अमेरिका में $1 के सिक्के पर ट्रम्प की तस्वीर:250वीं वर्षगांठ पर जारी हुआ, बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद आउट ऑफ स्टॉक

अमेरिका ने अपनी 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाला $1 का खास सिक्का जारी किया है। अमेरिकी मिंट ने बुधवार दोपहर 12 बजे इसकी बिक्री शुरू की। बिक्री शुरू होने के कुछ घंटे बाद ही सिक्का आउट ऑफ स्टॉक हो गया। दोपहर करीब 3 बजे अमेरिकी मिंट की वेबसाइट पर 25 सिक्कों का रोल उपलब्ध नहीं था। वहीं, 100 सिक्कों का बैग भी आउट ऑफ स्टॉक दिख रहा था। सिक्के के एक तरफ ट्रम्प की तस्वीर है। इसके साथ ‘IN GOD WE TRUST’ और ‘LIBERTY’ लिखा है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुहर और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए ‘250’ लिखा गया है। 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, 25 सिक्कों के रोल की कीमत 61 डॉलर और 100 सिक्कों के बैग की कीमत 154.50 डॉलर है। बिक्री शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद ही वेबसाइट पर लोगों को वेटिंग एरिया में भेजा जाने लगा। वहां करीब 1 घंटे का वेटिंग टाइम बताया गया। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक एक परिवार अधिकतम 2 खरीदारी कर सकता था। अमेरिकी मिंट ने बताया कि 2.5 लाख सिक्कों को खास ‘4 जुलाई’ निशान के साथ रैंडम तरीके से रोल और बैग में रखा गया है। ये सिक्के 4 जुलाई को बनाए गए थे। अमेरिका में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। 1926 के बाद पहली बार जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर अमेरिकी मिंट के मुताबिक, इससे पहले किसी जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर 1926 में सिक्के पर दिखाई गई थी। उस समय राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज की तस्वीर अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा पर हस्ताक्षर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर जारी आधे डॉलर के सिक्के पर लगाई गई थी। अमेरिकी कानून के तहत किसी जीवित राष्ट्रपति या जीवित पूर्व राष्ट्रपति की तस्वीर सिक्के पर लगाना प्रतिबंधित है। हालांकि, अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए कांग्रेस नेसर्कुलेटिंग कलेक्टिबल कॉइन रीडिजाइन एक्ट पास किया। इसके तहत ट्रेजरी को इस अवसर पर खास $1 के सिक्के जारी करने की अनुमति मिली। कानून में यह भी कहा गया है कि सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर किसी जीवित व्यक्ति का पोर्ट्रेट नहीं हो सकता। ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के आगे वाले हिस्से पर है, इसलिए इसे कानून के मुताबिक माना गया है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… नीदरलैंड्स ने अमेरिका-कनाडा से 86 टन सोना हटाकर लंदन भेजा:बैंक ऑफ इंग्लैड में रखा, कहा- संकट आने पर यहां आसानी से बेच सकेंगे नीदरलैंड्स ने अमेरिका और कनाडा में रखा अपना 86 टन सोना निकालकर लंदन भेज दिया है। डच सेंट्रल बैंक (DNB) के मुताबिक, यह ट्रांसफर मार्च से अगस्त के बीच कई महीनों में किया गया। अब यह सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…
प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

फिल्म इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। मुंबई में अपनी आने वाली एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘वाइब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रोजाना 18 घंटे तक काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर किसी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं” और उन्होंने भारत में अपने कम समय के टूर और अमेरिका में बच्चों के पास जल्दी लौटने के लिए खुद यह लंबा शेड्यूल चुना था। ‘बच्चों के पास लौटने के लिए 18 घंटे काम किया’ ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब मीडिया ने प्रीति जिंटा से सेट पर लंबे वर्किंग आवर्स के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शूटिंग करना मुश्किल जरूर था, लेकिन यह उनका अपना व्यक्तिगत फैसला था। 50 साल की प्रीति जिंटा ने कहा, सबकी अपनी पसंद और जरूरतें होती हैं। बेशक, मैंने 18 घंटे तक काम किया क्योंकि मैं अपना काम जितनी जल्दी हो सके खत्म करके अमेरिका वापस अपने बच्चों के पास जाना चाहती थी। मेरा फोकस सिर्फ यही था कि मैं भारत आऊंगी, अपना काम तेजी से पूरा करूंगी और तुरंत लौट जाऊंगी। मैं यहां 30 से 40 दिनों के समय के लिए आई थी। इसलिए मुझे इतनी लंबी शिफ्ट में काम करने में कोई आपत्ति नहीं थी। प्रीति ने यह भी बताया कि इस फिल्म में उन्होंने कई कठिन एक्शन सीन खुद किए हैं, जिसके लिए लगातार लंबे शोज और शारीरिक मेहनत की जरूरत थी। दीपिका पादुकोण की थी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग फिल्म इंडस्ट्री में वर्किंग आवर्स का यह विवाद असल में तब शुरू हुआ था, जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ (प्रभास स्टारर) और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से अलग होने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मां बनने के बाद दीपिका ने अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए रोजाना 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग रखी थी। मेकर्स के साथ काम के घंटों और फीस को लेकर सहमति न बन पाने के कारण दीपिका इन प्रोजेक्ट्स से हट गईं। इसके बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय सिनेमा में तय वर्किंग टाइम लागू होना चाहिए या नहीं। मेल सुपरस्टार्स् पर दीपिका का बयान जब दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की वर्किंग डिमांड पर विवाद बढ़ा, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दोहराव वाले रवैये पर खुलकर बात की। दीपिका ने CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा था, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई मेल सुपरस्टार्स् सालों से सिर्फ 8 घंटे ही काम करते आ रहे हैं। वे सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे काम करते हैं और वीकेंड्स पर काम नहीं करते। लेकिन जब कोई महिला अपने लिए 8 घंटे की शिफ्ट मांगती है, तो इसे हेडलाइन बना दिया जाता है। अक्षय कुमार करते हैं 8 घंटे काम इसी दौरान एक्टर अभिषेक बच्चन का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे ‘द कपिल शर्मा शो’ में अक्षय कुमार के वर्किंग स्टाइल के बारे में बता रहे थे। अभिषेक ने कहा था, पैकअप का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा खुश अक्षय कुमार होते हैं। वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। सुबह 7 बजे सेट पर आते हैं और तुरंत अपना काम शुरू कर देते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा 18 घंटे काम प्रोडक्टिव नहीं वर्किंग आवर्स की इस बहस में एक्टर सुनील शेट्टी ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होने कहा कि सेट पर 12 से 18 घंटे तक काम करना न तो प्रैक्टिकल है और न ही इससे बेहतर आउटपुट मिलता है। सुनील शेट्टी ने कहा था कि किसी भी कलाकार या क्रू मेंबर के लिए 12 से 18 घंटे तक लगातार काम करना संभव नहीं है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, सही ब्रेक और प्रॉपर रेस्ट को काम की क्वालिटी के लिए जरूरी बताया था। सुनील शेट्टी के मुताबिक, थकान में काम करने से रचनात्मकता पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सेट पर प्रोफेशनल और अनुशासित माहौल होना चाहिए। 70 घंटे के वर्क वीक की बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं यह बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति द्वारा देश के युवाओं को “हफ्ते में 70 घंटे काम” करने की सलाह देने के बाद से ही पूरे देश में ओवरवर्किंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। फिल्म निर्माता रोनी स्क्रूवाला ने नारायण मूर्ति के इस विचार का विरोध करते हुए कहा था कि केवल काम के घंटे बढ़ाने से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) नहीं बढ़ती, बल्कि क्वालिटी वर्क, स्किल और बेहतर वर्क एनवायरनमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

फिल्म इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। मुंबई में अपनी आने वाली एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘वाइब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रोजाना 18 घंटे तक काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर किसी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं” और उन्होंने भारत में अपने कम समय के टूर और अमेरिका में बच्चों के पास जल्दी लौटने के लिए खुद यह लंबा शेड्यूल चुना था। ‘बच्चों के पास लौटने के लिए 18 घंटे काम किया’ ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब मीडिया ने प्रीति जिंटा से सेट पर लंबे वर्किंग आवर्स के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शूटिंग करना मुश्किल जरूर था, लेकिन यह उनका अपना व्यक्तिगत फैसला था। 50 साल की प्रीति जिंटा ने कहा, सबकी अपनी पसंद और जरूरतें होती हैं। बेशक, मैंने 18 घंटे तक काम किया क्योंकि मैं अपना काम जितनी जल्दी हो सके खत्म करके अमेरिका वापस अपने बच्चों के पास जाना चाहती थी। मेरा फोकस सिर्फ यही था कि मैं भारत आऊंगी, अपना काम तेजी से पूरा करूंगी और तुरंत लौट जाऊंगी। मैं यहां 30 से 40 दिनों के समय के लिए आई थी। इसलिए मुझे इतनी लंबी शिफ्ट में काम करने में कोई आपत्ति नहीं थी। प्रीति ने यह भी बताया कि इस फिल्म में उन्होंने कई कठिन एक्शन सीन खुद किए हैं, जिसके लिए लगातार लंबे शोज और शारीरिक मेहनत की जरूरत थी। दीपिका पादुकोण की थी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग फिल्म इंडस्ट्री में वर्किंग आवर्स का यह विवाद असल में तब शुरू हुआ था, जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ (प्रभास स्टारर) और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से अलग होने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मां बनने के बाद दीपिका ने अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए रोजाना 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग रखी थी। मेकर्स के साथ काम के घंटों और फीस को लेकर सहमति न बन पाने के कारण दीपिका इन प्रोजेक्ट्स से हट गईं। इसके बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय सिनेमा में तय वर्किंग टाइम लागू होना चाहिए या नहीं। मेल सुपरस्टार्स् पर दीपिका का बयान जब दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की वर्किंग डिमांड पर विवाद बढ़ा, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दोहराव वाले रवैये पर खुलकर बात की। दीपिका ने CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा था, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई मेल सुपरस्टार्स् सालों से सिर्फ 8 घंटे ही काम करते आ रहे हैं। वे सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे काम करते हैं और वीकेंड्स पर काम नहीं करते। लेकिन जब कोई महिला अपने लिए 8 घंटे की शिफ्ट मांगती है, तो इसे हेडलाइन बना दिया जाता है। अक्षय कुमार करते हैं 8 घंटे काम इसी दौरान एक्टर अभिषेक बच्चन का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे ‘द कपिल शर्मा शो’ में अक्षय कुमार के वर्किंग स्टाइल के बारे में बता रहे थे। अभिषेक ने कहा था, पैकअप का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा खुश अक्षय कुमार होते हैं। वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। सुबह 7 बजे सेट पर आते हैं और तुरंत अपना काम शुरू कर देते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा 18 घंटे काम प्रोडक्टिव नहीं वर्किंग आवर्स की इस बहस में एक्टर सुनील शेट्टी ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होने कहा कि सेट पर 12 से 18 घंटे तक काम करना न तो प्रैक्टिकल है और न ही इससे बेहतर आउटपुट मिलता है। सुनील शेट्टी ने कहा था कि किसी भी कलाकार या क्रू मेंबर के लिए 12 से 18 घंटे तक लगातार काम करना संभव नहीं है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, सही ब्रेक और प्रॉपर रेस्ट को काम की क्वालिटी के लिए जरूरी बताया था। सुनील शेट्टी के मुताबिक, थकान में काम करने से रचनात्मकता पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सेट पर प्रोफेशनल और अनुशासित माहौल होना चाहिए। 70 घंटे के वर्क वीक की बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं यह बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति द्वारा देश के युवाओं को “हफ्ते में 70 घंटे काम” करने की सलाह देने के बाद से ही पूरे देश में ओवरवर्किंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। फिल्म निर्माता रोनी स्क्रूवाला ने नारायण मूर्ति के इस विचार का विरोध करते हुए कहा था कि केवल काम के घंटे बढ़ाने से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) नहीं बढ़ती, बल्कि क्वालिटी वर्क, स्किल और बेहतर वर्क एनवायरनमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
आतिफ असलम बोले- भारत से बेहतर है पाकिस्तान कोक स्टूडियो:पाकिस्तान के गानों में दिखता है जादू; भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन ज्यादा

पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम ने भारत और पाकिस्तान के लोकप्रिय संगीत प्लेटफॉर्म ‘कोक स्टूडियो’ के बीच तुलना करते हुए पाकिस्तान कोक स्टुडियो को बेहतर बताया है। एक इंटरव्यू में आतिफ ने कहा कि कोक स्टूडियो पाकिस्तान की सफलता के पीछे उसका ‘रॉ और ओरिजनल’ संगीत है, जबकि कोक स्टूडियो इंडिया में ‘कमर्शियलाइजेशन’ (व्यावसायीकरण) ज्यादा हावी दिखता है। ‘भारतीय संगीत में कमर्शियलाइजेशन हावी’ दुबई के रेडियो स्टेशन मिर्ची यूएई को दिए इंटरव्यू में आतिफ असलम ने दोनों देशों के कोक स्टूडियो के काम करने के तरीके पर बात की। आतिफ ने कहा, दोनों ही तरफ संगीत की कंपोजिशन बेहतरीन बनाई जाती है, लेकिन भारतीय संगीत में वह रॉ-नेस गायब है जो हमारे गानों में होती है। इंडियन कोक स्टूडियो कमर्शियलाइजेशन पर बहुत ज्यादा भरोसा करता है और गानों को बाजार के हिसाब से ढालता है। इसके उलट, पाकिस्तानी कोक स्टूडियो पूरी तरह से ओरिजनल कंपोजिशन पर जोर देता है। वहां संगीतकारों के पास अपनी कला दिखाने की आजादी होती है और एक तरह से यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति होती है, जहां वे अपनी अलग पहचान जोड़ सकते हैं। 2008 में शुरू हुआ कोक स्टूडियो पाकिस्तान कोक स्टूडियो पाकिस्तान की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसके फाउंडर और प्रोड्यूसर रोहेल हयात थे। इस शो ने पारंपरिक सूफी, कव्वाली, गजल और लोक संगीत को आधुनिक वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स के साथ मिलाकर फ्यूजन म्यूजिक को एक नया मुकाम दिया। कोक स्टूडियो भारत: 2011 में हुई थी शुरुआत भारत में कोक स्टूडियो की शुरुआत साल 2011 में ‘एमटीवी कोक स्टूडियो इंडिया’ के नाम से हुई थी। शुरुआती सीजन्स में ए.आर. रहमान, अमित त्रिवेदी और क्लिंटन सेरेजो जैसे संगीतकारों ने कई बेहतरीन ओरिजनल ट्रैक्स बनाए, लेकिन बाद के सालों में यह प्लेटफॉर्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और बॉलीवुड कंपोजर्स के प्रभाव में ज्यादा आ गया। भारत में बैन हुए, बोले- लोग VPN से गाने सुनते हैं इससे पहले आतिफ असलम ने भारत में लगे बैन पर बात करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और वो अपने फैंस को मिस करते हैं। यह बात उन्होंने रेडियो प्रेजेंटर क्रिस फेड के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में कही। बातचीत में आतिफ असलम ने कहा, “मुझे भारत में बैन हुए लगभग 10 साल हो गए हैं। यह भारतीय सरकार का फैसला था। उन्होंने पाकिस्तान के कलाकारों को बैन करने का फैसला किया। भारतीय कलाकार भी पाकिस्तान में बैन हैं। पिछले 10 साल से। मैंने वहां कोई गाना रिलीज नहीं किया है।” उन्होंने भारतीय फैंस के लगातार अपने संगीत को सुनने का जिक्र करते हुए कहा कि लोग वीपीएन के जरिए उनका संगीत सुनते हैं और सीडी बनाकर दूसरों को देते हैं। उन्होंने कहा कि वह पाइरेसी को बढ़ावा नहीं देते, लेकिन संगीत जहां पहुंचना होता है, वहां पहुंच जाता है। मेरे पहले सिंगल के साथ भी ऐसा ही हुआ था। आतिफ ने भारतीय फैंस को उदास नहीं होने कहा भारतीय फैंस के लिए आतिफ ने कहा, “हां, इसे लेकर बुरा मत महसूस करो। उदास मत हो। मैं हमेशा से आप लोगों से कहना चाहता था कि मुझे आप लोगों की याद आती है। मुझे वहां काम करने की याद नहीं आती, लेकिन आप लोगों की याद आती है।” आतिफ ने आगे कहा कि मैंने प्लेबैक सिंगिंग से बहुत कुछ सीखा है। अगर यह बैन नहीं हुआ होता, तो शायद मैं अपना खुद का म्यूजिक नहीं बना पाता। इसलिए इसके लिए भी मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं। पाकिस्तानी कलाकारों पर क्यों लगा था बैन सितंबर 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने अपने निर्माता सदस्यों को भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य होने तक पाकिस्तानी कलाकारों और तकनीशियनों को काम न देने का निर्देश दिया था। हालांकि, 2016 के बाद भी कई बॉलीवुड फिल्मों में आतिफ असलम के गाने आए। 2017 में फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का ‘दिल दियां गल्लां’, ‘राब्ता’ का ‘दरअसल’, ‘ट्यूबलाइट’ का ‘मैं अगर’ और ‘करीब करीब सिंगल’ का ‘जाने दे’ रिलीज हुआ। वहीं, 2018 में ‘बागी 2’ का ‘ओ साथी’, ‘सत्यमेव जयते’ का ‘पानियों सा’, ‘लवयात्री’ का ‘तेरा हुआ’ और ‘जीनियस’ का ‘दिल मेरी ना सुने’ गाना रिलीज हुआ। वहीं, मार्च 2019 के बाद से उनका कोई गाना बॉलीवुड फिल्मों में रिलीज नहीं हुआ। गौरतलब है कि फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के कुछ दिनों बाद ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तानी एक्टर्स और कलाकारों पर पूरी तरह बैन की घोषणा की थी। इस हमले में 40 CRPF जवानों की जान गई थी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी फिल्मों, वेब सीरीज, गानों और पॉडकास्ट पर रोक लगा दी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT रूल्स 2021 के तहत OTT और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स से पाकिस्तानी कंटेंट हटाने का आदेश दिया। इसके अलावा कई पाकिस्तानी कलाकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स भी भारत में अस्थायी रूप से ब्लॉक किए गए। इनमें माहिरा खान और हानिया आमिर जैसे कलाकार शामिल थे।
ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में फेडरल जज ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के नियम सीमित करने के लिए जारी किया गया था। ग्रीनबेल्ट की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला दिया। प्रवासी अधिकार संगठनों ने ट्रम्प के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। विवाद 30 जून को आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया था, जिसमें ऐसे बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं। ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म को बनाया निशाना इसके बाद ट्रम्प ने 6 अगस्त को नया आदेश जारी किया। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब विदेशी नागरिक अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाकर जन्म देते हैं। नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता पर भी सवाल उठाया गया था। नए आदेश के खिलाफ उन बच्चों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई, जिनकी नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मुकदमे के नतीजे आने तक उनकी नागरिकता को पूरी तरह मान्यता दी जाए। सरकार नागरिकता को नकार नहीं सकती जज बोर्डमैन ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताते हुए कहा कि ट्रम्प का नया आदेश भी संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले से जुड़े बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। ऐसे में सरकार उनकी नागरिकता को नकार नहीं सकती। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी संघीय एजेंसियां फिलहाल उन बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं दे सकेंगी, जो इस मुकदमे के दायरे में आते हैं। संविधान से मिला हक राष्ट्रपति नहीं बदल सकते इस मामले में प्रवासी अधिकार संगठन CASA और असायलम सीकर अडवोकेट प्रोजेक्ट याचिकाकर्ता हैं। संगठनों का कहना है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता संविधान से मिला अधिकार है और इसे राष्ट्रपति के आदेश से नहीं बदला जा सकता। सरकार का तर्क – कोर्ट ने जल्दबाजी में दखल दिया अमेरिकी सरकार का तर्क है कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया, क्योंकि आदेश को कैसे लागू किया जाएगा, इससे जुड़े नियम और दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं। हालांकि जज बोर्डमैन ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की यह नई कोशिश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। ———————-
ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जन्म से मिलने वाली नागरिकता सीमित करने वाले नए आदेश पर फेडरल जज ने रोक लगा दी है। मैरीलैंड की जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। जज ने कहा कि संविधान के तहत जन्म से अमेरिकी नागरिकता पाने वाले बच्चों की नागरिकता सरकार नहीं रोक सकती। ट्रम्प ने 6 अगस्त को यह आदेश जारी किया था। इसमें ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। इसमें विदेशी लोग बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। आदेश में कुछ अन्य मामलों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी। जज बोलीं- नागरिकता रोकने का अधिकार नहीं जज बोर्डमैन ने कहा कि ट्रम्प का आदेश संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि इस मामले में आने वाले बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन फिलहाल इस मामले से जुड़े बच्चों की नागरिकता रोकने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। सरकार ने फैसले का विरोध किया ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया है। सरकार के मुताबिक, आदेश को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश अभी तैयार नहीं हुए थे। जज ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता का अधिकार सीमित करने की कोशिश की अदालत में समीक्षा हो सकती है। प्रवासी संगठनों ने कोर्ट में चुनौती दी थी प्रवासी अधिकार संगठनों CASA और असायलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट ने आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया। उनका कहना था कि इससे कई बच्चों की नागरिकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक इन बच्चों को मिलने वाली नागरिकता पर कोई रोक न लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट पहले भी ट्रम्प को रोक चुका है जन्म से मिलने वाली नागरिकता को लेकर ट्रम्प प्रशासन की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट भी 30 जून को फैसला दे चुका है। कोर्ट ने प्रशासन की उस कोशिश को रोक दिया था, जिसमें कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी। अब फेडरल जज के इस फैसले से ट्रम्प प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने की कोशिश को एक और झटका लगा है। बच्चों की नागरिकता के लिए हजारों लोग अमेरिका आते हैं माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के अनुसार, अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़े मामलों की संख्या बहुत कम होती है। संस्था का अनुमान है कि हर साल 22 हजार से 26 हजार लोग अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं। हालांकि 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली माताओं से जन्मे केवल 9,600 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। ———————- यह भी पढ़ें…. अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…
4 घंटे मलबे में दबी रहीं 97 साल की महिला:रेस्क्यू के बाद बार-बार पूछा- पानी ने मुझे क्यों मारा; नेपाल बाढ़ में 1243 की मौत

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड में 97 साल की गुना माया बोहरा करीब 4 घंटे तक मलबे में दबी रहीं। नुवाकोट के देविघाट में नदी किनारे बने बुजुर्ग देखभाल केंद्र की ग्राउंड फ्लोर पर वह अपने कमरे में थीं। बाढ़ का पानी ग्राउंड फ्लोर तक पहुंचा और गुना माया को बहाकर एक किनारे तक ले गया, जहां पानी का बहाव कम था। उनके रिश्तेदार भी JCB लेकर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू में सेना और पुलिस की मदद की। गुना माया को काठमांडू के बीर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रेस्क्यू के बाद वह बहुत कम बोलती हैं और बार-बार एक ही सवाल पूछती हैं- “पानी ने मुझे क्यों मारा?” नेपाल में इस बाढ़ से अब तक 1,243 लोगों की मौत हो चुकी है। भोटेकोशी नदी के रास्ते और अंडरग्राउंड पावरहाउस की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश अब भी जारी है। नेपाल त्रासदी से जुड़ी 5 तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….
अमेरिका के मिनियापोलिस में अपार्टमेंट बिल्डिंग में गोलीबारी:2 की मौत, हमलावार भी मारा गया; तीन पुलिस अधिकारी घायल

अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस शहर में बुधवार दोपहर एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी का संदिग्ध भी मारा गया है। घटना में मिनियापोलिस पुलिस के तीन अधिकारी घायल हुए हैं। पुलिस सार्जेंट गैरेट पार्टेन ने बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इनमें से दो अधिकारियों को गोली लगी है। हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मियों की हालत स्थिर है। पुलिस को शाम करीब 4:30 बजे इमारत में गोली चलने की सूचना मिली। पार्टेन के मुताबिक, सूचना मिलने के करीब तीन मिनट बाद पुलिसकर्मी हाई-राइज बिल्डिंग में दाखिल हुए, जहां उन्हें कुछ लोग घायल अवस्था में मिले। पुलिसकर्मियों ने इसके बाद और गोलियां चलने की आवाज सुनी और आवाज का पीछा करते हुए इमारत की ऊपरी मंजिल की ओर बढ़े। वहां धुएं या धुंध जैसी स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम हो गई थी। पार्टेन ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि एक पीड़ित की घटनास्थल पर ही गोली लगने से मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गोलीबारी करने वाले संदिग्ध की मौत किस तरह हुई। हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर ने बताया कि अस्पताल में कुल सात मरीज लाए गए हैं। हालांकि, अस्पताल ने घायलों की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई गोलीबारी की कहानी अपार्टमेंट बिल्डिंग के बाहर मौजूद जूलियस बेली ने बताया कि उसने गोलियों की आवाज सुनी और इमारत में रहने वाले एक व्यक्ति को पिस्तौल हाथ में लिए देखा। उसने एक महिला को चिल्लाते हुए सुना और तुरंत वहां से भाग गया। बेली के मुताबिक, उसने करीब आठ गोलियां चलने की आवाज सुनी। उसने बताया कि वह उस व्यक्ति को पहचानता था और उसके बारे में जानता था कि वह अक्सर अपने हथियार का प्रदर्शन करता था। बेली ने कहा कि जून में इमारत में रहने के बाद से वह उस व्यक्ति से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहा था। बेली ने कहा, “मैं बता सकता था कि वह परेशानी खड़ी करने वाला था।” इमारत में रहने वाले क्रिस मिलर ने बताया कि उसने लगातार कई गोलियां चलने की आवाज सुनी और सुरक्षा के लिए तुरंत बाहर भाग गया। मिलर ने कहा कि उसे अंदाजा था कि गोलीबारी किसने की होगी। उसने यह भी बताया कि इसी सप्ताह की शुरुआत में उसने इमारत के गलियारे में एक व्यक्ति को हैंडगन के साथ देखा था और इसकी जानकारी बिल्डिंग मैनेजमेंट को दी थी। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ाई सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मिनियापोलिस कन्वेंशन सेंटर के पास स्थित एक अपार्टमेंट टावर की ओर पुलिसकर्मी राइफल ताने नजर आए। अधिकारियों ने आसपास के घनी आबादी वाले लोरिंग पार्क इलाके के लोगों को वहां जाने से बचने की चेतावनी दी। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने सोशल मीडिया पर कहा कि राज्य के अधिकारी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए घटनास्थल पर मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “आज दोपहर डाउनटाउन मिनियापोलिस में हमारे पड़ोसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे कानून प्रवर्तन अधिकारियों के प्रति आभारी हूं। मिनेसोटा हमारे प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं के लिए प्रार्थना कर रहा है।” FBI भी जांच में शामिल FBI के निदेशक काश पटेल ने कहा कि संघीय एजेंसी गोलीबारी की घटना पर कार्रवाई कर रही है और स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराएगी। पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि FBI स्थानीय प्रशासन को हर संभव सहायता देगी।
अमेरिका के मिनियापोलिस में अपार्टमेंट में गोलीबारी, 2 की मौत:संदिग्ध हमलावार भी मारा गया; तीन पुलिस अधिकारी घायल

अमेरिका के मिनियापोलिस में बुधवार दोपहर एक अपार्टमेंट में गोलीबारी हुई। इसमें 2 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, गोली चलाने वाला संदिग्ध भी मारा गया है। घटना में 3 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं, जिनमें 2 को गोली लगी है। तीनों अधिकारियों की हालत स्थिर है। पुलिस को स्थानीय समयानुसार बुधवार शाम करीब 4:30 बजे बिल्डिंग में गोली चलने की सूचना मिली थी। इसके करीब 3 मिनट बाद पुलिसकर्मी बिल्डिंग में दाखिल हुए, जहां उन्हें पीड़ित मिले। पुलिस ने गोलियों की आवाज का पीछा करते हुए ऊपरी मंजिल तक पहुंचकर कार्रवाई की। एक की मौके पर मौत, दूसरे ने अस्पताल में दम तोड़ा मिनियापोलिस पुलिस के सार्जेंट गैरेट पार्टेन के मुताबिक, एक पीड़ित की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया। संदिग्ध की मौत कैसे हुई, यह तुरंत साफ नहीं हो सका। हेनेपिन काउंटी मेडिकल सेंटर ने बताया कि अस्पताल में 7 मरीज लाए गए थे। हालांकि, अस्पताल ने घायलों की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी। पार्टेन ने घटना को बेहद दुखद बताया और मृतकों, घायलों, पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताई। पुलिस को ऊपर की मंजिल से गोलियों की आवाज सुनाई दी पुलिस के मुताबिक, अधिकारी बिल्डिंग में दाखिल होने के बाद गोलियों की आवाज सुनकर ऊपरी मंजिल की ओर गए। वहां धुंध या धुएं जैसी स्थिति के कारण विजिबिलिटी काफी कम थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मिनियापोलिस कन्वेंशन सेंटर के पास एक अपार्टमेंट टावर की ओर पुलिसकर्मी राइफल ताने नजर आए। अधिकारियों ने पास के घनी आबादी वाले लॉरिंग पार्क इलाके के लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की चेतावनी दी। चश्मदीद ने 8 गोलियों की आवाज सुनी अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने वाले जूलियस बेली ने बताया कि वह बिल्डिंग के बाहर बैठे थे। तभी उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी और एक ऐसे व्यक्ति को पिस्टल के साथ देखा, जिसे वह बिल्डिंग के निवासी के तौर पर पहचानते थे। बेली के मुताबिक, उन्होंने एक महिला को चिल्लाते सुना और तुरंत वहां से भाग गए। उन्होंने करीब 8 गोलियों की आवाज गिनी। बेली ने बताया कि वह व्यक्ति पहले भी हथियार दिखाता था। वह जून में इस बिल्डिंग में रहने आए थे और तब से उस व्यक्ति से बचने की कोशिश कर रहे थे। गवर्नर बोले- पुलिस की मदद के लिए राज्य के अधिकारी मौके पर मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राज्य के अधिकारी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद के लिए मौके पर मौजूद हैं। उन्होंने डाउनटाउन मिनियापोलिस में लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे पुलिस और अन्य फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स का आभार जताया। FBI डायरेक्टर काश पटेल ने भी कहा कि एजेंसी घटना पर प्रतिक्रिया दे रही है। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों की मदद के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही। ——————————-







