एअर इंडिया VP लेवल के अफसरों की सैलरी काटेगी:ईरान युद्ध के कारण 20% उड़ानें रद्द करने की तैयारी, नॉन-टेक्निकल स्टाफ को छुट्टी पर भेजेगी कंपनी

टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया अपनी लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी में कटौती और उड़ानों की संख्या करीब 20% कम कर सकती है। वर्तमान में एयरलाइन हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है। कंपनी मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण जेट फ्यूल महंगा होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने की वजह से यह कदम उठाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि एयरलाइन पहले से ही घाटे में है और अपने नए CEO की तलाश कर रही है। सभी कर्मचारियों का बोनस भी काट सकती है कंपनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में एयर इंडिया ने नॉन-टेक्निकल कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने और वाइस प्रेसिडेंट या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों की सैलरी में कटौती करने पर चर्चा की। इसके अलावा, सभी कर्मचारियों के बोनस में भी कमी की जा सकती है। एअर इंडिया भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है और इन बदलावों की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है। घाटा बढ़ने की 3 बड़ी वजहें अगले 3 महीने तक उड़ानों की संख्या 20% कम होगी सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया के बोर्ड ने मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों को देखते हुए फ्लाइट ऑपरेशंस में कटौती का प्रस्ताव रखा है। अगले 90 दिन तक एयरलाइन अपनी उड़ानों की क्षमता को 20% से ज्यादा कम कर सकती है। यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक कि मिडिल ईस्ट की स्थिति में सुधार नहीं हो जाता। ईरान जंग के चलते कच्चा तेल 45.5% महंगा हुआ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 45.5% बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% पर कैप कर दिया था। इसके चलते अप्रैल में तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू ATF के दाम सिर्फ 9.2% ही बढ़ाए, लेकिन इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा रही। एयरलाइंस का फ्यूल खर्च 40% से बढ़कर 60% हुआ FIA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेक्टर में फ्यूल की कीमतों के भारी अंतर ने एयरलाइंस के नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर बना दिया है। पहले एयरलाइंस के कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा 40% होता था, जो बढ़कर 60% तक पहुंच गया है। लीडरशिप का संकट और पुराने जख्म एयर इंडिया के सामने यह मुश्किल समय तब आया है जब कंपनी के पास कोई परमानेंट सीईओ (CEO) नहीं है। अप्रैल में कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद से टाटा ग्रुप नए बॉस की तलाश कर रहा है। इसके अलावा, पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव और पुराने विमानों के मेंटेनेंस के खर्च ने भी कंपनी की कमर तोड़ दी है।
भिंडी के साथ इन 5 फूड्स का सेवन कभी न करें, हो सकती हैं ये बड़ी शारीरिक परेशानियां

What do not eat with bhindi: भिंडी का सेवन बड़ों के साथ ही बच्चे भी खूब चाव से करना पसंद करते हैं. इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को अलग-अलग तरीके से लाभ पहुंचाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भिंडी को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ, भिंडी खाने से पहले या बाद में खाने से शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं. आयुर्वेद के अनुसार, एक फूड के अंदर यूनिक नेचर की चीजें होती हैं, जिसे दूसरे नेचर वाले फूड के साथ मिलाकर खाया जाए तो कई तरह की समस्याएं नजर आ सकती हैं. भिंडी को किन-किन फूड्स के साथ नहीं खाना चाहिए या खाने से पहले या खाने के बाद सेवन से परहेज करना चाहिए. इसके बारे में जानकारी दे रहें यूट्यब चैनल Healthy Hamesha डॉ. सलीम जैदी. आप चाहते हैं पाचन तंत्र, पेट आदि की समस्याओं से बचे रहना तो ये जरूरी वीडियो अवश्य देख लें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
इस फल को खाने से दूर होते हैं पेट के कई रोग, त्वचा और बालों को भी रखे हेल्दी, हर दिन करें सेवन, होंगे बड़े फायदे

Papaya Health benefits: पपीता एक स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ पोषण से भरपूर भी होता है. इसमें विटामिन ए, सी, ई, फोलेट, पोटैशियम और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करते हैं. भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इसके नियमित सेवन की सलाह देता है. एक्सपर्ट इसे पेट के लिए बेस्ट फल बताते हैं. पाचन को दुरुस्त रखता है. फाइबर होने के कारण ये पेट साफ करता है. जानिए, पपीता के सेवन से क्या फायदे हो सकते हैं. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त पपीते में मौजूद पेपेन एंजाइम भोजन को आसानी से पचाने में सहायक होता है. इसके सेवन से कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. रोजाना पपीता खाने से पेट साफ रहता है और पाचन तंत्र मजबूत बनता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए इस फल में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है. नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. त्वचा को बनाए चमकदार पपीते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और निखरा हुआ बनाए रखने में मदद करते हैं. यह मुंहासों और दाग-धब्बों को कम करने के साथ त्वचा की बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने में भी सहायक माना जाता है. हड्डियों को करता है मजबूत पपीते में विटामिन के और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों की मजबूती बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. बालों की सेहत के लिए भी उपयोगी पपीता बालों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन ए और ई बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं और रूसी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. पका और कच्चा दोनों रूपों में फायदेमंद आयुष विभाग के अनुसार, पपीते को पके फल के रूप में खाने के अलावा कच्चे रूप में सब्जी बनाकर भी सेवन किया जा सकता है. इसका नियमित सेवन शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ देता है. हालांकि, किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
विजय सरकार पर ग्रहण, सिर्फ 116 विधायकों का समर्थन, कांग्रेस ने बिश्नोई को दिया कोलकाता, कल वीसीके का फैसला

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अंतिम लॉन्च में उठा विवाद वीसीके ने पिछली बार टीवीके के समर्थन को खारिज कर दिया था गवर्नर ने शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा में देरी की कांग्रेस ने अपने शेयरधारकों को शिफ्ट किया तमिलनाडु में चुनाव के बाद शुक्रवार (8 मई, 2026) की देर रात उस वक्त का आकलन किया गया, जब टीवीके चीफ विक्ट्री को शनिवार (9 मई, 2026) को शपथ दिलाई गई, लेकिन आखिरी वक्त में वीसीके मुकर गए। इसके बाद गवर्नर रॉबर्ट अर्लेकर ने आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण की घोषणा में देरी कर दी है। इस बीच दस्तावेज से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी ने अपने पांचों बैच को चेन्नई से बेंगलुरु में स्थानांतरित कर दिया है। सिद्धांत के अनुसार, गवर्नर अर्लेकर अभी भी वीसी के समर्थन पत्र का इंतजार कर रहे हैं। जबकि इससे पहले विजय ने तीन बार नेपोलियन गवर्नर गवर्नर से मुलाकात की और उन्हें 116 बर्चस्व के समर्थन वाले लेखक ने कहा। हालाँकि, अभी भी सरकार के लिए जरूरी बहुमत से 2 का पात्र कम है। इससे पहले कहा जा रहा था कि वीसीके और आईयूएमएल ने टीवीके को समर्थन दे दिया है, जिससे अब विजय गठबंधन का आंकड़ा 121 तक पहुंच गया है। इसी आधार पर शनिवार (9 मई) को सुबह 11 बजे विजय के शपथ लेने की चर्चा थी, लेकिन घटना फिर से बदल गई, जब आईयूएमएल ने टीवीके को समर्थन देने की खबरों का खंडन कर दिया और कहा कि वह डीएमके के साथ ही बने रहेंगे। राज्यपाल समर्थन पत्र बैठक के बाद ही करेंगे शपथ ग्रहण की घोषणा सिद्धांत के अनुसार, पिछले दो घंटे से टीवीके नेता वीसीके प्रमुख थोल। तिरुवालवन से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा है। नोवोस्ती के अनुसार राज्यपाल कार्यालय वीसीके के निष्पक्ष समर्थन पत्र की बैठक के बाद ही शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा की गई। पार्टी शनिवार (9 मई) को टीवीके निर्णय पर समर्थन करेगी। यह भी पढ़ें: ‘नफ़रत के माहौल में मुहब्बत की दुकान का नारा मेरा नहीं’, ऐसा क्यों बोले राहुल गांधी विजय को किस-किस पार्टी का मिला समर्थन? थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (टीवीके) को कांग्रेस, सीपीआई और सीपीआई (एम) का समर्थन मिल गया है। मित्र हैं कि वीसीके, सीपीआई और सीपीआई (एम) पहले डीएमके के सहयोगी रहे हैं। वहीं, शपथ ग्रहण में देरी के पीछे पिछले समय की राजनीतिक डीलबाजी भी बताई जा रही है। एएमएमके पिशाचिनी ने कही हैरान करने वाली बात एएमएमके के प्रमुख टीवी टीवी दिनाकरन ने कहा, ‘मैं एआईएडीएमके का समर्थन कर रहा हूं। मैंने सरकार बनाने के लिए एडप्पादी पलानीस्वामी के समर्थन में यह पत्र निकाला है। हमारे नेता कामराज ने भी इस पर हस्ताक्षर किये हैं और इसे मेरे सचिव के माध्यम से भेजा है। जब मैंने टीवीके देखा, तो मैं आश्चर्यचकित हो गया, क्योंकि वहां कोई दूसरा पत्र नहीं था, शायद कोई नकली पत्र या फिर यह बैच की खरीद-फरोख्त हो सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने विधायक को फोन किया, लेकिन उनका कोई संपर्क नहीं मिला।’ उन्होंने शाम करीब 6:30 बजे इस पत्र पर हस्ताक्षर किए और इसे यहां भेज दिया। जब मैंने टीवी पर देखा कि हमारी पार्टी ने विजय का समर्थन किया है तो मुझे आश्चर्य हुआ। इसलिए मैंने राज्यपाल से मुलाकात का समय लिया और उनसे इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया। मुझे लगता है कि यह फर्जी है या फिर बिक्री-फरोख्त का मामला है। उन्हें इसका कोई दस्तावेज़ नहीं चाहिए।’ यह भी पढ़ें: केरल में अब तक मुख्यमंत्री ने क्यों नहीं लिया फैसला? जीत के बाद वहां कांग्रेस की किच-किच क्या है (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु(टी)टीवीके(टी)थलपति विजय(टी)वीके(टी)सीपीआई पार्टी(टी)सीपीएम पार्टी(टी)सीपीआई(टी)विजय सीएम न्यूज(टी)2026 चुनाव में वीकेसी सीटें(टी)टीवीके नवीनतम समाचार(टी)वीसीके पार्टी तमिलनाडु(टी)टीएन न्यूज(टी)टीवीके सरकार बना रही है(टी)सीपीआई और सीपीएम(टी)तमिलनाडु विजय चुनाव परिणाम(टी)विदुथलाई चिरुथैगल काची(टी)सीपीआई पार्टी(टी)तमिलनाडु(टी)कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया(टी)विजय सीएम(टी)निर्मल कुमार टीवीके(टी)सीपीआई तमिलनाडु(टी)टीवीके गठबंधन समाचार(टी)वीसीके समर्थन टीवीके(टी)भारत कम्युनिस्ट पार्टी(टी)सीपीआई एम(टी)तमिलनाडु(टी)टीवीके(टी) थालपति विजय(टी)वीसीके(टी)सीपीआई पार्टी(टी)सीपीएम पार्टी(टी)सीपीआई(टी)विजय सीएम न्यूज़(टी)2026 चुनाव में वीसीके प्रदर्शन(टी)टीवीके नवीनतम न्यूज़(टी)वीसीके पार्टी टेलीविज़न(टी)टीएन न्यूज़(टी)टीवीके सरकार बन रही है(टी)सीपीआई और सीपीएम(टी)तमिलनाडु विजय चुनाव नतीजे(टी)विदुथलाई चिरुथैगल ला(टी)सीपीआई पार्टी(टी)तमिलनाडु(टी)भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(टी)विजय सीएम(टी)निर्मल कुमार टीवीके(टी)सीपीआई तमिल(टी)टीवीके एलायंस न्यूज(टी)वीसीके समर्थन टीवीके(टी)भारत कम्युनिस्ट पार्टी(टी)सीपीआई एम
Yellow Teeth Remedies: मोती समान चमक उठेंगे पीले-सड़ते दांत, केले के छिलके से करें ये आसान उपाय

Last Updated:May 08, 2026, 23:03 IST Tips To Whiten Teeth Naturally: रोज ब्रश करने के बावजूद भी दांतों पर पीली परत जम रही है, तो केले का छिलका इस्तेमाल करें. इसमें मौजूद औषधि गुण दांतों को चमकाने में मददगार साबित होते हैं. ख़बरें फटाफट साफ-सुथरे चमकते दांत ओरल हाइजीन का अहम हिस्सा है. लेकिन दांतों के पीलेपन को हटाने के लिए कई लोग घरेलू उपायों पर भरोसा करते हैं. केला के छिलके का इस्तेमाल इसमें से ही एक है. माना जाता है कि केले के छिलकों में पोटैशियम जैसे कुछ मिनरल पाए जाते हैं, जो दांतों की ऊपरी सतह पर जमे दाग को हल्का करने में मदद कर सकते हैं. यही वजह है कि कुछ लोग दावा करते हैं कि केले के छिलके को दांतों पर रगड़ने से दांत पहले से ज्यादा साफ और चमकदार दिखाई देने लगते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि केले के छिलके में पोटैशियम की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती. अब तक इस बात के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं मिले हैं कि सिर्फ केले का छिलका दांतों को वास्तव में सफेद बना सकता है. लेकिन कुछ लोगों को इससे हल्का फर्क महसूस हुआ है. केले से चमकाएं पीले दांतअगर आप केले के छिलके से दांत साफ करने का तरीका आजमाना चाहते हैं, तो इसे सही तरीके से करना जरूरी है. इसके लिए सबसे पहले एक पका हुआ केला चुनें. जितना ज्यादा केला पका होगा, उसमें पोटैशियम की मात्रा उतनी ही बेहतर मानी जाती है. अब केले को धीरे से छीलें और उसके अंदर वाले हिस्से को अलग करें. इसके बाद केले के छिलके के अंदर वाले मुलायम हिस्से को अपने दांतों पर करीब दो मिनट तक हल्के हाथों से रगड़ें. कोशिश करें कि दांतों की पूरी सतह पर छिलका अच्छी तरह लगे. दो मिनट बाद मुंह को साफ पानी से धो लें और फिर रोज की तरह टूथब्रश कर लें. इस बात का रखें ध्यानअगर आप इस घरेलू उपाय को अपनाते हैं, तो ध्यान रखें कि एक-दो बार इस्तेमाल करने से तुरंत परिणाम नहीं मिलते. कुछ लोग इसे नियमित रूप से कई दिनों या हफ्तों तक इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. हालांकि, हर व्यक्ति में इसका असर अलग-अलग हो सकता है. ये नेचुरल उपाय भी मददगारकेले के छिलके के अलावा भी दांतों को साफ करने के कुछ दूसरे प्राकृतिक उपाय मौजूद हैं. उदाहरण के लिए, बेकिंग सोडा और पानी मिलाकर पेस्ट बनाया जा सकता है, जो दांतों पर जमा हल्के दाग हटाने में मदद कर सकता है. इसी तरह, पानी में थोड़ा हाइड्रोजन पेरॉक्साइड मिलाकर माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करने से भी दांतों की चमक बढ़ सकती है. डेंटिस्ट से सलाह जरूरी किसी भी घरेलू उपाय का इस्तेमाल करते समय सावधानी बहुत जरूरी है. ज्यादा मात्रा में या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए किसी भी नए उपाय को अपनाने से पहले डेंटिस्ट की सलाह लेना बेहतर माना जाता है. अगर आप ज्यादा साफ, चमकदार और लंबे समय तक असर दिखाने वाले परिणाम चाहते हैं, तो प्रोफेशनल टीथ व्हाइटनिंग बेहतर विकल्प हो सकता है. डेंटिस्ट कई तरह के ट्रीटमेंट देते हैं, जैसे क्लिनिक में ब्लीचिंग या घर पर इस्तेमाल करने के लिए व्हाइटनिंग किट. ये तरीके वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित होते हैं और आपकी जरूरत के हिसाब से तैयार किए जाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
बेल के गूदा से बनेगी कैंसर की सस्ती दवा, पटना के वैज्ञानिकों का दावा, चूहों में ट्यूमर हुआ खत्म, रिसर्च नेचर जर्नल में प्रकाशित

Last Updated:May 08, 2026, 23:01 IST Bael Pulp Breast Cancer: देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है. वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया. शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है. इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. उन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। बिहार की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
सत्तू शरबत रेसिपी: गर्मियों में रोजाना पिएं सत्तू का शरबत, बनाने में आसान, स्वाद में लाजवाब

भुने हुए चने से तैयार होने वाला सत्तू गर्मियों में शरीर के लिए बहुत चमत्कारी होता है। सत्तू की तासीर जरूरी है तो ये पेट की गर्मी और जलन को भी शांत रखने में मदद करती है। छवि: फ्रीपिक सत्तू शरबत की सामग्री- सत्तू, दही, गुड़, नींबू का रस, काला नमक, लाल मिर्च पाउडर, अन्य जीरा और मीठी कटी हरी मिर्च और बर्फ। छवि: फ्रीपिक एक बड़े पोएट्री में 4 माइक्रो सत्तू डालें। फिर इसमें थोड़ा सा ठंडा दही और स्वादिस्ट गुड़ मिक्स कर लें। इस मिश्रण में पानी मशीनरी मशीनरी ग्रेनड कर लें। छवि: एआई इसमें काला नमक, सफेद नमक, जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला, काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस शामिल है। इसके बाद इसे अच्छे तरीके से मिक्स कर लें। छवि: एआई आपका सत्तू का शरबत बनकर तैयार है। बोतल में शरबत को डाल दें। आप इसे ठंडा करके बर्फ के टुकड़े बनाकर भी डाल सकते हैं। छवि: एआई सत्तू में भारी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है जो पेट की गर्मी को शांत करता है और कब्ज से राहत देता है। इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। इस शरीर का तापमान भी सबसे ज्यादा है। छवि: एआई हाई प्रोटीन और साधारण से भरपूर सत्तू आपके पशुचिकित्सक लॉस में भी काफी मदद करता है। इसे पीने के बाद पेट लंबे समय तक भरा रहता है। दिन भर थकान नहीं होती। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं।
वह शनिवार जो नहीं था? जैसे ही विजय के शपथ ग्रहण को लेकर सस्पेंस बढ़ा, हजारों प्रशंसक चेन्नई में फंसे रह गए भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 22:40 IST ऐसी खबरें कि 9 अप्रैल को कोई शपथ ग्रहण समारोह नहीं होगा, विजय समर्थकों के लिए एक परेशान करने वाली बात है। टीवीके के वफादारों के लिए दुख की बात गतिरोध का बेहद कम अंतर है। फ़ाइल छवि चेन्नई की सड़कें, जो शनिवार को ऐतिहासिक “राज्याभिषेक” के लिए तैयार थीं, इसके बजाय भारी, अनिश्चित खामोशी छा गई है। अभिनेता से नेता बने विजय के हजारों समर्थकों के लिए, ऐसी खबरें कि 9 अप्रैल को कोई शपथ ग्रहण समारोह नहीं होगा, एक परेशान करने वाले विरोधी चरमोत्कर्ष के रूप में आई है। चूंकि तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) 117 समर्थकों पर अटकी हुई है – जो जादुई संख्या से केवल एक सीट कम है – सचिवालय के लिए नियोजित भव्य उत्सव को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। चेन्नई के लिए महान यात्रा शुक्रवार के शुरुआती घंटों से, राजधानी की ओर जाने वाली मुख्य सड़कें प्रशंसकों से भरे कार्यकर्ताओं से भरी हुई थीं। कन्याकुमारी, मदुरै और सेलम जैसे दूर-दराज के जिलों से समर्थक विशेष बसों और ट्रेनों में सवार हुए थे, उन्हें विश्वास था कि 9 मई को “थलपति” युग की शुरुआत होगी। शुक्रवार दोपहर तक, ट्रिप्लिकेन में बजट होटल और कोयम्बेडु बस टर्मिनस के पास गेस्ट हाउस कथित तौर पर 100% व्यस्त थे, कई प्रशंसकों ने ईसीआर के पास खुले मैदानों में डेरा डालने का विकल्प चुना। इन शिविरों में जश्न का माहौल था, पोस्टरों में विजय को “नए तमिलनाडु का वास्तुकार” बताया गया था। हालाँकि, जैसे ही राजभवन से खबर आई कि राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने शपथ ग्रहण के लिए निमंत्रण जारी करने से इनकार कर दिया है, खुशी की जगह समाचार फ़ीड की उन्मत्त ताज़ाता ने ले ली। “शनिवार जो नहीं था” ने शहर में अनुमानित पचास हजार आगंतुकों को तार्किक और भावनात्मक असमंजस की स्थिति में छोड़ दिया है। एक आकर्षक संख्या खेल टीवीके के वफादारों के लिए दुख की बात गतिरोध का बेहद कम अंतर है। अपनी खुद की 108 सीटों और कांग्रेस और वाम दलों के अंतिम चरण के समर्थन के साथ, विजय का गठबंधन 117 सीटों तक पहुंच गया। 118वें वोट को सुरक्षित करने में अब तक की विफलता – जो कि विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) से आने की व्यापक उम्मीद थी – ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से रोक दिया है। प्रशंसकों के लिए, भौतिक “118 की सूची” की संवैधानिक आवश्यकता एक राजनीतिक वास्तविकता के बजाय एक नौकरशाही बाधा की तरह महसूस होती है। उनके लिए, सबसे बड़ी पार्टी का जनादेश शनिवार के समारोह को शुरू करने के लिए पर्याप्त होना चाहिए था। टीवीके के जमीनी स्तर के लोग इस देरी को संख्या की विफलता के रूप में नहीं बल्कि स्थापित द्रविड़ दिग्गजों द्वारा एक नवागंतुक को सत्ता की कुर्सी लेने से रोकने के लिए एक रणनीतिक रुकावट के रूप में देख रहे हैं। ख़ाली मंच और क्षीण आशाएँ पनैयुर में टीवीके मुख्यालय और सचिवालय के पास निर्दिष्ट स्थानों पर, आधे-अधूरे चरणों और लुढ़के हुए कालीनों का दृश्य एक छूटे हुए मील के पत्थर की कहानी बताता है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है कि “थलपति” ने स्वयं अपने अनुयायियों से अनुशासन बनाए रखने और शांत रहने का आग्रह किया है, भले ही वीसीके आलाकमान ने अपने मैराथन विचार-विमर्श जारी रखे हैं। नगर प्रशासन की तात्कालिक चिंता अब इस भारी भीड़ को तितर-बितर करना है। जबकि कई प्रशंसकों ने “अंतिम हस्ताक्षर” प्राप्त होने तक रुकने की कसम खाई है, गवर्नर के कार्यालय से एक निश्चित समयरेखा की कमी से पता चलता है कि 2026 के राज्याभिषेक की प्रतीक्षा आने वाले सप्ताह तक बढ़ सकती है। फिलहाल, शनिवार को “ऐतिहासिक दिन” घोषित करने वाले बैनर लटके हुए हैं, जो इस बात की मार्मिक याद दिलाते हैं कि टीवीके सत्ता के गलियारों से कितना करीब है, फिर भी कितना दूर है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वह शनिवार जो नहीं था? जैसे ही विजय के शपथ ग्रहण को लेकर सस्पेंस बढ़ा, हजारों प्रशंसक चेन्नई में फंसे रह गए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)वीसीके(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक
Pahadi Bhatt ki Churkani Recipe: उत्तराखंड की फेमस भट्ट की चुड़कानी की रेसिपी

Last Updated:May 08, 2026, 22:13 IST Pahadi Bhatt ki Churkani Recipe: इसमें कोई दोराय नहीं कि चिकन और मटन में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है. लेकिन शाकाहारी खाना भी कम नहीं है. उत्तराखंड की फेमस भट्ट की चुड़कानी के सामने चिकन-मटक की ताकत भी फीकी पड़ जाती है. यहां जानें इसकी रेसिपी ख़बरें फटाफट उत्तराखंड भारत के ठंडे और बर्फीले इलाकों में से एक है. यहां का खानपान काफी अलग होता है, जो यहां सर्वाइवल के लिए बहुत जरूरी है. यही कारण भी है कि यहां रहने वाले दुबले-पतले लोग भी पहाड़ों पर बिना किसी सहारे भारी बोझ लेकर आसानी से चढ़ उतर जाते हैं. वैसे तो यहां के लोग नॉन वेज डाइट भी लेते हैं. लेकिन यहां खायी जाने वाली दाल भी पोषक तत्वों औ ताकत से भरपूर होती है. हम बात कर रहे हैं, पहाड़ों की पारंपरिक डिश “भट्ट की चुड़कानी” की.उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की यह खास डिश स्वाद और पोषण दोनों का शानदार मेल मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और यह खाने में बेहद सुकून देने वाली होती है. भट्ट की चुड़कानी क्या होती है?भट्ट की चुड़कानी काले भट्ट यानी ब्लैक सोयाबीन से बनाई जाती है. पहाड़ी इलाकों में इसे काफी पसंद किया जाता है. ब्लैक सोयाबीन को पोषण के मामले में सुपरफूड माना जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, फॉलेट, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह डिश सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. सेहत के लिए फायदेमंदब्लैक सोयाबीन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में सहायक होता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है. इसके अलावा यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और वजन नियंत्रित करने में भी मददगार माना जाता है. यही कारण है कि पहाड़ों में लोग इसे पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा मानते हैं. भट्ट की चुड़कानी की खासियत भट्ट की चुड़कानी का असली स्वाद लोहे की कड़ाही में पकाने से आता है. इससे दाल को गहरा रंग और हल्का स्मोकी फ्लेवर मिलता है. साथ ही लोहे की कड़ाही में पकाने से खाने में आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है. अगर आप घर पर चावल के साथ कुछ नया बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आसानी से ट्राई की जा सकती है. भट्ट की चुड़कानी रेसिपी सामग्रीएक कप भट्ट की दाल2-3 बड़े चम्मच गेहूं का आटासरसों का तेलजीराहींगबारीक कटा प्याजहरी मिर्चअदरक-लहसुन का पेस्टहल्दीधनियालाल मिर्चनमकटमाटर विधि– इसे बनाने के लिए सबसे पहले लोहे की कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें भट्ट की दाल डालकर मध्यम आंच पर भूनें.– दाल जब चटकने लगे और उससे सोंधी खुशबू आने लगे, तब समझिए कि वह अच्छी तरह भुन चुकी है. इस दौरान सावधानी रखना जरूरी है, क्योंकि दाल चटककर उछल सकती है.– इसके बाद उसी कड़ाही में गेहूं का आटा डालकर हल्का भूरा होने तक भूनें. फिर अलग से सरसों का तेल गर्म करें और उसमें जीरा, हींग, प्याज, हरी मिर्च और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह भून लें.– प्याज हल्का सुनहरा होने लगे तो उसमें सारे मसाले डाल दें. अगर आप चाहें तो इस समय टमाटर भी मिला सकते हैं.– मसाले तैयार होने के बाद इसमें धीरे-धीरे गर्म पानी डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि आटे की गुठलियां न बनें. ध्यान रखें कि इसमें ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.– आखिर में ऊपर से हरा धनिया डालें और इसे गरमागरम चावल या मंडुवे की रोटी के साथ परोसें सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
क्या विजय बाहरी समर्थन से स्थिर सरकार चला सकते हैं? 3 परिदृश्यों की व्याख्या | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 22:04 IST टीवीके प्रमुख विजय और तमिलनाडु के राज्यपाल के बीच तीसरी मुलाकात के बावजूद राज्य में सरकार गठन पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है. टीवीके प्रमुख विजय. (फ़ाइल) तमिलनाडु अपने राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बन सकता है, क्योंकि दशकों में पहली बार एक गैर-द्रविड़ पार्टी सत्ता में शपथ ले सकती है। कई दिनों की राजनीतिक अनिश्चितता और बातचीत के बाद तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की उम्मीद है। कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई और सीपीआई (एम) से समर्थन मिलने के बाद टीवीके बहुमत का आंकड़ा पार करने में कामयाब रही, जिससे विजय को सत्ता के करीब पहुंचने में मदद मिली। टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास अब 116 सीटें हैं, जो विधानसभा में बहुमत से कुछ ही दूर है। लाइव अपडेट देखें हालांकि टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के लिए अंतिम मंजूरी पर राज्यपाल की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ध्यान इस बात पर जाएगा कि विजय अगले पांच वर्षों के लिए बेहद कम बहुमत वाली गठबंधन सरकार का प्रबंधन कैसे करते हैं। यहां तक कि कुछ विधायकों का विद्रोह भी तमिलनाडु की राजनीति में एक भूकंपीय बदलाव ला सकता है और ‘जन नायकन’ को गंभीर दबाव में डाल सकता है। परिदृश्य 1: सभी दलों के साथ एक स्थिर सरकार गौरतलब है कि तमिलनाडु की ज्यादातर सरकारें स्थिर बनी हुई हैं। वास्तव में, 1952 के बाद से यह तमिलनाडु की पहली त्रिशंकु विधानसभा है। एक गठबंधन में इतने सारे दलों की भागीदारी, जो बहुमत के निशान से थोड़ा आगे है, चुनौतियों का एक सेट प्रस्तुत करता है, लेकिन पुनरुत्थान वाली भाजपा को मैदान से बाहर रखने के लिए सभी दल अब तक एक समान आधार पर हैं। कांग्रेस और वाम दलों के कई नेताओं ने तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता को रोकने, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने और सांप्रदायिक ताकतों को राज्य की राजनीति से दूर रखने की मांग की है। इसके अलावा, विजय को भारी जनमत प्राप्त है और सरकार को पटरी से उतारने के प्रयासों से छोटी पार्टियों को कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ेगी। यह भी पढ़ें: कम बहुमत वाली सरकारें पहले भी गिर चुकी हैं: विजय उन मिसालों को नज़रअंदाज नहीं कर सकते परिदृश्य 2: यदि सभी पार्टियाँ पीछे हट जाएँ तो क्या होगा? किसी बड़ी असहमति की स्थिति में, जिसके कारण गठबंधन में सभी दलों ने टीवीके को अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया, विजय सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या से कम हो जाएंगे और फर्श पर बहुमत साबित करने के लिए मजबूर होंगे। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है और कोई अन्य विकल्प नहीं है, तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत नए चुनावों की घोषणा होने तक राष्ट्रपति शासन लगा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि वाम दलों ने रणनीतिक लचीलेपन का विकल्प चुना है और वे विजय सरकार से पूरी तरह बंधे नहीं हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह कुछ नीतिगत मुद्दों पर द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन करेंगे, जिससे वह कुछ मुद्दों पर टीवीके पर दबाव डाल सकेंगे। परिदृश्य 3: यदि कुछ पार्टियाँ टीवीके से समर्थन वापस ले लेती हैं ऐसी स्थिति में जहां तीन पार्टियों में से कुछ ने टीवीके से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है, विजय को एएमएमके जैसी अन्य पार्टियों से समर्थन के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्हें फिर से शक्ति परीक्षण के दौरान बहुमत साबित करने की आवश्यकता होगी, और ऐसा करने में असमर्थता के कारण राष्ट्रपति शासन लग सकता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : चेन्नई (मद्रास), भारत, भारत न्यूज़ इंडिया क्या विजय बाहरी समर्थन से स्थिर सरकार चला सकते हैं? 3 परिदृश्यों की व्याख्या अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार गठन लाइव अपडेट(टी)तमिलनाडु सीएम गठन 2026(टी)तमिलनाडु नए मुख्यमंत्री(टी)तमिलनाडु सरकार गठन समाचार(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026(टी)तमिलनाडु सीएम शपथ समारोह(टी)तमिलनाडु राजनीतिक समाचार लाइव(टी)तमिलनाडु त्रिशंकु विधानसभा(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)विजय प्रमुख मंत्री (टी) गठबंधन सरकार तमिलनाडु (टी) गैर-द्रविड़ पार्टी की शक्ति (टी) टीवीके गठबंधन बहुमत (टी) राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 (टी) कांग्रेस वाम समर्थन





