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पेन किलर के साथ भूलकर भी न खाएं ये दवा, शरीर में बन जाएगी जहर, नई स्टडी में चेतावनी

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Painkiller turn Toxic : शरीर में दर्द होने पर पेनकिलर दवाइयां लोग लेते ही रहते हैं लेकिन इन पेनकिलर दवाइयों के साथ अगर आप कुछ खास तरह की दवाइयां साथ में लेते हैं तो लेने के देने पड़ सकते हैं. यहां तक कि अस्पताल जाने की नौबत भी आ सकती है. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक नए अध्ययन पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस स्टडी में कहा गया गैबापेंटिनोइड्स के साथ कुछ दवाइयों के इतने ज्यादा साइड इफेक्ट हैं कि इससे भारी मुसबतों का सामना करना पड़ सकता है.

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इन दवाओं के कॉन्बिनेशन से ड्रग प्वाइजन का खतरा.

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने एक अध्ययन से दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि गैबापेंटिनोइड्स जैसी पेनकिलर दवाइयों के साथ कुछ दवाओं को लेकर पर यह शरीर में जहर बनने लगती है. इसका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि इस कारण अस्पताल जाने की नौबत तक आ सकती है. अब सवाल है कि ये दवाइयां कौन-कौन सी है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेनकिलर वाली gabapentinoids को ली जाए और इसके साथ डियाजीपाम या वैलियम जैसी दवा भी साथ में ली जाए तो यह ड्रग प्वाइजन बन सकती है. इन दवाओं को साथ में लेने पर अस्पताल पहुंचने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी मर्जी से कभी भी इन दवाओं को साथ में नहीं लेनी चाहिए.

अस्पताल पहुंचने का खतरा 30 फीसदी ज्यादा
गैबापेंटिनोइड्स नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली आम दवा है जो शरीर में दर्द, मिर्गी और एंग्जाइटी में भी खाई जाती है. ये दवाइयों उन न्यूरोट्रांसमीटर के रिलीज को कम करती है जिससे दर्द होती है. लेकिन इन दवाइयों का व्यापक पैमाने पर मिसयूज होने लगी है. शोध में यह भी सामने आया कि बेंजोडायजेपीन benzodiazepines जैसे Diazepam और Valium को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है. वहीं ओपिओइड दवाएं जैसे Codeine, Tramadol और Morphine—को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.इन जोखिमों के बावजूद अध्ययन में शामिल करीब 90 प्रतिशत मरीजों को गैबापेंटिनोइड्स के साथ ओपिओइड्स भी दी गई थीं, जबकि आधे से अधिक मरीजों को बेंज़ोडायजेपीन दवाएं भी दी गई थीं.शोध में पाया गया कि जो लोग गैबापेंटिनोइड्स और बेंज़ोडायजेपीन दोनों लेते हैं, उनमें इलाज शुरू करने के पहले चार हफ्तों में ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है, तुलना में उन समयों के जब वे इनमें से कोई दवा नहीं ले रहे थे. इसी तरह, गैबापेंटिनोइड्स को ओपिओइड्स के साथ लेने पर भी खतरा दोगुना पाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 89 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी समय ओपिओइड्स के साथ गैबापेंटिनोइड्स लिए, जबकि 55 प्रतिशत को कुछ समय के लिए बेंज़ोडायजेपीन भी दी गई थीं.

65 देशों में दवा का इस्तेमाल बढ़ा
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. केनेथ मैन ने कहा, हाल के वर्षों में गैबापेंटिनोइड्स के प्रिस्क्रिप्शन तेजी से बढ़े हैं. यानी डॉक्टर इस दवा को मरीजों को लेने की सलाह देते है क्योंकि ओपिओइड्स के मुकाबले यह सुरक्षित माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दवा दर्द से राहत देने में प्रभावी है लेकिन इनके साथ कुछ खतरा भी है जिनके प्रति डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सतर्क रहना चाहिए. इस दवा को इंग्लैंड में हर साल 45 लाख से अधिक लोगों को दी जाती हैं. वहीं अमेरिका में भी सातवीं सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के पहले के शोध में पाया गया कि 2008 से 2018 के बीच 65 देशों में इनका उपयोग चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है.

साइड इफेक्ट पर क्या आते हैं लक्षण
रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैबापेंटिनोइड्स और वेलियम दवाओं के कॉम्बिनेशन से ड्रग पॉइजनिंग होता है तो इसमें सबसे पहले कंफ्यूजन यानी हर चीज में भ्रम होने लगती है, दिशा का ज्ञान नहीं रहता. इसके लिए मतली और दौरे भी आ सकते हैं. अगर सांस लेने वाली नली में रुकावट आ जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है. गंभीर मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर एंटीडोट दवाओं से इसका इलाज करते हैं. ब्रिटेन में हर साल लगभग 10,000 लोगों को ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल ले जाया जाता है. इस अध्ययन में गैबापेंटिनोइड्स से जुड़े कई जानबूझकर और अनजाने में हुए पॉइजनिंग के मामले सामने आए, जिनमें दवा का गलत इस्तेमाल या निर्धारित मात्रा से ज्यादा खुराक लेना भी शामिल था.डॉ. कैनेथ मान ने कहा कि गैबापेंटिनोइड्स दवा को लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब मरीज अन्य दवाएं भी ले रहा हो. साथ ही मरीजों की करीबी निगरानी जरूरी है.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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इन दवाओं के कॉन्बिनेशन से ड्रग प्वाइजन का खतरा.

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं ने अपने एक अध्ययन से दुनिया को चौंका दिया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि गैबापेंटिनोइड्स जैसी पेनकिलर दवाइयों के साथ कुछ दवाओं को लेकर पर यह शरीर में जहर बनने लगती है. इसका दुष्प्रभाव इतना ज्यादा है कि इस कारण अस्पताल जाने की नौबत तक आ सकती है. अब सवाल है कि ये दवाइयां कौन-कौन सी है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पेनकिलर वाली gabapentinoids को ली जाए और इसके साथ डियाजीपाम या वैलियम जैसी दवा भी साथ में ली जाए तो यह ड्रग प्वाइजन बन सकती है. इन दवाओं को साथ में लेने पर अस्पताल पहुंचने की आशंका 30 प्रतिशत बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी मर्जी से कभी भी इन दवाओं को साथ में नहीं लेनी चाहिए.

अस्पताल पहुंचने का खतरा 30 फीसदी ज्यादा
गैबापेंटिनोइड्स नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली आम दवा है जो शरीर में दर्द, मिर्गी और एंग्जाइटी में भी खाई जाती है. ये दवाइयों उन न्यूरोट्रांसमीटर के रिलीज को कम करती है जिससे दर्द होती है. लेकिन इन दवाइयों का व्यापक पैमाने पर मिसयूज होने लगी है. शोध में यह भी सामने आया कि बेंजोडायजेपीन benzodiazepines जैसे Diazepam और Valium को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा दोगुना हो जाता है. वहीं ओपिओइड दवाएं जैसे Codeine, Tramadol और Morphine—को गैबापेंटिनोइड्स के साथ लेने पर अस्पताल में भर्ती होने का खतरा लगभग 30 प्रतिशत बढ़ा हुआ पाया गया.इन जोखिमों के बावजूद अध्ययन में शामिल करीब 90 प्रतिशत मरीजों को गैबापेंटिनोइड्स के साथ ओपिओइड्स भी दी गई थीं, जबकि आधे से अधिक मरीजों को बेंज़ोडायजेपीन दवाएं भी दी गई थीं.शोध में पाया गया कि जो लोग गैबापेंटिनोइड्स और बेंज़ोडायजेपीन दोनों लेते हैं, उनमें इलाज शुरू करने के पहले चार हफ्तों में ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है, तुलना में उन समयों के जब वे इनमें से कोई दवा नहीं ले रहे थे. इसी तरह, गैबापेंटिनोइड्स को ओपिओइड्स के साथ लेने पर भी खतरा दोगुना पाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 89 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किसी न किसी समय ओपिओइड्स के साथ गैबापेंटिनोइड्स लिए, जबकि 55 प्रतिशत को कुछ समय के लिए बेंज़ोडायजेपीन भी दी गई थीं.

65 देशों में दवा का इस्तेमाल बढ़ा
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. केनेथ मैन ने कहा, हाल के वर्षों में गैबापेंटिनोइड्स के प्रिस्क्रिप्शन तेजी से बढ़े हैं. यानी डॉक्टर इस दवा को मरीजों को लेने की सलाह देते है क्योंकि ओपिओइड्स के मुकाबले यह सुरक्षित माना जाता है. इसमें कोई संदेह नहीं कि ये दवा दर्द से राहत देने में प्रभावी है लेकिन इनके साथ कुछ खतरा भी है जिनके प्रति डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सतर्क रहना चाहिए. इस दवा को इंग्लैंड में हर साल 45 लाख से अधिक लोगों को दी जाती हैं. वहीं अमेरिका में भी सातवीं सबसे ज्यादा प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं. यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन के पहले के शोध में पाया गया कि 2008 से 2018 के बीच 65 देशों में इनका उपयोग चार गुना से ज्यादा बढ़ गया है.

साइड इफेक्ट पर क्या आते हैं लक्षण
रिपोर्ट के मुताबिक अगर गैबापेंटिनोइड्स और वेलियम दवाओं के कॉम्बिनेशन से ड्रग पॉइजनिंग होता है तो इसमें सबसे पहले कंफ्यूजन यानी हर चीज में भ्रम होने लगती है, दिशा का ज्ञान नहीं रहता. इसके लिए मतली और दौरे भी आ सकते हैं. अगर सांस लेने वाली नली में रुकावट आ जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है. गंभीर मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती करना जरूरी होता है, जहां डॉक्टर एंटीडोट दवाओं से इसका इलाज करते हैं. ब्रिटेन में हर साल लगभग 10,000 लोगों को ड्रग पॉइजनिंग के कारण अस्पताल ले जाया जाता है. इस अध्ययन में गैबापेंटिनोइड्स से जुड़े कई जानबूझकर और अनजाने में हुए पॉइजनिंग के मामले सामने आए, जिनमें दवा का गलत इस्तेमाल या निर्धारित मात्रा से ज्यादा खुराक लेना भी शामिल था.डॉ. कैनेथ मान ने कहा कि गैबापेंटिनोइड्स दवा को लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब मरीज अन्य दवाएं भी ले रहा हो. साथ ही मरीजों की करीबी निगरानी जरूरी है.

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