फुटबॉल क्लब नशे से उबारकर बना रहा चैम्पियन:बाप-बेटे ने शुरू किया था सिरुकलाथुर क्लब; यहां के बच्चे विदेशी टीमों से भी जुड़े

स्पेनिश फुटबॉल क्लब बार्सिलोना का एक मशहूर नारा है- ‘मेस क्यू अन क्लब’ (एक क्लब से बढ़कर)। तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के एक छोटे से गांव सिरुकलाथुर में यह बात बिल्कुल सच साबित हो रही है। करीब 2,000 की आबादी वाले इस गांव में फुटबॉल सिर्फ 90 मिनट का खेल नहीं है, बल्कि यह युवाओं को नशे और भटकाव से दूर कर एक नई जिंदगी दे रहा है। ‘सिरुकलाथुर गालटीपेट फुटबॉल क्लब’ की शुरुआत 2014 के फीफा वर्ल्ड कप के दौरान डी. हरिकृष्णन ने की थी। जिस मैदान पर कभी कचरा फेंका जाता था, आज वहां हर हफ्ते 150 से ज्यादा बच्चे ट्रेनिंग लेते हैं। इस क्लब को ‘ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन’ से टू-स्टार मान्यता मिल चुकी है। क्लब के संस्थापक हरिकृष्णन का अपना सफर भी आसान नहीं था। 10वीं में फेल होने और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। कोरोना काल में जब स्कूल बंद थे, तब उनके बेटे शिवारमन ने देखा कि गांव के बच्चे शराब, सिगरेट और नशे की लत का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में बाप-बेटे की इस जोड़ी ने बच्चों को वापस मैदान पर लाने की ठानी। क्लब ने महसूस किया कि दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों के इन बच्चों को सही पोषण नहीं मिल पा रहा है। इसलिए क्लब ने ट्रेनिंग करने वाले बच्चों को नाश्ता और रात का खाना (हफ्ते में तीन दिन नॉन-वेज सहित) देना शुरू किया। एक बार हरिकृष्णन ने एक होनहार खिलाड़ी से नशे के इंजेक्शन तक छीने थे। उनका मकसद सिर्फ बेहतरीन खिलाड़ी बनाना नहीं है, बल्कि खेल के जरिए बच्चों को शिक्षा और रोजगार दिलाना है। आज इस क्लब के कई बच्चे बड़े कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। इस छोटे से क्लब की उपलब्धियां किसी बड़े शहर की अकादमी से कम नहीं हैं। यहां के सात खिलाड़ी चेन्नईयिन एफसी की यूथ टीम में, एक बेंगलुरु एफसी और दो एफसी मद्रास में अपनी जगह बना चुके हैं। 2016 में क्लब का एक खिलाड़ी रिशिश ट्रेनिंग के लिए स्पेन गया और फिर स्वीडिश क्लब ‘IK Sirius’ तक पहुंचा। यहां से संतोष ट्रॉफी, जूनियर नेशनल और यूनिवर्सिटी स्तर के 20 से ज्यादा खिलाड़ी निकले हैं। सिरुकलाथुर गांव में अब सुबह की शुरुआत फुटबॉल से होती है। संकरी गलियों और कच्चे रास्तों से निकलकर ये बच्चे अब बड़े मैदानों पर अपना नाम रोशन कर रहे हैं। यहां फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि गरीबी और भटकाव से बाहर निकलने का सबसे मजबूत रास्ता बन चुका है।
सबसे घातक कैंसर, 10 में से 9 की हो जाती है मौत, क्या नई वैक्सीन रोक पाएगी इसे

Last Updated:April 27, 2026, 11:56 IST India’s Most Dangerous Cancer: पैनक्रिएटिक कैंसर दुनिया में सबसे खतरनाक कैंसर है क्योंकि इसमें बहुत बाद में पता चलता है जिसके कारण लगभग 10 में से 9 मरीज की मौत हो जाती है. अमेरिका के ओलयन सेंटर फॉर कैंसर वैक्सीन्स द्वारा मैसेंजर आरएनए पर आधारित नई वैक्सीन तैयार की है जिसके परिणाम सकारात्मक आए हैं. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस वैक्सीन से भारत के इस सबसे घातक कैंसर पर रोक लग पाएगी. अग्नाशय कैंसर के लिए नई वैक्सीन कितनी कारगर. India’s Most Dangerous Cancer: वैसे तो कैंसर आज भी सबसे खतरनाक बीमारी है जिनमें अधिकांश का इलाज कर पाना मुश्किल होता है लेकिन पैंक्रिएटिक कैंसर या अग्नाशय का कैंसर सबसे खतरनाक है. यह इतना खतरनाक है कि 10 में से लगभग 9 मरीजों की मौत हो जाती है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि इस कैंसर का पता बहुत एडवांस स्टेज में चलता है तब तक यह शरीर के अधिकांश हिस्सों में फैल चुका होता है. अब इस कैंसर के लिए नई वैक्सीन की काफी चर्चा हो रही है. न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटेरिंग कैंसर सेंटर ने जर्मन बायोटेक्नोलॉजी कंपनी बायोटेक के साथ मिलकर पैंक्रिएटिक कैंसर के लिए मैसेंजर RNA पर आधारित जो वैक्सीन तैयार की थी, उसका 18 महीने का ट्रायल पूरा हो गया है. दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा है. ट्रायल में 90 फीसदी सफलता मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के प्रमुख साइंसटिस्ट और इस अध्ययन के प्रमुख डॉ. विनोद बालचंद्रन का कहना है कि mRNA वैक्सीन का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा है. यह वैक्सीन शरीर में उस प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर देता है जो पैंक्रियाज में कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उनपर हमला करता है. डॉ. बालचंद्रन ने कहा कि पैंक्रियाज में जब ट्यूमर होता है और अगर उसकी शुरुआत में पहचान भी हो जाती है तो सर्जरी के बाद इसके दोबारा पनपने की बहुत ज्यादा आशंका रहती है. लेकिन इस वैक्सीन को देने के बाद दोबारा सर्जरी की शायद जरूरत न पड़े. एडवांस स्टेज वाले 16 मरीजों पर इस वैक्सीन का पहला परीक्षण किया गया है जिनमें 8 में यह वैक्सीन 90 प्रतिशत तक सफल रही है. डॉ. विनोद बालचंद्रन ने बताया कि शुरुआती रिजल्ट इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह वैक्सीन सबसे घातक कैंसरों में से एक के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है. भारत में सरवाइवल रेट बहुत कम टीओआई की खबर में टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन के चीफ एग्जक्यूटिव और पैंक्रिएटक गैस्ट्रोइंटेस्टिनल कैंसर सर्जन डॉ. शैलेष श्रीखंडे बताते हैं कि दो दशक पहले तक भारत में प्रति एक लाख में 2.5 से 3 लोगों को अग्नाश्य का कैंसर होता था लेकिन अब यह संख्या 6 से 7 हो गई है. ग्लोबकैन GLOBOCAN 2022 के मुताबिक भारत में हर साल करीब 15 से 17 हजार पैंक्रिएटिक कैंसर के मामले सामने आते हैं. इनमें से 12 से 13 हजार मरीजों की मौत जल्दी हो जाती है. हालांकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है क्योंकि भारत का कैंसर रजिस्ट्री सिस्टम इस तरह का नहीं है जिसमें कैंसर मरीजों का डेटा सही से दर्ज हो सके. वैसे तो पैंक्रिएटिक कैंसर इतना घातक है कि विकसित देशों में भी इसमें सरवाइवल रेट बहुत कम है लेकिन भारत की स्थिति और भी खराब है. भारत में पैनक्रिएटिक कैंसर का सरवाइवल रेट लगभग 7 से 9 फीसदी है. 80-90 फीसदी मामलों में इसका पता एडवांस स्टेज पर चलता है. वैक्सीन कितना कारगर डॉ. शैलेष श्रीखंडे बताते हैं कि वैश्विक रूप से जो डेटा उपलब्ध है उसके अनुसार आज भी अग्नाशय कैंसर से पीड़ित मरीजों में सरवाइवल रेट बहुत कम है. इसके लिए जो परंपरागत इलाज है वह तीसरे स्टेज तक सर्जरी बेहतर विकल्प है. इसके लिए कीमोथेरेपी चलती है. मेडिकल साइंस में इतने एडवांसमेंट आने पर इसका इलाज पहले से जरूर बेहतर हुआ हुआ है पर वैक्सीन से कैंसर का इलाज भी अब भी चुनौतीपूर्ण है. डॉ. शैलेष श्रीखंडे ने बताया कि पिछले साल से इस वैक्सीन की चर्चा काफी जोर-शोर से चल रही है. इस वैक्सीन का इस्तेमाल कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए की जाती है लेकिन वास्तव में वैक्सीन सीधे कैंसर कोशिकाओं को नहीं मारती बल्कि यह शरीर को उकसाती है उस कैंसर को खत्म करने के लिए जो फैल रही है. मैसेंजर आरएनए वैक्सीन सर्जरी और कीमोथेरेपी की जगह नहीं ले सकती है. वैक्सीन का यह पहला ट्रायल है. अगर दूसरा और तीसरा ट्रायल भी सफल हो जाता है तो यह सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ-साथ एक एडीशनल इलाज हो सकता है लेकिन यह वर्तमान सर्जरी या कीमोथेरेपी की जगह नहीं ले सकती. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 27, 2026, 11:56 IST
टेली प्रॉम्पटर में डायलॉग पढ़ ट्रोल हुए थे अक्षय कुमार:अब बचाव में उतरीं अमीषा पटेल, कहा- मेरे साथ 2 फिल्में कीं, मैंने उन्हें कभी ऐसा करते नहीं देखा

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार अक्षय, हाल ही में टेली प्रॉम्पटर में डायलॉग पढ़कर जमकर ट्रोल हुए थे। दरअसल, एक्टर फिल्म भूत बंगला प्रमोट करने के लिए एकता कपूर के टीवी शो नागिन 7 का हिस्सा बने थे। एपिसोड के क्लिप जमकर वायरल हुए, जिसमें अक्षय बार-बार पढ़कर डायलॉग बोलते दिखे। अब इस पर अमीषा पटेल एक्टर के सपोर्ट में उतरी हैं। हाल ही में बॉलीवुड बबल को दिए इंटरव्यू में अमीषा पटेल से पूछा गया था कि क्या अक्षय सेट पर टेली प्रॉम्पटर इस्तेमाल करते हैं और पढ़कर डायलॉग बोलते हैं। इस पर एक्ट्रेस ने कहा, ‘मेरे दो एक्सपीरियंस रहे हैं अक्षय कुमार के साथ। भूल भुलैया और मेरे जीवन साथी। सुनील दर्शन जी की फिल्म थी मेरे जीवन साथी, बहुत ही खूबसूरत फिल्म थी। तब तो मैंने कभी टेली प्रॉम्पटर नहीं देखा। हो सकता है कि कुछ फिल्मों में किया हो, लेकिन मैंने तो उन्हें कभी ऐसे इस्तेमाल करते नहीं देखा।’ क्यों एक्टर पर उठे सवाल अक्षय कुमार की फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसे एकता कपूर ने को-प्रोड्यूस किया है। ऐसे में फिल्म का प्रमोशन के लिए अक्षय कुमार, एकता कपूर के टीवी शो नागिन 7 में नाग गुरू के रोल में कैमियो करते नजर आए थे। एपिसोड ऑन-एयर होने के बाद अक्षय कुमार के कई वीडियो वायरल हो गए, जिसमें वो साफ तौर पर पढ़कर डायलॉग बोलते नजर आ रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद एक्टर की जमकर आलोचना की जाने लगी। एक यूजर ने लिखा, ’30 साल के करियर के बाद भी अगर 60 साल का एक्टर डायलॉग याद न रखे, तो कुछ लोगों को यह अजीब या शर्मनाक लग सकता है। हालांकि, कई कलाकार काम की स्पीड और प्रैक्टिकल कारणों की वजह से टेलीप्रॉम्प्टर का इस्तेमाल करते हैं।’ वहीं एक यूजर ने लिखा है, ‘इस तरह आप एक साल में 4 फिल्में करते हैं।’
समर कूलिंग टिप्स: घर में क्या बन गया है गरम मसाला से तंदूर? पोचे के पानी में पकी ये 2 चीजें; फ्लोर कूलिंग के लिए बेस्ट है ये ट्रिक

27 अप्रैल 2026 को 11:49 IST पर अपडेट किया गया समर कूलिंग टिप्स: चिलचिलाती गर्मी में न सिर्फ हवा है, बल्कि घर का सामान भी तपने लगता है। अगर आप भी मुद्रा और इलेक्ट्रॉनिक्स की गर्म हवा से परेशान हैं, तो उद्यमों को ठंडा रखने का सबसे अच्छा तरीका है। आइए जानते हैं कैसे और कौन-कौन से तरीके हैं फ्लोर को कूल बनाने के। अनुसरण करना : पोखा सॉलिड समय बाल्टी में 2 माइक्रो सेंधा नमक और थोड़ी सी पिसी हुई फिटकरी मिला लें। मछलीघर को भिगोता है और फिटकरी पानी के वैराग्यीकरण की प्रक्रिया को तेजी से करता है, जिससे मछलीघर का नमक ठंडा रहता है। छवि: फ्रीपिक अगर आप ताजगी चाहते हैं तो पानी में पुदीने का अर्क या कपूर की गोलियां पिसकर डालें। कपूर की तासीर में निवेश होता है और यह कमरे के तापमान को तुरंत कम करने में मदद करता है। इस घर में मॅक तेजी से चलती है। छवि: फ्रीपिक सफेद सिरका न सिर्फ समुद्र को चमकाता है, बल्कि यह गर्मी को समुद्र की सतह पर चमक नहीं देता है। पोछे के पानी में आधा कप सिरका देखें, फर्क खुद महसूस होता है। छवि: फ्रीपिक दिन के बजाय सूरज ढलने के बाद ठंडे पानी से साफ़ करें। रात भर सोते हुए कमरे की दीवारों की गर्मी भी शांत हो जाती है, जिससे रात की नींद सार्वभौम हो जाती है। छवि: फ्रीपिक आसान घरेलू नुस्खों से आप बिजली का बिल भी बचा सकते हैं और अपने घर को बिना एसी के भी प्राकृतिक रूप से ठंडा रख सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित : कीर्ति सोनी प्रकाशित 27 अप्रैल 2026 11:49 IST (टैग्सटूट्रांसलेट) गर्मियों में कूलिंग टिप्स (टी) फर्श को ठंडा करने के घरेलू उपाय (टी) गर्मियों में घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा कैसे रखें (टी) बिना एसी के कमरे को ठंडा करने के टिप्स (टी) हिंदी में घर को ठंडा करने के टिप्स (टी) गर्मियों में घर के रखरखाव के टिप्स (टी) फर्श को ठंडा करने के सरल तरीके (टी) फर्श को ठंडा करने के घरेलू उपाय (टी) गर्मियों में कमरे के तापमान को कम करने के टिप्स (टी) गर्मियों के लिए फर्श की सफाई के टिप्स
गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, स्किन को हो सकते हैं ये नुकसान, जानिए एक्सपर्ट की राय – News18 हिंदी

X गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, हो सकते हैं ये नुकसान Summer Health Tips: रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अक्षय श्रीवास्तव कहते हैं कि गर्मियों के दिनों में पुरुष और महिलाएं दोनों ही अपने चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर निकलते हैं, ताकि टैनिंग से बचा जा सके. लेकिन एक कपड़ा बांधने से आपकी स्किन टैन नहीं होगी या फिर धूप और धूल-मिट्टी आपकी त्वचा तक नहीं पहुंच पाएगी. मुंह पर सिर्फ कपड़ा बांधना, गर्मी में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को पैदा कर सकता है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कई लोग एक ही कपड़े को हफ्तेभर मुंह में बांधकर घूमते हैं. ऐसे में इतने दिनों की जमी गंदगी आपके चेहरे को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे एक्ने, पिम्पल्स, तेलीय त्वचा, चेहरा फीका पड़ने और कई तरह की स्किन एलर्जी हो सकती है और धूप का असर भी होने लगता है. लेकिन क्या ऐसा करना सही है. गर्मी में मुंह पर कपड़ा बांधने के कई फायदे हैं, तो कई नुकसान भी हैं. गर्मी में हमेशा ही सूती और हल्के रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए.
हज यात्रियों को छोड़कर लौट रही कार पेड़ से टकराई:छिंदवाड़ा हादसे में 3 लोगों की मौत, 3 घायल; नागपुर से सिंगोड़ी जा रहे थे

छिंदवाड़ा जिले के उमरानाला क्षेत्र में सोमवार तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच एक भीषण सड़क हादसा हो गया। नागपुर में हज यात्रियों को छोड़कर सिंगोड़ी लौट रही कार (MP13AJ 4859) अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गई। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। सभी घायलों का इलाज छिंदवाड़ा के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां से एक महिला की हालत बेहद गंभीर होने पर उसे नागपुर रेफर किया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, वाहन चालक और एक अन्य व्यक्ति ने छिंदवाड़ा के अस्पताल में दम तोड़ दिया। तीन घायलों की हालत गंभीर, निजी अस्पताल में भर्ती कार में सवार तीन अन्य लोग भी हादसे में बुरी तरह घायल हुए हैं। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छिंदवाड़ा शहर के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। उनकी हालत अभी गंभीर बताई जा रही है। नींद का झोंका आने से अनियंत्रित हुई कार हादसे में कार के पेड़ से टकराने की रफ्तार इतनी तेज थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, सुबह का समय होने के कारण चालक को नींद का झोंका आने या फिर वाहन पर से अचानक नियंत्रण खोने के चलते यह हादसा हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
AAP के 7 सांसदों को BJP में विलय की मंजूरी:राज्यसभा में भाजपा सांसद 106 से बढ़कर 113 हुए, केजरीवाल की पार्टी 3 पर सिमटी

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई है, जबकि BJP सांसदों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। जो सात सांसद BJP में शामिल हुए हैं, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी इन सांसदों को BJP के सदस्यों के रूप में दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा सभापति को आवेदन देकर खुद को BJP सांसद के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, AAP ने इस घटनाक्रम का विरोध किया था। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने शुक्रवार को BJP जॉइन कर ली थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। AAP ने सभापति को याचिका दी AAP ने रविवार को सभापति के समक्ष याचिका दायर कर इन सात सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। AAP सांसद संजय सिंह ने भी सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अपील की थी। सिंह ने कहा था कि इन सदस्यों का पार्टी छोड़ना दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। राघव ने कहा- मैं राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी राघव ने कहा था कि पिछले कुछ सालों से मुझे महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं। इसलिए आज मैं घोषणा करता हूं कि मैं AAP से दूरी बना रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं। राजनीति में आने से पहले, मैं एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) था। इस मंच पर मेरे साथ अलग-अलग क्षेत्रों के लोग थे। स्वाति मालीवाल बोलीं- केजरीवाल महिला विरोधी हैं स्वाति मालीवाल ने AAP और अरविंद केजरीवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया, हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन बाद में उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट कराई गई और FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। मालीवाल ने कहा कि उन्हें दो साल तक संसद में बोलने का मौका नहीं दिया गया जो बेहद शर्मनाक है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… AAP छोड़ते ही राघव चड्ढा के 14 लाख इंस्टाग्राम-फॉलोअर्स घटे आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा जॉइन करने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर करीब 14 लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं। 24 घंटे पहले उनके फॉलोअर 14.6 मिलियन (1 करोड़ 46 लाख) थे। शनिवार शाम तक यह 13.2 मिलियन (1 करोड़ 32 लाख) बचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
HCL प्रदूषण पर ग्रामीणों ने सांसद से लगाई गुहार:बोले-धूल और जहरीली हवा से बढ़ रही बीमारियां; मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाने का आश्वासन

बालाघाट में सांसद भारती पारधी ने रविवार को मलाजखंड में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। ग्रामीणों ने एचसीएल के संचालन से उत्पन्न गंभीर प्रदूषण और उसके जनजीवन व पर्यावरण पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों ने सांसद को बताया कि एचसीएल की खनन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और जहरीले तत्वों के कारण मलाजखंड में सांस लेना दूर्लभ हो गया है। वायु प्रदूषण के चलते हर घर में लोग श्वसन और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। एचसीएल प्रदूषण से पानी संकट, सड़कें जर्जर हुई उन्होंने आरोप लगाया कि एचसीएल के कारण उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव, खराब सड़कें और दूषित वातावरण मिल रहा है। कंपनी से निकलने वाले प्रदूषित तत्वों ने जलस्रोतों को दूषित कर दिया है, जिससे पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो गई हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि एचसीएल के प्रदूषित तत्वों और दूषित हवा के कारण बुजुर्गों और बच्चों में गंभीर बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। सांसद बोलीं-जनस्वास्थ्य-पर्यावरण से समझौता नहीं सांसद भारती पारधी ने इस गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कंपनी प्रबंधन जनमानस के स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि पर्यावरण सुरक्षा और जनता का स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदूषण पर केंद्र तक मुद्दा उठाने की चेतावनी सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एचसीएल के उच्च प्रबंधन के समक्ष भी मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर केंद्र स्तर पर भी इस समस्या के ठोस समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की बात कही। सांसद पारधी ने इस मामले को अब केवल एक क्षेत्रीय शिकायत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय की लड़ाई बताया। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो मलाजखंड एक बड़े मानवीय और पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ सकता है।
‘पार्टी अब भ्रष्ट हाथों में’: राघव चड्ढा का दावा, ‘विषाक्त कार्य संस्कृति’ के कारण उन्हें AAP छोड़ना पड़ा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 10:50 IST इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में, राघव चड्ढा ने कहा कि भाजपा में शामिल होने का उनका कदम उनकी पूर्व पार्टी, AAP के भीतर एक विषाक्त कार्य वातावरण के बारे में चिंताओं से प्रेरित था। राघव चड्ढा शुक्रवार को आप छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. (फाइल फोटो) ऐसा सिर्फ कॉर्पोरेट कर्मचारी ही नहीं हैं जो विषाक्त कार्य वातावरण में फंसा हुआ महसूस करते हैं। अस्वास्थ्यकर कार्यस्थल संस्कृति का मुद्दा अब राजनीति में भी प्रवेश कर गया है। राघव चड्ढा ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के अपने फैसले पर आलोचना को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला क्यों किया। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में, चड्ढा ने कहा कि उनका कदम उनकी पूर्व पार्टी, AAP के भीतर एक विषाक्त कार्य वातावरण के रूप में वर्णित चिंताओं से प्रेरित था। AAP में ‘जहरीला माहौल’ राघव चड्ढा ने कहा कि समय के साथ आम आदमी पार्टी के अंदर हालात काफी बदल गए हैं. उन्होंने दावा किया कि पार्टी में अब जहरीली कार्य संस्कृति है, जिससे सदस्यों के लिए प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर की आवाज को प्रतिबंधित किया जा रहा है, साथ ही कहा कि सदस्यों को संसद में बोलने और अपना काम करने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा, “आप में अब काम करने का एक जहरीला माहौल है। मैं यहां राजनीति में अपना करियर बनाने के लिए नहीं आया हूं। मैंने अपनी युवावस्था के 15 साल एक विशेष पार्टी को दे दिए। आपको संसद में बोलने और काम करने से रोक दिया गया है। यह पार्टी अब कुछ भ्रष्ट हाथों में है।” चड्ढा ने कहा कि उनके इस कदम की घोषणा के बाद से उन्हें बड़ी संख्या में संदेश मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “पिछले तीन दिनों से मुझे आप सभी से बहुत सारे संदेश मिल रहे हैं। आप में से अधिकांश मुझे शुभकामनाएं दे रहे हैं और बधाई दे रहे हैं, जबकि कुछ मेरे फैसले के पीछे के कारण जानना चाहते हैं।” खुद को आम आदमी पार्टी का संस्थापक सदस्य बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी युवावस्था के 15 साल संगठन के निर्माण में समर्पित कर दिए। उन्होंने कहा, “मैं अपना करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। मैं एक राजनीतिक पार्टी का संस्थापक सदस्य बन गया। मैंने अपने खून, पसीने और कड़ी मेहनत से इस पार्टी को अपनी युवावस्था के 15 साल दिए।” उन्होंने कहा कि पार्टी बदल गई है और अब पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा, “आज यह पार्टी पुरानी पार्टी नहीं रही। आज इस पार्टी में कामकाज का माहौल जहरीला है। आपको काम करने से रोका जाता है। आपको संसद में बोलने से रोका जाता है।” वह बीजेपी में क्यों शामिल हुए? अपने बदलाव के बारे में बताते हुए चड्ढा ने कहा कि वह पार्टी के भीतर खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं और उन्होंने खुद को “सही आदमी, लेकिन गलत पार्टी में” बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई विकल्पों पर विचार किया है, जिनमें राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर से सुधार करने की कोशिश करना या किसी अन्य मंच पर जाना शामिल है। अंततः उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। चड्ढा ने यह भी बताया कि उनका फैसला अकेले नहीं लिया गया था. उन्होंने कहा, ”एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, पांच नहीं, छह नहीं, सात सांसदों ने इस राजनीतिक दल से अपना रिश्ता तोड़ने का फैसला किया है।” उन्होंने कहा, ”एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते।” राघव चड्ढा ने बीजेपी के दबाव के दावों को खारिज किया इस आलोचना का जवाब देते हुए कि उनका बाहर निकलना दबाव या डर से प्रेरित था, चड्ढा ने आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय “निराशा, मोहभंग और घृणा” पर आधारित था। उन्होंने कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहेंगे। उन्होंने कहा, ”मैं आपकी समस्याओं को और अधिक ऊर्जा और उत्साह के साथ उठाना जारी रखूंगा।” सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया राघव चड्ढा के इस कदम पर ऑनलाइन भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। आम आदमी पार्टी से बाहर निकलने और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के 24 घंटों के भीतर, उन्होंने कथित तौर पर इंस्टाग्राम पर दस लाख से अधिक फॉलोअर्स खो दिए। बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग दो मिलियन हो गई। उनके कई समर्थकों ने उनके फैसले की आलोचना की, जबकि पुराने वीडियो क्लिप और पिछले बयान जिनमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की थी, ऑनलाइन फिर से सामने आए, जिससे उनके राजनीतिक बदलाव को लेकर बहस और तेज हो गई। राघव चड्ढा और छह अन्य आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों ने पिछले शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए, जो राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण विकास है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2026, 10:31 IST न्यूज़ इंडिया ‘पार्टी अब भ्रष्ट हाथों में’: राघव चड्ढा का दावा, ‘विषाक्त कार्य संस्कृति’ के कारण उन्हें आप छोड़ना पड़ा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राघव चड्ढा(टी)राघव चड्ढा ने आप छोड़ी(टी)राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हुए(टी)राघव चड्ढा वीडियो(टी)विषाक्त कार्य संस्कृति(टी)राघव चड्ढा विषाक्त कार्य वातावरण(टी)राघव चड्ढा बीजेपी(टी)आम आदमी पार्टी संकट(टी)विषाक्त कार्यस्थल संस्कृति(टी)आप राज्यसभा सांसद(टी)राजनीतिक पार्टी स्विच(टी)आंतरिक पार्टी सेंसरशिप(टी)भारतीय राजनीति समाचार
बागेश्वर बाबा के बयान पर भड़के रितेश देशमुख:कहा था- जिम्मेदारी छोड़ना चाहते थे शिवाजी महाराज, एक्टर बोले- अपमान बर्दाश्त नहीं; बाबा ने माफी मांगी

बॉलीवुड एक्टर रितेश देशमुख, बागेश्वर बाबा के उस बयान पर भड़क गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज युद्ध से थककर जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे। अब एक्टर ने इस पर रिएक्ट करते हुए कहा है कि ये अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि विवाद बढ़ने पर बागेश्वर बाबा ने माफी मांग ली है। क्या था बागेश्वर बाबा का बयान नागपुर में आयोजित एक इवेंट में बागेश्वर बाबा ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर बयान देते हुए कहा, शिवाजी महाराज युद्ध से थककर अपनी जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे। वो अपने गुरू समर्थ रामदास के पास मुकुट लेकर पहुंचे थे। बयान सामने आने के बाद से बागेश्वार बाबा की जमकर आलोचना की जाने लगी। इस पर रितेश देशमुख भी भड़क गए, जो जल्द ही छत्रपति शिवाजी महाराज पर बनी फिल्म राजा शिवाजी में नजर आने वाले हैं। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से मराठी में लिखा है, जब कोई आकर हमारे पूज्य देवता के बारे में गलत और उल्टा-सीधा बोलता है, तो एक शिव-प्रेमी और शिव-भक्त के लिए यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है और गुस्सा आना स्वाभाविक है। आगे उन्होंने लिखा, ‘ऐसी बेकार कोशिशें, जो उन्हें किसी दायरे में बांधने की कोशिश करती हैं, समय के साथ खत्म हो जाएंगी। लेकिन जैसे सह्याद्रि की पर्वत श्रृंखलाएं लाखों सालों से कायम हैं, वैसे ही वह एक नाम आने वाले करोड़ों सालों तक बना रहेगा। और वह नाम है, प्रताप पुरंदर, क्षत्रिय कुल के, सिंहासन के स्वामी, सम्राटों के सम्राट, धन्य राजाशिव छत्रपति शिवाजी महाराज।’ बागेश्वार बाबा ने मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद अब बागेश्वर बाबा ने भी माफी मांग ली है। नागपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। वो किसी भी तरह से छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान नहीं करना चाहते थे। उन्होंने कहा, हमने कुछ अनुचित नहीं कहा। हमने संतों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से ये बात कही। इसके बावजूद हमने खेद व्यक्त किया और माफी मांगी है। कुछ लोगों ने मेरी बात गलत तरह पेश की। मेरी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुईं तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं। मैं शिवाजी महाराज के लिए जीता और मरता हूं। शिवाजी महाराज पर बनी फिल्म में नजर आएंगे रितेश रितेश देशमुख, जेनेलिया डिसूजा, संजय दत्त स्टारर फिल्म राजा शिवाजी 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज पर बनी है। फिल्म को रितेश देशमुख ने ही डायरेक्ट किया है।







