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प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

फिल्म इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। मुंबई में अपनी आने वाली एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘वाइब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रोजाना 18 घंटे तक काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर किसी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं” और उन्होंने भारत में अपने कम समय के टूर और अमेरिका में बच्चों के पास जल्दी लौटने के लिए खुद यह लंबा शेड्यूल चुना था। ‘बच्चों के पास लौटने के लिए 18 घंटे काम किया’ ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब मीडिया ने प्रीति जिंटा से सेट पर लंबे वर्किंग आवर्स के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शूटिंग करना मुश्किल जरूर था, लेकिन यह उनका अपना व्यक्तिगत फैसला था। 50 साल की प्रीति जिंटा ने कहा, सबकी अपनी पसंद और जरूरतें होती हैं। बेशक, मैंने 18 घंटे तक काम किया क्योंकि मैं अपना काम जितनी जल्दी हो सके खत्म करके अमेरिका वापस अपने बच्चों के पास जाना चाहती थी। मेरा फोकस सिर्फ यही था कि मैं भारत आऊंगी, अपना काम तेजी से पूरा करूंगी और तुरंत लौट जाऊंगी। मैं यहां 30 से 40 दिनों के समय के लिए आई थी। इसलिए मुझे इतनी लंबी शिफ्ट में काम करने में कोई आपत्ति नहीं थी। प्रीति ने यह भी बताया कि इस फिल्म में उन्होंने कई कठिन एक्शन सीन खुद किए हैं, जिसके लिए लगातार लंबे शोज और शारीरिक मेहनत की जरूरत थी। दीपिका पादुकोण की थी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग फिल्म इंडस्ट्री में वर्किंग आवर्स का यह विवाद असल में तब शुरू हुआ था, जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ (प्रभास स्टारर) और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से अलग होने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मां बनने के बाद दीपिका ने अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए रोजाना 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग रखी थी। मेकर्स के साथ काम के घंटों और फीस को लेकर सहमति न बन पाने के कारण दीपिका इन प्रोजेक्ट्स से हट गईं। इसके बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय सिनेमा में तय वर्किंग टाइम लागू होना चाहिए या नहीं। मेल सुपरस्टार्स् पर दीपिका का बयान जब दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की वर्किंग डिमांड पर विवाद बढ़ा, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दोहराव वाले रवैये पर खुलकर बात की। दीपिका ने CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा था, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई मेल सुपरस्टार्स् सालों से सिर्फ 8 घंटे ही काम करते आ रहे हैं। वे सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे काम करते हैं और वीकेंड्स पर काम नहीं करते। लेकिन जब कोई महिला अपने लिए 8 घंटे की शिफ्ट मांगती है, तो इसे हेडलाइन बना दिया जाता है। अक्षय कुमार करते हैं 8 घंटे काम इसी दौरान एक्टर अभिषेक बच्चन का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे ‘द कपिल शर्मा शो’ में अक्षय कुमार के वर्किंग स्टाइल के बारे में बता रहे थे। अभिषेक ने कहा था, पैकअप का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा खुश अक्षय कुमार होते हैं। वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। सुबह 7 बजे सेट पर आते हैं और तुरंत अपना काम शुरू कर देते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा 18 घंटे काम प्रोडक्टिव नहीं वर्किंग आवर्स की इस बहस में एक्टर सुनील शेट्टी ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होने कहा कि सेट पर 12 से 18 घंटे तक काम करना न तो प्रैक्टिकल है और न ही इससे बेहतर आउटपुट मिलता है। सुनील शेट्टी ने कहा था कि किसी भी कलाकार या क्रू मेंबर के लिए 12 से 18 घंटे तक लगातार काम करना संभव नहीं है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, सही ब्रेक और प्रॉपर रेस्ट को काम की क्वालिटी के लिए जरूरी बताया था। सुनील शेट्टी के मुताबिक, थकान में काम करने से रचनात्मकता पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सेट पर प्रोफेशनल और अनुशासित माहौल होना चाहिए। 70 घंटे के वर्क वीक की बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं यह बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति द्वारा देश के युवाओं को “हफ्ते में 70 घंटे काम” करने की सलाह देने के बाद से ही पूरे देश में ओवरवर्किंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। फिल्म निर्माता रोनी स्क्रूवाला ने नारायण मूर्ति के इस विचार का विरोध करते हुए कहा था कि केवल काम के घंटे बढ़ाने से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) नहीं बढ़ती, बल्कि क्वालिटी वर्क, स्किल और बेहतर वर्क एनवायरनमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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प्रीति जिंटा बोलीं- मैंने रोज 18 घंटे काम किया:दीपिका पादुकोण ने 8 घंटे शिफ्ट के लिए छोड़ी थी फिल्म; मेल एक्टर्स पर सवाल उठाया था

फिल्म इंडस्ट्री में काम के लंबे घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। लगभग एक दशक के अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया है। मुंबई में अपनी आने वाली एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘वाइब’ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रोजाना 18 घंटे तक काम किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हर किसी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं” और उन्होंने भारत में अपने कम समय के टूर और अमेरिका में बच्चों के पास जल्दी लौटने के लिए खुद यह लंबा शेड्यूल चुना था। ‘बच्चों के पास लौटने के लिए 18 घंटे काम किया’ ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब मीडिया ने प्रीति जिंटा से सेट पर लंबे वर्किंग आवर्स के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक शूटिंग करना मुश्किल जरूर था, लेकिन यह उनका अपना व्यक्तिगत फैसला था। 50 साल की प्रीति जिंटा ने कहा, सबकी अपनी पसंद और जरूरतें होती हैं। बेशक, मैंने 18 घंटे तक काम किया क्योंकि मैं अपना काम जितनी जल्दी हो सके खत्म करके अमेरिका वापस अपने बच्चों के पास जाना चाहती थी। मेरा फोकस सिर्फ यही था कि मैं भारत आऊंगी, अपना काम तेजी से पूरा करूंगी और तुरंत लौट जाऊंगी। मैं यहां 30 से 40 दिनों के समय के लिए आई थी। इसलिए मुझे इतनी लंबी शिफ्ट में काम करने में कोई आपत्ति नहीं थी। प्रीति ने यह भी बताया कि इस फिल्म में उन्होंने कई कठिन एक्शन सीन खुद किए हैं, जिसके लिए लगातार लंबे शोज और शारीरिक मेहनत की जरूरत थी। दीपिका पादुकोण की थी 8 घंटे की शिफ्ट की मांग फिल्म इंडस्ट्री में वर्किंग आवर्स का यह विवाद असल में तब शुरू हुआ था, जब एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ (प्रभास स्टारर) और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से अलग होने की खबरें सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि मां बनने के बाद दीपिका ने अपनी पर्सनल लाइफ और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए रोजाना 8 घंटे की वर्क शिफ्ट की मांग रखी थी। मेकर्स के साथ काम के घंटों और फीस को लेकर सहमति न बन पाने के कारण दीपिका इन प्रोजेक्ट्स से हट गईं। इसके बाद सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि क्या भारतीय सिनेमा में तय वर्किंग टाइम लागू होना चाहिए या नहीं। मेल सुपरस्टार्स् पर दीपिका का बयान जब दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की वर्किंग डिमांड पर विवाद बढ़ा, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दोहराव वाले रवैये पर खुलकर बात की। दीपिका ने CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कहा था, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कई मेल सुपरस्टार्स् सालों से सिर्फ 8 घंटे ही काम करते आ रहे हैं। वे सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे काम करते हैं और वीकेंड्स पर काम नहीं करते। लेकिन जब कोई महिला अपने लिए 8 घंटे की शिफ्ट मांगती है, तो इसे हेडलाइन बना दिया जाता है। अक्षय कुमार करते हैं 8 घंटे काम इसी दौरान एक्टर अभिषेक बच्चन का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे ‘द कपिल शर्मा शो’ में अक्षय कुमार के वर्किंग स्टाइल के बारे में बता रहे थे। अभिषेक ने कहा था, पैकअप का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा खुश अक्षय कुमार होते हैं। वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते। सुबह 7 बजे सेट पर आते हैं और तुरंत अपना काम शुरू कर देते हैं। सुनील शेट्टी ने कहा 18 घंटे काम प्रोडक्टिव नहीं वर्किंग आवर्स की इस बहस में एक्टर सुनील शेट्टी ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होने कहा कि सेट पर 12 से 18 घंटे तक काम करना न तो प्रैक्टिकल है और न ही इससे बेहतर आउटपुट मिलता है। सुनील शेट्टी ने कहा था कि किसी भी कलाकार या क्रू मेंबर के लिए 12 से 18 घंटे तक लगातार काम करना संभव नहीं है। उन्होंने वर्क-लाइफ बैलेंस, सही ब्रेक और प्रॉपर रेस्ट को काम की क्वालिटी के लिए जरूरी बताया था। सुनील शेट्टी के मुताबिक, थकान में काम करने से रचनात्मकता पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए सेट पर प्रोफेशनल और अनुशासित माहौल होना चाहिए। 70 घंटे के वर्क वीक की बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं यह बहस सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति द्वारा देश के युवाओं को “हफ्ते में 70 घंटे काम” करने की सलाह देने के बाद से ही पूरे देश में ओवरवर्किंग और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। फिल्म निर्माता रोनी स्क्रूवाला ने नारायण मूर्ति के इस विचार का विरोध करते हुए कहा था कि केवल काम के घंटे बढ़ाने से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) नहीं बढ़ती, बल्कि क्वालिटी वर्क, स्किल और बेहतर वर्क एनवायरनमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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