वायरल बीमारियां अब जल्दी ठीक क्यों नहीं होती हैं? कोविड के बाद दुनिया में ऐसा क्या बदल गया

Last Updated:May 14, 2026, 18:18 IST Viral Infections Recovery Time: कोविड महामारी से पहले वायरल बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन अब छोटी-छोटी परेशानियां ठीक होने में 8 से 10 दिन का वक्त ले रही हैं. डॉक्टर्स की मानें तो कोविड की वजह से करोड़ों लोगों की इम्यूनिटी लंबे समय तक प्रभावित हुई है. इसकी वजह से वायरल इंफेक्शंस से लड़कर उबरने में शरीर को लंबा समय लग रहा है. इसके अलावा भी कई फैक्टर्स रिकवरी टाइम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. कोविड महामारी के बाद वायरल इंफेक्शन को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है. Viral Diseases and Immunity: जनवरी 2020 में भारत में कोविड का पहला मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे देश भर में कोरोना संक्रमण फैलने लगा था. इसे कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन भी लगाया गया था, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. करीब 6 साल बाद भी कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब यह स्थानीय बीमारी बन गई है. कोविड से पहले जब भी लोगों को बुखार आता था, तब एक पैरासिटामोल लेने पर ही अधिकतर लोग ठीक हो जाते थे. कोविड के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब छोटी-मोटी परेशानियां होने पर भी लोगों को सही ट्रीटमेंट के बावजूद रिकवर होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. पहले सामान्य वायरल बुखार, सर्दी या फ्लू जैसी बीमारियां कुछ दिनों में ठीक हो जाया करती थीं, लेकिन अब कई लोग शिकायत करते हैं कि वायरल संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है. खांसी हफ्तों तक नहीं जाती, कमजोरी बनी रहती है और शरीर पूरी तरह रिकवर होने में ज्यादा समय लेने लगा है. कोविड-19 महामारी के बाद लोगों के मन में यह सवाल और बढ़ गया है कि आखिर अब वायरल बीमारियां जल्दी ठीक क्यों नहीं होतीं? क्या वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं या फिर दुनिया में कुछ ऐसा बदल गया है, जो शरीर की रिकवरी को प्रभावित कर रहा है. इस बारे में डॉक्टर की राय जान लेते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कोविड के बाद दुनिया में कई चीजें बदली हैं. सबसे बड़ा बदलाव लोगों की इम्यूनिटी और शरीर के इंफेक्शन से लड़ने के तरीके में देखा गया है. कोरोना वायरस ने सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि शरीर के इम्यून सिस्टम पर भी गहरा असर डाला है. कई रिसर्च में यह सामने आया कि कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों का इम्यून रिस्पॉन्स लंबे समय तक प्रभावित रह सकता है. यही वजह है कि बाद में होने वाले वायरल संक्रमण से शरीर को उबरने में ज्यादा समय लग रहा है. पहले जो वायरल इंफेक्शन 3-4 दिन में अपने आप ठीक हो जाते थे, उन्हें ठीक होने में अब 10 से 15 दिन का वक्त लग रहा है. डॉक्टर ने बताया कि अब लोग छोटी बीमारी में भी तुरंत एंटीबायोटिक या कई दवाएं लेने लगे हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती हैं. जरूरत से ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक रिकवरी सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा कुछ नए वायरस और उनके वेरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकते हैं, जिससे संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि हर लंबे समय तक रहने वाला वायरल संक्रमण गंभीर हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सही खानपान, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने से इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो कोविड के बाद लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल भी काफी बिगड़ गई है. अब ज्यादातर लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है, जंक फूड का सेवन बढ़ गया है और सोने-जागने की टाइमिंग में भी बदलाव आ गया है. इसके अलावा बढ़ता हुआ तनाव भी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर रहा है. कोविड के बाद बढ़ता स्क्रीन टाइम भी सेहत के लिए एक चैलेंज बन गया है. इन सभी फैक्टर्स की वजह से भी वायरल संक्रमण को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. अगर शरीर को पर्याप्त आराम, सही पोषण और नींद नहीं मिलती, तो वायरल संक्रमण से रिकवरी धीमी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पुराने जमाने के ये 7 फूड अब बन गया अमीरों के घरों की शान, हर किसी में सुपरफूड वाला गुण

7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं. वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है. घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है. फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है. शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है. मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है. दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.
सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की एंट्री और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों वाली बेंच ने 16 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे कई अहम संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में एंट्री का विवाद है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में एंट्री पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजा गया। केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है। सबरीमाला मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। मामले की सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में CJI जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता का विषय है। केंद्र के मुताबिक, यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।
विपक्षी बेंच से लेकर क्लिफ हाउस तक: केरल के नए सीएम वीडी सतीसन के बारे में सब कुछ

एक वकील जिन्होंने छात्र सक्रियता के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया: 31 मई, 1964 को कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे सतीसन ने कानून की पढ़ाई की और बाद में पूर्णकालिक राजनीति में प्रवेश करने से पहले लगभग एक दशक तक केरल उच्च न्यायालय में अभ्यास किया। उनका उदय छात्र और युवा राजनीति में शुरू हुआ: सतीसन ने केरल छात्र संघ (केएसयू) से शुरुआत की और बाद में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के साथ काम किया। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। गढ़ बनाने से पहले वह अपना पहला चुनाव हार गए: उनकी चुनावी शुरुआत 1996 में हुई, जब वह परवूर से हार गए, जिसे उस समय वामपंथियों का गढ़ माना जाता था। वह 2001 में इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए लौटे और तब से इस सीट पर काबिज हैं। परवूर से छह बार विधायक: सतीसन ने 2001 से लगातार केरल विधानसभा में परवूर का प्रतिनिधित्व किया है, लगातार छह बार जीत हासिल की और केरल की राजनीति में कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे। 2021 के बाद वह विपक्ष का चेहरा बन गए: 2021 में, सतीसन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में रमेश चेन्निथला की जगह ली। पिछले पांच वर्षों में, उन्होंने शासन और भ्रष्टाचार से लेकर कानून-व्यवस्था तक के मुद्दों पर वामपंथी सरकार पर यूडीएफ के हमलों का नेतृत्व किया।
केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा: जब वीडियो में केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई, तो क्या कह रहे हैं कांग्रेस नेता

केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस द्वारा वी. डी. श्रीशन के नाम की घोषणा के बाद संप्रदाय के नेताओं और नवनिर्वाचित नामों ने उन्हें बधाई दी। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने फेसबुक पर शेरशान की एक तस्वीर साझा की और लिखा, ”केरल के 24 वें मुख्यमंत्री वी डी शेरशान को बहुत-बहुत बधाई।” कांग्रेस के नेता और नेता वी टी बलराम ने भी श्रीशन को बधाई देते हुए कहा कि यह जनता की इच्छा है। बलराम ने फेसबुक पर लिखा कि यह एक ऐसी घोषणा थी जिसका केरल इंतजार कर रहा था। उन्होंने उन लोगों की भावनाओं की पुष्टि करते हुए कहा कि पहले ही उन्हें अपना नेता मान लिया गया था। बलराम ने कहा, ”एक सच्ची लोकतांत्रिक पार्टी का सम्मान करके ही फैसला सुनाया जा सकता है और स्थायी जनभावनाओं को मंजूरी नहीं दी जा सकती।” उन्होंने कहा कि श्रीशेषन एक ऐसे ही विपरीत जन समर्थन के बीच कब्जा कर रहे हैं, जो किसी भी राजनीतिक नेता के लिए विरले ही देखा जा रहा है। बलराम ने कहा कि श्रीशथन की यह पार्टी केवल कांग्रेस या यूयू के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं है, बल्कि केरल की जनता के मुख्यमंत्री के रूप में देखी जानी चाहिए। अपने पोस्ट के समापन में उन्होंने कहा, ”हम ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि यह केरल है।” यह भी पढ़ें: जब सम्मान का समर्थन नहीं किया तो कांग्रेस ने कैसे बनाया केरल का नया मुख्यमंत्री? वीडी शेरेशन ने खुद बताया यू.एफ.ई.सी. वी.आई.टी. को बताया गया दार्शनिक की मेहनत कांग्रेस से राष्ट्रीय नेता राहुल ममकूटाथिल ने भी श्रीशरण को बधाई दी। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि यू-फॉल्क की जीत पार्टी पार्टियों के राजनीतिक संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। उनके अनुसार, कैथोलिक पुरा के सिद्धांत अब एक जन हितैषी सरकार के रूप में सामने आए हैं और अलाकमान ने श्रीशेन को इसके नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। सतीशन को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार के लोगों के विचार काम करने के लिए काम करेंगे। पुथुपल्ली से फिर से विधायक विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चंडी के बेटे चंडी ओमन ने भी श्रीशेषन की तस्वीर साझा कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। IUML ने श्रीशेषन के नाम का स्वागत किया मुवत्तुपुझा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मैथ्यू कुझालदान ने कहा कि केरल शासन का एक नया चेहरा और नई शैली दिखेगा। यूएफओ के दूसरे सबसे बड़े घटक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने कांग्रेस के फैसले का पूरी तरह से समर्थन किया। केरल की जनता के साथ-साथ हम भी इसका समर्थन करते हैं। ”शेषन सुशासन देने में सक्षम होगा.” यह भी पढ़ें: क्वेंच-जिनपिंग बैठक से खुलागा होर्मुज का प्रस्थान? ईरान वॉर के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा बयान
कुछ पेनिकलर दवाओं में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह भी मेडिसिन का तत्व, यहां समझ लीजिए

Last Updated:May 14, 2026, 17:10 IST Caffeine in Pain Relief Medicines: कई पेनकिलर दवाओं में कैफीन इसलिए मिलाया जाता है, क्योंकि यह दवा के असर को बढ़ाने और दर्द से जल्दी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन की दवाओं में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है. हालांकि ज्यादा कैफीन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. ऐसे में सावधानी बरतनी चाहिए. पेनकिलर दवाओं में कैफीन मिलाने से उनका असर तेज और बेहतर तरीके से होता है. Caffeine in Headache Medicines: कैफीन एक नेचुरल तत्व होता है, जो चाय-कॉफी और चॉकलेट से लेकर कई खाने-पीने की चीजों में पाया जाता है. कई एनर्जी ड्रिंक्स और शुगरी ड्रिंक्स में भी कैफीन मिलाया जाता है. यह एक स्टिम्युलेंट है, जो हमारे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर सतर्कता और एनर्जी बढ़ाता है. जब भी लोग सिरदर्द, माइग्रेन या बदन दर्द की दवा लेते हैं, तो कई बार दवा के पैकेट पर कैफीन लिखा होता है. अक्सर सवाल उठता है कि दर्द की दवा में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह सिर्फ जागने या नींद भगाने के लिए होता है या फिर इसका दर्द कम करने में भी कोई रोल है? US के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कैफीन सिर्फ चाय-कॉफी में पाया जाने वाला तत्व नहीं है, बल्कि कई पेनकिलर दवाओं में इसे एक एनाल्जेसिक एडजुवेंट यानी दवा का असर बढ़ाने वाले तत्व के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कैफीन खुद बहुत मजबूत पेनकिलर नहीं होता, लेकिन यह पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद कर सकता है. कई रिसर्च में पाया गया है कि पेनकिलर के साथ कैफीन मिलाने से दर्द से राहत थोड़ी तेजी से और बेहतर मिल सकती है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियों में कैफीन वाली दवाएं ज्यादा यूज की जाती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि कैफीन शरीर में कुछ ऐसे रिसेप्टर्स को ब्लॉक करता है, जो दर्द महसूस कराने में भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा यह दवा के अवशोषण को तेज कर सकता है, जिससे दवा जल्दी असर दिखा सकती है. कुछ मामलों में कैफीन ब्रेन की ब्लड वेसल्स को संकरा करने में भी मदद करता है, जो माइग्रेन या सिरदर्द में राहत देने में उपयोगी माना जाता है. एक मेडिकल रिव्यू में पाया गया कि लगभग 100 मिलीग्राम या उससे अधिक कैफीन को सामान्य पेनकिलर के साथ मिलाने पर 5% से 10% ज्यादा लोगों को बेहतर दर्द से राहत मिली, जबकि सामान्य पेनिकलर वालों को कम राहत मिली. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा कैफीन वाली दवाएं हमेशा बेहतर होती हैं, ऐसा नहीं है. कुछ लोगों को कैफीन से घबराहट, नींद न आना, दिल की धड़कन तेज होना या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जो लोग पहले से ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं या कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं, उन्हें ऐसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर, एंजायटी या नींद की समस्या वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. किसी भी दवा का लगातार या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बिना एक्सपर्ट की सलाह के लंबे समय तक दवा का सेवन नहीं करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
सत्तू की कुल्फी रेसिपी: लू और गर्मी से बचाएगी सत्तू की यह ताज़गी भरी कुल्फी, सिर्फ 3 साल पहले बनेगी तैयार, नोट करें विधि

14 मई 2026 को 16:58 IST पर अद्यतन किया गया सत्तू की कुल्फी रेसिपी: गर्मियों में कुल्फी खाना किसे पसंद नहीं आता। लेकिन बाजार में मिलने वाली कुल्फी कई बार स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं होती। ऐसे में हम दादी-नानी वाले नुस्खे का इस्तेमाल करके घर पर ही सेहतमंद प्रोटीन वाली सत्तू की कलौंजी बना सकते हैं। शामिल हैं सत्तू की कुल्फी बनाने का रहस्य। अनुसरण करना : सत्तू की कुल्फी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 1 कप सत्तू आधा लीटर दूध स्वाद यात्री गुड़ या चीनी स्वाद के लिए इलायची छवि: एआई इस कुल्फी को तैयार करने के लिए सबसे पहले ठंडे दूध में सत्तू और गुड़ डालें। अब इसे अच्छी तरह से फेंट लें ताकि बैटर एसेट फ़्लोट्स बनकर तैयार हो जाए। छवि: एआई इस मिक्चर को लाइट- लाइट लॉन्च पर 7-10 मिनट तक अच्छे से पकाएंगे। सत्तू का गोंद जब तक डायनासोर न हो जाए तब तक वापस पकाना है। छवि: एआई अब इस मिक्चर को ठंडा करें, फिर इसे कुल्फी मोल्ड्स या फिर छोटे-छोटे होने वाले ग्लासों में भर दें। इसके ऊपर से डॉयचेल्स स्प्रिंकल करें। छवि: एआई तैयार किए गए कुल्फी के मोल्ड्स को 7 से 8 घंटे तक या फिर पूरी रात इसे रेफ्रीजिरेटर में जमने के लिए रख लें। जमने के बाद कुल्फी सख्त हो जाती है, और बेहद स्वादिष्ट भी लगती है। छवि: एआई जमी हुई सुपर प्लाजा सत्तू की कुल्फी को मोल्ड से बाहर निकाले गए प्लेट में गुड से सजाएं। इस कुल्फी को और भी स्वस्थ बनाने के लिए चीनी स्थान पर खजूर के पेस्ट का उपयोग करें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 14 मई 2026 16:58 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू आइसक्रीम रेसिपी(टी)सत्तू कुल्फी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन विशेष सत्तू रेसिपी(टी)स्वस्थ कुल्फी रेसिपी(टी)गर्मियों में सत्तू के फायदे(टी)घर पर सत्तू आइसक्रीम कैसे बनाएं(टी)देसी कुल्फी रेसिपी(टी)सत्तू रेसिपी इन हिंदी(टी)हाई प्रोटीन समर डेजर्ट(टी)त्वरित सत्तू रेसिपी
जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं-मेरे और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं:चुप नहीं रह सकती; शराब नीति घोटाला के आरोपियों पर अवमानना की कार्रवाई करूंगी

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि वह इस मामले से जुड़े आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई करेंगी। उन्होंने कहा कि इस मामले पर शाम करीब 5.30 बजे आदेश सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने कहा- मेरे और कोर्ट के खिलाफ कुछ आरोपियों और अन्य लोगों ने इंटरनेट पर अपमानजनक और मानहानिकारक पोस्ट डाली हैं। मैं इस पर चुप नहीं रह सकती। कुछ लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। जस्टिस स्वर्णकांता दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सुनवाई कर रही हैं। इस मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी होने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जज को केस से हटाने की मांग की है। केजरीवाल का आरोप है कि जस्टिस शर्मा RSS के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी दरअसल हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई हो रही थी जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया था। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया और पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 लोगों को राहत दी थी। हाईकोर्ट में पेश नहीं हो रहे AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने 27 अप्रैल को वीडियो जारी कर कहा था- ‘शराब नीति घोटाला मामले में मैं हाईकोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलीलें रखेगा। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। केजरीवाल ने आरोप लगाया था- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच करीब 5904 केस मिले। अगर जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तय कर रहे हैं तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ फैसला सुना पाएंगी। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने जस्टिस स्वर्णा शर्मा की अदालत में पेश होना बंद कर दिया है। उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए अदालत में उपस्थित होने का फैसला किया।
सूर्यवंशी इंडिया-A के लिए खेलेंगे:ट्राई-सीरीज के लिए टीम में शामिल; अफगानिस्तान के खिलाफ 19 मई को भारतीय टीम का ऐलान संभव

15 साल के ओपनर वैभव सूर्यवंशी को इंडिया-A में जगह मिली है। श्रीलंका में जून में होने वाली ट्राई-सीरीज के लिए गुरुवार को टीम का ऐलान किया गया। तिलक वर्मा को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि रियान पराग उपकप्तान होंगे। सीरीज में भारत-A के अलावा श्रीलंका-A और अफगानिस्तान-A की टीमें हिस्सा लेंगी। वहीं, भारतीय सीनियर टीम का ऐलान 19 मई को होने की संभावना है। टीम इंडिया को जून में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे और टेस्ट सीरीज खेलनी है। प्रियांश-प्रभसिमरन के नाम BCCI ने स्क्वॉड में प्रियांश आर्या, वैभव सूर्यवंशी, आयुष बडोनी, निशांत सिंधु और अंशुल कम्बोज जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है। विकेटकीपर के तौर पर प्रभसिमरन सिंह और कुमार कुशाग्र टीम में शामिल हैं। ट्राई सीरीज के लिए इंडिया-A स्क्वॉड- तिलक वर्मा (कप्तान), प्रियांश आर्या, वैभव सूर्यवंशी, रियान पराग (उपकप्तान), आयुष बडोनी, निशांत सिंधु, हर्ष दुबे, सूर्यांश शेडगे, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), विपराज निगम, यश ठाकुर, युधवीर सिंह, अंशुल कम्बोज, अरशद खान। वनडे ट्राई-सीरीज के सभी मुकाबले दांबुला में खेले जाएंगे। इसके बाद इंडिया-A टीम श्रीलंका-A के खिलाफ दो मल्टी-डे मैच भी खेलेगी, जिनके लिए अलग स्क्वॉड का ऐलान बाद में किया जाएगा। बुमराह को आराम दिया जा सकता है अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मुकाबला IPL खत्म होने के तुरंत बाद 6 जून को न्यू चंडीगढ़ में खेला जाना है। ऐसे में चयनकर्ता टीम में कुछ नए चेहरों को मौका दे सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जसप्रीत बुमराह को इस टेस्ट में आराम दिया जा सकता है, क्योंकि यह मुकाबला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं है। गिल ही कप्तानी करेंगे शुभमन गिल ही टेस्ट टीम की कप्तानी करते दिखेंगे। पंजाब के तेज गेंदबाज गुरनूर बरार का नाम भी चर्चा में है। डोमेस्टिक क्रिकेट में चयनकर्ताओं को उनकी लगातार सही लाइन-लेंथ, तेज गेंदबाजी और मूवमेंट ने प्रभावित किया है। वनडे ईशान की वापसी हो सकती है वनडे टीम में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन दूसरे विकेटकीपर को लेकर चर्चा तेज है। ऋषभ पंत लंबे समय से टीम सेटअप का हिस्सा रहे हैं, लेकिन IPL में खराब बल्लेबाजी फॉर्म की वजह से उनकी जगह पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, ईशान किशन की वापसी की संभावना बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चयन बैठकों में भी उनका नाम चर्चा में रहा था। बाएं हाथ के बल्लेबाज होने और किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की क्षमता को टीम मैनेजमेंट अहम मान रहा है। टी-20 में वापसी के बाद उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा है। केएल राहुल फिलहाल टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद बने हुए हैं। उनकी फॉर्म अच्छी है और अगले साल साउथ अफ्रीका में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए उनका अनुभव टीम के लिए अहम माना जा रहा है। जडेजा-अक्षर में से एक को मौका वनडे टीम में स्पिन ऑलराउंडर की जगह को लेकर भी बड़ी चर्चा हो सकती है। रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल में से एक को चुना जाएगा, इस पर चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट बातचीत कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जडेजा का हालिया वनडे प्रदर्शन गेंद और बल्ले दोनों से उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। खासकर उनकी बल्लेबाजी अप्रोच को लेकर सवाल हैं, क्योंकि टीम मैनेजमेंट उस बल्लेबाजी पोजिशन पर ज्यादा आक्रामकता चाहता है।
Skin Tips: गर्मी के कारण बार-बार करते हैं फेश वॉश, एक्सपर्ट ने बताया स्किन के लिए क्यों खतरनाक ये छोटी-सी गलती

Last Updated:May 14, 2026, 16:41 IST Frequent Face Wash: बार-बार फेश वॉश करना आपकी स्किन को बेहतर नहीं बेकार कर सकता है. यहां आप स्किन एक्सपर्ट से दिन में 2 बार से अधिक फेश वॉश करने के नुकसान के बारे में जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट How Often Should I Use a Face Wash: गर्मियों में पसीना, चिपचिपाहट और चेहरे पर बार-बार तेल आने की वजह से कई लोग दिन में कई बार फेस वॉश करने लगते हैं. हालांकि चेहरा साफ रखना जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा फेस वॉश करना आपकी त्वचा को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है. PSRI अस्पताल दिल्ली में डर्मेटोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. भावुक धीर बताते हैं कि बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल कम होने लगता है, जिससे स्किन का पीएच लेवल बिगड़ सकता है. ऐसे में यदि आप रोजाना दो बार से अधिक बार फेश वॉश कर रहे हैं, तो आपको कई तरह की स्किन संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ज्यादा फेश वॉश करने के नुकसानएक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादा फेस वॉश के स्किन ड्राई होने लगती है. चेहरा रूखा, खिंचा हुआ और संवेदनशील महसूस हो सकता है. वहीं, कई बार त्वचा अपनी खोई हुई नमी की भरपाई के लिए और ज्यादा तेल बनाना शुरू कर देती है, जिससे चेहरा पहले से ज्यादा ऑयली दिख सकता है और मुंहासों की समस्या भी बढ़ सकती है. गर्मियों में बहुत अधिक फेस वॉश करने से स्किन बैरियर कमजोर पड़ सकता है. इसका मतलब है कि त्वचा बाहरी धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया से खुद को ठीक तरह से बचा नहीं पाती. इससे जलन, लालपन, खुजली या छोटे-छोटे दाने निकलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं, खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा होती है. कितनी बार फेस वॉश करना चाहिए? एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि दिन में दो बार फेस वॉश करना काफी होता है. एक बार सुबह और एक बार रात में सोने से कुछ घंटे पहले. अगर बहुत ज्यादा पसीना आता है या बाहर धूल-मिट्टी में रहना पड़ता है, तो चेहरे को साधारण पानी से धोना बेहतर विकल्प हो सकता है. हर बार फेस वॉश का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं होता. इस बात का भी रखें ध्यानअपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार हल्का माइल्ड फेस वॉश चुनना भी जरूरी है. बहुत ज्यादा तेज या केमिकल वाले उत्पाद त्वचा को और ज्यादा ड्राई और सेंंसिटिव बना सकते हैं. गर्मियों में स्किन की देखभाल का मतलब केवल बार-बार सफाई करना नहीं, बल्कि सही संतुलन बनाए रखना भी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi







