Tuesday, 22 Sep 2026 | 07:52 PM

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बॉडी शेमिंग को लेकर नीना गुप्ता ने दिया जवाब:67 साल की एक्ट्रेस बोलीं- 'कोई पूछे तो कह देना मैं प्रेग्नेंट हूं'

बॉडी शेमिंग को लेकर नीना गुप्ता ने दिया जवाब:67 साल की एक्ट्रेस बोलीं- 'कोई पूछे तो कह देना मैं प्रेग्नेंट हूं'

नीना गुप्ता ने हाल ही में बॉडी शेमिंग और शादी को लेकर किए जाने वाले सवालों पर मजेदार अंदाज में जवाब दिया। CNN-न्यूज18 को दिए इंटरव्यू में पूछा गया कि जब लोग पूछते थे कि उनकी शादी क्यों नहीं हुई, तो वह इस पर क्या जवाब देती थीं। इस पर नीना ने कहा, “मैं तुम्हारे बाप का तो नहीं खा रही ना, अपने बाप का खा रही हूं। तुम्हें क्या प्रॉब्लम है, शादी करी कि नहीं?” एक अन्य सवाल में जब पूछा गया कि कोई यह कहे कि आप पिछली बार से ज्यादा मोटी हो गई हैं, तो वह क्या जवाब देंगी। इस पर नीना ने कहा, “प्रेग्नेंट हूं।” नीना ने बताया कि वह वजन को लेकर होने वाली टिप्पणियों से काफी परेशान हो जाती थीं। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने थोड़ी मोटी साड़ी पहनी थी। साड़ी की वजह से शरीर के एक हिस्से पर थोड़ा बल्क नजर आ गया। इसके बाद लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि नीना गुप्ता 60 की उम्र में प्रेग्नेंट हैं। नीना ने बताया कि मैंने कहा, अब कोई पूछे तो कह देना, “मैं प्रेग्नेंट हूं।” जब उन्हें बताया गया कि हाल ही में 74 साल की एक महिला के जुड़वां बच्चे हुए हैं, जिस पर नीना ने हंसते हुए कहा, “मेरा चांस है अभी।” नीना गुप्ता को लुक को लेकर ट्रोल किया गया था नीना गुप्ता को पिछले साल एयरपोर्ट पर शॉर्ट्स पहनने और अपना वीडियो शेयर करने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसका उन्होंने बेहद करारा जवाब दिया था। दरअसल, वीडियो में नीना ब्लैक आउटफिट और शॉर्ट्स में नजर आई थीं। उन्होंने कैमरे पर बताया था कि लंबे इंतजार के दौरान वह घर का बना खाना साथ रखती हैं। इसके लिए वह रोटी रोल और टिफिन में आलू, मिर्च, पनीर और प्याज जैसी चीजें पैक कर लेती हैं। जिसके बाद वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा था, “बहुत अच्छा …लेकिन एक रिक्वेस्ट है, अपने पैर मत दिखाइए। ये अच्छे टोन में नहीं हैं। हमने कभी दादी-मम्मी को इस तरह पैर दिखाते नहीं देखा। उम्र के साथ ग्रेसफुल रहना ही सही है।” वहीं, यूजर के कमेंट पर रिप्लाई करते हए एक दूसरी यूजर ने लिखा था, “ये कितना शर्मनाक कमेंट है। खासकर किसी औरत की तरफ से। आप खुद बॉडी शेमिंग करके औरतों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं।” जिसके बाद इस कमेंट पर नीना गुप्ता ने जवाब देते कहा था, “चिंता मत करो। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, असल में वो जलते हैं कि उनके पास इतनी अच्छी बॉडी नहीं है। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करो।” नीना गुप्ता की निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव रहे हैं। उन्होंने कॉलेज के दिनों में IIT दिल्ली में पढ़ाई कर रहे अमलान घोष से शादी की थी। हालांकि, यह शादी एक साल के भीतर ही दोनों की आपसी सहमति से खत्म हो गई। इसके बाद नीना गुप्ता की सगाई पंडित जसराज के बेटे शारंगदेव पंडित से भी हुई थी। हालांकि, यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला। 1980 के दशक के आखिर में नीना गुप्ता वेस्ट इंडीज के पूर्व क्रिकेटर विव रिचर्ड्स के साथ रिलेशनशिप में थीं। दोनों ने शादी नहीं की, लेकिन 1989 में उनकी बेटी मसाबा गुप्ता का जन्म हुआ। विव रिचर्ड्स पहले से शादीशुदा थे, इसलिए नीना ने मसाबा की परवरिश सिंगल मदर के तौर पर करने का फैसला लिया। 2008 में उन्होंने अमेरिका में एक निजी समारोह में नई दिल्ली के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी की। सीरीज ‘चुंबक’ में दिखीं नीना गुप्ता नीना गुप्ता की कॉमेडी-ड्रामा सीरीज ‘चुंबक’ कल रिलीज हो गई है। सीरीज की कहानी एक शहरी भारतीय मोहल्ले में रहने वाले पांच परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है। सीरीज में देवेन भोजानी, अर्जुन बिजलानी, हेली शाह, सुमीत व्यास, मानसी पारेख, सुमीत राघवन, संदीपा धर, डेलनाज ईरानी, अनंत वी. जोशी और अमायरा दस्तूर नजर आ रहे हैं। ‘चुंबक’ को हैट्स ऑफ प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया है। यही प्रोडक्शन हाउस ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ और ‘खिचड़ी’ जैसे लोकप्रिय शोज बना चुका है। सीरीज की कहानी और निर्देशन आतिश कपाड़िया ने किया है। इसे जमनादास (JD) मजीठिया और आतिश कपाड़िया ने प्रोड्यूस किया है।

बॉडी शेमिंग को लेकर नीना गुप्ता ने दिया जवाब:67 साल की एक्ट्रेस बोलीं- 'कोई पूछे तो कह देना मैं प्रेग्नेंट हूं'

बॉडी शेमिंग को लेकर नीना गुप्ता ने दिया जवाब:67 साल की एक्ट्रेस बोलीं- 'कोई पूछे तो कह देना मैं प्रेग्नेंट हूं'

नीना गुप्ता ने हाल ही में बॉडी शेमिंग और शादी को लेकर किए जाने वाले सवालों पर मजेदार अंदाज में जवाब दिया। CNN-न्यूज18 को दिए इंटरव्यू में पूछा गया कि जब लोग पूछते थे कि उनकी शादी क्यों नहीं हुई, तो वह इस पर क्या जवाब देती थीं। इस पर नीना ने कहा, “मैं तुम्हारे बाप का तो नहीं खा रही ना, अपने बाप का खा रही हूं। तुम्हें क्या प्रॉब्लम है, शादी करी कि नहीं?” एक अन्य सवाल में जब पूछा गया कि कोई यह कहे कि आप पिछली बार से ज्यादा मोटी हो गई हैं, तो वह क्या जवाब देंगी। इस पर नीना ने कहा, “प्रेग्नेंट हूं।” नीना ने बताया कि वह वजन को लेकर होने वाली टिप्पणियों से काफी परेशान हो जाती थीं। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने थोड़ी मोटी साड़ी पहनी थी। साड़ी की वजह से शरीर के एक हिस्से पर थोड़ा बल्क नजर आ गया। इसके बाद लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि नीना गुप्ता 60 की उम्र में प्रेग्नेंट हैं। नीना ने बताया कि मैंने कहा, अब कोई पूछे तो कह देना, “मैं प्रेग्नेंट हूं।” जब उन्हें बताया गया कि हाल ही में 74 साल की एक महिला के जुड़वां बच्चे हुए हैं, जिस पर नीना ने हंसते हुए कहा, “मेरा चांस है अभी।” नीना गुप्ता को लुक को लेकर ट्रोल किया गया था नीना गुप्ता को पिछले साल एयरपोर्ट पर शॉर्ट्स पहनने और अपना वीडियो शेयर करने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसका उन्होंने बेहद करारा जवाब दिया था। दरअसल, वीडियो में नीना ब्लैक आउटफिट और शॉर्ट्स में नजर आई थीं। उन्होंने कैमरे पर बताया था कि लंबे इंतजार के दौरान वह घर का बना खाना साथ रखती हैं। इसके लिए वह रोटी रोल और टिफिन में आलू, मिर्च, पनीर और प्याज जैसी चीजें पैक कर लेती हैं। जिसके बाद वीडियो पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा था, “बहुत अच्छा …लेकिन एक रिक्वेस्ट है, अपने पैर मत दिखाइए। ये अच्छे टोन में नहीं हैं। हमने कभी दादी-मम्मी को इस तरह पैर दिखाते नहीं देखा। उम्र के साथ ग्रेसफुल रहना ही सही है।” वहीं, यूजर के कमेंट पर रिप्लाई करते हए एक दूसरी यूजर ने लिखा था, “ये कितना शर्मनाक कमेंट है। खासकर किसी औरत की तरफ से। आप खुद बॉडी शेमिंग करके औरतों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं।” जिसके बाद इस कमेंट पर नीना गुप्ता ने जवाब देते कहा था, “चिंता मत करो। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, असल में वो जलते हैं कि उनके पास इतनी अच्छी बॉडी नहीं है। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करो।” नीना गुप्ता की निजी जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव रहे हैं। उन्होंने कॉलेज के दिनों में IIT दिल्ली में पढ़ाई कर रहे अमलान घोष से शादी की थी। हालांकि, यह शादी एक साल के भीतर ही दोनों की आपसी सहमति से खत्म हो गई। इसके बाद नीना गुप्ता की सगाई पंडित जसराज के बेटे शारंगदेव पंडित से भी हुई थी। हालांकि, यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला। 1980 के दशक के आखिर में नीना गुप्ता वेस्ट इंडीज के पूर्व क्रिकेटर विव रिचर्ड्स के साथ रिलेशनशिप में थीं। दोनों ने शादी नहीं की, लेकिन 1989 में उनकी बेटी मसाबा गुप्ता का जन्म हुआ। विव रिचर्ड्स पहले से शादीशुदा थे, इसलिए नीना ने मसाबा की परवरिश सिंगल मदर के तौर पर करने का फैसला लिया। 2008 में उन्होंने अमेरिका में एक निजी समारोह में नई दिल्ली के चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी की। सीरीज ‘चुंबक’ में दिखीं नीना गुप्ता नीना गुप्ता की कॉमेडी-ड्रामा सीरीज ‘चुंबक’ कल रिलीज हो गई है। सीरीज की कहानी एक शहरी भारतीय मोहल्ले में रहने वाले पांच परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है। सीरीज में देवेन भोजानी, अर्जुन बिजलानी, हेली शाह, सुमीत व्यास, मानसी पारेख, सुमीत राघवन, संदीपा धर, डेलनाज ईरानी, अनंत वी. जोशी और अमायरा दस्तूर नजर आ रहे हैं। ‘चुंबक’ को हैट्स ऑफ प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया है। यही प्रोडक्शन हाउस ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ और ‘खिचड़ी’ जैसे लोकप्रिय शोज बना चुका है। सीरीज की कहानी और निर्देशन आतिश कपाड़िया ने किया है। इसे जमनादास (JD) मजीठिया और आतिश कपाड़िया ने प्रोड्यूस किया है।

कुनिका सदानंद ने पूनम ढिल्लों पर लगाए गंभीर आरोप:बोलीं- उनकी गाड़ी में CINTAA ऑफिस के पेपर्स रखे जा रहे थे, वीडियो बनाने से भी रोका

कुनिका सदानंद ने पूनम ढिल्लों पर लगाए गंभीर आरोप:बोलीं- उनकी गाड़ी में CINTAA ऑफिस के पेपर्स रखे जा रहे थे, वीडियो बनाने से भी रोका

CINTAA के भीतर चल रही कानूनी लड़ाई और कोर्ट के आदेश पर होने वाले चुनाव के बीच एक्ट्रेस कुनिका सदानंद ने आरोप लगाया कि ऑफिस के कुछ दस्तावेज पूनम ढिल्लों की कार में रखे जा रहे थे और उन्हें इसका वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई। एक वीडियो में कुनिका सदानंद ने मामले को लेकर कहा, “मैं CINTAA की आज की स्थिति देखकर बहुत दुखी हूं। मैंने पिछले 40 साल में किसी कमेटी का ऐसा व्यवहार नहीं देखा।” कुनिका ने बताया कि उन्हें CINTAA ऑफिस से दस्तावेज हटाए जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचीं। उनके मुताबिक, मनीष चतुर्वेदी और प्रीति ने फोन कर बताया कि पिछली कमेटी के लोग जल्दबाजी में कागजात ले जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन पुलिस ने कहा कि दस्तावेजों को रोकने के लिए चैरिटी कमिश्नर का आदेश जरूरी है। कुनिका के अनुसार, दस्तावेजों को टेंपो से कार्तिक कॉम्प्लेक्स स्थित ऑफिस ले जाया जा रहा था। कुनिका ने कहा कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) से जुड़े लोगों ने टेंपो को रोक दिया और दस्तावेजों को CINTAA के ऑफिस में रखकर वहां ताला लगा दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग दस्तावेजों को पूनम ढिल्लों की कार में रख रहे थे। कुनिका के मुताबिक, इसका वीडियो बनाया गया और पुलिस से प्रक्रिया रोकने के लिए कहा गया। कुनिका ने बताया कि पुलिस ने कुछ दस्तावेज दिखाए, जिनमें कुछ कोर्ट के कागजात थे। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई 16 तारीख को है, इसलिए दस्तावेजों को लॉक करके रखने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने पद्मिनी कोल्हापुरे के कथित बयान का भी जिक्र किया। कुनिका के अनुसार, पद्मिनी ने कहा कि वह कागजात सुरक्षित रखने के लिए ले जा रही थीं। कुनिका ने सवाल उठाया कि उन्हें दस्तावेज किससे सुरक्षित रखने थे। कुनिका ने आरोप लगाया कि पूनम ने एक व्यक्ति का फोन छीनकर तोड़ने की कोशिश की और उन्हें वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया। कुनिका ने कहा कि पुलिस ने कागजात के एक कार्टन पर ताला लगाने की अनुमति दी और बाद में उस लॉकिंग सिस्टम पर टेप लगाया गया। उन्होंने कहा कि CINTAA के संस्थापकों ने कभी नहीं सोचा होगा कि संगठन में ऐसी स्थिति आएगी। गुरुवार को CINTAA के मुंबई कार्यालय में दोनों गुटों पूनम ढिल्लों खेमा और उपासना सिंह-FWICE खेमा के बीच तीखी बहस हुई। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने कानूनी दस्तावेजों को कथित तौर पर कार्यालय से बाहर ले जाने और चुनाव से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। अगस्त की शुरुआत में पूनम ढिल्लों और उपासना सिंह के नेतृत्व वाले गुटों के बीच मतभेद के बाद CINTAA (सिने और टीवी कलाकार संघ) की कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। जिनमें से 8 निर्वाचित सदस्य थे। इसके बाद FWICE (फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज) ने 12 सितंबर को CINTAA के नए चुनाव कराने की घोषणा की। पूनम ढिल्लों के नेतृत्व वाले गुट ने 25 अगस्त को दिंडोशी सत्र न्यायालय में चुनाव की वैधता को चुनौती दी थी। 8 सितंबर को अदालत ने चुनाव कराने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि चुनाव घोषित होने के बाद वह इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव होने पर उसके परिणाम मामले के अंतिम फैसले के अनुरूप होंगे। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उपासना सिंह ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलने का पूरा विश्वास था। उन्होंने बताया कि CINTAA के इतिहास में पहली बार 51 लोगों ने नामांकन दाखिल किए हैं। उनका कहना है कि कार्यकारी समिति के भंग होने के बाद कार्यकारी आम बैठक में लिए गए फैसले अमान्य हैं। FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी ने कहा कि अदालत ने 12 सितंबर को चुनाव कराने की अनुमति दी है और चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव परिणाम घोषित होने तक CINTAA के सोशल मीडिया खातों को निलंबित करने का अनुरोध किया गया है। इस मामले में वर्सोवा और अंबोली पुलिस स्टेशनों को भी पत्र लिखा गया है। CINTAA के बैंक खाते भी चुनाव परिणाम आने तक फ्रीज किए गए हैं।

नशा मुक्त हरियाणा थीम पर क्रिकेट लीग में शराब पार्टी,VIDEO:देहरादून स्टेडियम में सिंगर ने कोहनी से खोली बोतल, साथी बोले- वाह भाई के मारा है

नशा मुक्त हरियाणा थीम पर क्रिकेट लीग में शराब पार्टी,VIDEO:देहरादून स्टेडियम में सिंगर ने कोहनी से खोली बोतल, साथी बोले- वाह भाई के मारा है

देहरादून में ‘नशा मुक्त हरियाणा और खेलों को बढ़ावा’ देने की थीम पर चल ही हरियाणवी आर्टिस्ट क्रिकेट लीग (ACL) में शराब पार्टी का वीडियो सामने आया है। इसमें कलाकार योगेश उर्फ योगी दहिया कोहनी मारकर शराब की बोतल खोलते नजर आ रहे हैं। उनके आसपास कुछ अन्य कलाकार भी खड़े नजर आ रहे हैं। पीछे से एक शख्स की आवाज भी सुनाई देती है, जो योगी के बोतल खोलने के अंदाज पर कहता है- ‘वाह भाई वाह… के मारा है रै।’ इसके बाद कलाकार बोतल के साथ एंजॉय करते नजर आते हैं। आयोजक साहिल सोहरडा के अनुसार, देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 9 सितंबर को ओपनिंग सेरेमनी के बाद 10 सितंबर से लीग के मैच शुरू हुए थे। ओपनिंग सेरेमनी में प्रांजल दहिया और खासा आला चाहर समेत कई कलाकार पहुंचे थे। दैनिक भास्कर ने जब योगी दहिया से बात की तो उन्होंने इस पर सफाई दी। बोले-ये सेलिब्रेशन का वीडियो किसी ने वायरल कर दिया। शराब बोतल खोलने की 2 तस्वीरें:- पहले जानिए, वीडियो में क्या दिख रहा… योगी के हाथ में शराब की बोतल देहरादून के रायपुर स्थित राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में हरियाणवी आर्टिस्ट क्रिकेट लीग चल रही है। इस लीग में खेल रहे कलाकार योगी दहिया का 15 सेकेंड का एक वीडियो सामने आया है। इसमें योगी कई कलाकारों के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथ में शराब की बोतल है। कोहनी मारकर ढक्कर खोला योगी कोहनी मारकर बोतल खोलते हैं। इसके बाद ढक्कन खोलकर बोतल को ऊपर उठाते हैं। यहां एक टेबल पर कुछ ग्लास और खाना भी नजर आ रहा है। इसके बाद योगी ग्लास में शराब डालते हैं। स्टेडियम के अंदर कुछ प्लेयर भी खड़े नजर आ रहे हैं। योगेश दहिया की सफाई-बोले सेलिब्रेशन का वीडियो वायरल हुआ जीत का जश्न मना रहे थेः सोनीपत के बढ़खालसा निवासी योगेश उर्फ योगी दहिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में वायरल वीडियो पर सफाई दी। बोले-हर साल आर्टिस्ट की क्रिकेट लीग होती है। मैच जीत के बाद खिलाड़ियों ने सेलिब्रेशन किया था। सेलिब्रेशन का वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वे टीम में खिलाड़ी के तौर पर शामिल हुए थे और जीत के बाद टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ सेलिब्रेशन कर रहे थे। 3 विकेट से जीती थी जगन्नाथ टीमः योगेश दहिया ने बताया कि 9 सितंबर को जगन्नाथ टीम का मुकाबला मांगेराम लीजेंड टीम से हुआ था। मांगेराम लीजेंड की टीम ने 163 रन बनाए थे। इसके जवाब में जगन्नाथ टीम ने लक्ष्य हासिल करते हुए 3 विकेट से मुकाबला जीत लिया था। जीत के बाद टीम के खिलाड़ियों ने सेलिब्रेशन किया। 2015 से हरियाणवी इंडस्ट्री में कामः दहिया ने बताया कि वह बॉडी बिल्डर होने के साथ-साथ हरियाणवी कलाकार, मॉडल और एक्टर भी हैं। वे वर्ष 2015 से हरियाणवी इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। 100 से ज्यादा हरियाणवी सॉन्ग कर चुके हैं। प्रोफेशनल क्रिकेटर नहीं हैं, बल्कि शौक के तौर पर क्रिकेट खेलते हैं। आर्टिस्ट की क्रिकेट लीग में भी वे इसी शौक के चलते हिस्सा लेते हैं। अब क्रिकेट लीग के बारे में जानिए… 90 हरियाणवी कलाकार बने क्रिकेटर लीग के आयोजक कलाकार पिंटू पाबड़ा और साहिल सेहरडा हैं। साहिल ने बताया कि 9 से 13 सितंबर तक आर्टिस्ट चैंपियन लीग (ACL) का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ‘नशा मुक्त हरियाणा और खेलों को बढ़ावा’ देना है। इस लीग में हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़े करीब 90 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। कलाकारों को 6 टीमों में बांटा गया है और 5 दिन तक क्रिकेट मैच खेले जा रहे हैं। हरियाणा के कवियों के नाम पर टीमें लीग की 6 टीमों के नाम हरियाणा के प्रसिद्ध कवियों और कलाकारों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें जाट मेहर सिंह लीजेंड, धनपत लीजेंड, बाजे भगत लीजेंड, मांगेराम लीजेंड, लख्मीचंद लीजेंड और जगन्नाथ लीजेंड शामिल हैं। सभी टीमों के बीच क्रिकेट मुकाबले कराए जा रहे हैं। ये कलाकार लीग में शामिल इस लीग में योगी दहिया, रोमी हुडा, एचडी कुंडू, अमित ढूल, जीत घनघस और आर मान सहित कई कलाकार खेल रहे हैं। लीग की ओपनिंग में केडी देसी रॉक, प्रांजल दहिया, खासा आला चाहर समेत हरियाणा के कई कलाकार पहुंचे थे।

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

कास्ट- अक्षय कुमार, सैफ अली खान डायरेक्टर- प्रियदर्शन ड्यूरेशन- 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग- 3/5 प्रियदर्शन, अक्षय कुमार और सैफ अली खान, नाम सुनकर ही लगता है कि मामला कुछ बड़ा होने वाला है। ऊपर से कहानी में एक ऐसा नेत्रहीन किरदार है, जिसकी आंखें भले दुनिया नहीं देख पातीं, लेकिन उसके कान, नाक और दिमाग कमाल का काम करते हैं। सामने है अक्षय कुमार का खूंखार परशुराम का किरदार, जो बदले की आग में जल रहा है। यानी एक तरफ ऐसा आदमी जिसे दिखाई नहीं देता और दूसरी तरफ ऐसा आदमी जिसे रोकना आसान नहीं। ‘हैवान’ का यह मुकाबला कागज पर काफी दिलचस्प है और फिल्म कई जगह इस दिलचस्पी को पर्दे पर भी उतारती है। बस दिक्कत यह है कि फिल्म अपने असली खेल तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। कैसी है फिल्म की कहानी? श्याम राणे जन्म से नेत्रहीन है। परिवार की जिम्मेदारियां उठाते हुए वह मुंबई की एक बड़ी बिल्डिंग में काम करता है। आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन आवाज, खुशबू और स्पर्श से आसपास की दुनिया को समझने की उसकी क्षमता असाधारण है। दूसरी तरफ है परशुराम गोखले। जेल से बाहर आने के बाद उसके पास गुस्सा है, पुराना हिसाब है और बदला लेने की पूरी तैयारी। श्याम की जिंदगी में एक बच्ची से जुड़ा ऐसा राज आता है, जो उसे सीधे परशुराम के निशाने पर ला खड़ा करता है। इसके बाद शुरू होता है असली बिल्ली-चूहे का खेल, जहां श्याम को उस दुश्मन से बचना है जिसे वह देख नहीं सकता, और परशुराम को उस आदमी से निपटना है जो उसकी हर आहट सुन सकता है। कहानी का आइडिया मजेदार है और खासकर श्याम के सेंसेस को जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उसमें काफी गुंजाइश है। लेकिन फिल्म को वहां तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। कहानी में दम है, बस रफ्तार थोड़ी और तेज होती तो मजा दोगुना हो जाता। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? सैफ अली खान श्याम के किरदार में काफी सहज नजर आते हैं। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को बेचारा बनाने की गलती नहीं की। श्याम शांत है, जिम्मेदार है और जरूरत पड़ने पर खतरनाक भी हो सकता है। सैफ की अंडरप्ले की गई एक्टिंग इस किरदार को विश्वसनीय बनाती है। अक्षय कुमार के लिए यह रोल अलग है। परशुराम में हीरो वाली चमक नहीं, बल्कि एक अजीब बेचैनी और गुस्सा है। अक्षय ने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। हालांकि कुछ जगह उनका गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि डर पैदा होने के बजाय सीन थोड़ा ओवर-द-टॉप लगने लगता है। जिस ‘हैवान’ से खौफ पैदा होना चाहिए, वह हर बार उतना डरावना नहीं बन पाता। शारिब हाशमी पुलिस वाले के रोल में फिल्म के तनाव के बीच हंसी की खिड़की खोलते हैं और कई जगह खूब मजा देते हैं। बोमन ईरानी भरोसेमंद हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म में गर्माहट लाती है। सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर को अच्छे कलाकार होने के बावजूद सीमित जगह मिली है। और मोहनलाल की झलक ‘ओप्पम’ देखने वालों के लिए खास तोहफा है। कैसा है डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? कॉमेडी के लिए मशहूर प्रियदर्शन यहां एक डार्क थ्रिलर लेकर आए हैं। उनका यह नया रंग देखने में अच्छा लगता है। फिल्म में माहौल बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है। कुछ हिस्से कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकते हुए लगते हैं। गाने और कुछ लंबे भावनात्मक हिस्से थ्रिलर की गति को तोड़ते हैं। जब फिल्म श्याम और परशुराम के बीच आमने-सामने का खेल शुरू करती है, तब इसका असर बेहतर होता है। श्याम की सुनने और सूंघने की क्षमता को कहानी में इस्तेमाल करना भी दिलचस्प है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड के साथ जाती है। मुंबई की ऊंची इमारतें, बंद गलियां और रात के दृश्य कहानी को जरूरी अंधेरा देते हैं। खासकर तनाव वाले सीन्स में कैमरा और साउंड मिलकर माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मजबूत हिस्सों में है। कई जगह संगीत से ज्यादा आवाजें और खामोशी तनाव पैदा करती हैं, जो श्याम के किरदार को देखते हुए फिल्म की कहानी के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बस एडिटिंग टेबल पर थोड़ी और सख्ती होती तो फिल्म ज्यादा चुस्त हो सकती थी। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कानों में घूमता रहे। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों में ठीक बैठता है और ‘रंगियारा’ थोड़ा हल्कापन देता है। लेकिन इस फिल्म में असली काम गानों से ज्यादा बैकग्राउंड स्कोर करता है। ‘ओप्पम’ का असर: पुरानी कहानी, नया तड़का ‘हैवान’ प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने नेत्रहीन श्याम जैसे किरदार को निभाया था। यहां सैफ अपनी अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी होते हैं। हिंदी संस्करण में एक्शन, इमोशन, कॉमेडी और स्टारडम का मसाला थोड़ा ज्यादा है। यही इसे ‘ओप्पम’ से अलग बनाता है, लेकिन कभी-कभी यही मसाला थ्रिलर की कसावट कम भी करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘हैवान’ में आइडिया है, बड़े सितारे हैं और प्रियदर्शन का अलग अंदाज भी। सैफ का शांत श्याम और अक्षय का बेचैन परशुराम आमने-सामने आते हैं तो फिल्म में असली मजा शुरू होता है। समस्या सिर्फ इतनी है कि जिस थ्रिल के लिए दर्शक टिकट खरीदता है, फिल्म उसे थोड़ा इंतजार करवाकर देती है। अगर आपको डार्क थ्रिलर में थोड़ा मसाला, इमोशन और कॉमेडी पसंद है तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन अगर उम्मीद है कि फिल्म शुरू से आखिर तक सीट की पकड़ मजबूत रखेगी, तो मामला थोड़ा ढीला पड़ता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ में काटने वाले दांत जरूर हैं, बस हमला थोड़ा देर से होता है।

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

कास्ट- अक्षय कुमार, सैफ अली खान डायरेक्टर- प्रियदर्शन ड्यूरेशन- 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग- 3/5 प्रियदर्शन, अक्षय कुमार और सैफ अली खान, नाम सुनकर ही लगता है कि मामला कुछ बड़ा होने वाला है। ऊपर से कहानी में एक ऐसा नेत्रहीन किरदार है, जिसकी आंखें भले दुनिया नहीं देख पातीं, लेकिन उसके कान, नाक और दिमाग कमाल का काम करते हैं। सामने है अक्षय कुमार का खूंखार परशुराम का किरदार, जो बदले की आग में जल रहा है। यानी एक तरफ ऐसा आदमी जिसे दिखाई नहीं देता और दूसरी तरफ ऐसा आदमी जिसे रोकना आसान नहीं। ‘हैवान’ का यह मुकाबला कागज पर काफी दिलचस्प है और फिल्म कई जगह इस दिलचस्पी को पर्दे पर भी उतारती है। बस दिक्कत यह है कि फिल्म अपने असली खेल तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। कैसी है फिल्म की कहानी? श्याम राणे जन्म से नेत्रहीन है। परिवार की जिम्मेदारियां उठाते हुए वह मुंबई की एक बड़ी बिल्डिंग में काम करता है। आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन आवाज, खुशबू और स्पर्श से आसपास की दुनिया को समझने की उसकी क्षमता असाधारण है। दूसरी तरफ है परशुराम गोखले। जेल से बाहर आने के बाद उसके पास गुस्सा है, पुराना हिसाब है और बदला लेने की पूरी तैयारी। श्याम की जिंदगी में एक बच्ची से जुड़ा ऐसा राज आता है, जो उसे सीधे परशुराम के निशाने पर ला खड़ा करता है। इसके बाद शुरू होता है असली बिल्ली-चूहे का खेल, जहां श्याम को उस दुश्मन से बचना है जिसे वह देख नहीं सकता, और परशुराम को उस आदमी से निपटना है जो उसकी हर आहट सुन सकता है। कहानी का आइडिया मजेदार है और खासकर श्याम के सेंसेस को जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उसमें काफी गुंजाइश है। लेकिन फिल्म को वहां तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। कहानी में दम है, बस रफ्तार थोड़ी और तेज होती तो मजा दोगुना हो जाता। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? सैफ अली खान श्याम के किरदार में काफी सहज नजर आते हैं। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को बेचारा बनाने की गलती नहीं की। श्याम शांत है, जिम्मेदार है और जरूरत पड़ने पर खतरनाक भी हो सकता है। सैफ की अंडरप्ले की गई एक्टिंग इस किरदार को विश्वसनीय बनाती है। अक्षय कुमार के लिए यह रोल अलग है। परशुराम में हीरो वाली चमक नहीं, बल्कि एक अजीब बेचैनी और गुस्सा है। अक्षय ने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। हालांकि कुछ जगह उनका गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि डर पैदा होने के बजाय सीन थोड़ा ओवर-द-टॉप लगने लगता है। जिस ‘हैवान’ से खौफ पैदा होना चाहिए, वह हर बार उतना डरावना नहीं बन पाता। शारिब हाशमी पुलिस वाले के रोल में फिल्म के तनाव के बीच हंसी की खिड़की खोलते हैं और कई जगह खूब मजा देते हैं। बोमन ईरानी भरोसेमंद हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म में गर्माहट लाती है। सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर को अच्छे कलाकार होने के बावजूद सीमित जगह मिली है। और मोहनलाल की झलक ‘ओप्पम’ देखने वालों के लिए खास तोहफा है। कैसा है डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? कॉमेडी के लिए मशहूर प्रियदर्शन यहां एक डार्क थ्रिलर लेकर आए हैं। उनका यह नया रंग देखने में अच्छा लगता है। फिल्म में माहौल बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है। कुछ हिस्से कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकते हुए लगते हैं। गाने और कुछ लंबे भावनात्मक हिस्से थ्रिलर की गति को तोड़ते हैं। जब फिल्म श्याम और परशुराम के बीच आमने-सामने का खेल शुरू करती है, तब इसका असर बेहतर होता है। श्याम की सुनने और सूंघने की क्षमता को कहानी में इस्तेमाल करना भी दिलचस्प है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड के साथ जाती है। मुंबई की ऊंची इमारतें, बंद गलियां और रात के दृश्य कहानी को जरूरी अंधेरा देते हैं। खासकर तनाव वाले सीन्स में कैमरा और साउंड मिलकर माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मजबूत हिस्सों में है। कई जगह संगीत से ज्यादा आवाजें और खामोशी तनाव पैदा करती हैं, जो श्याम के किरदार को देखते हुए फिल्म की कहानी के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बस एडिटिंग टेबल पर थोड़ी और सख्ती होती तो फिल्म ज्यादा चुस्त हो सकती थी। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कानों में घूमता रहे। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों में ठीक बैठता है और ‘रंगियारा’ थोड़ा हल्कापन देता है। लेकिन इस फिल्म में असली काम गानों से ज्यादा बैकग्राउंड स्कोर करता है। ‘ओप्पम’ का असर: पुरानी कहानी, नया तड़का ‘हैवान’ प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने नेत्रहीन श्याम जैसे किरदार को निभाया था। यहां सैफ अपनी अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी होते हैं। हिंदी संस्करण में एक्शन, इमोशन, कॉमेडी और स्टारडम का मसाला थोड़ा ज्यादा है। यही इसे ‘ओप्पम’ से अलग बनाता है, लेकिन कभी-कभी यही मसाला थ्रिलर की कसावट कम भी करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘हैवान’ में आइडिया है, बड़े सितारे हैं और प्रियदर्शन का अलग अंदाज भी। सैफ का शांत श्याम और अक्षय का बेचैन परशुराम आमने-सामने आते हैं तो फिल्म में असली मजा शुरू होता है। समस्या सिर्फ इतनी है कि जिस थ्रिल के लिए दर्शक टिकट खरीदता है, फिल्म उसे थोड़ा इंतजार करवाकर देती है। अगर आपको डार्क थ्रिलर में थोड़ा मसाला, इमोशन और कॉमेडी पसंद है तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन अगर उम्मीद है कि फिल्म शुरू से आखिर तक सीट की पकड़ मजबूत रखेगी, तो मामला थोड़ा ढीला पड़ता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ में काटने वाले दांत जरूर हैं, बस हमला थोड़ा देर से होता है।

इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किमी-लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; PM नेतन्याहू बोले- हैप्पी न्यू ईयर

इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किमी-लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; PM नेतन्याहू बोले- हैप्पी न्यू ईयर

इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग को ब्लास्ट कर तबाह कर दिया। यह विस्फोट इतना तेज था कि इलाके में 4.1 तीव्रता का भूकंप आ गया। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, धमाक से आसपास के इलाकों में जमीन हिलने लगी। कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर!” इजराइली सेना के मुताबिक, सुरंग नेटवर्क में ईरान में बने दर्जनों रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन रखे थे। यहां मशीनगन, दर्जनों एंटी-टैंक मिसाइल और सैकड़ों बारूदी सुरंगें व विस्फोटक भी मिले। सेना ने बताया कि इस परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी था। 2 दशक में तैयार किया गया था टनल नेटवर्क नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस टनल नेटवर्क आतंकी ढांचा बताया। उनके मुताबिक, इसे ईरान की फंडिंग और योजना से करीब दो दशक में तैयार किया गया था। इजराइल का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद अली अल-ताहेर पहाड़ी पर जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह उसका ऑपरेशनल कंट्रोल हो गया है। इजराइल ने पिछले हफ्ते अली अल-ताहेर पहाड़ी पर कब्जा करने का दावा किया था। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, वहां हिजबुल्लाह के कुछ लड़ाके इलाके से निकल गए, जबकि कुछ को हवाई हमलों और तोपखाने की कार्रवाई में मार गिराया गया। लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हो रहे ईरान और अमेरिका के बीच जून में समझ बनने और उसके बाद लेबनान-इजराइल समझौते के बाद कुछ समय के लिए हिंसा कम हुई थी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हुए हैं। AFP के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि अली अल-ताहेर पहाड़ी का नियंत्रण लेबनानी सेना को दिया जाए, लेकिन हिजबुल्लाह ने इसे स्वीकार नहीं किया। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में भी मौजूद है। खबर अपडेट हो रही है…

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा शहर पर कब्जा किया:यह बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75km दूर, इससे आगे बढ़े तो तेल सप्लाई पर संकट

हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा शहर पर कब्जा किया:यह बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75km दूर, इससे आगे बढ़े तो तेल सप्लाई पर संकट

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से सिर्फ 75 किमी दूर है। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में इसकी गिनती होती है। यहां से एशिया, यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के बीच बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। यमन फोर्स और हूती विद्रोहियों के बीच 9 दिन से लड़ाई चल रही है। मोखा शहर पर कब्जे के बाद पिछले 4 साल में हूतियों की यह सबसे बड़ी क्षेत्रीय कामयाबी मानी जा रही है। मोखा पर कब्जे से हूतियों की पकड़ मजबूत मोखा लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में था। पिछले करीब 10 दिनों से हूती लड़ाके ताइज की पश्चिमी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले अल-शकीरा इलाके पर भी कब्जा कर लिया। यह इलाका ताइज शहर को पश्चिमी तट से जोड़ने वाले अहम रास्ते पर है। इस पर कब्जे से हूतियों की इस इलाके में पकड़ और मजबूत हो गई। हूती पहले से ही यमन की राजधानी सना और लाल सागर के बड़े बंदरगाह होदेइदा पर नियंत्रण रखते हैं। मोखा पर कब्जे से उनके कब्जे वाले उत्तरी और पश्चिमी इलाकों के बीच संपर्क और मजबूत हुआ है। यही वजह है कि मोखा की लड़ाई को सिर्फ एक बंदरगाह शहर पर कब्जे के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इससे यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की सैन्य और रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचे हूती, जहाजों पर बढ़ा खतरा मोखा पर कब्जे के बाद हूती बाब अल-मंदेब के और करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने लाल सागर में मौजूद हनीश द्वीपों की ओर भी बढ़त बनाई है। धुबाब और उसके सामने मौजूद ये द्वीप बाब अल-मंदेब के बहुत करीब हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हूती इस इलाके में अपनी पकड़ और मजबूत करते हैं, तो लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखना और उन पर दबाव बनाना उनके लिए आसान हो सकता है। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को खतरा पैदा करने के लिए किसी बहुत बड़े इलाके पर कब्जा करना जरूरी नहीं है। यानी आसपास के कुछ रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाकर भी हूती जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। खबर अपडेट हो रही है…