Friday, 25 Sep 2026 | 09:44 PM

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अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे

अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके।। टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार क्या हैं? टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले परमाणु हथियार होते हैं। इन्हें पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन या सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका को लगता है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से जंग हुई, तो सिर्फ बड़े परमाणु हमले का विकल्प काफी नहीं होगा। इसलिए वह छोटे एटम बमों को भी अपनी सैन्य योजना में शामिल करना चाहता है। उसका मानना है कि इससे दुश्मन पर दबाव बनेगा और जरूरत पड़ने पर सीमित जवाब देना आसान होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर छोटे एटम बम इस्तेमाल का विकल्प बन गए, तो उन्हें चलाने की संभावना भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य जंग देखते-देखते परमाणु जंग में बदल सकती है। रूस के पास सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रखने वाला देश है। SIPRI और FAS के मुताबिक उसके पास 5,459 परमाणु हथियार हैं। अमेरिका 5,177 हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है। दोनों देशों के पास दुनिया के करीब 88% परमाणु हथियार हैं। वहीं, चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार हैं। संख्या में वह काफी पीछे है, लेकिन परमाणु हथियारों का जखीरा सबसे तेजी से वही बढ़ा रहा है। 1945 के बाद परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? द्वितीय विश्व युद्ध में अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे। इसके बाद दुनिया ने परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता देखी। तभी से बड़ी परमाणु शक्तियों ने इन्हें युद्ध में चलाने के बजाय ‘न्यूक्लियर डिटरेंस’ (परमाणु प्रतिरोध) के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया। न्यूक्लियर डिटरेंस क्या है? इस रणनीति का मतलब है कि अगर कोई देश परमाणु हमला करेगा, तो जवाब में उसे भी उतना ही विनाशकारी परमाणु हमला झेलना पड़ेगा। यानी दोनों पक्षों को अस्वीकार्य नुकसान होगा। इसी डर ने अमेरिका, रूस समेत परमाणु शक्तियों को 1945 के बाद युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोके रखा है।

अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मीर ने शुक्रवार को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेस वॉक पूरी की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट को असेंबल किया, जिससे भविष्य में सोलर एरे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेस वॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) समाप्त हुई। यह स्पेस स्टेशन के लिए 281वीं, जेसिका मीर के लिए छठी और अनिल मेनन के लिए पहली स्पेस वॉक थी। छह घंटे से ज्यादा चली स्पेस वॉक मेनन और मीर ने क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर छह घंटे 27 मिनट तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी के बाहरी हिस्से में स्ट्रक्चरल अपग्रेड का काम किया। उनका मकसद स्टेशन के स्टारबोर्ड 6 ट्रस सेगमेंट पर लगे 3B पावर चैनल पर माउंटिंग हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। नासा ने बताया कि यह काम भविष्य में रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल लेबोरेटरी को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो महत्वपूर्ण सिस्टम को सपोर्ट करने और स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने में मददगार होगी। नासा में मॉनीटरिंग की 3 तस्वीरें… अब तक 6 सोलर एरे तैनात साल 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह IROSA असेंबली तैनात कर चुके हैं। अब केवल दो असेंबली बची हैं, जिन्हें इस साल के अंत तक स्टेशन पर भेजा जाएगा। स्पेस वॉक के दौरान मेनन एक आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्टोरेंट पर तैनात थे, जिससे उन्हें ट्रस पर काम करने के लिए स्थिर एंगल मिला। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बाद में केबलिंग का काम पूरा किया, जो भविष्य में iROSA से 3B पावर चैनल तक बिजली पहुंचाएगी। इसके बाद उन्होंने स्ट्रट्स को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया। काम के दौरान मीर ने मेनन से चांद दिखने की बात कही, जिस पर मेनन ने कहा कि उन्हें वहां भविष्य का मून बेस दिखाई दे रहा है। अगस्त में दो और स्पेस वॉक होंगी यह इस महीने एक्सपेडिशन 75 क्रू के लिए तीन स्पेस वॉक में से पहली थी। अगली स्पेस वॉक 13 अगस्त को होगी, जिसमें दो अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना बदलेंगे। यह एंटीना ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और स्पेस स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है। इसके बाद 25 अगस्त को होने वाली स्पेस वॉक में क्रू मेंबर्स पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम को कनेक्ट करेंगे। नासा के अनुसार, इस दौरान वे हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर स्पेसक्राफ्ट डॉकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नेविगेशनल एड को भी बदलेंगे।

अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

अंतरिक्ष स्टेशन को अपग्रेड करने नासा एस्ट्रोनॉट्स की स्पेस वॉक:पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट लगाई; 6.27 घंटे बाहर रहे

नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मीर ने शुक्रवार को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के बाहर स्पेस वॉक पूरी की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के पावर चैनल के लिए मॉडिफिकेशन किट को असेंबल किया, जिससे भविष्य में सोलर एरे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। यह स्पेस वॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे) समाप्त हुई। यह स्पेस स्टेशन के लिए 281वीं, जेसिका मीर के लिए छठी और अनिल मेनन के लिए पहली स्पेस वॉक थी। छह घंटे से ज्यादा चली स्पेस वॉक मेनन और मीर ने क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकलकर छह घंटे 27 मिनट तक ऑर्बिटल लेबोरेटरी के बाहरी हिस्से में स्ट्रक्चरल अपग्रेड का काम किया। उनका मकसद स्टेशन के स्टारबोर्ड 6 ट्रस सेगमेंट पर लगे 3B पावर चैनल पर माउंटिंग हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। नासा ने बताया कि यह काम भविष्य में रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल लेबोरेटरी को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो महत्वपूर्ण सिस्टम को सपोर्ट करने और स्पेस स्टेशन को सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने में मददगार होगी। नासा में मॉनीटरिंग की 3 तस्वीरें… अब तक 6 सोलर एरे तैनात साल 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह IROSA असेंबली तैनात कर चुके हैं। अब केवल दो असेंबली बची हैं, जिन्हें इस साल के अंत तक स्टेशन पर भेजा जाएगा। स्पेस वॉक के दौरान मेनन एक आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्टोरेंट पर तैनात थे, जिससे उन्हें ट्रस पर काम करने के लिए स्थिर एंगल मिला। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने बाद में केबलिंग का काम पूरा किया, जो भविष्य में iROSA से 3B पावर चैनल तक बिजली पहुंचाएगी। इसके बाद उन्होंने स्ट्रट्स को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया। काम के दौरान मीर ने मेनन से चांद दिखने की बात कही, जिस पर मेनन ने कहा कि उन्हें वहां भविष्य का मून बेस दिखाई दे रहा है। अगस्त में दो और स्पेस वॉक होंगी यह इस महीने एक्सपेडिशन 75 क्रू के लिए तीन स्पेस वॉक में से पहली थी। अगली स्पेस वॉक 13 अगस्त को होगी, जिसमें दो अंतरिक्ष यात्री स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना बदलेंगे। यह एंटीना ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर और स्पेस स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है। इसके बाद 25 अगस्त को होने वाली स्पेस वॉक में क्रू मेंबर्स पावर चैनल केबल और डेटा रिले सिस्टम को कनेक्ट करेंगे। नासा के अनुसार, इस दौरान वे हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर स्पेसक्राफ्ट डॉकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले नेविगेशनल एड को भी बदलेंगे।

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

ट्रम्प बोले- ईरान से जंग जल्द खत्म हो सकती है:हूती विद्रोहियों का यमन में मिसाइल और ड्रोन अटैक, 30 सैनिकों की मौत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ जारी जंग जल्द खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के साथ संघर्ष अब ज्यादा लंबा चलेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास हथियारों की कोई कमी नहीं है और जरूरत के मुताबिक नए हथियार लगातार बनाए जा रहे हैं। उधर, यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें 30 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेजी पर मिसाइल हमला करने का भी दावा किया है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज डील जल्द संभव: AP की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। ईरान-ओमान के बीच मसौदा अंतिम चरण में है। 2. ट्रम्प बोले- ईरान खुद बातचीत चाहता है: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने खुद बातचीत की पहल की है और दोनों देशों के बीच वार्ता में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, समझौता ईरान के लिए सबसे बेहतर विकल्प होगा। 3. होर्मुज और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से बुधवार को सिर्फ 2 जहाज गुजरे, जबकि तनाव से पहले यहां रोज 130-140 जहाज गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी शिपिंग ट्रैफिक लगातार घट रहा है। 4. होर्मुज में टोल लगा तो दुनिया में महंगाई बढ़ेगी: दुनिया के आठ बड़े शिपिंग संगठनों ने UN और IMO से अपील की है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह का टोल या सर्विस शुल्क न लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे शिपिंग महंगी होगी और वैश्विक महंगाई बढ़ेगी। 5. लेबनान में 2 इजराइली सैनिकों की मौत: दक्षिणी लेबनान में एक इमारत में धमाके में दो इजराइली सैनिक मारे गए और चार घायल हुए। इसके बाद इजराइल ने कई इलाकों में हवाई हमले किए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर ₹5,390 करोड़ का जुर्माना:कहा- बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर हुआ;

न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर ₹5,390 करोड़ का जुर्माना:कहा- बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर हुआ;

न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 5000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मेटा के प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हुए दुष्प्रभाव के खिलाफ जारी किया गया है। अदालत ने यह फैसला कंपनी की जवाबदेही तय करते हुए सुनाया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की स गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि जुर्मान की रकम का बड़ा हिस्सा 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम अगले 5 साल तक अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की सुरक्षा और मेंटल हेल्थ को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ा है। मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल सेन शुरू किया था मुकदमा यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। मुकदमा इस बात पर आधारित था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम और फेसबुक बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं और कंपनी ने जानबूझकर इन खतरों को नजरअंदाज किया। कंपनी पर आरोप लगा कि एल्गोरिदम को इस तरह डिजाइन किया है कि वे बच्चों को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) बनाते हैं। इसके असर से बच्चों में डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई। मुकदमा केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं था। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और बच्चों को फंसाने के लिए किया जा रहा था, और कंपनी ने इस खतरे के बारे में जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठाए।

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन) से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक आदेश अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र हैं। ट्रम्प ने बताया कि दूसरा आदेश ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाम लगाने के लिए है। इसके तहत उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। इससे पहले बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब वे दोबारा इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आदेशों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ट्रम्प का मानना है कि उनके ये नए कदम संवैधानिक होंगे। जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था इससे पहले जून में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रम्प के उन पिछले प्रयासों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने यह घोषित करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध-अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से मौजूद लोगों के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में अपने पहले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि विदेशी माता-पिता से अमेरिका में पैदा हुए बच्चे इसके हकदार हैं। कैसे मिला था बर्थराइट सिटीजनशिप का अधिकार व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ये एग्जीक्यूटिव एक्शन 14वें संशोधन के मूल मकसद पर आधारित हैं। अमेरिकी संविधान में किया गया 14वां संशोधन खास तौर पर गृह युद्ध के बाद इसलिए बनाया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य हर विदेशी नागरिक के बच्चे को स्वतः नागरिकता देना नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, ऐसी नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की कैटेगरी का दायरा बढ़ाने के लिए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। बर्थराइट-बर्थ टूरिज्म पर नए आदेश का असर 2024 में बर्थ टूरिज्म से पैदा हुए बच्चों की संख्या 9600 थी ट्रम्प प्रशासन इसे बहुत बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े कुछ और बताते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के मुताबिक अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में से एक बहुत ही छोटा हिस्सा ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 22,000 से 26,000 बच्चों के पेरेंट्स अमेरिकी नागरिकता पाने के मकसद से वहां पहुंचते हैं। 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली मांओं के केवल 9,600 जन्म दर्ज किए गए थे।

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को नागरिकता नहीं मिलेगी; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिका में पहली बार 'बर्थ टूरिज्म' पर रोक:यहां पैदा हुए विदेशियों के बच्चे को भी नागरिकता नहीं; ट्रम्प बोले- बर्थराइट सिटीजनशिप मजाक बन गई थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों को नागरिकता मिलने के दायरे को सीमित करने की कोशिश की है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने इमिग्रेशन से जुड़े दो कार्यकारी आदेश साइन किए हैं। इनमें से एक अमेरिका में पैदा होने वाले उन लोगों की संख्या को सीमित करेगा, जो यहां नागरिकता पाने के हकदार हैं। ट्रम्प ने बताया कि दूसरा आदेश ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाम लगाने के लिए है। इसके तहत उन विदेशी पर्यटकों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाए जाएंगे, जो अमेरिका में आकर बच्चे को जन्म देना चाहते हैं। इससे पहले बर्थराइट सिटीजनशिप को सीमित करने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, लेकिन अब वे दोबारा इसके लिए कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आदेशों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ट्रम्प का मानना है कि उनके ये नए कदम संवैधानिक होंगे। जून में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था इससे पहले जून में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बर्थराइट सिटीजनशिप को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रम्प के उन पिछले प्रयासों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने यह घोषित करने की कोशिश की थी कि अमेरिका में अवैध-अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। कोर्ट ने कहा था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से मौजूद लोगों के बच्चे अपने-आप अमेरिकी नागरिकता पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ मामले में अपने पहले के फैसले का भी हवाला दिया और कहा कि विदेशी माता-पिता से अमेरिका में पैदा हुए बच्चे इसके हकदार हैं। कैसे मिला था बर्थराइट सिटीजनशिप का अधिकार व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ये एग्जीक्यूटिव एक्शन 14वें संशोधन के मूल मकसद पर आधारित हैं। अमेरिकी संविधान में किया गया 14वां संशोधन खास तौर पर गृह युद्ध के बाद इसलिए बनाया गया था ताकि यह पक्का किया जा सके कि गुलामों के बच्चे नागरिक बन सकें। इसका उद्देश्य हर विदेशी नागरिक के बच्चे को स्वतः नागरिकता देना नहीं था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, ऐसी नागरिकता के लिए अयोग्य लोगों की कैटेगरी का दायरा बढ़ाने के लिए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। बर्थराइट-बर्थ टूरिज्म पर नए आदेश का असर 2024 में बर्थ टूरिज्म से पैदा हुए बच्चों की संख्या 9600 थी ट्रम्प प्रशासन इसे बहुत बड़े खतरे के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े कुछ और बताते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के मुताबिक अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में से एक बहुत ही छोटा हिस्सा ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक 22,000 से 26,000 बच्चों के पेरेंट्स अमेरिकी नागरिकता पाने के मकसद से वहां पहुंचते हैं। 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली मांओं के केवल 9,600 जन्म दर्ज किए गए थे। ————– ट्रम्प से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम: पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा वीजा मिले हैं। पढ़ें पूरी खबर…

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के सख्त नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक:RBI ने रिकवरी के नियमों में बदलाव किया, 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे

पर्सनल, कार या होम लोन न चुकाने वाले ग्राहकों के मोबाइल और लैपटॉप बैंक बंद या डिसेबल नहीं कर सकते। रिजर्व बैंक यानी RBI ने 6 अगस्त को यह साफ कर दिया है। बैंक सिर्फ उन्हीं मामलों में ऐसा कर सकते हैं, जहां वो डिवाइस खुद बैंक के लोन पर खरीदा गया हो। केंद्रीय बैंक का यह कदम ग्राहकों को मिलने वाली धमकियों, प्राइवेसी के उल्लंघन और रिकवरी के नाम पर होने वाली प्रताड़ना को रोकने के लिए उठाया गया है। सवाल-जवाब में समझिए ये नए नियम क्या हैं… सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया आदेश दिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की वसूली के लिए कर्जदार के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर की मदद से लॉक या डिसेबल नहीं कर सकता। सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में फोन या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते? जवाब: बैंक केवल एक ही शर्त पर डिवाइस को डिसेबल कर सकते हैं, अगर वह मोबाइल या लैपटॉप खुद उसी बैंक या कंपनी के लोन पर खरीदा गया हो। अगर लोन या फाइनेंस किसी अन्य चीज के लिए लिया गया है, तो डिवाइस लॉक करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सवाल 3: जिन मामलों में डिवाइस फाइनेंस हुआ है, क्या वहां बैंक तुरंत फोन बंद कर सकते हैं? जवाब: नहीं, RBI ने कहा है कि अगर डिवाइस लोन पर खरीदा भी गया है, तो बैंक सीधे या शुरुआत से ही फोन लॉक नहीं कर सकते। बैंकों को चरणबद्ध तरीका अपनाना होगा। सवाल 4: अगर लोन पर खरीदा फोन लॉक होता भी है, तो कौन-कौन से फीचर्स चालू रहेंगे? जवाब: RBI के मुताबिक, फोन की जरूरी सेवाएं बंद नहीं की जा सकतीं। इसमें इनकमिंग कॉल्स, SMS और इमरजेंसी SOS फीचर्स शामिल हैं। लोन बकाया होने की स्थिति में भी ये सेवाएं चालू रखनी होंगी। सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या नियम हैं? जवाब: RBI ने साफ किया है कि बैंक या थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर बिना जांचे-परखे या थर्ड-पार्टी अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। उन्हें उस डिवाइस के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) प्लेटफॉर्म से बाकायदा सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। सवाल 6: RBI को ये सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: लंबे समय से ग्राहकों की शिकायतें आ रही थीं कि रिकवरी एजेंसियां और बैंक उन्हें परेशान कर रहे हैं। रिकवरी एजेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो डालकर बदनाम करने और अभद्र भाषा (गैली-गलौज) का इस्तेमाल कर रहे थे। इन्हीं शिकायतों के बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। सवाल 7: रिकवरी एजेंटों को कर्जदार की जानकारी देने पर क्या निर्देश दिए गए हैं? जवाब: RBI ने निर्देश दिया है कि बैंक अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ कर्जदार या गारंटर की निजी जानकारी बहुत सीमित दायरे में ही शेयर करें। केवल उतनी ही जानकारी दी जाए, जितनी लोन रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए बेहद जरूरी हो। सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे और इसकी प्रक्रिया कब शुरू हुई थी? जवाब: RBI के सर्कुलर के अनुसार, ये संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। बता दें कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने मई में ‘कंडक्ट ऑफ रेगुलेटेड एंटिटीज इन रिकवरी ऑफ लोन्स’ का एक ड्राफ्ट पेश किया था, जिस पर मिले फीडबैक के बाद अब फाइनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या हैं आपके अधिकार

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

अमेरिका में ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर दिख रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टूडेंट वीजा मिले हैं। सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, सख्ती का असर अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों की संख्या पर भी दिखा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या कम हुई है। भारतीय स्टूडेंट्स को मिलने वाले अमेरिकी वीजा 62% घटे सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को सिर्फ 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा मिले। पिछले साल इसी समय में यह संख्या 58,694 थी। यानी एक साल में भारतीय छात्रों के वीजा 62% घट गए। चीनी छात्रों के वीजा में भी कमी आई। 2025 में मई से अगस्त के बीच चीन के 40,034 छात्रों को F-1 वीजा मिला, जबकि 2024 में इसी समय में यह संख्या 61,075 थी। जहां भारत और चीन के छात्रों को कम F-1 वीजा मिले, वहीं कई दूसरे एशियाई देशों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल से 19.6% ज्यादा हैं। इसी दौरान बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 F-1 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 वीजा मिले, जो 44.3% ज्यादा हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।