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अडाणी एंटरप्राइजेस ट्रंप प्रशासन को ₹2,300 करोड़ चुकाएगी:ईरान से गैस खरीदने के मामले में सेटलमेंट हुआ; अमेरिका में $10 बिलियन का निवेश करेंगे

अडाणी एंटरप्राइजेस ट्रंप प्रशासन को ₹2,300 करोड़ चुकाएगी:ईरान से गैस खरीदने के मामले में सेटलमेंट हुआ; अमेरिका में $10 बिलियन का निवेश करेंगे

भारतीय कारोबारी गौतम अडाणी की कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का मामला सुलझा लिया है। इसके लिए कंपनी अमेरिकी ट्रेजरी को सेटलमेंट राशि के रूप में 275 मिलियन डॉलर (करीब 2,300 करोड़ रुपए) का भुगतान करेगी। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को इस समझौते की आधिकारिक घोषणा की। यह मामला ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के 32 संभावित नागरिक दायित्व उल्लंघनों से जुड़ा हुआ है। ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने एक बयान में बताया कि दोनों पक्षों के बीच इस बड़ी राशि के भुगतान को लेकर सहमति बन गई है। अडाणी एंटरप्राइजेज ने इस साल फरवरी में ही साफ कर दिया था कि वह अमेरिकी जांच में पूरा सहयोग कर रही है। दुबई के सप्लायर से खरीदा था ओमान-इराक के नाम पर ईरानी गैस OFAC के मुताबिक, पूरा मामला नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात से जुड़ा हुआ है। अडाणी एंटरप्राइजेज ने दुबई के एक ट्रेडर से LPG की खेप खरीदी थी। उस सप्लायर ने दावा किया था कि यह गैस ओमान और इराक से आ रही है। हालांकि, जांच में सामने आया कि यह एलपीजी वास्तव में ईरान से मंगवाई गई थी। ईरान के ऊर्जा व्यापार को सीमित करने वाले अमेरिकी नियमों (ITSR) के तहत इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। मुंद्रा पोर्ट पर आई थी खेप, नियमों की अनदेखी पड़ी भारी अमेरिकी एजेंसी का कहना है कि अडाणी एंटरप्राइजेज ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के जरिए भारत में इस एलपीजी का आयात किया था। इसके भुगतान के लिए अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के जरिए डॉलर में 32 ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल कीमत लगभग 192 मिलियन डॉलर थी। OFAC ने कहा कि कंपनी को ऐसे कई संकेत मिले थे (रेड फ्लैग्स) जिनसे उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए था कि यह एलपीजी ईरान से ही आ रही है। कंपनी ने खुद से इन संभावित उल्लंघनों की जानकारी नहीं दी थी, इसलिए उन्हें इस गंभीर मामले में किसी भी तरह की ढील नहीं दी गई। इस वजह से कंपनी पर शुरुआती सिविल पेनल्टी 384.2 मिलियन डॉलर की बन रही थी, लेकिन आपसी बातचीत और सहयोग के बाद फाइनल सेटलमेंट 275 मिलियन डॉलर पर तय हुआ। अडाणी के अन्य अमेरिकी मामलों में भी राहत के संकेत यह सेटलमेंट ऐसे समय में आया है जब गौतम अडाणी को अमेरिका में चल रहे कुछ अन्य कानूनी मामलों में भी बड़ी राहत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले सप्ताह के कोर्ट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की कथित योजना से जुड़े एक सिविल मुकदमे को अलग से सेटल कर लिया है, हालांकि इसे अभी कोर्ट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके साथ ही, दो सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) अडाणी के खिलाफ चल रहे आपराधिक फ्रॉड के आरोपों को हटाने के बेहद करीब है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब गौतम अडाणी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया है। इसके अलावा कुछ ही दिन पहले अडाणी की एक अन्य कंपनी ने बिना दोष स्वीकार किए भ्रष्टाचार से जुड़े एक सिविल कोर्ट मामले को सुलझाने के लिए 18 मिलियन डॉलर के भुगतान पर सहमति जताई थी।

देर रात तक जागने की आदत शरीर को कैसे बदल देती है? धीरे-धीरे दिखने लगते हैं ये संकेत

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Last Updated:May 18, 2026, 22:16 IST आजकल देर रात तक जागना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन गया है, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ने लगता है. लगातार कम नींद लेने से थकान, चिड़चिड़ापन, कमजोर इम्यूनिटी और फोकस की समस्या बढ़ सकती है. समय रहते इस आदत को न बदला जाए तो यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह बन सकती है. ख़बरें फटाफट देर रात तक जागने के नुकसान. आजकल देर रात तक मोबाइल चलाना, वेब सीरीज देखना या काम करना कई लोगों की आदत बन चुका है. शुरुआत में यह सिर्फ एक छोटी सी लाइफस्टाइल चॉइस लगती है, लेकिन लगातार रात में देर तक जागने का असर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ने लगता है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि बदलाव धीरे-धीरे दिखाई देते हैं. लेकिन समय के साथ यही आदत थकान, मूड स्विंग, कमजोर इम्यूनिटी और कई दूसरी समस्याओं की वजह बन सकती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, हमारे शरीर में एक नैचुरल बॉडी क्लॉक होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है. यह तय करती है कि कब शरीर को आराम चाहिए और कब एक्टिव रहना है. जब कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है, तो यह बॉडी क्लॉक बिगड़ने लगती है. इसका असर नींद की क्वालिटी पर पड़ता है और सुबह उठने के बाद भी शरीर फ्रेश महसूस नहीं करता. कई लोगों को दिनभर सुस्ती, सिर भारी लगना और काम में फोकस न कर पाने जैसी परेशानियां होने लगती हैं. धीरे-धीरे यह आदत पूरे रूटीन को असंतुलित कर देती है. दिमाग और मूड पर भी पड़ता है असरदेर रात तक जागने का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है. कम नींद लेने वाले लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव और मूड स्विंग ज्यादा देखे जाते हैं. कई बार छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है और दिमाग शांत नहीं रहता. रात में देर तक स्क्रीन देखने से दिमाग लगातार एक्टिव बना रहता है, जिससे उसे ठीक से आराम नहीं मिल पाता. कुछ लोगों को याददाश्त कमजोर होने या चीजें भूलने जैसी दिक्कतें भी महसूस होने लगती हैं. इम्यूनिटी और पाचन पर पड़ सकता है बुरा असरजब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो इम्यून सिस्टम भी कमजोर होने लगता है. ऐसे लोग जल्दी सर्दी-जुकाम, खांसी या वायरल संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. इसके अलावा देर रात तक जागने वाले लोग अक्सर अनहेल्दी स्नैकिंग भी करते हैं, जिससे पाचन पर असर पड़ता है. एसिडिटी, पेट भारी रहना और भूख का सही समय बिगड़ना आम समस्या बन सकती है. कुछ लोगों का वजन तेजी से बढ़ने लगता है, क्योंकि देर रात जागने से हार्मोन बैलेंस भी प्रभावित होता है. त्वचा और आंखों में दिखने लगते हैं बदलावनींद पूरी न होने का असर चेहरे पर भी साफ नजर आने लगता है. आंखों के नीचे डार्क सर्कल, त्वचा का बेजान दिखना और चेहरे पर थकान नजर आना आम बात है. रात के समय शरीर खुद को रिपेयर करता है, लेकिन अगर नींद पूरी न हो तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. लगातार देर रात तक जागने से आंखों में जलन, सूखापन और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं, खासकर उन लोगों में जो रातभर मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं. कैसे सुधार सकते हैं अपनी आदतअगर आप रोज देर रात तक जागते हैं, तो धीरे-धीरे अपनी स्लीप टाइमिंग सुधारने की कोशिश करें. सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन टाइम कम करें और रात में कैफीन वाली चीजों से दूरी बनाएं. हर दिन एक तय समय पर सोना और उठना शरीर की बॉडी क्लॉक को दोबारा संतुलित करने में मदद कर सकता है. अच्छी नींद सिर्फ आराम नहीं देती, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी बेहद जरूरी मानी जाती है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

न आम, न तरबूज…उत्तराखंड की गर्मियों का साथी ये नन्हा फल, पहाड़ों पर इसके गाए जाते गीत

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Last Updated:May 18, 2026, 21:33 IST Kafal Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला काफल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. गहरे लाल रंग का यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से काफी प्रसिद्ध है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है. काफल केवल फल नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा भी है. प्रसिद्ध लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. पहाड़ों में यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. इसी के साथ जंगलों में रौनक बढ़ने लगती है. गांवों में बच्चे और महिलाएं जंगलों में काफल तोड़ने जाते हैं, जो एक तरह की पारंपरिक गतिविधि बन चुकी है. कई मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी काफल जान है. काफल को प्राकृतिक ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर को ताजगी और ठंडक मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में उपयोग करते आए हैं. पहाड़ों में जंगलों से लौटते समय लोग काफल खाकर थकान मिटाते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बिना किसी मिलावट और केमिकल के मिलने वाला काफल आज के समय में लोगों के लिए हेल्दी विकल्प बन चुका है. गर्मियों के मौसम में काफल स्थानीय ग्रामीणों के लिए अच्छी आय का साधन बन जाता है. गांवों के लोग जंगलों से काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है. सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में काफल की अच्छी कीमत मिलती है. पर्यटक भी इसे खरीदने में काफी रुचि दिखाते हैं. कई परिवारों की मौसमी आय का बड़ा हिस्सा काफल बिक्री से आता है. खासकर महिलाओं और युवाओं को इससे रोजगार मिलता है. पहाड़ों में सीमित रोजगार के बीच यह जंगली फल लोगों के लिए आर्थिक सहारा बन रहा है. हर साल काफल सीजन का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google पिछले कुछ वर्षों में काफल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पहले यह केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ने लगी है. लोग इसे उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान के रूप में पसंद कर रहे हैं. कई स्थानीय व्यापारी काफल को पैक करके दूसरे शहरों तक पहुंचा रहे हैं. सोशल मीडिया और पर्यटन के कारण भी इसकी पहचान मजबूत हुई है. गर्मियों में बाजारों में काफल की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसका स्वाद पसंद करते हैं. प्राकृतिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण काफल आज उत्तराखंड के सबसे चर्चित जंगली फलों में शामिल हो गया है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला जंगली फल है. उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के जंगलों में यह बड़ी मात्रा में मिलता है. करीब 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफल के पेड़ अधिक पाए जाते हैं. ग्रामीण लोग हर साल मौसम आने पर जंगलों से काफल इकट्ठा करते हैं. पहाड़ों के पर्यावरण और जैव विविधता में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है. बिना किसी रासायनिक खाद या दवा के उगने वाला यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि काफल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भी खजाना है. इसमें विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. काफल पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की समस्याओं से राहत देने में उपयोगी है. इसकी छाल का उपयोग दांत दर्द और गले की खराश में भी किया जाता है. गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह फल प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच काफल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. पहाड़ घूमने पहुंचे लोग स्थानीय बाजारों और सड़कों पर काफल खरीदते नजर आते हैं. इसका अनोखा स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है. कई लोग इसे पहाड़ों की खास पहचान मानते हैं. काफल से बने नमक-मसाले वाले स्वाद को लोग बड़े चाव से खाते हैं. सोशल मीडिया पर भी काफल की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं. गर्मियों में पहाड़ी पर्यटन के साथ काफल की बिक्री भी बढ़ जाती है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर काफल के बारे में पूछते हैं, इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा जरूर खरीदते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में काफल की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है. लाल और गहरे बैंगनी रंग का काफल जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, मई-जून के महीनों में बाजारों में दिखाई देता है. स्थानीय लोग सुबह-सुबह जंगलों से काफल तोड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं. सड़क किनारे छोटे दुकानदार भी इसे बेचते नजर आते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

स्किन फास्टिंग: बिना सरकारी प्रोडक्ट्स के नेचुरल ग्लो, गर्मियों में तेजी से ट्रेंड कर रही है स्किन फास्टिंग

स्किन फास्टिंग: बिना सरकारी प्रोडक्ट्स के नेचुरल ग्लो, गर्मियों में तेजी से ट्रेंड कर रही है स्किन फास्टिंग

18 मई 2026 को 21:05 IST पर अद्यतन किया गया स्किन फास्टिंग: बिना सरकारी प्रोडक्ट्स के ही गर्मियों में स्किन पे सेकीन चमकती है। इस सीजन में बहुत तेजी से ट्रेंड हो रहा है ये स्किन फास्टिंग का तरीका। (टैग्सटूट्रांसलेट)स्किन फास्टिंग(टी)ग्रीष्मकालीन स्किनकेयर(टी)प्राकृतिक चमक टिप्स(टी)स्किनकेयर रूटीन(टी)न्यूनतम स्किनकेयर(टी)स्किन बैरियर रिपेयर(टी)स्वस्थ त्वचा टिप्स(टी)सौंदर्य रुझान 2026(टी)प्राकृतिक रूप से चमकती त्वचा(टी)चेहरे की देखभाल के टिप्स

ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

Ruturaj Gaikwad and Kartik Sharma are building a partnership (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार

खांसी में कौन से फल खाएं ताकि दवा से भी तेजी से मिले आराम? जानिए ये 4 असरदार फ्रूट्स का राज

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Last Updated:May 18, 2026, 20:39 IST खांसी और गले की खराश होने पर सही खानपान शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है. अनानास, अनार का जूस, केला और कीवी जैसे फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं. खांसी में खाने वाले फल. मौसम बदलते ही खांसी, गले में खराश और बलगम जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. कई लोग दवाइयों के साथ खानपान पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि कुछ चीजें गले को राहत पहुंचाने में मदद कर सकती हैं. खासतौर पर फल शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर जल्दी रिकवर करने में मदद पाता है. हालांकि खांसी में हर फल फायदेमंद नहीं होता, इसलिए ऐसे फलों का चुनाव जरूरी है जो गले को आराम दें और शरीर को हाइड्रेट रखें. सही फल खाने से कमजोरी कम होती है और गले की जलन में भी राहत मिल सकती है. आइए जानते हैं कौनसे फल आपको राहत दे सकते हैं. अनानासअनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो गले में जमा बलगम को पतला करने और सूजन कम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग खांसी और गले की खराश में अनानास को फायदेमंद मानते हैं. इसमें विटामिन C भी होता है, जो इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है. लेकिन बहुत ज्यादा खट्टा अनानास कुछ लोगों के गले में जलन भी कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए. अनार का जूसअनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. खांसी के दौरान जब शरीर थका हुआ महसूस करता है, तब अनार का जूस एनर्जी देने का काम कर सकता है. इसे बहुत ठंडा पीने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंडी चीजें कुछ लोगों की खांसी बढ़ा सकती हैं. केलाकेला पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाला फल माना जाता है. इसमें फास्ट-एक्टिंग कार्बोहाइड्रेट और सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर को जल्दी एनर्जी देने में मदद करता है. खांसी, सर्दी या कमजोरी के दौरान केला रिकवरी में मददगार माना जाता है. यही वजह है कि BRAT डाइट में भी केले को शामिल किया जाता है. हालांकि अगर केला खाने से बलगम बढ़ता महसूस हो, तो इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए. कीवी भी काफी फायदेमंद कीवी भले ही खांसी में थोड़ा अलग विकल्प लगे, लेकिन इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों में गिना जाता है. इसमें विटामिन C और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकते हैं. कुछ स्टडीज के मुताबिक, सर्दी-जुकाम के दौरान कीवी खाने से गले की परेशानी और रिकवरी में फायदा मिल सकता है. इसे भी सामान्य तापमान पर खाना बेहतर माना जाता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

‘परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाओ’: कांग्रेस विधायक ने कर्नाटक में नेतृत्व की नई चर्चा छेड़ी | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

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आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 19:35 IST राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर (फाइल फोटो) कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर ताजा राजनीतिक चर्चा सोमवार को तब तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने कहा कि अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने अवसर के लिए लंबे समय से इंतजार किया था और अगर कांग्रेस नेतृत्व ने बदलाव करने का फैसला किया तो वह राज्य का नेतृत्व करने का मौका पाने के हकदार थे। पत्रकारों से बात करते हुए, राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने आठ साल तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और अगर वह अपनी सीट जीतते तो 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन सकते थे। शीर्ष पद के लिए गृह मंत्री का समर्थन करते हुए राजन्ना ने कहा, “वह तब चुनाव हार गए थे और उनका बकाया अभी भी लंबित है।” ‘राहुल गांधी और हाईकमान करेंगे फैसला’ राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल अपनी निजी राय व्यक्त कर रहे हैं और कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी राय मांगी गई तो वह चाहेंगे कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहें। हालांकि, अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक नेतृत्व वार्ता संभवत: केरल में हुई होगी राजन्ना ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के नेतृत्व के बारे में चर्चा सोमवार को तिरुवनंतपुरम में हुई होगी, जहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नई केरल सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए एकत्र हुए थे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। राजन्ना ने कहा कि यह उनका “भविष्यवाणी” था कि बैठक के दौरान कर्नाटक की राजनीति पर चर्चा हुई होगी। ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग तेज़ यह टिप्पणी कर्नाटक में किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस के एक वर्ग के भीतर बढ़ती मांग के बीच आई है। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो परमेश्वर को अग्रणी नामों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा के दौरान उनका नाम कई बार सामने आया है, खासकर पार्टी में अहिंदा नेताओं के बीच। AHINDA अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का एक राजनीतिक और सामाजिक समूह है, जो सिद्धारमैया की राजनीति से निकटता से जुड़ा हुआ है। सत्ता साझेदारी पर बहस जारी है नवंबर 2025 में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा पड़ाव पार करने के बाद से नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें जारी हैं। शिवकुमार के समर्थकों ने बार-बार मांग की है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर कथित सत्ता साझेदारी व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। चल रही राजनीतिक चर्चा से राज्य में कैबिनेट फेरबदल की अफवाहें भी तेज हो गई हैं। इस बीच, कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने पहले कहा था कि कैबिनेट बदलाव के संबंध में कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री और कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान शासन और विकास कार्यों पर केंद्रित है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक राजनीति समाचार(टी)राजनीतिक हलचल(टी)कर्नाटक सीएम

गर्मियों में वरदान है ये देसी फल! आंखों की रोशनी से लेकर खून बढ़ाने तक में फायदेमंद, गांवों से शहरों तक लोग हैं दीवाने

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Last Updated:May 18, 2026, 19:06 IST उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्रों में पाया जाने वाला बड़हर का फल गर्मियों में खास तौर पर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाला यह देसी फल न सिर्फ स्वाद में खास होता है, बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने, पाचन सुधारने, शरीर को ठंडक देने और खून की कमी दूर करने में भी फायदेमंद माना जाता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में कई ऐसे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है बड़हर का फल, जो खासतौर पर गर्मियों के मौसम में मिलता है और अपने स्वाद के साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. बड़हर का फल केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के कारण भी वर्षों से उपयोग किया जाता रहा है. गांवों में आज भी लोग गर्मी के मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं, ताकि इस फल का सेवन कर सकें. माना जाता है कि यह शरीर को ताजगी देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में भी मदद करता है. बड़हर का फल मई से लेकर जुलाई महीने तक बाजारों में आसानी से मिल जाता है. वहीं ग्रामीण इलाकों में आज भी यह फल पेड़ों पर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण लोग इसे बिना पैसे खर्च किए भी आसानी से प्राप्त कर लेते हैं. जैसे-जैसे यह फल पकता है, इसका रंग हरे से बदलकर हल्का पीला, गुलाबी और फिर भूरा होने लगता है. बाजार में बड़हर के फल की कीमत करीब 5 से 10 रुपये तक होती है, लेकिन इसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन बड़े शौक से करते हैं. अगर आप भी आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या से परेशान हैं, तो गर्मियों में मिलने वाला बड़हर का फल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आज के डिजिटल दौर में लगातार मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल करने की वजह से युवाओं में आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यह फल आंखों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाले बड़हर के फल में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है. माना जाता है कि विटामिन-ए से भरपूर आहार रतौंधी जैसी समस्याओं को दूर रखने में भी सहायक हो सकता है. इस फल का सेवन लोग कई तरीकों से करते हैं और गर्मियों में इसे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, लेकिन बड़हर का फल पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह फल पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में मदद करता है और इसके सेवन से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है. गर्मी के दिनों में शरीर जल्दी थक जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. ऐसे में बड़हर के फल में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं और दिनभर ताजगी बनाए रखने में मदद करते हैं. त्वचा की झुर्रियों और स्किन एजिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए भी बड़हर का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर यह फल त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में सहायक माना जाता है. माना जाता है कि बड़हर त्वचा के घावों को भरने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए लोग बड़हर के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करते हैं और उसे प्रभावित जगह पर लगाते हैं. इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है. बड़हर के फल में आयरन समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मददगार माने जाते हैं. माना जाता है कि नियमित रूप से बड़हर का सेवन करने से खून की कमी यानी एनीमिया जैसी समस्या से बचाव में सहायता मिल सकती है. गर्मियों के मौसम में कई लोगों के शरीर में कमजोरी और खून की कमी की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में यह फल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि गर्मियों में बड़हर का फल आसानी से बाजारों और ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध हो जाता है. गर्मियों के मौसम में लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश करते हैं, जो शरीर को ठंडक और ताजगी प्रदान कर सकें. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक बड़ी संख्या में लोग बड़हर के फल का सेवन करना पसंद करते हैं. माना जाता है कि यह फल शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाने और दिनभर ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है. बड़हर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो लिवर को स्वस्थ रखने में मददगार माने जाते हैं. खास बात यह है कि इस फल का सेवन लोग कच्चा और पका, दोनों रूपों में कर सकते हैं. बड़हर का पेड़ सामान्य पेड़ों की तुलना में काफी बड़ा और घना माना जाता है. इसकी शाखाएं दूर तक फैली रहती हैं और इसकी छाया बेहद ठंडी मानी जाती है, यही वजह है कि गर्मियों में लोग इसके नीचे बैठना पसंद करते हैं. बड़हर का फल कई पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी और पोषण की कमी होना आम बात है, ऐसे में यह फल शरीर को ताजगी और जरूरी पोषण देने के लिए फायदेमंद माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक की सामने से आ रहे कंटेनर से टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है।

महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक और कंटेनर की टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…..