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तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

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Real Watermelon Check Tips: राजधानी पटना में इन दिनों फलों में मिलावट को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है. मुंबई में सामने आए ‘तरबूज कांड’ ने इस डर को और गहरा कर दिया है. बता दें कि, मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत बिरयानी के बाद तरबूज खाने से हो गई थी. इस घटना के बाद पूरे देश में कैमिकल वाले तरबूज को लेकर डर का माहौल बन गया है. भीषण गर्मी में जिस तरबूज को सबसे सुरक्षित और ताजगी देने वाला फल माना जाता है, अब उसी को खरीदने से पहले लोग कई बार सोचने लगे हैं. पहले केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए केमिकल इस्तेमाल की खबरें आती थीं, लेकिन अब तरबूज में भी मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं.

पटना फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, थोक बाजार में तो स्थिति सामान्य है, लेकिन खुदरा स्तर पर कुछ विक्रेता तरबूज को अधिक लाल और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी को लेकर मेदांता अस्पताल, पटना की डाइटीशियन प्रिया दुबे और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शाची ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

डॉ. शाची के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल यदि निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदने की सलाह दी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी फल की सतह पर सफेद या मोटी परत दिखे, तो उसे सीधे खाने के बजाय अच्छी तरह धोना चाहिए. खासकर अंगूर और संतरे जैसे फलों में कीटनाशक अधिक इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से पहले पानी में थोड़ा खाने वाला सोडा मिलाकर साफ करना सुरक्षित रहता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार में बहुत ज्यादा फल खाने से बचना चाहिए और कटे हुए फलों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए. खासतौर पर कई घंटों पहले कटे फल नुकसानदायक हो सकते हैं. यहां तक कि फ्रिज में रखे कटे फल भी चार घंटे के बाद सुरक्षित नहीं माने जाते, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

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डाइटीशियन प्रिया दुबे के अनुसार, अगर आप कटा हुआ तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसकी जांच के लिए एक आसान तरीका है. तरबूज के गूदे पर टिश्यू पेपर रखकर हल्का दबाएं. यदि टिश्यू पर हल्का गुलाबी रंग आता है, तो यह सामान्य है. वहीं, अगर गहरा लाल रंग निकलता है, तो इसमें रोडामाइन बी जैसे केमिकल के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है. घर पर जांच के लिए तरबूज का एक टुकड़ा पानी में डालें. यदि पानी हल्का गुलाबी हो, तो फल सामान्य है. लेकिन, अगर पानी तेजी से गहरा लाल हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है.

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बिरयानी में भी मिलावट का खतरा है. रंग और स्वाद के लिए इस्तेमाल होने वाले केसर और हल्दी की जगह कुछ लोग सस्ते और हानिकारक केमिकल जैसे मेटानिल येलो का इस्तेमाल करते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और कैंसर तक का कारण बन सकता है.

ऐसी मिलावटी बिरयानी की पहचान करने के लिए एक आसान तरीका है. थोड़े से चावल को हाथों में लेकर हल्के से रगड़ें. अगर रंग हल्का पीला दिखे और हाथ धोने पर आसानी से साफ हो जाए, तो यह प्राकृतिक रंग का संकेत है. लेकिन अगर रंग हाथों से चिपका रह जाए और पानी से न उतरे, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है.

एक और तरीका यह है कि चावल के कुछ दाने पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. केसर और हल्दी के टुकड़े पानी के नीचे जमे हुए दिखाई देंगे यानी यह सेफ है. अगर चावल से कोई भी रंग नहीं निकलता है तो समझ जाएं कि यह नुकसानदायक है. गर्मी के मौसम में खासतौर पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि सेहत सुरक्षित रह सके.

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तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

तरबूज में केमिकल का डर, मुंबई कांड के बाद पटना में अलर्ट, टिश्यू पेपर से करें असली-नकली की पहचान

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पटना फ्रूट वेजिटेबल एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद के अनुसार, थोक बाजार में तो स्थिति सामान्य है, लेकिन खुदरा स्तर पर कुछ विक्रेता तरबूज को अधिक लाल और आकर्षक दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी को लेकर मेदांता अस्पताल, पटना की डाइटीशियन प्रिया दुबे और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शाची ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.

डॉ. शाची के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल यदि निर्धारित मात्रा से अधिक हों, तो इससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हमेशा भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदने की सलाह दी जाती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी फल की सतह पर सफेद या मोटी परत दिखे, तो उसे सीधे खाने के बजाय अच्छी तरह धोना चाहिए. खासकर अंगूर और संतरे जैसे फलों में कीटनाशक अधिक इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें खाने से पहले पानी में थोड़ा खाने वाला सोडा मिलाकर साफ करना सुरक्षित रहता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, एक बार में बहुत ज्यादा फल खाने से बचना चाहिए और कटे हुए फलों को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए. खासतौर पर कई घंटों पहले कटे फल नुकसानदायक हो सकते हैं. यहां तक कि फ्रिज में रखे कटे फल भी चार घंटे के बाद सुरक्षित नहीं माने जाते, क्योंकि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

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डाइटीशियन प्रिया दुबे के अनुसार, अगर आप कटा हुआ तरबूज खरीद रहे हैं, तो उसकी जांच के लिए एक आसान तरीका है. तरबूज के गूदे पर टिश्यू पेपर रखकर हल्का दबाएं. यदि टिश्यू पर हल्का गुलाबी रंग आता है, तो यह सामान्य है. वहीं, अगर गहरा लाल रंग निकलता है, तो इसमें रोडामाइन बी जैसे केमिकल के इस्तेमाल की आशंका हो सकती है. घर पर जांच के लिए तरबूज का एक टुकड़ा पानी में डालें. यदि पानी हल्का गुलाबी हो, तो फल सामान्य है. लेकिन, अगर पानी तेजी से गहरा लाल हो जाए, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है.

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बिरयानी में भी मिलावट का खतरा है. रंग और स्वाद के लिए इस्तेमाल होने वाले केसर और हल्दी की जगह कुछ लोग सस्ते और हानिकारक केमिकल जैसे मेटानिल येलो का इस्तेमाल करते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और कैंसर तक का कारण बन सकता है.

ऐसी मिलावटी बिरयानी की पहचान करने के लिए एक आसान तरीका है. थोड़े से चावल को हाथों में लेकर हल्के से रगड़ें. अगर रंग हल्का पीला दिखे और हाथ धोने पर आसानी से साफ हो जाए, तो यह प्राकृतिक रंग का संकेत है. लेकिन अगर रंग हाथों से चिपका रह जाए और पानी से न उतरे, तो समझ लें कि उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है.

एक और तरीका यह है कि चावल के कुछ दाने पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. केसर और हल्दी के टुकड़े पानी के नीचे जमे हुए दिखाई देंगे यानी यह सेफ है. अगर चावल से कोई भी रंग नहीं निकलता है तो समझ जाएं कि यह नुकसानदायक है. गर्मी के मौसम में खासतौर पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि सेहत सुरक्षित रह सके.

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