Wednesday, 21 Oct 2026 | 02:32 PM

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महापौर निधि का कानून में प्रावधान नहीं:ग्वालियर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब, 6 मई को अगली सुनवाई; महापौर ने बताया भेदभावपूर्ण फैसला

महापौर निधि का कानून में प्रावधान नहीं:ग्वालियर हाईकोर्ट में सरकार का जवाब, 6 मई को अगली सुनवाई; महापौर ने बताया भेदभावपूर्ण फैसला

ग्वालियर में महापौर निधि पर रोक को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश करते हुए इस रोक को पूरी तरह वैध बताया है। मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 2 मार्च को जारी आदेश में केवल महापौर निधि पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि नगर निगम अधिनियम में महापौर निधि का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, इसलिए इस पर रोक लगाना पूरी तरह कानूनी है। महापौर की ओर से दायर याचिका में इस आदेश को भेदभावपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया गया है। इसमें सवाल उठाया गया है कि जब सभापति और पार्षद निधि जारी रखी गई हैं, तो केवल महापौर निधि पर ही रोक क्यों लगाई गई। महापौर ने 2 मार्च के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की है। अब 6 मई को होने वाली सुनवाई इस पूरे विवाद में अहम मानी जा रही है, जहां कोर्ट का रुख आगे की दिशा तय करेगा। याचिका में तीन मुख्य आपत्तियां रखी गई हैं

सतना में आंधी-बूंदाबांदी से गर्मी से राहत:सुबह से बादलों का डेरा, रात का तापमान 3 डिग्री गिरकर 28.2 पर पहुंचा

सतना में आंधी-बूंदाबांदी से गर्मी से राहत:सुबह से बादलों का डेरा, रात का तापमान 3 डिग्री गिरकर 28.2 पर पहुंचा

सतना में भीषण गर्मी के बीच बुधवार रात से मौसम में अचानक बदलाव देखा गया। गुरुवार सुबह से तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी का सिलसिला जारी है, जिससे लोगों को तेज धूप और गर्मी से राहत मिली है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 42.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ यह 28.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। हालांकि, बुधवार को दिन भर तेज धूप और बादलों की आवाजाही के बावजूद गर्मी से खास राहत नहीं मिली थी। उमस और तपिश ने जनजीवन को प्रभावित किया था, लेकिन गुरुवार सुबह हुई बूंदाबांदी से स्थिति में सुधार हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में बने पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी उत्तर प्रदेश-हरियाणा में बने ऊपरी चक्रवात के कारण एक ट्रफ लाइन मणिपुर से मध्य प्रदेश तक बनी हुई है। इन्हीं मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से सतना समेत रीवा संभाग में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। इस दौरान गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश तेज हवाओं के साथ होने की संभावना है।

'बुलेट बाबा' पर फिल्म, अंधविश्वास या आस्था की कहानी?:डायरेक्टर बोले-सोच कैसे हकीकत बनती है, यही दिखाया; बताया-क्यों नहीं ली ओम बन्ना के परिवार से परमिशन?

'बुलेट बाबा' पर फिल्म, अंधविश्वास या आस्था की कहानी?:डायरेक्टर बोले-सोच कैसे हकीकत बनती है, यही दिखाया; बताया-क्यों नहीं ली ओम बन्ना के परिवार से परमिशन?

हिंदी फिल्म ‘डुग डुग’ का ट्रेलर राजस्थान में चर्चा में बना हुआ है। ट्रेलर में दिखाई गई बाइक (लूना), आस्था और चमत्कार वाली कहानी सीधे ओम बन्ना धाम (बुलेट बाबा) से मेल खाती नजर आ रही है। राजस्थान की लोक आस्था के बड़े प्रतीक पर बनी इस फिल्म को लेकर लोगों में कई सवाल हैं। कोई इसे अंधविश्वास पर तंज कह रहा है तो कोई हास्य व्यंग्य की कहानी मान रहा है। फिल्म के लेखक-निर्देशक ऋत्विक पारीक ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इन्हीं सवालों के खुलकर जवाब दिए… सवाल : ट्रेलर रिलीज के बाद राजस्थान के दर्शकों से क्या रिएक्शन मिला है? जवाब : ट्रेलर से हमें अच्छा ही रेस्पॉन्स मिला है। हालांकि लोगों के मन में थोड़े सवाल भी हैं कि क्या आप सही चीज तो दिखा रहे हो न? अब ये तो आप जब फिल्म देखोगे तो अपने आप समझ में आ जाएगा कि सब कुछ सही है। इसमें हमने ऐसा कुछ दिखाया नहीं है जो सही नहीं हो। सवाल : डुग डुग फिल्म से बतौर लेखक और डायरेक्टर आप क्या कहना चाहते हैं? जवाब : लोगों को ट्रेलर देखकर लग रहा है कि ये अंधविश्वास पर है या धर्म पर सवाल कर रही है। पर यह फिल्म पूरी तरह से इस बात पर आधारित है कि आपके विचार ही आपकी वास्तविकता को आकार देते हैं। ये ठीक उसी तरह है कि जब आप किसी चीज में बहुत ज्यादा विश्वास करते हैं तो वो मैनिफेस्ट हो जाती है। ऐसे में इस बिलीफ और मैनिफेस्टेशन का जरिया कुछ भी हो सकता है- ये एक बाइक भी हो सकती है, एक मूर्ति भी हो सकती है और बिना किसी माध्यम के भी हो सकता है। आपकी सोच ही आपका यूनिवर्स बनाती है, हम इस फिल्म में यही एक्सप्लेन करना चाहते हैं। सवाल : इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखते समय आपने ओम बन्ना धाम की घटना को कितना फॉलो किया और कितना फिक्शन बनाया? जवाब : ये मिक्स है। हमने डायरेक्ट उन पर नहीं रखा है। हमें सरकार ने भी कहा था कि आप ये बताओ कि आपने नाम, कास्ट और कुछ भी ऐसा मेंशन नहीं किया है। इसीलिए हमने बाइक बदल दी और बाकी सब चीजें भी बदली हैं। हालांकि ये थोड़ा उनसे सिमिलर ही है, जितना हम कर सकते थे। बाकी कुछ फिक्शन भी हैं, जैसे नाट्य रूपांतरण। हमने ये भी सुनिश्चित किया है कि किसी को कुछ बुरा न लगे। ऐसा कुछ इस फिल्म में रखा ही नहीं है तो सेंसर भी ये देखकर हैरान था कि अब इसमें कट कहां लगाएं। हमने फिल्म में रंग भी लिए तो इसका भी पूरा ध्यान रखा कि ये ऐसे हों कि अलग दिखें। क्योंकि हमारे यहां लाल रंग दुर्गा माता का हो गया, शिव जी के लिए कुछ लोग काला रंग मानते हैं और हरा रंग इस्लाम का हो गया। ऐसे में हमारे सामने ये भी चैलेंज था कि इनके लिए रंग क्या काम में लें। तो बाद में ये आइडिया आया कि इनकी गाड़ी का ही रंग काम में लेंगे। सीट का रंग गुलाबी और बॉडी नीली है तो मुख्य किरदार ठाकुर साहब के जाने के बाद लोगों ने यही कलर उठा लिए और वो कलर ही उनकी आइडेंटिटी बन जाते हैं। सवाल : ओम बन्ना (बुलेट बाबा) की सच्ची घटना आपको पहली बार कब और कैसे पता चली? जवाब : मेरी दादी मां ने इसके बारे में मुझे बताया था। मैं खुद जयपुर से हूं तो पूरा बचपन यहीं मालवीय नगर के आस-पास ही बीता है। दादी मां मुझे खाटू श्याम जी, सालासर और कई मंदिरों में ले जाती थीं तो ये सब देखा हुआ ही है। अब ये याद नहीं है कि वहां पहली बार कब गया था। आप जयपुर में हैं तो गोविंददेव जी कैसे पता हैं? बस यही मामला है। शायद मैं नौवीं क्लास में था जब हम जोधपुर गए थे, तब की बात होगी। तब लगा था कि कमाल है भाई, ये क्या चीज है! बाद में इसी इंस्पिरेशन को लेकर फिल्म बनाई है। सवाल : फिल्म में मुख्य किरदार की मौत के बाद बाइक (लूना) का ‘चमत्कार’ दिखाया गया है? क्या आपने असली ओम बन्ना घटना के गवाहों या स्थानीय लोगों से बात की थी? जवाब : हां, उनकी कहानी तो हमने सुनी हुई है। मैं सीधा जोधपुर और पाली के अपने रिश्तेदारों को फोन लगाता था और वो बताते थे। इसके अलावा न्यूज पर भी काफी मटेरियल था। फिल्म में एक सीन है कि जब रिपोर्टर आता है तो वो भी एंड तक बुलेट पर ही दिखता है। ये आइडिया हमें एक न्यूज से ही मिला था। स्टोरी की रिसर्च तो ऐसी है कि सब देखा हुआ है, पर जो मेन रिसर्च थी वो आर्ट और डिजाइनिंग में थी। इसके लिए हमने पेंटिंग्स का सहारा लिया था। हमने पिक्चर में काफी चीजें लोगों को पेंटिंग्स के जरिए भी समझाने का प्रयास किया है। ये लोकल हैंड पेंटर ने किया और इसमें काफी मेहनत लगी है। सवाल: फिल्म में कॉमेडी-सटायर के रूप में क्यों चुना गया? जवाब : मैं इस फिल्म से दोनों पॉइंट ऑफ व्यू बताना चाह रहा था। लोग देखें तो उन्हें लगे कि ये क्या है? इसीलिए हमने जब इसे ग्लोबली दिखाया तो फिल्म के बीच में इंटरवल के समय डिस्क्लेमर डाला कि ये रियल घटना पर बनाई गई फिल्म है। अगर हम ये स्टार्टिंग में डाल देते तो उन्हें लगता कि ऐसे ही लिख रखा है। अब ज्यादा मैं आपको बता नहीं सकता, लेकिन फिल्म के अंत में आप मानेंगे कि सटायर तो है, पर इसके साथ ही वो पहलू भी समझेंगे कि कुछ ऊपरी ताकतें हैं, जिन्हें डिस्क्राइब नहीं किया जा सकता, पर वो हैं। इंसान का काम ही यही है कि ऐसी चीजों के लिए सवाल करो। सवाल: क्या आपको लगता है कि फिल्म रिलीज के बाद कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस मान सकते हैं? आप ऐसे विवाद को कैसे हैंडल करते हैं? जवाब : अब जब कोई फिल्म देखेगा तो उसे पता चल जाएगा कि कुछ पावर तो है। बाकी जिसने नहीं देखी है, उसे तो क्या ही कह पाऊंगा। आप फिल्म देखेंगे तो समझ ही जाएंगे कि मैंने अपना काम

मैहर में दादी करा रही थी बाल विवाह:कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रोकी; कानून के बारे में बताया

मैहर में दादी करा रही थी बाल विवाह:कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रोकी; कानून के बारे में बताया

मैहर जिले के ग्राम रामगढ़ में प्रशासन ने बुधवार रात करीब 8 बजे एक नाबालिग का बाल विवाह रुकवाया। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी को बाल विवाह की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अमरपाटन एसडीएम डॉ. आरती सिंह के मार्गदर्शन में महिला और बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और विवाह रुकवाया। यहां करीब 13 साल की लड़की का विवाह कराया जा रहा था। बच्ची की दादी ही करा रही थी शादी बालिका के माता-पिता का निधन हो चुका है और वह अपनी दादी के साथ रह रही है। दादी ही उसका बाल विवाह करा रही थी। थाना प्रभारी ताला महेंद्र मिश्रा और नायब तहसीलदार अनिल सिंह को सूचना मिलते ही वे रात करीब 8 बजे ग्राम रामगढ़ पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बालिका की दादी और अन्य परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समझाइश के बाद परिजनों ने विवाह तुरंत रोकने पर सहमति जताई और यह आश्वासन दिया कि बच्ची का विवाह 18 साल की आयु पूरी होने से पहले नहीं किया जाएगा। प्रशासन की ओर से मौके पर पंचनामा तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की गई। साथ ही परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में भी जागरूक किया गया।

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

लगभग 90% मतदान के साथ, कोलकाता में अब तक का सर्वाधिक मतदान हुआ; अन्य महानगर कहाँ खड़े हैं | भारत समाचार

ICSE, ISC Results 2026 Live Updates: CISCE Class 10th, 12th Results today at cisce.org

आखरी अपडेट:30 अप्रैल, 2026, 08:18 IST कुल मिलाकर, कोलकाता में औसतन 88.4% मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 28 प्रतिशत अंक से अधिक की तेज वृद्धि है। कोलकाता में, सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक थी। (फोटो: पीटीआई) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में प्रभावशाली 92.67% मतदान दर्ज किया गया, जो मजबूत सार्वजनिक भागीदारी को दर्शाता है। निर्वाचन क्षेत्रों में, कैनिंग पुरबा – जहां पिछले चुनावों में हिंसा देखी गई थी – में राज्य में सबसे अधिक 97.7% मतदान हुआ। कोलकाता में, सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक थी। कोलकाता उत्तर में 89.3% मतदान दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता दक्षिण – जिसमें हाई-प्रोफाइल भबनीपुर सीट शामिल है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं – में 87.84% मतदान दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, कोलकाता में औसतन 88.4% मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 28 प्रतिशत अंक से अधिक की तेज वृद्धि है। 92.9% के साथ, पश्चिम बंगाल में मतदान राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है, जो 2011 के चुनाव में निर्धारित 84.3% के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है। जहां अन्य मेट्रो खड़ी हैं 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, चेन्नई 83.74% के मजबूत मतदान के साथ सामने आया, जो नागरिक भागीदारी के एक महत्वपूर्ण स्तर को दर्शाता है। यह मुंबई के साथ बिल्कुल विपरीत है, जहां नवीनतम नागरिक चुनावों में भागीदारी कम-50% सीमा में रही, जो अपेक्षाकृत कम मतदाता भागीदारी के लगातार पैटर्न को दर्शाती है। बेंगलुरु ने भी इसी तरह का रुझान दिखाया है, जहां 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदान आम तौर पर 50% से 55% के बीच रहा। राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हुए भी दिल्ली ने 2025 के विधानसभा चुनाव में लगभग 60% मतदान दर्ज किया। हालाँकि यह मुंबई और बेंगलुरु से अधिक है, फिर भी यह चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में देखी गई अधिक मजबूत भागीदारी से काफी पीछे है। मतदान प्रतिशत इतना अधिक क्यों था? पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान में दो प्रमुख कारकों का योगदान रहा। पहला है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जिसने लगभग 90 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया। छोटे, अधिक सटीक हर के साथ, प्रतिशत स्वाभाविक रूप से बढ़ गया। दूसरा, मतदाता की अत्यावश्यकता थी, क्योंकि उन मतदाताओं में “क्रोध” की भावना थी जिनके नाम सूची में रह गए थे। बूथों पर भीड़ दिखाई दे रही थी, खासकर उन प्रवासी श्रमिकों के बीच जो राज्य में लौट आए थे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य के संशोधनों में उनके नाम नहीं काटे जाएं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 30 अप्रैल, 2026, 08:08 IST न्यूज़ इंडिया लगभग 90% मतदान के साथ, कोलकाता में अब तक का सर्वाधिक मतदान हुआ; जहां अन्य मेट्रो खड़ी हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता मतदान(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)दूसरे चरण का मतदान(टी)कैनिंग पुरबा मतदान(टी)कोलकाता मतदाता मतदान(टी)ममता बनर्जी भबानीपुर(टी)सुवेंदु अधिकारी बीजेपी

बार-बार प्यास और थकान? जौ का पानी दे सकता है राहत, एनर्जी, ठंडक और पाचन के लिए परफेक्ट ड्रिंक

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Summer Hydration Drink: गर्मी जब अपने पूरे तेवर में होती है, तब सिर्फ ठंडा पी लेना काफी नहीं होता-शरीर को ऐसा पेय चाहिए जो अंदर से ठंडक दे और लंबे समय तक हाइड्रेशन बनाए रखे. ऐसे में जौ का पानी एक पुराना लेकिन बेहद काम का ऑप्शन बनकर सामने आता है. यह न तो भारी लगता है, न ही इसमें ज्यादा झंझट है. गांवों से लेकर शहरों तक, लोग इसे अलग-अलग तरीकों से पीते रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि भी हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक स्मार्ट समर ड्रिंक मान रहे हैं, अगर आप बार-बार पानी पीकर भी थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव ला सकता है. जौ का पानी क्यों है खास?जौ के दानों से बना यह हल्का पेय देखने में सादा लगता है, लेकिन इसके अंदर छिपे फायदे इसे खास बनाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर, खासकर बीटा-ग्लूकन, शरीर को धीरे-धीरे हाइड्रेट करता है. यानी आप सिर्फ प्यास नहीं बुझाते, बल्कि शरीर को लंबे समय तक संतुलित रखते हैं. शरीर को ठंडा रखने में मददगर्मी में शरीर जल्दी गर्म हो जाता है. जौ का पानी प्राकृतिक तरीके से बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करने में मदद करता है. यही वजह है कि पुराने समय में भी इसे लू से बचाव के लिए पिया जाता था. पाचन के लिए हल्का और आरामदायकगर्मी में अक्सर भूख कम लगती है और पेट भारी-भारी सा लगता है. ऐसे में जौ का पानी पाचन को सहज बनाता है. यह पेट पर बोझ नहीं डालता, बल्कि हल्का महसूस कराता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एनर्जी लेवल रहता है स्थिरअगर आप दोपहर में थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण ब्लड शुगर का अचानक गिरना भी हो सकता है. जौ का पानी इस उतार-चढ़ाव को थोड़ा संतुलित रखने में मदद करता है. दिनभर में कैसे शामिल करें जौ का पानी?1. मिड-मॉर्निंग रिफ्रेश ड्रिंकसुबह 11 बजे के आसपास जब शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, तब एक गिलास ठंडा जौ का पानी बहुत काम आता है. इसमें थोड़ा नींबू और चुटकीभर नमक मिलाने से यह एक नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक बन जाता है. 2. लंच के बाद हल्का सपोर्टदोपहर का खाना खाने के बाद अगर भारीपन लगता है, तो थोड़ा-सा जौ का पानी पुदीने के साथ पी सकते हैं. यह पाचन को स्मूद बनाता है और पेट को आराम देता है. 3. दोपहर की थकान का हलजब 3-4 बजे के बीच मीठा या कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है, तब जौ का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें भुना जीरा और काला नमक डालकर पीने से स्वाद भी बढ़ जाता है और शरीर को फायदा भी मिलता है. 4. शाम का हल्का कूलरशाम को जब थोड़ी ठंडक चाहिए होती है, तब जौ का पानी हल्का ठंडा करके पीना सही रहता है. बहुत ज्यादा ठंडा करने की जरूरत नहीं-नॉर्मल ठंडा ही ज्यादा फायदेमंद होता है. 5. बाहर जाने से पहलेअगर आपको धूप में निकलना है, तो पहले से एक गिलास जौ का पानी पी लें. यह शरीर को अंदर से तैयार करता है और जल्दी डिहाइड्रेशन नहीं होने देता. घर पर ऐसे बनाएं जौ का पानीजौ का पानी बनाना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा समय चाहिए. -सबसे पहले 2 चम्मच जौ के दानों को अच्छे से धो लें ताकि धूल-मिट्टी निकल जाए. फिर एक पैन में 3 कप पानी डालकर उसमें जौ डालें और उबालें. जब पानी हल्का सफेद और थोड़ा गाढ़ा दिखने लगे, तब गैस धीमी करके 20-25 मिनट तक पकाएं. -अब गैस बंद करके इसे ठंडा होने दें और छानकर अलग कर लें. आप चाहें तो इसमें नींबू का रस, थोड़ा नमक या हल्का-सा गुड़ मिलाकर स्वाद के अनुसार तैयार कर सकते हैं. छोटी-छोटी आदत, बड़ा असरजौ का पानी कोई जादुई पेय नहीं है, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत में शामिल करने से फर्क जरूर महसूस होता है. खासकर जब लोग हेल्दी और नेचुरल ऑप्शन की तरफ लौट रहे हैं, तब यह ड्रिंक एक सिंपल लेकिन असरदार चॉइस बन गया है. अगर आप भी गर्मी में बार-बार थकान, प्यास या सुस्ती से परेशान रहते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक स्मार्ट एडिशन हो सकता है-बिना ज्यादा खर्च और बिना किसी साइड इफेक्ट के. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

छतरपुर में चाट दुकानदार को अगवा करने की कोशिश, VIDEO:बस स्टैंड पर दबंगों ने मारपीट कर गाड़ी में बैठाने का किया प्रयास

छतरपुर में चाट दुकानदार को अगवा करने की कोशिश, VIDEO:बस स्टैंड पर दबंगों ने मारपीट कर गाड़ी में बैठाने का किया प्रयास

छतरपुर : जिले के भगवां थाना क्षेत्र के रामटौरिया बस स्टैंड पर दिनदहाड़े एक चाट दुकानदार के अपहरण की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दबंगों ने सरेआम दुकानदार के साथ मारपीट की और उसे जबरन गाड़ी में डालकर ले जाने का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों की सतर्कता से वारदात नाकाम हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुरानी रंजिश में हमला, बीच बाजार मचा हड़कंप जानकारी के अनुसार पीड़ित जग्गी पटेल रामटौरिया बस स्टैंड पर चाट का ठेला लगाता है। बुधवार को वह रोज की तरह दुकान चला रहा था, तभी पुरानी रंजिश के चलते गौरीशंकर यादव हलावनी अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा। दोनों ने अचानक दुकानदार पर हमला बोल दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मारपीट कर जबरन गाड़ी में डालने की कोशिश प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपियों ने पहले जग्गी के साथ जमकर मारपीट की और फिर उसे घसीटते हुए अपनी गाड़ी की ओर ले जाने लगे। वे उसे जबरदस्ती वाहन में डालकर अगवा करना चाहते थे। इस दौरान दुकानदार की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और बीच-बचाव किया। भीड़ की हिम्मत से नाकाम हुई वारदात स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर आरोपियों को घेरने की कोशिश की, जिससे घबराकर दोनों मौके से फरार हो गए। लोगों की तत्परता से दुकानदार की जान बच गई। घटना के बाद इलाके में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी घटना का वीडियो किसी ने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। बस स्टैंड पर सुरक्षा पर उठे सवाल दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

पांता भात रेसिपी: मोदी के झालमुड़ी के बाद अब ममता दीदी के ‘पांता-भात’ का क्रेज़, गर्मी में स्वाद के साथ पेट को मिलेगा ठंडक, नोट करें रेसिपी

पंता भात रेसिपी

30 अप्रैल 2026 को 07:49 IST पर अपडेट किया गया पैंता भात रेसिपी: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झालमुड़ी का मशालेदार वीडियो वायरल हुआ था। इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वोट दिया और अपने खास संदर्भ में ‘पंता भाट’ का जिक्र किया, जिसने देखते ही इंटरनेट पर मीम्स और रेसिपीज की बाढ़ ला दी। जो डिश कभी बंगाल के आम घर का सादा खाना था, वह अब एक स्टॉक ट्रेंड बन गया है। अनुसरण करना : ममता बनर्जी ने वोट के दिन लोगों से कहा कि जरूरत हो तो खाना बनाने की चिंता न करें, एक दिन पहले पांता-भात तैयार करके रख लें। लोग सुबह जल्दी मतदान करें और खाना बनाने में समय खराब न हो। छवि: सोशल मीडिया पांता-भाट बंगाल के बेहद पुराने और पारंपरिक व्यंजन हैं। रात के बचे हुए चावल को पानी में भिगोकर रातभर रखा जाता है और अगले दिन खाया जाता है। छवि: फेसबुक पाँता भात नमक, हरी मिर्च, प्याज, सरसों के तेल की कुछ बूंदें या तली हुई गन्ने के साथ खाया जाता है। आप मछली भुजिया या आलू भर्ता के साथ भी खा सकते हैं. छवि: सोशल मीडिया पुराने समय में जब फ़र्ज़ी नहीं हुआ करते थे, तब बचे हुए चावल को क्रांति के स्थान पर पानी में अकेलेकर सेफ रखा जाता था।इससे चावल ख़राब भी नहीं होता था और अगले दिन भी खाया जाता था। छवि: सोशल मीडिया किसान में सुबह जल्दी ही निकल जाते थे, ऐसे में पंता-भात उनके लिए झटपट तैयार होने वाला खाना था। पेट भरता था, शरीर को ठंडक मिलती थी और गर्मी में राहत भी मिलती थी। छवि: सोशल मीडिया पाँता भात पाचन, पेट की ठंडक और प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहतरीन सुपरफूड है। यह प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत है, जो कि एंटीऑक्सीडेंट को स्वस्थ बनाता है, कब्ज को दूर करता है। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित : आर्या पांडे प्रकाशित 30 अप्रैल 2026, 07:49 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)पंटा भात(टी)पंटा भात रेसिपी(टी)किण्वित चावल का व्यंजन(टी)पारंपरिक बंगाली भोजन(टी)ममता बनर्जी की अपील(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बचे हुए चावल का व्यंजन(टी)ग्रीष्मकालीन ठंडा भोजन(टी)पंटा भात