Skin Tips: गर्मी के कारण बार-बार करते हैं फेश वॉश, एक्सपर्ट ने बताया स्किन के लिए क्यों खतरनाक ये छोटी-सी गलती

Last Updated:May 14, 2026, 16:41 IST Frequent Face Wash: बार-बार फेश वॉश करना आपकी स्किन को बेहतर नहीं बेकार कर सकता है. यहां आप स्किन एक्सपर्ट से दिन में 2 बार से अधिक फेश वॉश करने के नुकसान के बारे में जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट How Often Should I Use a Face Wash: गर्मियों में पसीना, चिपचिपाहट और चेहरे पर बार-बार तेल आने की वजह से कई लोग दिन में कई बार फेस वॉश करने लगते हैं. हालांकि चेहरा साफ रखना जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फेस वॉश करना आपकी त्वचा को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है. PSRI अस्पताल दिल्ली में डर्मेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. भावुक धीर बताते हैं कि बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल कम होने लगता है, जिससे स्किन का पीएच लेवल बिगड़ सकता है. ऐसे में यदि आप रोजाना दो बार से अधिक बार फेश वॉश कर रहे हैं, तो आपको कई तरह की स्किन संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ज्यादा फेश वॉश करने के नुकसानएक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादा फेस वॉश के स्किन ड्राई होने लगती है. चेहरा रूखा, खिंचा हुआ और संवेदनशील महसूस हो सकता है. वहीं, कई बार त्वचा अपनी खोई हुई नमी की भरपाई के लिए और ज्यादा तेल बनाना शुरू कर देती है, जिससे चेहरा पहले से ज्यादा ऑयली दिख सकता है और मुंहासों की समस्या भी बढ़ सकती है. गर्मियों में बहुत अधिक फेस वॉश करने से स्किन बैरियर कमजोर पड़ सकता है. इसका मतलब है कि त्वचा बाहरी धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया से खुद को ठीक तरह से बचा नहीं पाती. इससे जलन, लालपन, खुजली या छोटे-छोटे दाने निकलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं, खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा होती है. कितनी बार फेस वॉश करना चाहिए? एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि दिन में दो बार फेस वॉश करना काफी होता है. एक बार सुबह और एक बार रात में सोने से कुछ घंटे पहले. अगर बहुत ज्यादा पसीना आता है या बाहर धूल-मिट्टी में रहना पड़ता है, तो चेहरे को साधारण पानी से धोना बेहतर विकल्प हो सकता है. हर बार फेस वॉश का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं होता. इस बात का भी रखें ध्यानअपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार हल्का माइल्ड फेस वॉश चुनना भी जरूरी है. बहुत ज्यादा तेज या केमिकल वाले उत्पाद त्वचा को और ज्यादा ड्राई और सेंंसिटिव बना सकते हैं. गर्मियों में स्किन की देखभाल का मतलब केवल बार-बार सफाई करना नहीं, बल्कि सही संतुलन बनाए रखना भी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi
खट्टी कढ़ी रेसिपी: घर में ऐसे पक्के बच्चों वाली कढ़ी, भूल जाएंगे होटल का स्वाद; नोट करें सबसे आसान तरीका

पकौड़ों के लिए: 1 कप बेसन, 1 इलेक्ट्रोनिक कटा प्याज, 1 हरी मिर्च, थोड़ा हरा धनिया, नमक का स्वाद, तेल तलने के लिए छवि: फ्रीपिक कढ़ी के लिए: 1 कप कटा दही, 3 कप सोडा, 3 कप पानी, 1/2 छोटा सोडा, नमक बड़ा स्वाद छवि: सोशल मीडिया धन्यवाद के लिए: 1 छोटा चम्मच जीरा, 1/2 छोटा चम्मच मेथी दाना, 2 सूखी लाल मिर्च, कैरी पत्ते, एक चुटकी हींग, 1 बड़ा चम्मच तेल या घी छवि: एआई पकौड़े बनाने की विधि: बेसन लेन में सबसे पहले एक बाउल। इसमें प्याज, हरी मिर्च, हरा धनियां और नमक डालें। थोड़ा-थोड़ा पानी, अल्ट्रा-इलेक्ट्रॉनिक बैटर तैयार करें। छवि: एआई अब हो जाएं मसाले में तेल गर्म करें और छोटी-छोटी पकौड़े की संरचना तक तल लें। पकौड़ों को श्रमिक अलग रख दें। छवि: एआई कढ़ी बनाने की आसान विधि: एक बड़े तालाब में दही और बेसन के महानुभाव से फेंट लें ताकि पेट न रहें। अब इसमें पानी, हल्दी और नमक मिलाप लें। इसके बाद गैस पर पेस्ट्री के बर्तन और उसमें मौजूद घी गर्म करें। छवि: फ्रीपिक फिर जीरा, मेथी दाना, हींग, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते का तड़का स्टूडियो। अब तैयार है दही-बेसन वाला इसमें मिक्स दाल के टुकड़े और लगातार मसाले बने रहें ताकि कढ़ी फटे नहीं. मध्यम गति पर 20 से 25 मिनट तक का समय। छवि: फ्रीपिक जब अच्छी तरह पक जाए और हल्की गाढ़ी हो जाए, तब पकौड़े डाल कर तैयार कर लीजिए. 5 मिनट और पकाकर गैस बंद कर दें। गरमा-गरम खट्टी कढ़ी को जीरा राइस, गेहूँ चावल या रोटी के साथ सर्व करें। छवि: एआई ऊपर से छोटी हरी धनिया दाल दे, इससे स्वाद और भी बढ़ेगा। ज्यादा कट्टापन चाहिए तो दही को थोड़ा पुराना इस्तेमाल करें। छवि: सोशल मीडिया पकौड़ों को सामान्य बनाए रखने के लिए तलने के बाद स्वादिष्ट गुनगुने पानी में 2 मिनट डाल सकते हैं। लाजवाब में लहसुनिया से बनी कढ़ी का स्वाद और भी लाजवाब है। छवि: फ्रीपिक
बुमराह पंजाब के खिलाफ मुंबई की कप्तानी कर सकते हैं:हार्दिक-सूर्या धर्मशाला नहीं पहुंचे, प्लेऑफ की रेस से बाहर है मुंबई

पंजाब किंग्स के खिलाफ आज रात मुंबई इंडियंस नए कप्ताम के साथ उतर सकती है। टीम के नियमित कप्तान हार्दिक पंड्या और स्टैंड-इन कप्तान सूर्यकुमार यादव इस मैच में नहीं खेलेंगे। दोनों खिलाड़ी मुकाबले के लिए धर्मशाला नहीं पहुंचे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हार्दिक और सूर्या की गैरमौजूदगी में कप्तानी के लिए जसप्रीत बुमराह और तिलक वर्मा के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि, 33 साल के बुमराह को कप्तानी मिलने की संभावना ज्यादा है। वहीं, अगले सीजन के लिए हार्दिक के ट्रेड होने की चर्चाओं को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। फ्रेंचाइजी से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों को महज अफवाह बताया है। बुमराह 13 साल से मुंबई के साथ हैं बुमराह 2013 से यानी पिछले 13 सालों से फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं और उन्हें टीम की गहरी समझ है। वे पहले भारतीय टीम की कमान भी संभाल चुके हैं। वहीं, पांच बार के विजेता कप्तान रोहित शर्मा टीम का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन उनके दोबारा कप्तानी संभालने की उम्मीद कम ही है। सूर्या परिवार के साथ समय बिताएंगे सूर्यकुमार यादव हाल ही में पिता बने हैं और फ्रेंचाइजी ने उन्हें परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दी है। वहीं, हार्दिक पंड्या बैक स्पैम (कमर में खिंचाव) की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हें 2 मई को चेन्नई के खिलाफ मैच के दौरान यह दिक्कत हुई थी। हालांकि वे रिलायंस कॉरपोरेट पार्क में प्रैक्टिस करते दिखे थे, लेकिन मेडिकल टीम ने उन्हें अभी पूरी तरह फिट घोषित नहीं किया है। हार्दिक के ट्रेड होने की खबरें महज अफवाह सोशल मीडिया पर हार्दिक पंड्या को किसी दूसरी फ्रेंचाइजी के साथ ट्रेड करने की चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन क्रिकबज को टीम के सूत्रों ने बताया, इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। फ्रेंचाइजी इस समय ऐसी किसी संभावना पर विचार नहीं कर रही है और हार्दिक भविष्य में भी टीम के साथ बने रहेंगे। मुंबई प्लेऑफ की रेस से बाहर पॉइंट्स टेबल में पंजाब किंग्स फिलहाल 13 अंकों के साथ चौथे स्थान पर है। मुंबई इंडियंस 9वें स्थान पर है और टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। आज की जीत पंजाब को 15 अंकों पर ले जाएगी, जिससे प्लेऑफ में उसकी स्थिति मजबूत होगी। ऐसे में चेन्नई और राजस्थान जैसी टीमों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि मुंबई क्वालिफाई नहीं कर सकती, लेकिन आज रात उलटफेर करने की कोशिश करेगी।
बुमराह पंजाब के खिलाफ मुंबई की कप्तानी कर सकते हैं:हार्दिक-सूर्या धर्मशाला नहीं पहुंचे, प्लेऑफ की रेस से बाहर है मुंबई

पंजाब किंग्स के खिलाफ आज रात मुंबई इंडियंस नए कप्तान के साथ उतर सकती है। टीम के नियमित कप्तान हार्दिक पंड्या और स्टैंड-इन कप्तान सूर्यकुमार यादव इस मैच में नहीं खेलेंगे। दोनों खिलाड़ी मुकाबले के लिए धर्मशाला नहीं पहुंचे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हार्दिक और सूर्या की गैरमौजूदगी में कप्तानी के लिए जसप्रीत बुमराह और तिलक वर्मा के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। हालांकि, 33 साल के बुमराह को कप्तानी मिलने की संभावना ज्यादा है। वहीं, अगले सीजन के लिए हार्दिक के ट्रेड होने की चर्चाओं को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है। फ्रेंचाइजी से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों को महज अफवाह बताया है। बुमराह 13 साल से मुंबई के साथ हैं बुमराह 2013 से यानी पिछले 13 सालों से फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं और उन्हें टीम की गहरी समझ है। वे पहले भारतीय टीम की कमान भी संभाल चुके हैं। वहीं, पांच बार के विजेता कप्तान रोहित शर्मा टीम का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन उनके दोबारा कप्तानी संभालने की उम्मीद कम ही है। सूर्या परिवार के साथ समय बिताएंगे सूर्यकुमार यादव हाल ही में पिता बने हैं और फ्रेंचाइजी ने उन्हें परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दी है। वहीं, हार्दिक पंड्या बैक स्पैम (कमर में खिंचाव) की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हें 2 मई को चेन्नई के खिलाफ मैच के दौरान यह दिक्कत हुई थी। हालांकि वे रिलायंस कॉरपोरेट पार्क में प्रैक्टिस करते दिखे थे, लेकिन मेडिकल टीम ने उन्हें अभी पूरी तरह फिट घोषित नहीं किया है। हार्दिक के ट्रेड होने की खबरें महज अफवाह सोशल मीडिया पर हार्दिक पंड्या को किसी दूसरी फ्रेंचाइजी के साथ ट्रेड करने की चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन क्रिकबज को टीम के सूत्रों ने बताया, इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। फ्रेंचाइजी इस समय ऐसी किसी संभावना पर विचार नहीं कर रही है और हार्दिक भविष्य में भी टीम के साथ बने रहेंगे। मुंबई प्लेऑफ की रेस से बाहर पॉइंट्स टेबल में पंजाब किंग्स फिलहाल 13 अंकों के साथ चौथे स्थान पर है। मुंबई इंडियंस 9वें स्थान पर है और टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। आज की जीत पंजाब को 15 अंकों पर ले जाएगी, जिससे प्लेऑफ में उसकी स्थिति मजबूत होगी। ऐसे में चेन्नई और राजस्थान जैसी टीमों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि मुंबई क्वालिफाई नहीं कर सकती, लेकिन आज रात उलटफेर करने की कोशिश करेगी।
महिलाओं पर आतंकी हमले से भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी:नाइजीरिया में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं की हत्या की, एक्ट्रेस बोलीं- इन राक्षसों के लिए नरक में जगह

साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के साथ काफी क्रूरता की, जिसे देखकर एक्ट्रेस ने इन हमलावरों को ‘राक्षस’ और ‘शैतान’ करार दिया है। देवोलीना ने कहा- नरक में मिलेगी खास जगह देवोलीना ने इस बर्बर घटना पर नाराजगी जताते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘एकदम राक्षस और शैतान वाली प्रवृत्ति। इन राक्षसों के लिए नरक में खास जगह है, जिसे वे स्वर्ग समझते हैं।’ एक्ट्रेस उस वीडियो पर भड़क गईं जिसमें आतंकियों ने निर्दोष परिवारों और गर्भवती महिलाओं को अपना निशाना बनाया। प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ की गई क्रूरता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाइजीरिया के एक ईसाई गांव पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। जो परिवार वहां से भाग नहीं पाए, उन पर आतंकियों ने कुल्हाड़ियों से हमला किया। वीडियो में दावा किया गया है कि इन आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को पकड़ लिया और उनके पेट पर वार किए। इतना ही नहीं, उन महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चों को आंखों के सामने मरते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया। 11 ईसाइयों की हत्या सीबीएन (CBN) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला 8 मई की रात को हुआ था। हथियारबंद फुलानी आतंकवादियों ने इस ईसाई समुदाय पर हमला किया, जिसमें बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित कम से कम 11 लोगों की हत्या कर दी गई। हमले में बंदूकों और चाकुओं का इस्तेमाल हुआ था। बंगाल चुनाव में भी रही थीं चर्चा में देवोलीना भट्टाचार्जी हाल ही में तब भी चर्चा में रही थीं, जब उन्होंने मई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बीजेपी की जीत का समर्थन किया था और ममता बनर्जी को बंगाल के लिए ‘बुरा सपना’ बताया था।
महिलाओं पर आतंकी हमले से भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी:नाइजीरिया में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं की हत्या की, एक्ट्रेस बोलीं- इन राक्षसों के लिए नरक में जगह

साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के साथ काफी क्रूरता की, जिसे देखकर एक्ट्रेस ने इन हमलावरों को ‘राक्षस’ और ‘शैतान’ करार दिया है। देवोलीना ने कहा- नरक में मिलेगी खास जगह देवोलीना ने इस बर्बर घटना पर नाराजगी जताते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘एकदम राक्षस और शैतान वाली प्रवृत्ति। इन राक्षसों के लिए नरक में खास जगह है, जिसे वे स्वर्ग समझते हैं।’ एक्ट्रेस उस वीडियो पर भड़क गईं जिसमें आतंकियों ने निर्दोष परिवारों और गर्भवती महिलाओं को अपना निशाना बनाया। प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ की गई क्रूरता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाइजीरिया के एक ईसाई गांव पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। जो परिवार वहां से भाग नहीं पाए, उन पर आतंकियों ने कुल्हाड़ियों से हमला किया। वीडियो में दावा किया गया है कि इन आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को पकड़ लिया और उनके पेट पर वार किए। इतना ही नहीं, उन महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चों को आंखों के सामने मरते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया। 11 ईसाइयों की हत्या सीबीएन (CBN) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला 8 मई की रात को हुआ था। हथियारबंद फुलानी आतंकवादियों ने इस ईसाई समुदाय पर हमला किया, जिसमें बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित कम से कम 11 लोगों की हत्या कर दी गई। हमले में बंदूकों और चाकुओं का इस्तेमाल हुआ था। बंगाल चुनाव में भी रही थीं चर्चा में देवोलीना भट्टाचार्जी हाल ही में तब भी चर्चा में रही थीं, जब उन्होंने मई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बीजेपी की जीत का समर्थन किया था और ममता बनर्जी को बंगाल के लिए ‘बुरा सपना’ बताया था।
सतीसन के लिए छह मुकदमे: केरल के नए मुख्यमंत्री की शासन की राह कांटों से भरी क्यों है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:14 मई, 2026, 16:19 IST राजकोषीय संकट, आंतरिक गुटबाजी और सांप्रदायिक संतुलन कार्यों का सामना करते हुए, क्या सतीसन 2029 लोकसभा लिटमस टेस्ट को पास करने के लिए घायल वामपंथ और पुनर्जीवित भाजपा से बच पाएंगे? वीडी सतीसन केरल के नए मुख्यमंत्री हैं। आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस आलाकमान ने आखिरकार वीडी सतीसन को केरल का मुख्यमंत्री पद देने का फैसला कर लिया है। जबकि राज्य उनकी जीत के महान जश्न का गवाह बनेगा, सतीसन का परीक्षण अभी शुरू हो रहा है। उन्हें न केवल जनादेश विरासत में मिला है, बल्कि राजनीतिक, सांप्रदायिक और संस्थागत चुनौतियों का भंडार भी मिला है, जो उनके कार्यकाल को परिभाषित या पटरी से उतार सकता है। परीक्षण 1: जमात-ए-इस्लामी बैगेज सतीसन का उत्थान उनके और जमात-ए-इस्लामी के बीच एक समझौते के आरोपों से लगातार बाधित हुआ है। केरल में राजनीतिक दलों के लिए अछूत होने के बावजूद, सतीसन ने खुले तौर पर जमात का समर्थन स्वीकार करने में संकोच नहीं किया और यहां तक कि संगठन का बचाव करते हुए इसे धर्मनिरपेक्ष प्रमाण पत्र भी दिया। फरवरी में, जमात को ‘सांप्रदायिक’ कहने के लिए पूर्व कानून मंत्री एके बालन पर सतीसन की कटाक्ष ने सुर्खियां बटोरी थीं। यह भी पढ़ें | केरल का गेम ऑफ थ्रोन्स: सतीसन को मिला ताज, वेणुगोपाल के पास सत्ता सतीसन के नेतृत्व में, कांग्रेस मौदूदियों के साथ एक खतरनाक सामरिक नृत्य में लगी हुई है, जिसके केरल में सर्वोच्च नेता शेख मुहम्मद काराकुन्नु ने हाल ही में जनवरी 2026 में एक इस्लामी गणराज्य की स्थापना का आह्वान भी किया था। जमात-ए-इस्लामी ने स्पष्ट रूप से सतीसन के लिए मुस्लिम वोटों को मजबूत करने में मदद की है। ऐसे दोस्तों के साथ, उनकी धर्मनिरपेक्ष साख की रक्षा करना अपने आप में एक बड़ा काम होगा। इसके अलावा, सतीसन के पास जमात और उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी, सुन्नी सर्वोच्च निकाय समस्त के बीच संतुलन साधने का अविश्वसनीय कार्य भी है, जिसने उन्हें अपना अंतर्निहित समर्थन भी दिया था। इस बात की पूरी संभावना है कि वह हिंदू मतदाताओं को अलग-थलग कर सकते हैं, जो मुस्लिम समुदाय के बढ़ते प्रभाव को चिंता की दृष्टि से देखते हैं, और उदारवादी और सुधारवादी मुस्लिम आवाजें भी, जो जमात के बढ़ते प्रभाव को चिंता की दृष्टि से देखते हैं। परीक्षण 2: हिंदू क्रोध और आईयूएमएल का पाउंड ऑफ़ फ़्लेश सभी यूडीएफ सहयोगी मुख्यमंत्री के रूप में सतीसन के समर्थन में एकमत थे। लेकिन मुस्लिम लीग से अधिक मुखर कोई नहीं। IUML ने उन सीटों पर कांग्रेस को महत्वपूर्ण जीत दिलाई थी जहां उसका कोई मजबूत संगठन नहीं था। हमेशा की तरह, उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्रालय जैसे प्रमुख पदों के लिए पहले से ही बढ़ती कॉलों के कारण, लीग को अपने एक पाउंड की उम्मीद होगी। साथ ही, सतीसन ने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (एसएनडीपी) जैसे हिंदू समुदाय संगठनों के अहंकार को बढ़ावा देने से इनकार कर दिया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनके चयन पर उनकी नाराजगी स्पष्ट है। यहां तक कि 11वें घंटे में, एनएसएस महासचिव सुकुमारन नायर सतीसन की आलोचना करने के लिए सामने आए थे, और “सीएम चयन में लीग को असंगत प्रभाव की अनुमति देने” के लिए कांग्रेस की आलोचना की थी। सतीसन, जो स्वयं एक नायर हैं, को जल्द ही सामाजिक गठबंधन के पुनर्गठन का सामना करना पड़ सकता है जो यूडीएफ के हिंदू वोट बैंक को स्थायी रूप से नष्ट कर देगा। ठगा हुआ महसूस कर रहे एनएसएस और एसएनडीपी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि सतीसन इन समूहों को शांत करने में विफल रहते हैं, और माना जाता है कि वे आईयूएमएल के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं, तो इससे हिंदू वोट बैंक का भाजपा की ओर बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है। एलडीएफ के ख़त्म हो चुकी ताकत के साथ, एनएसएस और एसएनडीपी के पास केरल के मामलों में अपनी बात कहने का कोई विकल्प नहीं है, सिवाय केंद्र में सत्ता में मौजूद पार्टी के साथ तालमेल बिठाने के। परीक्षण 3: गुटों को वश में करना, प्राधिकार पर जोर देना कांग्रेस के 63 में से 46 विधायकों ने कथित तौर पर शीर्ष पद के लिए केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया था। सतीसन को अब एक विधायक दल विरासत में मिला है जो ऐसे लोगों से भरा है जिन्होंने उनके लिए नहीं बोला। वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नेतृत्व वाले शक्तिशाली गुटों के लंबे समय तक चुप रहने की संभावना नहीं है। आख़िरकार, कांग्रेस लगातार पीठ पीछे वार करने, नीतिगत पंगुता और नेतृत्व संकट के लिए प्रसिद्ध है। सतीसन को विधायकों के ठोस बहुमत की वफादारी सुनिश्चित करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यदि वह ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो वह खुद को पार्टी के भीतर अलग-थलग और एक बेकार मुख्यमंत्री पाएंगे। वह अपनी सरकार को चलाने के लिए गठबंधन सहयोगियों पर अधिक निर्भर हो जाएंगे, जिससे उनका अधिकार और भी कम हो जाएगा। परीक्षण 4: 2029 लोकसभा लिटमस टेस्ट विपक्षी नेता के तौर पर वीडी सतीसन का एक ही काम था और वह था पिनाराई विजयन सरकार को गिराना. इसमें उन्हें पार्टी मशीनरी का अंतर्निहित विश्वास और समर्थन प्राप्त था। हालाँकि, बाद के नेतृत्व संघर्ष में, हमने रैंकों के भीतर एक विभाजन देखा। परंपरागत रूप से, केपीसीसी अध्यक्ष एक तटस्थ रेफरी के रूप में कार्य करता है। लेकिन इस बार सनी जोसेफ वेणुगोपाल के समर्थन में अपना वजन साफ तौर पर बढ़ाते नजर आए. सतीसन को अब एक पार्टी संगठन विरासत में मिला है जो पूरी तरह से उनके साथ तालमेल नहीं बिठा सकता है, जो प्रशासनिक और संगठनात्मक पक्षाघात का एक नुस्खा है। सतीसन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिद्वंद्वी गुट हर मोड़ पर उनकी नीतिगत पहल और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को कमजोर न करें। 2029 का लोकसभा चुनाव उनकी अगली बड़ी चुनौती होगी। 2024 में, यूडीएफ ने केरल की 20 संसदीय सीटों में से 18 सीटें हासिल करके व्यापक जीत हासिल की। सतीसन के मुख्यमंत्री बनने से उम्मीदें बहुत अधिक हैं। 2024 की पुनरावृत्ति से कम कुछ भी तुरंत हथियार बना दिया जाएगा, और उनके कार्यकाल के बीच में ही पद छोड़ने के लिए बढ़ती मांगें शुरू हो जाएंगी। परीक्षण 5: बढ़ता कर्ज और एक वैश्विक संकट मुख्यमंत्री के रूप में,
तलविंदर ने पाकिस्तानी सिंगर के साथ मंच शेयर किया:टोरंटो में कॉन्सर्ट में गले मिले, हसन रहीम ने कहा- भाई

भारतीय पंजाबी सिंगर तलविंदर हाल ही में टोरंटो में पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के लाइव कॉन्सर्ट में शामिल हुए और उनके साथ मंच शेयर किया। दरअसल, मंगलवार को तलविंदर ने इंस्टाग्राम पर कॉन्सर्ट की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने पोस्ट पर कैप्शन लिखा, ‘टोरंटो में हसन रहीम के साथ विशेज पूरी हुईं।’ वीडियो में दोनों स्टेज पर एक साथ गाते, गले मिलते और डांस करते दिखे। हसन ने तलविंदर की इंस्टाग्राम पोस्ट पर ‘भाई’ लिखकर रिएक्ट किया। इस पोस्ट के बाद कुछ यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ने लिखा कि हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच ऐसी मौजूदगी गलत थी। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, ‘मैंने नहीं सोचा था भाई कि ये लोग हमारे देश की सेना का मजाक उड़ाने वालों के साथ स्टेज शो करेंगे।’ गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। इसके बाद ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज’ (FWICE) जैसे संगठन ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पाकिस्तानी कलाकारों, गायकों और तकनीशियनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। तलविंदर को गाने ‘पल पल’ से मिली थी बड़ी पहचान तलविंदर का असली नाम तलविंदर सिंह सिद्धू है। उन्हें उनके गाने पल पल से पहचान मिली। कुछ महीने पहले उनका नाम एक्ट्रेस दिशा पाटनी से जुड़ा था। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया था। वहीं, तलविंदर ने दिशा पाटनी के साथ कथित रिलेशनशिप को लेकर हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, हमारी मुलाकात शादी (नूपुर सेनन की शादी) से ठीक पहले हुई थी और अचानक मिली इतनी सारी चर्चा ने हमें हैरान कर दिया। हम न तो किसी दबाव में आना चाहते हैं और न ही अफवाहों पर ध्यान देना चाहते हैं। हम अभी खुद को समझने और एक-दूसरे को जानने की प्रोसेस में हैं। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर लोग अफवाहें फैलाने की कोशिश करेंगे तो मैं उन्हें अफवाह ही रहने दूंगा। जब तलविंदर से पूछा गया था कि क्या वह प्यार और रिश्तों के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “मैं हर दिन प्यार में पड़ जाता हूं। मैं अभी भी प्यार में पड़ रहा हूं।”
तलविंदर ने पाकिस्तानी सिंगर के साथ मंच शेयर किया:टोरंटो में कॉन्सर्ट में गले मिले, हसन रहीम ने कहा- भाई

भारतीय पंजाबी सिंगर तलविंदर हाल ही में टोरंटो में पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के लाइव कॉन्सर्ट में शामिल हुए और उनके साथ मंच शेयर किया। दरअसल, मंगलवार को तलविंदर ने इंस्टाग्राम पर कॉन्सर्ट की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने पोस्ट पर कैप्शन लिखा, ‘टोरंटो में हसन रहीम के साथ विशेज पूरी हुईं।’ वीडियो में दोनों स्टेज पर एक साथ गाते, गले मिलते और डांस करते दिखे। हसन ने तलविंदर की इंस्टाग्राम पोस्ट पर ‘भाई’ लिखकर रिएक्ट किया। इस पोस्ट के बाद कुछ यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ने लिखा कि हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच ऐसी मौजूदगी गलत थी। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, ‘मैंने नहीं सोचा था भाई कि ये लोग हमारे देश की सेना का मजाक उड़ाने वालों के साथ स्टेज शो करेंगे।’ गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया है। इसके बाद ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज’ (FWICE) जैसे संगठन ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पाकिस्तानी कलाकारों, गायकों और तकनीशियनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। तलविंदर को गाने ‘पल पल’ से मिली थी पहचान तलविंदर का असली नाम तलविंदर सिंह सिद्धू है। उन्हें उनके गाने पल पल से पहचान मिली। कुछ महीने पहले उनका नाम एक्ट्रेस दिशा पाटनी से जुड़ा। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया था। वहीं, तलविंदर ने दिशा के साथ कथित रिलेशनशिप को लेकर हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था, हमारी मुलाकात शादी (नूपुर सेनन की शादी) से ठीक पहले हुई थी और अचानक मिली इतनी सारी चर्चा ने हमें हैरान कर दिया। हम न तो किसी प्रेशर में आना चाहते हैं और न ही अफवाहों पर ध्यान देना चाहते हैं। हम अभी खुद को समझने और एक-दूसरे को जानने की प्रोसेस में हैं। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर लोग अफवाहें फैलाने की कोशिश करेंगे तो मैं उन्हें अफवाह ही रहने दूंगा। जब तलविंदर से पूछा गया था कि क्या वह प्यार और रिश्तों के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं हर दिन प्यार में पड़ जाता हूं। मैं अभी भी प्यार में पड़ रहा हूं।’
विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में क्या किया, यह हर सीएम को देखना चाहिए

वह आदमी जिसने भूमिकाएँ बदल दीं: लाइट्स, कैमरा, एक्शन – यही दशकों तक विजय की दुनिया थी। आज, सेट की जगह तमिलनाडु विधानसभा ने ले ली है, संवादों की जगह नीतिगत बहस ने ले ली है, और तालियों की जगह एक राज्य अपने नए मुख्यमंत्री के हर कदम को एक थ्रिलर फिल्म की तीव्रता के साथ देख रहा है। वह क्षण जो वायरल हो गया: हाथ में कलम, सिर थोड़ा झुका हुआ, उनके सामने एक नोटबुक खुली – विधानसभा कार्यवाही के दौरान सीएम विजय की शांत, केंद्रित उपस्थिति ने इंटरनेट की कल्पना पर कब्जा कर लिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का विधानसभा सत्र के दौरान ध्यान से नोट्स लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया है। अनुभवी राजनेताओं से भरे हॉल में, यह नवागंतुक ही थे जो सबसे अधिक तैयार दिखे। (X/thefederal.com) विपक्ष पर नोट्स लेना: जिस चीज़ ने छवि को और भी आकर्षक बना दिया वह था संदर्भ। रिपोर्टों से पता चलता है कि विजय विपक्ष द्वारा उनकी सरकार पर लगाए गए हर आरोप को चुपचाप चुपचाप नोट कर रहे थे। कोई रुकावट नहीं. कोई नाटकीयता नहीं. बस एक कलम, एक नोटबुक और पूरा ध्यान। नाटकीय राजनीतिक रंगमंच के आदी राज्य के लिए, यह पूरी तरह से एक अलग तरह का तमाशा था। नेटिज़ेंस प्रतिक्रिया: विपक्ष के बोलने के दौरान शांति से टिप्पणी करते हुए एक मुख्यमंत्री की छवि ने ऑनलाइन टिप्पणियों की बाढ़ ला दी। एक नेटिज़न ने लिखा, “हमने कभी किसी सीएम को इतना केंद्रित और गंभीर नहीं देखा।” दूसरे ने कहा, “राजनीति में हर किसी को इससे सीखना चाहिए।” ऐसे राजनीतिक माहौल में जिसे अक्सर वाकआउट, नारेबाजी और व्यवधान से परिभाषित किया जाता है, नोटबुक में लिखने का सरल कार्य एक बयान बन गया। स्टारडम से स्टेट्समैनशिप तक: रजनीकांत – विजय के समकालीन और तमिल सिनेमा के अन्य दिग्गज सुपरस्टार – से हाल ही में एक हवाई अड्डे पर विजय के राजनीतिक उत्थान के बारे में पूछा गया था। वह चुप रहा, हाथ जोड़े, कुछ नहीं बोला। प्रशंसकों का कहना है कि उनकी चुप्पी किसी भी टिप्पणी से ज़्यादा ज़ोर से बोलती है। वह व्यक्ति जिसने कभी विजय के साथ ब्लॉकबस्टर पोस्टर साझा किए थे, अब हर किसी की तरह देखता है कि उसका साथी तमिलनाडु की राजनीतिक कहानी को फिर से लिख रहा है। संख्याएँ झूठ नहीं बोलतीं: विधानसभा एकमात्र ऐसी जगह नहीं थी जहां विजय ने प्रभाव डाला। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर उनके पद संभालने के बाद आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई – 9 मई को 4.56 लाख फॉलोअर्स से बढ़कर 11 मई तक 1.9 मिलियन हो गए, जो कि केवल 48 घंटों में लगभग पांच गुना बढ़ गया। विजय के शपथ ग्रहण समारोह की रील को एक घंटे में 12 मिलियन बार देखा गया – यह संख्या एक सुपरस्टार की प्रशंसक संख्या और एक मुख्यमंत्री के सार्वजनिक जनादेश के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है।








