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सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर अटकलों पर मेकर्स ने अपडेट जारी किया है। सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है। आधिकारिक बयान में साफ किया गया कि ‘स्पिरिट’ तय समय पर ही रिलीज होगी। मेकर्स के मुताबिक, ‘स्पिरिट’ 5 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। प्रोडक्शन टीम ने बताया कि फिल्म का काम प्लान के अनुसार आगे बढ़ रहा है। रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि प्रभास की यह फिल्म सलमान खान की Eid 2027 पर रिलीज होने वाली फिल्म SVC63 (वर्किंग टाइटल) से क्लैश कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा था कि मेकर्स बॉक्स ऑफिस टकराव से बचने के लिए ‘स्पिरिट’ को दिसंबर 2027 तक पोस्टपोन करने पर विचार कर रहे हैं। अब मेकर्स के बयान के बाद साफ है कि फिल्म तय तारीख पर ही रिलीज होगी। ‘स्पिरिट’ को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे पैन-वर्ल्ड एक्शन एंटरटेनर बताया जा रहा है। फिल्म में प्रभास लीड रोल में नजर आएंगे। निर्देशन की कमान संदीप रेड्डी वांगा संभाल रहे हैं। इससे पहले संदीप और निर्माता भूषण कुमार की जोड़ी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी है। फिल्म में तृप्ति डिमरी, विवेक ओबेरॉय और ऐश्वर्या देसाई भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘स्पिरिट’ को 8 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

सलमान से टकराएंगे प्रभास, ‘स्पिरिट’ पर आया बड़ा अपडेट:ईद वीकेंड मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हुई, दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों पर इंडस्ट्री की नजरें टिकीं

साउथ सुपरस्टार प्रभास की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर अटकलों पर मेकर्स ने अपडेट जारी किया है। सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ सकती है। आधिकारिक बयान में साफ किया गया कि ‘स्पिरिट’ तय समय पर ही रिलीज होगी। मेकर्स के मुताबिक, ‘स्पिरिट’ 5 मार्च 2027 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। प्रोडक्शन टीम ने बताया कि फिल्म का काम प्लान के अनुसार आगे बढ़ रहा है। रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि प्रभास की यह फिल्म सलमान खान की Eid 2027 पर रिलीज होने वाली फिल्म SVC63 (वर्किंग टाइटल) से क्लैश कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा था कि मेकर्स बॉक्स ऑफिस टकराव से बचने के लिए ‘स्पिरिट’ को दिसंबर 2027 तक पोस्टपोन करने पर विचार कर रहे हैं। अब मेकर्स के बयान के बाद साफ है कि फिल्म तय तारीख पर ही रिलीज होगी। ‘स्पिरिट’ को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे पैन-वर्ल्ड एक्शन एंटरटेनर बताया जा रहा है। फिल्म में प्रभास लीड रोल में नजर आएंगे। निर्देशन की कमान संदीप रेड्डी वांगा संभाल रहे हैं। इससे पहले संदीप और निर्माता भूषण कुमार की जोड़ी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी है। फिल्म में तृप्ति डिमरी, विवेक ओबेरॉय और ऐश्वर्या देसाई भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘स्पिरिट’ को 8 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए गन्ने का जूस पीना फायदेमंद? डाइटिशियन से जान लीजिए

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Last Updated:May 06, 2026, 18:12 IST Sugarcane Juice and Diabetes: गर्मियों में गन्ने के रस को डिहाइड्रेशन का किंग माना जाता है. गन्ने का जूस प्राकृतिक शुगर से भरपूर होता है, जो डायबिटीज मरीजों का ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है. डाइटिशियन की मानें तो शुगर के मरीजों को गन्ने का रस सीमित मात्रा और एक्सपर्ट की सलाह से ही पीना चाहिए. शुगर के मरीजों को गन्ने का रस बेहद कम मात्रा में ही पीना चाहिए. Can Diabetics Drink Sugarcane Juice: गर्मियों के मौसम में ठंडा-ठंडा गन्ने का जूस पीकर बड़ी राहत मिलती है. अक्सर सड़क किनारे गन्ने का जूस आसानी से मिल जाता है और लोग इसका जमकर आनंद लेते हैं. गन्ने का जूस स्वादिष्ट होता है और इसे पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है. गन्ने का जूस शरीर को ठंडक देता है और इसे पीकर लोग तरोताजा महसूस करते हैं. अधिकतर लोग गन्ने का जूस मजे से पीते हैं, लेकिन जब बात डायबिटीज के मरीजों की आती है, तो जेहन में कई सवाल आने लगते हैं. क्या गन्ने का जूस शुगर के मरीजों के लिए सुरक्षित है? इस बारे में एक्सपर्ट से हकीकत जान लेते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया गन्ने के जूस में नेचुरल शुगर होती है, जिससे यह शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है. इस जूस में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कुछ एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं, जो सामान्य लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. हालांकि डायबिटीज के मरीजों के लिए इसकी नेचुरल शुगर समस्या बन सकती है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है. गन्ने के जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा ज्यादा होता है. यह खून में शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है. जिन लोगों का शुगर लेवल अनकंट्रोल है, उन्हें गन्ने का जूस अवॉइड करना चाहिए. एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज के जिन मरीजों का शुगर लेवल कंट्रोल में है, वे कम मात्रा में कभी-कभीर गन्ने का जूस पी सकते हैं. इससे शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आएगा. इसके अलावा बाजार में मिलने वाले गन्ने के जूस की साफ-सफाई भी एक बड़ा मुद्दा है. कई बार जूस बनाने में इस्तेमाल होने वाला पानी या मशीन साफ नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. डायबिटीज के मरीजों की इम्यूनिटी पहले से कमजोर हो सकती है, इसलिए उन्हें बाहर का जूस पीने में सावधानी बरतनी चाहिए. डाइटिशियन की सलाह यही है कि डायबिटीज के मरीज गन्ने के जूस को नियमित डाइट का हिस्सा न बनाएं. अगर पीना हो तो बहुत सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से ही लें. डायबिटीज के मरीज गन्ने के जूस की जगह ऐसी ड्रिंक्स पी सकते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करें. शुगर के मरीज बिना चीनी वाला नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, ग्रीन टी और बिना चीनी की हर्बल टी पी सकते हैं. इसके अलावा सब्जियों का जूस जैसे करेला, टमाटर या खीरा जूस भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इनमें शुगर कम होती है और पोषक तत्व भरपूर होते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

वर्ष 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 489 में से 364 पर कब्ज़ा जमाया था और उसका वोट शेयर करीब 45% था। यह वह दौर था जब एक विचारधारा पार्टी पूरे देश की साक्षात् मूर्ति पर थी। लेकिन आज 70 साल बाद, वामपंथी कांग्रेस चार राज्यों की सरकार से सीमेन्ट तक जा पहुंची है। कभी देश की दिशा और दशा करने वाली यह 140 साल पुरानी पार्टी की गिनती अब आखिरी सांसों में हो रही है या यह एक नई शुरुआत का इंतजार है? 400 से अधिक सबसे पवित्र कैथोलिक गांव-गांव उपनगरीय कांग्रेस कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुसार नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेताओं को तैयार किया। 1952 से 2014 के बीच करीब 50 साल तक सबसे ज्यादा समय तक पार्टी ने केंद्र की सत्ता संभाली। 1984 के चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 400 से अधिक वोट मिले। यह वह समय था जब कांग्रेस का जनाधार हिंदू बहुसंख्यक समाज से लेकर अल्पसंख्यकों और ईसाई समुदाय तक का विघटन हुआ था। पार्टी का संगठन गांव-गांव तक मजबूत था और ‘कांग्रेस व्यवस्था’ नाम से एक संपूर्ण व्यवस्था व्यवस्था थी। कांग्रेस पार्टी की शुरुआत कब और कैसे हुई? मान्यताओं का मानना ​​है कि कांग्रेस का वास्तविक पतन 1989 के बाद शुरू हुआ, जब वह केंद्र की पूर्ण बहुमत की सत्ता से बाहर हो गई और उसे गठबंधन की राजनीति पर अविश्वास प्रस्ताव मिला। संगठन के आरोप, संगठन में आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय आश्रमों के उदय ने पार्टी की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया। फिर 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस का तख्तापलट हो गया और वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गईं, जबकि उनका वोट शेयर 19.3% रह गया था। 2019 में मामूली सुधार के बाद 2024 में पार्टी ने 99 सीटें और 21.26% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन फिर भी वह मोदी लहर के आगे बौनी साबित हुई। असली हकीकत: सिर्फ 4 राज्यों की सरकार 2026 की ताजा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में ही अपनी सरकार है। 2026 के चुनाव में केरल में बड़ी जीत के बाद, कांग्रेस को अब तीन दक्षिण राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के अलावा उत्तर भारत में सिर्फ हिमाचल प्रदेश की सत्ता हासिल है। झारखंड में वह झामुमो के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है, लेकिन वहां नेतृत्व रसेल सोरेन के पास है। बिहार और तमिल जैसे राज्यों में पार्टी या तो छोटे सहयोगियों की भूमिका है या पूरी तरह से हाशिए पर है। वहीं, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार या तो खत्म हो चुका है या बेहद कमजोर है। कांग्रेस के पांच बड़े कारण क्या हैं? कांग्रेस के पतन को किन्हीं एक-दो कारणों से नहीं समझा जा सकता है, इसके पीछे एक सु-संयुक्त लोकोमोटिव प्रक्रिया है: आदर्श नेतृत्व और मार्गदर्शन कलह: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को 95वीं बहुमत से हार का सामना करना पड़ रहा है। आंतरिक गुटबाजी और हाईकमैन का ग्राउंड स्ट्रिप से कटाव पार्टी लगातार खराब हो रही है। आपदा का संकट: भाजपा ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के रूप में पेश किया, जिससे हिंदू बहुल मुस्लिमों का विश्वास खोद दिया गया। भाजपा का उदय और ध्रुवीकरण: 2014 के बाद कांग्रेस को उत्तर भारत में किसी भी तरह से गठबंधन में डायरेक्ट सीट नहीं मिली, क्योंकि बीजेपी धार्मिक आधार पर मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रही है। दल-बदल और पार्टी छोड़ने का नारा: 2014 के बाद सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। यह रुझान 2017 से 2021 के बीच अपने चरम पर था। गठबंधन की राजनीति में विश्वास: इंडिया अलायंस के सहयोगी दल, नैयर वह सैद्धांतिक कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कि एकजुटता एकता खत्म हो गई है। तो क्या ख़त्म होने वाली है कांग्रेस पार्टी? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है. हालांकि इंडिया गठबंधन सिर्फ 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच गया है और कई बीजेपी नेता इसे ‘केरल के बाहर न के बराबर’ बता रहे हैं। इसके बावजूद राजनीति में भविष्यवाणी करना मुश्किल है। 2024 के आम चुनाव में मिल 99 ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में अभी भी लड़ने की ताकतें बाकी हैं। दक्षिण भारत में पार्टी का जबरदस्त प्रभाव और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी पार्टियों ने जोश भरा है। लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में वह इस बात पर अड़े हुए हैं कि अपनी योजनाओं को कितनी जल्दी दूर किया जाए। कांग्रेस को एक मजबूत संगठन खड़ा करना, जातिगत और क्षेत्रीय ग्राफों को फिर से साधना और एक स्पष्ट परिभाषा तय करना होगा। ये वे कलाकार हैं जो राष्ट्रवादी पार्टी में शामिल होंगे। अगर यह कांग्रेस कर पाती नाकाम रही, तो इतिहास की कहानी में अपनी कहानी एक ‘हरे अतीत’ तक सीमेन्ट कर रहेगी।

‘भ्रष्ट लोगों ने पार्टी पर कब्ज़ा कर लिया’: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर टीएमसी नेताओं की ममता से राय | भारत समाचार

SRH vs PBKS Live Score, IPL 2026: Follow match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 17:57 IST जवाहर सरकार ने कहा है कि पार्टी पर “भ्रष्ट लोगों ने कब्ज़ा कर लिया है” और केवल बाहरी कारकों के बजाय आंतरिक मुद्दों ने चुनावी हार में योगदान दिया। पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार। (पीटीआई फाइल फोटो) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर आंतरिक असंतोष सामने आया है, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने खुलेआम पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व निर्णयों पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने कहा है कि पार्टी पर “भ्रष्ट लोगों ने कब्जा कर लिया है” और केवल बाहरी कारकों के बजाय आंतरिक मुद्दों ने चुनावी हार में योगदान दिया। समाचार एजेंसी के साथ एक साक्षात्कार में पीटीआईसरकार ने अपने “वायरल” इस्तीफे पत्र का उल्लेख किया, जो उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के साथ-साथ संस्थान से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पिछले सितंबर में राज्यसभा सांसद के रूप में पद छोड़ने के बाद सौंपा था। उन्होंने पार्टी ढांचे के भीतर गहरे विभाजन का संकेत देते हुए कहा, “मेरा इस्तीफा पत्र वायरल हो गया। मैंने भ्रष्टाचार, दादागिरी सूचीबद्ध की, ममता ने कहा कि यह प्रचार है; कुछ नापाक पार्टी नेता, एक क्विज मास्टर है, जिसने कुछ नहीं किया है, उसके पास अनुचित शक्ति है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘पार्टी पर भ्रष्ट लोगों का कब्जा’: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर टीएमसी नेताओं की ममता से राय अलग अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक असंतोष(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी चुनावी हार(टी)जवाहर सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप(टी)ममता बनर्जी नेतृत्व(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी का उदय(टी)टीएमसी आंतरिक संघर्ष(टी)चुनाव आयोग विवाद

तमिलनाडु का नंबर गेम बना नर्वस गेम: टीवीके-कांग्रेस गठबंधन कमजोर होने पर राज्यपाल क्या कर सकते हैं? | भारत समाचार

SRH vs PBKS Live Score, IPL 2026: Follow match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 17:38 IST त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में, राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत ‘स्थितिजन्य विवेक’ का प्रयोग करते हैं तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, बुधवार, 6 मई, 2026 को चेन्नई के लोक भवन में एक बैठक के दौरान तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय के साथ। छवि/पीटीआई तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल उन रिपोर्टों के बाद संवैधानिक गतिरोध पर पहुंच गया है कि राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के नेता विजय द्वारा प्रस्तुत समर्थन आंकड़ों से “आश्वस्त नहीं” हैं। जबकि टीवीके-कांग्रेस गठबंधन ने प्रशासन पर दावा किया है, इसकी 112 सीटों की वर्तमान संख्या – जिसमें टीवीके से 107 और कांग्रेस से पांच शामिल हैं – 234 सदस्यीय विधानसभा में महत्वपूर्ण 118 सीटों वाले बहुमत के निशान से छह कम है। इस घाटे ने चुनावी जनादेश से लेकर राजभवन की विवेकाधीन शक्तियों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, क्योंकि राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों को खंडित विधायी अंकगणित के विरुद्ध तौलते हैं। त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ क्या हैं? त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में, जहां किसी एक पार्टी या चुनाव पूर्व गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत “स्थितिजन्य विवेक” का प्रयोग करते हैं। राज्यपाल का प्राथमिक कर्तव्य एक ऐसे मुख्यमंत्री को नियुक्त करना है, जो उनके आकलन के अनुसार, सदन का विश्वास हासिल करने की सबसे अधिक संभावना रखता हो। यह महज़ गणितीय अभ्यास नहीं बल्कि गुणात्मक निर्णय है। राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी के नेता, चुनाव पूर्व गठबंधन के नेता या चुनाव बाद गठबंधन के नेता को आमंत्रित करना चुन सकते हैं। वर्तमान चेन्नई गतिरोध में, राज्यपाल इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या विजय के 112 सीटों वाले ब्लॉक के पास सरकार बनाए रखने के लिए आवश्यक “स्थिर” समर्थन है, या क्या दावा अनिश्चित राजनीतिक नींव पर आधारित है। क्या राज्यपाल शारीरिक परेड या शक्ति परीक्षण की मांग कर सकते हैं? राज्यपाल को पद की शपथ दिलाने से पहले समर्थन के दावों को सत्यापित करने का अधिकार है। जबकि ऐतिहासिक एसआर बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) फैसले ने स्थापित किया कि विधानसभा का फर्श बहुमत साबित करने का एकमात्र स्थान है, राज्यपाल उस प्रक्रिया के द्वारपाल के रूप में कार्य करता है। वह टीवीके-कांग्रेस गठबंधन से छह सीटों के अंतर को पाटने के लिए स्वतंत्र उम्मीदवारों या छोटे दलों से समर्थन के हस्ताक्षरित पत्र प्रदान करने के लिए कह सकते हैं। यदि राज्यपाल दस्तावेजी सबूतों से असहमत रहते हैं, तो वह नियुक्ति के बाद समयबद्ध फ्लोर टेस्ट पर जोर दे सकते हैं। हालाँकि, यदि कोई भी समूह 118 के जादुई आंकड़े तक स्पष्ट रास्ता नहीं दिखा पाता है, तो राज्यपाल संभावित खरीद-फरोख्त को रोकने के लिए सरकार बनाने के निमंत्रण में देरी करने के अपने अधिकार में हैं। यदि संवैधानिक गतिरोध बना रहता है तो क्या होगा? यदि राज्यपाल यह निर्धारित करता है कि कोई भी पार्टी या गठबंधन स्थिर प्रशासन बनाने की स्थिति में नहीं है, तो वह अनुच्छेद 356 के तहत भारत के राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेज सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, जिससे विधानसभा प्रभावी रूप से निलंबित स्थिति में आ सकती है। इस तरह के कदम को आम तौर पर अंतिम उपाय माना जाता है, क्योंकि राज्यपाल का संवैधानिक जनादेश लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के लिए हर संभव रास्ता तलाशना है। विजय के 107+5 फॉर्मूले की वर्तमान जांच से पता चलता है कि राजभवन यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरत रहा है कि कोई भी आमंत्रित प्रशासन अपने पहले विधायी सत्र के दौरान ढह न जाए, जिससे राज्य में और अस्थिरता पैदा हो जाएगी। क्या राज्यपाल के वर्तमान रुख के लिए कोई मिसाल है? भारतीय संघवाद का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां राज्यपाल का विवेक सत्ता संघर्ष का केंद्र बिंदु रहा है। 2018 के कर्नाटक विधानसभा संकट से लेकर महाराष्ट्र में हालिया राजनीतिक बदलाव तक, नेता को “आमंत्रित” करने में राजभवन की भूमिका पर अक्सर सुप्रीम कोर्ट में विवाद होता रहा है। तमिलनाडु की वर्तमान स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि इसमें स्थापित द्रविड़ दिग्गजों को सत्ता से हटाने वाली एक “विघटनकारी” पार्टी शामिल है। संख्याओं पर सवाल उठाकर, राज्यपाल संवैधानिक स्थिरता की सख्त व्याख्या का पालन कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक दशक लंबे आधिपत्य से एक नए राजनीतिक आदेश में परिवर्तन एक सत्यापन योग्य विधायी बहुमत द्वारा समर्थित है। अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि टीवीके-कांग्रेस गठबंधन लोक भवन को अपनी शासन व्यवहार्यता के बारे में “समझाना” चाहता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु का नंबर गेम बना नर्वस गेम: टीवीके-कांग्रेस गठबंधन कमजोर होने पर राज्यपाल क्या कर सकते हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक

विजय का शपथ समारोह अनिश्चित है क्योंकि तमिलनाडु के राज्यपाल टीवीके की संख्या को लेकर अनिश्चित हैं: सूत्र | भारत समाचार

SRH vs PBKS Live Score, IPL 2026: Follow match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 17:30 IST टीवीके के पास वर्तमान में 108 विधायक हैं, साथ ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन भी है। हालाँकि, यह अभी भी 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 118 से कम है। टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र वी अर्लेकर से मुलाकात की। (छवि: स्रोत) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय का शपथ ग्रहण समारोह अनिश्चित है, सूत्रों से संकेत मिलता है कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर अभी तक आश्वस्त नहीं हैं कि टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या है। लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने अभिनेता से नेता बने अभिनेता की पार्टी की ताकत पर स्पष्टता मांगी है, जिसने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने का दावा किया है। और पढ़ें: विजय ने तमिलनाडु सरकार बनाने का दावा पेश किया, राज्यपाल को मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने वाले 108 विधायकों का समर्थन सौंपा टीवीके के पास वर्तमान में 108 विधायक हैं, साथ ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन भी है। इसके साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, संख्या बढ़कर 112 हो गई। हालाँकि, यह अभी भी 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 118 से कम है। आगे के समर्थन पर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) जैसी पार्टियों, जिनके दो विधायक हैं, ने अभी तक अंतिम फैसला नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि राज्यपाल ने 118 विधायकों का समर्थन मांगा है और स्पष्ट कर दिया है कि शपथ ग्रहण तभी हो सकता है जब विजय आवश्यक बहुमत साबित कर दें। इससे पहले आज, टीवीके प्रमुख ने केए सेनगोट्टैयन, बुस्सी एन आनंद, अरुणराज, सीटीआर निर्मल कुमार, आधव अर्जुन और वेंकटरमन के साथ राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान, विजय ने 108 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला एक विस्तृत पत्र प्रस्तुत किया, जिन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें अपनी पसंद के रूप में समर्थन दिया। सीएनएन-न्यूज18. लाइव अपडेट का पालन करें पत्र में राज्य में सरकार बनाने के लिए आवश्यक टीवीके के प्रति विधायकों के समर्थन पर प्रकाश डालते हुए संख्या खेल को समझाने की भी मांग की गई है। सूत्रों के मुताबिक, विजय ने राज्यपाल आर्लेकर से आग्रह किया कि उन्हें कल सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की अनुमति दी जाए. तमिलनाडु चुनाव तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक झटका देखने को मिला है, जहां पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों में से कोई भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने नहीं आई है। अपने पहले चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीतीं। जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने 47 सीटें हासिल कीं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को बड़ा झटका लगा, उसने केवल 59 सीटें जीतीं, शेष सीटें कांग्रेस और वामपंथी समूहों सहित छोटी पार्टियों के पास गईं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया विजय का शपथ समारोह अनिश्चित है क्योंकि तमिलनाडु के राज्यपाल टीवीके की संख्या को लेकर अनिश्चित हैं: सूत्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार का गठन(टी)विजय टीवीके प्रमुख(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर(टी)विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)बहुमत का निशान 118(टी)गठबंधन सरकार वार्ता

वीसीके ने विजय का समर्थन करने पर अभी फैसला नहीं किया है क्योंकि टीवीके की सहयोगियों की तलाश जारी है | भारत समाचार

SRH vs PBKS Live Score, IPL 2026: Follow match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 17:30 IST टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की टीवीके प्रमुख विजय | फ़ाइल फ़ोटो समाचार एजेंसी के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी दमदार शुरुआत के बाद तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय की सहयोगियों की तलाश जारी है, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। पीटीआई सूत्रों के हवाले से खबर दी गई है. वीसीके, जिसने दो सीटें हासिल कीं, ने पुष्टि की कि पार्टी सुप्रीमो इस मामले पर निर्णय लेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने पीटीआई के हवाले से कहा, ”यह हमारे पार्टी अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन द्वारा तय किया जाएगा।” इससे पहले, विजय ने वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलन को पत्र लिखकर राज्य में सरकार बनाने के लिए उनका समर्थन मांगा था। विजय – जिन्होंने अपनी पार्टी टीवीके बनाकर राजनीति में कदम रखा – ने राज्य विधानसभा की 234 सीटों में से प्रभावशाली 108 सीटें हासिल करके डीएमके-एआईएडीएमके के एकाधिकार को समाप्त करके तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित किया। हालाँकि, टीवीके 118 के बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई और उसे सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त 10 सीटों की आवश्यकता है। तमिलनाडु सरकार गठन समाचार लाइव अपडेट विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात की इससे पहले दिन में, टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को एक औपचारिक पत्र सौंपा, जिसमें दावा किया गया कि उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन है। सूत्रों के मुताबिक, पत्र में टीवीके के 108 विधायकों के हस्ताक्षर भी शामिल थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद के रूप में विजय का समर्थन किया था। हालांकि, सूत्रों ने संकेत दिया कि राज्यपाल इस बात से सहमत नहीं हैं कि टीवीके के पास तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विधायकों की उपयुक्त संख्या है, और कल शपथ ग्रहण की संभावना नहीं है। विजय ने राज्यपाल आर्लेकर से आग्रह किया था कि उन्हें कल 7 मई को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की अनुमति दी जाए। डीएमके को 59 सीटें, एआईएडीएमके को 47 सीटें, पीएमके को 4 सीटें, आईयूएमएल को 2 सीटें, सीपीआई को 2 सीटें, सीपीआई (एम) को 2 सीटें और बीजेपी, डीएमडीके और एएमएमके को एक-एक सीट मिलीं। कोलाथुर में टीवीके के वीएस बाबू से हारने वाले डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन पहले ही मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वीसीके ने विजय का समर्थन करने पर अभी निर्णय नहीं लिया है क्योंकि टीवीके द्वारा सहयोगियों की तलाश जारी है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार का गठन(टी)विजय टीवीके(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)विदुथलाई चिरुथिगल काची(टी)वीसीके समर्थन निर्णय(टी)तमिलनाडु चुनाव परिणाम(टी)डीएमके एआईएडीएमके एकाधिकार(टी)थोल थिरुमावलवन

रोजमेरी vs प्याज तेल: बालों की ग्रोथ और मजबूती के लिए कौन सा ज्यादा फायदेमंद, चुनाव कैसे करें

रोजमेरी vs प्याज तेल: बालों की ग्रोथ और मजबूती के लिए कौन सा ज्यादा फायदेमंद, चुनाव कैसे करें

Last Updated:May 06, 2026, 17:20 IST Hair Growth Oil: आजकल बाल झड़ना, पतले होना और स्कैल्प से जुड़ी परेशानियां इतनी आम हो गई हैं कि हर दूसरा इंसान किसी न किसी हेयर ऑयल की तलाश में है. सोशल मीडिया पर दो नाम सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं-रोज़मेरी ऑयल और प्याज का तेल. कोई कहता है रोज़मेरी से बाल तेजी से बढ़ते हैं, तो कोई प्याज तेल को बालों की मजबूती का सीक्रेट बताता है. ऐसे में कन्फ्यूजन होना लाजमी है कि आखिर किसे चुना जाए. सच ये है कि दोनों ही तेल अपने-अपने तरीके से काम करते हैं और हर किसी के बालों की जरूरत अलग होती है, अगर आप भी बार-बार ऑयल बदलकर परेशान हो चुके हैं, तो ये आर्टिकल आपको साफ समझ देगा कि आपके बालों के लिए सही ऑप्शन क्या है और क्यों. रोज़मेरी ऑयल क्या है और कैसे काम करता है रोज़मेरी एक हर्ब है जिससे निकाला गया तेल बालों की जड़ों तक ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करता है. आसान भाषा में समझें तो ये तेल स्कैल्प में खून का बहाव तेज करता है, जिससे बालों की जड़ों तक ज्यादा पोषण पहुंचता है. यही वजह है कि जिन लोगों के बाल धीरे-धीरे बढ़ते हैं या बहुत पतले हो गए हैं, उनके लिए रोज़मेरी ऑयल काफी फायदेमंद माना जाता है. इसकी खुशबू भी हल्की और सुकून देने वाली होती है, जिससे इसे रोजमर्रा की हेयर केयर में शामिल करना आसान हो जाता है. किन लोगों के लिए बेहतर है रोज़मेरी ऑयल -जिनके बाल धीरे बढ़ते हैं -ड्राय या हल्के कमजोर बाल -स्कैल्प में खुजली या हल्की इरिटेशन प्याज का तेल क्या है और क्यों है इतना पॉपुलर प्याज का तेल दरअसल प्याज के अर्क को किसी कैरियर ऑयल में मिलाकर बनाया जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में सल्फर होता है, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है, अगर आपके बाल ज्यादा टूटते हैं या जड़ों से कमजोर हो गए हैं, तो प्याज का तेल उन जड़ों को रिपेयर करने का काम करता है. यही कारण है कि बाल झड़ने की समस्या में इसे काफी असरदार माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google किन लोगों के लिए सही है प्याज का तेल -ज्यादा हेयर फॉल -कमजोर जड़ें -पैच या जगह-जगह से बाल कम होना रिसर्च क्या कहती है -बालों की ग्रोथ को लेकर किए गए एक चर्चित अध्ययन में पाया गया कि रोज़मेरी ऑयल ने लगभग छह महीने के इस्तेमाल के बाद मिनॉक्सिडिल जितना असर दिखाया. -वहीं, प्याज के तेल पर हुए कुछ रिसर्च बताते हैं कि यह बाल झड़ने को कम करने और बालों की डेंसिटी बढ़ाने में मदद करता है. -हालांकि, दोनों ही तेलों का असर तुरंत नहीं दिखता. लगातार इस्तेमाल ही इनके रिजल्ट को बेहतर बनाता है. रोज़मेरी बनाम प्याज तेल: असली फर्क अगर सीधी बात करें तो रोज़मेरी ऑयल बालों की ग्रोथ को एक्टिव करता है, जबकि प्याज का तेल जड़ों को मजबूत बनाकर टूटने को कम करता है. एक तरह से देखें तो रोज़मेरी “ग्रोथ बूस्टर” है और प्याज का तेल “स्ट्रेंथ बिल्डर” की तरह काम करता है. क्या दोनों को साथ इस्तेमाल करना सही है? आजकल कई लोग वैकल्पिक दिनों में दोनों तेलों का इस्तेमाल कर रहे हैं और अच्छे रिजल्ट भी मिल रहे हैं. जैसे-एक दिन प्याज का तेल लगाएं और दूसरे दिन रोज़मेरी. इससे बालों को दोनों तरह का फायदा मिलता है-मजबूती भी और ग्रोथ भी. किसे चुनें: आसान गाइड अगर आपके बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं और जड़ें कमजोर हैं, तो प्याज का तेल आपके लिए बेहतर रहेगा, लेकिन अगर बाल धीरे बढ़ रहे हैं या स्कैल्प से जुड़ी दिक्कत है, तो रोज़मेरी ऑयल ज्यादा सूट करेगा. ध्यान रखें, ट्रेंड देखकर नहीं बल्कि अपनी समस्या समझकर तेल चुनना ही समझदारी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

कटहल के कोफ्ते रेसिपी: खाने में कटहल के कोफ्ते, नॉनवेज का मटन-चिकन सब पढ़ेंगे; बच्चों को भी आती है पसंद

तस्वीर का विवरण

कॉफ़ी के लिए: कच्चे कटहल आलू, 2 मसाले वाले आलू, 2-3 मसाले बेसन, 1 मसाले अदरक-लहसुन पेस्ट, 1-2 हरी मिर्च, नमक का स्वाद, 2 मसाले आलू, 1/2 मसाले लाल मिर्च पाउडर, 1/2 मसाले गरम मसाला, हरा धनियां, तेल छवि: एआई ग्रेवी के लिए: 2 प्याज, 2 टमाटर, 1 मूंग अदरक-लहसुन पेस्ट, 1/2 लौंग हल्दी, 1 धनिया पाउडर, 1/2 प्याज लाल मिर्च पाउडर, 1/2 प्याज गरम मसाला, 2 अदरक लहसुन पेस्ट, 2-3 अदरक लहसुन का तेल, 2-3 प्याज मसाला या मलाई छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले खिलौने हुए कटहल को अच्छे से मैश कर लें। इसमें आलू, बेसन, सोया और हरा धनिया शामिल हैं। इस मिश्रण के छोटे-छोटे गोल बॉल्स बनाएं। छवि: एआई कड़ाही में तेल गरम करें और इन बॉल्स को गोल्डन ब्राउन तक तल लें। पैन में तेल गरम करें और प्याज़ के टुकड़े में स्टोमनॉलर होना शामिल है। अब अदरक-लहसुन पेस्ट और टुकड़े टुकड़े आने तक। छवि: एआई टमाटर पुएरी कोरियोग्राफी के साथ-साथ बढ़िया से भून लें। जब मसाला तेल निकलने लगे, तब थोड़ा सा पानी स्टैमिना ग्रेवी तैयार करें। ग्रेवी में तैयार कोफ्ते डालें। छवि: एआई ऊपर से क्रीम या मलाई आर्किटेक्चर 2-3 मिनट का काम। गैस बंद करें और हरा धनिया की सजावट करें। गरमा-गरम कटहल के कोफ्ते आप रोटी, नान या चावल के साथ सर्व कर सकते हैं. छवि: फ्रीपिक कोफ्ते सॉफ्ट बनाने के लिए मिक्स में ज्यादा पानी न रखें। कटहल को नमक करते समय थोड़ा सा नमक डाला, इससे स्वाद का स्तर। प्लेसमेंट के लिए कोफ्ते की जगह डीप फ्री भी ले सकते हैं। छवि: फ्रीपिक कटहल के कोफ्ते के स्वाद में तीन लाजवाब होते हैं कि नॉनवेज खाने वाले भी चाहते हैं खुश हो जायेंगे। अगर आप घर में कुछ खास बनाना चाहते हैं तो यह डिश जरूर बनाएं। छवि: फ्रीपिक