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विदिशा में गेहूं उपार्जन पर कांग्रेस का प्रदर्शन:रैली निकालकर उठाई किसानों की आवाज; समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

विदिशा में गेहूं उपार्जन पर कांग्रेस का प्रदर्शन:रैली निकालकर उठाई किसानों की आवाज; समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

विदिशा जिले में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी ने आरोप लगाया कि उपार्जन प्रक्रिया में बड़े किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो पा रहे हैं, जबकि वे भी KCC के जरिए कर्ज लेकर खेती करते हैं। सैटेलाइट आधारित स्लॉट बुकिंग को उन्होंने जटिल बताया। कांग्रेस ने कहा कि कई केंद्रों पर तुलाई में विसंगतियां हैं। कहीं कम रकबे पर ज्यादा स्लॉट, तो कहीं ज्यादा रकबे पर कम स्लॉट मिल रहे हैं। तुलाई के बाद भुगतान में देरी, बारदाने की कमी और वेयरहाउस में सीमित तुलाई जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। क्षमता से कम हो रही खरीदी, किसानों को नुकसान जहां प्रतिदिन 2500-3000 क्विंटल तुलाई होनी चाहिए, वहां केवल 1500 क्विंटल ही हो पा रही है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने शनिवार की छुट्टी खत्म कर उस दिन भी तुलाई शुरू करने की मांग की, ताकि कम समय में अधिक उपार्जन हो सके। नेताओं ने कहा कि मौसम में बदलाव के कारण खुले में रखा गेहूं खराब होने का खतरा बना हुआ है, जिससे किसानों को और नुकसान हो सकता है। प्रदेश सचिव आनंद प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की व्यवस्था ऐसी है, जिससे किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर व्यापारियों को बेचने को विवश हो रहे हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि 25 मई तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो जिले की सभी समितियों पर मुख्यमंत्री का ‘आंख बंद’ पुतला रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

मंगलवार को बैतूल के कॉलेज चौक के पास कचरे में लगी आग तेजी से फैलकर पास खड़े पेड़ों तक पहुंच गई। लपटें और धुआं उठते देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। दूसरी घटना धनोरा क्षेत्र में हुई, जहां आग की चपेट में आने से बिजली विभाग की डीपी जल गई। इस दौरान धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। गनीमत रही कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा और आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। प्रारंभिक जांच में अत्यधिक गर्मी और सूखे कचरे को आग लगने की वजह माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से खुले में कचरा न जलाने और सावधानी बरतने की अपील की है। 4 तस्वीरों में देखिए आग…

उज्जैन में गैस एजेंसी संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट:सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम, पुलिस ने वितरित कराए

उज्जैन में गैस एजेंसी संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट:सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम, पुलिस ने वितरित कराए

उज्जैन में अभी भी एलपीजी की किल्लत बनी हुई है। इससे परेशान उपभोक्ताओं का मंगलवार को गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान गैस एजेंसी के संचालक और उपभोक्ता के बीच मारपीट हो गई। हालात इतने बिगड़े कि नई सड़क स्थित बिजली घर के पास उपभोक्ताओं ने चक्काजाम कर दिया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया और फिर पुलिस की निगरानी में गैस सिलेंडर का वितरण हुआ। शहर में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। इससे आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बहादुरगंज स्थित शिप्रा गैस एजेंसी पर एक उपभोक्ता और एजेंसी के संचालक के बीच मारपीट हो गई। इसके बाद लोगों ने अपने-अपने गैस सिलेंडर सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस की निगरानी में बंटे सिलेंडर चक्काजाम करने से कुछ देर तक यातायात प्रभावित रहा। मारपीट की सूचना पर पुलिस पहुंची और लोगों को समझाकर मामले को शांत कराया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में सिलेंडर के नंबर लगाने का काम शुरू किया गया। इस दौरान भी कई लोग विवाद करते नजर आए। एक महीने से चक्कर लगा रहे एटलस चौराहा निवासी आशिया खान ने बताया कि एक महीने से चक्कर लगा रही हूं टंकी नहीं मिल रही है। सोमवार को आई थी तो धक्का देकर बाहर निकला दिया। मकान मालिक चूल्हा नहीं जलाने दे रहे हैं। सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान हैं। एजेंसी संचालक मारपीट कर रहे हैं। शहर से 25 किमी दूर रहने वाले किशोर दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि अपना काम छोड़कर रोजाना लाइन में लग रहा हूं। एक माह से ऊपर हो चुका है अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है। आरोप-एजेंसी पर बाउंसर लगाए उपभोक्ताओं ने आरोप लगाए कि गैस एजेंसी संचालक ग्राहकों के साथ मारपीट कर रहे हैं। लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया, जिसमें एजेंसी संचालक के साथ दो अन्य लोग भिड़ते हुए नजर आ रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि एजेंसी पर बाउंसर तैनात किए गए हैं, जो ग्राहकों के साथ अभद्रता और डराते-धमकाते हैं। एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए शिप्रा गैस एजेंसी का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए, जो नियमों के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने अपने पत्र में लिखा कि 17 अप्रैल 2026 को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। इसके अगले दिन 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने टीवी पर देश को संबोधित किया। लेटर के मुताबिक प्रधानमंत्री ने करीब 29 मिनट के संबोधन में विपक्षी दलों पर बिल रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सीधे सवाल उठाए और उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की। वेणुगोपाल ने नियम 222 के तहत यह नोटिस दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। स्पीकर को लिखे लेटर की चार मुख्य बातें… जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार संबोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा। क्या है विशेषाधिकार हनन? संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में इसके खिलाफ प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है। —————

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति की मांग:आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ ने वेतन, सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर रखी 17 सूत्रीय मांग

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति की मांग:आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ ने वेतन, सुरक्षा और श्रम अधिकारों को लेकर रखी 17 सूत्रीय मांग

आगर मालवा में भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई ने मंगलवार को आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने कंपनी गार्डन से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसएलआर प्रीति चौहान को ज्ञापन दिया। सामाजिक सुरक्षा और वेतन को लेकर उठाए सवाल ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थानों में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और श्रम कानूनों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। संघ ने ‘आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट’ या निगम मंडल के गठन की मांग की है। ओवरटाइम, समय पर वेतन और सीधा भुगतान की मांग संघ ने मांग रखी कि 8 घंटे से अधिक कार्य पर ओवरटाइम दिया जाए और हर माह की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वेतन पर्ची उपलब्ध कराने और बिचौलिया प्रथा समाप्त कर सीधे विभाग से भुगतान की व्यवस्था करने की बात कही गई। ज्ञापन में अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि, संविदा या नियमित भर्ती में प्राथमिकता, बिना जांच के सेवा समाप्ति पर रोक और शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी शामिल है। ईएसआई, ईपीएफ और बीमा कवर की मांग संघ ने ईएसआई, ईपीएफ, 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, समान कार्य के लिए समान वेतन और साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही सेवा समाप्ति के खिलाफ अपील के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया। संघ ने नियमित कार्यों में लगे कर्मचारियों को 62 वर्ष तक सेवा का अवसर देने और रिक्त पदों पर समायोजन के लिए नीति बनाने की भी मांग की। भारतीय मजदूर संघ ने अपनी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

पेन किलर के साथ भूलकर भी न खाएं ये दवा, शरीर में बन जाएगी जहर, नई स्टडी में चेतावनी

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Last Updated:April 21, 2026, 16:48 IST Painkiller turn Toxic : शरीर में दर्द होने पर पेनकिलर दवाइयां लोग लेते ही रहते हैं लेकिन इन पेनकिलर दवाइयों के साथ अगर आप कुछ खास तरह की दवाइयां साथ में लेते हैं तो लेने के देने पड़ सकते हैं. यहां तक कि अस्पताल जाने की नौबत भी आ सकती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक नए अध्ययन पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस स्टडी में कहा गया गैबापेंटिनोइड्स के साथ कुछ दवाइयों के इतने ज्यादा साइड इफेक्ट हैं कि इससे भारी मुसबतों का सामना करना पड़ सकता है. इन दवाओं के कॉन्बिनेशन से ड्रग प्वाइजन का खतरा. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने एक अध्ययन से दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि गैबापेंटिनोइड्स जैसी पेनकिलर दवाइयों के साथ कुछ दवाओं को लेकर पर यह शरीर में जहर बनने लगती है. इसका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि इस कारण अस्पताल जाने की नौबत तक आ सकती है. अब सवाल है कि ये दवाइयां कौन-कौन सी है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेनकिलर वाली gabapentinoids को ली जाए और इसके साथ डियाजीपाम या वैलियम जैसी दवा भी साथ में ली जाए तो यह ड्रग प्वाइजन बन सकती है. इन दवाओं को साथ में लेने पर अस्पताल पहुंचने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी मर्जी से कभी भी इन दवाओं को साथ में नहीं लेनी चाहिए. अस्पताल पहुंचने का खतरा 30 फीसदी ज्यादा गैबापेंटिनोइड्स नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली आम दवा है जो शरीर में दर्द, मिर्गी और एंग्जाइटी में भी खाई जाती है. ये दवाइयों उन न्यूरोट्रांसमीटर के रिलीज को कम करती है जिससे दर्द होती है. लेकिन इन दवाइयों का व्यापक पैमाने पर मिसयूज होने लगी है. शोध में यह भी सामने आया कि बेंजोडायजेपीन benzodiazepines जैसे Diazepam और Valium को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है. वहीं ओपिओइड दवाएं जैसे Codeine, Tramadol और Morphine—को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.इन जोखिमों के बावजूद अध्ययन में शामिल करीब 90 प्रतिशत मरीजों को गैबापेंटिनोइड्स के साथ ओपिओइड्स भी दी गई थीं, जबकि आधे से अधिक मरीजों को बेंज़ोडायजेपीन दवाएं भी दी गई थीं.शोध में पाया गया कि जो लोग गैबापेंटिनोइड्स और बेंज़ोडायजेपीन दोनों लेते हैं, उनमें इलाज शुरू करने के पहले चार हफ्तों में ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है, तुलना में उन समयों के जब वे इनमें से कोई दवा नहीं ले रहे थे. इसी तरह, गैबापेंटिनोइड्स को ओपिओइड्स के साथ लेने पर भी खतरा दोगुना पाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 89 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी समय ओपिओइड्स के साथ गैबापेंटिनोइड्स लिए, जबकि 55 प्रतिशत को कुछ समय के लिए बेंज़ोडायजेपीन भी दी गई थीं. 65 देशों में दवा का इस्तेमाल बढ़ाअध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. केनेथ मैन ने कहा, हाल के वर्षों में गैबापेंटिनोइड्स के प्रिस्क्रिप्शन तेजी से बढ़े हैं. यानी डॉक्टर इस दवा को मरीजों को लेने की सलाह देते है क्योंकि ओपिओइड्स के मुकाबले यह सुरक्षित माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दवा दर्द से राहत देने में प्रभावी है लेकिन इनके साथ कुछ खतरा भी है जिनके प्रति डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सतर्क रहना चाहिए. इस दवा को इंग्लैंड में हर साल 45 लाख से अधिक लोगों को दी जाती हैं. वहीं अमेरिका में भी सातवीं सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के पहले के शोध में पाया गया कि 2008 से 2018 के बीच 65 देशों में इनका उपयोग चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है. साइड इफेक्ट पर क्या आते हैं लक्षण रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैबापेंटिनोइड्स और वेलियम दवाओं के कॉम्बिनेशन से ड्रग पॉइजनिंग होता है तो इसमें सबसे पहले कंफ्यूजन यानी हर चीज में भ्रम होने लगती है, दिशा का ज्ञान नहीं रहता. इसके लिए मतली और दौरे भी आ सकते हैं. अगर सांस लेने वाली नली में रुकावट आ जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है. गंभीर मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर एंटीडोट दवाओं से इसका इलाज करते हैं. ब्रिटेन में हर साल लगभग 10,000 लोगों को ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल ले जाया जाता है. इस अध्ययन में गैबापेंटिनोइड्स से जुड़े कई जानबूझकर और अनजाने में हुए पॉइजनिंग के मामले सामने आए, जिनमें दवा का गलत इस्तेमाल या निर्धारित मात्रा से ज्यादा खुराक लेना भी शामिल था.डॉ. कैनेथ मान ने कहा कि गैबापेंटिनोइड्स दवा को लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब मरीज अन्य दवाएं भी ले रहा हो. साथ ही मरीजों की करीबी निगरानी जरूरी है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 16:48 IST

एक्सक्लूसिव: ‘तृणमूल कांग्रेस है, बंगाल सुरक्षित नहीं’, शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘टीएमसी का मतलब है बंगाल’

एक्सक्लूसिव: 'तृणमूल कांग्रेस है, बंगाल सुरक्षित नहीं', शिक्षा मंत्री ने कहा, 'टीएमसी का मतलब है बंगाल'

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने तैयारी पूरी कर ली है। ममता बनर्जी की वैष्णवी कांग्रेस की अगली कड़ी प्रतियोगिता में शामिल होने का इरादा मैदान में है। देश के शिक्षा मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता डेमोक्रेट प्रधान ने बंगाल चुनाव से जुड़े कई अहम संगठनों से एबीपी न्यूज पर खास बातचीत की। उन पर संग्रहालय बनाने का आरोप लगाया गया। डेमोक्रेट प्रधान ने इसके साथ ही भाजपा के स्मारकों का भी ज़िक्र किया। धर्मप्रमुख का कहना है कि भाजपा सभी को चुनकर चुनती है और उनका लक्ष्य बंगाल की जनता को सुशासन और एक वैकल्पिक सरकार देना है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में, विशेष रूप से 2019 के बाद, बीजेपी बंगाल में ‘तीसरे नंबर की पार्टी’ से एक ‘प्रभावशाली ताकत’ उभरी है और लगभग 38-40 फीसदी वोट शेयर हासिल किया है। उनका मानना ​​है कि इस बार बंगाल में भाजपा को सेवा करने का अवसर मिलेगा बीजेपी बंगाल में किन आंकड़ों पर लड़ेगी चुनाव डेमोक्रेट प्रधान ने कहा कि बंगाल चुनाव में बीजेपी के लिए कई मुद्दे अहम होंगे. उन्होंने कहा कि नौकरियाँ और नौकरियाँ अहम वस्तुएँ होंगी। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा, घुसपैठिए (स्थानीय सरकार द्वारा घुसपैठियों को धोखा देने का आरोप), सोनार बंगला (बंगाल को शिक्षा, संस्कृति और कला के क्षेत्र में फिर से देश का नेतृत्व करने वाला प्रांत बनाना) भी मुद्दा है। ममता बनर्जी के वारंट पर पलटवार डेमोक्रेट प्रधान ने ममता बनर्जी के वेतन पर भी दिया जवाब. उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा चुनाव में ‘युद्ध की सजा’ भेजे जाने के आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने 1971 के आर. के. लक्ष्मण के एक कार्टून का हवाला देते हुए कहा गया कि ममता जी के पास कोई वास्तविक संतुष्टि नहीं है। प्रवासी बलिया मामले पर क्या बोले डेमोक्रेट प्रधान उन्होंने ममता बनर्जी के उस आरोप को ‘बेबुनियाद’ बताया जिसमें कहा गया था कि बीजेपी प्रवासी बंगालियों के धार्मिक ग्रंथों पर अमल कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव लोगों के लिए एक उत्सव है और वे अपनी इच्छा से वापस आ रहे हैं।’ डेमोक्रेट प्रधान ने बंगाल की चुनाव प्रक्रिया को देश के अंतिम आदर्शों से अलग बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 50 वर्षों में (पहले कम्युनिस्ट और अब के दशक में) ‘संत्रास’ विचारधाराओं को डराने-धमकाने का एक नया नाम बनाया गया है। उन्होंने नाव के ‘खेला’ को एक खतरनाक खतरा बना दिया। झालमुड़ी की राजनीति पर क्या बोले शिक्षा मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झालमुडी टीम की ओर से ममता बनर्जी को ‘पूरी तरह से पीएलडी ड्रामा’ कहे जाने पर प्रधान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी निर्मल ममता न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि बंगाल में झालमुड़ी बेचने वाले आम आदमी का भी अपमान कर रही हैं। उनके अनुसार, जब कोई व्यक्तिगत अनिश्चितता होती है, तब वह इस तरह की आरक्षित बातें करता है। यह भी पढ़ें: पीस टॉक में बलि का बकरा कौन, जेडी वेंस या नेतन्याहू? असली खेलेंगे पुराना गेम या फिर रहस्य के पीछे है रहस्य

‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया | राजनीति समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Sthree Sakthi SS-516 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 16:40 IST वेणुगोपाल ने आरोप लगाया, “देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी द्वारा इस तरह के बयान विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​हैं।” वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के संसद में अपेक्षित बहुमत नहीं जुटा पाने के बाद विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधित करना “अभूतपूर्व, अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग” है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशेषाधिकार नोटिस दायर किया है, जिसमें उन पर पिछले सप्ताह राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों पर आक्षेप लगाने का आरोप लगाया गया है। नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित किया गया है, जिससे 2029 में महिला आरक्षण लागू करने पर सदन द्वारा विधेयकों को खारिज किए जाने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया है। स्पीकर को लिखे एक पत्र में, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों पर उनके मतदान व्यवहार के लिए “उद्देश्य थोपना” जानबूझकर विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​है, उन्होंने आरोप लगाया और बिड़ला से इस मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने का आग्रह किया। लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के तहत प्रस्तुत अपने नोटिस में, उन्होंने दावा किया कि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार के बाद 18 अप्रैल को प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अपने 29 मिनट के भाषण में, प्रधान मंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की और विपक्षी सदस्यों के वोटिंग पैटर्न का सीधा संदर्भ दिया, उनके इरादों को जिम्मेदार ठहराया। वेणुगोपाल ने कहा, “इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है।” वेणुगोपाल ने कहा कि यह अच्छी तरह से स्थापित है कि संसद सदस्यों द्वारा संसद में दिए गए भाषणों के संबंध में उन पर विचार करना, आक्षेप लगाना और इरादों पर आरोप लगाना “विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना” के समान है। वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में कहा, “इसलिए मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपके माननीय अध्यक्ष को सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना को स्पष्ट रूप से और जानबूझकर विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना ​​के रूप में संज्ञान लिया जा सके और मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधान मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना “केवल एक व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है”। नोटिस में कहा गया है, “माननीय अध्यक्ष, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि संसद की पवित्रता और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही दोहराया जाए।” इस बीच, पूर्व सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत के चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक पत्र में, कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधान मंत्री का संबोधन एमसीसी अवधि के दौरान “चुनावी प्रचार और पक्षपातपूर्ण प्रचार” था। पीएम मोदी के संबोधन में क्या था? 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने नारी शक्ति पहल को 21वीं सदी में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक “महान यज्ञ” बताया। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर परिसीमन प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी फैलाने का भी आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए भ्रामक कथाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन महिलाओं को उनके लंबे समय से लंबित अधिकारों को प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो दशकों से विलंबित था, जिसकी शुरुआत 2029 के लोकसभा चुनावों से हुई थी। यह संबोधन एक प्रमुख महिला आरक्षण विधेयक के संसद में पारित होने में विफल रहने के एक दिन बाद आया। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर तीखी बहस हुई, जिसमें कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 16:38 IST समाचार राजनीति ‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केसी वेणुगोपाल विशेषाधिकार नोटिस(टी)नरेंद्र मोदी संबोधन(टी)विशेषाधिकार का उल्लंघन(टी)लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)संविधान 131वां संशोधन(टी)आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन(टी)भारत का चुनाव आयोग

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

भोपाल के बागसेवनिया इलाके में सोमवार दोपहर एक साधु ने जिला न्यायालय में पदस्थ अपर लोक अभियोजक नारायण सिंह ठाकुर पर त्रिशूल से हमला कर दिया। घटना मिसरोद स्थित बापू की कुटिया के सामने लाल सिग्नल पर उस वक्त हुई, जब वे परिवार के साथ कार से घर लौट रहे थे। फरियादी के मुताबिक जैसे ही उन्होंने सिग्नल पर अपनी कार रोकी, तभी एक साधु वहां पहुंचा और गालियां देने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने त्रिशूल से कार के सामने के कांच पर वार कर दिया। इसके बाद वह ड्राइवर साइड आया और साइड विंडो पर भी त्रिशूल मारकर कांच तोड़ दिया। बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में घोंपा त्रिशूल घटना के दौरान आरोपी ने दोबारा हमला किया, जिसे रोकने के लिए वकील ने हाथ आगे किया। इस दौरान त्रिशूल उनकी दाहिनी हथेली में घुस गया, जिससे वे घायल हो गए और खून बहने लगा। आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के वक्त वकील की पत्नी, बेटा समेत मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस को सूचना दी गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आरोपी की पहचान, केस दर्ज पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अरविंद चौधरी बताया है। बागसेवनिया थाना पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हमले में वकील की कार के आगे और साइड के कांच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।

ऐसे लोगों के लिए खतरनाक होता है नींबू पानी, भूलकर भी न करें सेवन, वरना बिगड़ जाएगी तबीयत !

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Last Updated:April 21, 2026, 16:00 IST Lemon Water Side Effects: नींबू पानी को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता है. जिन लोगों को एसिडिटी, अल्सर, माइग्रेन या किडनी की समस्या है, उनके लिए इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है. ज्यादा नींबू पानी पीने से दांतों की एनेमल भी कमजोर हो सकता है और पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए इसे सीमित मात्रा में और अपनी सेहत को ध्यान में रखकर ही पीना चाहिए. एसिडिटी और अल्सर से जूझ रहे लोगों को नींबू पानी नहीं पीना चाहिए. Who Should Not Drink Lemon Water: नींबू पानी को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. खासतौर से गर्मियों में नींबू पानी का सेवन करने की सलाह दी जाती है. नींबू में विटामिन C की भरपूर मात्रा होती है, जिससे शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है. हर मौसम में नींबू पानी को लाभकारी माना जाता है, लेकिन सभी लोगों के लिए यह फायदेमंद नहीं होती है. कई बार लोग इसे बिना अपनी शारीरिक स्थिति समझे रोजाना पीना शुरू कर देते हैं, जिससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में नींबू पानी से बचना चाहिए. नई दिल्ली के PSRI हॉस्पिटल की डाइटिशियन पूनम दुनेजा ने News18 को बताया जिन लोगों को एसिडिटी, गैस या एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है, उनके लिए नींबू पानी परेशानी बढ़ा सकता है. इसमें मौजूद सिट्रिक एसिड पेट में जलन और खटास को बढ़ा सकता है, जिससे सीने में जलन और अपच जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा नींबू पानी का ज्यादा सेवन दांतों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसका एसिड दांतों के एनेमल को कमजोर करता है, जिससे सेंसिटिविटी और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है. अगर नियमित रूप से इसका सेवन किया जाए, तो दांतों में झनझनाहट महसूस हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन के मुताबिक जिन लोगों को पेट में अल्सर या घाव की समस्या होती है, उन्हें नींबू पानी से दूर रहना चाहिए. यह पेट की परत को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है और दर्द या जलन को बढ़ा सकता है. कुछ लोगों में खट्टे फल, जैसे नींबू, माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं. ऐसे में नींबू पानी पीने से सिरदर्द बढ़ सकता है और स्थिति असहज हो सकती है. बहुत ज्यादा ठंडा नींबू पानी पीने से गले में खराश और सर्दी-खांसी की समस्या हो सकती है. साथ ही यह पाचन क्रिया को भी धीमा कर सकता है, जिससे भोजन सही तरीके से नहीं पचता. ऐसे लोगों को नींबू पानी से परहेज करना चाहिए. एक्सपर्ट की मानें तो किडनी के मरीजों को नींबू पानी का सेवन सावधानी से करना चाहिए. इसमें मौजूद कुछ तत्व शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. नींबू पानी का सेवन तभी फायदेमंद है जब इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से पिया जाए. जरूरत से ज्यादा सेवन करने से शरीर में असंतुलन पैदा हो सकता है. इसलिए अपनी सेहत और शरीर की जरूरत को समझते हुए ही इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 16:00 IST