क्या राजस्थान को IPL फाइनल का टिकट दिला पाएंगे सूर्यवंशी:गुजरात की गेंदबाजी सबसे मजबूत, रॉयल्स-टाइटंस में क्वालिफायर-2 मैच आज

IPL 2026 के क्वालिफायर-2 में आज गुजरात टाइटंस और राजस्थान रॉयल्स की टीमें आमने-सामने होगीं। इस मैच को जीतने वाली टीम फाइनल में पहुंच जाएगी, जबकि हारने वाली टीम बाहर हो जाएगी। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजर होगी। क्योंकि, उन्होंने एलिमिनेटर में हैदराबाद के खिलाफ 97 रनों की पारी में 12 छक्के लगाए थे। दूसरी ओर सीजन की सबसे मजबूत गुजरात की गेंदबाजी उन्हें रोकने का प्रयास करेगी। इसमें कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, जेसन होल्डर, प्रसिद्ध कृष्णा और राशिद खान जैसे गेंदबाज शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजस्थान को IPL फाइनल का टिकट दिला पाएंगे सूर्यवंशी? जवाब 4 फैक्टर्स से समझिए… पिछली भिड़ंत : 9 मई को जयपुर में गुजरात और राजस्थान के बीच पिछला मैच खेला गया था। इसमें मोहम्मद सिराज ने शॉर्ट बॉल पर सूर्यवंशी का विकेट लिया था। जबकि रबाडा उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का शिकार बने थे। वैभव ने 16 बॉल पर 3 छक्के सहित 36 रन बनाए थे। पुराना रिकॉर्ड: वैभव ने गुजरात के खिलाफ 3 मैच खेले हैं और एक शतक के सहारे 233.33 की स्ट्राइक रेट से 168 रन बनाए हैं। उनके बल्ले से 15 चौके और 15 छक्के आ चुके हैं। उन्हें मोहम्मद सिराज, राशिद खान और प्रसिद्ध कृष्णा ने एक-एक बार आउट किया है। हालिया फॉर्म : वैभव की हालिया फॉर्म कमाल की है। वे पिछली 5 पारियों में सिर्फ एक बार सिंगल डिटिट पर आउट हुए हैं। बाकी कि चार पारियों में वैभव ने दो अर्धशतक लगाए हैं। वे 250.9 के स्ट्राइक रेट से 276 रन बना चुके हैं। दूसरी ओर गुजरात के 5 गेंदबाज सीजन में कम से कम 15 विकेट ले चुके हैं। पिच कंडीशन: महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम की पिच बैटर्स के लिए मददगार होती है। लेकिन, 2 दिन पहले 27 मई को यहां पेसर्स को मदद मिली थी। मैच में गिरे 18 में से 12 विकेट पेसर्स को मिले। जबकि, दो बैटर्स रनआउट हुए। जोफ्रा आर्चर ने लेंथ और स्पीड के दम पर हैदराबाद के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया था। हालांकि, वैभव के सामने पैट कमिंस की अगुवाई वाला पेस अटैक बेअसर रहा था। हेड टु हेड गुजरात 7-3 से आगे, 2022 में फाइनल हराया था हेड टु हेड रिकॉर्ड में गुजरात का पलड़ा भारी है। दोनों के बीच अब तक 10 मैच खेले जा चुके हैं, इनमें से 7 मुकाबले गुजरात ने जीते हैं। जबकि, 3 मैच राजस्थान के नाम रहे हैं। इस सीजन में दोनों टीमें बराबरी पर रही है। पिछले मैच को गुजरात ने 77 रन से जीता। उससे पहले राजस्थान ने 6 विकेट की जीत हासिल की थी। टॉप प्लेयर्स राजस्थान सूर्यवंशी और आर्चर पर निर्भर राजस्थान रॉयल्स इस समय काफी हद तक वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर पर निर्भर है। दोनों खिलाड़ियों ने एलिमिनेटर में टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। वैभव 680 रन के साथ मौजूदा सीजन के टॉप स्कोरर हैं। जबकि, जोफ्रा आर्चर 24 विकेट के साथ टीम के टॉप विकेट टेकर्स हैं। यशस्वी जायसवाल इस सीजन सूर्यवंशी की चमक के आगे फीके नजर आए हैं, जबकि ध्रुव जुरेल ने नंबर-3 पर उपयोगी पारियां खेली हैं। कप्तान रियान पराग ने माना कि सनराइजर्स के खिलाफ टीम 260 रन तक पहुंच सकती थी, लेकिन डेथ ओवरों में बल्लेबाजी बिखर गई। टीम इस कमजोरी को सुधारना चाहेगी। साई सुदर्शन के पास ऑरेंज कैप लेने का मौका गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी हद तक साई सुदर्शन (652 रन), शुभमन गिल (618 रन) और जोस बटलर (498 रन) पर निर्भर है। पिछले मैच में बेंगलुरु के खिलाफ टॉप-3 बैटर्स के जल्दी आउट होने के बाद टीम 162 रन पर ऑलआउट हो गई थी। क्वालिफायर-1 में बेंगलुरु के बैटर्स ने गुजरात के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। ऐसे में गुजरात अपने गेंदबाजी और फील्डिंग प्रदर्शन में सुधार करना चाहेगा। कगिसो रबाडा 26 विकेट लेकर टीम सीजन के टॉप विकेट टेकर्स में दूसरे स्थान पर है। पिच एंड वेदर रिपोर्ट मुल्लांपुर में हाई स्कोरिंग मैच की उम्मीद मुल्लांपुर के महाराजा यादविंदर सिंह क्रिकेट स्टेडियम में एक और हाई स्कोरिंग मैच की उम्मीद है। यहां पिछले चारों मैच में 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। इनमें दो बार लक्ष्य चेज हुआ, जबकि दो बार स्कोर डिफेंड किया गया। पिछले मुकाबले में राजस्थान ने 243 रन बनाए थे। जवाब में हैदराबाद 196 रन पर ऑलआउट हो गई। मैच के दिन न्यू चंडीगढ़ का तापमान 23°C से 37°C तक रह सकता है। ऐसे में प्लेयर्स को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 राजस्थान: यशस्वी जायसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), डोनोवन फरेरा, दासुन शनाका, रवींद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, यश राज पुंजा, बृजेश शर्मा और सुशांत मिश्रा। गुजरात: शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, कुलवंत खेजरोलिया, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और राहुल तेवतिया।
हिंदू लड़की से शादी के बाद ट्रोल हुए थे मुदस्सर:कोरियोग्राफर बोले- मुझे अक्सर कमेंट्स में जिहादी कहा जाता है

कोरियोग्राफर मुदस्सर खान ने हाल ही में इंटरफेथ मैरिज और ट्रोलिंग को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि हिंदू लड़की रिया किशनचंदानी से शादी के बाद उन्हें और उनकी पत्नी को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि ऐसे लोगों को वह ज्यादा महत्व नहीं देते। फिल्मीज्ञान को दिए इंटरव्यू में मुदस्सर खान ने कहा, ‘अगर कोई गाली देता है या खराब बातें करता है, तो मैं उसे सीधे ब्लॉक कर देता हूं। ऐसे लोगों को भाव देने का कोई मतलब नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोग सिर्फ दूसरों को परेशान करने के लिए आते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोग फेक अकाउंट बनाकर गालियां देते हैं और दूसरों का मूड खराब करने की कोशिश करते हैं। रिया को ट्रोल्स को नजरअंदाज करना सिखाया मुदस्सर ने बताया कि शुरुआत में उनकी पत्नी रिया भी इन कमेंट्स से परेशान हो जाती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने उन्हें समझाया कि ऐसे लोगों को नजरअंदाज करना ही सबसे सही तरीका है। इसके बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर लोगों को फिल्टर करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, ‘जब शादी हो जाती है, तो धीरे-धीरे लोगों की बातें अपने आप कम होने लगती हैं। पहले लोग लगातार कमेंट करते हैं, लेकिन बाद में खुद ही शांत हो जाते हैं।’ ‘मुझे अक्सर जिहादी वाले कमेंट मिलते हैं’- मुदस्सर कोरियोग्राफर ने कहा, ‘मुझे अक्सर जिहादी वाले कमेंट मिलते हैं। हमेशा, अगर मैं पोस्ट कर रहा हूं तो मुझे भी आमतौर पर मिलते हैं, तो मुझे लगता है कि ये लोग वो हैं, जो छोटी बिल्डिंगों में, चार माले की बिल्डिंगों में दीवार के कोने में पान थूकते हैं, वो लाल हो जाता है न, तो ये वो लोग हैं जिनकी कोई वैल्यू नहीं है। एक दिन साफ होने वाले हैं। मुदस्सर ने यह भी कहा कि वह इन बातों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे लोगों को बिल्कुल महत्व नहीं देता। मेरी जिंदगी में इससे कहीं ज्यादा बड़े काम हैं। मैं अपने परिवार, दोस्तों और देश के लिए अच्छा काम करना चाहता हूं। मैं जिंदगी में कुछ बड़ा बनाना और क्रिएट करना चाहता हूं। इसलिए छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देता।’ साल 2023 में मुदस्सर की शादी हुई थी मुदस्सर खान और रिया किशनचंदानी ने साल 2023 में शादी की थी। उनकी शादी में सलमान खान भी शामिल हुए थे। मुदस्सर लंबे समय से सलमान के साथ काम कर रहे हैं और उन्होंने ‘दबंग’, ‘बॉडीगार्ड’ और ‘रेडी’ जैसी सलमान की कई फिल्मों के गानों को कोरियोग्राफ किया है।
क्या राजस्थान को IPL फाइनल का टिकट दिला पाएंगे सूर्यवंशी:गुजरात की गेंदबाजी सबसे मजबूत, रॉयल्स-टाइटंस में क्वालिफायर-2 मैच आज

IPL 2026 के क्वालिफायर-2 में आज गुजरात टाइटंस और राजस्थान रॉयल्स की टीमें आमने-सामने होगीं। इस मैच को जीतने वाली टीम फाइनल में पहुंच जाएगी, जबकि हारने वाली टीम बाहर हो जाएगी। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजर होगी। क्योंकि, उन्होंने एलिमिनेटर में हैदराबाद के खिलाफ 97 रनों की पारी में 12 छक्के लगाए थे। दूसरी ओर सीजन की सबसे मजबूत गुजरात की गेंदबाजी उन्हें रोकने का प्रयास करेगी। इसमें कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, जेसन होल्डर, प्रसिद्ध कृष्णा और राशिद खान जैसे गेंदबाज शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राजस्थान को IPL फाइनल का टिकट दिला पाएंगे सूर्यवंशी? जवाब 4 फैक्टर्स से समझिए… पिछली भिड़ंत : 9 मई को जयपुर में गुजरात और राजस्थान के बीच पिछला मैच खेला गया था। इसमें मोहम्मद सिराज ने शॉर्ट बॉल पर सूर्यवंशी का विकेट लिया था। जबकि रबाडा उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का शिकार बने थे। वैभव ने 16 बॉल पर 3 छक्के सहित 36 रन बनाए थे। पुराना रिकॉर्ड: वैभव ने गुजरात के खिलाफ 3 मैच खेले हैं और एक शतक के सहारे 233.33 की स्ट्राइक रेट से 168 रन बनाए हैं। उनके बल्ले से 15 चौके और 15 छक्के आ चुके हैं। उन्हें मोहम्मद सिराज, राशिद खान और प्रसिद्ध कृष्णा ने एक-एक बार आउट किया है। हालिया फॉर्म : वैभव की हालिया फॉर्म कमाल की है। वे पिछली 5 पारियों में सिर्फ एक बार सिंगल डिटिट पर आउट हुए हैं। बाकी कि चार पारियों में वैभव ने दो अर्धशतक लगाए हैं। वे 250.9 के स्ट्राइक रेट से 276 रन बना चुके हैं। दूसरी ओर गुजरात के 5 गेंदबाज सीजन में कम से कम 15 विकेट ले चुके हैं। पिच कंडीशन: महाराजा यादविंद्र सिंह स्टेडियम की पिच बैटर्स के लिए मददगार होती है। लेकिन, 2 दिन पहले 27 मई को यहां पेसर्स को मदद मिली थी। मैच में गिरे 18 में से 12 विकेट पेसर्स को मिले। जबकि, दो बैटर्स रनआउट हुए। जोफ्रा आर्चर ने लेंथ और स्पीड के दम पर हैदराबाद के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया था। हालांकि, वैभव के सामने पैट कमिंस की अगुवाई वाला पेस अटैक बेअसर रहा था। हेड टु हेड गुजरात 7-3 से आगे, 2022 में फाइनल हराया था हेड टु हेड रिकॉर्ड में गुजरात का पलड़ा भारी है। दोनों के बीच अब तक 10 मैच खेले जा चुके हैं, इनमें से 7 मुकाबले गुजरात ने जीते हैं। जबकि, 3 मैच राजस्थान के नाम रहे हैं। इस सीजन में दोनों टीमें बराबरी पर रही है। पिछले मैच को गुजरात ने 77 रन से जीता। उससे पहले राजस्थान ने 6 विकेट की जीत हासिल की थी। टॉप प्लेयर्स राजस्थान सूर्यवंशी और आर्चर पर निर्भर राजस्थान रॉयल्स इस समय काफी हद तक वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर पर निर्भर है। दोनों खिलाड़ियों ने एलिमिनेटर में टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। वैभव 680 रन के साथ मौजूदा सीजन के टॉप स्कोरर हैं। जबकि, जोफ्रा आर्चर 24 विकेट के साथ टीम के टॉप विकेट टेकर्स हैं। यशस्वी जायसवाल इस सीजन सूर्यवंशी की चमक के आगे फीके नजर आए हैं, जबकि ध्रुव जुरेल ने नंबर-3 पर उपयोगी पारियां खेली हैं। कप्तान रियान पराग ने माना कि सनराइजर्स के खिलाफ टीम 260 रन तक पहुंच सकती थी, लेकिन डेथ ओवरों में बल्लेबाजी बिखर गई। टीम इस कमजोरी को सुधारना चाहेगी। साई सुदर्शन के पास ऑरेंज कैप लेने का मौका गुजरात टाइटंस की बल्लेबाजी हद तक साई सुदर्शन (652 रन), शुभमन गिल (618 रन) और जोस बटलर (498 रन) पर निर्भर है। पिछले मैच में बेंगलुरु के खिलाफ टॉप-3 बैटर्स के जल्दी आउट होने के बाद टीम 162 रन पर ऑलआउट हो गई थी। क्वालिफायर-1 में बेंगलुरु के बैटर्स ने गुजरात के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। ऐसे में गुजरात अपने गेंदबाजी और फील्डिंग प्रदर्शन में सुधार करना चाहेगा। कगिसो रबाडा 26 विकेट लेकर टीम सीजन के टॉप विकेट टेकर्स में दूसरे स्थान पर है। पिच एंड वेदर रिपोर्ट मुल्लांपुर में हाई स्कोरिंग मैच की उम्मीद मुल्लांपुर के महाराजा यादविंदर सिंह क्रिकेट स्टेडियम में एक और हाई स्कोरिंग मैच की उम्मीद है। यहां पिछले चारों मैच में 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। इनमें दो बार लक्ष्य चेज हुआ, जबकि दो बार स्कोर डिफेंड किया गया। पिछले मुकाबले में राजस्थान ने 243 रन बनाए थे। जवाब में हैदराबाद 196 रन पर ऑलआउट हो गई। मैच के दिन न्यू चंडीगढ़ का तापमान 23°C से 37°C तक रह सकता है। ऐसे में प्लेयर्स को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 राजस्थान: यशस्वी जायसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), डोनोवन फरेरा, दासुन शनाका, रवींद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, यश राज पुंजा, बृजेश शर्मा और सुशांत मिश्रा। गुजरात: शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, कुलवंत खेजरोलिया, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और राहुल तेवतिया।
हाई ब्लड प्रेशर: ब्लड प्रेशर ज्यादातर हाई रहता है? आज ही खाएं ये बदलाव, पोषक तत्वों की सेहत को हो सकता है नुकसान!

28 मई 2026 को 23:37 IST पर अद्यतन किया गया ब्लड प्रेशर को कैसे नियंत्रित करें: अगर आपका ब्लड क्लॉज लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर प्रतिबंध न रखें। तुरंत एक अच्छे डॉक्टर से मिलें और अगर उनके पास कोई दवा है, तो उनसे बिना पूछे कभी बंद न करें। आपकी सेहत का नियंत्रण आपके हाथों में है। आज ही इन छोटे-छोटे बच्चों को अपनी आदतें सिखाएं और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
वेजिटेबल इडली रेसिपी: छोटी-छोटी गेंदों वाली टेस्टी इडली, इडली के लिए है परफेक्ट रेसिपी; विधि नोट करें

सामग्री: 1 कप सूजी, 1/2 कप दही, 1/2 कप पानी, 1 गाजर, 2 साबुत मिर्च, पिसा हुआ, मटर, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा सा मसाला राय, 1 छोटा सा मसाला सोडा, 1 बड़ा मसाला तेल, नमक का स्वाद, हरा धनिया छवि: सोशल मीडिया बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़े कटोरे में सूजी, दही और पानी के उपकरण अच्छी तरह से मिले लें। इसे 10 से 15 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए। छवि: एआई अब एक पैन में थोड़ा सा तेल गर्म करें। इसमें राई और चटकने दें। फिर हरी मिर्च, अदरक और सारी कटी हुई मंज़िल 2 से 3 मिनट का प्रभाव भून लें। इसके बाद भुनी हुई पास्ता को सूजी वाले बैटर में डाल दिया. छवि: एआई नमक और हरा धनिया का स्वाद। ज़रूरत लगे तो थोड़ा सा पानी एनालॉग बैटर को इडली की तरह रखें। अब अंतिम रूप से इनो और ऊपर से छोटे पानी के कलाकार हाथ से पकड़े हुए हैं। इससे इडली मुलायम गे। छवि: एआई इडली स्टैंड को तेल से ग्रीस करें और बैटर डाल दें। स्टीमर या कुकर में 10 से 12 मिनट तक स्टीम करें। जब इडली अच्छी तरह पक जाए तो थोड़ा ठंडा हो जाए और फिर निकाल लें। छवि: सोशल मीडिया गरमा-गरम वेजिटेबल इडली को नारियल की चटनी, साबुत या टमाटर की चटनी के साथ सर्व करें। यह अन्वेषक के साथ-साथ बच्चों के टिफ़िन के लिए भी अचूक रेसिपी है। छवि: सोशल मीडिया इडली को ज्यादा मुलायम बनाने के लिए बैटर ज्यादा पतला न करें. इसमें आप अपनी पसंद की चीज़ भी डाल सकते हैं। अगर इनो नहीं है तो बेस्ट सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं। छवि: एआई स्वाद और सेहत से भरपूर यह वेजिटेबल इडली रेसिपी घर में सभी को जरूर पसंद आएगी। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)वेजिटेबल इडली रेसिपी(टी)इडली रेसिपी(टी)वेजिटेबल इडली(टी)घर पर वेजिटेबल इडली कैसे बनाएं(टी)घर पर बनी इडली(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)दक्षिण भारतीय भोजन
कर्नाटक में राजनीतिक बदलाव: सिद्धरामय्या के इस्तीफे के साथ ही डीकेएस राज की शुरुआत, क्या सब कुछ आसान रहेगा?| कठिन तथ्य

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने के बाद कर्नाटक की राजनीति एक नए चरण में प्रवेश कर गई है, जिससे डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के लिए राज्य का शीर्ष पद संभालने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह परिवर्तन महीनों की गहन अटकलों, आंतरिक बातचीत और कांग्रेस आलाकमान के दबाव के बाद हुआ है। नेतृत्व परिवर्तन बेंगलुरु में एक महत्वपूर्ण नाश्ते की बैठक के बाद सामने आया, जहां सिद्धारमैया ने कथित तौर पर औपचारिक रूप से पद छोड़ने से पहले कैबिनेट सहयोगियों को अपने फैसले के बारे में सूचित किया था। भावनात्मक दृश्य, समर्थकों का विरोध प्रदर्शन और कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं ने परिवर्तन के आसपास के राजनीतिक नाटक को और बढ़ा दिया है। क्या कांग्रेस डीके शिवकुमार के नेतृत्व में एकता बनाए रखेगी, या कर्नाटक में ताजा राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिलेगी? द हार्ड फैक्ट्स पर यह विस्तृत विवरण देखें। n18oc_ Indian18oc_politics n18oc_the-hard-factsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 28 मई, 2026, 21:44 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बेंगलुरु समाचार(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)कैबिनेट फेरबदल(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)कांग्रेस नेतृत्व(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)डीके शिवकुमार(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय राजनीति(टी)कर्नाटक सीएम(टी)कर्नाटक कांग्रेस(टी)कर्नाटक समाचार(टी)कर्नाटक राजनीति(टी)राजनीतिक संकट(टी)सिद्धारमैया(टी)कठिन तथ्य
अनार शिकंजी रेसिपी: घर पर क्लासिक अनार शिकंजी, तुरंत मिटेगी थकान और खून की कमी भी होगी दूर; नोट करें रेसिपी

28 मई 2026 को 21:17 IST पर अपडेट किया गया गर्मियों के मौसम में शरीर को तुरंत एनर्जी देने और तरोताजा करने के लिए ‘अनार शिकंजी’ एक बेहतरीन और पेय पदार्थ है। यह सिर्फ आपके शरीर में खून की कमी को दूर करने में भी बेहद मददगार है। अनुसरण करना : अनार आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो हीमोग्लोबिन प्राप्त करता है। थकान को दूर करने में मदद मिलती है। इम्युनिटी बूस्टर है। छवि: मेटा एआई 2 कप अनार के दाने, 1 नींबू का रस, पुदीना, काला नमक, अन्य जीरा पाउडर और चीनी/शहद आदि। छवि: मेटा एआई सबसे पहले अनअमेरिकन अनार के दानों को मिक्सी में डाला गया। इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर अच्छी तरह ब्लेंड कर लें। छवि: मेटा एआई तैयार मिश्रण को एक इलेक्ट्रोनिक चटनी से अच्छा लें ताकि बीज अलग हो जाए। और आपको शुद्ध निकला हुआ मसाला मिल सके। छवि: मेटा एआई एक जग में अनार का साबुत पदार्थ। इसमें नींबू का रस और चीनी या शहद शामिल है। छवि: मेटा एआई अब आधा मोटा काला नमक और आधा टुकड़ा मिला हुआ जीरा पाउडर। पुदीने की नाव को हाथों से मसलकर डाल दें। छवि: मेटा एआई ग्लासों में कुछ बर्फ के टुकड़े डालें और शिकंजियों को मिलाकर पलटें। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 28 मई 2026 को 21:17 IST पर
सिद्धारमैया ने 8 साल बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया | डीके शिवकुमार बड़े पावर शिफ्ट के लिए तैयार | न्यूज18

एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आठ साल बाद इस्तीफा दे दिया, जिससे डीके शिवकुमार के नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त हो गया। भावनात्मक विदाई और विरोध के बीच, कांग्रेस पार्टी आंतरिक गतिशीलता और कैबिनेट वार्ता में उलझी हुई है, जो एक जटिल सत्ता परिवर्तन का संकेत देती है। -newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 28 मई, 2026, 20:42 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बेंगलुरु समाचार(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)कैबिनेट फेरबदल(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)कांग्रेस नेतृत्व(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)डीके शिवकुमार(टी)भारत समाचार(टी)भारतीय राजनीति(टी)कर्नाटक सीएम(टी)कर्नाटक कांग्रेस(टी)कर्नाटक सरकार(टी)कर्नाटक समाचार(टी)कर्नाटक राजनीति(टी)राजनीतिक संकट(टी)सिद्धारमैया
ओमान 15वां देश जिसपर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी:अब तक 7 देशों पर अटैक किया, 4 पर कब्जा करने की चेतावनी दी

ट्रम्प ने बुधवार को ओमान पर हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर वह ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसे उड़ा देगा। ओमान 15वां ऐसा देश है जिस पर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी है। इतना ही नहीं, ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ने 7 देशों पर हमले भी किए हैं। इसमें वेनेजुएला भी शामिल है जहां घुसकर अमेरिका ने राष्ट्रपति का किडनैप कर लिया था। इसके अलावा ट्रम्प 4 देशों पर कब्जा करने की चेतावनी भी दे चुके हैं। इसमें कनाडा, ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और क्यूबा शामिल हैं। इसके अलावा ट्रम्प पनामा नहर पर भी कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले शांति की बात करते थे ट्रम्प साल 2024 में जब ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे। तब वे खुद को अमन पसंद नेता के तौर पर पेश कर रहे थे। चुनावी रैलियों में वे अपने विरोधियों को युद्ध भड़काने वाला नेता कहते थे। उनका कहना था कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया में शांति आ जाएगी। उन्होंने कई बार कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प खुद को ऐसा नेता बताते थे जो दुश्मन देशों से बातचीत कर सकता है और बिना बड़े युद्ध के समझौते करा सकता है। ट्रम्प कहते थे कि अगर उनके विरोधी सत्ता में आए तो अमेरिका फिर से इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों में फंस जाएगा। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति बदल गई। 7 देश जिन पर अमेरिका ने हमला किया ट्रम्प, निक्सन की मैडमैन थ्योरी के फॉलोअर ट्रम्प कई बार ऐसे बयान देते हैं जिनसे दोस्त और दुश्मन दोनों असमंजस में रहते हैं कि अमेरिका अगला कदम क्या उठाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि अपने विरोधियों के अलावा सहयोगी देशों को धमकाना अब ट्रम्प की शैली का हिस्सा बन चुका है। राजनीतिक विज्ञान में इसे मैडमैन थ्योरी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि कोई नेता अपने विरोधियों को यह महसूस कराता है कि वह कुछ भी कर सकता है, ताकि सामने वाला डरकर समझौता कर ले। इस थ्योरी को सबसे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1960 और 1970 के दशक में वियतनाम युद्ध के दौरान अपनाया था। निक्सन चाहते थे कि सोवियत संघ और उत्तरी वियतनाम को लगे कि वह इतने पागल हैं कि परमाणु हमला तक कर सकते हैं। उनका मानना था कि डर पैदा करके दुश्मन को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है। विरोधियों पर बेअसर रही ट्रम्प की मैडमैन थ्योरी बीबीसी के मुताबिक ट्रम्प की यह रणनीति सहयोगी देशों पर तो असर डालती दिख रही है लेकिन विरोधियों पर यह बेअसर है। ट्रम्प की धमकी के बाद नाटो देश अपना रक्षा बजट बढ़ा रहे हैं। यूक्रेन, अमेरिका को अपने खनिज संसाधन देने को तैयार हो गया। लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखा। ईरान का मामला और भी मुश्किल है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका उल्टा असर हो सकता है। पूर्व ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग का कहना है कि इससे ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश और तेज कर सकता है। विशेषज्ञ माइकल डेश भी मानते हैं कि अब ईरान शायद चुपचाप परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाएगा और अंत में परमाणु परीक्षण भी कर सकता है। ईरान यह देख रहा है कि जिन नेताओं के पास परमाणु हथियार नहीं थे, जैसे सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी, उनकी सत्ता खत्म हो गई। जबकि उत्तर कोरिया के किम जोंग उन जैसे नेता परमाणु हथियार होने की वजह से सुरक्षित बने हुए हैं। इसलिए ईरान परमाणु हथियार को अपनी अंतिम सुरक्षा के रूप में देख सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल सोच रहे थे कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाया जाए तो वहां की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। लेकिन इतिहास इससे उल्टा संकेत देता है। 1980 में जब सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था, तब भी मकसद इस्लामिक गणराज्य को कमजोर करना था। लेकिन हुआ उल्टा। ईरानी व्यवस्था और मजबूत हो गई।
ओमान 15वां देश जिसपर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी:अब तक 7 देशों पर अटैक किया, 4 देशों को अमेरिका में मिलाने की चेतावनी दी

ट्रम्प ने बुधवार को ओमान पर हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर वह ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसे उड़ा देगा। ओमान 15वां ऐसा देश है जिस पर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी है। इतना ही नहीं, ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ने 7 देशों पर हमले भी किए हैं। इसमें वेनेजुएला भी शामिल है जहां घुसकर अमेरिका ने राष्ट्रपति का किडनैप कर लिया था। इसके अलावा ट्रम्प 4 देशों पर कब्जा करने की चेतावनी भी दे चुके हैं। इसमें कनाडा, ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और क्यूबा शामिल हैं। इसके अलावा ट्रम्प पनामा नहर पर भी कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले शांति की बात करते थे ट्रम्प साल 2024 में जब ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे। तब वे खुद को अमन पसंद नेता के तौर पर पेश कर रहे थे। चुनावी रैलियों में वे अपने विरोधियों को युद्ध भड़काने वाला नेता कहते थे। उनका कहना था कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया में शांति आ जाएगी। उन्होंने कई बार कहा कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प खुद को ऐसा नेता बताते थे जो दुश्मन देशों से बातचीत कर सकता है और बिना बड़े युद्ध के समझौते करा सकता है। ट्रम्प कहते थे कि अगर उनके विरोधी सत्ता में आए तो अमेरिका फिर से इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों में फंस जाएगा। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति बदल गई। 7 देश जिन पर अमेरिका ने हमला किया ट्रम्प, निक्सन की मैडमैन थ्योरी के फॉलोअर ट्रम्प कई बार ऐसे बयान देते हैं जिनसे दोस्त और दुश्मन दोनों असमंजस में रहते हैं कि अमेरिका अगला कदम क्या उठाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि अपने विरोधियों के अलावा सहयोगी देशों को धमकाना अब ट्रम्प की शैली का हिस्सा बन चुका है। राजनीतिक विज्ञान में इसे मैडमैन थ्योरी कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि कोई नेता अपने विरोधियों को यह महसूस कराता है कि वह कुछ भी कर सकता है, ताकि सामने वाला डरकर समझौता कर ले। इस थ्योरी को सबसे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1960 और 1970 के दशक में वियतनाम युद्ध के दौरान अपनाया था। निक्सन चाहते थे कि सोवियत संघ और उत्तरी वियतनाम को लगे कि वह इतने पागल हैं कि परमाणु हमला तक कर सकते हैं। उनका मानना था कि डर पैदा करके दुश्मन को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है। विरोधियों पर बेअसर रही ट्रम्प की मैडमैन थ्योरी बीबीसी के मुताबिक ट्रम्प की यह रणनीति सहयोगी देशों पर तो असर डालती दिख रही है लेकिन विरोधियों पर यह बेअसर है। ट्रम्प की धमकी के बाद नाटो देश अपना रक्षा बजट बढ़ा रहे हैं। यूक्रेन, अमेरिका को अपने खनिज संसाधन देने को तैयार हो गया। लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखा। ईरान का मामला और भी मुश्किल है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका उल्टा असर हो सकता है। पूर्व ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग का कहना है कि इससे ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश और तेज कर सकता है। विशेषज्ञ माइकल डेश भी मानते हैं कि अब ईरान शायद चुपचाप परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाएगा और अंत में परमाणु परीक्षण भी कर सकता है। ईरान यह देख रहा है कि जिन नेताओं के पास परमाणु हथियार नहीं थे, जैसे सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी, उनकी सत्ता खत्म हो गई। जबकि उत्तर कोरिया के किम जोंग उन जैसे नेता परमाणु हथियार होने की वजह से सुरक्षित बने हुए हैं। इसलिए ईरान परमाणु हथियार को अपनी अंतिम सुरक्षा के रूप में देख सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल सोच रहे थे कि अगर ईरान के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाया जाए तो वहां की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। लेकिन इतिहास इससे उल्टा संकेत देता है। 1980 में जब सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था, तब भी मकसद इस्लामिक गणराज्य को कमजोर करना था। लेकिन हुआ उल्टा। ईरानी व्यवस्था और मजबूत हो गई।








