एक्टिंग करियर छोड़, कृष्ण भक्त बनीं एक्ट्रेस एना जयसिंघानी:क्राइम पेट्रोल में काम किया था, प्रेमानंद महाराज के सपने के बाद आ गईं वृंदावन

टीवी एक्ट्रेस रहीं एना जयसिंघानी ने मुबई एक्टिंग का करियर छोड़कर आध्यात्म का मार्ग चुन लिया है और वह अब वृंदावन में रहकर भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हैं। ग्वालियर की रहने वाली एना ने हाल ही में एक यूट्यूब चैनल पर बताया कि वह अब वृंदावन में रह रही हैं और अपनी जिंदगी कृष्ण भक्ति को समर्पित कर चुकी हैं। एना जयसिंघानी ने अब अपना नाम बदलकर एना परी हरिवंशी रख लिया है। एना ने बताया कि उन्होंने एक्टिंग और डांस के सपने के साथ मुंबई का रुख किया था। उन्होंने 2011 में फ्रीलांस कोरियोग्राफर के तौर पर काम शुरू किया और इस दौरान कोरियोग्राफर थॉमस पॉलसन के साथ भी काम करने का मौका मिला। पूर्व एक्ट्रेस के अनुसार, कोरियोग्राफी के बाद उन्होंने एक्टिंग में करियर बनाने के लिए एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स में एक्टिंग कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने ‘क्राइम पेट्रोल’ और ‘सावधान इंडिया’ जैसे शो में काम किया। फिर उन्हें टीवी शो ‘देखा एक ख्वाब’ से खास पहचान मिली थी। ISKCON से जुड़ने के बाद बदली लाइफस्टाइल एना ने बताया कि मुंबई में कुछ दोस्तों के जरिए वह ISKCON से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाल बदल ली और मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज छोड़ दिया। वो मुंबई में ISKCON जाने लगी. वो धीरे-धीरे यूटूब पर सत्संग सुनने लगी। एना ने कहा कि फिर एक दिन प्रेमानंद महाराज उनके सपने में आए और उनसे मंत्र जाप करने को कहा। इस अनुभव के बाद, वे वृंदावन आईं, दीक्षा ली और अपना जीवन कृष्ण की भक्ति में लगाने का फैसला किया।
द्वारकेश पॉडकास्ट के मुरीद टेक दिग्गज:जकरबर्ग को कह दिया था- दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ेगा, हुआंग-नडेला करते हैं घंटों चर्चा

एआई की जादुई दुनिया में जहां बड़े-बड़े दिग्गज भी तकनीक के शोर में खो जाते हैं, वहीं द्वारकेश पटेल सिलिकॉन वैली के एआई समुदाय की सबसे अहम आवाज बनकर उभरे हैं। 25 वर्षीय भारतीय मूल के द्वारकेश के पॉडकास्ट को प्रति एपिसोड औसतन 20 लाख बार सुना जाता है। मार्क जकरबर्ग, सत्या नडेला और जैंसन हुआंग जैसे दिग्गज सीईओ उनके साथ घंटों तक चर्चाएं करते हैं। लोकप्रियता ऐसी है कि उनके साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ लग जाती है। पटेल इंटरव्यू के लिए गहन अध्ययन करते हैं और एआई की जटिल भाषा को नए अंदाज में पेश करते हैं। बोरियत से शुरू हुआ सफर द्वारकेश के पॉडकॉस्ट का सफर 2020 में एक कॉलेज हॉस्टल के कमरे से शुरू हुआ था। कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ ठप हो गया था, तब यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के छात्र द्वारकेश कुछ अलग करने की तलाश में थे। उन्होंने अपनी जिज्ञासा के दम पर विशेषज्ञों को ईमेल करना शुरू किया। आज ‘द्वारकेश पॉडकास्ट’ की अलग पहचान है। एंथ्रोपिक की मुख्य संचार अधिकारी साशा डी मारिग्नी कहती हैं, ‘लोग उन्हें केवल कमेंटेटर नहीं मानते, वे एआई समुदाय के अभिन्न अंग हैं।’ इंटरव्यू के लिए उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे नया सीखने को मिले द्वारकेश एक इंटरव्यू के लिए दो हफ्ते तक रिसर्च करते हैं। फ्लैश कार्ड बनाते हैं। विषयों को समझने के लिए इकोनॉमिक्स, फिजिक्स तक के ट्यूटर हायर करते हैं। साख ऐसी है कि उन्होंने मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग से भी इंटरव्यू को दोबारा रिकॉर्ड करने के लिए कह दिया था। एनवीडिया के सीईओ जैंसन हुआंग और ओपनएआई के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक इल्या सुत्स्केवर जैसे दिग्गजों से तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हैं। द्वारकेश के पॉडकास्ट में निवेशक करोड़ों रु. लगाने को तैयार हैं, लेकिन वे इसे स्वतंत्र रिसर्च कंपनी या नेटवर्क की तरह नहीं चलाना चाहते। वे अपने कंटेंट की एडिटिंग खुद देखते हैं और उन्हीं मेहमानों को चुनते हैं, जिनसे उन्हें कुछ नया सीखने को मिले। द्वारकेश जटिल तकनीकी शब्दों और मुद्दों पर घंटों बात करते हैं जहां मुख्यधारा का मीडिया अक्सर एआई को लेकर डर या सतही बातें करता है, द्वारकेश ‘क्वाड्रेटिक अटेंशन कॉस्ट’ और ‘केवी वेक्टर्स’ जैसे जटिल तकनीकी शब्दों पर घंटों बात करते हैं। प्रख्यात अर्थशास्त्री टायलर कोवेन उन्हें ‘एआई युग का नंबर-1 इतिहासकार’ बताते हैं। वे एआई के उस भविष्य की बात करते हैं, जहां मशीनें इंसान की तरह लगातार सीख सकेंगी, हालांकि वे इसके बी च आने वाली तकनीकी बाधाओं को लेकर भी सवाल उठाते हैं।
दिल्ली की IAS एकेडमी डायरेक्टर का अपहरण:भोपाल में 4 घंटे बंधक बनाया, पिस्टल सटाकर 2 करोड़ वसूले; विदेश भागने वाला था मास्टरमाइंड

भोपाल में 9 बदमाशों ने बुधवार दोपहर दिल्ली की IAS एकेडमी की डायरेक्टर को किडनैप कर लिया। 4 घंटे बंधक बनाकर रखा। कनपटी पर पिस्टल सटाकर करीब 1 करोड़ 89 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। वारदात के बाद मास्टरमाइंड प्रियंक शर्मा विदेश भागने की तैयारी में था, लेकिन रविवार को भोपाल एम्स से पकड़ा गया। मास्टरमाइंड के साथ 5 सहयोगी भी पकड़े गए हैं, जबकि 3 आरोपी फरार हैं। भोपाल क्राइम ब्रांच पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने वाला कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसी संस्थान की फ्रेंचाइजी चलाने वाला युवक है। आरोपी भेल के एक रिटायर्ड अधिकारी का बेटा है। वह पहले दिल्ली में रहकर आईएएस कोचिंग के जरिए UPSC की तैयारी कर चुका है। नामी होटल में ठहरी थीं शुभ्रा रंजन डायरेक्टर शुभ्रा रंजन के मुताबिक आरोपी ने भोपाल में कोचिंग की दूसरी ब्रांच खोलने और उस जगह का निरीक्षण कराने के बहाने उन्हें बुलाया। वह दिल्ली से भोपाल आई थीं। वह शहर के एक नामी होटल ताज में ठहरी थीं। बुधवार को आरोपी प्रियंक शर्मा उन्हें होटल से 2-3 बजे के करीब अपने साथ ले गया। इसके बाद बागसेवनिया इलाके के एक फ्लैट में ले जाकर बंधक बना लिया। जान से मारने की धमकी दी। कनपटी पर पिस्टल रखी। जान बख्शने के एवज में अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। फिरौती वसूलने दतिया से बुलाए बदमाश पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने बताया कि प्रियंक पहले से IAS अकादमी की एक फ्रेंचाइजी चला रहा था। उसे अंदाजा था कि डायरेक्टर के पास पर्याप्त पैसा है, इसलिए उसने साजिश रची। उसने दतिया और कालापीपल में रहने वाले अपने साथियों को बुलाया। शोर दबाने के लिए कराया सुंदरकांड पुलिस कमिश्नर ने बताया- जिस फ्लैट में महिला डायरेक्टर को बंधक बनाया गया था, वहां वारदात वाले दिन सोमवार को सुंदरकांड का पाठ कराया गया। मकसद था कि पीड़िता शोर मचाए तो आवाज बाहर तक न पहुंचे। फ्लैट के एक कमरे में उन्हें 4 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया। पैसे मिलने के बाद बुधवार रात को उनकी रिहाई हुई। पुलिस ने सभी खातों में रकम होल्ड करा दी है, ताकि रकम सुरक्षित रहे। एम्स के आईसीयू से मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी प्रियंक वारदात के बाद विदेश भागने की तैयारी में था। इसके लिए वह कई एजेंट्स के संपर्क में था। शिकायत के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी। उसके रिश्तेदारों की निगरानी शुरू की। गिरफ्तारी के डर से वह एम्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया। क्राइम ब्रांच को भनक लगते ही टीम ने अस्पताल पहुंचकर आईसीयू से ही उसे गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसकी मां और पत्नी ने गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई जारी रखते हुए उसे हिरासत में ले लिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने अन्य 5 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। जानिए आरोपियों की प्रोफाइल और भूमिका प्रियंक शर्मा: मास्टरमाइंड प्रियंक शर्मा भोपाल के अयोध्या बाइपास का रहने वाला है। पिता विष्णु शर्मा भेल के रिटायर्ड अधिकारी हैं। आरोपी प्रियंक बीए ग्रेजुएट है। कोचिंग सेंटर चलाता है। पहले यूपीएससी की तैयारी कर चुका है। इसी ने पूरी वारदात की साजिश रची। उसे अंजाम तक पहुंचाया। दीपक भगत: ड्राइवर और करीबी सहयोगी दीपक भगत बागसेवनिया, भोपाल का निवासी है। वह आठवीं तक पढ़ा है और प्रियंक की कार चलाने के साथ उसके निजी काम देखता है। पुलिस की गिरफ्त में आते ही उसने मरने की एक्टिंग की, लेकिन ज्यादा देर नहीं चली और वह पकड़ा गया। रोहित: सफाई कर्मचारी से बना आरोपी रोहित, पिता जगन्नाथ, कालापीपल का रहने वाला है। वह आठवीं तक पढ़ा है और प्रियंक के संस्थान में साफ-सफाई का काम करता था। वारदात के दौरान वह अन्य आरोपियों के साथ मास्क और हथियार लेकर फ्लैट में मौजूद था। विकास: साथ-साथ रहा, मुख्य का सहयोगी विकास उर्फ विक्की दाहिया आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। मार्केटिंग का काम करता है। पूरे घटनाक्रम के दौरान वह प्रियंक के साथ सक्रिय रूप से शामिल रहा और वारदात में अहम भूमिका निभाई। कुनाल यादव: मजदूर, लालच में बना आरोपी कुनाल यादव दतिया का निवासी है, आठवीं तक पढ़ा है और मजदूरी करता है। उसे विक्की ने वारदात में शामिल होने के लिए बुलाया था। काम पूरा होने के बाद उसे पांच लाख रुपए देने का लालच दिया गया था। पंकज अहिरवार: पांचवीं तक पढ़ा, साजिश में शामिल पंकज अहिरवार दतिया का रहने वाला है। पांचवीं कक्षा तक पढ़ा है। इसे भी विक्की ने वारदात में शामिल होने के लिए बुलाया था। फरार आरोपी: रामजी, निहाल और रामेश्वर की तलाश जारी रामजी उर्फ निहाल प्रजापति और रामू उर्फ रामेश्वर उर्फ शिव फिलहाल फरार हैं। इन्हें भी विक्की ने वारदात में शामिल होने के एवज में पांच-पांच लाख रुपए का लालच देकर बुलाया था। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। ……………………………… यह खबर भी पढ़ें भोपाल में लिवइन पार्टनर ने किया प्रेमिका की मासूम बेटी को अगवा भोपाल के बजरिया इलाके में एक महिला के लिव इन पार्टनर ने उसकी छह साल की बेटी का अपहरण कर लिया। पुलिस ने पूरे मामले में पड़ताल की तो पता चला कि वह बच्ची को अगवा कर अपने साथ यूपी के सीतापुर लेकर जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर…
अश्विन बोले-बटलर को आउट करना गलत नहीं:बोले-लोग इसे ईमानदारी से जोड़ते हैं,जबकि यह नियम है

टीम इंडिया के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने ‘मांकडिंग’ विवाद (नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट) पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जोस बटलर को उस तरह आउट करने पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है और वे आज भी अपने फैसले पर गर्व करते हैं। अश्विन के मुताबिक, क्रिकेट के नियमों में जो ‘आउट’ है, उसे खेल भावना की आड़ में गलत ठहराना समाज का दबाव है। जियोस्टार के शो ‘द रविचंद्रन अश्विन एक्सपीरियंस’ में उन्होंने एमएस धोनी के साथ तालमेल और पंजाब किंग्स व राजस्थान रॉयल्स के सफर पर बातें साझा कीं। लोग कहते हैं बटलर भागना नहीं चाहते थे, यह मेरी समस्या नहीं’ जोस बटलर को रन आउट करने की घटना पर अश्विन ने कहा,’कई लोग इसे कैरेक्टर और खेल भावना से जोड़कर देखते हैं। लोग कहते हैं कि बटलर भागने की कोशिश नहीं कर रहे थे, लेकिन यह मेरी समस्या नहीं है। लोग कहते हैं कि मैंने जीतने के लिए ऐसा किया। हां, बिल्कुल मैंने जीतने के लिए ही ऐसा किया था। इसमें शर्मिंदा होने वाली क्या बात है? अगर ICC को लगता कि इसमें ईमानदारी की कोई समस्या है, तो वे इसे नियमों में ही नहीं रखते। अश्विन बोले- क्रिकेट में ‘स्पिरिट’ के नाम पर गेंदबाजों पर दबाव है अश्विन ने कहा कि समाज में धारणा बन गई है कि बल्लेबाज को इस तरह आउट करना गलत है। उन्होंने बताया,’यह दबाव तब शुरू होता है जब अंपायर कप्तान से पूछते हैं कि क्या आप अपील वापस लेना चाहते हैं। अगर आप अपील वापस लेते हैं, तो आपको ‘अच्छा’ माना जाता है। यह गलत है क्योंकि आप सबके सामने अपने गेंदबाज को नीचा दिखाते हैं। जैसे एलबीडब्ल्यू आउट है, वैसे ही यह भी आउट है। जिन्होंने सोशल मीडिया पर मेरे कैरेक्टर पर सवाल उठाए, मैं उन पर कोर्ट में केस कर सकता हूं। मैंने कोई चोरी नहीं की, नियमों के अंदर रहकर खेला।’ धोनी के बारे में कहा-वे मेरे फील्ड सेट करने में दखल नहीं देते थे 2011 IPL फाइनल में क्रिस गेल के विकेट को याद करते हुए अश्विन ने एमएस धोनी की तारीफ की। उन्होंने कहा,’लोग धोनी की कप्तानी और खिताबों की बात करते हैं, लेकिन मेरी नजर में उनके जैसा मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज और स्पिनर्स के खिलाफ उनके जैसा कीपर कोई नहीं है। वे मेरे फील्ड सेट करने में दखल नहीं देते थे। वे बस इतना कहते थे-‘ज्यादा मत सोचो, अगर मार पड़ती है तो पड़ने दो, बस अपनी फील्ड के हिसाब से गेंदबाजी करो।’ उन्हें मुझ पर भरोसा था कि मैं अपनी प्लानिंग करके आया हूं।’ पंजाब किंग्स को ‘अपना’ नहीं बना पाने का मलाल अश्विन ने 2018 में पंजाब किंग्स (तब किंग्स इलेवन पंजाब) की कप्तानी मिलने पर कहा कि वे लीडरशिप के लिए तैयार थे। उन्होंने बताया,’मैंने पंजाब को अपना सब कुछ दिया, लेकिन मलाल है कि मैं टीम को पूरी तरह ‘अपना’ नहीं बना सका। टीम की नीलामी में सहवाग पाजी ने मुझे चुना था, लेकिन टीम मेरे हिसाब से नहीं बन पाई थी। हालांकि, हमने प्रभसिमरन, अर्शदीप सिंह और निकोलस पूरन जैसे खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयार किया।’ राजस्थान रॉयल्स के साथ बिताए 3 साल सबसे खास रहे राजस्थान रॉयल्स (RR) के साथ अपने सफर पर अश्विन ने कहा कि वहां उनके साथ जैसा बर्ताव हुआ, वैसा कहीं नहीं हुआ। अश्विन के मुताबिक, ‘आरआर ने मेरा बेहतरीन इस्तेमाल किया। मैंने वहां क्रिकेट का उतना आनंद लिया जितना तमिलनाडु की अंडर-19 टीम में भी नहीं लिया था। मेरा एक छोटा पछतावा है कि मैं राजस्थान को खिताब नहीं दिला सका। हम फाइनल और क्वालीफायर-2 तक पहुंचे, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाए।’
अश्विन बोले-बटलर को आउट करना गलत नहीं:बोले-लोग इसे ईमानदारी से जोड़ते हैं,जबकि यह नियम है

टीम इंडिया के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने ‘मांकडिंग’ विवाद (नॉन-स्ट्राइकर एंड पर रन आउट) पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जोस बटलर को उस तरह आउट करने पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है और वे आज भी अपने फैसले पर गर्व करते हैं। अश्विन के मुताबिक, क्रिकेट के नियमों में जो ‘आउट’ है, उसे खेल भावना की आड़ में गलत ठहराना समाज का दबाव है। जियोस्टार के शो ‘द रविचंद्रन अश्विन एक्सपीरियंस’ में उन्होंने एमएस धोनी के साथ तालमेल और पंजाब किंग्स व राजस्थान रॉयल्स के सफर पर बातें साझा कीं। लोग कहते हैं बटलर भागना नहीं चाहते थे, यह मेरी समस्या नहीं’ जोस बटलर को रन आउट करने की घटना पर अश्विन ने कहा,’कई लोग इसे कैरेक्टर और खेल भावना से जोड़कर देखते हैं। लोग कहते हैं कि बटलर भागने की कोशिश नहीं कर रहे थे, लेकिन यह मेरी समस्या नहीं है। लोग कहते हैं कि मैंने जीतने के लिए ऐसा किया। हां, बिल्कुल मैंने जीतने के लिए ही ऐसा किया था। इसमें शर्मिंदा होने वाली क्या बात है? अगर ICC को लगता कि इसमें ईमानदारी की कोई समस्या है, तो वे इसे नियमों में ही नहीं रखते। अश्विन बोले- क्रिकेट में ‘स्पिरिट’ के नाम पर गेंदबाजों पर दबाव है अश्विन ने कहा कि समाज में धारणा बन गई है कि बल्लेबाज को इस तरह आउट करना गलत है। उन्होंने बताया,’यह दबाव तब शुरू होता है जब अंपायर कप्तान से पूछते हैं कि क्या आप अपील वापस लेना चाहते हैं। अगर आप अपील वापस लेते हैं, तो आपको ‘अच्छा’ माना जाता है। यह गलत है क्योंकि आप सबके सामने अपने गेंदबाज को नीचा दिखाते हैं। जैसे एलबीडब्ल्यू आउट है, वैसे ही यह भी आउट है। जिन्होंने सोशल मीडिया पर मेरे कैरेक्टर पर सवाल उठाए, मैं उन पर कोर्ट में केस कर सकता हूं। मैंने कोई चोरी नहीं की, नियमों के अंदर रहकर खेला।’ धोनी के बारे में कहा-वे मेरे फील्ड सेट करने में दखल नहीं देते थे 2011 IPL फाइनल में क्रिस गेल के विकेट को याद करते हुए अश्विन ने एमएस धोनी की तारीफ की। उन्होंने कहा,’लोग धोनी की कप्तानी और खिताबों की बात करते हैं, लेकिन मेरी नजर में उनके जैसा मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज और स्पिनर्स के खिलाफ उनके जैसा कीपर कोई नहीं है। वे मेरे फील्ड सेट करने में दखल नहीं देते थे। वे बस इतना कहते थे-‘ज्यादा मत सोचो, अगर मार पड़ती है तो पड़ने दो, बस अपनी फील्ड के हिसाब से गेंदबाजी करो।’ उन्हें मुझ पर भरोसा था कि मैं अपनी प्लानिंग करके आया हूं।’ पंजाब किंग्स को ‘अपना’ नहीं बना पाने का मलाल अश्विन ने 2018 में पंजाब किंग्स (तब किंग्स इलेवन पंजाब) की कप्तानी मिलने पर कहा कि वे लीडरशिप के लिए तैयार थे। उन्होंने बताया,’मैंने पंजाब को अपना सब कुछ दिया, लेकिन मलाल है कि मैं टीम को पूरी तरह ‘अपना’ नहीं बना सका। टीम की नीलामी में सहवाग पाजी ने मुझे चुना था, लेकिन टीम मेरे हिसाब से नहीं बन पाई थी। हालांकि, हमने प्रभसिमरन, अर्शदीप सिंह और निकोलस पूरन जैसे खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयार किया।’ राजस्थान रॉयल्स के साथ बिताए 3 साल सबसे खास रहे राजस्थान रॉयल्स (RR) के साथ अपने सफर पर अश्विन ने कहा कि वहां उनके साथ जैसा बर्ताव हुआ, वैसा कहीं नहीं हुआ। अश्विन के मुताबिक, ‘आरआर ने मेरा बेहतरीन इस्तेमाल किया। मैंने वहां क्रिकेट का उतना आनंद लिया जितना तमिलनाडु की अंडर-19 टीम में भी नहीं लिया था। मेरा एक छोटा पछतावा है कि मैं राजस्थान को खिताब नहीं दिला सका। हम फाइनल और क्वालीफायर-2 तक पहुंचे, लेकिन ट्रॉफी नहीं जीत पाए।’
चेन्नई में यात्री ने चलती फ्लाइट का इमरजेंसी गेट खोला:विमान रनवे से टर्मिनल की तरफ जा रहा था, पायलट ने तुरंत रोका; आरोपी गिरफ्तार

चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार सुबह लैंडिंग के दौरान एयर अरेबिया की चलती फ्लाइट में एक यात्री ने इमरजेंसी गेट खोल दिया। यह फ्लाइट शारजाह से चेन्नई पहुंची थी और इसमें 231 यात्री सवार थे। घटना सुबह करीब 3:23 बजे हुई। एयरबस A320 मॉडल की फ्लाइट G9 471 रनवे से टर्मिनल की ओर बढ़ रही थी। घटना के बाद पायलट ने तुरंत विमान को रोक दिया और एयरपोर्ट अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद CISF, बम निरोधक दस्ते और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी यात्री को हिरासत में ले लिया है। आरोपी की पहचान 29 साल के मोहम्मद शरीफ मोहम्मद नजमुद्दीन के रूप में हुई है। वह तमिलनाडु के पुडुकोट्टई का रहने वाला है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है और उसकी मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। घटना के कारण थोड़ी देर के लिए एयरपोर्ट पर ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ। एयरपोर्ट अधिकारियों ने 3:25 बजे मुख्य रनवे (07/25) को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया। इसके कारण कई फ्लाइट्स में देरी हुई और एक उड़ान को डायवर्ट करना पड़ा। एक अधिकारी के मुताबिक, रनवे ऑपरेशन करीब 4:35 बजे फिर से शुरू कर दिए गए।
विवेक विहार में एसी ब्लास्ट से 9 पैसेंजर, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? रोकथाम के लिए ये हैं 5 सेफ्टी टिप्स

3 मई 2026 को 13:29 IST पर अपडेट किया गया दिल्ली विवेक विहार एसी ब्लास्ट: दिल्ली के विवेक विहार में बहुत बड़ा हादसा हुआ है। यहां एसी ब्लास्ट से 9 लोगों की मौत हो गई। छोटी सी प्रतियोगिता से बड़ी दुर्घटना हो गई है। ऐसे ही कुछ एस्टीमी टिप्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप ध्यान रख सकते हैं। अनुसरण करना : एसी के हर सीजन में 6 महीने में कर्मचारी सेवा जरूरी है। समय पर सफाई और चिकअप से कूड़ा, गंदगी या फिर किसी भी प्रकार का ब्लॉकेज हटते हैं। इस मशीन पर दबाव नहीं होता और ब्लास्ट का खतरा कम होता है। छवि: फ्रीपिक घर में वोल्टेज फ्लक्चुएशन AC के लिए खतरनाक हो सकता है। इसी समय पर सही वायरिंग और स्टेबलाइज़र का उपयोग करना आवश्यक है। इससे शॉर्ट सर्किट बचाया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक अगर एसी से सिगरेट खराब हो रही है या कूलिंग कम हो रही है, तो यह गैस लीक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत एसी बंद करें, टेक्नीशियन से चेक करें क्योंकि गैस और स्पार्क मिक्स ब्लास्ट का कारण बन सकते हैं। छवि: फ्रीपिक एसी लगातार लंबे समय तक चलने से लेकर स्पीड से ओवरहीट तक हो सकता है। इसलिए इसे बीच- बीच में ब्रेक देना और सही टेंपरेचर में चलना जरूरी है। ताकि मशीन पर ज्यादा दबाव न पड़े। छवि: फ्रीपिक 10 साल से ज्यादा पुराने एसी में खराबी और ओवरहीटिंग की संभावना सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में समय रहते ही नया एसी लेने पर ही सेफ पद पर नियुक्ति हो जाती है। छवि: फ्रीपिक एसी को हमेशा ऐसी जगह पर लगाना चाहिए जहां हवा का सही उद्देश्य हो, बंद या बहुत गर्म जगह पर इस्तेमाल से मशीन जल्दी गर्म होती है। इससे खतरा बढ़ जाता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : कीर्ति सोनी प्रकाशित 3 मई 2026 13:24 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट) दिल्ली आग विवेक विहार(टी)एसी विस्फोट कारण(टी)एयर कंडीशनर विस्फोट कारण(टी)एसी सुरक्षा युक्तियाँ घर(टी)रेफ्रिजरेंट गैस विस्फोट(टी)कंप्रेसर विफलता एसी(टी)आग दुर्घटना दिल्ली 2026(टी)घरेलू उपकरण सुरक्षा भारत(टी)एसी रखरखाव युक्तियाँ(टी)बिजली की आग एसी का कारण बनती है
विजय के पास तमिलनाडु की अगली सरकार की ‘मास्टर’ कुंजी हो सकती है: वह किस गुट में शामिल होंगे? 5 परिदृश्यों की व्याख्या | भारत समाचार

आखरी अपडेट:03 मई, 2026, 13:23 IST विजय ने पहले द्रमुक को टीवीके का प्राथमिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाजपा को उसका वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताया था। यदि विजय पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब होते हैं, तो यह एक ऐतिहासिक परिणाम होगा, जिससे चुनाव बाद गठबंधन या गठबंधन अंकगणित पर कोई निर्भरता खत्म हो जाएगी। (पीटीआई फ़ाइल) तमिलनाडु चुनाव 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में गिनती शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले, उम्मीदवार यह देखने के इंतजार में हैं कि मतदाताओं ने उन्हें जनादेश दिया है या नहीं। जबकि एनडीए और इंडिया ब्लॉक परिचित प्रतिद्वंद्वी हैं, इस बार सुर्खियों में अभिनेता से नेता बने विजय और उनका तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) कैसा प्रदर्शन करता है, इस पर है। विशेष रूप से, दशकों में यह पहली बार है कि तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है, जिससे दौड़ में अप्रत्याशितता की एक नई परत जुड़ गई है। विजय ने पहले द्रमुक को टीवीके का प्राथमिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाजपा को उसका वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताया था। हालाँकि, यदि चुनाव अनुमान मतगणना के दिन तक सही रहे, तो उनकी पार्टी खुद को एक निर्णायक स्थिति में पा सकती है – अगली सरकार में या तो एक निर्णायक ताकत या एक महत्वपूर्ण किंगमेकर के रूप में उभर सकती है। यहां कुछ परिदृश्य दिए गए हैं जो चुनाव परिणामों के बाद सामने आ सकते हैं यदि विजय असंभव कार्य करने में सफल हो जाते हैं: परिद्रश्य 1 एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल अनुमान के मुताबिक, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 98-120 सीटें जीतकर टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। यदि यह वास्तविकता बन जाती है, तो विजय सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, जिसने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा था और कुछ अन्य छोटे दलों से संपर्क कर सकते हैं। और पढ़ें | 5 टाइम्स एक्सिस माई इंडिया ने बोल्ड एग्ज़िट पोल भविष्यवाणियों से सभी को चौंका दिया और सही साबित हुए चुनाव से पहले कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने विजय से मुलाकात की थी. हालाँकि, सहमति नहीं बन पाई. टीवीके प्रमुख ने अपनी रैलियों के दौरान कांग्रेस पर ज्यादा हमला नहीं किया था. विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने पहले कांग्रेस से हाथ मिलाने की अपील की थी. परिदृश्य 2 अगर टीवीके खुद को सरकार बनाने की स्थिति में पाती है, तो विजय समर्थन के लिए एआईएडीएमके की ओर देख सकते हैं, जो तमिलनाडु में एनडीए का नेतृत्व कर रही है। हालाँकि, रास्ता सीधा नहीं है। विजय और टीवीके के वरिष्ठ नेताओं ने बार-बार कहा है कि वे “सांप्रदायिक ताकतों” के साथ गठबंधन नहीं करेंगे, इस रुख को व्यापक रूप से भाजपा से जुड़ी किसी भी साझेदारी को खारिज करने के रूप में देखा जाता है। साथ ही, विजय ने एआईएडीएमके की द्रविड़ विरासत के प्रति खुलेपन का संकेत दिया है। अभियान के दौरान, उन्होंने वैचारिक समानता को रेखांकित करते हुए तिरुचिरापल्ली में एमजीआर को श्रद्धांजलि दी। हालांकि इससे अन्नाद्रमुक के साथ संभावित समझ का रास्ता खुला है, लेकिन विजय ने प्रभावी ढंग से भाजपा से दूरी बनाए रखते हुए कहा है कि वह “विचारधारा पर समझौता” नहीं करेंगे। विजय अन्नाद्रमुक या भाजपा जैसी पार्टियों को औपचारिक रूप से सरकार में लाए बिना उनसे बाहर से समर्थन लेने का विकल्प भी तलाश सकते हैं। ऐसी व्यवस्था टीवीके को शासन करने के लिए आवश्यक संख्या सुरक्षित करते हुए नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति देगी। ऐसा ही एक मॉडल 2013 में दिल्ली में देखा गया था, जब आम आदमी पार्टी (आप) ने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद, अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी। हालाँकि, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में वह प्रयोग अल्पकालिक साबित हुआ, जिसने ऐसी व्यवस्थाओं की अंतर्निहित अस्थिरता को उजागर किया। परिदृश्य 3 यदि द्रमुक बहुमत से पीछे रह जाती है और टीवीके एक महत्वपूर्ण संख्या के साथ उभरती है, तो चुनाव के बाद के समीकरण एक दिलचस्प मोड़ ले सकते हैं। एक संभावना यह हो सकती है कि टीवीके किसी विपक्षी गुट को समर्थन दे, हालांकि विजय ने अब तक कांग्रेस के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार किया है। ऐसे परिदृश्य में, वह द्रमुक सरकार का समर्थन करने या उसमें भूमिका के लिए बातचीत करने पर विचार कर सकते हैं, संभवतः उपमुख्यमंत्री के रूप में भी। भारतीय राजनीति में पहले भी इसी तरह की व्यवस्था देखी गई है – विशेष रूप से कर्नाटक में, जहां जनता दल (सेक्युलर) के एचडी कुमारस्वामी कम सीटें जीतने के बावजूद मुख्यमंत्री बने, क्योंकि कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए उनका समर्थन किया था। हालाँकि, तमिलनाडु एक अलग गतिशीलता प्रस्तुत करता है। कर्नाटक के विपरीत, जहां कांग्रेस ने केंद्रीय भूमिका निभाई, द्रमुक यहां प्रमुख शक्ति है। ऐसी किसी भी व्यवस्था से द्रमुक को मजबूती से नियंत्रण में देखने की संभावना होगी, जिससे यह विजय और टीवीके के लिए अधिक जटिल और कम पूर्वानुमानित समीकरण बन जाएगा। परिदृश्य 4 यदि अन्नाद्रमुक बहुमत से कम हो जाती है, तो विजय अपने घोषित वैचारिक रुख को देखते हुए, एनडीए के साथ जुड़ने के लिए अनिच्छुक हो सकते हैं। वह अन्य दबावों से भी निपट रहे हैं, जिसमें उनकी फिल्म जन नागायन की लंबित रिलीज और करूर भगदड़ से संबंधित सीबीआई जांच शामिल है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी। जैसा कि कहा गया है, राजनीति अक्सर असंभावित गठबंधन पैदा करती है। चुनाव के बाद के कठिन परिदृश्य में, विजय अभी भी एमके स्टालिन को सत्ता से बाहर रखने के लिए अन्नाद्रमुक को समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें पहले की स्थिति पर फिर से काम करना पड़े। परिदृश्य 3 यदि विजय पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब होते हैं, तो यह एक ऐतिहासिक परिणाम होगा, जिससे चुनाव बाद गठबंधन या गठबंधन अंकगणित पर कोई निर्भरता खत्म हो जाएगी। टीवीके कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक केए सेनगोट्टैयन ने विश्वास जताते हुए दावा किया है कि पार्टी कम से कम 180 सीटें जीतने की ओर अग्रसर है। अन्नाद्रमुक के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की जरूरत को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “त्रिशंकु विधानसभा का कोई सवाल ही नहीं है। हम 180 से 200 सीटों का लक्ष्य बना रहे हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक
रोजाना लगाएं घर का बना राइस जेल, हो जाएगी कोरियन जैसी ग्लोइंग स्किन, झुर्रियां और डलनेस से मिलेगा छुटकारा

Last Updated:May 03, 2026, 13:21 IST Beauty Tips: कोरियन लोग अपनी ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए चावल से बने घरेलू नुस्खों का खूब इस्तेमाल करते हैं. चावल में मौजूद पोषक तत्व स्किन को अंदर से पोषण देते हैं और उसे सॉफ्ट, हाइड्रेटेड और चमकदार बनाते हैं. यह पूरी रात स्किन पर काम करता है. नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां कम होती हैं और चेहरा नैचुरली ग्लो करने लगता है. गर्मी का मौसम लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर हमारी त्वचा पर भी साफ नजर आने लगता है. तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण स्किन अपनी नमी खोने लगती है, जिससे चेहरा डल दिखने लगता है और समय से पहले झुर्रियां भी आने लगती हैं. ऐसे में स्किन की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. अगर आप भी अपने चेहरे की खोई हुई चमक वापस पाना चाहते हैं, तो यह कोरियन स्किन केयर सीक्रेट आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. LOCAL 18 से बातचीत में ब्यूटिशियन सुदर्शन सोलंकी बताते हैं कि अगर आप नेचुरल तरीके से अपनी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाना चाहते हैं, तो घर पर बना राइस जेल एक बेहतरीन उपाय है. यह त्वचा को नमी देता है, दाग-धब्बों को हल्का करता है और चेहरे को मुलायम बनाता है. कोरियन लोग अपनी ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए चावल से बने घरेलू नुस्खों का खूब इस्तेमाल करते हैं चावल से बने घरेलू नुस्खे के फायदेराइस जेल बनाने के लिए सबसे पहले आधा कप कच्चे सफेद चावल को अच्छी तरह धो लें और उसे दो कप पानी में करीब 15 मिनट तक उबालें, जब तक पानी दूधिया न हो जाए. इसके बाद इसे ठंडा होने दें और फिर मिक्सर में डालकर अच्छी तरह ब्लेंड कर लें. तैयार पेस्ट को मलमल के कपड़े या छलनी से छान लें और कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें, ताकि यह हल्का गाढ़ा हो जाए. इस्तेमाल करने का पूरा तरीकाजब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसमें एक बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल, दो बड़े चम्मच ठंडी ग्रीन टी, एक छोटा चम्मच कच्चा शहद, एक विटामिन E कैप्सूल का तेल, आधा छोटा चम्मच ग्लिसरीन, एक बड़ा चम्मच फर्मेंटेड राइस वॉटर और एक बड़ा चम्मच खीरे का रस मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. इस तरह आपका राइस जेल तैयार हो जाएगा. इसे आप साफ कांच के जार में भरकर एयर टाइट बंद करके फ्रिज में रख सकते हैं और करीब एक हफ्ते तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इस जेल को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह धो लें, फिर हल्के हाथों से इसे चेहरे पर लगाएं और धीरे-धीरे थपथपाकर स्किन में एब्जॉर्ब होने दें. रात में सोने से पहले इसका इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि यह पूरी रात स्किन पर काम करता है. नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आता है, झुर्रियां कम होती हैं और चेहरा नैचुरली ग्लो करने लगता है. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Khandwa,Khandwa,Madhya Pradesh
विनेश फोगाट बोलीं- बृजभूषण के शोषण की मैं भी विक्टिम:गोंडा में कुश्ती लड़ना मुश्किल होगा, यहां मेरे साथ गलत हुआ तो भारत सरकार जिम्मेदार होगी

ओलिंपियन विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर एक बार फिर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए विनेश ने कहा कि गोंडा में ‘सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट’ हो रहा है। आज कुछ मजबूरियों के चलते मैं कहना चाहती हूं कि बृजभूषण शरण के खिलाफ कंप्लेंट करने वाले उन 6 विक्टिम में, मैं भी शामिल हूं। मेरी गवाही भी कोर्ट में चल रही है। मेरा उसके घर (गोंडा) में जाकर, कॉम्पिटिशन लड़ना मुश्किल होगा। मुझे नहीं लगता कि मैं अपना 100 फीसद दे पाऊंगी। एक लड़की के लिए ये काफी मुश्किल होगा। विनेश ने आगे कहा- मैं और मेरी टीम कॉम्पिटिशन लड़ेगी, अगर किसी के साथ कुछ गलत होता है तो इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।






