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महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

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महबूब खान ने बदला नाम और फातिमा बन गईं नरगिस:नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े रोमांचक किस्से

‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘मदर इंडिया’ जैसी कल्ट फिल्मो की अभिनेत्री नरगिस दत्त सिर्फ एक स्टार नहीं, हिंदी सिनेमा की एक विरासत थीं। अपने करियर में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली नरगिस की 97वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ रोमांचक किस्से। नरगिस का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां कला और संगीत विरासत का हिस्सा थे। उनकी मां जद्दन बाई अपने दौर की मशहूर गायिका, संगीतकार, फिल्म निर्माता और अभिनेत्री थीं। बचपन में नरगिस का नाम फातिमा तेजेश्वरी रखा गया था, लेकिन फिल्मकार महबूब खान ने उन्हें नया नाम दिया- नरगिस। उनका मानना था कि ‘न’ अक्षर से शुरू होने वाले नाम भाग्यशाली होते हैं। महज 14 वर्ष की उम्र में नरगिस को महबूब खान की फिल्म ‘तकदीर’ मिली। स्क्रीन टेस्ट के दौरान ही उनकी प्रतिभा ने सभी को प्रभावित कर दिया और वे रातोंरात फिल्मी दुनिया की नई खोज बन गईं। हालांकि उनकी औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन वे हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाएं जानती थीं। इतना ही नहीं, वे अच्छी सितार वादक भी थीं और उन्होंने उस्ताद विलायत खान से सितार सीखा था। फिल्मों में आने से पहले वे ‘बेबी रानी’ के नाम से जानी जाती थीं। राजकपूर के साथ एक अधूरी प्रेमकथा नरगिस और राज कपूर की कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब वे बच्चे थे। वर्षों बाद जब राज अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नायिका की तलाश कर रहे थे, तो उनकी पसंद नरगिस पर जाकर रुकी। ‘आग’ के साथ शुरू हुई यह साझेदारी जल्द ही निजी रिश्ते में बदल गई। 1948 से 1956 के बीच दोनों ने लगभग 16 फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा बन गई। ‘बरसात’, ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे का सबसे लोकप्रिय रोमांटिक जोड़ा बना दिया। करीबी मित्र और अभिनेत्री निम्मी के अनुसार…‘दोनों एक-दूसरे को प्यार से ‘बेब्स’ और ‘बेबी’ कहकर बुलाते थे। लेकिन इस रिश्ते की सबसे बड़ी बाधा यह थी कि राज पहले से शादीशुदा थे।‘ ‘मदर इंडिया’ ने बदली नरगिस की जिंदगी 1957 में आई ‘मदर इंडिया’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा का मील का पत्थर साबित हुई। इसी फिल्म ने नरगिस को अभिनय के उस शिखर पर पहुंचाया, जहां बहुत कम कलाकार पहुंच पाते हैं। लेकिन शूटिंग के दौरान घटी एक घटना ने उनकी निजी जिंदगी भी बदल दी। शूटिंग के दौरान सेट पर लगी आग में नरगिस फंस गईं। उस समय सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकाला। इस हादसे में दोनों घायल हुए, लेकिन यहीं से उनके बीच भावनात्मक नजदीकियां बढ़ीं। धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम में बदल गया और 1958 में दोनों ने विवाह कर लिया। उन दिनों उनके रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी उड़ीं, लेकिन सुनील दत्त हर परिस्थिति में नरगिस के साथ खड़े रहे। विवाह के बाद नरगिस ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली और पूरी तरह परिवार को समय देना शुरू कर दिया। सुनील दत्त उन्हें प्यार से मनरो कहकर बुलाते थे, जबकि नरगिस ने उन्हें फ्रैंसली नाम दिया था।

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