पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सितारे:अनिल कपूर-शत्रुघ्न सिन्हा- गोविंदा ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत फिल्म निर्माता और पूर्व सीबीएफसी चीफ पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 7 बजे तक हुई इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रेयर मीट में अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, डेविड धवन, गोविंदा, चंकी पांडे, शक्ति कपूर समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार पहुंचे। सभी ने निहलानी परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत निर्माता को याद किया। पहलाज निहलानी का 4 जून को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई थी। पहलाज निहलानी ने ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘अंदाज’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया था। गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने 90 के दशक में कई हिट फिल्में दीं। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे थे।
पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:हेमा मालिनी, अनिल कपूर और गोविंदा समेत कई कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत फिल्म निर्माता और पूर्व सीबीएफसी चीफ पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 7 बजे तक हुई इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। पहलाज निहलानी का 4 जून को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। प्रेयर मीट में हेमा मालिनी अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, गोविंदा, चंकी पांडे, जैकी श्रॉफ और फरहान अख्तर समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार पहुंचे। सभी ने निहलानी परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत निर्माता को याद किया। देखें प्रेयर मीट की तस्वीरें … पहलाज निहलानी ने ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘अंदाज’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया था। गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने 90 के दशक में कई हिट फिल्में दीं। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे थे। पहलाज निहलानी का करियर पहलाज निहलानी ने 1982 में बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म हथकड़ी बनाई और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 1985 में उनकी दूसरी फिल्म आंधी-तूफान रिलीज हुई, जिसने उन्हें बॉलीवुड में एक निर्माता के रूप में पहचान दिलाई। साल 1986 में उन्होंने फिल्म इल्जाम बनाई, जिससे गोविंदा को पहला बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म हिट रही और गोविंदा को देशभर में पहचान मिली। 1987 में आई आग ही आग के जरिए चंकी पांडे ने बॉलीवुड में कदम रखा। इसी साल निहलानी ने फिल्म गुनाहों का फैसला भी बनाई। 1990 के दशक में पहलाज निहलानी ने शोला और शबनम और आंखें जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। आंखें उस दौर की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक साबित हुई। गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ चंकी पांडे, पहलाज निहलानी, गोविंदा और डेविड धवन की पुरानी तस्वीर ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो। लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा और पहलाज निहलानी ने कुल चार फिल्मों में साथ काम किया। इनमें इल्जाम, शोला और शबनम, आंखें और रंगीला राजा शामिल हैं। काम नहीं था, तो गोविंदा को दी शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज ने कहा, ‘गोविंदा के पास काम नहीं था, तब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी, क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता महबूब खान के बहुत बड़े हीरो रहे हैं। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती है। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’ दिव्या भारती को चोट लगी, तो रोक दी थी शूटिंग पहलाज निहलानी ने दिव्या भारती के साथ फिल्म शोला और शबनम की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने दिव्या भारती के डेडिकेशन से जुड़ा किस्सा शेयर किया और बताया कि कैसे उन्हें दिव्या भारती की चोट के चलते एक्ट्रेस के इनकार के बावजूद शूटिंग रोकनी पड़ी थी। पहलाज निहलानी ने कहा था, ‘शोला और शबनम’ के दौरान हम 20 घंटे शूटिंग करते थे। हम सुबह से शूटिंग शुरू करते थे और उसके बाद बैक टू बैक सीन, फिर डांस और फिर दूसरे सीन शूट होते थे। एक दिन मुझे याद है हम ऊटी में शूट कर रहे थे और दिव्या का पैर एक कील पर पड़ गया। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।’ ‘मैं मॉनिटर के पास खड़ा था जब दिव्या शूट के लिए वापस आईं। उन्होंने किसी को पता नहीं चलने दिया कि उन्हें चोट लगी है। मैं भी नहीं समझ पाया फिर उन्होंने मुझसे रुमाल मांगा और अपने पैर में हुए जख्म पर बांध लिया। मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो वो कुछ नहीं बोलीं लेकिन मैंने उनके पैर से खून बहता देखा तो फिर तुरंत पैक अप करवा दिया।’ पहलाज निहलानी
‘बस एक और पुनः रिलीज़’: टीवीके ने अन्नामलाई के नए राजनीतिक आंदोलन को खारिज कर दिया क्योंकि 14 लाख लोग शामिल हुए | भारत समाचार

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 19:13 IST टीवीके की प्रतिक्रिया तब आई जब अन्नामलाई के ‘वी द लीडर्स’ आंदोलन ने समर्थकों के बीच हलचल मचा दी, इसके लॉन्च के 10 घंटों के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया। तमिलनाडु के मंत्री केजी अरुणराज ने के अन्नामलाई के नए राजनीतिक आंदोलन को कम महत्व दिया। (पीटीआई/एक्स) तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई ने भगवा पार्टी से अलग होने के बाद एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू किया है, जिससे राज्य में हलचल मच गई है। हालाँकि, सत्तारूढ़ टीवीके सरकार ने उनके नए संगठन की लोकप्रियता को खारिज कर दिया है, इसे “सिर्फ एक और पुनः रिलीज़” कहा है। अन्नामलाई ने अपना नया मंच “वी द लीडर्स” लॉन्च करने के लिए शुक्रवार को भाजपा छोड़ दी, जिसने उनके समर्थकों के साथ जुड़ाव पैदा कर लिया है, इसके लॉन्च के 10 घंटों के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। उनके इस्तीफे से तमिलनाडु में भाजपा नेताओं का पलायन शुरू हो गया है। पत्रकारों से बात करते हुए, टीवीके के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने शनिवार को टिप्पणी की, “अन्नामलाई सिर्फ बीजेपी की री-रिलीज़ है। यह एक पुरानी फिल्म है जिसे दोबारा रिलीज़ किया गया है। लेकिन लोग हर री-रिलीज़ को नहीं देखते हैं। इसलिए वह जानते हैं कि उनकी स्थिति क्या है और चीजें उनके लिए कैसी हैं। लोग सभी री-रिलीज़ नहीं देखते हैं।” अन्नामलाई का बीजेपी से बाहर होना शुक्रवार को अन्नामलाई ने भाजपा से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर कई हफ्तों का सस्पेंस खत्म हो गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और संगठनात्मक जिम्मेदारियों दोनों से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अपने त्यागपत्र में अन्नामलाई ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रेरित होकर और तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति को बदलने के लिए भाजपा में शामिल हुए हैं। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले 18 महीनों में शीर्ष नेतृत्व को अपनी असहमति से अवगत कराया था। उन्होंने लिखा, “हमारे वरिष्ठ नेतृत्व के साथ मेरी बातचीत के बाद, मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि तमिलनाडु के संबंध में हमारे विचार मेल नहीं खाते हैं।” पूर्व आईपीएस अधिकारी 2020 में भाजपा में शामिल हुए और 37 साल की उम्र में राज्य इकाई के प्रमुख बने। उन्होंने घोषणा की कि वह जल्द ही एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करेंगे, इसे अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक यात्रा का अगला चरण बताया। उन्होंने कहा, “हमारे मूल सिद्धांतों से उभरकर राजनीति में एक नया आंदोलन और एक नया आयाम शुरू होने वाला है।” अन्नामलाई के आंदोलन से 14 लाख लोग जुड़े अन्नामलाई के नए शुरू किए गए आंदोलन की वेबसाइट ने सार्वजनिक समर्थन की एक मजबूत लहर प्रदर्शित की। शनिवार शाम तक इस आंदोलन में 14.43 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके थे। वेबसाइट पर लिखा है, “स्वयंसेवक हमारे आंदोलन की जीवनधारा हैं। हम समुदायों को सशक्त बना रहे हैं, नेतृत्व गुणों का पोषण कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण या युवा नेतृत्व हो, उस क्षेत्र में अवसरों की तलाश करें जो आपको प्रेरित करते हैं।” वर्ष 24 वर्ष, वर्ष 13 वर्ष உறுப்பினர்கள் இணைந்து, https://t.co/gSstBA1IYJ डाउनलोड करें होम उत्पाद विवरण, उत्तर उत्तर பொறுப்பையும் எனக்கு அளித்திருக்கிறது.இந்த இயக்கத்தின் மீது நம்பிக்கை வைத்து இணைந்துள்ள ஒவ்வொருவருக்கும், எனது… pic.twitter.com/nzB5URPZHV – के.अन्नामलाई (@annamalai_k) 6 जून, 2026 अन्नामलाई ने यह भी घोषणा की कि वह 2031 में अगला आम चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेंगे। उन्होंने कहा, “मैं अगला आम चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ूंगा। हम बीजेपी को उसी तरह देखेंगे जैसे हम डीएमके, एआईएडीएमके, टीटीवी, वाइको और सीमन को देखते हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘सिर्फ एक और पुन: रिलीज’: टीवीके ने अन्नामलाई के नए राजनीतिक आंदोलन को खारिज कर दिया क्योंकि 14 लाख लोग इसमें शामिल हुए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अन्नामलाई नया राजनीतिक आंदोलन(टी)अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ी(टी)वी द लीडर्स(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)बीजेपी का तमिलनाडु से पलायन(टी)टीवीके सरकार(टी)अन्नामलाई 2031 चुनाव
भारत ने तीसरा U-18 हॉकी एशिया कप जीता:जापान को 4-1 से हराया; आशीष की लगातार दूसरी हैट्रिक; महिला टीम को ब्रॉन्ज मिला

भारत ने तीसरा U-18 हॉकी एशिया कप जीत लिया है। टीम ने डिफेंडिंग चैंपियन जापान को फाइनल में 4-1 से हरा दिया। इससे पहले भारत ने 2001 और 2016 में टाइटल अपने नाम किया था। शनिवार को जापान के काकामिगाहारा में अशिष तानी पुर्ती ने हैट्रिक लगाई। कप्तान केतन कुशवाहा ने भी एक गोल किया। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भी आशीष ने हैट्रिक लगाते हुए 4 गोल किए थे। वहीं पाकिस्तान ने मलेशिया को हराकर तीसरा स्थान पक्का किया। दूसरी ओर विमेंस टीम ने साउथ कोरिया को 3-0 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस कैटेगरी में चीन ने गोल्ड अपने नाम किया। PM मोदी ने भारतीय जूनियर हॉकी टीमों को बधाई दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुष और महिला दोनों भारतीय U-18 हॉकी टीमों को एशिया कप 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने महिला टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरे टूर्नामेंट में टीम ने शानदार जुझारूपन दिखाया। यह उपलब्धि भारतीय महिला हॉकी की बढ़ती ताकत और खिलाड़ियों की अपार क्षमता को दर्शाती है। पुरुष टीम को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन कौशल और टीमवर्क का प्रदर्शन किया, जिसका परिणाम फाइनल में यादगार जीत के रूप में सामने आया। 3-3 लाख रुपए मिलेंगे खिताब जीतने के बाद हॉकी इंडिया ने मेंस टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को तीन-तीन लाख रुपए और सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को डेढ़ लाख रुपए देने का ऐलान किया। इसी दिन ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय महिला टीम के खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपए और सपोर्ट स्टाफ को 50 हजार रुपए देने की घोषणा भी की गई। आशीष टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर आशीष को फाइनल में शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वह 17 गोल के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर भी रहे। गोलकीपर आयुष रजक को टूर्नामेंट का बेस्ट गोलकीपर चुना गया। महिला प्रतियोगिता में भारत की नौशीन नाज 12 गोल के साथ टॉप स्कोरर रहीं। जापान से सिर्फ एक गोल लगा आशीष तानी पुर्ती ने दूसरे, 28वें और 34वें मिनट में गोल किए। केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में गोल दागा। जापान के लिए एकमात्र गोल नुमादा गाकु ने 52वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक पर किया। यहां से फाइनल मैच रिपोर्ट पहले 90 सेकंड के भीतर भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और अशिष ने उसे गोल में बदलकर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। दूसरे क्वार्टर में जापान ने दबाव बनाया और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया, लेकिन बराबरी का गोल नहीं कर सका। इसके बाद 28वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला और आशीष ने स्कोर 2-0 कर दिया। भारत ने बढ़त को और मजबूत करते हुए हाफ टाइम से ठीक पहले तीसरा गोल किया। कप्तान केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में गोल कर भारत को 3-0 से आगे कर दिया। तीसरे क्वार्टर में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। 34वें मिनट में आशीष ने हैट्रिक पूरी की और भारत को 4-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। आखिरी क्वार्टर में जापान ने वापसी की कोशिश की। 52वें मिनट में नुमादा गाकु ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल कर अंतर 4-1 कर दिया। इसके बाद जापान को तीन और पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने कोई और गोल नहीं होने दिया और टीम ने खिताब अपने नाम कर लिया।
भारत ने तीसरा U-18 हॉकी एशिया कप जीता:जापान को 4-1 से हराया; आशीष की लगातार दूसरी हैट्रिक; महिला टीम को ब्रॉन्ज मिला

भारत ने तीसरा U-18 हॉकी एशिया कप जीत लिया है। टीम ने डिफेंडिंग चैंपियन जापान को फाइनल में 4-1 से हरा दिया। इससे पहले भारत ने 2001 और 2016 में टाइटल अपने नाम किया था। शनिवार को जापान के काकामिगाहारा में अशिष तानी पुर्ती ने हैट्रिक लगाई। कप्तान केतन कुशवाहा ने भी एक गोल किया। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में भी आशीष ने हैट्रिक लगाते हुए 4 गोल किए थे। वहीं पाकिस्तान ने मलेशिया को हराकर तीसरा स्थान पक्का किया। दूसरी ओर विमेंस टीम ने साउथ कोरिया को 3-0 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस कैटेगरी में चीन ने गोल्ड अपने नाम किया। PM मोदी ने भारतीय जूनियर हॉकी टीमों को बधाई दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुष और महिला दोनों भारतीय U-18 हॉकी टीमों को एशिया कप 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने महिला टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरे टूर्नामेंट में टीम ने शानदार जुझारूपन दिखाया। यह उपलब्धि भारतीय महिला हॉकी की बढ़ती ताकत और खिलाड़ियों की अपार क्षमता को दर्शाती है। पुरुष टीम को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन कौशल और टीमवर्क का प्रदर्शन किया, जिसका परिणाम फाइनल में यादगार जीत के रूप में सामने आया। 3-3 लाख रुपए मिलेंगे खिताब जीतने के बाद हॉकी इंडिया ने मेंस टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को तीन-तीन लाख रुपए और सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को डेढ़ लाख रुपए देने का ऐलान किया। इसी दिन ब्रॉन्ज जीतने वाली भारतीय महिला टीम के खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपए और सपोर्ट स्टाफ को 50 हजार रुपए देने की घोषणा भी की गई। आशीष टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर आशीष को फाइनल में शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वह 17 गोल के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर भी रहे। गोलकीपर आयुष रजक को टूर्नामेंट का बेस्ट गोलकीपर चुना गया। महिला प्रतियोगिता में भारत की नौशीन नाज 12 गोल के साथ टॉप स्कोरर रहीं। जापान से सिर्फ एक गोल लगा आशीष तानी पुर्ती ने दूसरे, 28वें और 34वें मिनट में गोल किए। केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में गोल दागा। जापान के लिए एकमात्र गोल नुमादा गाकु ने 52वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक पर किया। यहां से फाइनल मैच रिपोर्ट पहले 90 सेकंड के भीतर भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और अशिष ने उसे गोल में बदलकर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। दूसरे क्वार्टर में जापान ने दबाव बनाया और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किया, लेकिन बराबरी का गोल नहीं कर सका। इसके बाद 28वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला और आशीष ने स्कोर 2-0 कर दिया। भारत ने बढ़त को और मजबूत करते हुए हाफ टाइम से ठीक पहले तीसरा गोल किया। कप्तान केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में गोल कर भारत को 3-0 से आगे कर दिया। तीसरे क्वार्टर में भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला। 34वें मिनट में आशीष ने हैट्रिक पूरी की और भारत को 4-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। आखिरी क्वार्टर में जापान ने वापसी की कोशिश की। 52वें मिनट में नुमादा गाकु ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल कर अंतर 4-1 कर दिया। इसके बाद जापान को तीन और पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस ने कोई और गोल नहीं होने दिया और टीम ने खिताब अपने नाम कर लिया।
‘कर्नाटक कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस ले लिया, बीजेपी सदमे में’: सुरजेवाला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:06 जून, 2026, 18:46 IST रणदीप सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि रेड्डी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव पार्टी संरचना के लिए अमूल्य है शुरुआती खींचतान को एक संक्षिप्त गलतफहमी बताते हुए सुरजेवाला ने राज्य इकाई के लिए रेड्डी के गहरे संस्थागत महत्व को दोहराया। तस्वीर/एएनआई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के कर्नाटक राज्य प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने घोषणा की कि वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। घोषणा, जो पार्टी के लिए संगठनात्मक निरंतरता को प्रभावी ढंग से सुरक्षित करती है, आंतरिक घर्षण को हल करने के उद्देश्य से उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श की एक श्रृंखला का पालन करती है। सुरजेवाला ने इस बात पर जोर दिया कि रेड्डी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव पार्टी ढांचे के लिए अमूल्य है, उन्होंने पुष्टि की कि अनुभवी राजनेता संगठन के एक वफादार सैनिक के रूप में अपने कर्तव्यों को जारी रखेंगे और अपने मंत्री पद को बरकरार रखेंगे। कथित तौर पर इस प्रस्ताव ने विपक्षी रणनीतियों को बाधित कर दिया है, कांग्रेस नेतृत्व ने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी आंतरिक परिवर्तन के सुचारू प्रबंधन को लेकर सदमे में है। आंतरिक गलतफहमी का समाधान इस्तीफा वापस लेने का कथित निर्णय विशिष्ट संगठनात्मक शिकायतों को दूर करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व और रेड्डी के बीच गहन चर्चा के बाद आया। शुरुआती खींचतान को एक संक्षिप्त गलतफहमी बताते हुए सुरजेवाला ने राज्य इकाई के लिए रेड्डी के गहरे संस्थागत महत्व को दोहराया। गतिरोध को तेजी से हल करके, पार्टी अपनी कैबिनेट स्थिरता की रक्षा करने और एक महत्वपूर्ण विधायी मोड़ पर एकीकृत मोर्चा पेश करने में कामयाब रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि त्वरित समाधान ने संभावित गुटीय कमजोरियों को सफलतापूर्वक बेअसर कर दिया है, जिससे आलाकमान को अपना अविभाजित ध्यान अपने मूल विधायी और शासन एजेंडे पर वापस स्थानांतरित करने की अनुमति मिली है। विधायी नामांकन और रणनीतिक तैनाती नेतृत्व संकट को हल करने के समानांतर, कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधान चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक तैनाती को सफलतापूर्वक सुव्यवस्थित किया है। वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने कई प्रमुख सहयोगियों के साथ, राज्यसभा और राज्य विधान परिषद दोनों में महत्वपूर्ण सीटों के लिए औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल किया है। यह समकालिक फाइलिंग पार्टी के राज्य तंत्र द्वारा अपनी विधायी ताकत को मजबूत करने के लिए एक अत्यधिक समन्वित प्रयास को रेखांकित करती है। यह प्रक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा हाई-प्रोफाइल नामांकन दाखिल करने के बाद होती है, जो वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में हुई, जो राज्य इकाई के दीर्घकालिक प्रक्षेपवक्र के लिए मजबूत केंद्रीय समर्थन का संकेत देती है। शासन का एक नया अध्याय व्यवस्थित नामांकन दाखिलों के साथ आंतरिक विवाद के सफल नियंत्रण को नेतृत्व द्वारा कर्नाटक के लिए एक अत्यधिक उत्पादक प्रशासनिक युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। परिषद और संसदीय लाइन-अप को अंतिम रूप देने के साथ, राज्य सरकार पूरे क्षेत्र में अपने विकास और कल्याण वितरण प्रणालियों में तेजी लाने का इरादा रखती है। पूर्ण संरचनात्मक अनुशासन बनाए रखने और सत्ता के हस्तांतरण में किसी भी व्यवधान को रोककर, सत्तारूढ़ दल का लक्ष्य अपने शासन जनादेश को मजबूत करना है, यह सुनिश्चित करना है कि विधायी मशीनरी बिना किसी राजनीतिक रुकावट के सुचारू रूप से चले। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘कर्नाटक कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस ले लिया है, बीजेपी सदमे में है’: सुरजेवाला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
क्षेत्रीय फिल्में अब ऑस्कर की रेस तक पहुंच रहीं:41% सफल क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी लागत से 10 गुना या ज्यादा कमाई की

बाहुबली, आरआरआर, केजीएफ और पुष्पा जैसी ‘पैन-इंडिया’ फिल्मों ने सफलता के नए पैमाने गढ़े हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से ‘मल्टी इंडिया’ सिनेमा का भी उदय हुआ है। हर भाषा का सिनेमा सुपरहिट फिल्में दे रहा है। उदाहरण के लिए गुजराती फिल्म ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ ने 112 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की, जबकि इसको बनाने में सिर्फ 50 लाख रुपए लगे थे। वहीं, मलयालम फिल्म ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ ने 30 करोड़ रुपए के बजट पर लगभग 300 करोड़ रुपए का कारोबार किया। मराठी सिनेमा भी इस बदलाव का उदाहरण है। मसलन, ‘दशावतार’ ने 12 करोड़ रुपए के बजट पर 28.47 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया और निवेश के मुकाबले 220% से अधिक रिटर्न दिया। यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह बनाने वाली पहली मराठी फिल्म भी बनी थी। एनालिसिस: गुजराती फिल्म ने 224 गुना कमाई की, दो साल में 17 क्षेत्रीय फिल्में सुपरहिट सैकनिक ने 17 सफल क्षेत्रीय फिल्मों का विश्लेषण किया है। इनमें 7 फिल्में ऐसी थीं, जिन्होंने 10 गुना या उससे ज्यादा रिटर्न दिया… यानी लगभग 41% फिल्मों ने अपनी लागत का 10 गुना या उससे अधिक कमाया। बॉक्स ऑफिस पर बढ़ रही हिस्सेदारी पीवीआर आइनॉक्स के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में क्षेत्रीय फिल्मों की हिस्सेदारी 27% थी, जो 2025 में बढ़कर 31% हो गई। वहीं हिंदी फिल्मों की हिस्सेदारी 55-56% के आसपास स्थिर बनी रही। अंग्रेजी फिल्मों की हिस्सेदारी 18% से घटकर 14% रह गई। एक्सपर्ट व्यू- आज सिनेमा का सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है – आज भारतीय सिनेमा में सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है। पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि क्षेत्रीय फिल्मों ने न सिर्फ अपने राज्यों में, बल्कि देश और विदेश में भी दर्शक बनाए हैं… क्योंकि वहां कंटेंट ही सबसे बड़ा स्टार है। – किसी भी भाषा की फिल्म अगर सफल होती है, तो उसका फायदा पूरे इकोसिस्टम को मिलता है। थिएटर में दर्शक आएंगे तो निर्माता, वितरक, प्रदर्शक और फिल्म उद्योग से जुड़े हजारों लोगों को फायदा होगा। – जहां तक सिनेमैटिक यूनिवर्स का सवाल है, तो मेरे ख्याल में यह एक वैश्विक ट्रेंड है। अगर किसी फिल्म का किरदार और उसकी दुनिया दर्शकों को पसंद आती है, तो उसके अगले भाग और फ्रेंचाइजी बनना स्वाभाविक है। दर्शक उसी कंटेंट को आगे देखना चाहते हैं जिससे वे जुड़ाव महसूस करते हैं। भविष्य – अब यूनिवर्स फिल्में बनेंगी तेलुगु सिनेमा – हनुमान यूनिवर्स ‘हनुमान’ की सफलता के बाद निर्देशक प्रशांत वर्मा पौराणिक फिल्मों का यूनिवर्स बना रहे हैं। ‘जय हनुमान’ सबसे चर्चित प्रोजेक्ट है। तमिल सिनेमा में लोकदेवताओं पर जोर – लोककथाओं व क्षेत्रीय देवताओं पर फिल्में बन रही हैं। शिवकार्तिकेयन की ‘सेयोन’ चर्चा में है। मराठी में बड़े ऐतिहासिक प्रोजेक्ट – ‘राजा शिवाजी’ की सफलता ने ऐतिहासिक फिल्मों का रास्ता खोला। ‘घाबडकुंड’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट लाइन में हैं। मलयालम में लोकाह यूनिवर्स – ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ की सफलता के बाद फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
क्षेत्रीय फिल्में अब ऑस्कर की रेस तक पहुंच रहीं:41% सफल क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी लागत से 10 गुना या ज्यादा कमाई की

बाहुबली, आरआरआर, केजीएफ और पुष्पा जैसी ‘पैन-इंडिया’ फिल्मों ने सफलता के नए पैमाने गढ़े हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से ‘मल्टी इंडिया’ सिनेमा का भी उदय हुआ है। हर भाषा का सिनेमा सुपरहिट फिल्में दे रहा है। उदाहरण के लिए गुजराती फिल्म ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ ने 112 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की, जबकि इसको बनाने में सिर्फ 50 लाख रुपए लगे थे। वहीं, मलयालम फिल्म ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ ने 30 करोड़ रुपए के बजट पर लगभग 300 करोड़ रुपए का कारोबार किया। मराठी सिनेमा भी इस बदलाव का उदाहरण है। मसलन, ‘दशावतार’ ने 12 करोड़ रुपए के बजट पर 28.47 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया और निवेश के मुकाबले 220% से अधिक रिटर्न दिया। यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह बनाने वाली पहली मराठी फिल्म भी बनी थी। एनालिसिस: गुजराती फिल्म ने 224 गुना कमाई की, दो साल में 17 क्षेत्रीय फिल्में सुपरहिट सैकनिक ने 17 सफल क्षेत्रीय फिल्मों का विश्लेषण किया है। इनमें 7 फिल्में ऐसी थीं, जिन्होंने 10 गुना या उससे ज्यादा रिटर्न दिया… यानी लगभग 41% फिल्मों ने अपनी लागत का 10 गुना या उससे अधिक कमाया। बॉक्स ऑफिस पर बढ़ रही हिस्सेदारी पीवीआर आइनॉक्स के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में क्षेत्रीय फिल्मों की हिस्सेदारी 27% थी, जो 2025 में बढ़कर 31% हो गई। वहीं हिंदी फिल्मों की हिस्सेदारी 55-56% के आसपास स्थिर बनी रही। अंग्रेजी फिल्मों की हिस्सेदारी 18% से घटकर 14% रह गई। एक्सपर्ट व्यू- आज सिनेमा का सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है – आज भारतीय सिनेमा में सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है। पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि क्षेत्रीय फिल्मों ने न सिर्फ अपने राज्यों में, बल्कि देश और विदेश में भी दर्शक बनाए हैं… क्योंकि वहां कंटेंट ही सबसे बड़ा स्टार है। – किसी भी भाषा की फिल्म अगर सफल होती है, तो उसका फायदा पूरे इकोसिस्टम को मिलता है। थिएटर में दर्शक आएंगे तो निर्माता, वितरक, प्रदर्शक और फिल्म उद्योग से जुड़े हजारों लोगों को फायदा होगा। – जहां तक सिनेमैटिक यूनिवर्स का सवाल है, तो मेरे ख्याल में यह एक वैश्विक ट्रेंड है। अगर किसी फिल्म का किरदार और उसकी दुनिया दर्शकों को पसंद आती है, तो उसके अगले भाग और फ्रेंचाइजी बनना स्वाभाविक है। दर्शक उसी कंटेंट को आगे देखना चाहते हैं जिससे वे जुड़ाव महसूस करते हैं। भविष्य – अब यूनिवर्स फिल्में बनेंगी तेलुगु सिनेमा – हनुमान यूनिवर्स ‘हनुमान’ की सफलता के बाद निर्देशक प्रशांत वर्मा पौराणिक फिल्मों का यूनिवर्स बना रहे हैं। ‘जय हनुमान’ सबसे चर्चित प्रोजेक्ट है। तमिल सिनेमा में लोकदेवताओं पर जोर – लोककथाओं व क्षेत्रीय देवताओं पर फिल्में बन रही हैं। शिवकार्तिकेयन की ‘सेयोन’ चर्चा में है। मराठी में बड़े ऐतिहासिक प्रोजेक्ट – ‘राजा शिवाजी’ की सफलता ने ऐतिहासिक फिल्मों का रास्ता खोला। ‘घाबडकुंड’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट लाइन में हैं। मलयालम में लोकाह यूनिवर्स – ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ की सफलता के बाद फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
अन्नामलाई ने छोड़ी बीजेपी! | नया राजनीतिक अध्याय? भाजपा से बाहर निकलने के बाद अन्नामलाई ने स्वतंत्र राह पकड़ी | एन18

तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक विकास सामने आया है क्योंकि के. अन्नामलाई ने युवा भागीदारी, शासन सुधार और जमीनी स्तर पर जुड़ाव पर केंद्रित एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने के लिए भाजपा से किनारा कर लिया है। इस कदम ने राजनीतिक हलकों में तीव्र बहस छेड़ दी है, समर्थकों ने इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा है, जबकि आलोचकों का सवाल है कि क्या भाजपा से खुद को दूर करने से उनका राजनीतिक प्रभाव सीमित हो सकता है। अन्नामलाई के फैसले से राज्य में राजनीतिक समीकरण फिर से बनने की उम्मीद है, खासकर वैकल्पिक नेतृत्व और नए राजनीतिक विचारों की तलाश करने वाले युवा मतदाताओं के बीच। राजनीतिक विश्लेषक बारीकी से देख रहे हैं कि नया आंदोलन कैसे विकसित होता है और क्या यह तमिलनाडु के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण ताकत के रूप में उभर सकता है। n18oc_breaking-newsn18oc_ Indian18oc_politicsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 06 जून, 2026, 15:39 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी तमिलनाडु(टी)करंट अफेयर्स(टी)शासन सुधार(टी)भारत राजनीति समाचार(टी)राजनीतिक विश्लेषण(टी)तमिल राजनीति(टी)युवा मतदाता
'वो मुझे बार-बार किस करता रहा':मुन्नाभाई MBBS में दिखीं एक्ट्रेस प्रिया बापट ने अनुभव शेयर किया, बोलीं- किसिंग सीन में अनकंफर्टेबल हुई थी

एक्ट्रेस प्रिया बापट ने हाल ही में बताया कि अपनी शुरुआती फिल्मों में से एक की शूटिंग के दौरान किसिंग सीन में वह अनकंफर्टेबल हो गई थीं। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में प्रिया ने कहा, ‘फिल्म में सिर्फ एक किसिंग सीन था। स्क्रिप्ट रीडिंग के समय से ही मुझे उसे लेकर डाउट था। मैं लगातार डायरेक्टर से पूछती थी कि इसकी जरूरत क्या है। मेरा सवाल किस करने या न करने को लेकर नहीं था, बल्कि यह था कि कहानी में इसे कैसे सही ठहराया जा रहा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘डायरेक्टर इस सीन को लेकर काफी जोर दे रहे थे। आखिर में मैंने सोचा कि अपनी झिझक तोड़नी चाहिए और सीन कर लिया। मैंने पूरी फिल्म में सिर्फ एक किस के लिए हामी भरी थी।’ को-स्टार किस करता रहा प्रिया ने कहा, ‘इसके बाद गाने की शूटिंग के दौरान एक्टर बार-बार इम्प्रोवाइज करने लगा और मुझे किस करता रहा। उस समय मैं अपने लिए आवाज नहीं उठा पाई, क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस स्थिति से कैसे निपटूं।’ उन्होंने बताया, ‘हम एक ही होटल में ठहरे थे, हालांकि कमरे अलग थे, लेकिन वह लगातार मैसेज करता था। कभी स्विमिंग सिखाने की बात करता, कभी डिनर और ब्रेकफास्ट के लिए बुलाता। मैं बार-बार मना करती रही। मेरे साथ पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था।’ प्रिया ने बताया कि वह हर रात अपने पति उमेश कामत से बात कर पूरी स्थिति शेयर करती थीं। बाद में उनके पति शूटिंग लोकेशन पर पहुंचे और कुछ दिनों तक उनके साथ रहे। एक्ट्रेस ने कहा कि उनके करियर में यह इकलौता ऐसा अनुभव था। ‘मुन्नाभाई MBBS’ में नजर आई थीं प्रिया प्रिया बापट मराठी सिनेमा और ओटीटी की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी। वो ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर’ और ‘मुन्नाभाई MBBS’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। मराठी फिल्म ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोलतोय!’ से उन्हें पहचान मिली। उन्होंने 2011 में एक्टर उमेश कामत से शादी की थी। एक्ट्रेस को दो महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार समेत कई सम्मान मिल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर मराठी और अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोहों में भी कई बार नॉमिनेशन मिला है।








