Wednesday, 06 May 2026 | 09:12 PM

Trending :

EXCLUSIVE

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

वर्ष 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 489 में से 364 पर कब्ज़ा जमाया था और उसका वोट शेयर करीब 45% था। यह वह दौर था जब एक विचारधारा पार्टी पूरे देश की साक्षात् मूर्ति पर थी। लेकिन आज 70 साल बाद, वामपंथी कांग्रेस चार राज्यों की सरकार से सीमेन्ट तक जा पहुंची है। कभी देश की दिशा और दशा करने वाली यह 140 साल पुरानी पार्टी की गिनती अब आखिरी सांसों में हो रही है या यह एक नई शुरुआत का इंतजार है?

400 से अधिक सबसे पवित्र कैथोलिक गांव-गांव उपनगरीय कांग्रेस

कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुसार नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेताओं को तैयार किया। 1952 से 2014 के बीच करीब 50 साल तक सबसे ज्यादा समय तक पार्टी ने केंद्र की सत्ता संभाली। 1984 के चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 400 से अधिक वोट मिले। यह वह समय था जब कांग्रेस का जनाधार हिंदू बहुसंख्यक समाज से लेकर अल्पसंख्यकों और ईसाई समुदाय तक का विघटन हुआ था। पार्टी का संगठन गांव-गांव तक मजबूत था और ‘कांग्रेस व्यवस्था’ नाम से एक संपूर्ण व्यवस्था व्यवस्था थी।

कांग्रेस पार्टी की शुरुआत कब और कैसे हुई?

मान्यताओं का मानना ​​है कि कांग्रेस का वास्तविक पतन 1989 के बाद शुरू हुआ, जब वह केंद्र की पूर्ण बहुमत की सत्ता से बाहर हो गई और उसे गठबंधन की राजनीति पर अविश्वास प्रस्ताव मिला। संगठन के आरोप, संगठन में आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय आश्रमों के उदय ने पार्टी की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया। फिर 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस का तख्तापलट हो गया और वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गईं, जबकि उनका वोट शेयर 19.3% रह गया था। 2019 में मामूली सुधार के बाद 2024 में पार्टी ने 99 सीटें और 21.26% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन फिर भी वह मोदी लहर के आगे बौनी साबित हुई।

असली हकीकत: सिर्फ 4 राज्यों की सरकार

2026 की ताजा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में ही अपनी सरकार है। 2026 के चुनाव में केरल में बड़ी जीत के बाद, कांग्रेस को अब तीन दक्षिण राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के अलावा उत्तर भारत में सिर्फ हिमाचल प्रदेश की सत्ता हासिल है। झारखंड में वह झामुमो के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है, लेकिन वहां नेतृत्व रसेल सोरेन के पास है।

बिहार और तमिल जैसे राज्यों में पार्टी या तो छोटे सहयोगियों की भूमिका है या पूरी तरह से हाशिए पर है। वहीं, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार या तो खत्म हो चुका है या बेहद कमजोर है।

कांग्रेस के पांच बड़े कारण क्या हैं?

कांग्रेस के पतन को किन्हीं एक-दो कारणों से नहीं समझा जा सकता है, इसके पीछे एक सु-संयुक्त लोकोमोटिव प्रक्रिया है:

  • आदर्श नेतृत्व और मार्गदर्शन कलह: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को 95वीं बहुमत से हार का सामना करना पड़ रहा है। आंतरिक गुटबाजी और हाईकमैन का ग्राउंड स्ट्रिप से कटाव पार्टी लगातार खराब हो रही है।
  • आपदा का संकट: भाजपा ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के रूप में पेश किया, जिससे हिंदू बहुल मुस्लिमों का विश्वास खोद दिया गया।
  • भाजपा का उदय और ध्रुवीकरण: 2014 के बाद कांग्रेस को उत्तर भारत में किसी भी तरह से गठबंधन में डायरेक्ट सीट नहीं मिली, क्योंकि बीजेपी धार्मिक आधार पर मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रही है।
  • दल-बदल और पार्टी छोड़ने का नारा: 2014 के बाद सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। यह रुझान 2017 से 2021 के बीच अपने चरम पर था।
  • गठबंधन की राजनीति में विश्वास: इंडिया अलायंस के सहयोगी दल, नैयर वह सैद्धांतिक कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कि एकजुटता एकता खत्म हो गई है।

तो क्या ख़त्म होने वाली है कांग्रेस पार्टी?

इस सवाल का जवाब आसान नहीं है. हालांकि इंडिया गठबंधन सिर्फ 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच गया है और कई बीजेपी नेता इसे ‘केरल के बाहर न के बराबर’ बता रहे हैं। इसके बावजूद राजनीति में भविष्यवाणी करना मुश्किल है। 2024 के आम चुनाव में मिल 99 ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में अभी भी लड़ने की ताकतें बाकी हैं। दक्षिण भारत में पार्टी का जबरदस्त प्रभाव और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी पार्टियों ने जोश भरा है।

लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में वह इस बात पर अड़े हुए हैं कि अपनी योजनाओं को कितनी जल्दी दूर किया जाए। कांग्रेस को एक मजबूत संगठन खड़ा करना, जातिगत और क्षेत्रीय ग्राफों को फिर से साधना और एक स्पष्ट परिभाषा तय करना होगा। ये वे कलाकार हैं जो राष्ट्रवादी पार्टी में शामिल होंगे। अगर यह कांग्रेस कर पाती नाकाम रही, तो इतिहास की कहानी में अपनी कहानी एक ‘हरे अतीत’ तक सीमेन्ट कर रहेगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

March 19, 2026/
7:48 am

मंदसौर में निकाह को लेकर उपजी रंजिश में जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी...

आयरलैंड के जॉन मूनी DC के फील्डिंग कोच बने:तीन वनडे वर्ल्ड कप खेल चुके, दिल्ली को पहले खिताब का इंतजार

March 19, 2026/
2:59 pm

IPL टीम दिल्ली कैपिटल्स ने आयरलैंड के पूर्व ऑलराउंडर जॉन मूनी को टीम का नया फील्डिंग कोच बनाया है। रिपोर्ट...

रियलिटी चेक में जीतू पटवारी फेल, भरी सभा में फजीहत:छींक आई और कट गई पंडोखर सरकार की चोटी; सज्जन वर्मा का छलका दर्द

April 2, 2026/
6:03 am

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर...

US Says Hormuz May Reopen Soon As Talks With Iran Progress. (IMAGE: REUTERS)

April 3, 2026/
2:04 pm

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 14:04 IST केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

समझाया: सिर्फ केरल में सरकार बनी पाई कांग्रेस! 141 साल पुरानी पार्टी कैसे 4 राज्यों तक, पतन के 5 बड़े संकेत

वर्ष 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव हुआ। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 489 में से 364 पर कब्ज़ा जमाया था और उसका वोट शेयर करीब 45% था। यह वह दौर था जब एक विचारधारा पार्टी पूरे देश की साक्षात् मूर्ति पर थी। लेकिन आज 70 साल बाद, वामपंथी कांग्रेस चार राज्यों की सरकार से सीमेन्ट तक जा पहुंची है। कभी देश की दिशा और दशा करने वाली यह 140 साल पुरानी पार्टी की गिनती अब आखिरी सांसों में हो रही है या यह एक नई शुरुआत का इंतजार है?

400 से अधिक सबसे पवित्र कैथोलिक गांव-गांव उपनगरीय कांग्रेस

कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुसार नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेताओं को तैयार किया। 1952 से 2014 के बीच करीब 50 साल तक सबसे ज्यादा समय तक पार्टी ने केंद्र की सत्ता संभाली। 1984 के चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड 400 से अधिक वोट मिले। यह वह समय था जब कांग्रेस का जनाधार हिंदू बहुसंख्यक समाज से लेकर अल्पसंख्यकों और ईसाई समुदाय तक का विघटन हुआ था। पार्टी का संगठन गांव-गांव तक मजबूत था और ‘कांग्रेस व्यवस्था’ नाम से एक संपूर्ण व्यवस्था व्यवस्था थी।

कांग्रेस पार्टी की शुरुआत कब और कैसे हुई?

मान्यताओं का मानना ​​है कि कांग्रेस का वास्तविक पतन 1989 के बाद शुरू हुआ, जब वह केंद्र की पूर्ण बहुमत की सत्ता से बाहर हो गई और उसे गठबंधन की राजनीति पर अविश्वास प्रस्ताव मिला। संगठन के आरोप, संगठन में आंतरिक गुटबाजी और क्षेत्रीय आश्रमों के उदय ने पार्टी की जड़ों को खोखला करना शुरू कर दिया। फिर 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस का तख्तापलट हो गया और वह सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गईं, जबकि उनका वोट शेयर 19.3% रह गया था। 2019 में मामूली सुधार के बाद 2024 में पार्टी ने 99 सीटें और 21.26% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन फिर भी वह मोदी लहर के आगे बौनी साबित हुई।

असली हकीकत: सिर्फ 4 राज्यों की सरकार

2026 की ताजा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में ही अपनी सरकार है। 2026 के चुनाव में केरल में बड़ी जीत के बाद, कांग्रेस को अब तीन दक्षिण राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना और केरल के अलावा उत्तर भारत में सिर्फ हिमाचल प्रदेश की सत्ता हासिल है। झारखंड में वह झामुमो के साथ गठबंधन में सरकार का हिस्सा है, लेकिन वहां नेतृत्व रसेल सोरेन के पास है।

बिहार और तमिल जैसे राज्यों में पार्टी या तो छोटे सहयोगियों की भूमिका है या पूरी तरह से हाशिए पर है। वहीं, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार या तो खत्म हो चुका है या बेहद कमजोर है।

कांग्रेस के पांच बड़े कारण क्या हैं?

कांग्रेस के पतन को किन्हीं एक-दो कारणों से नहीं समझा जा सकता है, इसके पीछे एक सु-संयुक्त लोकोमोटिव प्रक्रिया है:

  • आदर्श नेतृत्व और मार्गदर्शन कलह: राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी को 95वीं बहुमत से हार का सामना करना पड़ रहा है। आंतरिक गुटबाजी और हाईकमैन का ग्राउंड स्ट्रिप से कटाव पार्टी लगातार खराब हो रही है।
  • आपदा का संकट: भाजपा ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति के रूप में पेश किया, जिससे हिंदू बहुल मुस्लिमों का विश्वास खोद दिया गया।
  • भाजपा का उदय और ध्रुवीकरण: 2014 के बाद कांग्रेस को उत्तर भारत में किसी भी तरह से गठबंधन में डायरेक्ट सीट नहीं मिली, क्योंकि बीजेपी धार्मिक आधार पर मजबूत ध्रुवीकरण करने में सफल रही है।
  • दल-बदल और पार्टी छोड़ने का नारा: 2014 के बाद सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। यह रुझान 2017 से 2021 के बीच अपने चरम पर था।
  • गठबंधन की राजनीति में विश्वास: इंडिया अलायंस के सहयोगी दल, नैयर वह सैद्धांतिक कांग्रेस हो या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे कि एकजुटता एकता खत्म हो गई है।

तो क्या ख़त्म होने वाली है कांग्रेस पार्टी?

इस सवाल का जवाब आसान नहीं है. हालांकि इंडिया गठबंधन सिर्फ 6 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश तक पहुंच गया है और कई बीजेपी नेता इसे ‘केरल के बाहर न के बराबर’ बता रहे हैं। इसके बावजूद राजनीति में भविष्यवाणी करना मुश्किल है। 2024 के आम चुनाव में मिल 99 ने यह साबित कर दिया कि पार्टी में अभी भी लड़ने की ताकतें बाकी हैं। दक्षिण भारत में पार्टी का जबरदस्त प्रभाव और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसी पार्टियों ने जोश भरा है।

लेकिन पार्टी के भविष्य के बारे में वह इस बात पर अड़े हुए हैं कि अपनी योजनाओं को कितनी जल्दी दूर किया जाए। कांग्रेस को एक मजबूत संगठन खड़ा करना, जातिगत और क्षेत्रीय ग्राफों को फिर से साधना और एक स्पष्ट परिभाषा तय करना होगा। ये वे कलाकार हैं जो राष्ट्रवादी पार्टी में शामिल होंगे। अगर यह कांग्रेस कर पाती नाकाम रही, तो इतिहास की कहानी में अपनी कहानी एक ‘हरे अतीत’ तक सीमेन्ट कर रहेगी।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.