गर्मियों में जलजीरा रेसिपी: गर्मी में शरीर को पकाया जाता है जलजीरा, घर के इन टुकड़ों से करें मिनट में तैयार; आप रहें कूल-कूल

अब इस पेस्ट को एक बड़े स्थान पर रखा गया है। इसके अलावा इसमें जीरा, काला नमक, सामान्य नमक और इमली का पल्प या नींबू का रस शामिल है। अब ठंडा पानी सभी तरह से अच्छे से मिक्स करें। छवि: एआई जलजीरा पीने के फायदे: शरीर को ठंडा किया जाता है। डायग्नोस्टिक्स से खरीदना है। पाचन तंत्र में सुधार होता है। गैस एसिडिटी से राहत मिलती है। साथ ही, ताजगी और ऊर्जा देता है। छवि: एआई सामग्री: पुदीना पत्ता, हरा धनिया, 1-2 हरी मिर्च, अदरक, 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच मोटा काला नमक, 1 छोटा चम्मच इमली का गूदा, 3-4 चम्मच ठंडा पानी, बर्फ के टुकड़े छवि: मेटा एआई बनाने की आसान विधि: सबसे पहले पुदीना, हरा धनिया, अदरक और हरी मिर्च को मिक्सी में डालें। इसमें छोटे पानी के उपकरण तरह के पीस लें और एक इन्वेस्टमेंट गुड पेस्ट बनाएं लें। छवि: एआई पिड्रॉ तो इसे अच्छा लें शीतल पेय और दोस्त हो जाए। ऊपर से बर्फ का टुकड़ा और ठंडा-ठंडा सर्व करें। ज्यादा ठंडक के लिए इसमें थोड़ी सा ड्रॉपरी भी डाल सकते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए चाट मसाला मिला सकते हैं। छवि: एआई गर्मी में जब भी आपको कुछ ठंडा और चॉकलेट ड्रिंक का मन करे, तो बाजार के ड्रिंक की जगह घर का बना जलजीरा ड्रिंक का मजा ले सकते हैं। यह आपको कूल रिटायरमेंट और स्टेलर टैरोताजा फ़ेल्टोगा से मिलता है। छवि: एआई अगर कट्टापन ज्यादा पसंद है, तो नींबू थोड़ा ज्यादा डाला जाता है। पहले से फ़र्ज़ी में रख सकते हैं। छवि: फ्रीपिक
मंडला में ड्रोन निगरानी, नियमित गश्त और चेकिंग अभियान:बम स्क्वॉड नैनपुर रेलवे स्टेशन पहुंची, सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया

मंडला पुलिस ने अपराध नियंत्रण और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए सघन निगरानी अभियान शुरू किया है। पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा के निर्देश पर जिलेभर में ड्रोन निगरानी, नियमित गश्त और चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) टीम ने नैनपुर रेलवे स्टेशन पर गहन जांच अभियान चलाया। टीम ने स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अतिरिक्त, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख चौराहों, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी नियमित रूप से जांच की जा रही है। मंडला शहर के अपराध संभावित, सुनसान और संवेदनशील क्षेत्रों में हाई क्वालिटी कैमरों से लैस ड्रोन के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन की मदद से अंधेरे और संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर नजर रखी जा रही है, जिससे असामाजिक तत्वों में पुलिस की सक्रियता का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। शहर और संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग वाहनों के जरिए लगातार गश्त की जा रही है। कुंभ स्थल, सहस्त्रधारा, संगम, हाईवे और ढाबा क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। थाना कोतवाली की महिला सुरक्षा पेट्रोलिंग टीम शाम के समय गश्त कर महिलाओं और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। मंडला पुलिस नशा, जुआ और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े संभावित स्थानों पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और निरंतर निगरानी के माध्यम से जिले में अपराधों की रोकथाम और आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
रायसेन में स्वगणना पूरी, प्रदेश में नंबर-1:कल से मकान गणना शुरू, शहरी क्षेत्र में 13 सुपरवाइजर नियुक्त, हर मकान की होगी एंट्री

रायसेन जिले में जनगणना-2027 के तहत स्वगणना का कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर लिया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चले इस अभियान में रायसेन जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। 29 अप्रैल की शाम तक जिले में कुल 93,779 स्वगणना दर्ज की गईं, जो प्रदेश में सर्वाधिक हैं। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के निर्देशन में यह अभियान मिशन मोड में चलाया गया। इसमें प्रशासनिक अमले और आम नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी की। कलेक्टर ने बताया कि स्वगणना प्रक्रिया को सरल बनाया गया था, जिससे नागरिक मोबाइल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सके। स्वगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिले की पंचायतों और वार्डों में शिविर आयोजित किए गए। अधिकारियों ने क्षेत्रों का भ्रमण कर लोगों से सीधा संवाद किया और मौके पर ही स्वगणना कराई। प्रतिदिन प्रगति की निगरानी भी की गई, जिससे लक्ष्य समय पर पूरा हो सका। कल से मकान गणना का काम शुरू होगा अब अगले चरण में कल (1 मई) से मकान गणना (हाउस लिस्टिंग) का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके लिए नगरीय निकायों में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रायसेन नगर पालिका की सीएमओ सुरेखा जाटव ने जानकारी दी कि डायट भवन में गुरुवार को वार्ड प्रभारियों और सुपरवाइजरों की बैठक आयोजित कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। शहरी क्षेत्र के लिए कुल 13 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। इन्हें कार्य की विस्तृत जानकारी और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये टीमें घर-घर जाकर पहले नागरिकों को ऐप डाउनलोड कराएंगी, जिसके बाद प्रत्येक मकान की क्रमवार एंट्री की जाएगी। कर्मचारियों को ब्लॉकवार जिम्मेदारियां भी सौंप दी गई हैं, ताकि कार्य व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।
DJ की आवाज से मर गईं मुर्गियां…क्या इंसानों के लिए भी है खतरा? डॉक्टर के जवाब से चौंक जाएंगे

Loud Sound Effect on Humans: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक शादी में बजने वाले डीजे की तेज आवाज से 140 मुर्गियों के मरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पोल्ट्री फार्म संचालक साबिर अली ने तेज संगीत और शोर का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी दर्ज करा दी है और कहा है कि शोर के कारण मुर्गियों को कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी मौत हो गई. विशेषज्ञों की मानें तो तेज आवाज पक्षी सहन नहीं कर पाते और उनकी मौत हो सकती है. हालांकि मुर्गियों को लेकर हुई इस घटना के बाद एक सबसे बड़ा सवाल इंसानों की सेहत को लेकर भी पैदा हो गया है. लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि जब भी बहुत तेज साउंड में डीजे बजता है तो एक धमक जैसी महसूस होती है और कभी-कभी लगता है कि दिल की धड़कन बढ़ गई है. यहां तक कि कुछ लोगों को तेज आवाज में बजते संगीत से उलझन भी होती है, तो क्या डीजे की तेज आवाज इंसानों के लिए भी खतरा है? और क्या डीजे की आवाज से इंसानों की भी जान जा सकती है? इन तमाम सवालों पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली के प्रोफेसर ईएनटी डॉ. सुधीर माझी ने विस्तार से जानकारी दी है. डॉ. माझी कहते हैं कि मानव शरीर पर तेज आवाज का कई तरह से असर होता है. सबसे पहला असर कानों पर पड़ता है और बहरापन होता है जो आमतौर पर सभी जानते हैं. इसके अलावा ईयर टेनाइटस भी होता है, जिसमें कानों में अजीब सी आवाज आती है, सीटी बजती है या भिनभिनाने की आवाज आती है. तीसरा जो सबसे गंभीर असर पड़ता है वह शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है. तेज आवाज से आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं और ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. ऐसे में बीपी बढ़ने से हार्ट अटैक या सडन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. डॉ. माझी कहते हैं कि तेज आवाज से हार्ट अटैक बहुत कॉमन नहीं है लेकिन अगर 120 डेसीबल से ज्यादा साउंड में रहा जाए तो ये संभावना मजबूत हो जाती है. डीजे में तो इससे भी ज्यादा डेसीबल होता है, जो नुकसान पहुंचा सकता है. हाई साउंड से तनाव भी बढ़ता है. अगर आप सामान्य साउंड से एकाएक डीजे की तेज साउंड में रह गए तो कान के अंदर की नर्व भी डैमेज हो जाती है और स्थाई रूप से बहरापन आ जाता है. कई बार इसे वापस ठीक कर पाना भी संभव नहीं होता. तेज आवाज का शरीर पर क्या असर पड़ता है?तेज आवाज शरीर पर गहरा असर डालती है. कानों से लेकर हार्ट और ब्रेन को भी तेज साउंड से नुकसान होता है. यहां तक कि ज्यादा देर तक हाई साउंड में रहने से जान भी जा सकती है. डीजे जब बजता है तो धड़कन क्यों बढ़ती है?यह स्ट्रैस की वजह से होता है. डीजे की तेज आवाज में आर्टरीज सिकुड़ती हैं, बीपी बहुत बढ़ जाता है. तनाव बढ़ता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है. अगर पहले से कोई हार्ट की बीमारी है तो उस स्थिति में डेथ भी हो सकती है. क्या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है?हां, हो सकता है. आर्टरीज पूरे शरीर में ब्लड की सप्लाई करती हैं और अगर ब्रेन की आर्टरी सिकुड़ जाती है तो ब्लीडिंग हो सकती है, ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन हेमरेज होना संभव है. क्या शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ता है?आर्टरी की वजह से सभी अंगों पर असर पड़ सकता है लेकिन ब्रेन और हार्ट में खासतौर पर असर पड़ सकता है और यह घातक हो सकता है. कितनी देर तक आवाज में रहना खतरनाक है?अगर दो-तीन घंटे का बहुत ज्यादा तेज साउंड का एक्सपोजर है तो यह हार्ट या ब्रेन को नुकसान पहुंचा सकता है. हार्ट का मरीज भी दो घंटे झेल सकता है?अगर कोई पहले से बीमार है और उसकी आर्टरी कमजोर हैं या हार्ट की बीमारी है तो ऐसा व्यक्ति हो सकता है कि तेज आवाज को पांच मिनट भी न सहन कर पाए और उसे कार्डियक अरेस्ट आ जाए.
बेल से मिटेगा ब्रेस्ट कैंसर..! गर्मियों में मिलने वाला सुपरफूड, दवा बनाने में होगा उपयोग, वैज्ञानिकों का रिसर्च

पटना. देश में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. यह गंभीर बीमारी अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले रही है. इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध में जुटे हुए हैं, ताकि सटीक इलाज खोजा जा सके. इसी दिशा में पटना स्थित महावीर कैंसर संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक अहम खोज की है. शोध के दौरान गर्मियों में सुपर ड्रिंक माने जाने वाले बेल के गूदे में ऐसे तत्व पाए गए हैं, जो स्तन कैंसर को रोकने में सहायक हो सकते हैं. चूहों पर इसका परीक्षण भी किया गया. इससे पॉजिटिव रिजल्ट सामने आए हैं. इस महत्वपूर्ण शोध में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार की प्रमुख भूमिका रही है. चूहों पर किया गया शोधवरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनके शोध में यह सामने आया है कि बेल के पल्प में ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो कैंसररोधी प्रभाव रखते हैं. इस दावे की पुष्टि के लिए टीम ने चूहों पर प्रयोग किया. रिसर्च के दौरान चूहों को एक विशेष केमिकल दिया गया, जिससे करीब छह महीने में उनके स्तन में ट्यूमर विकसित हो गया. इसके बाद चूहों को मिश्रित मात्रा में बेल का पल्प दिया गया. कुछ समय बाद यह देखा गया कि ट्यूमर का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा और कुछ दिनों बाद पूरी तरह समाप्त हो गया. इसके बाद चूहे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इस शोध के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि बेल में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो कैंसर के इलाज में सहायक साबित हो सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी और विस्तृत शोध और मानव परीक्षण की आवश्यकता है. पेटेंट करने की तैयारीउन्होंने आगे बताया कि अब उनकी टीम बेल के पल्प में मौजूद मॉलिक्यूल को अलग यानी आइसोलेट कर दोबारा चूहों पर परीक्षण करेगी. अगर इस चरण में भी पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो शोध को पेटेंट कराया जाएगा और प्रकाशित किया जाएगा. इसके बाद अगला चरण मानवों पर क्लीनिकल ट्रायल का होगा, ताकि इसके प्रभाव की विस्तृत जांच की जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे शोध में करीब तीन से चार साल का समय लगा है और प्रक्रिया अभी भी जारी है. इस महत्वपूर्ण अध्ययन को इंग्लैंड की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है. सस्ती हो जाएंगी दवाएंउन्होंने जानकारी दी कि शोध के अनुसार बेल के गूदे में कई प्रकार के फाइटोकेमिकल यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कैरोटेनॉइड, फिनोलिक यौगिक, टैनिन, एल्कलॉइड, टरपेनॉइड, कूमरिन, स्टेरॉयड सैपोनिन, इनुलिन, कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स और लिग्निन शामिल हैं. अध्ययन में पाया गया कि ये तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कैंसर की दवाएं काफी महंगी हैं. कुछ दवाएं हजारों रुपये की होती हैं, जबकि कई की कीमत लाखों तक पहुंच जाती है. ऐसे में अगर इस शोध से प्रभावी मॉलिक्यूल विकसित हो जाता है, तो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की लागत कम हो सकती है और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं.
मैहर में ASI शिवनंदन साकेत का निधन:लीवर संबंधी बीमारी का नागपुर में चल रहा था इलाज; अमदरा में तोड़ा दम

मैहर जिले के अमदरा थाना के एएसआई शिवनंदन साकेत का गुरुवार सुबह इलाज के दौरान निधन हो गया। वे पिछले लंबे समय से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका उपचार महाराष्ट्र के नागपुर में चल रहा था, लेकिन तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। अमदरा अस्पताल में भर्ती थे एएसआई तबीयत में सुधार न होने के कारण शिवनंदन साकेत को हाल ही में अमदरा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी, लेकिन संक्रमण और लीवर डिसऑर्डर के कारण उनके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने सुबह उनकी मृत्यु की पुष्टि की। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव निधन की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पार्थिव देह परिजनों को सौंप दी गई। पुलिसकर्मियों ने दी श्रद्धांजलि एएसआई शिवनंदन साकेत को उनके सहकर्मियों ने एक अनुशासित और मिलनसार अधिकारी के रूप में याद किया। पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
अंजड़ के 5 वार्डों में दूषित जल आपूर्ति:रहवासी बोले- नलों से आ रहा बदबूदार पानी; 8 हजार लोगों को बीमारियों का खतरा

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर के वार्ड क्रमांक 7, 8, 9, 14 और 15 में पिछले कई महीनों से नलों के माध्यम से दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। इस समस्या के कारण करीब 8 हजार रहवासियों के बीच डायरिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार नर्मदा पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल की मांग की है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। वार्डों में भेदभाव और उपेक्षा का आरोप नगर परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि सूरजमल पिपल्या ने परिषद अध्यक्ष मांगीलाल मुकाती पर भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। पिपल्या के अनुसार, नगर के कुछ वार्डों को जानबूझकर उपेक्षित रखा जा रहा है और वहां के नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी नगर परिषद की बताते हुए भेदभाव खत्म करने की मांग की है। अध्यक्ष ने दूषित जल की खबरों को बताया अफवाह नगर परिषद अध्यक्ष मांगीलाल मुकाती ने सभी आरोपों को गलत और अफवाह बताया। मुकाती का दावा है कि वार्ड नंबर 7 और 8 में पीने के लिए अलग से पानी भिजवाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य दैनिक कार्यों के लिए कुएं और बावड़ी का पानी दिया जा रहा है, जबकि पीने के लिए केवल नर्मदा का जल ही उपलब्ध कराया जा रहा है। पाइपलाइन में टूट-फूट से जल वितरण प्रभावित अध्यक्ष मुकाती ने बताया कि गर्मी के मौसम के कारण पाइपलाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे जल वितरण में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सप्लाई में देरी हो सकती है, लेकिन पानी नर्मदा का ही दिया जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ लोग क्षेत्र में गलत जानकारी फैलाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। बावड़ी और कुओं की सफाई न होने से आक्रोश वार्ड 8 के रहवासियों का आरोप है कि उन्हें जो पानी मिल रहा है वह वर्षों से साफ न की गई बावड़ियों और कुओं का है। जमीनी तस्वीरों में भी इन जल स्रोतों में गंदगी नजर आ रही है। नागरिकों ने मांग की है कि नर्मदा की स्थायी पाइपलाइन से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पुराने जल स्रोतों की तत्काल सफाई कराई जाए।
चिंतामण ब्रिज से शिप्रा में कूदे युवक की मौत:उज्जैन में बहन से एक घंटे बाद मिलने का कहकर गया, वापस नहीं लौटा

उज्जैन में 22 वर्षीय युवक ने चिंतामण ब्रिज के पास निर्माणाधीन पुल से शिप्रा नदी में छलांग लगा दी। गोताखोरों ने उसे नदी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान इंगोरिया के ग्राम सुवासा निवासी अंकित पाटीदार के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार बुधवार को अंकित अपनी बड़ी बहन ज्योति के साथ उज्जैन आया था। परिवार शादी समारोह में गया हुआ था, जबकि अंकित और ज्योति घर पर थे। ज्योति इलाज के लिए उज्जैन जाना चाहती थी और अंकित ने कॉलेज के काम का हवाला देकर उसके साथ जाने का फैसला किया। एक घंटे में मिलने का कहकर रुक गया युवक उज्जैन पहुंचकर दोनों जंतर-मंतर क्षेत्र के पास उतरे। अंकित ने अपनी बहन से कहा कि उसका दोस्त आने वाला है और वह यहीं उसका इंतजार करेगा। उसने ज्योति से एक घंटे बाद उसी जगह मिलने या खुद उसके पास आने की बात कही। गोताखोरों ने नदी से बाहर निकाला इसके बाद ज्योति इलाज के लिए चली गई और इसी दौरान अंकित चिंतामण ब्रिज के पास पहुंचा तथा निर्माणाधीन पुल से शिप्रा नदी में कूद गया। घटना की सूचना मिलते ही एसडीईआरएफ और मां शिप्रा तैराक दल के गोताखोर मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद युवक को नदी से बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा एक घंटे बाद जब बहन ज्योति वापस लौटी, तो अंकित वहां नहीं मिला। उसका मोबाइल भी बंद आ रहा था। चिंतित होकर वह घर पहुंची, लेकिन अंकित वहां भी नहीं आया। परिजनों ने इंगोरिया थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने का प्रयास किया, जहां उन्हें नीलगंगा थाने जाने को कहा गया। नीलगंगा थाने में पुलिस ने उन्हें एक अज्ञात शव की तस्वीर दिखाई, जिसकी पहचान अंकित के रूप में हुई। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस फिलहाल इस आत्मघाती कदम के पीछे के स्पष्ट कारणों की जांच कर रही है।
निशांत सिंधु बोले- गुजरात टाइटंस का माहौल परिवार जैसा:गिल से काफी सीखता हूं, धोनी से दबाव के समय शांत रहना सीखा

गुजरात टाइटंस के ऑलराउंडर निशांत सिंधु ने कहा कि टीम का माहौल बिल्कुल परिवार जैसा है, जहां हर खिलाड़ी एक-दूसरे का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि युवा कप्तान शुभमन गिल से वह मैच की तैयारी और अनुशासन को लेकर काफी कुछ सीखते हैं। वहीं, चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी से उन्होंने दबाव के समय शांत रहकर फैसले लेना सीखा। निशांत ने अपनी क्रिकेट यात्रा, अंडर-19 वर्ल्ड कप जीत और परिवार के समर्थन को लेकर भी खुलकर बात की। सवाल: गुजरात टाइटंस जैसी टीम का हिस्सा बनने पर कैसा लगा, जिसने डेब्यू सीजन में ही खिताब जीता था? निशांत: ऐसी टीम का हिस्सा बनकर बहुत अच्छा लगा। यहां का माहौल परिवार जैसा है। मैंने पहले भी इस टीम के बारे में काफी अच्छी बातें सुनी थीं। सवाल: आप एक ऑलराउंडर हैं। वॉशिंगटन सुंदर से कितना सीखने को मिलता है? निशांत: उनसे काफी कुछ सीखने को मिलता है। वह भी ऑलराउंडर हैं और मैं भी। हम मैच और बल्लेबाजी को लेकर काफी चर्चा करते हैं। सवाल: 2022 में आपने भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया। उस जीत का अनुभव कैसा रहा? निशांत: हमने 2019 से ही साथ खेलना शुरू कर दिया था। चैलेंजर ट्रॉफी और एशिया कप भी साथ जीते थे। हमारी टीम की बॉन्डिंग काफी अच्छी थी। इसलिए वर्ल्ड कप में हमें एक-दूसरे को समझने में आसानी हुई। हमने पहले कई टीमों के खिलाफ खेला था, इसलिए उनके बारे में अच्छी जानकारी थी। सवाल: शुभमन गिल काफी युवा कप्तान हैं। उनकी लीडरशिप से क्या सीखते हैं? निशांत: इतनी कम उम्र में उन्होंने खुद को काफी मैच्योर किया है। वह भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। मैं उनके रूटीन और मैच से पहले की तैयारी को ध्यान से देखता हूं और उनसे काफी सीखता हूं। सवाल: आपके पिता शिक्षक और बॉक्सर रहे हैं। आपकी शुरुआती क्रिकेट यात्रा में उनका कितना योगदान रहा? निशांत: बचपन से ही उन्होंने हमारा बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने कभी पढ़ाई के लिए दबाव नहीं डाला। मेरे पिता खुद बॉक्सिंग करते थे और चाहते थे कि मैं खेलों में आगे बढ़ूं। बचपन से ही उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। सवाल: आपने एमएस धोनी से सबसे बड़ी क्या सीख ली? दबाव को कैसे संभालते हैं? निशांत: मैंने उनसे मेहनत और अनुशासन सीखा। दबाव के समय शांत रहना और अपने खेल पर फोकस करना सबसे जरूरी होता है।
निशांत सिंधु बोले- गुजरात टाइटंस का माहौल परिवार जैसा:गिल से काफी सीखता हूं, धोनी से दबाव के समय शांत रहना सीखा

गुजरात टाइटंस के ऑलराउंडर निशांत सिंधु ने कहा कि टीम का माहौल बिल्कुल परिवार जैसा है, जहां हर खिलाड़ी एक-दूसरे का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि युवा कप्तान शुभमन गिल से वह मैच की तैयारी और अनुशासन को लेकर काफी कुछ सीखते हैं। वहीं, चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी से उन्होंने दबाव के समय शांत रहकर फैसले लेना सीखा। निशांत ने अपनी क्रिकेट यात्रा, अंडर-19 वर्ल्ड कप जीत और परिवार के समर्थन को लेकर भी खुलकर बात की। सवाल: गुजरात टाइटंस जैसी टीम का हिस्सा बनने पर कैसा लगा, जिसने डेब्यू सीजन में ही खिताब जीता था? निशांत: ऐसी टीम का हिस्सा बनकर बहुत अच्छा लगा। यहां का माहौल परिवार जैसा है। मैंने पहले भी इस टीम के बारे में काफी अच्छी बातें सुनी थीं। सवाल: आप एक ऑलराउंडर हैं। वॉशिंगटन सुंदर से कितना सीखने को मिलता है? निशांत: उनसे काफी कुछ सीखने को मिलता है। वह भी ऑलराउंडर हैं और मैं भी। हम मैच और बल्लेबाजी को लेकर काफी चर्चा करते हैं। सवाल: 2022 में आपने भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया। उस जीत का अनुभव कैसा रहा? निशांत: हमने 2019 से ही साथ खेलना शुरू कर दिया था। चैलेंजर ट्रॉफी और एशिया कप भी साथ जीते थे। हमारी टीम की बॉन्डिंग काफी अच्छी थी। इसलिए वर्ल्ड कप में हमें एक-दूसरे को समझने में आसानी हुई। हमने पहले कई टीमों के खिलाफ खेला था, इसलिए उनके बारे में अच्छी जानकारी थी। सवाल: शुभमन गिल काफी युवा कप्तान हैं। उनकी लीडरशिप से क्या सीखते हैं? निशांत: इतनी कम उम्र में उन्होंने खुद को काफी मैच्योर किया है। वह भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। मैं उनके रूटीन और मैच से पहले की तैयारी को ध्यान से देखता हूं और उनसे काफी सीखता हूं। सवाल: आपके पिता शिक्षक और बॉक्सर रहे हैं। आपकी शुरुआती क्रिकेट यात्रा में उनका कितना योगदान रहा? निशांत: बचपन से ही उन्होंने हमारा बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने कभी पढ़ाई के लिए दबाव नहीं डाला। मेरे पिता खुद बॉक्सिंग करते थे और चाहते थे कि मैं खेलों में आगे बढ़ूं। बचपन से ही उन्होंने मुझे क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। सवाल: आपने एमएस धोनी से सबसे बड़ी क्या सीख ली? दबाव को कैसे संभालते हैं? निशांत: मैंने उनसे मेहनत और अनुशासन सीखा। दबाव के समय शांत रहना और अपने खेल पर फोकस करना सबसे जरूरी होता है।







