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चुनाव के बाद पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का आलोचकों को संदेश: ‘इसे जारी रखें’ | भारत समाचार

AP EAMCET 2026 Results Soon at cets.apsche.ap.gov.in — Steps To Check AP EAPCET Scorecard, Rank Card Today. (Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:01 जून, 2026, 17:08 IST द्रमुक पर कटाक्ष करते हुए विजय ने कहा कि जिन लोगों ने छह महीने तक चुप रहने का वादा किया था, वे छह दिन भी उनकी सरकार की आलोचना नहीं कर सके। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय तिरुचिरापल्ली में। (आईएएनएस) तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय ने सोमवार को तिरुचिरापल्ली में अपनी पहली मेगा सार्वजनिक धन्यवाद रैली आयोजित की, जहां उन्होंने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद अपनी सरकार की आलोचना करने के लिए प्रतिद्वंद्वियों पर हमला बोला। रैली को संबोधित करते हुए सीएम विजय ने डीएमके पर कटाक्ष करते हुए कहा, “हमें सत्ता में आए अभी कुछ हफ्ते भी नहीं हुए हैं। जो लोग कहते थे कि वे छह महीने तक चुप रहेंगे, वे छह दिन भी चुप नहीं रह सकते। हमारे सत्ता संभालने के आधे घंटे के भीतर ही उन्होंने शिकायत करना शुरू कर दिया। तमिलनाडु के लोगों ने उन दोनों पार्टियों को खारिज कर दिया है जो बारी-बारी से सत्ता में आईं और उन्हें सालों तक धोखा दिया।” उन्होंने कहा, “आपने अपने बड़े भाई विजय को चुना है, अपने छोटे भाई को मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि अपने मुख्य सेवक के रूप में चुना है जो आपके लिए ईमानदारी से काम करने आया है।” “हम बेहतर कर सकते थे, लेकिन आपने टीवीके को जो समर्थन दिया है, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।” तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जनसुनवाई कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तिरुचिरापल्ली पहुंचे pic.twitter.com/K2hiYcPuTM– आईएएनएस (@ians_india) 1 जून, 2026 अभिनेता से नेता बने अभिनेता भविष्य के चुनावों में प्रचंड बहुमत पाने को लेकर आश्वस्त दिखे और उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों से उनकी आलोचना करते रहने का अनुरोध भी किया। उन्होंने कहा, ”इससे ​​हमें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।” टीवीके बनाम डीएमके विजय ने यह भी दोहराया कि हाल ही में संपन्न चुनाव टीवीके और डीएमके के बीच सीधा मुकाबला था और सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने द्रमुक और अन्नाद्रमुक पर टीवीके को सत्ता में आने से रोकने के लिए एक असामान्य गठबंधन बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि द्रमुक का खराब प्रदर्शन ‘पारिवारिक राजनीति’, नशीली दवाओं के खतरे और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति लोगों के असंतोष का प्रतिबिंब है। उन्होंने टीवीके के तहत भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सभी जाति-आधारित राजनीति को समाप्त करने का भी आश्वासन दिया। तमिलनाडु में ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत की प्रशंसा करते हुए, विजय ने कहा, “उन्होंने कहा कि यहां तक ​​कि दिवंगत सीएम एमजी रामचंद्रन ने भी अपने पहले चुनाव में इतना वोट शेयर हासिल नहीं किया था। फिर भी आज, आपने तमिलागा वेट्ट्री कड़गम को इतना जबरदस्त समर्थन दिया है। मैं अपनी तुलना एमजीआर से नहीं कर रहा हूं। एमजीआर। एमजीआर है।, लेकिन मैं आपका विजय हूं, जो एमजीआर, अन्ना और पेरियार द्वारा दिखाए गए रास्ते पर काम करने आया हूं।” विजय ने सूट क्यों पहना है? विजय ने उन सवालों का भी जिक्र किया कि उन्होंने सार्वजनिक उपस्थिति के दौरान सूट क्यों पहना था। उन्होंने कहा, “क्या हमें कोट और सूट पहनने की अनुमति नहीं है? क्या यह केवल उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए है? ऐसा कुछ नहीं है। मैं कई रंग नहीं पहन रहा हूं। यह सिर्फ काले और सफेद हैं, जैसे हम सभी के दिल में हैं। इन रंगों का चयन यह दिखाने के लिए है कि मैं काले और सफेद की तरह हर चीज में पारदर्शी और सरल रहूंगा।” विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़कर अपनी शानदार राजनीतिक शुरुआत की: चेन्नई में पेरम्बूर और त्रिची पूर्व में। हालांकि बाद में उन्होंने त्रिची पूर्व सीट खाली कर दी, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचन क्षेत्र के लोग हमेशा उनके बहुत करीब रहेंगे। टीवीके ने कुल 234 सीटों में से 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति को नया आकार दिया। यह रैली क्षेत्र में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के साथ मेल खाती है, क्योंकि कई विपक्षी अन्नाद्रमुक पदाधिकारी और विधायक हाल ही में सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल हो गए हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुचिरापल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया चुनाव के बाद पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का आलोचकों को संदेश: ‘इसे जारी रखें’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय टीवीके रैली(टी)विजय धन्यवाद रैली(टी)विजय तिरुचिरापल्ली रैली(टी)विजय का राजनीतिक पदार्पण(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके बनाम डीएमके(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)भ्रष्टाचार मुक्त शासन

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर जल्द ही जी 5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आने वाली हैं। अभिनय देव के निर्देशन में बनी यह सीरीज 5 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। इस नियो-नोयर क्राइम थ्रिलर सीरीज में करिश्मा के साथ जिस्सू सेनगुप्ता, सूर्या शर्मा, सोनी राजदान और अनुभवी अभिनेत्री हेलेन शामिल हैं। वहीं परेश पाहुजा, मेघना मलिक, अजिंक्य देव, के.के. रैना और गायक शान भी विशेष भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस सीरीज और इसकी शूटिंग के अनुभव को लेकर अभिनय देव ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। अपराध से ज्यादा किरदारों की कहानी बताएगी यह सीरीज इस कहानी की सबसे अच्छी बात को लेकर अभिनय ने कहा कि जब मैंने इस पर बेस्ड किताब पढ़ी थी, तब मुझे यह बात बहुत पसंद आई कि यह एक क्राइम स्टोरी की तरह लिखी गई है, लेकिन इसके सभी किरदार बेहद बेहतरीन हैं। किताब में इन पात्रों को बहुत गहराई से लिखा गया है और हमने सीरीज में भी उन्हें उसी संवेदनशीलता के साथ दिखाने की कोशिश की है। ये ऐसे किरदार हैं, जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी में तो दिखाई देते हैं, लेकिन फिल्मों में कम नजर आते हैं। कोलकाता की अनदेखी गलियों में हुई इस वेब सीरीज की शूटिंग अभिनय ने बताया कि पूरी सीरीज की शूटिंग वास्तविक लोकेशनों पर की गई है और इसके लिए एक भी सेट नहीं बनाया गया। हमने पूरी शूटिंग कोलकाता में की, लेकिन जानबूझकर शहर के उन हिस्सों को चुना जो आमतौर पर फिल्मों में दिखाई नहीं देते। इसमें आपको कोलकाता का ऐसा चेहरा देखने को मिलेगा, जिसे शायद पहले किसी फिल्म या सीरीज में नहीं दिखाया गया है। कई लोकेशन इतनी रहस्यमयी और भयावह थीं कि अगर किसी को वहां आधे घंटे खड़े रहने के लिए भी कहा जाए, तो वह सहज महसूस नहीं करेगा। सस्पेंस और ड्रामा का संतुलन सबसे बड़ी चुनौती रही क्राइम थ्रिलर बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या होती है, इस पर अभिनय ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट में सस्पेंस और ड्रामा दोनों को साथ लेकर चलना पड़ता है। एक निर्देशक की पकड़ इन दोनों पहलुओं पर समान रूप से मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि दर्शकों को कहानी से जोड़े रखने के लिए रहस्य और भावनात्मक जुड़ाव, दोनों जरूरी हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई निर्देशक इन दोनों तत्वों को बराबर महत्व देने की कोशिश करता है, तो वह अपने लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर लेता है, क्योंकि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता।

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर जल्द ही जी 5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आने वाली हैं। अभिनय देव के निर्देशन में बनी यह सीरीज 5 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। इस नियो-नोयर क्राइम थ्रिलर सीरीज में करिश्मा के साथ जिस्सू सेनगुप्ता, सूर्या शर्मा, सोनी राजदान और अनुभवी अभिनेत्री हेलेन शामिल हैं। वहीं परेश पाहुजा, मेघना मलिक, अजिंक्य देव, के.के. रैना और गायक शान भी विशेष भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस सीरीज और इसकी शूटिंग के अनुभव को लेकर अभिनय देव ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। अपराध से ज्यादा किरदारों की कहानी बताएगी यह सीरीज इस कहानी की सबसे अच्छी बात को लेकर अभिनय ने कहा कि जब मैंने इस पर बेस्ड किताब पढ़ी थी, तब मुझे यह बात बहुत पसंद आई कि यह एक क्राइम स्टोरी की तरह लिखी गई है, लेकिन इसके सभी किरदार बेहद बेहतरीन हैं। किताब में इन पात्रों को बहुत गहराई से लिखा गया है और हमने सीरीज में भी उन्हें उसी संवेदनशीलता के साथ दिखाने की कोशिश की है। ये ऐसे किरदार हैं, जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी में तो दिखाई देते हैं, लेकिन फिल्मों में कम नजर आते हैं। कोलकाता की अनदेखी गलियों में हुई इस वेब सीरीज की शूटिंग अभिनय ने बताया कि पूरी सीरीज की शूटिंग वास्तविक लोकेशनों पर की गई है और इसके लिए एक भी सेट नहीं बनाया गया। हमने पूरी शूटिंग कोलकाता में की, लेकिन जानबूझकर शहर के उन हिस्सों को चुना जो आमतौर पर फिल्मों में दिखाई नहीं देते। इसमें आपको कोलकाता का ऐसा चेहरा देखने को मिलेगा, जिसे शायद पहले किसी फिल्म या सीरीज में नहीं दिखाया गया है। कई लोकेशन इतनी रहस्यमयी और भयावह थीं कि अगर किसी को वहां आधे घंटे खड़े रहने के लिए भी कहा जाए, तो वह सहज महसूस नहीं करेगा। सस्पेंस और ड्रामा का संतुलन सबसे बड़ी चुनौती रही क्राइम थ्रिलर बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या होती है, इस पर अभिनय ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट में सस्पेंस और ड्रामा दोनों को साथ लेकर चलना पड़ता है। एक निर्देशक की पकड़ इन दोनों पहलुओं पर समान रूप से मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि दर्शकों को कहानी से जोड़े रखने के लिए रहस्य और भावनात्मक जुड़ाव, दोनों जरूरी हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई निर्देशक इन दोनों तत्वों को बराबर महत्व देने की कोशिश करता है, तो वह अपने लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर लेता है, क्योंकि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता।

‘बरतन मंझने वाली’ हाल ही में मंत्री बनीं – और वह बंगाल की पहली बीजेपी कैबिनेट में सबसे चर्चित चेहरा हैं

'बरतन मंझने वाली' हाल ही में मंत्री बनीं - और वह बंगाल की पहली बीजेपी कैबिनेट में सबसे चर्चित चेहरा हैं

जिस क्षण उसका नाम पुकारा गया: राजभवन के लोक भवन में सोमवार सुबह जैसे ही मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने पश्चिम बंगाल के नए मंत्रियों की सूची पढ़ी, एक नाम ने हंगामा रोक दिया। कलिता माझी – जिन्होंने वर्षों तक दूसरे लोगों के घरों में बर्तन धोए और फर्श साफ किया – को बंगाल की पहली भाजपा सरकार में राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई जा रही थी। सबसे नीचे जिया गया जीवन: कलिता माझी की यात्रा में कोई शॉर्टकट नहीं था। गरीबी का मतलब था घरेलू काम – किसी और की रसोई, किसी और के बर्तन, किसी और की फर्श। राजनीति ने उन्हें बाहर निकलने का रास्ता दिया, और जब भाजपा ने उन्हें टिकट दिया, तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से ले लिया, और टीएमसी के मजबूत गढ़ को हरा दिया, जिसकी कुछ लोगों ने भविष्यवाणी की थी। शपथ लेना: जैसे ही राज्यपाल आरएन रवि ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, कलिता माझी वह छवि बन गईं जो इस कैबिनेट विस्तार को परिभाषित करेंगी – क्रिकेटर नहीं, दलबदलू नहीं, रणनीतिकार नहीं, बल्कि एक महिला जिसके पास कभी कुछ नहीं था, राजभवन के हॉल में खड़े होकर शासन करने की शपथ ली। सीएम अधिकारी का क्या इरादा था: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की कलिता माझी को चुनना आकस्मिक नहीं था। ऐसे राज्य में जहां राजनीतिक पूंजी को लंबे समय से ताकत और धन में मापा जाता रहा है, एक पूर्व घरेलू कामगार को कैबिनेट में रखना एक जानबूझकर दिया गया संदेश था – कि इस सरकार में, जमीनी स्तर का संघर्ष संरक्षण से अधिक मायने रखता है। घर वापस उत्सव: जबकि शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता में चल रहा था, हुगली में माझी के गृह गांव ने अपनी कहानी खुद बताई। बात तेजी से फैली, और मध्य सुबह तक, जश्न सड़कों पर फैल गया – पड़ोसियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और आम निवासियों ने एक ऐसे क्षण को चिह्नित किया, जो कई लोगों को, राजनीति की तरह कम और प्रतिशोध की तरह अधिक लगा। वह जिस मंत्रिमंडल में शामिल हुईं: कलिता माझी 35 सदस्यीय कैबिनेट में अपनी सीट लेती हैं जिसमें एक पूर्व टेस्ट क्रिकेटर, वरिष्ठ रणनीतिकार, टीएमसी दलबदलू और युवा जमीनी स्तर के चेहरे शामिल हैं। यह जानबूझकर फैलाया गया जाल है – लेकिन इस विस्तार की कहानी में, बर्तन धोने वाली महिला ने ही सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया है, और शायद, सबसे अधिक आशा भी।

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

फ्रेंच ओपन 2026 के विमेंस सिंगल्स में सोमवार को बड़ा उलटफेर हुआ। यूक्रेन की 15वीं वरीय मार्ता कोस्त्युक ने चार बार की चैंपियन और तीसरी वरीय इगा स्वियातेक को 7-5, 6-1 से हराकर बाहर कर दिया। मुकाबला 1 घंटा 39 मिनट चला। पहले सेट में कड़ी चुनौती के बाद स्वियातेक लय खो बैठीं और दूसरे सेट में वापसी नहीं कर सकीं। हार के बाद उन्होंने कहा कि वह मैच पर नियंत्रण नहीं रख सकीं और दबाव के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। कोस्त्युक ने मिले मौकों का पूरा फायदा उठाया। कोस्त्युक का मैच स्वितोलिना होगा क्वार्टर फाइनल में कोस्त्युक का सामना यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना से होगा। स्वितोलिना ने स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनसिच को हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। इस मुकाबले की विजेता ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली यूक्रेनी महिला खिलाड़ी बनेगी। एक अन्य मैच में रोमानिया की सोराना सिर्स्तेआ ने चीन की वांग शियू को 6-3, 7-6 (4) से हराकर 17 साल बाद रोलां गैरो के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। यह उनके करियर का तीसरा ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल है। अब उनका सामना रूस की मीरा एंड्रीवा से होगा। एंड्रीवा ने जिल टाइखमान को 6-3, 6-2 से हराया। पुरुषों में ज्वेरेव जीते, कैस्पर रूड बाहर पुरुष एकल वर्ग में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जेस्पर डी जोंग को सीधे सेटों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोन्सेका ने कैस्पर रूड को 7-5, 7-6 (6), 5-7, 6-2 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। वायेहो पर 65,000 यूरो का जुर्माना, महिला अंपायर पर टिप्पणी की पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर 65 हजार यूरो (करीब 76 हजार डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि उनके टूर्नामेंट से मिली पुरस्कार राशि की लगभग आधी है। पिछले हफ्ते दूसरे दौर में हारने के बाद वायेहो ने कहा था कि इतने कठिन मुकाबले में पुरुष अंपायर होना चाहिए था और महिला अंपायर के लिए ऐसी स्थिति संभालना मुश्किल है। फ्रैंच ओपन की डायरेक्टर अमेली मौरेस्मो ने सोमवार को कहा कि ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। ——————————————–

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

चार बार की चैंपियन इगा स्वियातेक फ्रेंच ओपन से बाहर:यूक्रेन की कोस्त्युक ने हराया; महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले खिलाड़ी पर जुर्माना

फ्रेंच ओपन 2026 के विमेंस सिंगल्स में सोमवार को बड़ा उलटफेर हुआ। यूक्रेन की 15वीं वरीय मार्ता कोस्त्युक ने चार बार की चैंपियन और तीसरी वरीय इगा स्वियातेक को 7-5, 6-1 से हराकर बाहर कर दिया। मुकाबला 1 घंटा 39 मिनट चला। दूसरी ओर महिला अंपायर पर कमेंट करने वाले पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर जुर्माना लगाया गया है। कोस्त्युक का मैच स्वितोलिना होगा क्वार्टर फाइनल में कोस्त्युक का सामना यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना से होगा। स्वितोलिना ने स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनसिच को हराकर अंतिम-8 में जगह बनाई। इस मुकाबले की विजेता ओपन एरा में फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली यूक्रेनी महिला खिलाड़ी बनेगी। एक अन्य मैच में रोमानिया की सोराना सिर्स्तेआ ने चीन की वांग शियू को 6-3, 7-6 (4) से हराकर 17 साल बाद रोलां गैरो के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। यह उनके करियर का तीसरा ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल है। अब उनका सामना रूस की मीरा एंड्रीवा से होगा। एंड्रीवा ने जिल टाइखमान को 6-3, 6-2 से हराया। पुरुषों में ज्वेरेव जीते, कैस्पर रूड बाहर पुरुष एकल वर्ग में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जेस्पर डी जोंग को सीधे सेटों में हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोन्सेका ने कैस्पर रूड को 7-5, 7-6 (6), 5-7, 6-2 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। वायेहो पर 65,000 यूरो का जुर्माना, महिला अंपायर पर टिप्पणी की पैराग्वे के एडोल्फो डेनियल वायेहो पर 65 हजार यूरो (करीब 76 हजार डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है। यह राशि उनके टूर्नामेंट से मिली पुरस्कार राशि की लगभग आधी है। पिछले हफ्ते दूसरे दौर में हारने के बाद वायेहो ने कहा था कि इतने कठिन मुकाबले में पुरुष अंपायर होना चाहिए था और महिला अंपायर के लिए ऐसी स्थिति संभालना मुश्किल है। फ्रैंच ओपन की डायरेक्टर अमेली मौरेस्मो ने सोमवार को कहा कि ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। ——————————————–

खड़गे की वापसी, कमलनाथ पर सवालिया निशान: बड़े नामों ने बढ़ाई कांग्रेस की राज्यसभा दौड़ | भारत समाचार

AP EAMCET 2026 Results Soon at cets.apsche.ap.gov.in — Steps To Check AP EAPCET Scorecard, Rank Card Today. (Representative/File Photo)

आखरी अपडेट:01 जून, 2026, 16:03 IST अपने स्वयं के नेताओं के अलावा, कांग्रेस उन राज्यों में प्रतिनिधित्व सुरक्षित करने के लिए सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रही है जहां उसके पास स्वतंत्र रूप से उम्मीदवारों को चुनने के लिए संख्या की कमी है। मल्लिकार्जुन खड़गे (बाएं) और कमल नाथ मैदान में बड़े नाम हैं। जैसे-जैसे 18 जून को राज्यसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने, राज्य-स्तरीय गुटीय समीकरणों को प्रबंधित करने और प्रतिकूल अंकगणित या क्रॉस-वोटिंग के कारण सीटें न खोने देने जैसे उच्च-दांव वाले संतुलन कार्य से जूझ रहा है। कई प्रमुख विपक्षी नेताओं की शर्तें समाप्त होने के साथ, आगामी चुनावों में पार्टी के भीतर इस बात पर गहन चर्चा शुरू होने की उम्मीद है कि उच्च सदन के लिए किसे और कहाँ से नामांकित किया जाए। इस मिश्रण में सबसे बड़े नामों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं, जिनका राज्यसभा कार्यकाल इस साल समाप्त हो रहा है। खड़गे के उच्च सदन में लौटने की उम्मीद है, जिससे उनका दोबारा नामांकन पार्टी के सामने सबसे कम विवादास्पद फैसलों में से एक बन जाएगा। बड़ी साज़िश मध्य प्रदेश को लेकर है, जहां कांग्रेस के पास केवल एक यथार्थवादी राज्यसभा सीट है और कई राजनीतिक पहलुओं पर विचार करना है। संसद में वापस आये कमलनाथ? मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ चुनाव से पहले सबसे चर्चित नामों में से एक बनकर उभरे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या नाथ को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए या उनकी जगह किसी अन्य उम्मीदवार को जगह दी जानी चाहिए। यह निर्णय एक राज्यसभा सीट से परे महत्व रखता है। हाल के वर्षों में अग्रिम पंक्ति की राजनीति से पीछे हटने के बावजूद नाथ राज्य में कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बने हुए हैं। राज्यसभा नामांकन अनुभवी नेता के लिए नए सिरे से राष्ट्रीय भूमिका का संकेत दे सकता है। साथ ही, पार्टी को राज्य के नेताओं के प्रतिस्पर्धी दावों से निपटना होगा और ऐसे राज्य में गुटीय हितों को संतुलित करना होगा जहां वह 2020 में सत्ता खोने के बाद से उबरने के लिए संघर्ष कर रही है। दिग्विजय सिंह अलग हट गए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा एक और राज्यसभा कार्यकाल अस्वीकार करने के बाद मुकाबला और अधिक खुला हो गया है। उनके फैसले ने एक नए सदस्य के लिए जगह खाली कर दी है, साथ ही इस बारे में अटकलें भी तेज हो गई हैं कि पार्टी अंततः अपनी संसदीय रणनीति के लिए किसे सबसे मूल्यवान मानती है। कांग्रेस नेता इस बात को लेकर सचेत हैं कि मध्य प्रदेश से चुना गया उम्मीदवार पार्टी के विधायकों को एकजुट रखने में सक्षम होना चाहिए, यह देखते हुए कि वहां केवल तीन सीटें हैं। मध्य प्रदेश में जॉर्ज कुरियन की दौड़ में भाजपा को दो सीटें मिलने की संभावना है। गठबंधन प्रबंधन भी महत्वपूर्ण अपने स्वयं के नेताओं के अलावा, कांग्रेस उन राज्यों में प्रतिनिधित्व सुरक्षित करने के लिए सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रही है जहां उसके पास स्वतंत्र रूप से उम्मीदवारों को चुनने के लिए संख्या की कमी है। झारखंड में पार्टी राज्यसभा सीट के लिए सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) पर निर्भर है। तमिलनाडु में, कांग्रेस भी अपने गठबंधन नेटवर्क के माध्यम से संभावनाएं तलाश रही है, यह रेखांकित करते हुए कि उच्च सदन में अपनी ताकत बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारी कैसे महत्वपूर्ण हो गई है। बातचीत पार्टी के सामने मौजूद व्यापक वास्तविकता को दर्शाती है: जबकि यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विपक्षी ताकत बनी हुई है, राज्यसभा में सदस्यों को भेजने की इसकी क्षमता कई राज्यों में गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर करती है। क्रॉस वोटिंग का साया उम्मीदवार का चयन पार्टी अनुशासन की चिंताओं से भी प्रभावित हो रहा है। हाल के राज्यसभा चुनावों में कई राज्यों में विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग की घटनाएं देखी गईं, जिससे कांग्रेस के भीतर चिंता पैदा हो गई। इसलिए पार्टी नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन करें जो विधायी दलों के भीतर व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त कर सकें और गुटीय असंतोष को भड़काने से बच सकें। यह विचार उन राज्यों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है जहां कांग्रेस की संख्या सीट सुरक्षित करने के लिए आवश्यक सीमा से थोड़ी ही ऊपर है। एक संख्या खेल से भी अधिक कांग्रेस के लिए, राज्यसभा चुनाव एक नियमित संसदीय अभ्यास से कहीं अधिक बनता जा रहा है। वे कई वरिष्ठ नेताओं की भविष्य की भूमिकाएँ निर्धारित करेंगे, आंतरिक आकांक्षाओं को प्रबंधित करने की पार्टी की क्षमता का परीक्षण करेंगे और इसके नेतृत्व की अगली पीढ़ी के बारे में सुराग देंगे। चाहे वह खड़गे की अपेक्षित वापसी हो, कमल नाथ को लेकर अटकलें हों, या सहयोगियों के माध्यम से प्रतिनिधित्व की तलाश हो, आने वाले दिनों में पार्टी की पसंद व्यस्त चुनावी कैलेंडर से पहले उसकी प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कुछ बताएगी। जैसे-जैसे नामांकन नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस के सामने अब केंद्रीय सवाल यह नहीं है कि क्या वह अपनी आवंटित सीटें जीत पाएगी, बल्कि यह है कि उसके कौन से दिग्गज अंततः उन पर कब्जा करेंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया खड़गे की वापसी, कमलनाथ पर सवालिया निशान: बड़े नामों ने कांग्रेस की राज्यसभा दौड़ को गर्म कर दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा चुनाव(टी)कांग्रेस की राज्यसभा रणनीति(टी)मल्लिकार्जुन खड़गे को दोबारा नामांकन(टी)कमलनाथ को राज्यसभा(टी)मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति(टी)दिग्विजय सिंह निर्णय(टी)गठबंधन प्रबंधन कांग्रेस(टी)क्रॉस वोटिंग की चिंताएं

रणबीर कपूर के राम बनने पर इम्तियाज अली का बयान:बोले- रणबीर में हर तरह के रोल करने की क्षमता, वे कुछ भी कर सकते हैं

रणबीर कपूर के राम बनने पर इम्तियाज अली का बयान:बोले- रणबीर में हर तरह के रोल करने की क्षमता, वे कुछ भी कर सकते हैं

डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर के भगवान राम का किरदार निभाने पर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। रणबीर के साथ ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके इम्तियाज ने फिल्मबीट को दिए इंटरव्यू में रणबीर की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रणबीर एक प्योर एक्टर हैं और वे पर्दे पर कुछ भी कर सकते हैं। इम्तियाज के मुताबिक, भगवान राम का किरदार निभाना खुद रणबीर के लिए भी काफी फायदेमंद रहेगा, क्योंकि वे जिस भी किरदार को निभाते हैं, उससे बहुत कुछ सीखते हैं। रणबीर में हर तरह के रोल करने की क्षमता इम्तियाज अली से पूछा गया था कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि ‘एनिमल’ जैसी फिल्म करने वाले रणबीर कपूर ‘रामायण’ में भगवान राम का रोल करेंगे? इस पर इम्तियाज ने कहा, ‘रणबीर एक एक्टर के तौर पर कुछ भी कर सकते हैं। उन्हें अलग-अलग तरह के रोल करने चाहिए। जब वे कोई नया रोल करते हैं, तो वे पूरी तरह उसी में ढल जाते हैं। मैं बहुत खुश हूं कि वे भगवान राम का रोल कर रहे हैं क्योंकि वे इस किरदार में एक असलियत और असर लेकर आएंगे। भगवान राम के किरदार को मानवीय और पर्सनल तरीके से देखना काफी अच्छा होगा।’ इस रोल से रणबीर की जिंदगी होगी समृद्ध इम्तियाज ने आगे कहा कि वे रणबीर को स्क्रीन पर श्री राम के रूप में देखने के लिए काफी उत्सुक हैं। उनके मुताबिक, इस रोल से रणबीर को खुद बहुत फायदा होने वाला है। वे एक ऐसे एक्टर हैं जो अपने निभाए जा रहे किरदार की खूबियों को खुद के अंदर सोख लेते हैं। वे भगवान राम के चरित्र से काफी कुछ अच्छी चीजें अपनी असल जिंदगी में साथ लेकर जाएंगे। यह अनुभव उनके लिए बहुत समृद्ध करने वाला साबित होगा। दो पार्ट में रिलीज होगी फिल्म रामायण नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बन रही ‘रामायण’ भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है। नमित मल्होत्रा के प्रोडक्शन में बन रही इस मेगा बजट फिल्म को दो भागों में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पहला पार्ट दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में आएगा, जबकि इसका दूसरा पार्ट दिवाली 2027 में रिलीज करने की तैयारी है। इस फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान और हंस जिमर तैयार कर रहे हैं। हाल ही में फिल्म का पहला टीजर भी रिलीज किया गया था। फिल्म की स्टारकास्ट और रणबीर का डबल रोल इस फिल्म में रणबीर कपूर के अलावा कई बड़े स्टार्स नजर आने वाले हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। वहीं केजीएफ फेम एक्टर यश रावण के रोल में दिखेंगे। इनके अलावा सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। रणबीर कपूर इस फिल्म में भगवान राम के साथ-साथ भगवान परशुराम का किरदार भी निभाते नजर आएंगे। रणबीर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें भगवान विष्णु के दो अलग-अलग अवतारों को निभाने का मौका मिला, जो उनके लिए शानदार अनुभव है।