Health Tips: आम के साथ दूध, दही या पानी, क्या नहीं मिलाना चाहिए? जानें क्या कहता है आयुर्वेद

Last Updated:May 07, 2026, 14:54 IST आयुर्वेद के अनुसार आम के साथ दूध, दही या तुरंत ठंडा पानी मिलाना पाचन के लिए सही नहीं माना जाता. इससे गैस, एसिडिटी और पाचन कमजोरी की समस्या हो सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है. आइए विस्तार से जानते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही आम का सीजन भी आ जाता है. इस दौरान लोग आम को अलग-अलग रूपों में खाना पसंद करते हैं, खासकर मैंगो शेक, आम की लस्सी और ठंडे ड्रिंक के रूप में इसका खूब सेवन किया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या आम के साथ दूध, दही या पानी मिलाना सही होता है या नहीं. आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है, आइए विस्तार से जानते हैं. Jiva Ayurveda के अनुसार, आयुर्वेद में खाने-पीने के संयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताया गया है, जिसे विरुद्ध आहार कहा जाता है. इसके अनुसार कुछ ऐसे फूड कॉम्बिनेशन होते हैं जो अलग-अलग तो फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन साथ में लेने पर शरीर के दोष यानी वात, पित्त और कफ को असंतुलित कर सकते हैं. इससे पाचन कमजोर हो सकता है और शरीर में विषैले तत्व यानी आम बनने की संभावना बढ़ जाती है. यही कारण है कि कुछ कॉम्बिनेशन को आयुर्वेद में हानिकारक माना गया है. आम और दूध का कॉम्बिनेशनमैंगो मिल्कशेक, भारत में काफी लोकप्रिय है. लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह संयोजन हर स्थिति में सही नहीं माना जाता. खासकर जब आम कच्चा या अधपका हो तो इसका स्वाद खट्टा और गर्म प्रकृति का होता है, जबकि दूध ठंडी और मीठी प्रकृति का होता है. दोनों के गुण एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे पाचन अग्नि यानी अग्नि कमजोर हो सकती है. इससे शरीर में गैस, भारीपन, एसिडिटी और लंबे समय में टॉक्सिन्स बनने की समस्या हो सकती है. हालांकि पूरी तरह पके और मीठे आम के साथ यह संयोजन अपेक्षाकृत कम हानिकारक माना जाता है, लेकिन फिर भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. आम और दहीइसी तरह आम के साथ दही का सेवन भी आयुर्वेद में सही नहीं माना गया है. दही की तासीर अलग होती है और आम की अलग. दोनों मिलकर शरीर में दोषों का असंतुलन पैदा कर सकते हैं. इससे पाचन संबंधी समस्याएं, त्वचा पर रिएक्शन, एलर्जी और कुछ मामलों में सांस से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं. खासकर जिन लोगों को पहले से ही एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या रहती है, उन्हें ऐसे कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए. आम के बाद तुरंत ठंडा पानी पीनाआम के बाद तुरंत ठंडा पानी पीना भी एक आम आदत है, जिसे आयुर्वेद में सही नहीं माना जाता. ठंडा पानी पाचन रसों को कमजोर कर देता है, जिससे आम जैसे भारी और रसीले फल का पाचन ठीक से नहीं हो पाता. इससे किण्वन जैसी प्रक्रिया शुरू हो सकती है और पेट में भारीपन या गैस की समस्या हो सकती है. इसलिए सलाह दी जाती है कि आम खाने के बाद कम से कम 30 से 45 मिनट का अंतर रखें और ठंडे पानी की बजाय सामान्य या गुनगुने पानी का सेवन करें. सबसे जरूरी बातआयुर्वेद किसी को भी मैंगो शेक छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर रहा है, बल्कि एक सवाल पूछ रहा है कि क्या इसे खाने के बाद आपका पाचन आरामदायक रहता है. अगर आपके किसी फेवरेट समर फूड कॉम्बिनेशन को लेने के बाद पेट फूलना, भारीपन या एसिडिटी महसूस हो रहा है, तो ऐसा संकेत हो सकता है कि यह फूड कॉम्बिनेशन आपके लिए सही नहीं है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
Health Tips: क्या गर्मी में हद से ज्यादा पसीना आना बुरा है? यह बीमारी का है संकेत या सेहत की निशानी, जानिए डिटेल

Last Updated:May 07, 2026, 14:37 IST Excess Sweating good or Bad: गर्मी के मौसम में पसीना आना आम बात है. भीषण गर्मी में जैसे ही लोग बाहर निकलते हैं या ज्यादा मेहनत करते हैं उन्हें बहुत तेज पसीना आता है. कुछ लोगों को हद से ज्यादा पसीना निकलता है. ऐसे में सोशल मीडिया पर यह फैलाया जा रहा है कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. पर असली सवाल यह है कि क्या सच में ज्यादा पसीना आना बुरा है या यह हेल्दीपन का संकेत है. यदि आप भी कंफ्यूज हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ें. जैसे ही गर्मी बढ़ती है या हम वर्कआउट करते हैं, पसीना हमारे कपड़ों को भिगो देता है.इससे हमें इरीटेशन होने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर पसीना न आए तो क्या होगा? पसीना आना असल में हमारे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है. यह न केवल हमारे शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है बल्कि अंदर जमी गंदगी को भी बाहर फेंकता है. इसलिए यह बात दिमाग से निकाल लीजिए कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. किसी भी तरह से ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार पसीना आपकी त्वचा को साफ करने से लेकर आपके मानसिक तनाव को कम करने तक में मदद करता है. एक्सपर्ट के मुताबिक धूप में पसीना आना बिल्कुल सामान्य है. बहुत लोग सोचते हैं कि पसीना आना सेहत के लिए खराब है. लेकिन पसीना हमारे शरीर को अंदर से और गर्मी से बचाता है, ये बात बहुत लोगों को पता नहीं होती. पसीना हमारे शरीर को ठंडा रखने का कमाल का तरीका है और ये हमें सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करता है. यह प्रक्रिया सिर्फ पानी निकालने की नहीं है, बल्कि शरीर को बचाने के लिए जरूरी एक जैविक प्रतिक्रिया है. तो चलिए जानते हैं पसीना आने से क्या-क्या फायदे होते हैं. असल में पसीना आना शरीर की एक प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक तौर पर थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है. हमारे शरीर का अंदरूनी तापमान आमतौर पर करीब 98.6°F (37°C) होना चाहिए.
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 14:06 IST नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद भी जारी रहने वाले सोशल-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-फॉरवर्ड जाति संयोजन एक साथ आ रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक समारोह में कैबिनेट का विस्तार किया जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा प्रमुख नितिन नबीन सहित अन्य लोग शामिल हुए। (एक्स) गुरुवार को निशांत कुमार ने आखिरकार अपनी अनिच्छा छोड़ दी और बिहार कैबिनेट में शामिल हो गए. गुरुवार को नीतीश कुमार के बेटे सम्राट चौधरी कैबिनेट में शपथ ली, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया. नए प्रवेशी के अलावा, सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल पर उस जाति संयोजन पर भी करीब से नजर रखी जा रही है जिसे नए मुख्यमंत्री आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लव-कुश मॉडल कैबिनेट विस्तार में लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) आधार का मजबूत होना स्पष्ट है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी थे, जबकि चौधरी कोइरी-कुशवाहा हैं। मुख्यमंत्री के अलावा एनडीए सहयोगियों में कैबिनेट में चार कुर्मी-कोइरी मंत्री हैं- निशांत कुमार, श्रवण कुमार, जेडी (यू) से भगवान सिंह खुशवाहा और आरएलएम से दीपक प्रकाश। हालाँकि, चौधरी सरकार ने भी नीतीश कुमार की तरह ही ईबीसी प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। केदार गुप्ता (कानू), रामा निषाद (मल्लाह), दिलीप जयसवाल और शीला मंडल (धानुक) जैसे नामों के साथ, कैबिनेट का लक्ष्य “मूक मतदाताओं” की आकांक्षाओं को पूरा करना है जो बिहार की आबादी का लगभग 36 प्रतिशत हैं। दलित-फॉरवर्ड संतुलन अधिनियम एनडीए 2.0 में जातिगत गतिशीलता को ठीक करते समय महादलित और पासवान वोट बैंक दोनों को ध्यान में रखा गया है। कैबिनेट में अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और संतोष मांझी (HAM) जैसे प्रमुख चेहरों का लक्ष्य दलितों के व्यापक स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लखेंद्र पासवान और संजय पासवान (एलजेपी-आर) जैसे नेताओं को लाकर पासवान फैक्टर का भी हिसाब लगाया गया है। लेकिन भाजपा के पारंपरिक वोट आधार-अगड़ी जातियों-को भी ध्यान में रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई “प्रतिक्रिया” न हो जैसा कि यूजीसी अधिसूचना के बाद देखा गया था। विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा भूमियार और ब्राह्मणों के पारंपरिक भाजपा कोर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह का समावेश राजपूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। अल्पसंख्यक चेहरा जेडीयू कोटे से जमा खान को शामिल करने का मकसद नीतीश कुमार के धर्मनिरपेक्ष चेहरे को जिंदा रखना है. जेडीयू ने कहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का मतलब यह नहीं होगा कि बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका खत्म हो जाएगी। भाजपा के मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में एक दुर्लभ मुस्लिम चेहरे को सुनिश्चित करना उस संदेश को रेखांकित करना है। कुल मिलाकर, नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद जारी रहने वाले सामाजिक-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-अगड़ी जाति के संयोजन का एक साथ आना राजद के मुस्लिम-यादव (एमवाई) संयोजन के लिए सीधी चुनौती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार कैबिनेट जाति की राजनीति(टी)बिहार एनडीए सरकार(टी)सम्राट चौधरी कैबिनेट(टी)निशांत कुमार शपथ(टी)लव-कुश मॉडल(टी)ईबीसी प्रतिनिधित्व बिहार(टी)दलित वोट बैंक(टी)पासवान समुदाय की राजनीति
egg embryo eating effects on health: मिड डे मील के अंडे में चूजे का भ्रूण: अगर खा लें तो क्या नुकसान हो सकता है? डॉक्टर ने बता दिया

Last Updated:May 07, 2026, 13:53 IST Mid Day Meal embryo in Egg: झारखंड में गोड्डा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील के उबले अंडे में चूजे का भ्रूण मिलने से हंगामा मच गया है. पेरेंट्स ने इसे लेकर अस्पताल में बवाल मचाया और बच्चों की सेहत को होने वाले नुकसान डॉ रमन कुमार ने कहा पकने पर इससे सेहत को नुकसान नहीं होता झारखंड में मिड डे मील के अंडे में निकला भ्रूण, अगर कोई खा ले तो क्या नुकसान हो सकते हैं.. सांकेतिक तस्वीर.. Mid Day Meal Chick embryo: झारखंड के गोड्डा जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को बांटे गए मिड डे मील में चूजे का भ्रूण निकलने से हंगामा मच गया. दर्जनों पेरेंट्स स्कूल में आकर प्रदर्शन करने लगे और बच्चों को खराब खाना परोसने का आरोप लगाया. दरअसल बच्चों को खाने में उबला अंडा दिया गया था. जब एक बच्चे ने अंडा फोड़ा तो उसमें चूजे का हिस्सा जैसा दिखाई दिया.पेरेंट्स का कहना था कि सिर्फ एक ही नहीं बल्कि बच्चों को दिए गए कई अंडों में भ्रूण बन रहा था. मिड डे मील की गुणवत्ता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है, लेकिन अंडे में भ्रूण निकलने का यह पहला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है. पेरेंट्स इस भ्रूण वाले अंडे से बच्चों की सेहत को खतरा होने का आरोप लगा रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई चूजे का भ्रूण अगर बच्चे खा लेते तो उनकी सेहत को नुकसान हो सकता था? क्या इससे कोई गंभीर बीमारी हो सकती थी? यह कितना खतरनाक है? इसे लेकर आइए फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. रमन कुमार से जानते हैं… डॉ. रमन कुमार ने बताया कि आमतौर पर जो अंड़े खाए जाते हैं, उनमें जीव पैदा करने की क्षमता नहीं होती है, लेकिन यह अंडा कैसे फर्टाइल हुआ और इसमें कैसे भ्रूण पनपा, या यह अंडा मिड डे मील में कैसे आया यह तो प्रशासनिक जांच का विषय है, लेकिन अगर मेडिकल नजरिए से देखें तो अगर यह भ्रूण पक गया था और इसे बच्चे खा लेते तो इससे हेल्थ को कोई नुकसान नहीं होता. डॉ. रमन कहते हैं कि यह अपने आप में पहला मामला है लेकिन जो बच्चे घरों में अंडा और चिकन खाते हैं, अगर वे इसे भी खाते तो स्वास्थ्य पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इसे न खाने या इसका विरोध करने के अन्य पहलू हो सकते हैं. वहीं इस भ्रूण से संक्रमण होने के सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि मिड डे मील हो या कहीं और मिलने वाला भोजन हो, अगर उसे बनाने के दौरान सही नियमों का पालन नहीं किया गया है और साफ-सफाई व अन्य चीजों का ध्यान नहीं रखा गया है, पानी ठीक इस्तेमाल नहीं किया गया है तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है. जो लोग चिकन नहीं सिर्फ अंडा खाते हैं… कुछ लोग सिर्फ अंडा खाते हैं लेकिन मीट या चिकन नहीं खाते हैं तो ऐसी स्थिति में अगर किसी के उबले अंडे में भ्रूण निकलता है तो वह बर्दाश्त करना मुश्किल होता है. ये भी एक वजह हो सकती है कि पेरेंट्स विरोध कर रहे हों. या हो सकता है कि उस अंडे की क्ववालिटी ही खराब हो. विदेशों में खाते हैं बलूत और भ्रूण बता दें कि चीन, इंडोनेशिया और कोरियाई देशों में लोग मुर्गी या बत्तख के अंडों में पनपे भ्रूण को खाते हैं. भ्रूण पनप चुके अंडों को बलूत बोला जाता है. वहां लोग अंडों को बिना छीले भी खा जाते हैं. हालांकि भारत में ऐसा नहीं पाया जाता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
भूत बंगला के मेकर्स पर नॉन पेमेंट के आरोप:दावा- वेंडर्स के 48 लाख रुपए बकाया, बालाजी टेलीफिल्म्स ने आरोपों को किया खारिज

कुछ वेंडर्स ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला के मेकर्स पर पेमेंट न करने का आरोप लगाया है। दावा है कि वेंडर्स के फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स पर 48 लाख रुपए बकाया हैं। ये दावे तब सामने आए हैं, जब एकता कपूर फिल्म की सक्सेस का जश्न मनाते हुए खुशी जाहिर कर रही हैं। मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार, भूत बंगला में काम करने वाले वेंडर्स ने कहा है कि पेमेंट कई महीनों से फंसी हुई हैं। एक बार जब फिल्म रिलीज हो जाती हो तो पैसे मिलना मुश्किल होता है। 90 दिनों में पेमेंट क्लियर होना, अब पुरानी बात हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स ने दो वेंडर्स की पेमेंट नहीं की है। प्रोडक्शन हाउस को एक वेंडर को 30 लाख और दूसरे वेंडर को 18 लाख रुपए देने हैं। कई महीनों से अपने 18 लाख का इंतजार कर रहे एक वेंडर ने नाराजगी जाहिर कर कहा है कि ऐसी बड़ी बजट की फिल्मों में ऐसा होना स्थिति के और खराब होने का संकेत है। राइटर ने भी लगाए नॉन पेमेंट के आरोप वेंडर्स के अलावा फिल्म के राइटर प्रांजल कृपलानी ने भी प्रोड्यूसर आलोक कुमार चौबे और संजय गुप्ता को 50 हजार रुपए की पेमेंट रोकने पर लीगल नोटिस भेजा था। पोर्टल से बात करते हुए एक क्रू मेंबर ने ये भी कहा है कि जनवरी में भोपाल में हुई शूटिंग के समय प्रोड्यूसर के पास फंड कम पड़ गया था। तब उन्हें जिन होटलों में ठहराया गया था, वहां की भी पेमेंट लंबे समय तक नहीं हो सकी, जिससे क्रू को पेमेंट पूरी होने तक वहीं रोककर रखा गया था। रिपोर्ट में बालाजी टेलीफिल्म्स के हवाले से वेंडर्स के इन दावों को खारिज किया गया है। प्रोडक्शन टीम का कहना है कि सिर्फ भूत बंगला ही नहीं बल्कि प्रोडक्शन के सभी प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों की कॉन्ट्रैक्ट में लिखी गई पेमेंट क्लियर हो चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर भूत बंगला ने कमाए 232 करोड़ अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड 232 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। हाल ही में फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के साथ तस्वीरें शेयर कर उन्हें इस प्रोजेक्ट की सक्सेस का श्रेय देते हुए धन्यवाद कहा है।
भूत बंगला के मेकर्स पर नॉन पेमेंट के आरोप:दावा- वेंडर्स के 48 लाख रुपए बकाया, बालाजी टेलीफिल्म्स ने आरोपों को किया खारिज

कुछ वेंडर्स ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला के मेकर्स पर पेमेंट न करने का आरोप लगाया है। दावा है कि वेंडर्स के फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स पर 48 लाख रुपए बकाया हैं। ये दावे तब सामने आए हैं, जब एकता कपूर फिल्म की सक्सेस का जश्न मनाते हुए खुशी जाहिर कर रही हैं। मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार, भूत बंगला में काम करने वाले वेंडर्स ने कहा है कि पेमेंट कई महीनों से फंसी हुई हैं। एक बार जब फिल्म रिलीज हो जाती हो तो पैसे मिलना मुश्किल होता है। 90 दिनों में पेमेंट क्लियर होना, अब पुरानी बात हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स ने दो वेंडर्स की पेमेंट नहीं की है। प्रोडक्शन हाउस को एक वेंडर को 30 लाख और दूसरे वेंडर को 18 लाख रुपए देने हैं। कई महीनों से अपने 18 लाख का इंतजार कर रहे एक वेंडर ने नाराजगी जाहिर कर कहा है कि ऐसी बड़ी बजट की फिल्मों में ऐसा होना स्थिति के और खराब होने का संकेत है। राइटर ने भी लगाए नॉन पेमेंट के आरोप वेंडर्स के अलावा फिल्म के राइटर प्रांजल कृपलानी ने भी प्रोड्यूसर आलोक कुमार चौबे और संजय गुप्ता को 50 हजार रुपए की पेमेंट रोकने पर लीगल नोटिस भेजा था। पोर्टल से बात करते हुए एक क्रू मेंबर ने ये भी कहा है कि जनवरी में भोपाल में हुई शूटिंग के समय प्रोड्यूसर के पास फंड कम पड़ गया था। तब उन्हें जिन होटलों में ठहराया गया था, वहां की भी पेमेंट लंबे समय तक नहीं हो सकी, जिससे क्रू को पेमेंट पूरी होने तक वहीं रोककर रखा गया था। रिपोर्ट में बालाजी टेलीफिल्म्स के हवाले से वेंडर्स के इन दावों को खारिज किया गया है। प्रोडक्शन टीम का कहना है कि सिर्फ भूत बंगला ही नहीं बल्कि प्रोडक्शन के सभी प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों की कॉन्ट्रैक्ट में लिखी गई पेमेंट क्लियर हो चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर भूत बंगला ने कमाए 232 करोड़ अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड 232 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। हाल ही में फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के साथ तस्वीरें शेयर कर उन्हें इस प्रोजेक्ट की सक्सेस का श्रेय देते हुए धन्यवाद कहा है।







