पेट्रोल, डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी:नई दरें 1 जून से लागू होंगी; देश के भीतर ईंधन खरीदने वालों पर कोई असर नहीं

केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई जहाज के ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटा दी है। शनिवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, यह नई दरें 1 जून से लागू होंगी। इस फैसले से देश के भीतर ईंधन खरीदने वालों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार की घोषणा के मुताबिक नई एक्सपोर्ट ड्यूटी हर 14 दिन में समीक्षा के आधार पर बदलाव इन दरों को हर 15 दिन में रिवाइज किया जाता है। यह बदलाव पिछली समीक्षा के बाद की अवधि के दौरान कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर आधारित होते हैं। नॉलेज पार्ट: क्या होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी और ATF?
भारतीय महिला टीम दूसरा टी-20 26 रन से हारी:इंग्लैंड ने सीरीज 1-1 से बराबर की,केम्प ने 39 रन बनाने के साथ 2 विकेट लिए

ब्रिस्टल में खेले गए दूसरे टी-20 इंटरनेशनल मैच में इंग्लैंड की महिला टीम ने भारत को 26 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने 3 मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। इंग्लैंड की जीत में ऑलराउंडर फ्रेया केम्प ने 13 गेंदों में नाबाद 39 रन बनाए और 15 रन देकर 2 विकेट लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 168 रन बनाए थे। जवाब में भारतीय टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 142 रन ही बना सकी। सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच मंगलवार को टांटन में खेला जाएगा। केम्प ने इंग्लैंड की पारी संभाली इंग्लैंड की शुरुआत धीमी रही थी। पावरप्ले के बाद टीम का स्कोर 1 विकेट पर 35 रन था। भारत की लेफ्ट ऑर्म स्पिनर एन श्री चरणी ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 17वें ओवर में 4 विकेट पर 116 रन के स्कोर पर फ्रेया केम्प क्रीज पर आईं। उन्होंने 300 के स्ट्राइक रेट से 13 गेंदों में नाबाद 39 रन बनाए। आखिरी ओवर में केम्प ने अरुंधति रेड्डी की पहली गेंद पर लॉन्ग ऑन के ऊपर से छक्का लगाया। फिर लगातार दो चौके और आखिरी गेंद पर एक और छक्का लगाकर इंग्लैंड का स्कोर 168 तक पहुंचाया। दानी गिब्सन ने भी उनका साथ दिया। दोनों ने नंदनी शर्मा के ओवर में 14 रन बटोरे थे। श्री चरणी की शानदार स्पिन, कप्तान नाइट फिर फ्लॉप रहीं भारतीय गेंदबाज एन श्री चरणी ने मध्यक्रम में इंग्लैंड को बड़े झटके दिए। उन्होंने 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट लिए। चरणी ने पहले दानी व्याट-हॉज (36 रन) और एमी जोन्स की साझेदारी तोड़ी। हॉज का कैच स्मृति मंधाना ने लिया। इसके बाद जोन्स को हरमनप्रीत कौर के हाथों कैच कराया। इंग्लैंड की कप्तान हीथर नाइट फिर अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सकीं। उन्होंने 14 गेंदों में 18 रन बनाए, लेकिन श्री चरणी की गेंद पर आसान रिटर्न कैच दे बैठीं। इस सीजन में नाइट का खराब फॉर्म जारी है। उन्होंने पिछली पांच टी-20 पारियों में 19, 25, 18, 21 और 18 रन बनाए हैं। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बैटिंग लड़खड़ाई 169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। ओपनर शेफाली वर्मा को लॉरेन बेल ने तीसरे ओवर में कवर पर कैच कराया। हालांकि, इंग्लैंड ने मैच में दो कैच छोड़े। सोफी एक्लेस्टोन ने यास्तिका भाटिया का नीचा कैच छोड़ा, जबकि चार्ली डीन ने अपनी ही गेंद पर उन्हें 29 रन के स्कोर पर जीवनदान दिया। स्मृति मंधाना भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं और केम्प की गेंद पर एलिस कैप्सी को कैच दे बैठीं। भारत की ओर से यास्तिका भाटिया ने सबसे ज्यादा 33 रन बनाए, लेकिन इसके लिए 36 गेंदें खेलीं। रन गति बढ़ाने के दबाव में यास्तिका ‘रिटायर्ड आउट’ होकर लौट गईं। आखिरी ओवरों में लगातार विकेट गिरे यास्तिका के जाने के बाद जेमिमा रोड्रिग्स क्रीज पर आईं। भारत को आखिरी 5 ओवरों में जीत के लिए 60 रन चाहिए थे, लेकिन फ्रेया केम्प ने जेमिमा को अपनी दूसरी गेंद पर कवर में कैच आउट करा दिया। इसके बाद चार्ली डीन ने एक ही ओवर में ऋचा घोष और कप्तान हरमनप्रीत कौर को आउट कर भारत की उम्मीदें खत्म कर दीं। आखिरी 12 गेंदों में भारत को 39 रन चाहिए थे, लेकिन पुछल्ले बल्लेबाज रन नहीं बना सके। इंग्लैंड की ओर से चार्ली डीन ने 4 ओवर में 20 रन देकर 2 विकेट लिए। लॉरेन बेल और फ्रेया केम्प को भी 2-2 विकेट मिले।
भारतीय महिला टीम दूसरा टी-20 26 रन से हारी:इंग्लैंड ने सीरीज 1-1 से बराबर की,केम्प ने 39 रन बनाने के साथ 2 विकेट लिए

ब्रिस्टल में खेले गए दूसरे टी-20 इंटरनेशनल मैच में इंग्लैंड की महिला टीम ने भारत को 26 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने 3 मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। इंग्लैंड की जीत में ऑलराउंडर फ्रेया केम्प ने 13 गेंदों में नाबाद 39 रन बनाए और 15 रन देकर 2 विकेट लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 168 रन बनाए थे। जवाब में भारतीय टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 142 रन ही बना सकी। सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच मंगलवार को टांटन में खेला जाएगा। केम्प ने इंग्लैंड की पारी संभाली इंग्लैंड की शुरुआत धीमी रही थी। पावरप्ले के बाद टीम का स्कोर 1 विकेट पर 35 रन था। भारत की लेफ्ट ऑर्म स्पिनर एन श्री चरणी ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 17वें ओवर में 4 विकेट पर 116 रन के स्कोर पर फ्रेया केम्प क्रीज पर आईं। उन्होंने 300 के स्ट्राइक रेट से 13 गेंदों में नाबाद 39 रन बनाए। आखिरी ओवर में केम्प ने अरुंधति रेड्डी की पहली गेंद पर लॉन्ग ऑन के ऊपर से छक्का लगाया। फिर लगातार दो चौके और आखिरी गेंद पर एक और छक्का लगाकर इंग्लैंड का स्कोर 168 तक पहुंचाया। दानी गिब्सन ने भी उनका साथ दिया। दोनों ने नंदनी शर्मा के ओवर में 14 रन बटोरे थे। श्री चरणी की शानदार स्पिन, कप्तान नाइट फिर फ्लॉप रहीं भारतीय गेंदबाज एन श्री चरणी ने मध्यक्रम में इंग्लैंड को बड़े झटके दिए। उन्होंने 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट लिए। चरणी ने पहले दानी व्याट-हॉज (36 रन) और एमी जोन्स की साझेदारी तोड़ी। हॉज का कैच स्मृति मंधाना ने लिया। इसके बाद जोन्स को हरमनप्रीत कौर के हाथों कैच कराया। इंग्लैंड की कप्तान हीथर नाइट फिर अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सकीं। उन्होंने 14 गेंदों में 18 रन बनाए, लेकिन श्री चरणी की गेंद पर आसान रिटर्न कैच दे बैठीं। इस सीजन में नाइट का खराब फॉर्म जारी है। उन्होंने पिछली पांच टी-20 पारियों में 19, 25, 18, 21 और 18 रन बनाए हैं। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बैटिंग लड़खड़ाई 169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। ओपनर शेफाली वर्मा को लॉरेन बेल ने तीसरे ओवर में कवर पर कैच कराया। हालांकि, इंग्लैंड ने मैच में दो कैच छोड़े। सोफी एक्लेस्टोन ने यास्तिका भाटिया का नीचा कैच छोड़ा, जबकि चार्ली डीन ने अपनी ही गेंद पर उन्हें 29 रन के स्कोर पर जीवनदान दिया। स्मृति मंधाना भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं और केम्प की गेंद पर एलिस कैप्सी को कैच दे बैठीं। भारत की ओर से यास्तिका भाटिया ने सबसे ज्यादा 33 रन बनाए, लेकिन इसके लिए 36 गेंदें खेलीं। रन गति बढ़ाने के दबाव में यास्तिका ‘रिटायर्ड आउट’ होकर लौट गईं। आखिरी ओवरों में लगातार विकेट गिरे यास्तिका के जाने के बाद जेमिमा रोड्रिग्स क्रीज पर आईं। भारत को आखिरी 5 ओवरों में जीत के लिए 60 रन चाहिए थे, लेकिन फ्रेया केम्प ने जेमिमा को अपनी दूसरी गेंद पर कवर में कैच आउट करा दिया। इसके बाद चार्ली डीन ने एक ही ओवर में ऋचा घोष और कप्तान हरमनप्रीत कौर को आउट कर भारत की उम्मीदें खत्म कर दीं। आखिरी 12 गेंदों में भारत को 39 रन चाहिए थे, लेकिन पुछल्ले बल्लेबाज रन नहीं बना सके। इंग्लैंड की ओर से चार्ली डीन ने 4 ओवर में 20 रन देकर 2 विकेट लिए। लॉरेन बेल और फ्रेया केम्प को भी 2-2 विकेट मिले।
आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं

1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी। सवाल: फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ किस बारे में है? जवाब: यह सिर्फ एक आरबीआई गवर्नर नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी की कहानी है। आर्थिक संकट के समय हर नजर आप पर हो तो कितना दबाव होता है, फिल्म यही दिखाती है। ऐसे समय परिवार और निजी जिंदगी पीछे छूट जाती है। फिल्म उसी संघर्ष और दबाव को दिखाती है। सवाल: फिल्म में इकोनॉमिक्स और आरबीआई जैसे कठिन विषय हैं। आम दर्शक इसे कैसे समझ पाएंगे? जवाब: फिल्म में जीडीपी, फिस्कल डेफिसिट और इन्फ्लेशन जैसे शब्द हैं, लेकिन उन्हें आसान तरीके से दिखाया गया है। यह क्लासरूम वाली फिल्म नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ है। यहां कम समय में देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की चुनौती ही रोमांच पैदा करती है। सवाल: इस किरदार की तैयारी कैसे की? जवाब: मैंने स्क्रिप्ट कई बार पढ़ी और जो बातें समझ नहीं आईं, उन्हें डायरेक्टर व राइटर्स से समझा। डायरेक्टर पढ़ने का मटेरियल और वीडियो भेजते थे। किरदार का लुक और बोलने का तरीका तय किया गया। करीब ढाई महीने तैयारी चली। टेक्निकल शब्दों को समझकर उन्हें आसान तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल था। सवाल: एक तरफ आप राम गोपाल वर्मा की फिल्म कर रहे थे, जहां माहौल बिल्कुल अलग था, जबकि ‘गवर्नर’ के सेट पर लोग आपको बहुत शांत और गंभीर इंसान के तौर पर देखने लगे थे। ऐसा क्या था इस किरदार में? जवाब: यह किरदार कम बोलने वाला इंसान है, जो ज्यादातर अपने विचारों में व्यस्त रहता है। नंबर, गणित और बड़ी जिम्मेदारियों से जुड़े लोग अक्सर शांत होते हैं और लगातार चुनौतियों पर सोचते रहते हैं। आरबीआई गवर्नर भी हर समय संकट सुलझाने में लगा रहता है, इसलिए यह गंभीर नहीं बल्कि भीतर से लगातार सोचने वाले व्यक्ति का किरदार है। सवाल: क्या फिल्म में गंभीरता के साथ ह्यूमर भी देखने को मिलेगा? जवाब: बिल्कुल। फिल्म में फैमिली बॉन्डिंग है। मधु मेरी पत्नी का रोल कर रही हैं। उनकी फिल्म ‘रोजा’ देखकर पागल हो गए थे। उनके साथ के सीन हल्के और प्यारे हैं। ऑफिस के कुछ हिस्सों में भी ह्यूमर है। थ्रिलर होने के कारण दर्शक कहानी से जुड़े रहेंगे। सवाल: आप इतिहास के छात्र भी रहे हैं। 1991 के आर्थिक संकट और आज के हालात में क्या समानता देखते हैं? जवाब: 1991 में गल्फ वॉर के दौरान तेल के दाम बढ़ रहे थे और भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। आज भी यूएस-ईरान जैसे तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होता है, डॉलर मजबूत होता है और भारत जैसे देशों पर दबाव बढ़ता है। इतिहास पूरी तरह नहीं दोहराता, लेकिन उसकी झलक जरूर दिखती है। सवाल: ऐसे संकट के समय आम आदमी क्या कर सकता है? जवाब: बड़े आर्थिक फैसले एक्सपर्ट्स और सरकारों का काम हैं। आम आदमी अपने खर्च नियंत्रित कर सकता है। मुश्किल समय में लोग फिजूल खर्च, घर खरीदने, घूमने और बड़े खर्चों से बचते हैं। लोग संभलकर चलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आगे का समय कठिन हो सकता है। सवाल: क्या आम आदमी सिस्टम बदल सकता है? जवाब: सिस्टम तभी तक मजबूत रहता है, जब तक आम आदमी सवाल नहीं पूछता। समस्याएं नहीं सुनी जाएं तो लोग आवाज उठाते हैं। इतिहास में कई बार आम आदमी ने बदलाव लाया है। इमरजेंसी और 1991 के संकट जैसे दौरों में भी लोगों की ताकत सामने आई है। सवाल: फिल्म की रिलीज के साथ दूसरी बड़ी फिल्में भी आ रही हैं। क्या ऐसी फिल्मों को सोलो रिलीज मिलनी चाहिए? जवाब: भारत में सबसे बड़ी समस्या थिएटर की कमी है। सरकार और इंडस्ट्री ज्यादा सिनेमाघर बनवाएं तो छोटी-बड़ी सभी फिल्मों को बराबर मौका मिलेगा। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का अधिकार है। सवाल: क्या कुछ बड़े प्रोडक्शन हाउस की मोनोपोली भी खत्म होनी चाहिए? जवाब: हां। यह तय होना चाहिए कि किस बजट की फिल्म को कितने शो मिलें। छोटी फिल्मों को बड़ी फिल्मों के ज्यादा स्क्रीन लेने से नुकसान नहीं होना चाहिए। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का बराबर मौका मिलना चाहिए। सवाल: ओटीटी ने इस तरह की फिल्मों को कितना फायदा पहुंचाया? जवाब: ओटीटी ने बहुत फायदा पहुंचाया और मुझे भी अच्छा काम करने का मौका मिला। लेकिन अब प्लेटफॉर्म ज्यादा कमर्शियल और असुरक्षित हो गए हैं। पहले अलग तरह की कहानियों को ज्यादा मौका मिलता था, जो अब कम हो गया है। सवाल: दर्शक इस फिल्म से क्या लेकर जाएंगे? जवाब: इस फिल्म का सबसे बड़ा संदेश “जिद” है, लेकिन समझदारी वाली जिद। यह किरदार हर मुश्किल में रास्ता निकालने की कोशिश करता है और आखिर तक हार नहीं मानता। सवाल: क्या आपको लगता है कि आपकी जिंदगी और इस किरदार में कुछ समानता है? जवाब: हां, मेरी जिंदगी में भी जिद रही है। कभी समझदारी वाली, तो कभी थोड़ी बेवकूफी वाली जिद। लेकिन उसी जिद ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।
IPL 2026 के टॉप-10 फ्यूचर स्टार्स:सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए, प्रिंस ने कोहली को बोल्ड किया; प्रफुल ने वैभव को दो बार आउट किया

IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। 1. वैभव सूर्यवंशी, राजस्थान रॉयल्स बिहार के 15 साल के लेफ्ट हैंड बैटर वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। पिछले सीजन में सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू और सबसे तेज भारतीय शतक लगाने वाले वैभव ने इस बार 16 मैचों में 776 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 237.30 का रहा, जबकि उन्होंने 1 शतक और 5 अर्धशतक लगाए। राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 2025 मेगा ऑक्शन में 1.10 करोड़ रुपए में खरीदा था। वैभव ने 12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया था और भारत की अंडर-19 टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं। वैभव ने 20 या इससे कम गेंदों में 5 फिफ्टी लगाई। इस सीजन उन्होंने 36 बॉल में शतक लगाया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन प्लेऑफ के एलिमिनेटर में आया, जब उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ महज 29 गेंदों पर 97 रन ठोक दिए। इस पारी में उन्होंने 12 छक्के लगाए और एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनके नाम अब 72 छक्के लगाने का रिकॉर्ड हैं। वैभव ने इसके बाद क्वालिफायर-2 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। हालांकि राजस्थान रॉयल्स उस मैच में हारकर फाइनल तक पहुंचाने में नाकाम रही। 15 साल की उम्र में उन्होंने सीजन में 600+ रन बनाने वाले वे पहले बैटर भी बने। 2. आयुष म्हात्रे, चेन्नई सुपर किंग्स मुंबई के 18 साल के ओपनर आयुष म्हात्रे चोट की वजह से इस IPL में सिर्फ 6 ही मैच खेल सके। इसमें उन्होंने 177.87 की स्ट्राइक रेट से 201 रन बनाए। आयुष ने 17 साल की उम्र में मुंबई के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया और 2024-25 रणजी ट्रॉफी सीजन के अपने तीसरे ही मैच में शतक जड़ दिया। 2024 के आखिर में उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 117 गेंदों पर 181 रन बनाकर लिस्ट-ए क्रिकेट में 150+ रन बनाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज का रिकॉर्ड बनाया। IPL 2025 के मेगा ऑक्शन में आयुष अनसोल्ड रहे, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ के चोटिल होने के बाद उन्हें रिप्लेसमेंट खिलाड़ी के तौर पर टीम में शामिल किया गया। मुंबई के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में उन्होंने अपना IPL और टी-20 डेब्यू किया। CSK के सबसे युवा खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे आयुष ने पहली ही पारी में 15 गेंदों पर 32 रन बनाकर अपनी प्रतिभा की झलक दिखा दी। 3. अंगकृष रघुवंशी, कोलकाता नाइट राइडर्स दिल्ली में जन्मे अंगकृष 11 साल की उम्र में मुंबई आ गए थे। यहां उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर अभिषेक नायर और कोच ओमकार साल्वी की देखरेख में ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने मुंबई को ही अपना स्थायी ठिकाना बना लिया। 2023-24 सीजन में उन्होंने मुंबई के लिए लिस्ट-ए और टी-20 डेब्यू किया। उनकी प्रतिभा को देखते हुए कोलकाता ने IPL 2024 ऑक्शन में 20 लाख रुपए में अपने साथ जोड़ा। 21 साल के रघुवंशी 2022 अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। अंगकृष ने IPL 2026 में 13 मैचों में 422 रन बनाए और 5 अर्धशतक लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 146.52 का रहा। इस सीजन के दौरान कई बार शुरुआती विकेट गिरने के बाद अंगकृष ने पारी को संभालने और अंत तक ले जाने की भूमिका निभाई। 4. मुकुल चौधरी, लखनऊ सुपर जायंट्स राजस्थान के 21 साल के विकेटकीपर-बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने अपनी तेज बल्लेबाजी से पहचान बनाई। अंडर-23 स्तर पर शानदार खेल दिखाने वाले मुकुल ने 2025-26 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 5 पारियों में 198.85 के स्ट्राइक रेट से 173 रन बनाए थे। इसी प्रदर्शन से प्रभावित होकर लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें IPL 2026 ऑक्शन में 2.60 करोड़ रुपए में खरीदा। मुकुल ने अपने पहले IPL सीजन के 10 मैचों में 170 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक शामिल रहा। कोलकाता के खिलाफ मुकुल ने IPL करियर की यादगार पारी खेली। उन्होंने सिर्फ 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाए, जिसमें 7 छक्के शामिल थे। 200 के स्ट्राइक रेट से खेली गई इस पारी की बदौलत लखनऊ सुपर जायंट्स ने आखिरी गेंद पर रोमांचक जीत हासिल की। दबाव की स्थिति में मैच फिनिश करने की उनकी क्षमता ने उन्हें युवा फिनिशरों में शामिल कर दिया। 5. प्रिंस यादव, लखनऊ सुपर जायंट्स दिल्ली के 24 साल के तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने इस सीजन यॉर्कर्स से अपनी पहचान बनाई। प्रिंस ने सबसे पहले 2024 दिल्ली प्रीमियर लीग में पहचान बनाई, जहां ऋषभ पंत की कप्तानी वाली पुरानी दिल्ली-6 टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने 10 मैचों में 13 विकेट लिए। 2024-25 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश के खिलाफ अपने पहले टी-20 मुकाबले में उन्होंने नीतीश राणा और समीर रिजवी जैसे बल्लेबाजों के विकेट लेकर प्रभावित किया। अगले ही दिन लखनऊ सुपर जायंट्स ने IPL मेगा ऑक्शन में उन्हें 30 लाख रुपए में खरीद लिया। रहे। IPL 2026 में प्रिंस ने 14 मैचों में 16 विकेट लिए। उनकी इकॉनमी 8.82 रही, जबकि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 3/32 का रहा। नई गेंद और डेथ ओवर्स दोनों में उन्होंने प्रभाव छोड़ा। प्रिंस के लिए सीजन का सबसे चर्चित पल तब आया, जब प्रिंस ने अपनी तेज बॉल पर विराट कोहली को क्लीन बोल्ड कर दिया। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में प्रिंस यादव को भारतीय टीम में चुना गया है। 6. रसिख सलाम, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु जम्मू-कश्मीर के 25 साल के तेज गेंदबाज रसिख सलाम का क्रिकेट संघर्ष, विवाद और शानदार वापसी की कहानी रहा है। 17 साल की उम्र में IPL डेब्यू करने वाले रसिख को अपने करियर में बैन और चोटों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उन पर भरोसा दिखाते हुए 2025 में मैदान पर उतरे बिना भी 6 करोड़ रुपए में रिटेन किया था। फ्रेंचाइजी के इस विश्वास को
‘मौत को देखा जा सकता था’: अभिषेक पर सोनारपुर हमले की क्रूरता से हैरान ममता बनर्जी | भारत समाचार

आखरी अपडेट:31 मई, 2026, 01:16 IST अस्पताल प्रांगण से सीधे मीडिया से बात करते हुए, हिली हुई दिख रही ममता ने टीएमसी सांसद द्वारा सहे गए शारीरिक आघात के दर्दनाक विवरण का खुलासा किया। टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के संक्षिप्त प्रवेश के बाद एक निजी अस्पताल में उनसे मुलाकात करने के बाद चली गईं। तस्वीर/पीटीआई गहरा आघात और आक्रोश व्यक्त करते हुए, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने शनिवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला किया, और सोनारपुर में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हिंसक हमले को पूर्ण क्रूरता का कृत्य करार दिया। अस्पताल के प्रांगण से सीधे मीडिया से बात करते हुए, हिली हुई दिख रही ममता ने संसद सदस्य को हुए शारीरिक आघात के दर्दनाक विवरण का खुलासा किया, जिसमें कहा गया कि पथराव की तीव्रता के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो सकती थी, अगर स्थानीय निवासियों ने उन्हें सुरक्षात्मक हेलमेट प्रदान करने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया होता। चुनाव बाद हिंसा के पीड़ितों से मिलने के लिए अपने सोनारपुर दौरे के दौरान हुए हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को कोलकाता के बेले व्यू अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। अभिषेक और ममता पहले शहर के अपोलो अस्पताल से चले गए। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी इस हमले में शामिल नहीं है. उन्होंने आगे सुझाव दिया कि इस घटना के पीछे टीएमसी के खिलाफ जनता का गुस्सा हो सकता है। ममता बनर्जी ने हमले के तुरंत बाद चिकित्सा प्रबंधन और प्रशासनिक देरी के बारे में भी गंभीर चिंता जताई, सवाल उठाया कि सांसद को स्थानांतरित करने से पहले दो घंटे से अधिक समय तक गहन चिकित्सा इकाई (आईटीयू) के अंदर क्यों रखा गया था। संस्थागत प्रतिक्रिया से निराश होकर, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने सांसद को छुट्टी देने और उनकी चिकित्सा देखभाल सीधे उनके आवास पर स्थानांतरित करने के अपने फैसले की घोषणा की, जहां उनकी वसूली की निगरानी के लिए एक अस्थायी अस्पताल सेटअप स्थापित किया जाएगा। उनके बयान के अनुसार, इलाज कर रहे डॉक्टरों ने पुष्टि की कि सांसद के शरीर पर कई चोटों के निशान हैं, उनकी छाती के पास खून का थक्का जमा होना बेहद चिंताजनक है। जबकि प्रारंभिक चिकित्सा मूल्यांकन ने उन्हें आगे के नैदानिक परीक्षणों और सलाइन प्रशासन के लिए आईटीयू में गहन निगरानी में रखने का दृढ़ता से सुझाव दिया, ममता ने दबाव में अस्पताल की परिचालन क्षमता पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि चिकित्सा सुविधा स्वयं सक्रिय बाहरी धमकी और धमकियों के तहत काम कर रही थी, जिससे स्वास्थ्य कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों को निर्बाध रूप से निष्पादित करने से रोका जा रहा था। अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करने के लिए तीव्र ऐतिहासिक समानताएं बनाते हुए, उन्होंने दावा किया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) शासन के 34 साल के लंबे कार्यकाल के दौरान भी, राज्य ने राजनीतिक द्वेष और शारीरिक लक्षित हिंसा का इतना निचला स्तर कभी नहीं देखा था। सामने आ रहे संकट ने सत्तारूढ़ टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बड़े पैमाने पर वाकयुद्ध शुरू कर दिया है, देश भर के शीर्ष विपक्षी नेताओं ने कानून प्रवर्तन की विफलता की निंदा की है। जैसा कि बनर्जी ने अपने घर से चिकित्सा वसूली की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने की कसम खाई थी, इस घटना ने राज्य प्रशासन को इसके परिणामों को संभालने के लिए परेशान कर दिया है, जिसे टीएमसी एक पूर्व नियोजित, जानलेवा साजिश करार देती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘मौत को देखा जा सकता था’: अभिषेक पर सोनारपुर हमले की क्रूरता से हैरान ममता बनर्जी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)बीजेपी(टी)सोनारपुर
शिवकुमार को सीएलपी नेता चुने जाने के बाद कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ हकीकत के करीब पहुंची | शीर्ष बिंदु | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 23:33 IST विधान सौधा में एक अहम बैठक में डीके शिवकुमार को सर्वसम्मति से सीएलपी नेता चुना गया, जिसके बाद उन्होंने अगली कर्नाटक सरकार बनाने का दावा पेश किया। कर्नाटक के मनोनीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के साथ। (पीटीआई) कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ का रास्ता अब साफ हो गया है कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) शनिवार को सर्वसम्मति से डीके शिवकुमार को अपना नेता चुना और उन्होंने राज्य में अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। सीएलपी ने बेंगलुरु के विधान सौधा में एक करीबी बैठक की, जिसमें सीएलपी सचिव अल्लमप्रभु पाटिल, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए। 28 मई को इस्तीफा देने वाले निवर्तमान सीएम सिद्धारमैया ने अगले नेता के रूप में शिवकुमार का नाम प्रस्तावित किया। अपेक्षाकृत सहज नेतृत्व परिवर्तन के बाद नई दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान, सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ मैराथन वार्ता का दौर चला, जिसका उद्देश्य नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देना और नई सरकार के गठन के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना था। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद से, सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण व्यवस्था की लगातार चर्चा चल रही थी, जिसमें 2.5 साल बाद सत्ता का हस्तांतरण शामिल होगा। सीएलपी बैठक में क्या हुआ? सीएलपी बैठक में तीन प्रमुख प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिससे पार्टी के विधायी नेता के रूप में डीके शिवकुमार के औपचारिक चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ। पहले प्रस्ताव में, सिद्धारमैया ने प्रस्ताव दिया कि नए सीएलपी नेता का चयन कांग्रेस आलाकमान पर छोड़ दिया जाए। प्रस्ताव का वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने समर्थन किया और हाथ उठाकर सर्वसम्मति से पारित कर दिया। दूसरे प्रस्ताव में सिद्धारमैया ने सीएलपी नेता पद के लिए डीके शिवकुमार का नाम प्रस्तावित किया. प्रस्ताव का फिर से परमेश्वर ने समर्थन किया और उपस्थित सभी विधायकों से सर्वसम्मति से अनुमोदन प्राप्त किया, औपचारिक रूप से शिवकुमार को सीएलपी नेता के रूप में चुना गया। सीएलपी नेता के रूप में चुने जाने के बाद, शिवकुमार ने सिद्धारमैया को उनके नेतृत्व और पार्टी में योगदान के लिए धन्यवाद देते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। कर्नाटक कांग्रेस इकाई के भीतर एकता के प्रदर्शन के बीच यह प्रस्ताव अपनाया गया। शिवकुमार ने सरकार बनाने का दावा पेश किया सीएलपी नेता चुने जाने के बाद शिवकुमार ने लोक भवन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और औपचारिक रूप से राज्य में अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। शिवकुमार के साथ निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेता भी थे। राज्यपाल गहलोत ने उन्हें 3 जून को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया. पत्र के अनुसार, शपथ समारोह 3 जून 2026 को शाम 4:05 बजे लोक भवन परिसर में होगा। राज्यपाल को अपना दावा पेश करते हुए लिखे अपने पत्र में, शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सीएलपी, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 135 सदस्य, 2 संबद्ध सदस्य और 1 रायता संघ विधायक शामिल थे, ने सर्वसम्मति से उन्हें कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में चुना था। सिद्धारमैया ने शिवकुमार को बधाई दी सिद्धारमैया ने बाद में डीके शिवकुमार को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने पर बधाई दी और उनकी अदम्य गतिशीलता, संगठनात्मक कौशल और अटूट निष्ठा की प्रशंसा की। एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए ಆಯ್ಕೆಯಾಗಿರುವ ಸಂಗಾತಿ ಡಿ.ಕೆ.ಶಿವಕುಮಾರ್ ಅವರಿಗೆ एक और विकल्प चुनें, एक और विकल्प चुनें, ठीक है एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए एक नया ऋण प्राप्त करने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है. और भी बहुत कुछ… pic.twitter.com/Hlep9qJaGF – सिद्धारमैया (@siddaramaiah) 30 मई, 2026 निवर्तमान मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के विकास को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों के बीच पार्टी के वैचारिक मूल्यों को बनाए रखने की शिवकुमार की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। शिवकुमार ने यह भी कहा कि वह सीएलपी के नेता के रूप में चुने जाने पर ”विनम्र” हैं और आश्वासन दिया कि पार्टी समर्पण, अखंडता और उद्देश्य के साथ राज्य के लोगों की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है। आज विधान सौधा में आयोजित सीएलपी बैठक में सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में चुने जाने पर विनम्र महसूस हुआ। श्री @siddaramaiah और अन्य नेताओं के साथ, मैंने माननीय राज्यपाल श्री @TCGEHLOT से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का अपना दावा पेश किया… pic.twitter.com/cbq3Gn7wHU – डीके शिवकुमार (@DKशिवकुमार) 30 मई, 2026 भाजपा ने नेतृत्व परिवर्तन पर कटाक्ष किया जहां कांग्रेस नेताओं ने सत्ता के सुचारु परिवर्तन की सराहना की, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शिवकुमार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नेतृत्व परिवर्तन से भ्रष्टाचार में डूबी सरकार के “चरित्र” में कोई बदलाव नहीं आएगा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन कांग्रेस की इस स्वीकारोक्ति को दर्शाता है कि सिद्धारमैया का शासन कई मोर्चों पर विफल रहा है। उन्होंने कहा, “इसलिए, उन्हें उन्हें बदलना पड़ा। अन्यथा, 2028 (विधानसभा चुनाव) चला जाएगा।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया शिवकुमार को सीएलपी नेता चुने जाने के बाद कर्नाटक में ‘डीकेएस सरकार’ हकीकत के करीब पहुंची | शीर्ष बिंदु अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक के मुख्यमंत्री का इस्तीफा(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार सबसे आगे(टी)कांग्रेस विधायक दल की बैठक(टी)कर्नाटक नेतृत्व परिवर्तन(टी)कर्नाटक की नई सरकार(टी)थावरचंद गहलोत राज्यपाल(टी)कर्नाटक सीएम समाचार
सुरक्षा उल्लंघन का एनाटॉमी: बंगाल के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी का विवरण कैसे छीन लिया गया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 22:55 IST पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोनारपुर में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिक सुरक्षा परिधि आने वाले सांसद और स्थानीय आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण बफर जोन बनाए रखने में विफल रही। सोनारपुर समझौते का मूल कारण डामर पर सामरिक प्रतिक्रिया से परे तक फैला हुआ है; यह सीधे तौर पर पूर्वानुमानित बुद्धिमत्ता की बुनियादी विफलता की ओर इशारा करता है। छवि/पीटीआई जब एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक काफिला या समूह अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो नियंत्रित वातावरण और कुल अराजकता के बीच का अंतर बहुत कम होता है। दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को हिंसक तरीके से निशाना बनाना, इस बात का उदाहरण पेश करता है कि कैसे एक परिष्कृत, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था से भी मिनटों के भीतर समझौता किया जा सकता है और उसे खत्म किया जा सकता है। शनिवार को अचानक वृद्धि – जिसमें उत्तेजित भीड़ ने सीधे पश्चिम बंगाल के संसद सदस्य पर पत्थर और अंडे फेंके – आधुनिक वीआईपी सुरक्षा में एक गंभीर भेद्यता को उजागर करता है: निष्क्रिय राजनीतिक असहमति से सक्रिय, समन्वित शारीरिक हमले में अप्रत्याशित परिवर्तन। जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी एक साथ एक विशिष्ट आगमन बिंदु पर एकत्र होते हैं, तो भीड़ नियंत्रण की संरचनात्मक यांत्रिकी हमेशा झुक जाती है, जिससे करीबी सुरक्षा टीमों को तत्काल, रक्षात्मक फ़ॉलबैक स्थिति में मजबूर होना पड़ता है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोनारपुर में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिक सुरक्षा परिधि आने वाले सांसद और स्थानीय आबादी के बीच एक महत्वपूर्ण बफर जोन बनाए रखने में विफल रही। हाई-प्रोफाइल वीआईपी पारगमन में, सुरक्षा एक स्तरित रक्षा मॉडल पर निर्भर करती है: स्थानीय पुलिस बाहरी रिंग में भीड़ प्रबंधन और मार्ग स्वच्छता को संभालती है, जबकि नेता के व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी आंतरिक रिंग का प्रबंधन करते हैं। जैसे ही बनर्जी हाल ही में चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचीं, बाहरी परिधि भंग हो गई। आक्रामक, गतिशील भीड़ का सामना करते हुए, स्थानीय पुलिस की तैनाती तेजी से बढ़ गई, जिससे प्रदर्शनकारियों को वाहन लाइन की दूरी को बंद करने की अनुमति मिल गई। इस संरचनात्मक पतन ने एक नियमित राजनीतिक यात्रा को तत्काल निकासी आपातकाल में बदल दिया, जिससे आंतरिक-रिंग सुरक्षा विवरण पूरी तरह से आपातकालीन भौतिक ढालों पर निर्भर हो गया। इनर कॉर्डन के महत्वपूर्ण यांत्रिकी एक बार जब बाहरी परिधि का उल्लंघन हो जाता है, तो वीआईपी के आंतरिक सुरक्षा विवरण के पास अपनी सामरिक संरचना को समायोजित करने के लिए केवल कुछ सेकंड होते हैं। सोनारपुर में, जैसे ही बनर्जी पर पत्थरों और अंडों की बारिश होने लगी, सांसद के निजी सुरक्षा अधिकारियों ने तुरंत एक आपातकालीन बंद-बंदी प्रोटोकॉल लागू किया, जिससे बनर्जी के चारों ओर एक कड़ा मानव सुरक्षा घेरा बनाया गया। इस विशिष्ट भौतिक संरचना का उद्देश्य भीड़ को शामिल करना या व्यवस्था बहाल करना नहीं है, बल्कि प्रभावों को अवशोषित करना, दृष्टि रेखाओं को अवरुद्ध करना और उड़ने वाले प्रोजेक्टाइल के खिलाफ तत्काल भौतिक अवरोध स्थापित करना है। रक्षात्मक मानव ढाल के लिए यह तीव्र परिवर्तन एक उच्च जोखिम वाला, अंतिम उपाय वाला पैंतरेबाज़ी है। क्योंकि स्थानीय प्रशासनिक प्रतिक्रिया में देरी हुई – अराजकता के शुरुआती क्षणों के दौरान एक ध्यान देने योग्य शून्य छोड़ दिया गया – आंतरिक विस्तार को दंगा विरोधी फैलाव इकाइयों के समर्थन के बिना जनता के गुस्से का खामियाजा भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसे परिदृश्यों में, प्राथमिक जोखिम लक्षित हत्या से भगदड़-प्रेरित आघात या कुंद-बल वाली वस्तुओं से गंभीर चोट में बदल जाता है। सुरक्षा टीम की सफलता को वीआईपी को सुरक्षित, मोबाइल निष्कर्षण बिंदु की ओर ले जाते समय सामंजस्य बनाए रखने की उनकी क्षमता से मापा जाता है। पूर्वानुमानित बुद्धि की विफलता सोनारपुर समझौते का मूल कारण डामर पर सामरिक प्रतिक्रिया से परे तक फैला हुआ है; यह सीधे तौर पर पूर्वानुमानित बुद्धिमत्ता की बुनियादी विफलता की ओर इशारा करता है। चुनाव के बाद तनाव से जूझ रहे क्षेत्रों में, सुरक्षा तैनाती स्थानीय भावना को मापने और घात बिंदुओं का अनुमान लगाने के लिए वास्तविक समय के स्थितिजन्य आकलन पर बहुत अधिक निर्भर होती है। जब एक शत्रुतापूर्ण भीड़ प्रक्षेप्यों को जमा करने और एक सटीक स्थान पर महत्वपूर्ण संख्या में इकट्ठा होने का प्रबंधन करती है, तो यह इंगित करता है कि स्थानीय कानून प्रवर्तन परिचालन तनाव के निर्माण की निगरानी या अवरोधन करने में विफल रहा है। यह ख़ुफ़िया ब्लाइंड स्पॉट एक हाई-प्रोफ़ाइल नेता के सुरक्षा विवरण के संरचनात्मक लाभों को प्रभावी ढंग से बेअसर कर देता है। पूर्व चेतावनी या पर्याप्त सुदृढीकरण लेन के बिना पथराव करने वाली भीड़ के सामने छोड़ दिया जाए तो काफिला एक स्थिर लक्ष्य बन जाता है। चूंकि दक्षिण 24 परगना के संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च करने के लिए दंगा-रोधी दस्ते और भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, इसलिए यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीतिक परिदृश्य में वीआईपी आंदोलन की व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन करने की तत्काल आवश्यकता को पीछे छोड़ देती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया सुरक्षा उल्लंघन का एनाटॉमी: बंगाल के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी का विवरण कैसे छीन लिया गया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)अभिषेक बनर्जी(टी)सुरक्षा(टी)सोनारपुर
आशुतोष राणा के 'हमारे राम' शो के दौरान लगी आग:शॉर्ट सर्किट से कंट्रोल पैनल में भड़की लपटें, ऑडिटोरियम में अंधेरा; एक्टर और लोगों का रेस्क्यू

मध्य प्रदेश के जबलपुर में शनिवार शाम अभिनेता आशुतोष राणा के शो ‘हमारे राम’ के मंचन के दौरान रामपुर स्थित तरंग ऑडिटोरियम में अचानक आग लग गई। आग के बाद पूरे ऑडिटोरियम की बिजली बंद करनी पड़ी, जिससे परिसर में अंधेरा छा गया। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम तत्काल रोक दिया गया। अभिनेता आशुतोष राणा समेत सभी कलाकारों और दर्शकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कार्यक्रम बाधित होने के कारण आयोजकों को दूसरा शो रद्द करना पड़ा। आशुतोष राणा दे रहे थे प्रस्तुति जानकारी के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 7 बजे रामपुर स्थित मध्य प्रदेश विद्युत विभाग के तरंग ऑडिटोरियम में मंचन चल रहा था। कार्यक्रम में अभिनेता आशुतोष राणा सहित कई कलाकार प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान ऑडिटोरियम के ग्रीन रूम के नीचे स्थित एक कक्ष के कंट्रोल पैनल में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। इसके बाद कंट्रोल पैनल में आग भड़क उठी। देखते ही देखते कमरे में धुआं भर गया। आग की सूचना मिलते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। सुरक्षा के लिए बंद की गई बिजली प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही ऑडिटोरियम की लाइटें बंद हो गईं और पूरे परिसर में अंधेरा छा गया। स्थिति को नियंत्रित करने और बड़े हादसे से बचने के लिए एहतियातन पूरे परिसर की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। आग और धुएं के कारण कार्यक्रम बीच में रोकना पड़ा। आयोजकों ने तत्काल कलाकारों और दर्शकों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। अभिनेता आशुतोष राणा को भी सुरक्षा के मद्देनजर ऑडिटोरियम से बाहर ले जाया गया। कर्मचारियों ने पहले खुद बुझाने की कोशिश की घटना के बाद ऑडिटोरियम प्रबंधन और कार्यक्रम आयोजकों ने परिसर में लगे अग्निशमन उपकरणों से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। हालांकि शुरुआती कोशिशों में आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी। इसके बाद नगर निगम के फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई और टीम मौके पर रवाना हुई। फायर ब्रिगेड ने पाया आग पर काबू फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। दमकलकर्मियों ने कुछ ही देर में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आग बुझने के बाद अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात रही कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ।
सात्विक-चिराग सिंगापुर ओपन बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचे:दुनिया की नंबर-1 जोड़ी को हराया; कोरिया के वर्ल्ड चैंपियंस को 21-19, 21-18 से हराया

भारत की मेंस डबल्स जोड़ी सात्विक साईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने सिंगापुर ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली है। चौथी वरीयता वाली भारतीय जोड़ी ने शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर-1 साउथ कोरियाई जोड़ी किम वोन हो और सियो सेउंग जे को 21-19 और 21-18 से हरा दिया। 52 मिनट तक चले मुकाबले में सात्विक और चिराग ने 21-19, 21-18 से जीत दर्ज की। यह भारतीय जोड़ी की किम और सियो के खिलाफ पहली जीत भी है। पहले गेम में पिछड़ने के बाद वापसी की मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों जोड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले गेम के मिड-गेम ब्रेक तक कोरियाई जोड़ी 13-11 से आगे थी। हालांकि, सात्विक और चिराग ने दबाव में शानदार खेल दिखाया। उन्होंने लगातार अंक जुटाए और वापसी करते हुए पहला गेम 21-19 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में भी सात्विक और चिराग 11-14 से पीछे चल रहे थे। फिर वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-18 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। रविवार को दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से मुकाबला अब भारतीय जोड़ी दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से रविवार को भिड़ेगी। दूसरा सेमीफाइनल इंडोनेशिया की फजार अल्फियान-मुहम्मद शोहिबुल फिकरी जोड़ी और चीन की लियांग वेई कांग-चांग वांग के बीच होगा। मिश्रित युगल में भारत को निराशा मिश्रित युगल वर्ग में भारत को निराशा हाथ लगी है। ध्रुव कपिला और तनिषा क्रास्टो की जोड़ी सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई। भारतीय जोड़ी को जापान के युइची शिमोगामी और सयाका होबारा के खिलाफ 16-21, 21-17, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा। तीन गेम तक चले इस मुकाबले में ध्रुव और तनिषा ने दूसरे गेम में वापसी की, लेकिन आखिरी गेम में जापानी जोड़ी ने बाजी मार ली। ——————————– स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत की कहानी:मां के कैंसर से टूटीं, खुद के पैर में चोट, डॉक्टरों ने कहा था- चल नहीं पाएगी “पहले मां को कैंसर हुआ। फिर खुद के पैर में चोट लगी। डॉक्टरों ने कहा था कि सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो सकता है, तब लगा था कि सब खत्म हो गया, लेकिन हार नहीं मानी।” हरियाणा के जींद जिले की 25 साल की पहलवान मीनाक्षी गोयत की यह कहानी संघर्ष, जज्बे और मेहनत की मिसाल है। पूरी खबर पढ़ें…






