“बड़े घर की माताएं भी पी रही हैं”:नागपुर में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर बवाल, कांग्रेस बोली- माफी मांगे

छतरपुर: नागपुर में देश के चर्चित कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। नागपुर में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने महिलाओं में बढ़ती शराब पीने की आदत पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आजकल पुरुष तो छोड़िए, बड़े घरानों की माताएं भी पी रही हैं… बजरंग बली बचाएं।” उनके इस बयान के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। कथा के दौरान शास्त्री ने कहा कि जब माताएं ही “विचित्र संस्कार” अपनाने लगेंगी तो बच्चों पर उसका असर पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे हालात हो सकते हैं कि बच्चे के रोने पर उसे भी शराब पिलाकर सुला दिया जाए। उन्होंने पुराने समय के संस्कारों और मर्यादाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले लोग गलत काम करने से डरते थे, लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। पहले भी बयानों पर हुआ है विवाद यह पहला मौका नहीं है जब शास्त्री के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले नागपुर में ही एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या देश सेवा के लिए समर्पित करने की अपील की थी। इस बयान पर भी देशभर में विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि बच्चे को सेना या डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करना चाहिए। महिला कांग्रेस का विरोध शास्त्री के ताजा बयान के बाद छतरपुर में विरोध तेज हो गया है। महिला कांग्रेस नेत्री दीप्ति पांडे ने बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि व्यासपीठ से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “पूरा देश उन्हें सुनता है, ऐसे में माताओं के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने शास्त्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रथम गुरु मां होती है। और व्यास पीठ से इस तरह के बयान देना उचित नहीं है। शास्त्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है, वरना वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगीं। लगातार बयानों से बढ़ रही सियासी गर्मी.. धार्मिक मंच से दिए जा रहे ऐसे बयानों ने एक बार फिर समाज और राजनीति के बीच बहस को तेज कर दिया है। समर्थक जहां इसे सामाजिक चेतावनी बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। नागपुर में शिवाजी महाराज पर दिया था बयान नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे। शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है। विवाद बढ़ा तो धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांग ली थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया। हम उन लोगों की आलोचना कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनके स्वराज्य ने हमें ‘हिंदू राष्ट्र’ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। मैंने अपने शब्दों में महाराज और संतों के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा- छत्रपति शिवाजी महाराज में आस्था रखने वाले सभी लोग हमारे अपने हैं। अगर हम ऐसे मुद्दों पर आपस में बहस करेंगे, तो इससे केवल दूसरों को ही फायदा होगा। मेरा किसी के प्रति कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं।
क्या बालों को डाई करने से काले बाल भी हो जाते हैं सफेद? मन में हैं कंफ्यूजन तो दूर कर लीजिए अपना भ्रम

Last Updated:April 29, 2026, 18:17 IST क्या बार-बार हेयर डाई करने से काले बाल भी सफेद होने लगते हैं? बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है और इसे लेकर कई तरह की बातें भी सुनने को मिलती हैं. अगर आप भी इस कंफ्यूजन में हैं, तो सच्चाई जान लेना जरूरी है. ख़बरें फटाफट हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों में सफेदी दिखते ही बहुत से लोग हेयर डाई का सहारा लेते हैं. कोई फैशन के लिए बाल रंगता है तो कोई सफेद बाल छिपाने के लिए. लेकिन इसी बीच एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या बार-बार डाई करने से काले बाल भी धीरे-धीरे सफेद होने लगते हैं? कई लोग मानते हैं कि हेयर कलर लगाने से बाल खराब हो जाते हैं और नए बाल सफेद निकलने लगते हैं. अगर आपके मन में भी ऐसा कंफ्यूजन है, तो इस भ्रम को समझना जरूरी है. असल बात यह है कि हेयर डाई सीधे तौर पर काले बालों को सफेद नहीं बनाती. बालों का रंग हमारे शरीर में बनने वाले मेलेनिन नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है. जब उम्र बढ़ने लगती है या जेनेटिक कारण होते हैं, तो मेलेनिन कम बनने लगता है और बाल सफेद दिखने लगते हैं. यानी बाल सफेद होने की मुख्य वजह डाई नहीं, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले बदलाव, उम्र, खानपान, तनाव और आनुवंशिक कारण होते हैं. इसलिए यह कहना गलत होगा कि सिर्फ डाई लगाने से काले बाल सफेद हो जाते हैं. गलत प्रोडक्ट आपके बालों को बनाते हैं बेजानहालांकि, लगातार और गलत तरीके से हेयर डाई इस्तेमाल करने से बालों को नुकसान जरूर हो सकता है. कई हेयर कलर में केमिकल्स होते हैं, जो बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. अगर डाई बार-बार की जाए, लंबे समय तक लगी रहे या सही देखभाल न की जाए, तो बाल टूटने लगते हैं और उनकी चमक कम हो सकती है. ऐसे में लोगों को लगता है कि बाल सफेद हो रहे हैं, जबकि कई बार बाल सिर्फ डैमेज और बेजान नजर आ रहे होते हैं. डाई आपके रूट्स को नहीं डैमेज करताकुछ लोग डाई करने के बाद नए उगे बालों में सफेदी देखकर घबरा जाते हैं. दरअसल, डाई केवल पहले से मौजूद बालों को रंगती है, सिर की जड़ों या नए उगने वाले बालों पर इसका असर नहीं होता. जब कुछ दिनों बाद जड़ों से नए बाल निकलते हैं और वे सफेद दिखाई देते हैं, तो लोगों को लगता है कि डाई की वजह से ऐसा हुआ है. जबकि सच्चाई यह है कि वे बाल पहले से ही सफेद आने वाले थे, बस डाई के कारण पहले नजर नहीं आ रहे थे. अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनेंअगर आप हेयर डाई करते हैं, तो कुछ सावधानियां रखना जरूरी है. हमेशा अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट चुनें और बहुत ज्यादा सस्ते या नकली रंगों से बचें. डाई लगाने से पहले पैच टेस्ट करें, ताकि एलर्जी का खतरा कम हो. बार-बार बाल रंगने के बजाय जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करें. साथ ही डाई के बाद अच्छे शैम्पू, कंडीशनर और हेयर ऑयल से बालों की देखभाल करें, ताकि बाल स्वस्थ रहें. ऐसे बचाएं बालों को सफेद होने सेबालों को समय से पहले सफेद होने से बचाने के लिए लाइफस्टाइल भी बहुत मायने रखती है. तनाव कम लें, अच्छी नींद लें और संतुलित आहार खाएं. शरीर में विटामिन B12, आयरन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी बालों की सेहत पर असर डाल सकती है. इसलिए सिर्फ बाहर से रंग लगाने के बजाय अंदर से पोषण देना भी जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 18:17 IST
विदिशा में सिंचाई नहर पर कब्जा, 11 को नोटिस:उद्वहन योजना पर अतिक्रमण, बन गए मकान और कॉलोनियां; कांग्रेस ने उठाए सवाल

विदिशा जिले में दशकों पुरानी उद्वहन सिंचाई योजना की नहर पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। किसानों के लिए बनाई गई यह नहर अब जमीन से लगभग गायब हो चुकी है। जहां कभी पानी बहता था, वहां अब पक्के निर्माण और कॉलोनियां बन गई हैं। मामले में राजस्व विभाग ने 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, दौलतपुरा और मदनखेड़ा क्षेत्र में वर्षों पहले बनाई गई इस नहर का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना था। वर्तमान में नहर का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है और मौके पर केवल जर्जर संरचनाएं ही बची हैं। जहां पहले पानी बहता था, वहां अब कंक्रीट निर्माण हो चुके हैं। कई स्थानों पर कॉलोनियां विकसित हो गई हैं, जिससे योजना का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया है। मशीनरी जर्जर, उपकरण भी गायब बेतवा घाट के पास लगी सिंचाई मशीनरी खराब हालत में है। कई उपकरण अनुपयोगी हो चुके हैं, जबकि कुछ के चोरी होने की आशंका भी जताई जा रही है। मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है और नहर की जमीन पर कब्जा होना गंभीर मामला है। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार यह योजना 40-50 साल पुरानी है, जिसके रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच के आधार पर आगे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
शांत मतपत्र, अनिश्चित फैसला: यहां 3 कारक हैं जो बंगाल के नतीजे तय करेंगे | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 18:03 IST 2026 का बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और करीबी मुकाबले वाला प्रतीत होता है बुधवार, 29 अप्रैल, 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान वोट डालने के लिए लोग कतार में इंतजार कर रहे हैं। (छवि: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में एक बार बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण और धांधली-मुक्त दो चरण के चुनाव हुए हैं, जो दशकों की हिंसा, झड़पों और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों से एक दुर्लभ प्रस्थान है। यह बदलाव एक अभूतपूर्व सुरक्षा तैनाती से प्रेरित है, जिसमें केंद्रीय बलों की 2,400 से अधिक कंपनियां और राज्य के बाहर से पुलिस-पर्यवेक्षकों के रूप में बड़ी संख्या में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। साथ ही, ममता बनर्जी सरकार के तहत कानून और व्यवस्था की गिरती स्थिति को लेकर राजनीतिक संदेश ने कहानी को नया आकार दिया है, जिससे भाजपा को उनकी पुलिस और प्रशासन के शासन रिकॉर्ड पर सवाल उठाने का मौका मिला है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सहित दोनों दलों के नेताओं की तीखी टिप्पणियां सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे उपायों और घटनाओं का परिणाम एक विधानसभा चुनाव है जो 2021 की तुलना में कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी और करीबी मुकाबले वाला प्रतीत होता है, जो न केवल परिणामों में, बल्कि प्रक्रिया और धारणा दोनों में बदलाव का संकेत देता है। हालाँकि, असली कहानी अब तीन प्रमुख कारकों या तीन प्रश्नों में निहित है: क्या प्रवासी मतदाताओं ने निरंतरता या परिवर्तन को चुना? क्या महिला मतदाता एकजुट रहीं या पुनर्गणना कीं? क्या समेकन पैटर्न कायम रहा या बदल गया? ये प्रश्न अब परिणाम को परिभाषित करते हैं। पहला, प्रवासी वोट- यह किस ओर झुका और क्यों? इन मतदाताओं ने न केवल भाग लेने के लिए बल्कि नामावली में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए, अक्सर अत्यधिक गर्मी की स्थिति में भी लंबी दूरी की यात्रा की। क्या यह मौजूदा तृणमूल कांग्रेस के समर्थन में तब्दील हो गया, जिसे स्थानीय स्तर पर अंतर्निहित माना जाता है? या क्या यह भाजपा और इसकी बड़ी राष्ट्रीय पिच के साथ जुड़ गया? यह सबसे अधिक तरल परिवर्तनशील रहता है। दूसरा, महिला वोट करती हैं। महिला मतदाता लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक मजबूत आधार रही हैं। अहम सवाल यह है कि क्या मामूली बदलाव भी हुआ है। उच्च मतदान वाले चुनाव में, इस ब्लॉक के भीतर छोटे बदलाव निर्णायक रूप से परिणामों को बदल सकते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारक हिंदू एकीकरण कारक है। क्या कोई समेकन हुआ है? क्योंकि, मुसलमानों के विपरीत, ऐतिहासिक रूप से हिंदुओं को एकीकृत या सामूहिक तरीके से मतदान करने वाला नहीं माना गया है। विभिन्न जिलों और सीटों पर हिंदू हमेशा से विषम, गैर-अनुरूपतावादी प्रकार के रहे हैं। क्या इस बार कोई समेकन हुआ है, और क्या यह दृढ़, गहरा या खंडित हुआ है? कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली सीटों पर, एकजुटता बनाम विभाजन अक्सर अंतिम परिणाम निर्धारित करता है। इसके अलावा, यदि हिंदू एकीकरण चुनावी पैटर्न में होता है, तो यह लगभग पांच दशकों में पहली बार बंगाल की राजनीति को नया आकार देने की संभावना है, और यह उस पारंपरिक विचार को भी तोड़ देगा जहां वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों ने सत्ता में बने रहने के लिए 30% मुस्लिम वोटों को सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। इस चुनाव में भी मुसलमान दीदी की तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होते दिख रहे हैं. सुरक्षा ताकत बनाम राजनीतिक संदेश पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान हो रहा है, जिसमें 90% तक मतदान हुआ है, जो पहले चरण की तरह है। सतह पर, रुझान अपरिवर्तित दिखता है। लेकिन चुनाव केवल मतदान से तय नहीं होते; वे इस बात पर निर्भर हैं कि किसने किसे वोट दिया और किस चीज़ ने उन्हें प्रेरित किया। जो बात तुरंत सामने आती है वह बड़े पैमाने पर हिंसा की अनुपस्थिति है। छोटी-मोटी झड़पों को छोड़कर, मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण और अपेक्षाकृत धांधली से मुक्त रहा। पूरे दिन किसी मौत की रिपोर्ट नहीं आई और न ही व्यापक बम हिंसा या ऐतिहासिक रूप से बंगाल चुनाव से जुड़ा कोई दृश्य सामने आया। भारत के चुनाव आयोग के लिए, यह एक उल्लेखनीय प्रशासनिक सफलता का प्रतीक है। 2021 के साथ विरोधाभास महत्वपूर्ण है। जबकि उस समय मतदान के दिन अधिकतर नियंत्रण था, उसके बाद चुनाव के बाद तीव्र हिंसा हुई, जिसने जनादेश को प्रभावित किया। इस बार, कम से कम अब तक, प्रक्रिया कहीं अधिक निहित प्रतीत होती है। फिर भी, इस शांत सतह के नीचे एक पुनर्गणित मतदाता है। उच्च मतदान न केवल लामबंदी बल्कि इरादे और तात्कालिकता को भी दर्शाता है। घर लौटने वाले प्रवासी, पहले से निष्क्रिय मतदाता बाहर निकल रहे हैं, और पारंपरिक गुट वफादारी का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं – ये पैटर्न एक बदलाव का सुझाव देते हैं जिसे कच्चे प्रतिशत पूरी तरह से समझा नहीं सकते हैं। पूरे दक्षिण बंगाल में, जो इस चरण का केंद्र है और ममता बनर्जी का राजनीतिक आधार है, मुकाबला काफी कड़ा और करीबी रहा है। क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय संदेश दोनों में स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा के साथ, अभियान की कहानियों में तीव्र टकराव हुआ है। परिणाम एक ऐसा चुनाव है जो आसान व्याख्या का विरोध करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 18:02 IST समाचार चुनाव शांत मतपत्र, अनिश्चित फैसला: यहां 3 कारक हैं जो बंगाल के नतीजे तय करेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव
अमेरिका ट्रम्प के तस्वीर वाले पासपोर्ट जारी करेगा:आजादी की 250वीं वर्षगांठ पर लिमिटेड एडिशन मिलेगा, ट्रम्प का गोल्डन सिग्नेचर भी दिखेगा

अमेरिका अपनी आजादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले खास पासपोर्ट जारी करेगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को बताया कि यह लिमिटेड एडिशन नए डिजाइन वाले अमेरिकी पासपोर्ट इस गर्मियों से जारी किए जाएंगे। साथ ही इसमें राष्ट्रपति ट्रम्प का गोल्डन सिग्नेचर भी होगा। अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन पासपोर्ट एजेंसी से इन पासपोर्ट्स की शुरुआत होगी। वहां व्यक्तिगत रूप से पासपोर्ट रिन्यू कराने वालों को यही डिफॉल्ट पासपोर्ट मिलेगा। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन करने वालों और अन्य केंद्रों पर मौजूदा डिजाइन जारी रहेगा। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि, अमेरिका ये पासपोर्ट कस्टमाइज्ड आर्टवर्क और बेहतर इमेजरी के साथ आएंगे, लेकिन इनकी सुरक्षा वही रहेगी, जो अमेरिकी पासपोर्ट को दुनिया के सबसे सुरक्षित दस्तावेजों में से एक बनाती है। यह पासपोर्ट सीमित संख्या में जारी किए जाएंगे, लेकिन कितने जारी होंगे, यह अभी साफ नहीं है। पासपोर्ट के पीछे ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ पेंटिंग होगी पासपोर्ट के पीछे के कवर पर जॉन ट्रंबुल की पेंटिंग ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ की तस्वीर होगी। यह मशहूर पेंटिंग 1776 के उस पल को देखाती है जब अमेरिकी नेताओं ने पहली बार स्वतंत्रता का दस्तावेज कांग्रेस (अमेरीकी संसद) में पेश किया था। यह पेंटिंग अमेरिकी इतिहास का प्रतीक मानी जाती है और वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल बिल्डिंग में भी लगी है। अभी जो अमेरिकी पासपोर्ट जारी होते हैं, उनके अंदर के फ्रंट कवर पर पर्सी मोरन की पेंटिंग होती है, जिसमें फ्रांसिस स्कॉट की फोर्ट मैकहेनरी पर हमले के बाद की सुबह दिखाई गई है। इसी घटना से अमेरिकी राष्ट्रगान लिखे जाने की प्रेरणा मिली थी और उसकी कुछ पंक्तियां भी अंदर छपी होती हैं। कई अन्य स्मारक चीजों पर भी ट्रम्प की तस्वीर ट्रम्प की तस्वीर का इस्तेमाल अन्य स्मारक चीजों में भी किया जा रहा है। इससे पहले, इंटीरियर डिपार्टमेंट ने नेशनल पार्क पास के नए डिजाइन पेश किए थे, जिनमें एक पास पर ट्रम्प और जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर साथ में है। सेक्रेटरी डग बर्गम ने कहा था कि यह पास अमेरिका की 250वीं सालगिरह और देश की जमीन की रक्षा करने वाली पीढ़ियों को सम्मान देने के लिए है। वहीं, पिछले महीने ट्रम्प की अगुआई वाली कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स ने ट्रम्प की तस्वीर वाले एक स्मारक सिक्के को भी मंजूरी दी है। ईरान का तंज- सिर्फ 250 साल पुराने पासपोर्ट को धरोहर बता रहे अमेरिका में नए पासपोर्ट डिजाइन के ऐलान के बाद मुंबई स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर तंज कसा। दूतावास ने X पर एक पारंपरिक घड़े ‘आफताबेह’ की तस्वीर शेयर की और लिखा कि अमेरिका 250 साल पुराने पासपोर्ट को ऐसे पेश कर रहा है, जैसे वह कोई बेहद पुरानी धरोहर हो, जबकि ईरान से 2,600 साल पुराना आफताबेह दिखा रहा है। इसके अलावा दूतावास ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए लिखा कि पासपोर्ट पश्चिमी आविष्कार है। उन्होंने कहा कि हम पहले आजाद थे, सम्मान के साथ मिलते थे, फिर वे आए, लूट भी लिया और लाइन में खड़ा भी कर दिया। क्या पासपोर्ट पर राष्ट्रपति की तस्वीर सामान्य है पासपोर्ट में किसी मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर लगाना आम बात नहीं है। ज्यादातर देशों में पासपोर्ट को एक न्यूट्रल और स्थायी पहचान दस्तावेज माना जाता है, इसलिए उसमें राजनीति से दूरी रखी जाती है। आमतौर पर इसके पन्नों पर राष्ट्रीय प्रतीक, ऐतिहासिक जगहें या संस्कृति से जुड़ी तस्वीरें होती हैं। अमेरिका में भी अब तक यही परंपरा रही है। वहां पासपोर्ट के अंदर फोर्ट मैकहेनरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों या आजादी से जुड़े विजुएलस दिखाए जाते हैं। किसी राष्ट्रपति की तस्वीर को डिजाइन में शामिल करना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। फ्लोरिडा एयरपोर्ट का नाभ भी ट्रम्प के नाम पर इससे पहले, अमेरिका के फ्लोरिडा में पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर भी राष्ट्रपति ट्रम्प के नाम पर रखने का प्रस्ताव पेश किया गया था। जिसके बाद फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने बिल पर हस्ताक्षर कर पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ करने की मंजूरी भी दे दी है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की मंजूरी मिलने पर 1 जुलाई से यह नाम लागू हो सकता है। ऐसा होने पर ट्रम्प पहले ऐसे राष्ट्रपति होंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर एयरपोर्ट रखा जाएगा। ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के नाम रखे जा रहे हैं। जैसे कि- ट्रम्प के सिग्नेचर वाली नोट भी आएगी इसके अलावा अमेरिकी करेंसी पर भी इस साल से ट्रम्प के सिग्नेचर आने की बात कही गई है। अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार होगा, जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नोटों पर छापे जाएंगे। नए नोटों के छपने से 1861 से चली आ रही 165 साल पुरानी परंपरा भी टूटे जाएगी। अब तक नोटों पर सिर्फ वित्त मंत्री और अमेरिका के ट्रेजरर के साइन होते थे। इनमें से कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर को हटा दिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ट्रम्प और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर वाले पहले 100 डॉलर के नोट जून में छापे जाएंगे और बाकी नोट आने वाले महीनों में छापे जाएंगे। —————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान को परमाणु अप्रसार संधि का उपाध्यक्ष बनाने पर विवाद:अमेरिकी अधिकारी बोले- यह संगठन का अपमान, ईरान बोला- अमेरिका हमें न सिखाए ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इसी बीच एक दिलचस्प खबर सामने आई है। ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह फैसला न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में चल रहे NPT के 11वें रिव्यू कॉन्फ्रेंस में लिया गया। यह कॉन्फ्रेंस 5 साल में एक बार होती है। सम्मेलन के अध्यक्ष और वियतनाम के राजदूत दो हुंग वियेत ने बताया कि ईरान का नाम ‘गुटनिरपेक्ष देशों के ग्रुप’ की तरफ से आया था। इस ग्रुप में भारत समेत 100 से भी ज्यादा देश हैं। पूरी खबर पढ़ें…
गर्मियों में टमाटर भंडारण युक्तियाँ: गर्मी में गल जाते हैं टमाटर? बिना फ़िरोज़ के असली तक ताज़ा रखने के ये 5 देसी जुगाड़ काम

29 अप्रैल 2026 को 17:51 IST पर अद्यतन किया गया बिना फ्रिज के टमाटर को ताज़ा कैसे रखें: गर्मी के मौसम में टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं। फर्म में रहने से कभी-कभी उनका स्वाद भी बदल जाता है। ऐसे में अगर आप बिना फरी के टमाटरों को कई दिनों तक ताजा रखना चाहते हैं, तो ये आसान देसी तरीके आपके बहुत काम आएंगे। अनुसरण करना : टमाटरों को प्रमाणित करके जानें: टमाटर को हमेशा सुपरमार्केट वाली साइड नीचे करके रखें। इससे हवा अंदर नहीं जाती और टमाटर जल्दी खराब नहीं होते। छवि: फ्रीपिक धूप और गर्मी से दूर: टमाटरों को भी कभी-कभी धूप में नहीं रखा जाता। उन्हें किसी भी कोना या अलमारी की तरह, अनावश्यक रसोई और जगह-जगह पर रखा जाता है। इससे वे ज्यादातर समय तक ताज़ा रहते हैं। छवि: फ्रीपिक अखबार या पेपर में लपेटकर रखा हुआ: टमाटरों को अखबार या किसी कागज़ में लपेटकर रखें। इस तरह के संस्थागत नियंत्रण रहते हैं और टमाटर जल्दी गलते नहीं हैं। छवि: फ्रीपिक मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है: मिट्टी का बर्तन गर्मी में ठंडा रहता है। टमाटरों को मटके में हाथ से ऊपर से ढक दें। यह देसी नुस्खा टमाटर कई दिनों तक ताज़ा बना रहता है। छवि: एआई कच्चे और छोटे टमाटर अलग-अलग स्थान: कभी-कभी कच्चे और टूटे हुए टमाटरों को भी साथ में न रखें। टमाटर टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे बाकी टमाटर भी जल्दी खराब हो जाते हैं। छवि: फ्रीपिक अगर टमाटर प्राकृतिक हो गए हैं, तो उन्हें तुरंत इस्तेमाल कर लें। जैसे चटनी, चटनी या सब्जी में। इससे बुरा होने से पहले ही उनका सही उपयोग हो जाएगा। छवि: फ्रीपिक इन आसान देसी सिद्धांतों को अपनाकर आप बिना पिज्जा के भी टमाटरों को लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं और रोज-रोज खराब होने की चिंता से बच सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 29 अप्रैल 2026 17:51 IST पर
राघव चड्ढा पर नवजोत कौर का दावा:प्रियंका चोपड़ा ने राघव को BJP जॉइन कराई; सीनियर लीडर्स से की थी सिफारिश

पंजाब की पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा को लेकर कहा कि प्रियंका चोपड़ा ने बीजेपी के सीनियर लीडर्स से राघव चड्ढा का बचाव करने की गुजारिश की थी। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इसी सिफारिश के बाद राघव चड्ढा की भाजपा में एंट्री की जमीन तैयार हुई और उन्हें केंद्रीय एजेंसियों की जांच से बचाया गया। राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर थी। परिणीति की मदद के लिए प्रियंका का दखल इंटरव्यू में नवजोत कौर ने बताया कि जब राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच संबंध बिगड़ने लगे, तब परिणीति चोपड़ा ने अपनी बहन प्रियंका चोपड़ा से मदद मांगी थी। परिणीति को डर था कि राघव को पार्टी से निकाला जा सकता है और उन्हें ED/CBI की जांच का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद प्रियंका ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और कथित तौर पर भाजपा के सीनियर नेताओं से बात कर राघव के लिए सुरक्षा घेरा तैयार किया। ED-CBI की जांच से बचने का आरोप नवजोत कौर सिद्धू ने दावा किया कि इसी ‘पॉलिटिकल सेटिंग’ की वजह से अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा की आलोचना करना बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि राघव को पहले ही एहसास हो गया था कि पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देगी, इसलिए प्रियंका ने पारिवारिक सपोर्ट देते हुए उनकी मदद की। सिद्धू के मुताबिक, राघव चड्ढा को एजेंसियों की कार्रवाई से बचाने में प्रियंका चोपड़ा का बड़ा हाथ है। ‘मलाई खाई और अब बोल रहे’ पॉडकास्ट के दौरान नवजोत कौर काफी आक्रामक नजर आईं। उन्होंने राघव चड्ढा की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें दो साल पहले ही बोलना चाहिए था। सिद्धू ने तंज कसते हुए कहा, “इन्होंने पहले सत्ता की मलाई खाई और अब बोल रहे हैं।” उन्होंने राघव की चुप्पी और भाजपा के साथ उनके कथित गुप्त समझौतों को लेकर कई सवाल उठाए और इसे एक बड़ा सियासी खेल बताया।
बंगाल चुनाव चरण 2: 78.68% मतदान दर्ज, दीदी को बीजेपी की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा | न्यूज18

जैसे ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में दोपहर 3 बजे तक मतदान 78.68% तक पहुंच गया, ममता बनर्जी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक लड़ाई तेज हो गई। क्या टीएमसी सुप्रीमो सत्ता बरकरार रखेंगी, या कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? पूरे बंगाल से लाइव अपडेट, ग्राउंड रिपोर्ट और एग्जिट अनुमानों के लिए बने रहें। n18oc_राजनीति आखरी अपडेट: 29 अप्रैल, 2026, 17:33 IST
सरपंच बोले- मनरेगा पेमेंट का अधिकार पंचायत के पास हो:गांवों में निर्माण के लिए मुरम-पत्थर निकालने की छूट मिले, बड़वानी में ज्ञापन सौंपा

बड़वानी में सरपंचों का कार्यकाल 4 साल का होने वाला है, लेकिन गांवों के विकास को लेकर सरपंचों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बजट की कमी और सरकारी नियमों की उलझनों की वजह से वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। इसी गुस्से को लेकर ‘राष्ट्रीय सरपंच संघ’ ने कलेक्टर ऑफिस पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है। सरपंच संघ के अध्यक्ष मनोज सोलंकी का कहना है कि पंचायतों को उनके हक मिलने चाहिए। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि मनरेगा का पेमेंट करने वाला अधिकार (डीएससी) जनपद ऑफिस के बजाय सीधे पंचायत के पास हो। साथ ही, गांवों में निर्माण काम के लिए पत्थर, मिट्टी और मुरम निकालने की छूट दी जाए। सरपंचों ने यह भी मांग की है कि बार-बार तकनीकी मंजूरी (टी.एस.) के चक्कर काटने के बजाय एक बार ऑनलाइन डीपीआर बनने पर ही उसे फाइनल मान लिया जाए। कर्मचारियों पर लगाम और सी.आर. की मांग सरपंचों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के सरकारी कर्मचारियों, जैसे सचिव, रोजगार सहायक, शिक्षक, पटवारी और आशा कार्यकर्ताओं की ‘गोपनीय रिपोर्ट’ (सी.आर.) लिखने का अधिकार सरपंच को मिले। उनका कहना है कि जब तक इन कर्मचारियों का वेतन और छुट्टी सरपंच के हाथ में नहीं होगी, तब तक गांव की व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पाएगी। भ्रष्टाचार रोकने और नई योजनाओं की मांग संघ ने साफ कहा है कि अगर किसी काम में सरपंच के साइन नहीं हैं, तो उसका पेमेंट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो इसके लिए जनपद सीईओ को जिम्मेदार मानकर उन पर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, बंद पड़ी हितग्राही योजनाएं जैसे पशु शेड और बकरी शेड को फिर से शुरू करने और सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग भी की गई है। पुराने रेट और सरकारी सुविधाओं पर नाराजगी सरपंचों का कहना है कि आज के समय में साल 2022 के रेट से पैसा दिया जा रहा है, जबकि महंगाई बहुत बढ़ गई है। उन्हें अब 2025-26 के नए रेट चाहिए। साथ ही, मुख्यमंत्री की घोषित 50,000 रुपए की स्वेच्छा अनुदान निधि को भी लागू करने की मांग की गई है। सरपंचों ने यह भी कहा कि जब वे काम के सिलसिले में भोपाल जाएं, तो उनके ठहरने के लिए सरकारी विश्राम गृह की सुविधा मिलनी चाहिए।
बैंक मीटिंग में सीईओ नहीं, बोल रहा था AI क्लोन:अमेरिकी बैंक के तिमाही नतीजों की बैठक में आधे घंटे बाद हुआ खुलासा, दुनिया हैरान

कल्पना करें कि आप किसी से आधे घंटे बात कर लें और फिर पता चले कि सामने इंसान था ही नहीं। अमेरिका के कस्टमर्स बैंक के साथ यही हुआ। सीईओ सैम सिद्धू की तिमाही नतीजों की कॉन्फ्रेंस कॉल में विश्लेषक पूरे आत्मविश्वास के साथ “उनसे’ बात करते रहे। 30 मिनट तक कॉल चलती रही। बाद में सिद्धू ने खुद खुलासा किया कि वे बोल ही नहीं रहे थे। उनकी जगह था उनका एआई क्लोन बोल रहा था। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धू ने कहा, “आज आप लोगों ने मेरी ओर से जो बातें सुनीं, वो मैंने नहीं, मेरे एआई क्लोन ने कही थीं।’ कस्टमर्स बैंक का मुख्यालय पेन्सिलवेनिया के फोनिक्सविले में है। इस बैंक ने ओपनएआई के साथ बैंकिंग ऑपरेशन को ऑटोमेटेड करने के लिए कई वर्षों का करार किया है। सिद्धू के मुताबिक यह किसी लिस्टेड कंपनी की अर्निंग्स कॉल में पहली बार हुआ। यह घटना दरअसल एक बड़े बदलाव की एक झलक है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का एआई अवतार बनाया जा रहा है। उनकी बोलने की शैली, हाव-भाव और सार्वजनिक बयानों को सीख रहा है, ताकि कर्मचारी फाउंडर से जुड़ाव महसूस करते रहें। जुकरबर्ग एक अलग एआई एजेंट भी बना रहे हैं, जो उनके काम में मदद करेगा। ऐसे प्रयोग बढ़ रहे हैं। सीईओ से लेकर आम इंसान तक, एआई क्लोन की दुनिया तेजी से फैल रही है। मसलन, चीन में जहां लोग दिवंगत परिजन के एआई रेप्लिका खरीद रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ठग इसी तकनीक से आवाज की नकल करके लोगों को लूट रहे हैं। दरअसल एआई क्लोन अब महज तकनीकी प्रयोग नहीं रहे। ये कॉरपोरेट रणनीति, व्यक्तिगत भावनाएं और आपराधिक हथकंडे, तीनों का हिस्सा बन चुके हैं। सवाल यह है कि इस “डिजिटल हमशक्ल’ की दुनिया में असली और नकली की पहचान कैसे होगी? ये तो समय ही बताएगा। भारत में भी एआई क्लोनिंग प्रोजेक्ट पर हो रहे काम, आवाज की नकल से ठगी शुरू भारत में भी एआई क्लोनिंग शुरू हो चुकी है। बेंगलुरु की स्टार्टअप जीनैनी डॉट एआई 12 भारतीय भाषाओं में आवाज का क्लोन तैयार करने की तकनीक विकसित कर रहा है। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। एआई क्लोन जितने उपयोगी हैं, उतने ही खतरनाक भी। ठग अब एआई से नकली आवाज बनाकर रिश्तेदारों की नकल उतार रहे हैं और लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं। मध्य प्रदेश में एक शिक्षिका को 1 लाख रुपए का चूना लगा। जालसाज ने एआई से उनके कजिन की आवाज, लहजा और भावनात्मक अंदाज की इतनी सफाई से नकल की कि वो ठगी का शिकार हो गईं। चीन में तो “घोस्ट बॉट्स’ का ट्रेंड शुरू हो गया है, जहां लोग दिवंगत प्रियजन के एआई रेप्लिका खरीद रहे हैं।







