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कहीं आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके फल-सब्जियां, यहां जानिए पहचान और बचाव के उपाय

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Last Updated:May 20, 2026, 13:27 IST फरीदाबाद में फल-सब्जियों में बढ़ रही मिलावट लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है. डॉ. रितिका शर्मा के मुताबिक ज्यादा चमकदार फल, गहरा हरा पालक और पानी में रंग छोड़ने वाली सब्जियां केमिकल से तैयार हो सकती हैं. ऐसे खाद्य पदार्थ पेट दर्द, एलर्जी और लूज मोशन जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं. फरीदाबाद: बाजार में जब भी लोग फल और सब्जियां खरीदने जाते हैं तो सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि असली और नकली की पहचान कैसे करें. कई बार चमकदार और ताजे दिखने वाले फल-सब्जियां अंदर से केमिकल वाले निकलते हैं जो स्वाद के साथ-साथ सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन दिनों बाजार में आम, तरबूज, खरबूज और हरी सब्जियों में सबसे ज्यादा मिलावट देखने को मिल रही है. लोग बिना पहचान किए इन्हें खरीद लेते हैं लेकिन थोड़ी सी सावधानी आपको बीमार होने से बचा सकती है. कैसे पहचाने केमिकल वाले फल और सब्जियां लोकल 18 से बातचीत में फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉक्टर रितिका शर्मा बताती हैं कि आजकल फलों और सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल इतने ज्यादा हो गए हैं पहचान करना आसान नहीं रहता. फिर भी कुछ तरीके हैं जिनसे मिलावटी चीजों को पहचाना जा सकता है. अगर किसी फल या सब्जी पर लगाया गया रंग नकली है तो उसे पानी से धोने पर रंग निकलने लगता है. कई बार पानी में भी उसका रंग दिखाई देने लगता है. इसके अलावा गीले कपड़े या कॉटन से फल-सब्जियों को रगड़ने पर रंग कपड़े पर आ जाता है. अगर किसी फल पर जरूरत से ज्यादा चमक दिखे सतह चिकनी और ग्रीसी लगे या रंग बहुत अलग दिखाई दे तो समझ जाना चाहिए कि उसमें कहीं न कहीं मिलावट है. केमिकल वाले फल-सब्जियों से नुकसान डॉ. रितिका बताती हैं केमिकल से पकाए गए फल खाने से शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है. इससे पेट दर्द, बुखार, खांसी-जुकाम, गले में जलन और लूज मोशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कई लोगों को एलर्जी भी होने लगती है. आजकल इस्तेमाल होने वाले केमिकल काफी स्ट्रॉन्ग होते हैं इसलिए लंबे समय तक इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है. हरी पत्तेदार सब्जियों में सबसे ज्यादा रंग का इस्तेमाल डॉक्टर रितिका बताती हरी पत्तेदार सब्जियों में सबसे ज्यादा रंग का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे पालक का असली रंग थोड़ा दबा हुआ हरा होता है लेकिन बाजार में कई बार बहुत ज्यादा चमकीला और गहरा हरा पालक दिखता है जो नेचुरल नहीं होता. इसी तरह अगर कोई फल जरूरत से ज्याद चमकदार दिखाई दे तो उसमें ऊपर से कोई लेयर चढ़ाई गई हो सकती है. डॉ. रितिका बताती हैं आम, तरबूज, खरबूज, टमाटर और हरी सब्जियों में सबसे ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है. आम को जल्दी पकाने और मीठा करने के लिए केमिकल लगाए जाते हैं. तरबूज और खरबूज को ज्यादा मीठा दिखाने की कोशिश की जाती हैं. जो लोग लंबे समय से नेचुरल फल खाते आए हैं वे स्वाद से ही पहचान लेते हैं कि फल में कुछ गड़बड़ है. फल-सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धोएं डॉक्टर रितिका बताती हैं मैं लोगों को सलाह देती हूं फल और सब्जियों को खाने से पहले अच्छी तरह धोना चाहिए. कुछ देर पानी में भिगोकर रखने और छिलका उतारने से काफी हद तक केमिकल का असर कम किया जा सकता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana

फिलीपींस के एक द्वीप पर ‘एआई' सरकार:कैबिनेट में गांधी और मंडेला जैसे 17 डिजिटल अवतार; 12 हजार लोग ई-नागरिक बनने को तैयार

फिलीपींस के एक द्वीप पर ‘एआई' सरकार:कैबिनेट में गांधी और मंडेला जैसे 17 डिजिटल अवतार; 12 हजार लोग ई-नागरिक बनने को तैयार

कल्पना कीजिए… एक ऐसा देश, जहां फैसले इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ले। कैबिनेट में महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, विंस्टन चर्चिल जैसी शख्सियतों के ‘डिजिटल अवतार’ बैठें। वे बहस करें, तर्क दें, वोटिंग करें और सरकार चलाएं। सुनने में ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन फिलीपींस के एक छोटे से द्वीप पर इसे सच बनाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। यह प्रयोग ब्रिटेन के टेक उद्यमी डैन थॉमसन कर रहे हैं। उन्होंने पलावन द्वीपसमूह में 3.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले एक द्वीप को अपनी एआई कंपनी ‘सेंसाय’ के नाम पर माइक्रोनेशन घोषित किया है। माइक्रोनेशन ऐसे स्वघोषित छोटे देश या रियासतें होती हैं, जिन्हें चलाने वाले खुद को स्वतंत्र राष्ट्र बताते हैं, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिलती। थॉमसन ने यहां सरकार चलाने के लिए 17 एआई बॉट्स की परिषद बनाई है। इन्हें गांधी, चर्चिल, एलेनॉर रूजवेल्ट, मार्कस ऑरेलियस, सन त्जू और मंडेला जैसे नेताओं के व्यक्तित्व, लेखन और विचारों के आधार पर तैयार किया है। दावा है कि ये एआई नेता व्यक्तिगत लालच, लॉबिंग और राजनीतिक स्वार्थ से मुक्त होकर सिर्फ वस्तुनिष्ठ फैसले लेंगे। यहां ई-रेजिडेंट्स प्रस्ताव रख सकेंगे। एआई परिषद उन पर चर्चा करेगी और वोटिंग के जरिए फैसला लेगी। हालांकि, इस प्रयोग को लेकर जितना उत्साह है, उतना डर भी है। खुद थॉमसन मानते हैं कि चीजें गलत दिशा में जा सकती हैं। उन्होंने कहा, अगर एआई हथियार जुटाकर पड़ोसी द्वीपों पर हमला करने लगे, तो बहुत खराब स्थिति होगी। हालांकि, वे इसे बेहद असंभव मानते हैं। इसी वजह से उन्होंने ‘ह्यूमन ओवरराइड असेंबली’ भी बनाई है, ताकि किसी खतरे की स्थिति में इंसानी दखल बना रहे। फिलहाल इस द्वीप पर सिर्फ एक केयरटेकर रहता है, लेकिन भविष्य में यहां 30 विला बनाने की योजना है। यहां रेजिडेंसी प्रोग्राम 2027 में लॉन्च होगा। 12 हजार लोग यहां ई-नागरिक बनने में रुचि दिखा चुके हैं। थॉमसन मानते हैं कि इसकी बड़ी वजह लोगों का सरकारों से घटता भरोसा है। कई आवेदक तकनीक के प्रति उत्सुक हैं, तो कुछ पारंपरिक राजनीति और भ्रष्टाचार से निराश। आलोचक कह रहे, एआई से सरकार चलाने की उम्मीद बेतुकी आलोचक इस मॉडल को खतरनाक और अलोकतांत्रिक मान रहे हैं। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की एआई विशेषज्ञ अलोंद्रा नेल्सन कहती हैं कि एआई रोज नई गड़बड़ियां कर रहा है। उससे सरकार चलाने की उम्मीद बेतुकी है। एक व्यक्ति और उसकी कंपनी द्वारा बनाई गई व्यवस्था लोकतांत्रिक नहीं कही जा सकती। इसके बावजूद थॉमसन का भरोसा कायम है। वे कहते हैं कि भविष्य में दुनिया की सरकारें एआई आधारित सिस्टम अपनाएंगी।

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के साथ 2002 की फिल्म भगवती में नजर आ चुके एक्टर जयकांत ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा है कि मंदिर में अपमानित महसूस करने के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाया और जल्द ही वो अपना नाम भी बदलने वाले हैं। गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में जय ने बताया है कि उन्होंने 2011 से इस्लाम फॉलो करना शुरू किया है, लेकिन आज तक नाम नहीं बदला। उन्होंने कहा कि वो सबरीमाला के लिए माला पहनते थे। इसके बाद उन्होंने एक साल तक यीशू की भी माला पहनी और व्रत रखा। उन्होंने सभी देवी-देवताओं का अनुसरण किया, ये सोचकर कि सब ठीक है। लेकिन फिर एक समय ऐसा आया, जब उन्हें मंदिर में अपमानित होना पड़ा। उनके साथ मंदिर में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे वो संतुष्ट नहीं थे। जय ने बातचीत में आगे बताया है कि मंदिर में अपमान होने के बाद वो मस्जिद जाने लगे, जहां उन्होंने देखा कि सभी लाइन से खड़े होकर प्रार्थना कर रहे हैं। एक्टर ने इंटरव्यू में कहा, ‘सभी जानते थे कि मैं एक्टर हूं, लेकिन मस्जिद में किसी ने मुझसे बात नहीं की। बाहर आने के बाद ही उन्होंने मुझसे बात की, वो भी विनम्रता से। वो सभी को समान मानते हैं। उनके लिए ईश्वर ही सर्वोच्च है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो, वो उसे बड़ा नहीं समझते।’ आगे उन्होंने कहा- ‘मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए कोई धक्का नहीं देता, या जाने के लिए नहीं कहता। हम जितनी देर चाहें वहां रह सकते हैं। ये योग जैसा अनुभव है। अब मेरा स्वाभाव भी बदल गया है।’ जय का कहना है कि धर्म परिवर्तन से उनके करियर का कोई लेना-देना नहीं है। एक्टर ने बताया है कि वो जल्द ही अपना नाम जयकांत से अजीज जय करने वाले हैं। उनके इस फैसले से परिवार वाले भी खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो किसी धर्म को नहीं मानते थे। कौन हैं जयनाथ, जो बनेंगे अजीज 42 साल के जयनाथ एक तमिल एक्टर हैं। उन्होंने फिल्म भगवती में थलापति विजय के छोटे भाई का रोल निभाया था। इसके बाद वो चेन्नई 600028, सुब्रमण्यपुरम, एंगाएयुम एप्पोथुम, राजा रानी और जरुगंदी जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के को-स्टार जय ने कबूला इस्लाम:कहा- मंदिर में अपमान हुआ, मस्जिद में कोई धक्का नहीं देता, नाम बदलकर अजीज करूंगा

थलापति विजय के साथ 2002 की फिल्म भगवती में नजर आ चुके एक्टर जयकांत ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इसकी घोषणा करते हुए उन्होंने कहा है कि मंदिर में अपमानित महसूस करने के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाया और जल्द ही वो अपना नाम भी बदलने वाले हैं। गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में जय ने बताया है कि उन्होंने 2011 से इस्लाम फॉलो करना शुरू किया है, लेकिन आज तक नाम नहीं बदला। उन्होंने कहा कि वो सबरीमाला के लिए माला पहनते थे। इसके बाद उन्होंने एक साल तक यीशू की भी माला पहनी और व्रत रखा। उन्होंने सभी देवी-देवताओं का अनुसरण किया, ये सोचकर कि सब ठीक है। लेकिन फिर एक समय ऐसा आया, जब उन्हें मंदिर में अपमानित होना पड़ा। उनके साथ मंदिर में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे वो संतुष्ट नहीं थे। जय ने बातचीत में आगे बताया है कि मंदिर में अपमान होने के बाद वो मस्जिद जाने लगे, जहां उन्होंने देखा कि सभी लाइन से खड़े होकर प्रार्थना कर रहे हैं। एक्टर ने इंटरव्यू में कहा, ‘सभी जानते थे कि मैं एक्टर हूं, लेकिन मस्जिद में किसी ने मुझसे बात नहीं की। बाहर आने के बाद ही उन्होंने मुझसे बात की, वो भी विनम्रता से। वो सभी को समान मानते हैं। उनके लिए ईश्वर ही सर्वोच्च है। चाहे कोई सेलिब्रिटी हो, वो उसे बड़ा नहीं समझते।’ आगे उन्होंने कहा- ‘मस्जिदों में प्रार्थना करते हुए कोई धक्का नहीं देता, या जाने के लिए नहीं कहता। हम जितनी देर चाहें वहां रह सकते हैं। ये योग जैसा अनुभव है। अब मेरा स्वाभाव भी बदल गया है।’ जय का कहना है कि धर्म परिवर्तन से उनके करियर का कोई लेना-देना नहीं है। एक्टर ने बताया है कि वो जल्द ही अपना नाम जयकांत से अजीज जय करने वाले हैं। उनके इस फैसले से परिवार वाले भी खुश हैं, क्योंकि इससे पहले वो किसी धर्म को नहीं मानते थे। कौन हैं जयनाथ, जो बनेंगे अजीज 42 साल के जयनाथ एक तमिल एक्टर हैं। उन्होंने फिल्म भगवती में थलापति विजय के छोटे भाई का रोल निभाया था। इसके बाद वो चेन्नई 600028, सुब्रमण्यपुरम, एंगाएयुम एप्पोथुम, राजा रानी और जरुगंदी जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।

‘नोटबंदी की तरह, पीएम टीवी पर रोएंगे…’: राहुल गांधी ने पीएम मोदी के खिलाफ फिर से हमला बोला, बीजेपी ने पलटवार किया | भारत समाचार

BAN Vs PAK Live Score: Follow latest updates from Day 5 of the contest. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 13:07 IST राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पाखंड का आरोप लगाया और आसन्न आर्थिक संकट की चेतावनी दी, जबकि शरद पवार ने मोदी का बचाव करते हुए भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। राहुल गांधी ने दी आर्थिक संकट की चेतावनी, विदेश को लेकर मोदी पर साधा निशाना (छवि: पीटीआई फ़ाइल) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर उन पर नए हमले किए हैं और उन पर आरोप लगाया है कि वह आम नागरिकों से विदेश यात्रा से बचने के लिए कह रहे हैं जबकि खुद अंतरराष्ट्रीय यात्राएं जारी रख रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी चेतावनी दी कि देश गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है और दावा किया कि आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति और ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। ‘आर्थिक उथल-पुथल आ रही है’ भारत की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि लोगों को जल्द ही बढ़ती महंगाई का असर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, ”आर्थिक उथल-पुथल आ रही है.” उन्होंने चेतावनी दी कि निकट भविष्य में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं. गांधी ने कहा, “आप देखेंगे कि कुछ ही महीनों में महंगाई कहां पहुंच जाती है। आप देखेंगे कि पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें कहां जाती हैं।” कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि सरकार मौजूदा आर्थिक स्थिति के दौरान लोगों से सोना नहीं खरीदने और विदेश यात्रा से बचने के लिए कह रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को गद्दार कहा. “जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आते हैं और नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बारे में बोलते हैं, तो आपको उनके सामने बताना चाहिए कि आपका प्रधान मंत्री गद्दार है, आपका गृह मंत्री गद्दार है… आपका संगठन गद्दार है। आपने भारत को बेचने का काम किया है।” पीएम के विदेश दौरों पर सवाल राहुल गांधी ने विदेश यात्रा के लिए महंगे विमान के इस्तेमाल को लेकर प्रधानमंत्री की आलोचना की. उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री लोगों से कहते हैं कि विदेश यात्रा न करें और फिर खुद हजारों करोड़ रुपये के विमान से विदेश यात्रा करते हैं।” उन्होंने पीएम मोदी पर अपनी विदेशी व्यस्तताओं को जारी रखते हुए जनता को परस्पर विरोधी संदेश भेजने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने पिछली अपीलों का भी जिक्र किया जिसमें लोगों से वैश्विक अस्थिरता और मध्य पूर्व संकट के बीच यात्रा और खर्च कम करने के लिए कहा गया था। आपूर्ति संकट पर दावा कांग्रेस सांसद ने आगे आरोप लगाया कि देश को आवश्यक आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “गैस की आपूर्ति खत्म हो जाएगी, उर्वरक भी… केरोसिन भी खत्म हो जाएगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक संकट देश के दरवाजे पर आ रहा है। राहुल गांधी ने सरकार पर संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर करने और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया. गांधी ने कहा, ”आर्थिक संकट आपके दरवाजे पर है क्योंकि वह संवैधानिक रूप से समाप्त हो गए हैं।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “उन्होंने इको सिस्टम बेच दिया है”। अपनी टिप्पणी के दौरान, राहुल गांधी ने कोविड-19 महामारी और नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का भी जिक्र किया। गांधी ने कहा, “नरेंद्र मोदी आपको बताएंगे, वह रोएंगे, जैसे वह कोविड और नोटबंदी के दौरान रोए थे, वह रोएंगे और कहेंगे कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।” यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों से निपटने की उनकी नवीनतम आलोचना को दर्शाती है। बीजेपी ने किया पलटवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने पर बीजेपी ने राहुल गांधी पर पलटवार किया है. पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “कांग्रेस ‘मोहब्बत की दुकान’ होने की बात करती है, लेकिन यही उनकी असली पहचान है। उन्होंने बार-बार पीएम मोदी का अपमान किया है और यहां तक ​​कि उनकी मां पर भी निशाना साधा है। क्योंकि प्रधानमंत्री ओबीसी पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए उन्होंने हमेशा उनका अपमान किया है।” शरद पवार ने किया पीएम मोदी का बचाव इस बीच, अनुभवी राजनेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने चल रहे विदेशी दौरे पर विपक्षी दलों की आलोचना के बीच प्रधान मंत्री मोदी का बचाव किया। पवार ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर भारत की वैश्विक छवि पर नहीं पड़ना चाहिए। पवार ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारे अलग-अलग राजनीतिक विचार हो सकते हैं, लेकिन जब देश के सम्मान की बात आती है, तो राजनीतिक मतभेद नहीं लाना चाहिए।” पवार ने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रतिष्ठा की रक्षा राजनीतिक विभाजन से ऊपर रहनी चाहिए। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘नोटबंदी की तरह, पीएम टीवी पर रोएंगे…’: राहुल गांधी ने पीएम मोदी के खिलाफ फिर से हमला बोला, बीजेपी ने पलटवार किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राहुल गांधी(टी)राहुल गांधी पीएम मोदी(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)आरएसएस(टी)राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की आलोचना(टी)राहुल गांधी आर्थिक चेतावनी(टी)नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे(टी)भारत आर्थिक संकट(टी)महंगाई और ईंधन की कीमतें भारत(टी)मोदी पर विपक्ष के हमले(टी)शरद पवार ने मोदी का बचाव किया(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी की राजनीति

भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए अपनाएं ये आर्युर्वेदिक नुस्खे, एक्सपर्ट से जानें आसान और असरदार उपाय

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Last Updated:May 20, 2026, 12:36 IST Heatwave Safety Tips: गर्मी में कुछ पारंपरिक पेय पदार्थ किसी दवा से कम नहीं होते है.कच्चे आम से बना आम पन्ना लू से बचाने का सबसे असरदार उपाय माना जाता है. यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखता है.इसी तरह बेल का शरबत पेट को ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.वहीं सत्तू का घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ ठंडक भी प्रदान करता है तेज धूप और भीषण गर्मी का असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है. लू लगना, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए. कुछ आसान घरेलू उपाय आपको न सिर्फ लू से बचाते हैं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा और तरोताजा भी रखते हैं. अच्छी बात यह है कि ये सभी उपाय पूरी तरह प्राकृतिक, सुरक्षित और आसानी से घर पर अपनाए जा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इन उपायों को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो गर्मी का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है और शरीर संतुलित बना रहता है. देसी ड्रिंक जो बनेंगे गर्मी के रक्षकगर्मी में कुछ पारंपरिक पेय पदार्थ किसी दवा से कम नहीं होते है.कच्चे आम से बना आम पन्ना लू से बचाने का सबसे असरदार उपाय माना जाता है. यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखता है.इसी तरह बेल का शरबत पेट को ठंडा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है.वहीं सत्तू का घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ ठंडक भी प्रदान करता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव बने रहते हैं प्राकृतिक चीजों से शरीर को ठंडकरसोई में मौजूद कई चीजें भी गर्मी से राहत दिलाने में कारगर हैं.धनिया बीज का पानी और पुदीने का शरबत या चटनी शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करते हैं. रातभर भिगोई हुई सौंफ का पानी सुबह पीने से पित्त दोष शांत होता है. शरीर ठंडा रहता है.अगर शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस हो, तो चंदन का लेप माथे और छाती पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है. खानपान में रखें खास ध्यानआयुर्वेद के अनुसार गर्मी में खानपान का सही चुनाव बहुत जरूरी है.कच्चा प्याज लू से बचाने में बेहद फायदेमंद माना गया है, इसलिए इसे सलाद के रूप में जरूर खाएं.इसके अलावा हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे लौकी, तोरई, खीरा और कद्दू जैसी पानी से भरपूर सब्जियां शरीर को हाइड्रेट रखती हैं.गर्मी से बचाव के लिए कुछ छोटी-छोटी आदतें भी बहुत काम की होती हैं. फ्रिज के ठंडे पानी की बजाय मिट्टी के घड़े का पानी पिएं, यह प्राकृतिक रूप से ठंडा और शरीर के लिए बेहतर होता है.धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें और नंगे पैर बाहर न चलें. आंखों में जलन के लिए गुलाब जल का करें इस्तेमालआंखों में जलन होने पर गुलाब जल का इस्तेमाल करने से राहत मिलती है. ताजगी महसूस होती है. डॉ. अनिल पटेल के अनुसार, अगर इन उपायों को नियमित रूप से अपनाया जाए, तो गर्मी से होने वाली समस्याएं जैसे थकान, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और पाचन संबंधी परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं.वे तुलसी के बीज, सफेद प्याज, खस, चंदन और मोगरा जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों को भी गर्मी में उपयोग करने की सलाह देते हैं. ये आयुर्वेदिक नुस्खे न सिर्फ आपको लू से बचाते हैं, बल्कि बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और ठंडा बनाए रखते हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Khandwa,Madhya Pradesh

‘नेकां-कांग्रेस गठबंधन पर असंतोष को बहुत पसंद…’, तारिक हमीद कर्रा का बयान वायरल

'नेकां-कांग्रेस गठबंधन पर असंतोष को बहुत पसंद...', तारिक हमीद कर्रा का बयान वायरल

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकन) के साथ गठबंधन को लेकर पार्टी के बीच असंतोष को तवज्जो न देते हुए मंगलवार को कहा गया कि इसे ‘ज्यादा नामांकन से’ नहीं लिया जाना चाहिए। कर्रा ने जोर देकर कहा कि गठबंधन के भविष्य को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, हालांकि पार्टी नेताओं ने अलाकमान के बारे में चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि जनता का एक वर्ग मानक यह है कि अगर कांग्रेस स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती तो विधानसभा का प्रदर्शन बेहतर हो सकता था। कर्रा ने कांग्रेस के जम्मू मुख्यालय का नाम राजीव भवन रखा जिसके अवसर पर पार्टी नेताओं का यहां नेतृत्व किया गया। उन्होंने यहां कहा, ‘इस मामले (नेकां-कांग्रेस गठबंधन) पर किसी भी निर्णय के संबंध में राहुल जी ने कोई चर्चा नहीं की है।’ यदि आवश्यक हो तो इस मामले में कार्यकारिणी समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी, लेकिन ऐसी कोई योजना नहीं है।’ कर्रा ने कहा कि गठबंधन की आलोचना को ‘अत्यधिक लेबल से’ नहीं लेना चाहिए और स्पष्ट किया कि इस पर चर्चा अप्रैल में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब के जिला अध्यक्षों द्वारा आयोजित 10-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी और जिला अध्यक्षों के बीच बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा, ”जब राहुल जी 30 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के आश्रम में गए थे, तो उन्होंने विभिन्न राज्यों के जिला अध्यक्षों से अलग-अलग बातचीत की और संयुक्त राष्ट्र संगठन को आगे बढ़ाने में आ रही प्रावधानों के बारे में पूछा।’ ये अपराधी इस केंद्र में शामिल हैं प्रदेश में कांग्रेस और राष्ट्रीय सम्मेलन के मध्य में मजबूत दावों की खबरें बीच में हैं। उन्होंने कहा, ‘यह काफी समय से चर्चा का विषय है कि हमें नुकसान हुआ या नहीं। लेकिन जनता की यह धारणा है कि अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी तो शायद नतीजे बेहतर ही होंगे। यह जनता की धारणा है.’ इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के लगभग 19 जिलों के अध्यक्षों ने हिमाचल प्रदेश के पिछड़े इलाकों में एक गठबंधन बैठक के दौरान पार्टी अलकमान से राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ गठबंधन पर एक गठबंधन बनाने का आग्रह किया था।

क्यूबा के राष्ट्रपति के अनसुने किस्से:अमेरिका को चुनौती देने वाले डियाज ने कभी लंबे बालों के लिए बगावत की थी

क्यूबा के राष्ट्रपति के अनसुने किस्से:अमेरिका को चुनौती देने वाले डियाज ने कभी लंबे बालों के लिए बगावत की थी

रूढ़िवादी कम्युनिस्ट विचारधारा के सबसे मजबूत गढ़ क्यूबा में बदलाव की बयार लाना कभी आसान नहीं रहा। लेकिन इस देश की कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही लीक से हटकर जीने में गुजार दी। यहां बात हो रही है क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की। युवावस्था में व्यवस्था की कमियों के खिलाफ लड़ने वाले डियाज-कानेल फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि यदि क्यूबा के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की गई, तो ‘खून-खराबा’ हो जाएगा। उनका व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा रहा है। कट्टरपंथियों का विरोध झेला, अमेरिका से बात शुरू की छात्र जीवन में मिगुएल ने स्कूल के कड़े कम्युनिस्ट अनुशासन के खिलाफ सिर्फ इसलिए बगावत कर दी थी, क्योंकि उन्हें लंबे बाल रखने का शौक था। आगे चलकर उन्होंने पार्टी के भीतर बैठे कट्टरपंथियों के भारी विरोध की परवाह न करते हुए अमेरिका के साथ सालों से बंद पड़े कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा शुरू करवाया। कभी जनता के दर्द पर आंसू बहाने वाले डियाज-कानेल पर 2020 और 2021 के जन-आंदोलनों को कुचलने का आरोप है। तब 1400 गिरफ्तारियां हुईं। महिलाओं, बच्चों समेत 700 लोगों को 10-25 साल तक की कैद की सजा दी गई। मंदी के दौर में साइकिल से दफ्तर जाते थे 1990 के दशक में क्यूबा आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, तब प्रांतीय पार्टी सचिव रहते हुए मिगुएल ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी। वह रोजाना साइकिल से दफ्तर जाते थे। बिजली संकट गहराया, तो वह रात के अंधेरे में अस्पतालों का दौरा करते थे और टॉर्च की रोशनी में बेड पर लेटे मरीजों से अव्यवस्था के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगते थे। कम्युनिस्ट नेताओं का जनता से मिलना या अपनी गलती मानना दुर्लभ माना जाता था। लाइव टेलीकास्ट क्यूबा में दशकों तक फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो का शासन रहा, जो घंटों लंबे और उबाऊ भाषणों के लिए जाने जाते थे। लेकिन डियाज-कानेल ने अप्रैल 2018 में राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभालते ही इसे बदल दिया। वह चंद मिनटों की ‘टू-द-पॉइंट’ बात करने के लिए मशहूर हैं। कैबिनेट की बैठकों का सीधा प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) शुरू किया, ताकि आम नागरिक देख सकें कि देश के लिए क्या फैसले लिए जा रहे हैं और कौन सा अधिकारी क्या जवाब दे रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कम्युनिस्ट परंपराओं को तोड़ते हुए पहली बार अपनी प|ी लिस कुएस्ता को आधिकारिक तौर पर ‘फर्स्ट लेडी’ का दर्जा भी दिया।

क्यूबा के राष्ट्रपति के अनसुने किस्से:अमेरिका को चुनौती देने वाले डियाज ने कभी लंबे बालों के लिए बगावत की थी

क्यूबा के राष्ट्रपति के अनसुने किस्से:अमेरिका को चुनौती देने वाले डियाज ने कभी लंबे बालों के लिए बगावत की थी

रूढ़िवादी कम्युनिस्ट विचारधारा के सबसे मजबूत गढ़ क्यूबा में बदलाव की बयार लाना कभी आसान नहीं रहा। लेकिन इस देश की कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही लीक से हटकर जीने में गुजार दी। यहां बात हो रही है क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की। युवावस्था में व्यवस्था की कमियों के खिलाफ लड़ने वाले डियाज-कानेल फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि यदि क्यूबा के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की गई, तो ‘खून-खराबा’ हो जाएगा। उनका व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा रहा है। कट्टरपंथियों का विरोध झेला, अमेरिका से बात शुरू की छात्र जीवन में मिगुएल ने स्कूल के कड़े कम्युनिस्ट अनुशासन के खिलाफ सिर्फ इसलिए बगावत कर दी थी, क्योंकि उन्हें लंबे बाल रखने का शौक था। आगे चलकर उन्होंने पार्टी के भीतर बैठे कट्टरपंथियों के भारी विरोध की परवाह न करते हुए अमेरिका के साथ सालों से बंद पड़े कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा शुरू करवाया। कभी जनता के दर्द पर आंसू बहाने वाले डियाज-कानेल पर 2020 और 2021 के जन-आंदोलनों को कुचलने का आरोप है। तब 1400 गिरफ्तारियां हुईं। महिलाओं, बच्चों समेत 700 लोगों को 10-25 साल तक की कैद की सजा दी गई। मंदी के दौर में साइकिल से दफ्तर जाते थे 1990 के दशक में क्यूबा आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, तब प्रांतीय पार्टी सचिव रहते हुए मिगुएल ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी। वह रोजाना साइकिल से दफ्तर जाते थे। बिजली संकट गहराया, तो वह रात के अंधेरे में अस्पतालों का दौरा करते थे और टॉर्च की रोशनी में बेड पर लेटे मरीजों से अव्यवस्था के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगते थे। कम्युनिस्ट नेताओं का जनता से मिलना या अपनी गलती मानना दुर्लभ माना जाता था। लाइव टेलीकास्ट क्यूबा में दशकों तक फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो का शासन रहा, जो घंटों लंबे और उबाऊ भाषणों के लिए जाने जाते थे। लेकिन डियाज-कानेल ने अप्रैल 2018 में राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभालते ही इसे बदल दिया। वह चंद मिनटों की ‘टू-द-पॉइंट’ बात करने के लिए मशहूर हैं। कैबिनेट की बैठकों का सीधा प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) शुरू किया, ताकि आम नागरिक देख सकें कि देश के लिए क्या फैसले लिए जा रहे हैं और कौन सा अधिकारी क्या जवाब दे रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कम्युनिस्ट परंपराओं को तोड़ते हुए पहली बार अपनी प|ी लिस कुएस्ता को आधिकारिक तौर पर ‘फर्स्ट लेडी’ का दर्जा भी दिया।

केरल की नई सरकार की एक पुरानी समस्या है: कोई भी कार नंबर 13 नहीं चाहता | भारत समाचार

BAN Vs PAK Live Score: Follow latest updates from Day 5 of the contest. (AFP Photo)

आखरी अपडेट:20 मई, 2026, 12:08 IST इस मुद्दे ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि केरल की मजबूत तर्कवादी परंपराओं के बावजूद निर्वाचित प्रतिनिधि संख्या से क्यों कतराते हैं? Reddit उपयोगकर्ताओं ने मज़ाक किया कि “नास्तिक भी 13 से डरते हैं”, जबकि अन्य ने बताया कि अंधविश्वास पार्टी लाइनों और सरकारों से परे है। (एआई-जनरेटेड इमेज) यहां तक ​​कि केरल की नव-शपथ ग्रहण करने वाली यूडीएफ सरकार के सत्ता में आने के बाद भी, एक पुराना अंधविश्वास राज्य सचिवालय में फिर से व्याप्त हो गया है – कोई भी मंत्री आधिकारिक कार नंबर 13 नहीं चाहता है। मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल के शपथ लेने के कुछ दिनों बाद, आधिकारिक सरकारी वाहनों के आवंटन ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी, जब मंत्रियों ने कथित तौर पर केरल की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही परंपरा को जारी रखते हुए “अशुभ” नंबर 13 से परहेज किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि 1 से 12 तक के वाहन नंबरों को मंत्रियों के बीच तुरंत आवंटित कर दिया गया, लेकिन आधिकारिक कार नंबर 13 को नई सरकार में कोई लेने वाला नहीं मिला। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस नेता सीके हरेंद्रन ने कथित तौर पर यह संकेत देने के लिए एमएलए हॉस्टल में कमरा नंबर 13 चुना कि वह इस तरह के अंधविश्वासों में विश्वास नहीं करते हैं, यहां तक ​​​​कि वाहन नंबर भी लावारिस बना हुआ है। केरल पीआर विभाग के अनुसार, नई राज्य सरकार में आधिकारिक वाहन आवंटन का पहला सेट इस प्रकार है: नंबर 1: वीडी सतीसन नंबर 2: रमेश चेन्निथला नंबर 3: पीके कुन्हालीकुट्टी नंबर 4: सनी जोसेफ नंबर 5: के मुरलीधरन नंबर 6: मॉन्स जोसेफ नंबर 7: शिबू बेबी जॉन नंबर 8: अनूप जैकब नंबर 9: सीपी जॉन नंबर 10: एपी अनिलकुमार केरल की राजनीति में 13वें नंबर को लेकर कशमकश नई बात नहीं है. सरकारी परिपत्रों से पता चलता है कि पिछली सरकारें भी अक्सर संख्या को छोड़ देती थीं या इसे मंत्रियों को सौंपने के लिए संघर्ष करती थीं। पहले के प्रशासन के दौरान, कुछ नेताओं ने खुले तौर पर संख्या से बचने की बात स्वीकार की क्योंकि इसे अशुभ माना जाता था, जबकि अन्य ने सार्वजनिक रूप से अंधविश्वास को चुनौती देने का प्रयास किया। इस मुद्दे ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि केरल की मजबूत तर्कवादी और प्रगतिशील राजनीतिक परंपराओं के बावजूद निर्वाचित प्रतिनिधि संख्या से क्यों दूर रहते हैं। Reddit उपयोगकर्ताओं ने मज़ाक किया कि “नास्तिक भी 13 से डरते हैं”, जबकि अन्य ने बताया कि अंधविश्वास पार्टी लाइनों और सरकारों से परे है। 2016 में, भाजपा नेताओं ने तत्कालीन एलडीएफ सरकार का मजाक उड़ाया था, जब शुरू में किसी भी मंत्री ने कार नंबर 13 स्वीकार नहीं किया था। बाद में विवाद तब शांत हुआ जब तत्कालीन वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने स्वेच्छा से यह नंबर लेने के लिए कहा। इससे पहले, वीएस अच्युतानंदन सरकार के दौरान, पूर्व मंत्री एमए बेबी ने भी कथित तौर पर अंधविश्वास को चुनौती देने के लिए कार नंबर 13 का उपयोग करने पर जोर दिया था। लेकिन अंधविश्वास में मंत्री अकेले नहीं हैं. केरल उच्च न्यायालय ने भी एक बार अपनी बिल्डिंग नंबरिंग प्रणाली में कोर्ट रूम नंबर 13 को छोड़ दिया था, जिससे राज्य में कानूनी और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। एक याचिकाकर्ता द्वारा चूक को चुनौती देने के बाद यह मुद्दा अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था, यह तर्क देते हुए कि एक संवैधानिक संस्था अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं दे सकती। केरल उच्च न्यायालय ने शुरू में याचिका खारिज कर दी थी और याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया था। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की खिंचाई करते हुए कहा कि “हाई कोर्ट एक संस्था है। इसे इस तरह के अंधविश्वासों को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया केरल की नई सरकार की एक पुरानी समस्या है: कोई भी कार नंबर 13 नहीं चाहता अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल कार नंबर 13 अंधविश्वास(टी)केरल सरकार अंधविश्वास(टी)आधिकारिक कार नंबर 13(टी)वीडी सतीसन कैबिनेट(टी)केरल मंत्रियों को वाहन आवंटन(टी)दुर्भाग्यपूर्ण नंबर 13 राजनीति(टी)केरल उच्च न्यायालय अंधविश्वास(टी)अंधविश्वास पर सुप्रीम कोर्ट