ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम:65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा

अमेरिका में ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का सबसे बड़ा असर भारतीय छात्रों पर दिख रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा स्टूडेंट वीजा मिले हैं। सिर्फ छात्रों पर ही नहीं, सख्ती का असर अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों की संख्या पर भी दिखा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या कम हुई है। भारतीय स्टूडेंट्स को मिलने वाले अमेरिकी वीजा 62% घटे सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को सिर्फ 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा मिले। पिछले साल इसी समय में यह संख्या 58,694 थी। यानी एक साल में भारतीय छात्रों के वीजा 62% घट गए। चीनी छात्रों के वीजा में भी कमी आई। 2025 में मई से अगस्त के बीच चीन के 40,034 छात्रों को F-1 वीजा मिला, जबकि 2024 में इसी समय में यह संख्या 61,075 थी। जहां भारत और चीन के छात्रों को कम F-1 वीजा मिले, वहीं कई दूसरे एशियाई देशों के छात्रों की संख्या बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल से 19.6% ज्यादा हैं। इसी दौरान बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 F-1 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 वीजा मिले, जो 44.3% ज्यादा हैं। ट्रम्प सरकार ने वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया स्क्रीनिंग की वीजा में आई इस गिरावट की एक बड़ी वजह ट्रम्प सरकार के नए नियम रहे। जैसे- अमेरिका की जगह यूरोप का रुख कर रहे हैं भारतीय छात्र कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों की नई पसंद बन रहे हैं। इसकी वजह कम फीस, आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बाद नौकरी के बेहतर मौके हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से 50% से 80% तक कम होती है। 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी, जबकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों का दाखिला 68% बढ़ा। वहीं, कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं। H-1B वीजा में अब भी भारत सबसे आगे स्टूडेंट वीजा में गिरावट के बावजूद नौकरी के लिए मिलने वाले H-1B वर्क वीजा में भारत की पकड़ अब भी सबसे मजबूत है। 2024 में जारी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही। यानी, स्टूडेंट वीजा घटे हैं, लेकिन नौकरी के लिए भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा है। अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं। 2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है। प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या भी घटी है। 2025 में करीब 6.83 करोड़ विदेशी टूरिस्ट अमेरिका पहुंचे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। टूरिस्टों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी आई। सबसे ज्यादा गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों में रही। भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले टूरिस्टों की संख्या भी कम हुई, जबकि मेक्सिको से आने वाले टूरिस्ट बढ़े। यानी, ट्रम्प सरकार की सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा ही नहीं, बल्कि इमिग्रेशन और विदेशी टूरिज्म पर भी साफ दिख रहा है।
हर महीने ₹610 जमा करने पर मिलेंगे ₹1 लाख:SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में 7.05% तक का ब्याज, जानें इससे जुड़ी खास बातें

भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI एक खास रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD स्कीम चला रहा है, जिसका नाम ‘हर घर लखपति’ है। यह एक कस्टमाइज्ड RD प्रोडक्ट है, जिसका मकसद है कि आम आदमी हर महीने छोटी-छोटी बचत करके मैच्योरिटी पर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का फंड जुटा सके और ‘लखपति’ बन सके। समझें RD क्या है? रिकरिंग डिपॉजिट या RD बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। आप इसका इस्तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। मतलब आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मैच्योर होने पर आपके हाथ में बड़ी रकम होगी। हर घर लखपति स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड 3 साल से 10 साल तक रहता है। यानी आप 3 साल से 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं। 1 लाख से ज्यादा के लिए भी कर सकते हैं निवेश हर घर लखपति योजना में आप 1 लाख रुपए से ज्यादा का टारगेट भी चुन सकते हैं। इसमें 2, 3 और 4 लाख आदि का टारगेट सेट करके भी निवेश कर सकते हैं। आप जितनी रकम का टारगेट रखते है, आपकी किस्त की राशि उसी हिसाब से तय होती है।
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सरकार बोली-जेट फ्यूल में एथेनॉल मिलाने का कोई प्लान नहीं:केजरीवाल के दावे को गलत बताया, मंत्री बोले- अफवाह फैलाकर यात्रियों को न डराएं

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी ATF में एथेनॉल मिलाने की सरकार की कोई योजना या प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज यानी 6 गुरुवार को कहा कि विमान सुरक्षा को लेकर इस तरह की गलत जानकारी या अफवाहें फैलाने से हवाई यात्रियों में बेवजह डर और चिंता पैदा होती है। नायडू का यह बयान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर विमान के ईंधन में एथेनॉल मिलाने की योजना बनाने का आरोप लगाया था। उड्डयन मंत्री ने साफ किया कि हवाई यात्रियों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। केजरीवाल ने क्या दावा किया था? दरअसल, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की थी। उन्होंने लिखा था कि सूत्रों से संकेत मिला है कि मोदी सरकार ATF में एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। जानकारों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा से गंभीर समझौता हो सकता है। नायडू बोले- एथेनॉल और SAF में अंतर समझें अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू ने X पर लिखा कि सरकार का ATF में एथेनॉल मिलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह दावा पूरी तरह से झूठा और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने दोनों फ्यूल का अंतर समझाते हुए लिख एथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल SAF यानी दो पूरी तरह अलग चीजें हैं और इन्हें एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। SAF एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित एविएशन फ्यूल है, जिसे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन यानी ICAO द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसे वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से गुजरता है SAF नायडू ने आगे बताया कि SAF को इस्तेमाल में लाने से पहले कड़े टेस्टिंग प्रोसेस से गुजारा जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मानकों को पूरी तरह पूरा करता है। इसलिए इसे नॉर्मल जेट फ्यूल के साथ इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित माना गया है। उन्होंने दोहराया कि देश में एविएशन सेक्टर की ग्रोथ और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है और सुरक्षा से जुड़ा कोई भी कदम वैश्विक मानकों को ध्यान में रखकर ही उठाया जाता है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है SAF और यह एथेनॉल से कैसे अलग है? एथेनॉल : मुख्य रूप से गन्ने या अनाज से बनता है। इसे पेट्रोल में मिक्स किया जाता है जैसे कार/बाइक के लिए। इसका इस्तेमाल विमान के इंजन में सीधे नहीं किया जा सकता। SAF : यह बायो-वेस्ट, इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और अन्य ऑर्गेनिक कचरे से बनता है। यह पारंपरिक एटीएफ जैसा ही केमिकल स्ट्रक्चर रखता है और कार्बन उत्सर्जन को 80% तक कम करता है। इसका उपयोग
सरकार का हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने का प्लान नहीं:केजरीवाल के दावे को गलत बताया, मंत्री बोले- अफवाह फैलाकर यात्रियों को न डराएं

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार का हवाई जहाज के ईंधन में एथेनॉल मिलाने का कोई प्लान नहीं है। उन्होंने कहा कि विमान सुरक्षा को लेकर इस तरह की गलत जानकारी या अफवाहें फैलाने से हवाई यात्रियों में बेवजह डर और चिंता पैदा होती है। नायडू का यह बयान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर विमान के ईंधन में एथेनॉल मिलाने की योजना का आरोप लगाया था। उड्डयन मंत्री ने साफ किया कि हवाई यात्रियों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। केजरीवाल ने क्या दावा किया था? अरविंद केजरीवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि सूत्रों से संकेत मिला है कि मोदी सरकार जहाई जहाज के ईंधन में एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। जानकारों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा से गंभीर समझौता हो सकता है। नायडू बोले- एथेनॉल और SAF में अंतर समझें अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू ने X पर लिखा कि एथेनॉल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) दो पूरी तरह अलग चीजें हैं और इन्हें एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए। SAF एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित एविएशन फ्यूल है, जिसे इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन यानी ICAO द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसे वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। ग्लोबल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से गुजरता है SAF नायडू ने आगे बताया कि SAF को इस्तेमाल में लाने से पहले कड़े टेस्टिंग प्रोसेस से गुजारा जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा मानकों को पूरी तरह पूरा करता है। इसलिए इसे नॉर्मल जेट फ्यूल के साथ इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित माना गया है। उन्होंने दोहराया कि देश में एविएशन सेक्टर की ग्रोथ और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है और सुरक्षा से जुड़ा कोई भी कदम वैश्विक मानकों को ध्यान में रखकर ही उठाया जाता है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है SAF और यह एथेनॉल से कैसे अलग है? एथेनॉल : मुख्य रूप से गन्ने या अनाज से बनता है। इसे पेट्रोल में मिक्स किया जाता है जैसे कार/बाइक के लिए। इसका इस्तेमाल विमान के इंजन में सीधे नहीं किया जा सकता। SAF : यह बायो-वेस्ट, इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और अन्य ऑर्गेनिक कचरे से बनता है। यह पारंपरिक एटीएफ जैसा ही केमिकल स्ट्रक्चर रखता है और कार्बन उत्सर्जन को 80% तक कम करता है। इसका उपयोग दुनिया के कौन से देश पहले से SAF का उपयोग कर रहे हैं? वर्तमान में 40 से अधिक देशों और क्षेत्रों ने SAF के समर्थन में नीतियां लागू की हैं या विकसित कर रहे हैं। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन यानी ICAO के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के 125 से अधिक हवाई अड्डों पर SAF उपलब्ध है और अब तक 3,60,000 से अधिक व्यावसायिक उड़ानें SAF का उपयोग कर चुकी हैं। अमेरिका और यूरोप इसके उपयोग में सबसे आगे हैं।
एआई मॉडल में बिना निर्देश भ्रामक व्यवहार का अनूठा मामला:खुद बनाई फर्जी पहचान, साइबर हमले की कोशिश की; पकड़े जाने पर सबूत मिटाए

एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट (एआईएसआई) की एक टेस्टिंग में दो एडवांस एआई मॉडल ऐसे व्यवहार करते मिले, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी। टेस्ट के दौरान एंथ्रोपिक के माइथोस एआई ने इंसानों जैसी फर्जी ऑनलाइन पहचान बनाई। फिर निजी संदेश भेजे और लोगों को भरोसे में लेकर ‘गिटहब’ सिस्टम में नुकसान पहुंचाने वाला कोड डालने की कोशिश की। जब इसकी गतिविधियों पर सवाल उठे तो इसने अपने पुराने रिकॉर्ड को सामान्य दिखाने के लिए उसमें बदलाव किए और नई पहचान अपनाने पर भी विचार किया। यह पहली बार है जब किसी एआई मॉडल में बिना किसी निर्देश के इतने स्पष्ट ऑटोनोमस और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान मानव निगरानी मौजूद थी, इसलिए एआई अपने मकसद में सफल नहीं हो सका। इस मामले में एआई मॉडल को सिर्फ एक साइबर सिक्योरिटी चुनौती हल करने का काम दिया गया था। इसके लिए उसे इंटरनेट तक पहुंच दी गई थी, ताकि यह समझा जा सके कि वास्तविक परिस्थितियों में एआई क्या कर सकता है। लेकिन एआई ने तय दायरे से आगे बढ़कर खुद लोगों की पहचान खोजी, उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए और उन्हें फाइल शेयरिंग सर्विस के जरिए संदेश भेजकर सिस्टम तक पहुंच हासिल करने की कोशिश की। एआईएसआई का कहना है कि इससे पता चलता है कि ज्यादा सक्षम होते एआई मॉडल भविष्य में उम्मीद से अलग व्यवहार भी कर सकते हैं। ब्रिटेन के एआई मंत्री कनिष्क नारायण ने कहा कि ऐसे जोखिमों की पहचान करना और उन्हें सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि इसे और सुरक्षित बनाया जा सके। एंथ्रोपिक और ओपनएआई, दोनों ने कहा कि यह परीक्षण सामान्य इस्तेमाल जैसे हालात में नहीं किया गया था। टेस्ट के दौरान उनके मॉडल की सामान्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को कम या हटाया गया था। एंथ्रोपिक ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि ओपनएआई ने कहा कि वह भविष्य में ऐसे परीक्षणों को और सुरक्षित बनाने के लिए मूल्यांकन एजेंसियों के साथ काम जारी रखेगी। टेस्ट में एआई को नहीं मिला था धोखा देने का कोई निर्देश एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट ने कहा कि माइथोस एआई को न तो लोगों को धोखा देने और न ही उससे बचने का कोई विशेष निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद उसने खुद फर्जी पहचान बनाई और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की। संस्था के मुताबिक, पहली बार बिना किसी खास प्रॉम्प्ट के एआई में इस स्तर का स्वायत्त और भ्रामक व्यवहार देखने को मिला। हालांकि, ऐसी घटनाएं बहुत सीमित परिस्थितियों में हुईं।
रियलिटी शोज पर भड़के महाभारत एक्टर सौरभ राज:कहा- TRP बटोरने के लिए जिस हद तक गिर रहे हैं वो शर्मनाक, ये मनोरंजन नहीं घिनौना प्रदर्शन है

मशहूर टीवी शो महाभारत में भगवान कृष्ण का किरदार निभाने वाले एक्टर सौरभ राज ने रियलिटी शोज पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मेकर्स टीआरपी बटोरने के लिए जिस हद तक गिर रहे हैं वो शर्मनाक है। उनका ये बयान तब सामने आया है, जब ओटीटी प्लेटफॉर्म में लॉकअप 2, अलायंस और भोजपुरी बवाल जैसे शोज चर्चा में हैं। सौरभ राज ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से रियलिटी शोज पर निशाना साधते हुए लिखा है, ‘मुझे कहा गया था कि इस मुद्दे पर चुप रहूं, क्योंकि प्रोफेशनली इसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन इंसानियत के नाते अब बोलना जरूरी है। रियलिटी शोज को अब खुद अपनी हकीकत का सामना करने की जरूरत है। सिर्फ टीआरपी बटोरने के लिए ये जिस हद तक गिर चुके हैं, वह बेहद शर्मनाक है। यह मनोरंजन बिल्कुल नहीं है। यह बीमार मानसिकता, अमानवीयता, मानसिक उत्पीड़न, क्रूरता और विकृत सोच का घिनौना प्रदर्शन है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘हैरानी होती है कि इतने बड़े और मशहूर होस्ट ऐसे शो में यह सब होते हुए कैसे चुपचाप देखते रहते हैं और इसे होने देते हैं। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है। उम्मीद है कि इंडस्ट्री में अब भी कुछ समझदारी बाकी है और समय रहते इस पर लगाम लगेगी। आखिर हम समाज के लिए किस तरह का मानदंड तय कर रहे हैं?’ क्या लॉकअप 2 पर एक्टर ने साधा निशाना इन दिनों 3 रियलिटी शोज चर्चा में हैं। पहला है नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुआ लॉक अप-2, जिसकी विजेता श्रेया कालरा बनी हैं। दूसरा शो है अमेजन प्राइम का अलायंस और तीसरा है जियो हॉटस्टार का भोजपुरी बवाल। जहां अलायंस स्ट्रेटजी का साफ सुथरा रियलिटी शो है, वहीं नेटफ्लिक्स का लॉक अप 2, गाली गलौज और झगड़ों के चलते विवादों में रहा। शो में सेक्शुएलिटी का मजाक बनाया गया और अभद्र भाषा भी इस्तेमाल हुई। इसके अलावा 2 अगस्त से जियो हॉटस्टार में स्ट्रीम हो रहा रियलिटी शो भोजपुरी बवाल भी सुर्खियों में है, जिसमें भोजपुरी एक्ट्रेस, बॉलीवुड एक्ट्रेस का मजाक उड़ाती दिखी हैं। 2 रियलिटी शोज का हिस्सा रहे एक्टर सौरभ राज रियलिटी शोज पर सवाल खड़े करने वाले सौरभ राज खुद भी 2 रियलिटी शोज खतरों के खिलाड़ी 11 और नच बलिए में नजर आ चुके हैं। बता दें कि सौरभ राज कई माइथोलॉजिकल शोज देवों के देव महादेव, महाकालीः अंत ही आरंभ है, महाभारत में नजर आए हैं। उन्हें असल पहचान महाभारत में भगवान कृष्ण के किरदार से मिली थी। इनके अलावा वो कसम से, परिचय, मीत मिला दे रब्बा और पटियाला बेब्स में नजर आए हैं।
हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।
हवा में 171 फीट के रॉकेट को पकड़ेगा चॉपस्टिक टावर:अगस्त में स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी स्पेसएक्स; मस्क बोले- सालभर में रोजाना 1 फ्लाइट होगी

स्पेसएक्स इसी महीने इतिहास रचने की तैयारी में है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो कंपनी अगस्त खत्म होने से पहले अपने स्टारशिप का 14वां टेस्ट करेगी। इस टेस्ट में स्पेसएक्स की टीम लॉन्च टावर के जरिए स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ‘शिप’ को हवा में कैच करने की कोशिश करेगी। सेप्सएक्स दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की कंपनी है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। केवल स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा 171 फीट का है। ‘शिप’ को टावर के ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स से पकड़ेंगे साउथ टेक्सास के स्टारबेस साइट पर 2 लॉन्च टावर हैं, जिनमें बड़े ‘चॉपस्टिक’ आर्म्स लगे हैं। यह स्टारशिप को पैड पर असेंबल करते हैं। इन्हीं टावर्स पर स्टारशिप को कैच करने की तैयारी है। इससे पहले स्पेसएक्स 3 टेस्ट फ्लाइट में स्टारशिप के निचले हिस्से बूस्टर को कैच करने का कारनामा कर चुकी है, लेकिन शिप को कैच करने की यह पहली कोशिश होगी। स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में छोड़े जाएंगे फ्लाइट 14 के जरिए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट्स का एक बैच भेजा जाएगा। यह मौजूदा सैटेलाइट्स से बड़े और ज्यादा सक्षम हैं। 24 जुलाई को हुई फ्लाइट 13 में 20 स्टारलिंक V3 भेजे गए थे, जो सब-ऑर्बिट में थे। फ्लाइट 14 में इन्हें ऑपरेशनल ऑर्बिट में रखा जाएगा। फ्लाइट 13 की सफलता ने बढ़ाया कंपनी का भरोसा 24 जुलाई को स्टारशिप की फ्लाइट 13 लॉन्च हुई थी। यह एक सब-ऑर्बिट उड़ान थी। इसकी हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई थी। मस्क ने बताया कि फ्लाइट 13 के दौरान वायुमंडल में वापस आते समय शिप की ‘हीट शील्ड’ पूरी तरह सुरक्षित रही। पूरा रॉकेट आज भी सुरक्षित है। हीट शील्ड की सफलता ने ही कंपनी को फ्लाइट 14 में टावर कैच का जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। हीट शील्ड की समस्या सुलझ चुकी है, जल्द रोजाना 1 फ्लाइट होगी स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान इलॉन मस्क ने स्टारशिप के भविष्य और इसकी रफ्तार को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि “मैं किसी भी तरह की नजर नहीं लगाना चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि इस मोड़ पर हीट शील्ड की समस्या पूरी तरह से सुलझ चुकी है।” उन्होंने कहा कि “हम उम्मीद करते हैं कि उड़ानों की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ेगी। संभवतः आज से एक साल बाद हम रोजाना कम से कम एक फ्लाइट करेंगे, या शायद उससे भी ज्यादा।” नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘हीट शील्ड’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण? जब कोई स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से वापस पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के घर्षण से अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ‘हीट शील्ड’ स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से पर लगाई जाने वाली एक सुरक्षात्मक परत है। यह इंसुलेटिंग मटीरियल से बनी होती है, जो इस गर्मी को झेलकर रॉकेट के अंदरूनी हिस्सों को जलने से बचाती है। स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए हीट शील्ड का सुरक्षित रहना सबसे जरूरी शर्त है।
लाफ्टर चैलेंज से रिजेक्ट हो गए थे कपिल शर्मा:चंदन प्रभाकर बोले- मेकर्स को हाथ जोड़ एंट्री दिलाई, उन्होंने मुझे ही शो से निकाल दिया

अमृतसर के रहने कपिल शर्मा को कॉमेडी की दुनिया में पहचान दिलाने में उनके बचपन के दोस्त चंदन प्रभाकर की बड़ी भूमिका रही। चंदन ने अपना करियर दांव पर लगाकर कपिल की ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ में एंट्री करवाई थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में चंदन ने बताया कि वह और कपिल मुंबई में शो के ऑडिशन के लिए गए थे। वहां कपिल रिजेक्ट हो गए, जबकि उनका सिलेक्शन हो गया था। इसके बाद कपिल ने दिल्ली में भी ऑडिशन दिया, लेकिन वहां भी उन्हें रिजेक्शन मिला। चंदन ने कपिल को शो में शामिल करने के लिए मेकर्स से काफी आग्रह किया। मेकर्स ने शर्त रखी कि कपिल को जगह देने के लिए किसी एक कंटेस्टेंट को शो छोड़ना होगा। चंदन ने बिना देर किए शो छोड़ दिया और कपिल की एंट्री करवा दी। यहीं से कपिल के करियर को बड़ी उड़ान मिली। हालांकि, कुछ महीने बाद मेकर्स ने चंदन को दोबारा शो में बुला लिया। चंदन प्रभाकर को ‘द कपिल शर्मा शो’ में चंदू चायवाला के किरदार से भी खूब पहचान मिली। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कपिल शर्मा के साथ अपनी दोस्ती और करियर से जुड़े कई किस्से साझा किए। जानिए कैसे दोस्त बने कपिल और चंदन… चंदन प्रभाकर ने ये बड़ी बातें कही… 2013 में ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ शुरू चंदन ने इससे पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2013 में जब कपिल शर्मा ने अपना खुद का शो ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ शुरू किया, तो उन्होंने अपने सबसे पुराने साथी यानी उन्हें अपने साथ जोड़ा। चंदन को इस शो में ‘चंदू चायवाला’ का आइकॉनिक रोल दिया गया। चंदन के लिए यह किरदार निभाना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि शो में हर वक्त उनका चेहरा, कपड़े और गरीबी का मजाक उड़ाया जाता था। कपिल अक्सर शो में ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन मजाकिया अंदाज में कहा करते थे, “अगर मैं इसे अमृतसर से पकड़कर मुंबई नहीं लाता, तो यह आज भी वहीं भटक रहा होता। हालांकि चंदन इस बात को दोस्त का प्यार और शो की स्क्रिप्ट का हिस्सा मानकर मुस्कुराते हुए सह लेते थे। ऑस्ट्रेलिया टूर, एयर इंडिया फ्लाइट विवाद चंदन बताते हैं कि मार्च 2017 में कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर के बरसों पुराने रिश्ते में उस वक्त भारी दरार आ गई, जब एक अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान बड़ा विवाद हो गया। ऑस्ट्रेलिया के शो के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई। चंदन ने साफ शब्दों में कपिल से कहा कि तू मुझसे इस तरह बात नहीं कर सकता। चंदन ने वहां आगे काम करने से इनकार कर दिया। वापस भारत लौटते समय एयर इंडिया की फ्लाइट में कपिल शर्मा, सुनील ग्रोवर और चंदन के बीच विवाद और बढ़ गया। मुंबई पहुंचते ही चंदन प्रभाकर, सुनील ग्रोवर व कुछ अन्य सदस्यों ने कपिल के शो ‘द कपिल शर्मा शो’ से अपना नाता तोड़ लिया। बेटी का जन्म, कपिल का पछतावा विवाद के ठीक बाद चंदन की जिंदगी में एक नया मोड़ आया और 31 मार्च में चंदन प्रभाकर के घर एक नन्हीं बेटी ने जन्म लिया। चंदन प्रभाकर ने बताया कि बेटी होने के बाद कपिल शर्मा उनके घर आए और बेटी को शगुन दिया। उसके बाद कपिल शर्मा भावुक हो गए और उन्होंने अपनी पुरानी दोस्ती का वास्ता देकर उन्हें शाे में वापस बुला दिया। उन्होंने बताया कि जून 2017 में वो वापस ‘द कपिल शर्मा शो’ में लौट आए। साल 2018 में जब कपिल शर्मा डिप्रेशन, हेल्थ इश्यूज और मीडिया विवादों के कारण अपने जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे, तब चंदन प्रभाकर किसी ढाल की तरह उनके साथ खड़े रहे। हालांकि जब कपिल शर्मा का शो नेट फिलिक्स पर आया तो चंदन प्रभाकर ने उनका शो फिर से छोड़ दिया। *********** ये खबर भी पढ़ें: चंडीगढ़ में ₹3 करोड़ इन्वेस्ट, फिर बंद हुआ शोरूम: ‘बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी’ का पूरा केस, जिसमें कोर्ट ने सलमान खान को तलब किया चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री और स्टाइल एंड क्यूंटेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य को समन जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी को 5 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। कोर्ट में याचिका दायर करने वाले कारोबारी का दावा है कि सलमान खान उसे बिग बॉस के सेट पर मिले थे।(पढ़ें पूरी खबर)







