प्रिंस ने कोहली को जीरो पर बोल्ड किया:पंत के हाथ से बल्ला छूटा, मार्श ने लखनऊ के लिए सबसे तेज शतक जड़ा; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

IPL में गुरुवार को खेले गए मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 9 रन से हरा दिया। इकाना स्टेडियम में मिचेल मार्श ने लखनऊ के लिए सबसे तेज शतक जड़कर इतिहास रचा। वहीं, युवा गेंदबाज प्रिंस यादव ने विराट कोहली को शून्य पर बोल्ड कर बड़ा झटका दिया। मैच के दौरान ऋषभ पंत के हाथ से बल्ला छूटने वाला मजेदार पल भी देखने को मिला। आइए जानते हैं मैच के खास मोमेंट्स और रिकॉर्ड्स। लखनऊ-बेंगलुरु मैच के टॉप मोमेंट्स 1. मार्श के छक्के से कैमरामैन के सिर पर लगी बॉल लखनऊ की पारी के दूसरे ओवर में मिचेल मार्श ने जोश हेजलवुड की बॉल पर दो छक्के लगाए। उनका दूसरा छक्का बाउंड्री पर मौजूद कैमरामैन के सिर पर जा लगा। हालांकि, चोट ज्यादा नहीं लगी। 2. बारिश के कारण मैच तीन बार रुका 3. पंत के हाथ से बल्ला छूटा, चौका भी मिला 17वें ओवर की तीसरी बॉल पर ऋषभ पंत के हाथ से बल्ला छूट गया। हालांकि, इस बॉल पर उन्हें चौका मिल गया। हेजलवुड की यॉर्कर ऑफ स्टंप के बाहर थी, जिस पर पंत ने जोरदार शॉट खेला। गेंद पॉइंट की ओर चौके के लिए गई, लेकिन शॉट के दौरान उनका बल्ला हाथ से छूटकर लेग साइड में जा गिरा। 4. पंत को जीवनदान, कैच छूटा, बेथेल की उंगली में चोट लगी 17वें ओवर की 5वीं बॉल पर ऋषभ पंत को जीवनदान मिला। जोश हेजलवुड की लो फुल टॉस गेंद पर पंत ने शॉट खेला और गेंद डीप मिडविकेट की ओर गई। बाउंड्री से दौड़ते हुए बेथेल ने कैच पकड़ने की कोशिश की, लेकिन कैच छूट गया। इस दौरान उनकी उंगली चोटिल हो गई और खून निकलने लगा। चोट के बाद उन्हें कुछ समय के लिए मैदान से बाहर जाना पड़ा। 5. कोहली को प्रिंस यादव ने बोल्ड किया दूसरी पारी के दौरान बेंगलुरु ने दूसरे ओवर में दूसरा विकेट गंवाया। विराट कोहली जीरो पर आउट हुए। उन्हें प्रिंस यादव ने बोल्ड किया। करीब 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार की गेंद गुड लेंथ पर ऑफ स्टंप के बाहर पिच हुई। कोहली आगे बढ़कर खेलने गए, लेकिन गेंद अंदर आई और सीधे ऑफ स्टंप से टकराकर स्टंप उखाड़ गई। 6. पाटीदार की छक्के से फिफ्टी 10वें ओवर में कप्तान रजत पाटीदार ने छक्के से फिफ्टी पूरी की। उन्होंने मयंक यादव की दूसरी बॉल पर डीप बैकवर्ड स्क्वैयर लेग के ऊपर छक्का लगाया। अगली बॉल पर उन्होंने 101 मीटर का छक्का जड़ा। यहां से टॉप रिकॉर्ड्स पढ़िए 1. मार्श ने लखनऊ के लिए सबसे तेज शतक लगाया लखनऊ के बल्लेबाज मिचेल मार्श ने बेंगलुरु के खिलाफ मैच में टीम के लिए सबसे तेज शतक लगाया। उन्होंने गुरुवार को इकाना स्टेडियम में सिर्फ 49 गेंदों में सेंचुरी पूरी की। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऋषभ पंत के नाम था। उन्होंने पिछले साल 54 गेंदों में शतक लगाया था। 2. भुवनेश्वर 200 IPL मैच खेलने वाले पहले पेसर बेंगलुरु के भुवनेश्वर कुमार 200 IPL मैच खेलने वाले पहले तेज गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने लखनऊ के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की। भुवनेश्वर 200 मैच खेलने वाले कुल 12वें खिलाड़ी बने हैं। इससे पहले 5 अप्रैल को वे युजवेंद्र चहल के बाद IPL में 200 विकेट लेने वाले दूसरे और पहले तेज गेंदबाज बने थे।
कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की ‘फौज’:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…
कश्मीर में एडवांस हथियारों वाली 1500 विलेज गार्ड्स की फौज:5 जिलों के ग्रामीण जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने गांव स्तर पर सुरक्षा तंत्र काफी मजबूत किया है। पिछलेे एक साल में पांच जिलों में 1500 से ज्यादा विलेज डिफेंस गार्ड्स (वीडीजी) को ट्रेनिंग दी गई है। इसमें हथियार चलाना, टैक्टिकल मूवमेंट, सर्विलांस व इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल है। वहीं, .303 राइफल की जगह एसएलआर, बुलेटप्रूफ जैकेट व वायरलेस कम्युनिकेशन सेट भी दिए जा रहे हैं। ये ग्रामीण सीमाई इलाकों में जवानों के साथ 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। राजौरी के अमित कुमार कहते हैं कि पिछले एक साल में कई बार घुसपैठ की कोशिशें हुईं, पर वीडीजी सदस्यों ने समय रहते सेना और पुलिस को अलर्ट किया। उनके मुताबिक गांव में कोई अजनबी आता है तो लोग तुरंत पहचानकर मूवमेंट की सूचना देते हैं। रात में सुरक्षा बलों के साथ जॉइंट पेट्रोलिंग भी होती है। बदलाव: आतंकी घटनाएं 27.5% घटीं पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं से होने वाली मौतों में लगभग 27.5% की कमी दर्ज की गई है। जहां हमले से पहले वाले साल में कुल 127 मौतें हुई थीं, वहीं पिछले एक साल में यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है। हिंसा का सबसे गहरा असर पर्यटन पर पड़ा है, जिससे पर्यटकों की सालाना संख्या 33 लाख से गिरकर 11.60 लाख रह गई है। पर्यटकों का भरोसा बहाल करने के लिए कई स्तरों पर कोशिशें की जा रही हैं। पुलिस: 50-60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक सर्च ऑपरेशन में 60% इनपुट ह्यूमन इंटेलिजेंस पर आधारित होते हैं। बॉर्डर और पहाड़ी गांवों में स्थानीय लोग और वीडीजीज सदस्य सर्विलांस की पहली परत की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से कई आतंकी वारदात रोकने में सफलता मिली है। अमरनाथ यात्रा: सीएपीएफ की 190 कंपनियां होंगी सुरक्षा में तैनात 3 जुलाई से शुरू होने वाले अमरनाथ यात्रा की तैयारियां के बीच चुनाव ड्यूटी के लिए दूसरे राज्यों में गईं सीएपीएफ की 190 कंपनियां जम्मू-कश्मीर लौटने लगी हैं। ये कंपनियां अगले दो हफ्ते में पहुंच जाएंगी। प्रशासन का फोकस टूरिस्ट लोकेशन और हाईवे की सुरक्षा पर है। हर कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। आतंकियों काे मारने में कामयाबी पिछले साल दिसंबर में सेना ने डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाए। सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जिलों में फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई। फोकस खास तौर पर दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है, जहां इमरजेंसी में सुरक्षा बलों को पहुंचने में वक्त लगता है। डोडा और आसपास के जिलों में महिलाएं भी वीडीजी नेटवर्क से जुड़ी हैं और गांव की सुरक्षा व निगरानी में हिस्सा ले रही हैं। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई। पूरी खबर पढ़ें…
थायराइड कंट्रोल करने का तरीका, हेल्दी फूड चुनें, इन फूड्स से करें परहेज

Last Updated:May 08, 2026, 01:20 IST थायराइड कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे सिर्फ दवाओं से ही नियंत्रित किया जा सके. सही खानपान, नियमित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. चलिए यहां समझते हैं किन फूड्स के सेवन और परहेज से इस बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है. ख़बरें फटाफट थायराइड की समस्या होने पर थकान, बाल झड़ने, मूड स्विंग जैसे लक्षण नजर आते हैं. थायराइड की समस्या आज के समय में बहुत आम हो गई है, खासकर महिलाओं में यह ज्यादा देखी जाती है. यह एक हार्मोन से जुड़ी बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि (जो गले के पास होती है) शरीर के लिए जरूरी हार्मोन या तो बहुत ज्यादा बनाने लगती है या बहुत कम. दोनों ही स्थितियों में शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं, जैसे वजन बढ़ना या घटना, थकान, बाल झड़ना, मूड बदलना और कमजोरी महसूस होना. इस समस्या के बढ़ने का एक बड़ा कारण खराब जीवनशैली है. गलत खानपान, नींद की कमी, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसका मुख्य कारण माने जाते हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ दवाओं से ही थायराइड ठीक हो जाएगा, लेकिन सच यह है कि दवाओं के साथ-साथ सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना भी बहुत जरूरी होता है. अगर खानपान सही न हो, तो दवाओं का असर भी सीमित हो सकता है. थायराइड में क्या खाना चाहिए?– सबसे पहले सब्जियों की बात करें तो लौकी, तोरी, परवल, कद्दू, गाजर, बीन्स और सभी हरी पत्तेदार सब्जियां बहुत अच्छी मानी जाती हैं. ये सब्जियां शरीर के लिए हल्की होती हैं और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालतीं. साथ ही इनमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं.– फलों में अनार, पपीता, सेब, नाशपाती और अमरूद को शामिल किया जा सकता है. ये फल शरीर को विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है.– दालों की बात करें तो मूंग दाल, मसूर दाल और कुल्थी की दाल अच्छी मानी जाती हैं. ये हल्की होती हैं और आसानी से पच जाती हैं. साथ ही इनमें प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है, जो शरीर की मांसपेशियों और ऊर्जा के लिए जरूरी है. थायराइड में क्या नहीं खाना चाहिए?– सबसे पहले गोभी वर्ग की सब्जियां जैसे फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रोकली आदि को सीमित करना चाहिए, क्योंकि ये कुछ मामलों में थायराइड हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं. इसी तरह सोयाबीन और सोया उत्पाद भी कुछ लोगों में समस्या बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करने की सलाह दी जाती है.– फलों में केला, आम, चीकू और अंगूर को ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए. ये फल शुगर और कैलोरी में अधिक हो सकते हैं, जिससे वजन और हार्मोनल बैलेंस पर असर पड़ सकता है. तेल के मामले में बार-बार गर्म किया हुआ तेल बहुत नुकसानदायक होता है.– इसके अलावा मूंगफली का तेल और रिफाइंड तेल का ज्यादा उपयोग भी शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता. ये तेल शरीर में सूजन और अन्य समस्याएं बढ़ा सकते हैं. थायराइड के मरीजों को देसी घी, नारियल तेल और सरसों का तेल सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए.– दालों में राजमा, छोले और सोया चंक्स का ज्यादा सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ये भारी होते हैं और पाचन में समय लेते हैं, जिससे थायराइड के मरीजों को परेशानी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
40 साल की उम्र के बाद नियमित आई टेस्ट क्यों जरूरी? आंखों को सुरक्षित रखने का आसान तरीका

Last Updated:May 07, 2026, 23:50 IST Eyes Health Tips: आंखों की सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. नियमित आई टेस्ट, सही खानपान और अच्छी आदतें अपनाकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है.समय पर जांच ही आंखों की रोशनी बचाने का सबसे अच्छा तरीका है. ख़बरें फटाफट आंखें हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. लेकिन आजकल मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी जैसे गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल और लापरवाही आंखों पर बुरा असर डालते हैं. खासकर 40 साल की उम्र के बाद आंखों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट इस उम्र के बाद नियमित आई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. आई टेस्ट क्यों जरूरी? नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है समय-समय पर नेत्र जांच कराना. इस उम्र के बाद अगर नजर थोड़ी धुंधली हो या पास की चीजें साफ न दिखें, तो लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो सही नहीं है. समय पर जांच कराने से कई गंभीर बीमारियों का पता शुरुआती चरण में ही लग सकता है और उनका इलाज आसान हो जाता है. 40 के बाद आंखों में होने वाले बदलाव40 साल के बाद आंखों में कई बदलाव आना स्वाभाविक है. इस उम्र में पास की चीजें धुंधली दिखना आम समस्या बन जाती है. इसके अलावा ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ये बीमारियां शुरुआत में धीरे-धीरे बढ़ती हैं और इनके स्पष्ट लक्षण तुरंत नजर नहीं आते, इसलिए नियमित जांच बहुत जरूरी हो जाती है. कितनी बार कराएं आई टेस्टविशेषज्ञों के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कम से कम साल में एक बार पूरा नेत्र परीक्षण जरूर कराना चाहिए.अगर किसी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर है या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास है, तो हर छह महीने में एक बार जांच कराना बेहतर होता है. समय पर जांच से बीमारी का पता जल्दी चल जाता है और इलाज आसान हो जाता है. आंखों की देखभाल कैसे करेंआंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आदतें बहुत जरूरी हैं. स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए और मोबाइल या कंप्यूटर का उपयोग सीमित करना चाहिए. हमेशा अच्छी रोशनी में पढ़ना चाहिए और आंखों को आराम देना जरूरी है. इसके साथ ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है. गाजर, पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, बादाम और ब्लूबेरी जैसे फल और सब्जियां आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन ए, सी, ई, ल्यूटिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो आंखों की रोशनी को मजबूत बनाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
ऊपर से सख्त दिखने वाला ये फल गर्मियों में पेट को दे ठंडक, त्वचा के लिए वरदान, जानें इस फ्रूट की अन्य खूबियां

Last Updated:May 07, 2026, 23:41 IST Wood apple health benefits in summer: अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है. जानिए किस तरह से बेल सेहत के लिए है फायदेमंद और गर्मियों में इसे क्यों खाना चाहिए. गर्मियों में बेल के सेवन के फायदे. पुराने समय से बेल यानी बिल्व को घरेलू उपचार का अहम हिस्सा माना जाता रहा है. दादी-नानी के नुस्खों में इसका इस्तेमाल आम था और आज भी यह कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फायदेमंद माना जाता है. आधुनिक लाइफस्टाइल में जहां लोग पाचन, त्वचा और ऊर्जा से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में गर्मियों का सुपर फल बेल इन सभी समस्याओं से बचे रहने के लिए एक नेचुरल विकल्प साबित हो सकता है. पेट और त्वचा के लिए रामबाण है बेल. जानिए इसके अन्य क्या फायदे होते हैं शरीर पर… बेल के सेवन के फायदे (Bael fruit benefits) पाचन तंत्र रखे दुरुस्त अगर आपको गैस, अपच या पेट दर्द जैसी समस्याएं अक्सर परेशान करती हैं, तो बेल का सेवन लाभकारी हो सकता है. खासतौर पर गर्मियों में बेल का शरबत पेट को ठंडक पहुंचाता है और डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है. कब्ज की समस्या में भी इसे उपयोगी माना जाता है. वात और कफ करे संतुलित आयुर्वेद में बेल को ऐसा फल माना गया है जो शरीर में बढ़े हुए वात और कफ दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है. इन दोषों के असंतुलन से शरीर में भारीपन, सुस्ती और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. बेल शरीर को हल्का और संतुलित बनाए रखने में सहायक माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. शुगर और मेटाबॉलिज्म के लिए फायदेमंद आजकल डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. बेल का नियमित सेवन शरीर के शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है. साथ ही यह मेटाबॉलिक एक्टिविटी को बेहतर बनाकर शरीर में ऊर्जा के सही उपयोग में सहायक होता है, जिससे थकान कम महसूस होती है. त्वचा को दे ठंडक और पोषण स्किन केयर में भी बेल काफी उपयोगी माना जाता है. हल्की जलन, इंफ्लेमेशन या रैशेज की समस्या होने पर बेल का गूदा या रस आराम पहुंचा सकता है. यह त्वचा को ठंडक देने के साथ अंदर से पोषण भी देता है, जिससे स्किन हेल्दी और साफ नजर आती है. इम्यूनिटी करे बूस्ट खांसी-जुकाम जैसी मौसमी समस्याओं में भी बेल लाभकारी माना जाता है. इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से बचाव आसान हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
लौकी का पुलाव रेसिपी: गर्मी में पेट का मजा चाहता है लौकी का पुलाव, स्वाद और सेहत दोनों पर पड़ता है असर; बच्चों को भी आती है पसंद

सामग्री: 1 कप बासमती चावल, 1 छोटी लौकी (कद्दूकस हुई), 1 प्याज स्ट्रॉबेरी कटा, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा सा जीरा, 1 तेजपत्ता, 2 लौंग छवि: फ्रीपिक 1 छोटी इलायची, आधा छोटा हल्दी, स्वाद नमक, 2 बड़ा चम्मच घी या तेल, 2 कप पानी, थोड़ा हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले चावल को धोकर करीब 20 मिनट के लिए विलंबित करें। अब कुकर या पैन में घी गरम करें. इसमें जीरा, तेजपत्ता, लौंग और इलायची के टुकड़े टुकड़े भून लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद कटा हुआ प्याज और हरी मिर्च स्टोमनॉल होने तक। अब लोकी इसमें शामिल हो गए और 2-3 मिनट तक महानुभाव से भूल गए। फिर हल्दी और नमक मिश्रण करें। छवि: एआई अब भीगे हुए चावल और बने हुए हाथ से बने मसाले। इसके बाद पानी के उपकरण कुकर का समुद्र तट बंद कर दिया गया। 1-2 शहर आने तक। छवि: एआई जब कुकर का खिलौना निकल जाए, तो पुलाव को पतले हाथों से फुलाएं और ऊपर से हरा धनिया बांधें। छवि: एआई लॉकी बॉडी को ठंडक क्लिनिक में मदद मिलती है। यह पेट को चित्रित करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। गर्मी में डायहाइड्रेशन की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। छवि: सोशल मीडिया कम क्वालिटी में बनने की वजह से यह माना जाता है। लोकी का पुलाव आप दही, रायता, पुदीने की चटनी या पापड़ के साथ सर्व कर सकते हैं। फ़्लोरिडा तो ऊपर से छोटी-छोटी घी-मसाले का स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)लौकी का पुलाव रेसिपी(टी)लौकी का पुलाव(टी)पुलाव रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)लौकी रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)लौकी पुलाव कैसे बनाएं(टी)घर का बना लौकी पुलाव
क्या पोहा अनहेल्दी फूड है? शेफ संजीव कपूर के बयान पर छिड़ी बहस, डाइटिशियन से जानें हकीकत

Last Updated:May 07, 2026, 23:02 IST Poha Healthy or Unhealthy Breakfast: पोहा को आमतौर पर हेल्दी ब्रेकफास्ट माना जाता है, लेकिन मशहूर शेफ संजीव कपूर ने एक हालिया पॉडकास्ट में पोहा को अनहेल्दी बताया है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह के अनुसार पोहा आसानी से पचने वाला फूड है, जो चावल से बनाया जाता है. पोहा को अनहेल्दी नहीं मान सकते. अधिकतर लोगों के लिए पोहा फायदेमंद है. डायबिटीज के मरीजों को पोहा खाने में सावधानी बरतनी चाहिए. शेफ संजीव कपूर ने पोहा को अनहेल्दी बताया है, जिसके बाद इसे लेकर बहस छिड़ गई है. Is Poha Healthy Breakfast or Overrated: देश भर में पोहा को सबसे पसंदीदा ब्रेकफास्ट माना जाता है. इंदौर का पोहा पूरी दुनिया में मशहूर है. पोहा चावल से बनाया जाता है और यह झटपट तैयार होने वाला नाश्ता है. इसे एक हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शन भी समझा जाता है. हाल ही में एक पॉडकास्ट में मशहूर शेफ संजीव कपूर ने कहा “पोहा ओवररेटेड है और यह हेल्दी नहीं है. लोगों को लगता है कि पोहा हेल्दी है, लेकिन यह हेल्दी नहीं है. राइस अगर खराब था, तो पोहा उससे भी ज्यादा खराब हो गया. अगर आपको शुगर स्पाइक्स देखना है, तो नाश्ते में पोहा खा लीजिए. इससे आपका शुगर लेवल सीधे ऊपर जाएगा.” संजीव कपूर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या वाकई पोहा अनहेल्दी है? यूपी के गाजियाबाद स्थित रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया पोहा चावल से बनाया जाता है. सबसे पहले चावल को भिगोया जाता है, फिर उसे भाप देकर दबाया और सुखाया जाता है. इसके बाद चपटे फ्लेक्स के रूप में पोहा तैयार होता है. पोहा एक तरह का प्रोसेस्ड राइस है. इसमें चावल का उपयोग होता है, इसलिए इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. पोहा में थोड़ी मात्रा में फाइबर, आयरन और कुछ बी-विटामिन्स भी पाए जाते हैं. अगर इसे मूंगफली, मटर, प्याज, करी पत्ता और सब्जियों के साथ बनाया जाए, तो इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ जाती है. मूंगफली से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलते हैं, जबकि सब्जियां फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स बढ़ाती हैं. क्या शुगर के मरीज पोहा खा सकते हैं? डाइटिशियन ने बताया कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि कोई खाना ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है. पोहा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 65 से 75 के बीच हो सकता है. इसका मतलब है कि पोहा को ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है. हालांकि यह असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि पोहा के साथ क्या खाया जा रहा है और व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि कैसी है. डायबिटीज के मरीज भी कम मात्रा में पोहा खा सकते हैं. हालांकि वे पोहा बनाते समय उसमें ज्यादा से ज्यादा सब्जियां, मूंगफली या स्प्राउट्स डालें, ताकि प्रोटीन और फाइबर बढ़े. इसके अलावा पोहा के साथ दही या उबला अंडा जैसे प्रोटीन भी लें. ऐसा करने से ब्लड शुगर का असर धीमा हो सकता है. अगर डायबिटीज के किसी मरीज का शुगर लेवल अनकंट्रोल है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही पोहा खाना चाहिए. क्या पोहा वाकई अनहेल्दी है? एक्सपर्ट के मुताबिक पोहा को अनहेल्दी कहना ठीक नहीं है. पोहा एक हल्का और आसानी से पचने वाला फूड है. इसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं. अगर इसे कम तेल में सब्जियों और मूंगफली के साथ बनाया जाए, तो यह हेल्दी ब्रेकफास्ट ऑप्शन है. पोहा को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर खाना चाहिए. सिर्फ किसी एक बयान के आधार पर उसे पूरी तरह खराब या बेकार मान लेना सही नहीं होगा. सही मात्रा, सही कॉम्बिनेशन और एक्टिव लाइफस्टाइल के साथ पोहा खाया जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
तमिल: विजय की पार्टी टीवीके के सभी 108 विधायक छोड़ देंगे, अगर डीएमके या एआईएडीएमके ने उठाया ये कदम

तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिल में त्रिशंकु विधानसभा के बाद सरकार गठन को लेकर सस्पेंस और गहराई जा रही है। विजय की नागालैंड वाली तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) ने गवर्नर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, लेकिन उन्हें बहुमत का जरूरी पात्र (118) साबित करने के लिए कहा गया है। अभिनेता से नेता बने विजय की अवाज वाली तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके) हाल ही में हुई 108 पवित्र कैलाश में सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई है, लेकिन 238 फैजाबाद विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 के आंकड़े अभी भी पीछे हैं। ऐसे में पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 10 और बहुमत के समर्थन की जरूरत है। टीवीके उठाना बड़ा कदम हो सकता है इसी बीच, द्रविड़ मुनेत्र कशगम (एमएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कशगम (एमएमके) के बीच बातचीत की खबरें ने हलचल तेज कर दी है। टीवीके ऑफिसियल के, अगर टीचर्स या आईए डियाके सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पार्टी के सभी 108 नेता पद छोड़ सकते हैं। यह एक बड़ा और आक्रामक राजनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में बदलाव और बढ़ोतरी हो सकती है। असल में, टीवीके को शक है कि एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली टीचर्स और एआईए एमआईके के सामूहिक विजय को सत्य से दूर रखने की रणनीति बनाई जा रही है। इसी के नाम पर स्टालिन ने राजनीतिक निर्णय लेने का विरोध किया और इसके लिए उन्हें अधिकार भी दे दिया। तमिलनाडु में अभी स्थिति बेहद अनिश्चित है, एक तरफ टीवीके बहुसंख्यक कम्युनिस्ट पार्टी की कोशिश है, तो दूसरी तरफ नए गठबंधन की राज्य की राजनीति का अनुपात पूरी तरह से बदल सकता है। टीवीके ने लेफ्ट से मांगा समर्थन टीवीके नेता सी. ए.टी. कुमार ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एम. वीरपांडियन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पी. मुशनगम से मुलाकात कर समर्थन माँगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विजय से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि सत्ता में भागीदारी जरूरी है, ताकि सहयोगी दल-अपने सहयोगियों और सहयोगियों को अपने-अपने काम में लागू कर सकें। कुमार के अनुसार, टीवीके ने वाम आश्रम, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसी) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयू लेवल) को ईमेल और समर्थन पत्र के माध्यम से समर्थन का प्रस्ताव भेजा है। वे भरोसेमंद समर्थकों की पार्टी तमिलनाडु में सरकार बनाने में सफल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके ने जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से कोई संपर्क नहीं किया है और ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। वहीं कांग्रेस ने, जो 5 शेयर बाजार हैं, सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है. कुमार ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. उनका दावा है कि प्रतिष्ठा टीवी के पक्ष में है और इसी आधार पर विजय को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए। (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय(टी)टीवीके प्रमुख(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)जोसेफ विजय(टी)एमके स्टालिन(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन डीएमके सहयोगियों की बैठक(टी)एमके स्टालिन पार्टी का नाम(टी)तमिलनाडु सरकार गठन
तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

Last Updated:May 07, 2026, 21:36 IST Real Watermelon Check Tips: राजधानी पटना में इन दिनों फलों में मिलावट को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. मुंबई में सामने आए ‘तरबूज कांड’ ने इस डर को और गहरा कर दिया है. बता दें कि, मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी के बाद तरबूज खाने से हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे देश में कैमिकल वाले तरबूज को लेकर डर का माहौल बन गया है. भीषण गर्मी में जिस तरबूज को सबसे सुरक्षित और ताजगी देने वाला फल माना जाता है, अब उसी को खरीदने से पहले लोग कई बार सोचने लगे हैं. पहले केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए केमिकल इस्तेमाल की खबरें आती थीं, लेकिन अब तरबूज में भी मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं. पटना फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, थोक बाजार में तो स्थिति सामान्य है, लेकिन खुदरा स्तर पर कुछ विक्रेता तरबूज को अधिक लाल और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी को लेकर मेदांता अस्पताल, पटना की डाइटीशियन प्रिया दुबे और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शाची ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. शाची के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल यदि निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदने की सलाह दी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी फल की सतह पर सफेद या मोटी परत दिखे, तो उसे सीधे खाने के बजाय अच्छी तरह धोना चाहिए. खासकर अंगूर और संतरे जैसे फलों में कीटनाशक अधिक इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से पहले पानी में थोड़ा खाने वाला सोडा मिलाकर साफ करना सुरक्षित रहता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार में बहुत ज्यादा फल खाने से बचना चाहिए और कटे हुए फलों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए. खासतौर पर कई घंटों पहले कटे फल नुकसानदायक हो सकते हैं. यहां तक कि फ्रिज में रखे कटे फल भी चार घंटे के बाद सुरक्षित नहीं माने जाते, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google डाइटीशियन प्रिया दुबे के अनुसार, अगर आप कटा हुआ तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसकी जांच के लिए एक आसान तरीका है. तरबूज के गूदे पर टिश्यू पेपर रखकर हल्का दबाएं. यदि टिश्यू पर हल्का गुलाबी रंग आता है, तो यह सामान्य है. वहीं, अगर गहरा लाल रंग निकलता है, तो इसमें रोडामाइन बी जैसे केमिकल के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है. घर पर जांच के लिए तरबूज का एक टुकड़ा पानी में डालें. यदि पानी हल्का गुलाबी हो, तो फल सामान्य है. लेकिन, अगर पानी तेजी से गहरा लाल हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बिरयानी में भी मिलावट का खतरा है. रंग और स्वाद के लिए इस्तेमाल होने वाले केसर और हल्दी की जगह कुछ लोग सस्ते और हानिकारक केमिकल जैसे मेटानिल येलो का इस्तेमाल करते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और कैंसर तक का कारण बन सकता है. ऐसी मिलावटी बिरयानी की पहचान करने के लिए एक आसान तरीका है. थोड़े से चावल को हाथों में लेकर हल्के से रगड़ें. अगर रंग हल्का पीला दिखे और हाथ धोने पर आसानी से साफ हो जाए, तो यह प्राकृतिक रंग का संकेत है. लेकिन अगर रंग हाथों से चिपका रह जाए और पानी से न उतरे, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है. एक और तरीका यह है कि चावल के कुछ दाने पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. केसर और हल्दी के टुकड़े पानी के नीचे जमे हुए दिखाई देंगे यानी यह सेफ है. अगर चावल से कोई भी रंग नहीं निकलता है तो समझ जाएं कि यह नुकसानदायक है. गर्मी के मौसम में खासतौर पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि सेहत सुरक्षित रह सके. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।





