सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल ने बनाया मेलोडी टॉफी पर वीडियो:पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की टॉफी; सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मेलोडी ट्रेंड

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मेलोडी’ ट्रेंड में शामिल हो गए हैं। दोनों ने बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में जहीर मेलोडी टॉफी की मशहूर टैगलाइन बोलते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा ट्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने के बाद शुरू हुआ है। जॉइंट इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किए गए इस वीडियो में सोनाक्षी अपने पति जहीर से पूछती हैं, “तुम क्या पूछना चाहते हो?” इस पर जहीर जवाब देते हैं, “तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।” जब सोनाक्षी चिढ़ाते हुए कहती हैं “नहीं”, तो जहीर तुरंत अपनी जेब से मेलोडी टॉफी निकालते हैं और कहते हैं, “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” पीएम मोदी और मेलोनी के वीडियो से शुरू हुआ ट्रेंड इस मेलोडी ट्रेंड का बैकग्राउंड काफी दिलचस्प है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हो रही थी। जी-7 समिट या द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारत की तरफ से इटली को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया गया था। इसके बाद से ही यह मामला चर्चा में आया। ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’ की कहानी वीडियो में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी कहती हैं, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं, यह बहुत अच्छी टॉफी है।” इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, “मेलोडी।” इसके बाद दोनों नेता हंसने लगते हैं। दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच हुई इस बातचीत के बाद से ही सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर अलग-अलग रील्स और वीडियो बनाने का ट्रेंड शुरू हो गया, जिसमें अब बॉलीवुड के ये सेलिब्रिटीज भी शामिल हो रहे हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी बता दें कि सोनाक्षी और जहीर ने साल 2024 में ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी की थी। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म बदले शादी करने की अनुमति देता है। चूंकि यह एक अंतरधार्मिक विवाह था, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा और बहस हुई थी। सलमान खान की पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात सोनाक्षी और जहीर की लव स्टोरी करीब 10 साल पुरानी है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में सलमान खान की एक पार्टी में हुई थी। यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। साल 2017 से दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया।
knee pain at 30| knee problems in youth|30 की उम्र में युवाओं को मिल रहा दर्द और धोखा, अपने नहीं घुटने हैं धोखेबाज, क्या है वजह? टॉप सर्जन ने बता दी

आखिर क्यों कमजोर हो रहे हैं युवाओं के घुटने?घुटना शरीर के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा दबाव सहने वाले जोड़ों में से एक है. चलना, बैठना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना, वजन उठाना. लगभग हर गतिविधि में घुटनों की भूमिका होती है. लेकिन जब शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलता और आसपास की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तो घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे यह दबाव कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने लगता है और दर्द की शुरुआत हो जाती है. आज का शहरी जीवन इस समस्या को और बढ़ा रहा है. सुबह से रात तक लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना, घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताना और दिनभर बहुत कम चलना-फिरना शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है. लगातार बैठने से क्वाड्रिसेप्स और हिप मसल्स कमजोर होने लगती हैं, जो घुटनों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब ये मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो पूरा दबाव सीधे घुटनों के कार्टिलेज पर पड़ता है और घिसाव तेजी से बढ़ने लगता है. कम उम्र में घुटनों के दर्द के पीछे छिपे बड़े कारण 1. लंबे समय तक बैठकर काम करनाडेस्क जॉब आज घुटनों की समस्याओं की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है. लगातार कई घंटों तक बैठने से घुटनों की मूवमेंट कम हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है. यही कारण है कि कई युवा मीटिंग के बाद उठते समय जकड़न महसूस करते हैं या लंबे समय तक ड्राइव करने के बाद घुटनों में दर्द महसूस करते हैं. शुरुआती संकेतों में शामिल हैं- 2. तेजी से बढ़ता वजन और मोटापामोटापा घुटनों के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे घुटनों पर दबाव बढ़ाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, चलने के दौरान शरीर का हर अतिरिक्त किलो वजन घुटनों पर कई गुना अधिक दबाव डालता है.रिसर्च के मुताबिक, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा लगभग 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि पुरुषों में यह खतरा लगभग 5 गुना तक हो सकता है. यही कारण है कि कम उम्र में बढ़ता वजन अब घुटनों की बीमारी का प्रमुख कारण बनता जा रहा है. 3. “वीकेंड वॉरियर” फिटनेस कल्चरआजकल कई लोग पूरे सप्ताह शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं और फिर वीकेंड पर अचानक भारी वर्कआउट, रनिंग, ट्रेकिंग या खेलकूद शुरू कर देते हैं. बिना सही तैयारी, बिना स्ट्रेचिंग और गलत तकनीक के साथ किया गया हाई-इम्पैक्ट वर्कआउट घुटनों पर अचानक अत्यधिक दबाव डालता है.कंक्रीट सतह पर दौड़ना, गलत फुटवियर पहनना और जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना भी सूजन और माइक्रो-इंजरी का कारण बन सकता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर घुटनों की संरचना प्रभावित होने लगती है. 4. कार्टिलेज का शुरुआती घिसावघुटनों में होने वाला नुकसान हमेशा तुरंत दर्द के रूप में सामने नहीं आता. कई बार कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसना शुरू हो जाता है और व्यक्ति को लंबे समय तक इसका एहसास तक नहीं होता. डॉक्टरों के मुताबिक, 30 की उम्र तक कई लोगों में शुरुआती कार्टिलेज डैमेज और बोन स्पर्स बनने लगते हैं.अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही शुरुआती बदलाव आगे चलकर ऑस्टियोआर्थराइटिस में बदल सकते हैं. 5. पोषण की कमी और लगातार तनावघुटनों की मजबूती केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही पोषण भी उतना ही जरूरी है. विटामिन D, कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन की कमी हड्डियों और मांसपेशियों को कमजोर बनाती है. इसके अलावा, लगातार तनाव और खराब नींद शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है.फास्ट फूड, प्रोसेस्ड डाइट और अनियमित खानपान भी जोड़ों की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं. किन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करेंअगर कम उम्र में ये लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए: क्या कम उम्र में घुटनों की समस्या को रोका जा सकता है?विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में घुटनों की अधिकांश समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में स्थिति को सुधारा भी जा सकता है. इसके लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी बदलाव अपनाने की जरूरत है. घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव30 की उम्र में घुटनों का दर्द अब दुर्लभ नहीं रहा, लेकिन इसे सामान्य समझना बड़ी गलती हो सकती है. शरीर समय रहते संकेत देना शुरू कर देता है, लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर क्रॉनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस, लगातार दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण, मजबूत मांसपेशियां और सही जीवनशैली लंबे समय तक जोड़ों को स्वस्थ रखने की सबसे प्रभावी रणनीति हैं. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके कम उम्र में होने वाले घुटनों के दर्द से काफी हद तक बचा जा सकता है.शरीर हमेशा समय रहते चेतावनी देता है. जरूरत सिर्फ उसे समझने और सही समय पर कदम उठाने की है.
High BP symptoms| हाई बीपी है ‘साइलेंट किलर’ लेकिन ये 6 लक्षण हैं पुख्ता सबूत, तुरंत पकड़ में आ जाएगी बीमारी, डॉक्टर ने बताई काम की बात

Last Updated:May 21, 2026, 15:24 IST High Blood Pressure Symptoms and signs: हाई बीपी को साइलेंट किलर कहा जाता है लेकिन डॉ पूजा त्रेहन ने हाई बीपी के 6 प्रमुख लक्षण बताए हैं, जिन्हें पहचान कर हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है. अक्सर लोग इन लक्षणों को नींद की कमी या थकान समझकर इग्नोर कर देते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के क्या लक्षण होते हैं, कैसे पहचानें और हार्ट अटैक के खतरे को कम करें ? High BP ke lakshan: हाई ब्लड प्रेशर अक्सर लोगों को होता है लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता है, यही वजह है कि इस बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है. इसके लक्षण होते भी हैं लेकिन थकान और नींद कम आने से मिले जुले होने के कारण लोग इन्हें अक्सर इग्नोर कर देते हैं, लिहाजा ये पता करना मुश्किल होता है कि किसी को हाइपरटेंशन या हाई बीपी की समस्या हो चुकी है. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो हाई बीपी के 6 लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें अगर इग्नोर न किया जाए तो इस समस्या को तत्काल पहचाना जा सकता है और हार्ट अटैक या अन्य गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. हाई ब्लड प्रेशर को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर की कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट और जोनल चीफ ऑफ लैब्स डॉ. पूजा त्रेहन कहती हैं कि हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि कई लोगों को लंबे समय तक इसका कोई साफ लक्षण महसूस ही नहीं होता.क्लिनिकल प्रैक्टिस में अक्सर मरीज कहते हैं, “हमें तो बिल्कुल ठीक लग रहा था,” लेकिन यही बात इसे और खतरनाक बनाती है. जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक कई बार शरीर के अंदर नुकसान शुरू हो चुका होता है. पूजा आगे कहती हैं कि आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल, देर रात तक जागना, कम नींद, ज्यादा स्क्रीन टाइम, बाहर का खाना, स्मोकिंग, शराब, मोटापा, तनाव और एक्सरसाइज की कमी हाई BP के मामलों को तेजी से बढ़ा रहे हैं. पहले इसे उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30–40 साल के युवाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर काफी देखा जा रहा है. इसकी वजह से हार्ट की बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. हालांकि कई लोगों को बीपी की समस्या होती हैं लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं दिखाई देते. फिर भी कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे बार-बार सिर दर्द होना, चक्कर आना, जल्दी थकान लगना, धुंधला दिखना, दिल की धड़कन तेज महसूस होना, सांस फूलना या सीने में भारीपन डॉ. पूजा कहती हैं कि लोग अक्सर इन्हें तनाव, थकावट या नींद की कमी समझकर टाल देते हैं. जबकि ये हाई बीपी के सबसे मजबूत संकेत हैं. जिन पर बारीकी से ध्यान देना जरूरी है. क्या किया जाना चाहिए? डॉ. पूजा बताती हैं कि इससे बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. नियमित BP चेक कराना बेहद जरूरी है. कम नमक वाला संतुलित खाना खाएं रोजाना थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी, वजन कंट्रोल में रखना, अच्छी नींद लेना, स्मोकिंग और शराब से दूरी बनाना तनाव कम करना बहुत जरूरी है. डॉ. पूजा कहती हैं कि सही समय पर पहचान और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव भविष्य में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं. इसलिए इन संकेतों को समय पर पहचानना जरूरी है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
क्या गर्मियों में खाना चाहिए अंडा? हां या ना… जान लीजिए डॉक्टर की जुबानी

Last Updated:May 21, 2026, 15:20 IST Mirzapur News: कहा जाता है कि गर्मियों के दिनों में अंडा नहीं खाना चाहिए… पर क्या सच में ? यही जानने के लिए हमने डाइटीशियन से बात की. उन्होंने सारा भ्रम दूर किया और बताया कि अंडा खाना चाहिए या नहीं. मिर्जापुर: अक्सर आपके मन में सवाल रहता है कि गर्मियों में अंडे खाने चाहिए या नहीं. कई बार कुछ लोग गर्मियों के मौसम में अंडे को खाना ही छोड़ देते हैं. दरअसल, कहा जाता है कि गर्मियों के दिनों में अंडा नहीं खाना चाहिए. अब इस बात में कोई सच्चाई है भी या नहीं… ये आज हम आपको बताने वाले हैं. लोकल 18 की टीम ने मंडलीय अस्पताल की डाइटीशियन से इस बारे में बात की तो पता चला कि अंडा से गर्मी होने जैसी बात में कोई सच्चाई नहीं है. बिना किसी चिंता के अंडा खा सकते हैं. डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह ने कहा कि अंडा किसी भी सीजन में खा सकते हैं. अंडे में सबसे ज्यादा प्रोटीन मिलता है. इसे प्रोटीन का बेहतर सोर्स माना जाता है, जो लोग भी अंडे खाते हैं वह खा सकते हैं. अक्सर मन में चलता रहता है कि गर्मियों में अंडे खाने से गर्मी होती है. यह नुकसान पहुंचाता है. हालांकि, ऐसा नहीं है. अंडे को खाने के बाद डाइजेस्ट होने में थोड़ा वक्त लगता है. यहीं वजह है कि लोग कहते हैं कि अंडा खाने से गर्मी होती है बाकी ऐसा कुछ नहीं है. यह आपके के लिए ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है. दो अंडे हैं पर्याप्तडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि किसी भी संतुलित आहार के साथ दो अंडे ले सकते हैं. जब भी हाई प्रोटीन रिच चीजों को लेते हैं तो ऐसे में हाइड्रेटेड रहना फायदेमंद रहता है. अंडे में क्युरीन नामक पदार्थ होता है. ऐसे में जब भी अंडे खाएं तो पानी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पिएं. अन्यथा यह गठिया जैसी बीमारी का कारक हो सकता है. अंडे खाने के बाद नींद अच्छी लें. नींद पूरी न होने पर वेस्ट बनकर बाहर निकल जाता है. कोई फायदा हमारे शरीर को नहीं मिलता है. अगर आप अंडे खाने को लेकर सोच रहे हैं तो ये बेस्ट जगह है. अंडे खाए पर ज्यादा मात्रा में न खाए. यह नुकसानदेह हो सकता है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh
वायरल कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में रोका गया, संस्थापक ने लॉन्च किया नया हैंडल | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 15:04 IST 200K से अधिक फॉलोअर्स हासिल करने के बाद भारत में कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट बंद कर दिया गया, संस्थापक अभिजीत डुबके ने एक नया हैंडल बनाने की घोषणा की। भारत में कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट पर प्रतिबंध और नए हैंडल की घोषणा का स्क्रीनग्रैब। (स्रोत: एक्स) देश की जेन जेड के बीच बढ़ती लोकप्रियता के बीच कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट गुरुवार को भारत में रोक दिया गया। एक्स पर अकाउंट बैन करने की पुष्टि करते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत डुपके ने एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया, जिसमें दिखाया गया कि अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया है। पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”जैसा कि उम्मीद थी, कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट भारत में रोक दिया गया है।” संस्थापक ने आगे दावा किया कि खाते पर प्रतिबंध लगा दिया गया था क्योंकि उसके 200K से अधिक अनुयायी थे। उन्होंने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट 16 मई को शुरू किया गया था। 4 दिनों के भीतर अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि इसे 200K से ज्यादा फॉलोअर्स मिल गए थे।” कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट 16 मई को शुरू हुआ था। 4 दिन के अंदर ही अकाउंट को 200K से ज्यादा फॉलोअर्स मिलने के कारण बैन कर दिया गया। pic.twitter.com/q93MTXIbrm – अभिजीत डुपके (@abhajet_dipke) 21 मई 2026 एक घंटे के भीतर डुपके ने घोषणा की कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कॉकरोच जनता पार्टी का एक नया अकाउंट बनाया है। यह भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी ने इंस्टाग्राम पर मारा जैकपॉट, 5 दिनों में बने 11 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त वृद्धि के बीच एक्स पर कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? “कॉकरोच जनता पार्टी” शब्द की उत्पत्ति हाल ही में एक अदालती सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में हुई थी। कार्यवाही के दौरान, सीजेआई ने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” के रूप में संदर्भित किया था, जिसकी ऑनलाइन व्यापक आलोचना हुई थी। कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया पर एक मेम-संचालित विरोध अभियान के रूप में जो शुरू हुआ वह तेजी से एक वायरल डिजिटल आंदोलन में विकसित हो गया है, जो बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, राजनीतिक बयानबाजी और संस्थागत जवाबदेही के आसपास के सवालों से निराश युवाओं के साथ दृढ़ता से गूंज रहा है। यह भी पढ़ें: कौन हैं अभिजीत डुबके? वायरल कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे का दिमाग अपने व्यंग्यपूर्ण लहजे के बावजूद, समूह के घोषणापत्र में कई गंभीर राजनीतिक मांगें शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा पद स्वीकार करने से रोकना, चुनाव आयोग की जवाबदेही बढ़ाना, संसद और मंत्री पदों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना और मीडिया स्वामित्व और रोजगार अधिकारों से संबंधित सुधार पेश करना शामिल है। इस आंदोलन ने हास्य, मीम्स और तीखी राजनीतिक टिप्पणियों पर बहुत अधिक भरोसा किया है, जिससे इसे कम समय में ऑनलाइन बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल करने में मदद मिली है। जैसे-जैसे इस चलन ने गति पकड़ी, सोशल मीडिया प्रभावितों द्वारा लॉन्च किया गया “इंडियन नेशनल कॉकरोचेस” नामक एक और पैरोडी संगठन भी ऑनलाइन सामने आया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वायरल कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में रोका गया, संस्थापक ने नया हैंडल लॉन्च किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कॉकरोच जनता पार्टी(टी)एक्स अकाउंट रोक दिया गया(टी)सोशल मीडिया प्रतिबंध भारत(टी)जेन जेड राजनीतिक आंदोलन(टी)व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी(टी)मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत टिप्पणी(टी)वायरल डिजिटल विरोध(टी)बेरोजगारी और युवा सक्रियता
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधायक के रूप में शपथ ली

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने नए विधानसभा क्षेत्र के पहले दिन विधायक के रूप में शपथ ली। असम विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष चंद्र मोहन पटवारी ने शर्मा को 16वीं विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई। शर्मा ने असमिया भाषा में शपथ ली. अंतरिम अध्यक्ष पटवारी ने कहा, ‘सभी सदस्य अपनी इच्छानुसार किसी भी अनुमोदित भाषा में शपथ ले सकते हैं। वे अपनी शपथ की शुरुआत विधानसभा कार्यालय में जमा कर सकते हैं। ‘मुख्यमंत्री के बाद, अन्य नामों ने भी असमिया, डेमोक्रेट, बोडो और संस्कृत जैसे विभिन्न समुद्रों में शपथ ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने राज्य विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की, जिसमें 126 विधान सभाओं में 102 पर जीत दर्ज की गई। इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), असम गण परिषद (बीजेपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) शामिल हैं। बीजेपी ने अकेले 82 रनों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी और बीपीएफ ने 10-10 पर जीत हासिल की. इसके अलावा, छह ऑर्केस्ट्रा के डेमोक्रेटिक एलायंस का हिस्सा क्रांतिकारी कांग्रेस और रायजोर दल ने क्रमशः 19 और दो प्रतिभागियों का प्रदर्शन किया। इसके अलावा अकेले चुनावी मैदान में उतरने वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूपी दोष) ने दो और विपक्षी कांग्रेस ने एक सीट पर जीत हासिल की। यह भी पढ़ें: ‘पार्टी ने कूड़ा-कचरा’, बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी में फूटा पत्ता! ममता बनर्जी की मुसीबत, उगलने लगे विधायक (टैग्सटूट्रांसलेट)हेमंत बिस्वा सरमा(टी)असम
बिहार चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर ने अपना ठिकाना पटना आश्रम में स्थानांतरित किया: ‘अगले चुनाव तक मेरा निवास’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 11:40 IST प्रशांत किशोर अगले बिहार चुनाव तक शेखपुरा हाउस से आईआईटी पटना के पास बिहार नवनिर्माण आश्रम में शिफ्ट हो गए हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में कहा। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को घोषणा की कि वह बिहार में अगले विधानसभा चुनाव होने तक पटना के बाहरी इलाके में स्थित एक आश्रम में चले गए हैं। बिहार के दरभंगा में पत्रकारों से बात करते हुए, प्रशांत किशोर ने कहा, “पिछली रात, मैं पटना में उस जगह से बाहर चला गया जहां मैं रह रहा था। आईआईटी-पटना के करीब स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम, अगले विधानसभा चुनावों तक मेरा निवास स्थान होगा, जब जन सुराज पार्टी, उम्मीद है, प्रभाव डालेगी।” हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पार्टी शुरू करने के बाद चुनावी रणनीतिकार से नेता बने ने एक आश्रम में स्थानांतरित होने का फैसला किया, लेकिन एक भी सीट जीतने में असफल रहे। अब तक, प्रशांत किशोर ‘शेखपुरा हाउस’ से काम कर रहे थे, जो पटना हवाई अड्डे के करीब एक विशाल बंगला है। यह घर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद उदय सिंह के परिवार के पास है. यह भी पढ़ें: क्या तमिलनाडु में विजय लहर के पीछे प्रशांत किशोर हैं? जन सुराज नेता का पुराना वीडियो वायरल सिंह बिहार के प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक हैं। उनके बड़े भाई एनके सिंह 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं, और उनकी दिवंगत मां, माधुरी सिंह, पूर्णिया से सांसद और एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता थीं। प्रशांत किशोर ने बिहार कैबिनेट में अपने बेटे को शामिल करने को लेकर नीतीश पर निशाना साधा प्रशांत किशोर ने अपने बेटे के राज्य का स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना की। किशोर ने कहा, “चुनाव के बाद जो मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया, वह आर्थिक संकट के कारण होने वाले प्रवासन को रोकने में असमर्थ था। इसके बजाय, उन्होंने खुद प्रवासन का फैसला किया, लेकिन यह सुनिश्चित करने से पहले नहीं कि उनके बेटे को पैर जमाने का मौका मिले।” उन्होंने बिहार के मतदाताओं से अपील की कि वे अपने हितों को प्राथमिकता दें और जाति, धर्म या मौद्रिक प्रलोभन के आधार पर अपना वोट न डालें। यह भी पढ़ें: सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एक और विभाजन की ओर बढ़ रही है? प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद चर्चा बढ़ी किशोर ने कहा, “बिहार के लोगों को वोट देते समय अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू प्रसाद जैसे नेताओं के बहकावे में नहीं आना चाहिए और न ही 10,000 रुपये में अपना वोट बेचना चाहिए।” इस बयान को विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर स्पष्ट प्रहार के रूप में देखा गया, जिसके तहत 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बिहार चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर ने अपना ठिकाना पटना आश्रम में स्थानांतरित किया: ‘अगले चुनाव तक मेरा निवास’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति(टी)जन सुराज पार्टी(टी)बिहार विधानसभा चुनाव(टी)बिहार नवनिर्माण आश्रम(टी)नीतीश कुमार आलोचना(टी)बिहार कैबिनेट में फेरबदल(टी)मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना(टी)बिहार के स्वास्थ्य मंत्री
सलमान खान को पैपराजी ने घेरा:नाराजगी पर चिल्ला-चिल्लाकर बोला- सॉरी भाईजान, फिर एक्टर ने दिए पोज, पहले कहा था- ऐसे सौ जला दूंगा

मंगलवार को सलमान खान हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते हुए पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए। उन्होंने पैपराजी को जमकर खरी-खोटी सुनाई और फिर बाद में सीरीज में पोस्ट शेयर कर सभी को चेतावनी दी थी। हालांकि अब ये विवाद खत्म हो चुका है। हाल ही में सलमान खान, फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे थे, जहां सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी है। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली। क्यों हुआ था विवाद? सलमान खान मंगलवार को अपनी सिक्योरिटी टीम के साथ हिंदुजा हॉस्पिटल से निकल रहे थे। उन्हें देखते ही पैपराजी ने उनकी अपकमिंग फिल्म मातृभूमि चिल्लाना शुरू कर दिया। सलमान करीब आए और सभी को सुनाने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने आधिकारिक X अकाउंट से एक-एक कर 4 पोस्ट कीं। पहली पोस्ट में उन्होंने लिखा, “अगर मैं किसी प्रेस वाले को अस्पताल में मेरी पीड़ा का मजा लेते देखूं। उस प्रेस वाले के लिए मैंने खड़ा होकर बात की है, उनका ध्यान रखा है ताकि वो भी अपनी रोजी-रोटी कमा सकें।” दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “लेकिन अगर वो मेरे नुकसान से पैसा कमाना चाहते हैं, तो करते रहें। भाई भाई मातृभूमि पिक्चर की मां की आंख, पिक्चर इंपोर्टेंट है या लाइफ।” तीसरी पोस्ट में सलमान लिखते हैं, “ऐसे मैं सौ जला दूंगा। भाई का एक भाई के दुख पर अगली बार कोशिश कर लेना मेरे साथ। बस कोशिश कर लेना, जब भी तुम्हारा कोई अस्पताल में होगा, क्या मैं ऐसा रिएक्ट करूंगा?” आखिर में सलमान खान ने लिखा, “साठ साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला, ये याद रख लेना, जेल में डालोगे हाहा हाहा।” वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सलमान की नाराजगी के बाद पैपराजी उनसे माफी मांगते दिखे हैं। इस दौरान सलमान ने कुछ अपशब्द भी कहे। बता दें कि ये हाल-फिलहाल का इकलौता मामला नहीं है। इससे पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा सोमवार को एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा।
सलमान खान को पैपराजी ने घेरा:नाराजगी पर चिल्ला-चिल्लाकर बोला- सॉरी भाईजान, फिर एक्टर ने दिए पोज, पहले कहा था- ऐसे सौ जला दूंगा

मंगलवार को सलमान खान हिंदुजा अस्पताल पहुंचे थे, जहां से निकलते हुए पैपराजी के शोर से एक्टर भड़क गए। उन्होंने पैपराजी को जमकर खरी-खोटी सुनाई और फिर बाद में सीरीज में पोस्ट शेयर कर सभी को चेतावनी दी थी। हालांकि अब ये विवाद खत्म हो चुका है। हाल ही में सलमान खान, फिल्म राजा शिवाजी की सक्सेस पार्टी में पहुंचे थे, जहां सभी पैपराजी ने उनसे माफी मांगी है। सलमान जैसे ही पार्टी में पहुंचे, वैसे ही सभी पैपराजी ने उन्हें घेर लिया और माफी मांगने लगे। सभी एक साथ, सॉरी भाईजान, जोर से बोलो सॉरी, कहते दिखे। इसके बाद सलमान ने भी उनकी माफी कबूल कर ली। क्यों हुआ था विवाद? सलमान खान मंगलवार को अपनी सिक्योरिटी टीम के साथ हिंदुजा हॉस्पिटल से निकल रहे थे। उन्हें देखते ही पैपराजी ने उनकी अपकमिंग फिल्म मातृभूमि चिल्लाना शुरू कर दिया। सलमान करीब आए और सभी को सुनाने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने आधिकारिक X अकाउंट से एक-एक कर 4 पोस्ट कीं। पहली पोस्ट में उन्होंने लिखा, “अगर मैं किसी प्रेस वाले को अस्पताल में मेरी पीड़ा का मजा लेते देखूं। उस प्रेस वाले के लिए मैंने खड़ा होकर बात की है, उनका ध्यान रखा है ताकि वो भी अपनी रोजी-रोटी कमा सकें।” दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “लेकिन अगर वो मेरे नुकसान से पैसा कमाना चाहते हैं, तो करते रहें। भाई भाई मातृभूमि पिक्चर की मां की आंख, पिक्चर इंपोर्टेंट है या लाइफ।” तीसरी पोस्ट में सलमान लिखते हैं, “ऐसे मैं सौ जला दूंगा। भाई का एक भाई के दुख पर अगली बार कोशिश कर लेना मेरे साथ। बस कोशिश कर लेना, जब भी तुम्हारा कोई अस्पताल में होगा, क्या मैं ऐसा रिएक्ट करूंगा?” आखिर में सलमान खान ने लिखा, “साठ साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला, ये याद रख लेना, जेल में डालोगे हाहा हाहा।” वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सलमान की नाराजगी के बाद पैपराजी उनसे माफी मांगते दिखे हैं। इस दौरान सलमान ने कुछ अपशब्द भी कहे। बता दें कि ये हाल-फिलहाल का इकलौता मामला नहीं है। इससे पहले गोविंदा के बॉडीगार्ड्स की भी पैपराजी से बहस हो चुकी है। दरअसल, गोविंदा सोमवार को एक इवेंट में पहुंचे थे। वहां से निकलते हुए उन्हें पैपराजी ने घेर लिया। जब उनके गार्ड्स ने निकलने की जगह बनाने के लिए लोगों को पीछे किया, तो पैपराजी ने आरोप लगाया कि उन्हें धक्का दिया गया। विवाद बढ़ने पर गोविंदा को खुद बीच-बचाव करना पड़ा।
क्या 50% विधायकों के चुनाव बाद हिंसा विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने से टीएमसी टूट रही है? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 09:10 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा में 80 में से केवल 35 टीएमसी विधायक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, जिससे आंतरिक दरार की अटकलें तेज हो गईं क्योंकि पार्टी चुनाव में हार के बाद फिर से संगठित होने के लिए संघर्ष कर रही है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, बाईं ओर, पश्चिम बंगाल के कालीघाट में लीगल सेल के साथ एक बैठक के दौरान बोलती हुई। (स्रोत: पीटीआई) बुधवार को पार्टी के पहले बड़े विरोध कार्यक्रम से लगभग 50% तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों की अनुपस्थिति ने 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करने के बाद पार्टी के टूटने की संभावना के बारे में ताजा राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी। कथित तौर पर पार्टी द्वारा सड़क पर राजनीति में लौटने की आवश्यकता पर आंतरिक रूप से चर्चा करने के एक दिन बाद विधायक विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। ‘चुनाव बाद हिंसा’ के खिलाफ टीएमसी विधायकों ने धरना नहीं दिया कुछ टीएमसी विधायकों ने “चुनाव के बाद की हिंसा” और फेरीवालों को हटाने के अभियान के विरोध में विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास धरना दिया। यह विरोध सत्ता से विपक्ष में आने के बाद पार्टी का पहला समन्वित आंदोलन था। यह विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर चुनाव बाद हिंसा, बेदखली और इमारतों को गिराने के लिए बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर आयोजित किया गया था। भाग लेने वाले विधायकों में सोवन्देब चट्टोपाध्याय, नयना बनर्जी, कुणाल घोष और रीताब्रता बनर्जी शामिल थे। यह भी पढ़ें: क्यों तृणमूल द्वारा संचालित कोलकाता सिविक बॉडी उल्लंघनों के लिए अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों की जांच कर रही है? हालाँकि, 80 विधायकों में से केवल 35 विधायकों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया, जिसने जल्द ही राजनीतिक हलकों में संगठन के भीतर दरार की अटकलों को हवा दे दी, जब पार्टी चुनावी झटके का सामना करने के बाद फिर से संगठित होने की कोशिश कर रही है। क्या टीएमसी सत्तारूढ़ दल से विपक्षी दल में स्थानांतरित हो सकती है? राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव के बाद टीएमसी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में अपेक्षाकृत कम उपस्थिति ने अनिवार्य रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि पार्टी एक लंबे समय से सत्तारूढ़ दल से विपक्षी दल में कितनी आसानी से बदलाव कर सकती है। उनका मानना है कि मुद्दा सिर्फ विरोध प्रदर्शन में कम उपस्थिति नहीं हो सकता है, बल्कि इस तरह के प्रकाशिकी राजनीतिक क्षेत्र में उस समय संदेश भेजते हैं जब पार्टी चुनाव के झटके के बाद अपने संगठनात्मक विश्वास को फिर से बनाने की कोशिश कर रही है। वरिष्ठ टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अफवाहों को खारिज कर दिया और विधायकों की अनुपस्थिति के लिए साजो-सामान संबंधी बाधाओं और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को जिम्मेदार ठहराया। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आज कार्यक्रम में लगभग 35 विधायक मौजूद थे। चूंकि विधायक चुनाव के बाद हिंसा प्रभावित कई इलाकों में कार्यकर्ताओं के साथ व्यस्त थे, इसलिए कई लोग नहीं आ सके। और फिर कार्यक्रम एक दिन के नोटिस पर आयोजित किया गया था, इसलिए दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विधायकों के लिए इसमें आना एक समस्या थी।” क्या चुनावी हार के बाद टीएमसी खुद को पुनर्जीवित कर सकती है? हालाँकि, विरोध का स्वरूप महत्वपूर्ण था क्योंकि यह पार्टी द्वारा कालीघाट में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने के एक दिन बाद आया था, जहाँ, पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई विधायकों ने चिंता जताई थी कि टीएमसी केवल रणनीति सत्रों के माध्यम से खुद को पुनर्जीवित नहीं कर सकती है और उसे जमीनी स्तर पर लामबंदी के माध्यम से लोगों के साथ फिर से जुड़ने की आवश्यकता होगी। यह भी पढ़ें: ‘बदसूरत, विचित्र प्रतिमा’: साल्ट लेक स्टेडियम से हटाई जाएगी ममता द्वारा डिजाइन की गई फुटबॉल की मूर्ति पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार की बैठक में भाग लिया था, जहां कुछ विधायकों ने चुनाव में हार के बाद सड़क पर आंदोलन से पार्टी नेतृत्व की कथित अनुपस्थिति पर चिंता जताई थी। कुछ विधायकों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि “बंद कमरों के अंदर बैठकें आयोजित करने” से उस पार्टी को मदद नहीं मिलेगी जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कालीघाट में हुई चर्चा में नेतृत्व के चुनाव के बाद के राजनीतिक दृष्टिकोण पर पार्टी के कुछ वर्गों की चिंताएं भी प्रतिबिंबित हुईं। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में, बुधवार का विरोध चुनाव के बाद की हिंसा और अतिक्रमण विरोधी उपायों पर चिंताओं से परे महत्व रखता है। टीएमसी के लिए, जन आंदोलन और सड़क पर विरोध प्रदर्शन लंबे समय से उसकी राजनीतिक रणनीति का अभिन्न अंग रहे हैं। सिंगुर और नंदीग्राम आंदोलन से लेकर वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ निरंतर अभियानों तक, पार्टी ने ऐतिहासिक रूप से अपने राजनीतिक कथानक को मजबूत करने और मतदाताओं से जुड़ने के लिए सार्वजनिक लामबंदी पर भरोसा किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया क्या 50% विधायकों के चुनाव बाद हिंसा विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने से टीएमसी टूट रही है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें








