Tuesday, 06 Oct 2026 | 05:53 PM

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नीमच में अतिक्रमण हटाने के बाद बुजुर्ग की मौत:झोपड़ी में लगी आग. परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप

नीमच में अतिक्रमण हटाने के बाद बुजुर्ग की मौत:झोपड़ी में लगी आग. परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप

नीमच तहसील के जयसिंहपुरा गांव में बुधवार को प्रशासन की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद विवाद उत्पन्न हो गया। कार्रवाई के कुछ देर बाद 60 वर्षीय नानूराम जाटव की मौत हो गई। इस घटना के बाद जिला अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया और पुलिस प्रशासन पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का आरोप है कि प्रशासनिक अमला और पुलिस बल बिना किसी पूर्व सूचना के जयसिंहपुरा के नई आबादी क्षेत्र में पहुंचा था। उनका दावा है कि संबंधित जमीन का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। मृतक की नातिन ममता जाटव के अनुसार, जब उनके नाना ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कोर्ट केस का हवाला दिया, तो पुलिस ने उनके साथ हाथापाई और मारपीट की। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सरपंच के पुत्र और पुलिस ने उनकी झोपड़ी में आग लगा दी। इसके अतिरिक्त, साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से पुलिस पर वीडियो बना रहे परिजनों के मोबाइल छीनकर डेटा डिलीट करने का भी आरोप है। परिजनों का कहना है कि प्रशासन की इस कार्रवाई और कथित मानसिक दबाव के कारण नानूराम को दिल का दौरा पड़ा, जिससे अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से उस स्थान पर रह रहे हैं और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मृतक के दामाद गोपाल जाटव को पहले 15 दिन के लिए जेल भेजा गया था। बुजुर्ग की मौत के बाद प्रशासन ने उनकी पुत्री से हस्ताक्षर कराकर गोपाल को मात्र 4 दिन में ही रिहा कर दिया। दूसरी ओर, एसडीएम संजीव साहू ने परिजनों के सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से की गई थी और आगजनी की घटना स्वयं परिजनों द्वारा की गई थी। प्रशासन के अनुसार, यह जमीन डोम निर्माण के लिए चिन्हित है और नियमानुसार नोटिस जारी करने के बाद ही कार्रवाई की गई थी। ममता जाटव ने बताया कि उनके घर पर तहसीलदार सरपंच पटवारी सहित पुलिस का अमला कार्रवाई करने पहुंचा था। ममता ने बताया कि जब उसके नाना जी कार्रवाई का कारण पूछा तो अतिक्रमण हटाने की बात कहकर कार्रवाई करने लगे। जब उसके नाना ने बताया कि यहां सभी का अतिक्रमण है और सभी का हटाओ। और उक्त जमीन का केस कोर्ट में चल रहा है। इसी दौरान पुलिस ने उसके नाना जी से हाथापाई की और उनके साथ मारपीट की। उसके बाद उसके नाना जी वहां से चले गए थे और कुछ ही देर बाद उन्हें झंझारवाड़ा में दोनों का फैक्ट्री के यहां पड़े होने की सूचना मिली। ममता का कहना है कि उनकी मौत पुलिस एवं प्रशासन की प्रताड़ना के चलते हुए। ममता ने मांग की है कि उसको न्याय दिलाए जाए। और उनकी झोपड़ी में आग सरपंच के लड़के रमेश सुथार ओर पुलिस ने लगाई। और कार्रवाई के दौरान पेड़ भी गिराए गए हैं इस दौरान जब वीडियो बनाया जा रहे थे तो पुलिस प्रशासन ने दबाव बनाकर मोबाइल छीनकर वीडियो भी डिलीट करवाए हैं। ममता का कहना है वह 40 सालों से रह रहे हैं। कि 2024 से उन्हें परेशान कर रहे हैं। करीब 5 वि बार ये कार्रवाई करने पहुंचे।

नकली मूंछ विवाद पर अक्षय कुमार ने मांगी माफी:बोले- फिल्म 'पृथ्वीराज' में वैसी मूंछें उगना मुमकिन नहीं था; 4 साल बाद दी सफाई

नकली मूंछ विवाद पर अक्षय कुमार ने मांगी माफी:बोले- फिल्म 'पृथ्वीराज' में वैसी मूंछें उगना मुमकिन नहीं था; 4 साल बाद दी सफाई

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ (2022) में नकली मूंछों के इस्तेमाल को लेकर हुई आलोचना पर अब सफाई दी है। एक पॉडकास्ट के दौरान एक्टर ने पहली बार इस विवाद पर खुलकर बात की और फैंस से माफी भी मांगी। अक्षय ने स्पष्ट किया कि मूंछें न बढ़ाना आलस नहीं, बल्कि फिल्म की जरूरत और उनके चेहरे की बनावट से जुड़ा फैसला था। ‘पृथ्वीराज’ के लिए वैसी मूंछें नहीं उग सकती थीं शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में जब अक्षय से पूछा गया कि क्या उन्हें फिल्म के लिए ज्यादा वक्त नहीं देना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, मैं अभी कई फिल्मों और लुक्स पर काम कर रहा हूं। जैसे अभी मेरी यह दाढ़ी है, जिसे बढ़ाने के लिए मैंने करीब 6 हफ्ते तक काम नहीं किया। सम्राट पृथ्वीराज की कहानी के हिसाब से एक खास तरह की मूंछ की जरूरत थी, जो मेरे चेहरे पर कुदरती तौर पर नहीं उग सकती थी। अक्षय ने आगे कहा कि शायद वह मूंछ अच्छी नहीं लगी, इसलिए अगर लोगों को बुरा लगा तो वे माफी मांगते हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रही थी फ्लॉप बता दें कि डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बनी ‘सम्राट पृथ्वीराज’ 3 जून 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का बजट करीब 175 करोड़ रुपये था, लेकिन यह वर्ल्डवाइड सिर्फ 90 करोड़ रुपये ही कमा सकी थी। फिल्म में अक्षय के साथ मानुषी छिल्लर, संजय दत्त और सोनू सूद मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के फ्लॉप होने के पीछे अक्षय के ‘नकली मूंछ’ वाले लुक को भी एक बड़ी वजह माना गया था। अक्षय के आने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स अक्षय के पाइपलाइन में अभी कई बड़ी फिल्में हैं। वे जल्द ही अहमद खान की ‘वेलकम टू द जंगल’ (वेलकम 3) में दिखेंगे। इस फिल्म में रवीना टंडन, दिशा पाटनी, अरशद वारसी और जैकलीन फर्नांडिस समेत कई बड़े एक्टर्स है। इसके अलावा वे सैफ अली खान के साथ फिल्म ‘हैवान’ में भी नजर आएंगे, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ही कर रहे हैं।

नकली मूंछ पर अक्षय कुमार ने मांगी माफी:बोले- फिल्म 'पृथ्वीराज' में वैसी मूंछें उगना मुमकिन नहीं था; फैंस को बुरा लगा तो सॉरी

नकली मूंछ पर अक्षय कुमार ने मांगी माफी:बोले- फिल्म 'पृथ्वीराज' में वैसी मूंछें उगना मुमकिन नहीं था; फैंस को बुरा लगा तो सॉरी

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ (2022) में नकली मूंछों के इस्तेमाल को लेकर हुई आलोचना पर अब सफाई दी है। एक पॉडकास्ट के दौरान एक्टर ने पहली बार इस विवाद पर खुलकर बात की और फैंस से माफी भी मांगी। अक्षय ने स्पष्ट किया कि मूंछें न बढ़ाना आलस नहीं, बल्कि फिल्म की जरूरत और उनके चेहरे की बनावट से जुड़ा फैसला था। दरअसल, मूवी रिलीज के वक्त अक्षय को अपनी नकली मूछ के लिए ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। आलोचकों का कहना था कि अक्षय एक महान सम्राट का किरदार निभा रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए अपनी मूंछें तक नहीं बढ़ाईं। ‘पृथ्वीराज’ के लिए वैसी मूंछें नहीं उग सकती थीं शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में जब अक्षय से पूछा गया कि क्या उन्हें फिल्म के लिए ज्यादा वक्त नहीं देना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, मैं अभी कई फिल्मों और लुक्स पर काम कर रहा हूं। जैसे अभी मेरी यह दाढ़ी है, जिसे बढ़ाने के लिए मैंने करीब 6 हफ्ते तक काम नहीं किया। सम्राट पृथ्वीराज की कहानी के हिसाब से एक खास तरह की मूंछ की जरूरत थी, जो मेरे चेहरे पर कुदरती तौर पर नहीं उग सकती थी। अक्षय ने आगे कहा कि शायद वह मूंछ अच्छी नहीं लगी, इसलिए अगर लोगों को बुरा लगा तो वे माफी मांगते हैं। क्या था पूरा मामला? दरअसल ‘सम्राट पृथ्वीराज’ जैसी ऐतिहासिक फिल्मों में अक्सर एक्टर्स अपने किरदारों के लिए महीनों पहले से तैयारी करते हैं और असली मूंछें-दाढ़ी बढ़ाते हैं, लेकिन अक्षय कुमार ने इस फिल्म के लिए नकली मूंछ का इस्तेमाल किया था। जब फिल्म का ट्रेलर और पोस्टर रिलीज हुआ, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। आलोचकों और फैंस का कहना था कि अक्षय एक महान सम्राट का किरदार निभा रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसके लिए अपनी मूंछें तक नहीं बढ़ाईं और महज 40-45 दिनों में शूटिंग खत्म कर दी। लोगों ने इसकी तुलना ‘पद्मावत’ में रणवीर सिंह की मेहनत से की, जिससे यह बहस छिड़ गई कि क्या अक्षय अपने प्रोजेक्ट्स को पर्याप्त समय और गंभीरता नहीं दे रहे हैं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर रही थी फ्लॉप बता दें कि डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बनी ‘सम्राट पृथ्वीराज’ 3 जून 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का बजट करीब 175 करोड़ रुपये था, लेकिन यह वर्ल्डवाइड सिर्फ 90 करोड़ रुपये ही कमा सकी थी। फिल्म में अक्षय के साथ मानुषी छिल्लर, संजय दत्त और सोनू सूद मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के फ्लॉप होने के पीछे अक्षय के ‘नकली मूंछ’ वाले लुक को भी एक बड़ी वजह माना गया था। अक्षय के आने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स अक्षय के पाइपलाइन में अभी कई बड़ी फिल्में हैं। वे जल्द ही अहमद खान की ‘वेलकम टू द जंगल’ (वेलकम 3) में दिखेंगे। इस फिल्म में रवीना टंडन, दिशा पाटनी, अरशद वारसी और जैकलीन फर्नांडिस समेत कई बड़े एक्टर्स है। इसके अलावा वे सैफ अली खान के साथ फिल्म ‘हैवान’ में भी नजर आएंगे, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ही कर रहे हैं।

सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। नए नियमों के तहत फ्यूल की परिभाषा बदली मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा को अपडेट किया गया है। अब एटीएफ में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ सिंथेसाइज्ड कंपोनेंट्स (जैसे एथेनॉल) को भी शामिल किया जा सकेगा। यह भारतीय मानकों के अनुरूप होगा। सरकार का यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के चलन को ध्यान में रखकर किया गया है। तेल आयात और विदेशी मुद्रा की बचत होगी भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल की खपत कम होगी, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। गडकरी बोले- 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। हमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। CAFE III नॉर्म्स से ईवी और फ्लेक्स-फ्यूल को राहत सरकार का ध्यान केवल विमानों तक ही सीमित नहीं है। गडकरी ने कहा कि अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (CAFE) III नॉर्म्स का इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि सरकार भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना जारी रखेगी। CAFE III नॉर्म्स वाहनों के औसत ईंधन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के मानक हैं, जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। क्या होता है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF)? SAF एक ऐसा वैकल्पिक ईंधन है जिसे कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष और कचरे से तैयार किया जा सकता है। इसमें एथेनॉल का मिश्रण भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए विमान के इंजन या मौजूदा फ्यूल सप्लाई सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। यह पारंपरिक जेट फ्यूल के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देता है। ये खबर भी पढ़ें… टेक महिंद्रा का मुनाफा 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़: चौथी तिमाही में रेवेन्यू 12.64% बढ़ा, निवेशकों को 36 रुपए डिविडेंड देगी कंपनी टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q4FY25) में कंपनी को ₹1,167 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (22 अप्रैल) को कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी किए हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपने निवेशकों को 36 रुपए का डिविडेंड देना का भी ऐलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…

सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन फ्यूल में एथेनॉल मिलाने की मंजूरी दी:कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी; गडकरी बोले-100% ब्लेंडिंग का टारगेट

सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर ATF मार्केटिंग नियमों में बदलाव किया है। इस फैसले से न केवल हवाई यात्रा क्लीन होगी, बल्कि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता भी कम होगी। नए नियमों के तहत फ्यूल की परिभाषा बदली मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा को अपडेट किया गया है। अब एटीएफ में हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ सिंथेसाइज्ड कंपोनेंट्स (जैसे एथेनॉल) को भी शामिल किया जा सकेगा। यह भारतीय मानकों के अनुरूप होगा। सरकार का यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के चलन को ध्यान में रखकर किया गया है। तेल आयात और विदेशी मुद्रा की बचत होगी भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हवाई ईंधन में एथेनॉल मिलाने से कच्चे तेल की खपत कम होगी, जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी। गडकरी बोले- 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए। हमें फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। CAFE III नॉर्म्स से ईवी और फ्लेक्स-फ्यूल को राहत सरकार का ध्यान केवल विमानों तक ही सीमित नहीं है। गडकरी ने कहा कि अप्रैल 2027 से लागू होने वाले ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (CAFE) III नॉर्म्स का इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि सरकार भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देना जारी रखेगी। CAFE III नॉर्म्स वाहनों के औसत ईंधन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के मानक हैं, जो पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। क्या होता है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF)? SAF एक ऐसा वैकल्पिक ईंधन है जिसे कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष और कचरे से तैयार किया जा सकता है। इसमें एथेनॉल का मिश्रण भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए विमान के इंजन या मौजूदा फ्यूल सप्लाई सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। यह पारंपरिक जेट फ्यूल के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम कर देता है। ये खबर भी पढ़ें… टेक महिंद्रा का मुनाफा 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़: चौथी तिमाही में रेवेन्यू 12.64% बढ़ा, निवेशकों को 36 रुपए डिविडेंड देगी कंपनी टेक महिंद्रा का वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार (YoY) 16% बढ़कर ₹1,354 करोड़ हो गया। एक साल पहले की समान तिमाही (Q4FY25) में कंपनी को ₹1,167 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज (22 अप्रैल) को कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी किए हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपने निवेशकों को 36 रुपए का डिविडेंड देना का भी ऐलान किया है। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तानी ऑलराउंडर नवाज ड्रग टेस्ट पॉजिटिव पाए गए:PCB ने जांच शुरू की; टी-20 वर्ल्डकप के दौरान लिए गए सैंपल में फेल

पाकिस्तानी ऑलराउंडर नवाज ड्रग टेस्ट पॉजिटिव पाए गए:PCB ने जांच शुरू की; टी-20 वर्ल्डकप के दौरान लिए गए सैंपल में फेल

पाकिस्तान के ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। ESPNcricinfo के मुताबिक यह सैंपल 2026 टी-20 वर्ल्डकप के दौरान लिया गया था। इस मामले में ICC ने PCB को जानकारी दी है और बोर्ड ने अपनी जांच शुरू कर दी है। अंतिम फैसला आना बाकी- PCB PCB के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा- ICC ने इस मामले की जानकारी दी है और PCB ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके नतीजे आज ICC को बताए जाएंगे। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। 32 साल के नवाज ने इस साल श्रीलंका में हुए टी-20 वर्ल्डकप में पाकिस्तान के सभी सात मैच खेले थे। टीम सुपर-8 स्टेज में बाहर हो गई थी। इस दौरान उन्होंने 15 रन बनाए और 7 विकेट लिए। ICC गोपनीय तरीके से जांच कर रहा नवाज के खिलाफ यह मामला ICC की एंटी-डोपिंग प्रक्रिया के तहत चल रहा है। पॉजिटिव टेस्ट रिक्रिएशनल ड्रग (नशीली दवाएं) से जुड़ा है। ICC ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है और पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से चल रही है। सरे ने डील रद्द की इस विवाद का असर नवाज के करियर पर दिखने लगा है। नवाज को इंग्लैंड में टी-20 ब्लास्ट के लिए सरे टीम के साथ जुड़ना था। PCB ने उन्हें NOC भी दे दिया था और क्लब इस हफ्ते उनके साइनिंग का ऐलान करने वाला था। लेकिन अब यह डील टूट गई है और नवाज इस सीजन सरे के लिए नहीं खेलेंगे। क्लब ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। पॉजिटिव होने के बाद भी PSL खेल रहे नवाज जांच के बावजूद पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में खेलते हुए नजर आ रहे हैं। वे मुल्तान सुल्तांस की ओर से लगातार मैच खेल रहे हैं। हाल ही में कराची में रावलपिंडी के खिलाफ मैच में उन्होंने तीन ओवर फेंके, लेकिन कोई विकेट नहीं लिया। 98 टी-20 इंटरनेशनल खेल चुके नवाज अब तक पाकिस्तान के लिए 98 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। टीम के व्हाइट-बॉल सेटअप में वह नियमित खिलाड़ी रहे हैं और अपनी लेफ्ट आर्म स्पिन और लोअर ऑर्डर बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। अगर जांच में एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उन्हें सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

मैहर में तीन जगह आग लगी, एक मकान जला:अनाज और भूसा राख; नरवाई से फैली लपटें, ग्रामीणों ने पाया काबू

मैहर में तीन जगह आग लगी, एक मकान जला:अनाज और भूसा राख; नरवाई से फैली लपटें, ग्रामीणों ने पाया काबू

मैहर जिले में मंगलवार को आगजनी की तीन अलग-अलग घटनाओं से हड़कंप मच गया। इन घटनाओं में कहीं खेत जलकर खाक हो गए तो कहीं एक गरीब का घर राख हो गया। गनीमत यह रही कि समय रहते लोगों ने काबू पा लिया, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। अमरपाटन इलाके के ओबरा गांव में खेतों में लगी नरवाई की आग ने तेज हवा के कारण विकराल रूप ले लिया और करीब 2 किलोमीटर तक फैल गई। आग की लपटें खेतों के बीच बने गोरेलाल पटेल के कच्चे मकान तक पहुंच गईं। जब तक लोग कुछ समझ पाते, आग ने पूरे घर को चपेट में ले लिया। इस हादसे में घर में रखा अनाज, भूसा और गृहस्थी का सारा सामान जलकर राख हो गया। हवा के साथ कई गांवों तक पहुंची लपटें दूसरी घटना पहाड़ी मंटोलवा क्षेत्र की है। यहां भी नरवाई में लगी आग तेज हवा के कारण तेजी से बेकाबू हो गई। आग मड़ई, धनवाही और उमरी फीफरी जैसे कई गांवों के खेतों तक पहुंच गई। प्रशासन को सूचना तो दी गई, लेकिन दमकल के पहुंचने का इंतजार किए बिना ग्रामीणों ने खुद ही हिम्मत दिखाई। करीब दो घंटे की कड़ी मेहनत और पानी की मदद से लोगों ने आग को आगे बढ़ने से रोका। कब्रिस्तान के पास झाड़ियों में लगी आग तीसरी घटना मैहर शहर में कब्रिस्तान के पास हुई, जहां झाड़ियों में अचानक भीषण आग लग गई। शहर के बीचों-बीच धुआं और लपटें देख लोग दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से वक्त रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। दहशत में ग्रामीण, घटना का कारण पता नहीं इन तीनों ही मामलों में फिलहाल आग लगने की सही वजह सामने नहीं आ पाई है। लेकिन एक ही दिन में तीन जगह लगी आग से ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल है। लगातार बढ़ती गर्मी और खेतों में सूखी नरवाई के कारण आग लगने का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने में जुटा है।

सुप्रीम कोर्ट बोला-सीएम जांच में दखल देंगी, सोचा न था:वे लोकतंत्र को खतरे में नहीं डाल सकतीं; ममता IPAC छापेमारी के बीच पहुंची थीं

सुप्रीम कोर्ट बोला-सीएम जांच में दखल देंगी, सोचा न था:वे लोकतंत्र को खतरे में नहीं डाल सकतीं; ममता IPAC छापेमारी के बीच पहुंची थीं

I-PAC रेड मामले में ED की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सेंट्रल एजेंसी की तरफ से की जा रही जांच के बीच CM ममता बनर्जी के दखल को भी गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य का सीएम ऐसा करता है जो यह लोकतंत्र को खतरे में डालता है। जस्टिस कुमार ने कहा- यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। हमने कभी नहीं सोचा था कि इस देश में ऐसा भी दिन आएगा जब कोई मौजूदा CM उस दफ्तर में चली जाएंगी जहां कोई जांच एजेंसी काम कर रही हो। दरअसल इसी साल 8 जनवरी को ED की टीम ने I-PAC हेड प्रतीक जैन के कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित घर और दफ्तर पर छापा मारा था। प्रतीक जैन ही ममता बनर्जी के लिए पॉलिटिकल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं। छापेमारी के बीच ममता प्रतीक के घर पहुंच गईं थीं और कुछ दस्तावेज लेकर चली गईं। ED ने ममता बनर्जी और राज्य पुलिस अधिकारियों पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। ममता की चुनावी रणनीति बनाने वाली I-PAC का ऑफिस बंद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और सीएम ममता बनर्जी का चुनावी कैंपेन संभाल रही फर्म ‘आई-पैक’ का कोलकाता के विधाननगर स्थित दफ्तर 20 अप्रैल से बंद है। सूत्रों के अनुसार इसके एचआर ने 1300 कर्मियों को काम पर न आने का लेटर भेजा है। यह सब ऐसे समय हुआ है जब पहले चरण का मतदान को 3 दिन बचे हैं। 23 अप्रैल को पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोटिंग होनी है। चुनाव प्रचार 21 को खत्म हो जाएगा। दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को है। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। दरअसल, तृणमूल की बूथ लेवल की गतिविधि से लेकर नेताओं की सभाएं, रैलियां, सब कुछ तय करने में I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी की अहम भूमिका निभा रही है। बंगाल में पार्टी के मौजूदा करीब 33% विधायकों के टिकट काटने के फैसले के पीछे भी इसी का सर्वे आधार था। इसने बंगाल के 93 हजार पोलिंग बूथों के लिए एक लाख शैडो एजेंट्स तैयार किए थे। तृणमूल भले ही इसके बंद होने की खबरों को खारिज कर रही है, लेकिन मतदान से ठीक पहले संगठन और कार्यकर्ता असमंजस में आ गए हैं। हालांकि भास्कर के सवाल पर पार्टी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- हम संसद में दूसरी बड़ी विपक्षी पार्टी हैं। 5 एजेंसियों के साथ काम कर रहे हैं। सभी ठीक हैं। पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि टीएमसी संगठन 4 स्तर पर काम कर रहा है। ऐसे समझें… तृणमूल के लिए आईपैक इतनी जरूरी क्यों I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। —————————————–

बेंगलुरु में बॉयफ्रेंड को कुर्सी से बांधकर जिंदा जलाया:युवती ने सरप्राइज का झांसा देकर आंखों पर पट्टी, हाथ-पैर बांधे; आग लगाकर वीडियो भी बनाया

बेंगलुरु में बॉयफ्रेंड को कुर्सी से बांधकर जिंदा जलाया:युवती ने सरप्राइज का झांसा देकर आंखों पर पट्टी, हाथ-पैर बांधे; आग लगाकर वीडियो भी बनाया

कर्नाटक के बेंगलुरु में पुलिस ने एक युवती को बॉयफ्रेंड की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, युवती ने सरप्राइज देने का झांसा देकर युवक की आंखों पर पट्टी बांधी। फिर कुर्सी पर बैठाकर रस्सी से हाथ-पैर बांधकर जिंदा जला दिया। युवती ने बॉयफ्रेंड की मौत का वीडियो भी बनाया। आरोपी प्रेमा और मृतक किरण, दोनों 27 साल के थे। दोनों शहर के राजाजीनगर में एक टेलीकॉम कंपनी में साथ काम करते थे और करीब दो साल से रिलेशनशिप में थे। घटना शहर के ब्यादरहल्ली इलाके में प्रेमा के घर पर दोपहर करीब 2 बजे हुई। प्रेमा के परिवार के लोग घर पर नहीं थे। इसी का फायदा उठाकर उसने किरण को अपने घर बुलाया था। किरण तुमकुरु जिले के चिक्कनायकनहल्ली का रहने वाला था। पड़ोसियों ने चीखें और धुआं देखकर पुलिस बुलाई नॉर्थ-वेस्ट के डीसीपी नागेश डीएल के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आरोपी युवती ने रोमांटिक मीटिंग के बहाने युवक को बांधा। कुछ ही मिनट बाद उसपर केरोसिन या पेट्रोल डालकर आग लगा दी। खुद को छुड़ा न पाने के कारण किरण की मौके पर ही मौत हो गई। पड़ोसियों ने चीखें और धुआं देखकर पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया था, लेकिन जांच में कई गड़बड़ियां सामने आने पर मामला हत्या का निकला। प्रेमा ने कहा था- किरण ने खुद ही आग लगाई थी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमा ने अपने शुरुआती बयान में दावा किया था कि किरण ने खुद को आग लगा ली थी। प्रेमा ने कहा कि घटना के समय वह बाथरूम में थी। चीखें सुनकर बाहर आई तो किरण को आग में जला हुआ पाया। हालांकि जांच के दौरान पता चला कि किरण अपने साथ कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं लाया था। पुलिस के अनुसार, ज्वलनशील पदार्थ पहले से खरीदा गया था, जिससे हत्या की प्री-प्लानिंग का शक मजबूत हुआ है। शादी करने से इनकार करने पर नाराज थी प्रेमा पूछताछ के दौरान प्रेमा बार-बार बयान बदल रही थी लेकिन बाद में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि किरण उसे नजरअंदाज कर रहा था। इसके कारण हाल के दिनों में दोनों के बीच तनाव बढ़ गया था। प्रेमा इस बात से भी नाराज थी कि किरण ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने प्रेमा का मोबाइल जब्त किया है, जिसमें घटना का वीडियो मौजूद है। फिलहाल पुलिस पीड़ित के परिवार की औपचारिक शिकायत का इंतजार कर रही है।

रसगुल्ला खाते-खाते 35 साल के शख्स को मार दिया लकवा, पर ऐसा हुआ क्यों? डॉक्टर ने बताया इसके पीछे का खौफनाक सच

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Last Updated:April 22, 2026, 15:34 IST Paralysed After Eating Rasgullas : हैदराबाद में 35 साल के एक शख्स को रसगुल्ला खाते समय अचानक लकवा मार दिया. उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर रसगुल्ला खाने से किसी को लकवा कैसे मार सकता है. यही सवाल हमने एशिया मारेंगो अस्पताल गुरुग्राम के चेयरमैन और प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण गुप्ता से पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है और इसके कारण होते हैं लेकिन यह सबको नहीं होता. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. डॉ. प्रवीण गुप्ता बता रहे हैं रसगुल्ला और लकवे का कनेक्शन. क्या कोई कल्पना कर सकता है कि रसगुल्ला खाते-खाते किसी को लकवा मार दे. शायद ही कोई इस पर यकीन करे लेकिन एक डॉक्टर ने इंस्टाग्राम पर सच में ऐसे वाकये के बारे में बताया है. उन्होंने बताया है कि 35 साल का एक शख्स पहले की तरह रसगुल्ला खा रहा था. जैसे ही उसने 5-6 रसगुल्ले खाएए उसके बाद अचानक उनके हाथ-पैरों से ताकत गायब होने लगी. पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन कुछ ही समय बाद उसे हाथ और पैरों में पूरी तरह से ताकत लगनी बंद हो गई. इसके बाद अस्पताल जाना पड़ा. डॉक्टर ने लिखा है कि मरीज को कोई फूड प्वाइजनिंग नहीं हुआ क्योंकि रसगुल्ले एकदम ताजे थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि उसे लकवा मार दिया. क्यों होता है ऐसा जब यही सवाल मैंने एशिया मारेंगो अस्पताल गुरुग्राम के चेयरमैन और प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण गुप्ता से पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल संभव है. लेकिन ऐसा नहीं है कि रसगुल्ला खाने से किसी को भी यह बीमारी हो सकती है. यह एक स्थिति है जो कुछ लोगों में हो सकती है. इस बीमारी को मेडिकल भाषा में हाइपोकैलमिक पीरियोडिक पैरालाइसिस कहा जाता है. यह एक रेयर जेनेटिक कंडीशन है जो बचपन से लेकर जवानी तक किसी भी उम्र में शुरू हो सकती है. डॉ. प्रवीण गु्प्ता ने बताया कि हाइपोकैलमिया का मतलब है कि खून में पौटाशियम का लेवल बहुत कम हो जाना. वास्तव में जब कोई ज्यादा कार्बोहाइड्रैट वाली चीजें खाता है तो उसमें इस कार्बोहाइड्रैट को एनर्जी में बदलने के लिए इंसुलिन हार्मोन तेजी से निकलता है. पर जिस व्यक्ति में हाइपोकैलमिया की स्थिति होती है उसमें इंसुलिन ज्यादा बनने पर पोटैशियम को खून से निकाल देता है और कोशिकाओं के अंदर भर देता है. पोटैशियम हमारी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है. पोटैशियम हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का काम करता है. यानी यह दिमाग से शरीर में इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजने में मदद करता है. जब पोटैशियम की कमी हो जाती है तो नर्व से मसल्स तक सिग्नल ट्रांसफर नहीं हो पाता है. इससे मसल्स काम करना बंद कर देता है और हाथ-पैर हिलते-डुलते नहीं है. जिस व्यक्ति में यह बीमारी होती है, उसे यह बार बार यह होता है. पोटैशियम की कमी होने पर हार्ट रेट पर कम हो सकता है. इस कारण हार्ट स्लो हो जाता है. अगर इसका समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो इससे कार्डिएक अरेस्ट का भी खतरा बढ़ सकता है. इस बीमारी की पहचान कैसे करें डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं कि आमतौर पर इस बीमारी में हाथ-पैर बहुत कमजोर होकर काम करना बंद कर देते हैं. यह अचानक भी हो सकता है और धीरे-धीरे भी हो सकता है. कभी-कभार लक्षण बहुत कम होते हैं तो लोग ध्यान नहीं देते लेकिन यह बार-बार होता है इसलिए बाद में मरीज को पता चल ही जाता है. इस बीमारी में जब अटैक आता है तो उससे पहले मूड चेंज होने लगता है. हाथ-पैर में ऐसा लगता है कि सूई चुभ रही है. इसके साथ ही थकान होने लगती है. किस स्थिति में अटैक का खतरा जिस व्यक्ति को हाइपोकैलमिक पीरियोडिक पैरालाइसिस की बीमारी है उनमें कभी-कभी बहुत हार्ड एक्सरसाइज करने के बाद भी अटैक हो सकता है. इसलिए ऐसे लोगों को हार्ड एक्सरसाइज से बचना चाहिए. इसके अलावा बहुत ज्यादा ओवरइटिंग, ज्यादा कार्बोहाइड्रैट वाली चीजें खाने, ज्यादा नमक खाने, शराब पीने आदि से भी अटैक आ सकता है. वहीं ज्यादा सर्दी लग जाए तो भी इस बीमारी का अटैक हो सकता है. जिन लोगों को किडनी की बीमारी रीनल ट्यूबलर एडिसोसिस होती है, उन्हें भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है. इस बीमारी का इलाज क्या है डॉ. प्रवीण गुप्ता कहते हैं कि पैरालाइसिस अटैक के बाद मरीज को तुरंत अस्पताल में लाना चाहिए. न्यूरोलॉजिस्ट कुछ टेस्ट लिखते हैं. इसके बाद अगर यह साबित हो जाता है कि मरीज को हाइपोकैलमिक पीरियोडिक पैरालाइसिस है तो उसे पोटैशियम बढ़ाने वाली दवाई दी जाती है. इससे धीरे-धीरे पैरालाइसिस ठीक हो जाती है. ऐसे मरीजों को हाई पोटैशियम डाइट लेने की सलाह दी जाती है. मसूर की दाल, एवोकाडो, आलू, केला, दूध, पालक, चिकन ब्रेस्ट, मछली, फूलगोभी आदि में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है. इसलिए इन चीजों को मरीज को सेवन करना चाहिए. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 22, 2026, 15:34 IST