमेश सिप्पी की ‘सीता और गीता’ रिलीज हुई थी। 24 नवंबर 1972 को इसकी शुरुआत हुई थी। उस दौर में सिंगल स्क्रीन थिएटर ही फिल्मों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा पैमाना हुआ करते थे और गैटी-गैलेक्सी ने जल्द ही मुंबई में अपनी अलग पहचान बना ली।

मिर्जापुर ने 4 दिन में कमाए ₹154 करोड़:अल्फा, कॉकटेल-2 पीछे, साल की 8वीं सबसे बड़ी फिल्म बनी; सोमवार की कमाई में सलमान, रणबीर की फिल्में पछाड़ीं

मिर्जापुर ने 4 दिन में कमाए ₹154 करोड़:अल्फा, कॉकटेल-2 पीछे, साल की 8वीं सबसे बड़ी फिल्म बनी; सोमवार की कमाई में सलमान, रणबीर की फिल्में पछाड़ीं

गुरमीत सिंह के निर्देशन में बनी ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने पहले सोमवार को देश में ₹16 करोड़ की नेट कमाई की। इसके साथ फिल्म का 4 दिन में भारत में नेट कलेक्शन ₹109.75 करोड़ और वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹154.05 करोड़ हो गया है। महज 4 दिनों में ही ये फिल्म इस साल की 8वीं हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बन चुकी है। इसने अल्फा और कॉकटेल 2 जैसी फिल्मों को पीछे कर दिया। फिल्म ने पहले सोमवार की कमाई में सलमान खान की ‘सुल्तान’, ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट 1 शिवा’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ को पीछे छोड़ दिया है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ चार दिन में 100 करोड़ क्लब में शामिल हो गई है। मिर्जापुर ने बनाया रिकॉर्ड फिल्म महज 4 दिनों में 2026 की 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है। इसने अल्फा और कॉकटेल-2 जैसी फिल्मों से ज्यादा कमाई कर ली है। मौजूदा कमाई देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि ये जल्द ही अक्षय कुमार की वेलकम टू द जंगल और आवारापन 2 से भी ज्यादा कमाई कर सकती है। सोमवार को 10,570 शोज में 38.8% ऑक्यूपेंसी सोमवार को ‘मिर्जापुर’ के 10,570 शोज में 38.8% सीटों पर दर्शक नजर आए। वहीं, भक्ति ड्रामा ‘हनुमान अंश’ के 7,343 शोज में 36.0% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। ‘हनुमान अंश’ ने सोमवार को अपने 32वें दिन ₹10 करोड़ कमाए। पहले सोमवार को ₹16 करोड़ की नेट कमाई सैकनिल्क के मुताबिक, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने अपने पहले सोमवार यानी रिलीज के चौथे दिन देश में ₹16 करोड़ की नेट कमाई की। ओपनिंग डे की तुलना में यह 37.86% की गिरावट है। हालांकि वीकडे के लिहाज से कमाई बेहतरीन हुई है। आमतौर पर पहले दिन की तुलना में पहले कामकाजी सोमवार को कमाई 40% तक गिरती है। पहले सोमवार की कमाई में कई फिल्मों को पीछे छोड़ा देश में अब तक पहले सोमवार को सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 39वें नंबर पर है। हालांकि, इसने रणबीर कपूर की ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की ₹15.65 करोड़ की कमाई को पीछे छोड़ा है। फिल्म ने सलमान खान की ‘सुल्तान’ की ₹15.54 करोड़, ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट 1 शिवा’ की ₹15.10 करोड़ और विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ की ₹15.05 करोड़ की पहले सोमवार की कमाई को भी पछाड़ दिया है। विदेशी बाजार से 4 दिन में ₹22.50 करोड़ इस गैंगस्टर-एक्शन-ड्रामा को विदेशों में भी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने चौथे दिन ओवरसीज मार्केट में ₹2.50 करोड़ की ग्रॉस कमाई की। विदेशी बाजार से 4 दिन में कुल ₹22.50 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन हुआ है। भारत और विदेशों की कमाई मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹154.05 करोड़ तक पहुंच गया है। गाने के चलते विवादों में है फिल्म राजस्थानी रैपर और कलाकार रैपरिया बालम के गाने ‘शूरवीर’ को ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ में इस्तेमाल करने पर विवाद हो गया था। रैपरिया बालम ने वीडियो जारी कर दावा किया था कि फिल्म में गाना उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया गया। विवाद के बीच गाने के म्यूजिक लेबल ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने बयान जारी कर कहा है कि उसने ‘शूरवीर’ को फिल्म में इस्तेमाल करने के लिए एक्सेल एंटरटेनमेंट को आधिकारिक लाइसेंस दिया था। ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने अपने बयान में लिखा, “ट्रूपर रिकॉर्ड्स यह साझा करते हुए खुश है कि ‘शूरवीर’ को ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ में इस्तेमाल करने के लिए एक्सेल एंटरटेनमेंट को आधिकारिक तौर पर लाइसेंस दिया गया था। एक्सेल एंटरटेनमेंट और पूरी मिर्जापुर टीम को रिलीज पर बधाई।” लेबल ने इसी बयान में गाने के क्रेडिट भी साझा किए। इसमें रैपरिया बालम को ‘शूरवीर’ का गायक और कंपोजर बताया गया है। क्या था गाने पर विवाद? मिर्जापुरः द फिल्म 4 सितंबर को रिलीज हुई। फिल्म में शूरवीर गाना दिखाया गया। इसके बाद राजस्थानी सिंगर रैपरिया बालम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि ये गाना उनका है, जिसे बिना इजाजत इस्तेमाल किया गया। रैपर के मुताबिक, फिल्म में गाना मारधाड़ और गोलियां चलाने वाले सीन में इस्तेमाल हुआ, जिससे उनके राज्य की छवि खराब हुई। जबकि ये गाना उन्होंने महाराणा प्रताप पर बनाया था। वीडियो में उन्होंने कहा, “आप में से कुछ लोग पूछ सकते हैं कि मेरा दिल क्यों टूटा है। आप कह सकते हैं कि मुझे खुश होना चाहिए, क्योंकि मेरा गाना मिर्जापुर में है। लेकिन मिर्जापुर की टीम ने मेरा गाना इस्तेमाल करने के लिए मेरी अनुमति नहीं ली। उन्हें अनुमति किसने दी? मैंने तो नहीं दी।” उन्होंने आगे कहा, “यह गाना महाराणा प्रताप जी को समर्पित है। हम इस गाने का इस्तेमाल फिल्म के विलेन का महिमामंडन करने के लिए कर रहे हैं। क्या यह सही है? अगर मिर्जापुर की टीम मेरे पास आती और कहती कि ‘रैपरिया भाई, हम आपका गाना इस्तेमाल करना चाहते हैं’, तो हम उन्हें 10 आइडिया देते। लेकिन बिना अनुमति गाना लेना सही नहीं है।” रैपर ने ‘शूरवीर’ के कॉपीराइट और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि ये अधिकार आपको किसने दिए या आपने किससे लिए। जिसने भी आपको अधिकार दिए हैं, उससे पूछिए कि क्या उसके पास कोई कॉपीराइट है?” एक्सेल एंटरटेनमेंट की सबसे बड़ी फिल्म बनी मिर्जापुर मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ये एक्सेल एंटरटेनमेंट की सबसे बड़ा ओपनिंग कलेक्शन करने वाली फिल्म बन चुकी है। फिल्म ने डॉन 2, गली बॉय, रईस और गोल्ड जैसी फिल्मों को पीछे कर दिया है। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं।

हरियाणवी कनिका मान की बिगबॉस में धमाकेदार एंट्री:सलमान खान ने देशी छोरी कहकर इंट्रोड्यूस कराया, बोले- अब असली ‘ड्रैगन मोड’ देखने को मिलेगा

हरियाणवी कनिका मान की बिगबॉस में धमाकेदार एंट्री:सलमान खान ने देशी छोरी कहकर इंट्रोड्यूस कराया, बोले- अब असली ‘ड्रैगन मोड’ देखने को मिलेगा

हरियाणा के पानीपत से निकलकर मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस कनिका मान अब रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ के घर में पहुंच गई हैं। ग्रैंड प्रीमियर में सलमान खान ने उनका स्वागत किया। कनिका ने ‘शरारत’ गाने पर धमाकेदार परफॉर्मेंस के साथ शो की पहली कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। इस परफॉर्मेंस के बाद सलमान खान ने उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कनिका को हरियाणा की छोरी के तौर पर दर्शकों से मिलवाया। इसके बाद मजाकिया अंदाज में कहा कि कनिका अब ‘बिग बॉस की मेहमान’ बन गई हैं, अब असली ‘ड्रैगन मोड’ देखने को मिलेगा। सलमान ने यह भी बताया कि उनकी मां भी कनिका की बहुत बड़ी फैन हैं। एक पुराने किरदार को लेकर की गई टिप्पणी का जिक्र भी किया। कनिका मान का जन्म पानीपत में हुआ है। उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। शुरुआत में मनोरंजन की दुनिया में जाना उनके लिए आसान फैसला नहीं था। परिवार की तरफ से भी पढ़ाई और करियर को लेकर चिंताएं थीं। हालांकि बाद में परिवार ने उनका साथ दिया और कनिका ने मॉडलिंग को अपना करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। बिगबॉस के घर में कनिका मान के एंट्री के PHOTO… सलमान खान और कनिका मान के बीच ऐसे हुई बातचीत… हरियाणा में जन्म से लेकर मॉडलिंग और बिगबॉस तक का सफर अब बिग बॉस के घर में नई परीक्षा कनिका मान के करियर का नया पड़ाव अब ‘बिग बॉस 20’ है। 6 सितंबर 2026 को शो के ग्रैंड प्रीमियर में उन्होंने सलमान खान के सामने परफॉर्म किया और इसके बाद बिग बॉस के घर में एंट्री की। बिग बॉस में एंट्री के साथ ही कनिका को घर में एक खास भूमिका भी मिली और उन्हें ‘पपेट मास्टर’ के तौर पर पेश किया गया। अब उनके सामने चुनौती सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करने की नहीं, बल्कि घर के रिश्तों, विवादों और रणनीति के बीच खुद को मजबूत बनाए रखने की भी है। ———————— यै खबर भी पढ़ें… मासूम शर्मा की बाबाओं-डेरों पर फिर विवादित टिप्पणी:जींद में बोले-जित भी ये फंस ज्यां, जूत मारने हैं; नए सॉन्ग ‘फिल्मी बाबे’ में जल्लाद बताया हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा पांखडवाद के खिलाफ अब खुलकर मैदान में आ गए है। जींद के पदाना धाम श्याम मंदिर में हुए भजन कीर्तन में सिंगर ने जहां पाखंडवाद पर खुलकर कटाक्ष किए, वहीं अपना ‘तत्वदर्शी’ सॉन्ग सुनाते हुए विवादित टिप्पणी भी कर दी। (पूरी खबर पढ़ें)

रूस में हिमस्खलन, 11 पर्वतारोहियों की मौत:33 लोगों के ग्रुप पर बर्फ गिरी; 6 अभी लापता, 50 से ज्यादा बचावकर्मी तलाश में जुटे

रूस में हिमस्खलन, 11 पर्वतारोहियों की मौत:33 लोगों के ग्रुप पर बर्फ गिरी; 6 अभी लापता, 50 से ज्यादा बचावकर्मी तलाश में जुटे

रूस के उत्तरी काकेशस इलाके में स्थित माउंट मिजहिरगी पर रविवार शाम हिमस्खलन हुआ। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में 11 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। वहीं 10 लोग किसी तरह सुरक्षित नीचे उतर आए, लेकिन 6 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल उनकी तलाश में जुटा हुआ है। जब हादसा हुआ उस समय 33 पर्वतारोहियों का एक समूह पहाड़ पर चढ़ाई कर रहा था। अचानक पहाड़ से बड़ी मात्रा में बर्फ खिसककर उनके ऊपर आ गिरी, जिससे कई लोग बर्फ के नीचे दब गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली राजधानी सना को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ताइज, अल-बायदा और अल-जौफ समेत कई इलाकों में लड़ाई हो रही है। दूसरी तरफ हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और तेल और गैस कंपनी अरामको की सुविधाओं को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी पर जेल पर हवाई हमले का आरोप 7 सितंबर को हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। शुरुआत में कहा गया था कि हमले में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। बाद में अल-जौफ सिविल डिफेंस के प्रमुख हसन साबौला ने मौतों का आंकड़ा बढ़कर 11 बताया। उन्होंने कहा कि 20 कैदी अभी भी मलबे में लापता हैं। हूती मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में जेल में किसी से मिलने आया एक बच्चा भी शामिल था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अरब ने जेल भी हमले के आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हूतियों का दावा- सऊदी के 4 निगरानी ड्रोन गिराए जेल हमले के आरोप के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हूतियों ने कहा कि उन्होंने अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अरामको की कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा सऊदी अरब के 4 निगरानी ड्रोन भी गिराए। इन हमलों से हुए नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू:सरकार बोली- राजधानी सना को कब्जे में लेंगे; हूतियों का दावा- सऊदी एयरपोर्ट और अरामको को निशाना बनाया

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच फिर जंग तेज हो गई है। सरकार ने हूतियों के कब्जे वाली राजधानी सना को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ताइज, अल-बायदा और अल-जौफ समेत कई इलाकों में लड़ाई हो रही है। दूसरी तरफ हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट, किंग खालिद एयरबेस और तेल और गैस कंपनी अरामको की सुविधाओं को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है। सऊदी पर जेल पर हवाई हमले का आरोप 7 सितंबर को हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर की एक जेल पर हवाई हमला किया। शुरुआत में कहा गया था कि हमले में एक बच्चे समेत 7 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। बाद में अल-जौफ सिविल डिफेंस के प्रमुख हसन साबौला ने मौतों का आंकड़ा बढ़कर 11 बताया। उन्होंने कहा कि 20 कैदी अभी भी मलबे में लापता हैं। हूती मीडिया के मुताबिक, मरने वालों में जेल में किसी से मिलने आया एक बच्चा भी शामिल था। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अरब ने जेल भी हमले के आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हूतियों का दावा- सऊदी के 4 निगरानी ड्रोन गिराए जेल हमले के आरोप के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हूतियों ने कहा कि उन्होंने अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अरामको की कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा सऊदी अरब के 4 निगरानी ड्रोन भी गिराए। इन हमलों से हुए नुकसान की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। सऊदी का दावा- हूती हमलों में 73 लोग घायल इधर हूतियों पर सऊदी शहरों में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप है। इन हमलों में 73 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। हमलों का असर अबहा, खमिस मुशैत, नजरान और जिजान में पड़ा। सऊदी पक्ष के मुताबिक, घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सऊदी अरब ने इन हमलों का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। यमनी सरकार ने कहा- अब सना वापस लेंगे बढ़ते तनाव के बीच यमन के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर मेजर जनरल समीर अल-साबरी ने कहा कि सरकार ने सना को वापस लेने का फैसला किया है। सरकार समर्थित सेना ने हूती ठिकानों पर रॉकेट और हवाई हमले किए हैं। जमीन पर भी दोनों पक्षों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। सरकार समर्थित सेना के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली ने कहा कि लक्ष्य यमन को हूतियों के कब्जे से मुक्त कराना और सना को फिर से सभी यमनियों की राजधानी बनाना है। सरकार ने सना जाने वाली कुछ प्रमुख सड़कों पर आम लोगों को जाने से बचने की चेतावनी भी दी है। अल-जौफ क्यों बना अहम मोर्चा? यमन का अल-जौफ सऊदी अरब की सीमा के करीब है। यह इलाका सना की दिशा में जाने वाले महत्वपूर्ण रास्तों से जुड़ा है। इसलिए यहां बढ़त बनाने से सरकार समर्थित सेना को राजधानी की तरफ आगे बढ़ने में रणनीतिक फायदा मिल सकता है। इसी वजह से अल-जौफ में चल रही लड़ाई को मौजूदा सैन्य अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ताइज और अल-बायदा में भी लड़ाई तेज सरकार और हूतियों के बीच लड़ाई सिर्फ अल-जौफ तक सीमित नहीं है। ताइज, अल-बायदा और मारिब में भी दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। ताइज पश्चिमी यमन का महत्वपूर्ण इलाका है। यहां लंबे समय से सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष रहा है। अल-बायदा यमन के बीच में स्थित है। यह उत्तर और दक्षिण के कई इलाकों को जोड़ता है। इन इलाकों पर नियंत्रण से दोनों पक्षों को सैनिकों और हथियारों की आवाजाही में फायदा मिल सकता है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रामानंद सागर के पोते और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शिव सागर ने नितेश तिवारी की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर को भगवान राम के रोल में लेने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘एनिमल’ के बाद वह रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। शिव सागर ने न्यूज एजेंसी ANI से नितेश तिवारी की रामायण पर कहा, “एक कास्टिंग को छोड़कर मुझे बाकी पूरी कास्टिंग बहुत पसंद है। पर्सनली मैं ‘एनिमल’ के बाद मैं रणबीर कपूर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। जब मैं रामजी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि किसी नए चेहरे को लिया जाना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “आप एक बहुत मजबूत सपोर्टिंग कास्ट ले सकते हैं। यश बहुत अच्छे लग रहे हैं और साई पल्लवी भी बहुत अच्छी लग रही हैं। उन दोनों के साथ पिछली भूमिकाओं का इतना बोझ नहीं है। रणबीर के साथ बहुत बोझ है। इसलिए हम आमतौर पर अपने सीरियल्स में नए चेहरे लेते हैं, ताकि उनकी कोई पिछली छवि या इतिहास न हो।” उन्होंने शिव सागर ने कहा, “हो सकता है कि अगर रणबीर को नहीं लिया जाता, तो फिल्म की मार्केटिंग इतनी अच्छी तरह नहीं हो पाती। इस बारे में भी सोचना चाहिए। लेकिन मेरा निजी मानना है कि ऐसे किरदारों के लिए नया चेहरा लेना बेहतर होता है। क्योंकि ‘रामायण’ के बाद क्या लोग उन्हें फिर ‘एनिमल’ जैसी फिल्म में स्वीकार कर पाएंगे? खासकर जब बात रामजी और रामायण की आती है, तो लोग ज्यादा संवेदनशील और भावुक होते हैं।” शिव सागर ने कहा, “पश्चिमी देशों में इसे माइथोलॉजी कहा जाता है। भारत में भी इसे माइथोलॉजी कहा जाता है, लेकिन यह हमारा इतिहास है। लोग हर दिन उनकी पूजा करते हैं। राम हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।” कास्टिंग के अलावा कॉस्ट्यूम पर भी जताई नाराजगी शिव सागर ने कुछ कॉस्ट्यूम और कास्टिंग फैसलों पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा, “असल में जनता ही राजा है। जनता जो कहेगी, वही अंतिम फैसला होगा। मुझे कुछ हिस्सों की कास्टिंग और कॉस्ट्यूम पसंद नहीं आए। उन्हें बेहतर किया जा सकता था।” शिव सागर की राय इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनके दादा रमनंद सागर ने बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ बनाया था। शिव सागर ने साई पल्लवी और यश की कास्टिंग की सराहना की और कहा कि आपत्तियों के बावजूद फिल्म की कास्टिंग और क्रिएटिव फैसलों पर दर्शकों की प्रतिक्रिया ही सबसे अहम होगी। ‘रामायण: पार्ट 1’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही दो हिस्सों वाली फिल्म है। इसका दुनियाभर में सिनेमाघरों में रिलीज शेड्यूल 6 नवंबर 2026 है। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।

रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता:रामानंद सागर के पोते ने रामायण कास्टिंग पर उठाए सवाल, कहा- एनिमल कैरेक्टर का बोझ है

रामानंद सागर के पोते और प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शिव सागर ने नितेश तिवारी की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर को भगवान राम के रोल में लेने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘एनिमल’ के बाद वह रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। शिव सागर ने न्यूज एजेंसी ANI से नितेश तिवारी की रामायण पर कहा, “एक कास्टिंग को छोड़कर मुझे बाकी पूरी कास्टिंग बहुत पसंद है। पर्सनली मैं ‘एनिमल’ के बाद मैं रणबीर कपूर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। जब मैं रामजी को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि किसी नए चेहरे को लिया जाना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “आप एक बहुत मजबूत सपोर्टिंग कास्ट ले सकते हैं। यश बहुत अच्छे लग रहे हैं और साई पल्लवी भी बहुत अच्छी लग रही हैं। उन दोनों के साथ पिछली भूमिकाओं का इतना बोझ नहीं है। रणबीर के साथ बहुत बोझ है। इसलिए हम आमतौर पर अपने सीरियल्स में नए चेहरे लेते हैं, ताकि उनकी कोई पिछली छवि या इतिहास न हो।” उन्होंने शिव सागर ने कहा, “हो सकता है कि अगर रणबीर को नहीं लिया जाता, तो फिल्म की मार्केटिंग इतनी अच्छी तरह नहीं हो पाती। इस बारे में भी सोचना चाहिए। लेकिन मेरा निजी मानना है कि ऐसे किरदारों के लिए नया चेहरा लेना बेहतर होता है। क्योंकि ‘रामायण’ के बाद क्या लोग उन्हें फिर ‘एनिमल’ जैसी फिल्म में स्वीकार कर पाएंगे? खासकर जब बात रामजी और रामायण की आती है, तो लोग ज्यादा संवेदनशील और भावुक होते हैं।” शिव सागर ने कहा, “पश्चिमी देशों में इसे माइथोलॉजी कहा जाता है। भारत में भी इसे माइथोलॉजी कहा जाता है, लेकिन यह हमारा इतिहास है। लोग हर दिन उनकी पूजा करते हैं। राम हमारे इतिहास का हिस्सा हैं।” कास्टिंग के अलावा कॉस्ट्यूम पर भी जताई नाराजगी शिव सागर ने कुछ कॉस्ट्यूम और कास्टिंग फैसलों पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा, “असल में जनता ही राजा है। जनता जो कहेगी, वही अंतिम फैसला होगा। मुझे कुछ हिस्सों की कास्टिंग और कॉस्ट्यूम पसंद नहीं आए। उन्हें बेहतर किया जा सकता था।” शिव सागर की राय इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनके दादा रमनंद सागर ने बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ बनाया था। शिव सागर ने साई पल्लवी और यश की कास्टिंग की सराहना की और कहा कि आपत्तियों के बावजूद फिल्म की कास्टिंग और क्रिएटिव फैसलों पर दर्शकों की प्रतिक्रिया ही सबसे अहम होगी। ‘रामायण: पार्ट 1’ नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही दो हिस्सों वाली फिल्म है। इसका दुनियाभर में सिनेमाघरों में रिलीज शेड्यूल 6 नवंबर 2026 है। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।

ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के वेल्स में कार्डिफ कैसल (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने इसका विरोध किया है। रिफॉर्म के सीनियर नेता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराया जाना बंद होना चाहिए।उन्होंने लिखा, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर कब्जे की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? अब यह हर जगह दिखाई देता है। कार्डिफ काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था। इससे पहले 9 अगस्त को भी एक कार्यक्रम में झंडा फहराया गया था और वह रातभर लगा रहा। कंजरवेटिव नेता बोलीं- यह सम्मान है, कब्जा नहीं वेल्श कंजरवेटिव सांसद नताशा असगर ने रिफॉर्म के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी, भारतीय और पोलिश समुदायों के झंडा फहराने के कार्यक्रमों में वह खुद शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग शामिल होते हैं। यह किसी समुदाय का कब्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। असगर ने कहा, “मैं रिफॉर्म की ओर से नस्लीय विवाद भड़काने की कोशिशों से तंग आ चुकी हूं।” उन्होंने रिफॉर्म नेताओं को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे देख सकें कि अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल कैसे होता है। काउंसिल ने कहा- भारत का झंडा भी फहराया था कार्डिफ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने कहा कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का मकसद कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देना था। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय झंडा भी फहराया गया था। वीवर ने कहा कि काउंसिल लंबे समय से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर अलग-अलग देशों के झंडे फहराती रही है। कार्डिफ कैसल पर वेल्स और ब्रिटेन के झंडे भी लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पूरा विवाद गलत जानकारी की वजह से खड़ा हुआ है और अब इसे बंद होना चाहिए।” विवाद में 2024 की पुरानी तस्वीर भी रिफॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “अब लेबर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहरा रही है।” लेकिन यह तस्वीर नई नहीं थी। इसे 14 अगस्त 2024 को एक BBC पत्रकार ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पोस्ट किया था। सोमवार को कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा नहीं दिखा। BBC Wales ने रिफॉर्म से पूछा कि थॉमस ने दो साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल क्यों किया और पोस्ट में ऐसे क्यों लिखा जैसे झंडा अभी फहराया गया हो। रिफॉर्म वेल्स ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय नेता बोले- वेल्स की पहचान को खतरा नहीं वेल्स की एक स्थानीय पार्टी की वेस्टमिंस्टर नेता लिज सेविल रॉबर्ट्स ने भी रिफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश का झंडा फहराने से वेल्स की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, रॉबर्ट जेनरिक अपनी पार्टी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। रिफॉर्म वेल्स इससे पहले कार्डिफ बे में वेल्स की संसद Senedd के बाहर यूक्रेन का झंडा फहराने का भी विरोध कर चुकी है। पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की बात कार्डिफ काउंसिल ने कहा कि कार्डिफ कैसल शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और सार्वजनिक इमारतों में से एक है। ऐसे मौकों पर यहां झंडा फहराने से शहर अलग-अलग स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को सम्मान देता है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान का झंडा फहराना कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को पहचानने का हिस्सा था। खबर अपडेट हो रही है…

ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने पर विवाद:दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने विरोध किया, कहा- ऐतिहासिक इमारत पर विदेशी झंडा क्यों

ब्रिटेन के वेल्स में कार्डिफ कैसल (किले) पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया है। दक्षिणपंथी रिफॉर्म पार्टी ने इसका विरोध किया है। रिफॉर्म के सीनियर नेता रॉबर्ट जेनरिक ने सोशल मीडिया पर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों पर विदेशी झंडे फहराया जाना बंद होना चाहिए।उन्होंने लिखा, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया है। हम अपनी संस्कृति पर कब्जे की इस कोशिश को क्यों होने दे रहे हैं? अब यह हर जगह दिखाई देता है। कार्डिफ काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त को कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था। इससे पहले 9 अगस्त को भी एक कार्यक्रम में झंडा फहराया गया था और वह रातभर लगा रहा। कंजरवेटिव नेता बोलीं- यह सम्मान है, कब्जा नहीं वेल्श कंजरवेटिव सांसद नताशा असगर ने रिफॉर्म के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी, भारतीय और पोलिश समुदायों के झंडा फहराने के कार्यक्रमों में वह खुद शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लोग शामिल होते हैं। यह किसी समुदाय का कब्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। असगर ने कहा, “मैं रिफॉर्म की ओर से नस्लीय विवाद भड़काने की कोशिशों से तंग आ चुकी हूं।” उन्होंने रिफॉर्म नेताओं को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने की सलाह दी, ताकि वे देख सकें कि अलग-अलग समुदायों के बीच मेल-जोल कैसे होता है। काउंसिल ने कहा- भारत का झंडा भी फहराया था कार्डिफ काउंसिल के लेबर नेता क्रिस वीवर ने कहा कि पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का मकसद कार्डिफ में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देना था। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय झंडा भी फहराया गया था। वीवर ने कहा कि काउंसिल लंबे समय से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मौकों पर अलग-अलग देशों के झंडे फहराती रही है। कार्डिफ कैसल पर वेल्स और ब्रिटेन के झंडे भी लगे रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पूरा विवाद गलत जानकारी की वजह से खड़ा हुआ है और अब इसे बंद होना चाहिए।” विवाद में 2024 की पुरानी तस्वीर भी रिफॉर्म वेल्स के नेता डैन थॉमस ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “अब लेबर कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहरा रही है।” लेकिन यह तस्वीर नई नहीं थी। इसे 14 अगस्त 2024 को एक BBC पत्रकार ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पोस्ट किया था। सोमवार को कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा नहीं दिखा। BBC Wales ने रिफॉर्म से पूछा कि थॉमस ने दो साल पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल क्यों किया और पोस्ट में ऐसे क्यों लिखा जैसे झंडा अभी फहराया गया हो। रिफॉर्म वेल्स ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। स्थानीय नेता बोले- वेल्स की पहचान को खतरा नहीं वेल्स की एक स्थानीय पार्टी की वेस्टमिंस्टर नेता लिज सेविल रॉबर्ट्स ने भी रिफॉर्म पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश का झंडा फहराने से वेल्स की पहचान को कोई खतरा नहीं है। उनके मुताबिक, रॉबर्ट जेनरिक अपनी पार्टी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। रिफॉर्म वेल्स इससे पहले कार्डिफ बे में वेल्स की संसद Senedd के बाहर यूक्रेन का झंडा फहराने का भी विरोध कर चुकी है। पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने की बात कार्डिफ काउंसिल ने कहा कि कार्डिफ कैसल शहर की प्रमुख ऐतिहासिक और सार्वजनिक इमारतों में से एक है। ऐसे मौकों पर यहां झंडा फहराने से शहर अलग-अलग स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसरों को सम्मान देता है। काउंसिल के मुताबिक, पाकिस्तान का झंडा फहराना कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज और यहां रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को पहचानने का हिस्सा था। खबर अपडेट हो रही है…