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सरकार बोली-चुनाव आयुक्त के चयन पैनल में जज जरूरी नहीं:SC से कहा- संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं, जज को शामिल करना संसद का फैसला

सरकार बोली-चुनाव आयुक्त के चयन पैनल में जज जरूरी नहीं:SC से कहा- संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं, जज को शामिल करना संसद का फैसला

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि चुनाव आयोग (EC) के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में जज का होना जरूरी नहीं है। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। केंद्र ने कहा कि किसी जज को चयन समिति में शामिल करना संसद का फैसला हो सकता है, लेकिन इसे संवैधानिक मजबूरी नहीं माना जा सकता। कोर्ट में ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस कानून के मुताबिक, CEC और EC की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री वाली समिति करेगी। पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था में इसमें भारत के CJI को भी शामिल किया था। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने CJI वाली समिति बनाई थी मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि जब तक संसद इस पर कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI वाली समिति की सिफारिश पर होगी। इसके बाद केंद्र सरकार नया कानून लेकर आई। यह कानून 2 जनवरी 2024 से लागू हुआ। इसके तहत अब चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। CJI को इस समिति से हटा दिया गया। सरकार की 4 मुख्य पॉइंट्स… 14 मई: SC ने कहा था- जब सरकार को ही फैसला लेना है, फिर कमेटी में नेता विपक्ष को रखने का दिखावा क्यों सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया था। कोर्ट ने कहा था- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में नेता विपक्ष (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। पूरी खबर पढ़ें… 6 मई: SC ने पूछा था- क्या हमारे पास कानून बनवाने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को मामले की सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। पूरी खबर पढ़ें… 12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता। प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया। पूरी खबर पढ़ें… ———-

सरकार बोली-चुनाव आयुक्त के चयन पैनल में जज जरूरी नहीं:SC से कहा- संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं, जज को शामिल करना संसद का फैसला होगा

सरकार बोली-चुनाव आयुक्त के चयन पैनल में जज जरूरी नहीं:SC से कहा- संविधान में ऐसा प्रावधान नहीं, जज को शामिल करना संसद का फैसला होगा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि चुनाव आयोग (EC) के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में जज का होना जरूरी नहीं है। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। केंद्र ने कहा कि किसी जज को चयन समिति में शामिल करना संसद का फैसला हो सकता है, लेकिन इसे संवैधानिक मजबूरी नहीं माना जा सकता। सरकार ने ये जवाब उस मामले में दिया है, जिसमें ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस कानून के मुताबिक, CEC और EC की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री वाली समिति करेगी। पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था में इसमें भारत के CJI को भी शामिल किया था। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने CJI वाली समिति बनाई थी मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि जब तक संसद इस पर कानून नहीं बनाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI वाली समिति की सिफारिश पर होगी। इसके बाद केंद्र सरकार नया कानून लेकर आई। यह कानून 2 जनवरी 2024 से लागू हुआ। इसके तहत अब चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। CJI को इस समिति से हटा दिया गया। इस बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार का प्रभाव बढ़ेगा और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। सरकार की 4 मुख्य पॉइंट्स… 14 मई: SC ने कहा था- जब सरकार को ही फैसला लेना है, फिर कमेटी में नेता विपक्ष को रखने का दिखावा क्यों सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया था। कोर्ट ने कहा था- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में नेता विपक्ष (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा था कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है। 6 मई: SC ने पूछा था- क्या हमारे पास कानून बनवाने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को मामले की सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। पूरी खबर पढ़ें… 12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता। प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया। पूरी खबर पढ़ें…

गुजरात- किरायदार ने मकान मालिक से पत्नी-बेटी का रेप कराया:₹2000 किराया नहीं दे पाया तो समझौता किया, 2 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात- किरायदार ने मकान मालिक से पत्नी-बेटी का रेप कराया:₹2000 किराया नहीं दे पाया तो समझौता किया, 2 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात के मोरबी में किरायदार ने किरया नहीं चुका पाने पर मकान मालिक को अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ रेप की इजाजत दे दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर शनिवार को किरायदार और मकान मालिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, परिवार करीब छह महीने पहले काम की तलाश में मोरबी आया था। उन्होंने 2 हजार रुपए महीने पर किराए का घर लिया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार नियमित रूप से किराया नहीं दे पा रहा था। आरोप है कि मकान मालिक ने बकाया किराया माफ करने के बदले महिला से यौन संबंध बनाने की मांग की। पति इसके लिए तैयार हो गया। इसके बाद मकान मालिक ने महिला के साथ कई बार रेप किया। नाबालिग बेटी को भी प्रताड़ित किया किरायदार की पत्नी के बाद मकान मालिक ने उसकी नाबालिग बेटी को भी निशाना बनाया। किरायदार ने इसके लिए भी सहमति दे दी। आरोप है कि बच्ची को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर मकान मालिक और एक अन्य आरोपी ने उसका यौन शोषण किया। यह सिलसिला पिछले छह महीने से चल रहा था। घटना की जानकारी जब महिला के पिता (बच्ची के नाना) को हुई, तो उन्होंने मोरबी ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। 2 आरोपी गिरफ्तार, तीसरे की तलाश मोरबी के डीएसपी जेएम आल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन के पीआई वाईबी जडेजा और उनकी टीम ने दो मुख्य आरोपियों (पति और मकान मालिक) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। तीसरे आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई है। ——– ये खबर भी पढ़ें… केंद्रीय मंत्री बंदी संजय बोले-बेटे को पुलिस के हवाले किया:पुलिस बोली- सरेंडर नहीं, हमने पकड़ा; POCSO मामले में लुकआउट नोटिस जारी हुआ था केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने पॉक्सो केस में आरोपी बेटे बंदी भगीरथ को पुलिस को सौंप दिया है। बंदी संजय कुमार ने शनिवार को कहा कि कानून के सामने सभी बराबर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

गुजरात- किरायदार ने मकान मालिक से पत्नी-बेटी का रेप कराया:₹2000 किराया नहीं दे पाया तो समझौता किया, 2 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात- किरायदार ने मकान मालिक से पत्नी-बेटी का रेप कराया:₹2000 किराया नहीं दे पाया तो समझौता किया, 2 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात के मोरबी में किरायदार ने किरया नहीं चुका पाने पर मकान मालिक को अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ रेप की इजाजत दे दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर शनिवार को किरायदार और मकान मालिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, परिवार करीब छह महीने पहले काम की तलाश में मोरबी आया था। उन्होंने 2 हजार रुपए महीने पर किराए का घर लिया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार नियमित रूप से किराया नहीं दे पा रहा था। आरोप है कि मकान मालिक ने बकाया किराया माफ करने के बदले महिला से यौन संबंध बनाने की मांग की। पति इसके लिए तैयार हो गया। इसके बाद मकान मालिक ने महिला के साथ कई बार रेप किया। नाबालिग बेटी को भी प्रताड़ित किया किरायदार की पत्नी के बाद मकान मालिक ने उसकी नाबालिग बेटी को भी निशाना बनाया। किरायदार ने इसके लिए भी सहमति दे दी। आरोप है कि बच्ची को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर मकान मालिक और एक अन्य आरोपी ने उसका यौन शोषण किया। यह सिलसिला पिछले छह महीने से चल रहा था। घटना की जानकारी जब महिला के पिता (बच्ची के नाना) को हुई, तो उन्होंने मोरबी ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। 2 आरोपी गिरफ्तार, तीसरे की तलाश मोरबी के डीएसपी जेएम आल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन के पीआई वाईबी जडेजा और उनकी टीम ने दो मुख्य आरोपियों (पति और मकान मालिक) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। तीसरे आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई है। ——– ये खबर भी पढ़ें… केंद्रीय मंत्री बंदी संजय बोले-बेटे को पुलिस के हवाले किया:पुलिस बोली- सरेंडर नहीं, हमने पकड़ा; POCSO मामले में लुकआउट नोटिस जारी हुआ था केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने पॉक्सो केस में आरोपी बेटे बंदी भगीरथ को पुलिस को सौंप दिया है। बंदी संजय कुमार ने शनिवार को कहा कि कानून के सामने सभी बराबर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

ऑक्सीजन भी बन सकती है जानलेवा! मालदीव में स्कूबा डाइविंग करते वक्त 5 लोगों की मौत, 160 फीट नीचे क्या हुआ?

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Last Updated:May 16, 2026, 23:45 IST Oxygen Toxicity: स्कूबा डाइविंग एक एडवेंचर एक्टिविटी है. लेकिन यदि इसे सावधानी और सतर्कता के साथ न किया जाए तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. हाल ही में मालदीव में 5 लोगों की मौत का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि इसका कारण ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी हो सकता है. ये क्या होता है, चलिए इस लेख में समझते हैं. ख़बरें फटाफट मालदीव में हाल ही में हुई स्कूबा डाइविंग दुर्घटना ने समुद्र की गहराई में छिपी एक जानलेवा खतरे को उजागर किया है. दरअसल, इस हादसे में 5 इटालियन टूरिस्ट की मौत हुई है जो अंडरवाटर केव को एक्सप्लोर करने के लिए गहरे पानी में उतरे थें. बताया जा रहा है कि हादसा मालदीव के वावू एटोल इलाके के पास हुआ, जहां गोताखोर लगभग 160 फीट गहराई तक उतर गए थे. मृतकों में प्रसिद्ध समुद्री जीव वैज्ञानिक मोनिका मोंटेफाल्कोन और उनकी 20 साल की बेटी भी शामिल थीं. इनके अलावा रिसर्च फेलो म्यूरियल ओडेनिनो, मरीन बायोलॉजी ग्रेजुएट फेडेरिको गुआल्तियेरी और डाइविंग इंस्ट्रक्टर जियानलुका बेनेडेट्टी की भी जान चली गई. रिपोर्ट के अनुसार, 14 मई को ये ग्रुप अलीमाथा द्वीप के पास समुद्र के अंदर बनी गुफाओं की खोज कर रहा था, लेकिन डाइविंग के बाद वे वापस सतह पर नहीं लौट सके. ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी मौत की वजह?विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की एक बड़ी वजह “ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” हो सकती है. ऑक्सीजन हमारे जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन ज्यादा दबाव वाली परिस्थितियों में यही ऑक्सीजन शरीर के लिए खतरनाक बन सकती है. समुद्र में गहराई बढ़ने के साथ दबाव भी बढ़ता जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का असर सामान्य से ज्यादा हो जाता है. ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन भी जानलेवाएक्सपर्ट के मुताबिक, ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन शरीर में जहरीले तत्व पैदा कर सकती है, जो दिमाग और शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं. गहरे समुद्र में डाइविंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा “सेंट्रल नर्वस सिस्टम ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी” का होता है. इसके लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं. ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के लक्षणऑक्सीजन टॉक्सिसिटी के दौरान चक्कर आना, उलझन महसूस होना, आंखों के सामने धुंधलापन, मांसपेशियों में झटके, मतली और अचानक दौरे पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर पानी के अंदर किसी डाइवर को दौरा पड़ जाए, तो उसके डूबने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. समुद्र की गहराई में छिपा खतराआमतौर पर स्कूबा डाइविंग में लोग सामान्य हवा जैसी गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ज्यादा गहराई पर यही गैस खतरनाक हो सकती है. अनुभवी डाइवर कई बार विशेष गैस मिश्रण का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर उसकी मात्रा सही न हो तो ऑक्सीजन जहरीली साबित हो सकती है. गुफाओं में डाइविंग करना और भी ज्यादा जोखिम भरा होता है. वहां रोशनी कम होती है, पानी का बहाव तेज हो सकता है और घबराहट बढ़ने से सांस तेज चलने लगती है. इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रभाव और बढ़ सकता है. खराब मौसम, तेज हवाएं, तनाव और थकान भी इस खतरे को बढ़ाने वाले कारण माने जाते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

What is the right way to eat watermelon: तरबूज खाने का सही तरीका

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Last Updated:May 16, 2026, 23:16 IST Watermelon Eating Tips: तरबूज खाने से कई लोगों की गंभीर रूप से तबीयत बिगड़ने और मौत की खबर लगातार आ रही है. ऐसे में ये लेख आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. यहां आप तरबूज खाने का सही तरीका जान सकते हैं, जो सेहत को बनाएं रखने के लिए बहुत जरूरी हैं. ख़बरें फटाफट गर्मी के मौसम में लोग सबसे ज्यादा तरबूज और खरबूजा खाना पसंद करते हैं. ये दोनों फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पानी की कमी भी पूरी करते हैं. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच ये फल शरीर को तरोताजा रखने में मदद करते हैं. हालांकि, इन फलों को सही तरीके से खाना बहुत जरूरी होता है. अगर इन्हें गलत चीजों के साथ खाया जाए, तो फायदा मिलने की जगह पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को एक साथ खाने से मना किया गया है. इसे ‘विरुद्ध आहार’ कहा जाता है. इसका मतलब है ऐसी चीजें जिन्हें साथ खाने से पाचन खराब हो सकता है. तरबूज और खरबूजा भी ऐसे फल हैं जिन्हें सोच-समझकर खाना चाहिए. खासतौर पर इनके साथ दूध, दही या दूसरी डेयरी चीजें नहीं खानी चाहिए. ऐसा करने से खाना ठीक से पच नहीं पाता और गैस, पेट दर्द या भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. तरबूज खाने का सही तरीका बहुत से लोग गर्मियों में ठंडे फल खाने के साथ तला-भुना खाना भी पसंद करते हैं, लेकिन यह आदत नुकसान पहुंचा सकती है. तरबूज और खरबूजे जैसे पानी से भरपूर फलों के साथ ज्यादा ऑयली या मसालेदार खाना खाने से पेट पर असर पड़ सकता है. इससे अपच, एसिडिटी और पेट में जलन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. गर्मी में शरीर पहले ही गर्म रहता है, इसलिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना ज्यादा अच्छा माना जाता है. इन फलों को भारी भोजन या ज्यादा अनाज के साथ भी नहीं खाना चाहिए. अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद तरबूज या खरबूजा खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इससे शरीर में आलस, भारीपन और बेचैनी महसूस हो सकती है. इसलिए इन्हें अकेले खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. बहुत ठंडे पेय पदार्थों के साथ भी तरबूज और खरबूजा खाना सही नहीं माना जाता. कुछ लोग इन फलों के साथ आइस्ड ड्रिंक या बर्फ वाला पानी पी लेते हैं, जिससे पेट की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे दस्त, पेट दर्द या पाचन संबंधी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. आयुर्वेद के अनुसार, पानी वाले फलों को अकेले या फिर उसी तरह के दूसरे फलों के साथ खाना बेहतर होता है. इससे शरीर को पोषण सही तरीके से मिलता है और पाचन भी अच्छा रहता है. ये हैं हेल्दी विकल्पअगर किसी कारण से आप तरबूज या खरबूजा नहीं खा सकते, तो गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दूसरे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं. नारियल पानी, बेल का शरबत, नींबू पानी और छाछ जैसी चीजें शरीर को ठंडक देने और पानी की कमी दूर करने में मदद करती हैं. इसके साथ ही सही खानपान, पर्याप्त पानी और आराम भी गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

डीके बनाम एचडीके: बिदादी की लड़ाई कैसे शिवकुमार के खिलाफ गौड़ा परिवार के युद्ध में बदल गई | भारत समाचार

GT skipper Shubman Gill.

आखरी अपडेट:16 मई, 2026, 22:00 IST राजनीतिक तापमान तब बढ़ गया जब एचडी देवेगौड़ा मैदान में उतरे, अपने बेटे का पुरजोर समर्थन किया और शिवकुमार और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। कर्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार (बाएं) और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी। फ़ाइल छवि बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बीच राजनीतिक खींचतान के रूप में जो शुरू हुआ वह अब पूर्ण पैमाने पर गौड़ा परिवार के आक्रामक रूप में बदल गया है, पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवेगौड़ा खुद युद्ध के मैदान में उतर रहे हैं। टकराव के केंद्र में शिवकुमार का आरोप है कि कुमारस्वामी, जिन्होंने 2006-07 में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पहली बार बिदादी टाउनशिप परियोजना शुरू की थी, अब राजनीतिक सुविधा के लिए उसी परियोजना का विरोध कर रहे हैं। शिवकुमार ने यह सुझाव देकर अपने हमले को तेज कर दिया है कि परियोजना और इसके आसपास की भूमि राजनीति कुमारस्वामी के रुख में विरोधाभासों को उजागर करती है, यहां तक ​​​​कि वह भूमि, व्यापार और राजनीतिक हितों पर बड़े सवालों का संकेत भी देते हैं। शिवकुमार ने कहा है कि कांग्रेस सरकार केवल उस परियोजना को जारी रख रही है जिसकी परिकल्पना मूल रूप से कुमारस्वामी के नेतृत्व में की गई थी। शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर पलटवार करते हुए कहा, “हम केवल आपके द्वारा शुरू की गई बिदादी टाउनशिप परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री “हमारी आलोचना किए बिना राजनीतिक रूप से जीवित नहीं रह सकते”। कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने कुमारस्वामी के भूमि अधिग्रहण के विरोध को भी चुनौती देते हुए पूछा है कि जब उनके पास मौका था तो उन्होंने खुद जमीन को पूरी तरह से डीनोटिफाई क्यों नहीं किया। शिवकुमार ने कहा, “किसान मुझ पर पत्थर फेंक सकते हैं; वे मेरे खिलाफ नारे लगा सकते हैं। क्या मुझे डरना चाहिए? जो मायने रखता है वह उनका भविष्य, उनके बच्चों का भविष्य और उनकी जमीन का भविष्य है। अब से बीस साल बाद, बिदादी और दक्षिण बेंगलुरु मुझे याद रखेंगे।” हालांकि, कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया सरकार पर रियल एस्टेट ब्रोकर बनने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया, “किसानों की जमीन छीनने वाले वे कौन होते हैं? सरकार दलाल की तरह काम कर रही है, प्रति वर्ग फुट पर रियल एस्टेट कारोबार कर रही है। सिद्धारमैया दलाल के रूप में उभरे हैं,” उन्होंने राज्य से परियोजना को रद्द करने का आग्रह किया। लेकिन राजनीतिक तापमान तब तेजी से बढ़ गया जब देवेगौड़ा अपने बेटे का पुरजोर समर्थन करते हुए मैदान में उतरे और शिवकुमार और कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। शिवकुमार की टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए देवेगौड़ा ने कहा, “वे कहते हैं कि मैं बैठकों में रोता हूं। आज मैं इस व्यवस्था पर हंस रहा हूं।” देवेगौड़ा ने सिद्धारमैया को अपना राजनीतिक मित्र बताते हुए साथ ही उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी लड़ाई अब शुरू होती है. “मेरा संघर्ष आज से शुरू हो रहा है। गरीबों की जमीन कैसे अधिग्रहीत की गई? कोर्ट के आदेश के बाद क्या हुआ? मैं पूरी जानकारी के साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा।” उन्होंने सरकार पर बिदादी के किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी या विधायक उनसे मिलने क्यों नहीं गया। “सिद्धारमैया को मेरे साथ बिदादी आने दीजिए। किसी भी तहसीलदार, डीसी या विधायक ने उन किसानों के प्रति शिष्टाचार नहीं दिखाया है।” प्रत्यक्ष राजनीतिक चेतावनी में, देवेगौड़ा ने अपने लंबे विरोध इतिहास – देवराज उर्स से लेकर एसएम कृष्णा से लेकर बीएस येदियुरप्पा तक का जिक्र किया – जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह एक अंतिम आंदोलन के लिए तैयार हैं। “मैंने जीवन भर गरीबों के लिए संघर्ष किया है। अगर मुझे जीवन के अंत में भी लड़ना पड़े तो मैं तैयार हूं।” उन्होंने कांग्रेस की आंतरिक सत्ता राजनीति पर भी कटाक्ष किया. सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार के उत्तराधिकार की चर्चा पर स्पष्ट रूप से चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, “वे जन्मदिन पर सत्ता हस्तांतरण का जश्न मना रहे हैं।” देवेगौड़ा ने आगे दावा किया कि उन्होंने सिद्धारमैया को पत्र लिखकर लगभग 20,000 एकड़ भूमि के स्वामित्व की जांच की मांग की थी और आरोप लगाया था कि राजनीतिक दबाव में बेंगलुरु को संकट में धकेला जा रहा है। हालाँकि, सबसे तीखी टिप्पणी शिवकुमार के इस दावे के लिए आरक्षित थी कि वह नाराज किसानों का सामना करने के लिए तैयार थे। देवेगौड़ा ने पलटवार करते हुए कहा, “क्या वह वहां जाएंगे और किसानों द्वारा पीटे जाएंगे? पहले उन्हें जाने दीजिए। मैं डीके शिवकुमार के वहां जाने और किसानों द्वारा पीटे जाने के बाद बोलूंगा।” सैटेलाइट टाउनशिप के माध्यम से बेंगलुरु में भीड़भाड़ कम करने के लिए कुमारस्वामी के नेतृत्व में पहली बार प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप अब एक शहरी नियोजन परियोजना से एक भयंकर राजनीतिक हथियार में बदल गई है – पुराने फैसलों, वर्तमान विरोधाभासों और शिवकुमार, कुमारस्वामी और देवेगौड़ा के बीच एक नए त्रिकोणीय युद्ध को उजागर करना। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया डीके बनाम एचडीके: बिदादी की लड़ाई कैसे शिवकुमार के खिलाफ गौड़ा परिवार के युद्ध में बदल गई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

हार्ट से लेकर ब्रेन तक… आगरा के इन हॉस्पिटल्स में मिलती हैं आधुनिक सुविधाएं, लोगों को है सबसे ज्यादा भरोसा

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Last Updated:May 16, 2026, 21:48 IST आगरा में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार आधुनिक होती जा रही हैं. शहर में कई ऐसे अस्पताल मौजूद हैं, जो बेहतर इलाज, आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की वजह से लोगों के बीच खास पहचान बना चुके हैं. हार्ट, ब्रेन, आईवीएफ और इमरजेंसी सेवाओं से लेकर सामान्य उपचार तक, ये अस्पताल मरीजों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं. आगरा के आवास विकास क्षेत्र में स्थित जे. जे. हॉस्पिटल काफी पुराना और प्रसिद्ध अस्पताल माना जाता है. आसपास के कई लोग यहां अपना इलाज कराने पहुंचते हैं. यह अस्पताल कम बजट में बेहतर उपचार देने के लिए जाना जाता है. छोटे-मोटे इलाज और सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. स्थानीय लोगों की नजर में यह अस्पताल किफायती होने के साथ-साथ बेहतर इलाज के लिए भी जाना जाता है. आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित रेनबो हॉस्पिटल एक पुराना और विश्वसनीय अस्पताल माना जाता है. यहां विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं. यह अस्पताल विशेष रूप से आधुनिक आईवीएफ तकनीक के लिए जाना जाता है. लंबे समय से संतान सुख से वंचित दंपतियों के इलाज के लिए यहां आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उपचार किया जाता है. इसके अलावा नई प्रजनन तकनीकों की मदद से भी मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. आगरा के आईएसबीटी के सामने स्थित असोपा हॉस्पिटल एक काफी पुराना और प्रसिद्ध अस्पताल माना जाता है. इस अस्पताल की स्थापना प्रो. एच. एस. असोपा ने की थी. तब से यह लगातार मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता आ रहा है. यहां कम खर्च में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है. हालांकि, आगरा में नए अस्पताल खुलने के बाद इसकी लोकप्रियता पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, लेकिन आज भी कई लोग इस अस्पताल पर भरोसा करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आगरा के दिल्ली गेट के पास स्थित पुष्पांजलि हॉस्पिटल अपने बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है. यहां क्रिटिकल मरीजों को तुरंत भर्ती कर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. एमरजेंसी मामलों को संभालने में भी इस अस्पताल के चिकित्सकों को अनुभवी माना जाता है. खासतौर पर हृदय और ब्रेन से जुड़ी चिकित्सा सेवाओं के लिए यह अस्पताल काफी प्रसिद्ध है. आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में स्थित शांति वेद हॉस्पिटल एक नया और आधुनिक अस्पताल माना जाता है. बताया जाता है कि यहां अत्याधुनिक तकनीक से लैस कई आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से विभिन्न प्रकार के इलाज किए जाते हैं. यहां जटिल मामलों को भी संभालने की सुविधा मौजूद है. साथ ही, कई विशेषज्ञ चिकित्सक दूर-दूर से यहां मरीजों को देखने के लिए विजिट पर आते हैं. आगरा में प्रभा हॉस्पिटल की दो शाखाएं हैं. इसकी एक शाखा सिकंदरा और दूसरी ट्रांस यमुना क्षेत्र में स्थित है. यह अस्पताल आधुनिक इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जाना जाता है. यहां मरीजों को विभिन्न प्रकार की चिकित्सकीय सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए यह अस्पताल एक अच्छा विकल्प माना जाता है, जहां अपेक्षाकृत कम खर्च में डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. आगरा के दीवानी चौराहे के सामने स्थित लॉट्स हॉस्पिटल कई वर्षों से संचालित हो रहा है. यहां विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है. यह अस्पताल विशेष रूप से हृदय रोगियों के इलाज के लिए जाना जाता है. यहां हार्ट से जुड़ी समस्याओं के लिए अलग-अलग प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही, मरीजों के उपचार के लिए आधुनिक मशीनों का भी उपयोग किया जाता है. आगरा के सिविल लाइन इलाके में स्थित राम रघु हॉस्पिटल अपनी आधुनिक तकनीक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है. यहां दिमाग से संबंधित कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है. इस अस्पताल में अनुभवी और विशेषज्ञ चिकित्सक मरीजों का उपचार करते हैं. नई तकनीकों और आधुनिक सुविधाओं के कारण यह अस्पताल लोगों के बीच खास पहचान बना चुका है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

चांदी के इम्पोर्ट पर सरकार ने लगाई कड़ी पाबंदी:अब बिना मंजूरी नहीं ला सकेंगे सिल्वर बार; रुपया मजबूत बनाने के लिए फैसला

चांदी के इम्पोर्ट पर सरकार ने लगाई कड़ी पाबंदी:अब बिना मंजूरी नहीं ला सकेंगे सिल्वर बार; रुपया मजबूत बनाने के लिए फैसला

केंद्र सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, चांदी की कई कैटेगरीज को ‘फ्री’ लिस्ट से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ यानी प्रतिबंधित कैटेगिरी में डाल दिया गया है। सरकार ने यह फैसला कीमती धातुओं के बढ़ते आयात को रोकने और देश के बढ़ते इम्पोर्ट बिल को कंट्रोल करने के लिए लिया है। नए नियमों के बाद, अब कोई भी कंपनी चांदी की सिल्लियां (सिल्वर बार), अनरॉट सिल्वर (बिना गढ़ी चांदी) या चांदी का पाउडर अपनी मर्जी से सीधे भारत नहीं ला सकेगी। इसके लिए अब पहले सरकार से बकायदा मंजूरी (लाइसेंस) लेना होगा। इसके साथ ही, चांदी मंगाने की कुछ कैटेगरीज को रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के दायरे में भी लाया गया है।

‘धमाल 4’ की रिलीज डेट फिर टली:अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को क्लीन विंडो, अजय देवगन ने निभाई दोस्ती

‘धमाल 4’ की रिलीज डेट फिर टली:अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को क्लीन विंडो, अजय देवगन ने निभाई दोस्ती

अजय देवगन और अक्षय कुमार की दोस्ती फिर चर्चा में है। खबर है कि अजय ने ‘धमाल 4’ की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी है, ताकि ‘वेलकम टू द जंगल’ को बॉक्स ऑफिस पर क्लीन विंडो मिल सके। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले ‘धमाल 4’ 4 जुलाई 2026 को रिलीज होने वाली थी। अब फिल्म 17 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में आएगी। वहीं ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून 2026 को रिलीज होगी। दोनों बड़ी मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्में हैं। मेकर्स नहीं चाहते थे कि दोनों फिल्मों के बिजनेस पर असर पड़े। सूत्रों के अनुसार, अजय देवगन और अक्षय कुमार ने बातचीत के बाद यह फैसला लिया। दोनों लंबे समय से दोस्त हैं और बॉक्स ऑफिस क्लैश का असर समझते हैं। इंडस्ट्री में इस फैसले को पॉजिटिव कदम माना जा रहा है। ‘धमाल 4’ की रिलीज डेट इससे पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। शुरुआत में फिल्म को ईद 2026 वीकेंड पर रिलीज करने की तैयारी थी। उस समय इसकी टक्कर यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ और ‘धुरंधर 2’ से होने की चर्चा थी। क्लैश से बचने के लिए मेकर्स ने फिल्म को ईद स्लॉट से हटाकर 12 जून 2026 कर दिया था। इसके बाद ट्रेड रिपोर्ट्स में सामने आया कि मेकर्स जून स्लॉट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। बड़ी फिल्मों की भीड़ और बॉक्स ऑफिस विंडो को देखते हुए फिल्म की रिलीज 12 जून से बढ़ाकर 4 जुलाई 2026 कर दी गई थी। अब चौथी बार फिल्म की रिलीज डेट बदली गई है। इस बार वजह ‘वेलकम टू द जंगल’ बनी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार दो बड़ी कॉमेडी फिल्मों की रिलीज से दोनों के कलेक्शन पर असर पड़ सकता था। इसी वजह से ‘धमाल 4’ को 17 जुलाई 2026 तक आगे बढ़ाया गया। वहीं, यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ की रिलीज डेट भी आगे बढ़ाई गई है। पहले यह फिल्म ईद 2026 के आसपास रिलीज होने वाली थी। बाद में इसकी नई रिलीज डेट 4 जून 2026 तय की गई। इससे कई बड़ी फिल्मों का संभावित क्लैश टल गया। अजय देवगन और अक्षय कुमार जल्द ही ‘गोलमाल 5’ में साथ नजर आएंगे। दोनों स्टार्स की बॉन्डिंग इंडस्ट्री में चर्चा में है। इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी ‘धमाल 4’ में अजय देवगन के अलावा रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी और संजय मिश्रा नजर आएंगे। वहीं ‘वेलकम टू द जंगल’ में अक्षय कुमार के साथ बड़ी स्टारकास्ट दिखाई देगी।