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क्षेत्रीय फिल्में अब ऑस्कर की रेस तक पहुंच रहीं:41% सफल क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी लागत से 10 गुना या ज्यादा कमाई की

क्षेत्रीय फिल्में अब ऑस्कर की रेस तक पहुंच रहीं:41% सफल क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी लागत से 10 गुना या ज्यादा कमाई की

बाहुबली, आरआरआर, केजीएफ और पुष्पा जैसी ‘पैन-इंडिया’ फिल्मों ने सफलता के नए पैमाने गढ़े हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से ‘मल्टी इंडिया’ सिनेमा का भी उदय हुआ है। हर भाषा का सिनेमा सुपरहिट फिल्में दे रहा है। उदाहरण के लिए गुजराती फिल्म ‘लालो: कृष्ण सदा सहायते’ ने 112 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की, जबकि इसको बनाने में सिर्फ 50 लाख रुपए लगे थे। वहीं, मलयालम फिल्म ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ ने 30 करोड़ रुपए के बजट पर लगभग 300 करोड़ रुपए का कारोबार किया। मराठी सिनेमा भी इस बदलाव का उदाहरण है। मसलन, ‘दशावतार’ ने 12 करोड़ रुपए के बजट पर 28.47 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया और निवेश के मुकाबले 220% से अधिक रिटर्न दिया। यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह बनाने वाली पहली मराठी फिल्म भी बनी थी। एनालिसिस: गुजराती फिल्म ने 224 गुना कमाई की, दो साल में 17 क्षेत्रीय फिल्में सुपरहिट सैकनिक ने 17 सफल क्षेत्रीय फिल्मों का विश्लेषण किया है। इनमें 7 फिल्में ऐसी थीं, जिन्होंने 10 गुना या उससे ज्यादा रिटर्न दिया… यानी लगभग 41% फिल्मों ने अपनी लागत का 10 गुना या उससे अधिक कमाया।

बॉक्स ऑफिस पर बढ़ रही हिस्सेदारी पीवीआर आइनॉक्स के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में क्षेत्रीय फिल्मों की हिस्सेदारी 27% थी, जो 2025 में बढ़कर 31% हो गई। वहीं हिंदी फिल्मों की हिस्सेदारी 55-56% के आसपास स्थिर बनी रही। अंग्रेजी फिल्मों की हिस्सेदारी 18% से घटकर 14% रह गई। एक्सपर्ट व्यू- आज सिनेमा का सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है – आज भारतीय सिनेमा में सबसे बड़ा स्टार कंटेंट है। पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि क्षेत्रीय फिल्मों ने न सिर्फ अपने राज्यों में, बल्कि देश और विदेश में भी दर्शक बनाए हैं… क्योंकि वहां कंटेंट ही सबसे बड़ा स्टार है। – किसी भी भाषा की फिल्म अगर सफल होती है, तो उसका फायदा पूरे इकोसिस्टम को मिलता है। थिएटर में दर्शक आएंगे तो निर्माता, वितरक, प्रदर्शक और फिल्म उद्योग से जुड़े हजारों लोगों को फायदा होगा। – जहां तक सिनेमैटिक यूनिवर्स का सवाल है, तो मेरे ख्याल में यह एक वैश्विक ट्रेंड है। अगर किसी फिल्म का किरदार और उसकी दुनिया दर्शकों को पसंद आती है, तो उसके अगले भाग और फ्रेंचाइजी बनना स्वाभाविक है। दर्शक उसी कंटेंट को आगे देखना चाहते हैं जिससे वे जुड़ाव महसूस करते हैं। भविष्य – अब यूनिवर्स फिल्में बनेंगी तेलुगु सिनेमा – हनुमान यूनिवर्स ‘हनुमान’ की सफलता के बाद निर्देशक प्रशांत वर्मा पौराणिक फिल्मों का यूनिवर्स बना रहे हैं। ‘जय हनुमान’ सबसे चर्चित प्रोजेक्ट है। तमिल सिनेमा में लोकदेवताओं पर जोर – लोककथाओं व क्षेत्रीय देवताओं पर फिल्में बन रही हैं। शिवकार्तिकेयन की ‘सेयोन’ चर्चा में है। मराठी में बड़े ऐतिहासिक प्रोजेक्ट – ‘राजा शिवाजी’ की सफलता ने ऐतिहासिक फिल्मों का रास्ता खोला। ‘घाबडकुंड’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट लाइन में हैं। मलयालम में लोकाह यूनिवर्स – ‘लोकाह चैप्टर 1: चंद्रा’ की सफलता के बाद फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

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