राहुल पर FIR का अपना आदेश हाईकोर्ट जज ने बदला:बिना नोटिस केस दर्ज करना सही नहीं माना; याचिकाकर्ता बोला- CJI से शिकायत करेंगे

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सांसद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का अपना ही आदेश बदल दिया है। मामला दोहरी नागरिकता से जुड़ा है। कोर्ट ने शनिवार को अपनी वेबसाइट पर नया आदेश जारी किया। कोर्ट ने बताया कि शुक्रवार (17 अप्रैल) को सुनवाई हुई थी। इसमें याचिकाकर्ता समेत केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से पूछा गया था कि क्या राहुल गांधी को नोटिस जारी करने की जरूरत है? वकीलों ने नोटिस जारी करने की कोई जरूरत नहीं बताई थी। इसके बाद FIR दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया गया था। हालांकि, आदेश टाइप होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने फिर से फैसले को परखा। उन्होंने पुराने केसों की स्टडी में पाया कि ऐसे मामलों में नोटिस भेजना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना फैसला करना उचित नहीं है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की है। यह याचिका कर्नाटक में रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की थी। उन्होंने राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता का आरोप लगाते हुए विदेशी अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम आदि में केस दर्ज होने की मांग की है। कोर्ट का फैसला आने के बाद विग्नेश ने कहा- राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का फैसला वापस लेने की शिकायत हम CJI से करेंगे। कल केस दर्ज करने और CBI से जांच के आदेश दिए थे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने कहा था- FIR दर्ज करके मामले को CBI को ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, इससे पहले 28 जनवरी, 2026 को MP-MLA कोर्ट ने विग्नेश शिशिर की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने मंत्रालय से ‘टॉप सीक्रेट’ फाइलें ली थीं सुनवाई के दौरान जज सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश दिए थे कि मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज पेश करें। मंत्रालय ने केस से जुड़ी सभी फाइलें हाईकोर्ट में पेश की थीं। विग्नेश शिशिर का दावा है कि उन्होंने कोर्ट में दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए। इनसे संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं। वहां चुनावों में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं। शुक्रवार को सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से वकील डॉ. बीके सिंह पेश हुए थे। केंद्र सरकार का पक्ष वकील एसबी पांडेय ने रखा। याचिकाकर्ता विग्नेश पांडेय की तरफ से बिंदेश्वरी पांडेय कोर्ट पहुंचे थे। रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर हुआ था केस 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी ही याचिका खारिज कर दी थी सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राहुल की भारतीय नागरिकता से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अगर कोई कंपनी किसी फॉर्म में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक के तौर मेंशन करती है, तो क्या ऐसा कर देने से ही वे ब्रिटिश नागरिक हो गए। सीजेआई गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा था- ‘हम यह याचिका खारिज करते हैं। इसमें कोई आधार नहीं है। ‘याचिका में कहा गया था, ‘कोर्ट राहुल की नागरिकता के बारे में मिली शिकायत पर जल्द फैसला करने के लिए गृह मंत्रालय को निर्देश दे।’ याचिका में राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता जय भगवान गोयल ने ब्रिटेन की कंपनी के 2005-06 के सालाना ब्योरे का जिक्र किया था। इसमें कथित तौर पर राहुल को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था। राहुल के खिलाफ यूपी में 3 केस मोदी सरनेम केस में गई थी सांसदी मोदी सरनेम केस में गुजरात की एक कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद 24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 7 अगस्त 2023 को उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी। …………………………… यह खबर भी पढ़ें जदयू के ललन सिंह बोले- अखिलेश मेरे मित्र हैं, कांग्रेस के चक्कर में मत पड़िए, सपा प्रमुख मुस्कुराते रहे लोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने और सीटों के परिसीमन के लिए तीन संशोधित बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा जारी है। इसी बीच, जदयू से मोदी सरकार में मंत्री ललन सिंह ने कहा- अखिलेश जी हमारे मित्र हैं। उनके (कांग्रेस) चक्कर में मत पड़िए, उनको झटका मारिए। बिहार में उनका क्या हुआ, जानते हैं न। लगातार कांग्रेस की सीटें घटती गईं। यह सुनकर अखिलेश यादव मुस्कुराने लगे। पढ़ें पूरी खबर…
‘महिलाओं ने ऐतिहासिक अवसर से इनकार किया’: नारी शक्ति विधेयक को लेकर स्मृति ईरानी ने इंडी ब्लॉक पर निशाना साधा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:18 अप्रैल, 2026, 16:35 IST स्मृति ईरानी ने कहा कि विपक्ष ने भारत की महिलाओं को हराने और उन्हें एक ऐतिहासिक अवसर से वंचित करने के लिए एकजुट मोर्चा पेश किया। बीजेपी नेता और अभिनेत्री स्मृति ईरानी भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने शनिवार को संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से एक संवैधानिक संशोधन का विरोध करने के लिए INDI ब्लॉक पर हमला बोला और कहा कि महिलाओं को एक ऐतिहासिक अवसर से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष ने भारत की महिलाओं को हराने के लिए एकजुट मोर्चा पेश किया। के साथ एक विशेष साक्षात्कार में सीएनएन-न्यूज18ईरानी ने कहा, “कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने कल संसद में जो किया वह अपमानजनक है… उन्होंने यह हौव्वा खड़ा किया कि (परिसीमन के कारण) दक्षिणी राज्यों को मताधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। कल, गृह मंत्री ने प्रस्ताव दिया कि यदि विपक्ष लिखित गारंटी चाहता है, तो उन्हें राज्य की सीटों में 50% आनुपातिक वृद्धि के सरकार के प्रस्ताव में संशोधन करने के लिए एक घंटे का समय लगेगा। विपक्ष ने गृह मंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार क्यों नहीं किया?” उन्होंने कहा, “विपक्ष ने जो करने की कोशिश की वह वास्तव में – परिसीमन, दक्षिणी राज्यों और समय की आड़ में – वे महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकार से वंचित करना चाहते थे। इस देश में ऐसे युवा हैं जो चाहते हैं कि महिलाओं को भारत की राजनीति में आनुपातिक और सम्मानजनक योगदान मिले। विपक्ष सचमुच जश्न मना रहा था। वे किस बात का जश्न मना रहे थे? अगला लोकसभा चुनाव तीन साल दूर है।” यह भी पढ़ें: ‘उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी’: पीएम मोदी ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक का समर्थन नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की ‘ऐतिहासिक अवसर अस्वीकृत’ उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह हर राजनीतिक दल के लिए एक साथ आने और अगली लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का अवसर है। उन्होंने कहा, “उन्होंने भारत की महिलाओं को इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित कर दिया है।” ईरानी ने आगे इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन की अवधारणा संवैधानिक रूप से कांग्रेस द्वारा निर्धारित की गई थी, फिर भी वे विपक्ष में रहते हुए इस प्रक्रिया को खारिज कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा, “हम निश्चित रूप से इस मुद्दे को उजागर करेंगे, चाहे संसद हो या भारत की सड़कें। यह सभी राजनीतिक संगठनों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था। सरकार अपने प्रस्ताव में बहुत स्पष्ट थी। आप (विपक्ष) इस देश की महिलाओं को अपमानित करने पर क्यों हंसेंगे, हंसेंगे, मेज थपथपाएंगे और इतने खुश होंगे? इससे पता चलता है कि कांग्रेस और सहयोगी कभी भी महिला आरक्षण के समर्थक नहीं थे।” पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन 131वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसका उद्देश्य 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा में सीटों की संख्या को 850 तक बढ़ाना था, विशेष बहुमत हासिल करने में विफल रहने के बाद शुक्रवार को संसद में गिर गया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से 298 ने विधेयक का समर्थन किया जबकि 230 ने इसका विरोध किया। संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए प्रस्ताव को 352 वोटों की आवश्यकता थी। विधेयक को पर्याप्त वोट नहीं मिलने के बाद, सरकार ने स्पीकर ओम बिरला से दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर आगे नहीं बढ़ने का भी अनुरोध किया। शनिवार को सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विपक्षी दलों को महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक का समर्थन नहीं करने के लिए “जीवन भर पछतावा रहेगा”। वह रात 8:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन भी देने वाले हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 18 अप्रैल, 2026, 16:33 IST न्यूज़ इंडिया ‘महिलाओं को ऐतिहासिक अवसर से वंचित किया गया’: नारी शक्ति विधेयक को लेकर स्मृति ईरानी ने इंडी ब्लॉक पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
निवाड़ी अस्पताल के सामने सड़क पर ट्रांसफार्मर:लोग बोले- इससे शॉर्ट सर्किट का खतरा; बिजली कंपनी ने अस्पताल प्रबंधन को ठहराया जिम्मेदार

निवाड़ी जिला मुख्यालय के मुख्य बाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने सड़क किनारे बिजली ट्रांसफार्मर लगा है। इसी स्थान से अस्पताल की एंबुलेंस और मरीजों के वाहन गुजरते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट या आग लगने का जोखिम हमेशा बना रहता है। शॉर्ट सर्किट से पहले भी लग चुकी आग कुछ समय पहले इसी ट्रांसफार्मर के पास रखी दुकानों (गुमटियों) में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी, जिसमें लाखों का नुकसान हुआ था। उस घटना के बाद प्रशासन ने गुमटियां तो हटा दीं, लेकिन अब वहां दोबारा अस्थायी दुकानें लगने लगी हैं। गुरुवार को साप्ताहिक हाट बाजार के दौरान इस ट्रांसफार्मर के नीचे भारी भीड़ रहती है। कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं हटाया जिले के तत्कालीन कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान इस ट्रांसफार्मर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बिजली कंपनी ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पर्याप्त जगह होने के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसे नहीं हटाया जा रहा है। बिजली विभाग ने अस्पताल प्रबंधन पर डाला जिम्मा ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग को लेकर विद्युत विभाग के एई विनोद शर्मा का कहना है कि पूर्व में अस्पताल प्रबंधन से चर्चा हुई थी। विभाग का दावा है कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक ट्रांसफार्मर लगाने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय कर उन्हें जानकारी नहीं दी है, जिसके चलते काम रुका हुआ है। हाट बाजार में बढ़ जाता है खतरा बाजार के व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि भीषण गर्मी में ट्रांसफार्मर से निकलने वाली चिंगारी किसी बड़ी आग का कारण बन सकती है। विशेषकर साप्ताहिक बाजार के दिन इसके ठीक नीचे दुकानें सजती हैं। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना इसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
चंबा में संदिग्ध पाकिस्तानी गुब्बारा मिलने से हड़कंप:खेतों में मवेशी चराने गए व्यक्ति ने देखा; 'PIA' और उर्दू में लिखावट से एजेंसियां सतर्क

हिमाचल के चंबा जिले में खेतों में शनिवार को एक संदिग्ध गुब्बारा मिलने से हड़कंप मच गया। इस पर “PIA” लिखा होने के साथ उर्दू में कुछ शब्द और पाकिस्तान का झंडा बना हुआ था। जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह एक ग्रामीण अपने मवेशी चराने के लिए खेतों की ओर गया था। इसी दौरान उसकी नजर इस असामान्य गुब्बारे पर पड़ी। पास जाकर देखने पर गुब्बारे पर बने चिन्ह और लिखावट उसे संदिग्ध लगी। यह गुब्डबारा लहौजी के खैरी क्षेत्र स्थित चलाड़ी गांव के समीप मिला। भारतीय सेना को भी अलर्ट किया ग्रामीण ने तुरंत इसकी सूचना गांव के पूर्व प्रधान को दी। पूर्व प्रधान ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी किए पुलिस थाना खैरी को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र का जायजा लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय सेना को भी अलर्ट किया गया। पुलिस और सेना के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए गुब्बारे को कब्जे में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में यह गुब्बारा बच्चों के सामान्य खिलौने जैसा प्रतीत हो रहा है। गुब्बारे को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा हालांकि, उस पर लिखे “PIA” और अन्य चिन्हों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सेना अधिकारियों के अनुसार, गुब्बारे को अब विस्तृत तकनीकी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा, ताकि इसके स्रोत और उद्देश्य का पता लगाया जा सके। पुलिस ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि किसी को इस तरह की कोई संदिग्ध वस्तु दिखाई दे, तो उसे छुएं नहीं और तुरंत पुलिस को सूचित करें।
केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया:50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार ने DA 58% से बढ़कर 60% किया है। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (18 अप्रैल) को दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया गया। इससे 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्र सरकार साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बदलाव करती है। इस फैसले से कर्मचारियों की मंथली सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होता है। क्या है DA और यह क्यों जरूरी है? महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला ‘कॉस्ट-ऑफ-लिविंग’ एडजस्टमेंट है। इसका कैलकुलेशन बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य मकसद बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय की सुरक्षा करना है, ताकि उनकी सैलरी महंगाई के साथ तालमेल बिठा सके। 8वें वेतन आयोग में बेसिक पे ₹69,000 करने की मांग यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने अपने ज्ञापन में 3.83 के हायर फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह मांग मानी जाती है, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹69,000 हो सकती है। संगठन ने सैलरी कैलकुलेशन के लिए परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को शामिल करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने का सुझाव भी दिया है। हालांकि आठवें वेतन आयोग के लागू होने की टाइमलाइन का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये जल्द लागू हो सकता है। लेकिन इसे पूरी तरह इम्प्लीमेंट होने में 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक DA का क्या होगा? नए वेतन आयोग के लागू होने तक महंगाई भत्ता बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में ही कैलकुलेट किया जाता रहेगा। इसे हर छह महीने में जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है। यानी, 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक महंगाई भत्ता मिलता रहेगा। आयोग आने पर मौजूदा DA को बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाएगा। यानी, अभी जो 58% DA मिल रहा है वो जीरो हो जाएगा। सैलरी-पेंशन और अलाउंस रिवाइज होगा 8वें सेंट्रल पे कमीशन का मकसद सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई की सैलरी, पेंशन और अलाउंस को रिवाइज करना है। इसमें महंगाई, एम्प्लॉई की जरूरतें और गवर्नमेंट की अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी शर्तों को मंजूरी दी थी। अब कमीशन के गठन के बाद ये अपनी सिफारिशें 18 महीने के अंदर देगा। समझिए 8वें वेतन मान का सैलरी कैलकुलेशन बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, ये फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर पर निर्भर करता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। 8वें में ये 3.83 हो सकता है। हर वेतन आयोग में DA जीरो से शुरू होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नई बेसिक सैलरी पहले से ही महंगाई को ध्यान में रखकर बढ़ाई जाती है। इसके बाद DA फिर से धीरे-धीरे बढ़ता है। अभी DA बेसिक पे का 60% है। DA के हटने से टोटल सैलरी (बेसिक + DA + HRA) में बढ़ोतरी थोड़ी कम दिख सकती है, क्योंकि 60% DA का हिस्सा हट जाएगा। उदाहरण: मान लीजिए, आप लेवल 6 पर हैं और 7वें वेतन आयोग के हिसाब से आपकी मौजूदा सैलरी है: 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट 3.83 लागू होता है, तो नई सैलरी होगी: फिटमेंट फैक्टर क्या है? ये एक मल्टीप्लायर नंबर है, जिसे मौजूदा बेसिक सैलरी से गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है। वेतन आयोग इसे महंगाई और लिविंग कॉस्ट को ध्यान में रखकर तय करता है। 8वें वेतन आयोग का फायदा किसे मिलेगा किसे नहीं राज्य अपने अलग पे कमीशन गठित करते हैं, जो संशोधन के बाद केंद्रीय सिफारिशों को अपनाते हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलता क्योंकि वे भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर रहते हैं। पिछले वेतन आयोग कब बने, कब लागू हुए? कमीशन जब सैलरी-पेंशन की सिफारिशें बनाएगा, तो ये 5 बातें ध्यान में रखेगा… सैलरी सिस्टम, पेंशन जैसे मुद्दों पर विचार करता है कमीशन सेंट्रल पे कमीशन को हर कुछ सालों में बनाया जाता है, ताकि सैलरी सिस्टम, पेंशन जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सके। ये कमीशन देखता है कि क्या बदलाव जरूरी हैं और फिर सिफारिशें देता है। आम तौर पर, इन सिफारिशों को हर दस साल बाद लागू किया जाता है। इसी पैटर्न के हिसाब से 8वें सेंट्रल पे कमीशन की सिफारिशें भी जल्द लागू होने की उम्मीद है। आठवां वेतन आयोग जल्द लागू हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह इम्प्लीमेंट होने में 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। यानी, कर्मचारियों को 17-18 महीने का एरियर एकमुश्त या किस्तों में मिलेगा। इससे 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में बढ़त रही: सोना ₹1,328 बढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम हुआ, चांदी ₹10 हजार महंगी हुई इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में बढ़त रही। सोना 1,328 रुपए बढ़कर 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 10 अप्रैल, शुक्रवार को 1.50 लाख रुपए पर था। वहीं चांदी 2.40 लाख रुपए किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 10,006 रुपए बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें…
केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया:50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार ने DA 58% से बढ़कर 60% किया है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। इस फैसले से सरकार का सालाना 6,791 करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (18 अप्रैल) को दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया गया। इससे लगभग 50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्र सरकार साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बदलाव करती है। इस फैसले से कर्मचारियों की मंथली सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होता है। क्या है DA और यह क्यों जरूरी है? महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला ‘कॉस्ट-ऑफ-लिविंग’ एडजस्टमेंट है। इसका कैलकुलेशन बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य मकसद बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय की सुरक्षा करना है, ताकि उनकी सैलरी महंगाई के साथ तालमेल बिठा सके। 8वें वेतन आयोग में बेसिक पे ₹69,000 करने की मांग यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने अपने ज्ञापन में 3.83 के हायर फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह मांग मानी जाती है, तो न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹69,000 हो सकती है। संगठन ने सैलरी कैलकुलेशन के लिए परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को शामिल करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने का सुझाव भी दिया है। हालांकि आठवें वेतन आयोग के लागू होने की टाइमलाइन का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये जल्द लागू हो सकता है। लेकिन इसे पूरी तरह इम्प्लीमेंट होने में 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक DA का क्या होगा? नए वेतन आयोग के लागू होने तक महंगाई भत्ता बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में ही कैलकुलेट किया जाता रहेगा। इसे हर छह महीने में जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है। यानी, 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक महंगाई भत्ता मिलता रहेगा। आयोग आने पर मौजूदा DA को बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाएगा। यानी, अभी जो 58% DA मिल रहा है वो जीरो हो जाएगा। सैलरी-पेंशन और अलाउंस रिवाइज होगा 8वें सेंट्रल पे कमीशन का मकसद सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई की सैलरी, पेंशन और अलाउंस को रिवाइज करना है। इसमें महंगाई, एम्प्लॉई की जरूरतें और गवर्नमेंट की अफोर्डेबिलिटी को ध्यान में रखा जाएगा। केंद्र ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी शर्तों को मंजूरी दी थी। अब कमीशन के गठन के बाद ये अपनी सिफारिशें 18 महीने के अंदर देगा। समझिए 8वें वेतन मान का सैलरी कैलकुलेशन बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, ये फिटमेंट फैक्टर और DA मर्जर पर निर्भर करता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। 8वें में ये 3.83 हो सकता है। हर वेतन आयोग में DA जीरो से शुरू होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि नई बेसिक सैलरी पहले से ही महंगाई को ध्यान में रखकर बढ़ाई जाती है। इसके बाद DA फिर से धीरे-धीरे बढ़ता है। अभी DA बेसिक पे का 60% है। DA के हटने से टोटल सैलरी (बेसिक + DA + HRA) में बढ़ोतरी थोड़ी कम दिख सकती है, क्योंकि 60% DA का हिस्सा हट जाएगा। उदाहरण: मान लीजिए, आप लेवल 6 पर हैं और 7वें वेतन आयोग के हिसाब से आपकी मौजूदा सैलरी है: 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट 3.83 लागू होता है, तो नई सैलरी होगी: फिटमेंट फैक्टर क्या है? ये एक मल्टीप्लायर नंबर है, जिसे मौजूदा बेसिक सैलरी से गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है। वेतन आयोग इसे महंगाई और लिविंग कॉस्ट को ध्यान में रखकर तय करता है। 8वें वेतन आयोग का फायदा किसे मिलेगा किसे नहीं राज्य अपने अलग पे कमीशन गठित करते हैं, जो संशोधन के बाद केंद्रीय सिफारिशों को अपनाते हैं। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों को वेतन आयोग का लाभ नहीं मिलता क्योंकि वे भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर निर्भर रहते हैं। पिछले वेतन आयोग कब बने, कब लागू हुए? कमीशन जब सैलरी-पेंशन की सिफारिशें बनाएगा, तो ये 5 बातें ध्यान में रखेगा… सैलरी सिस्टम, पेंशन जैसे मुद्दों पर विचार करता है कमीशन सेंट्रल पे कमीशन को हर कुछ सालों में बनाया जाता है, ताकि सैलरी सिस्टम, पेंशन जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सके। ये कमीशन देखता है कि क्या बदलाव जरूरी हैं और फिर सिफारिशें देता है। आम तौर पर, इन सिफारिशों को हर दस साल बाद लागू किया जाता है। इसी पैटर्न के हिसाब से 8वें सेंट्रल पे कमीशन की सिफारिशें भी जल्द लागू होने की उम्मीद है। आठवां वेतन आयोग जल्द लागू हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह इम्प्लीमेंट होने में 2028 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। यानी, कर्मचारियों को 17-18 महीने का एरियर एकमुश्त या किस्तों में मिलेगा। इससे 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में बढ़त रही: सोना ₹1,328 बढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम हुआ, चांदी ₹10 हजार महंगी हुई इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में बढ़त रही। सोना 1,328 रुपए बढ़कर 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 10 अप्रैल, शुक्रवार को 1.50 लाख रुपए पर था। वहीं चांदी 2.40 लाख रुपए किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 10,006 रुपए बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें…
बुरहानपुर में प्रदर्शनकारियों के साथ बैठे मंत्री:41 डिग्री में सिलावट और विधायक ने जमीन पर बैठकर सुनी बात; अंबेडकर का बैनर फाड़ने पर विरोध

बुरहानपुर में शनिवार को प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट के सामने समाजजनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। शाहपुर के अडगांव में डॉ. अंबेडकर का बैनर फाड़ने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से लोग नाराज थे। मंत्री सिलावट और विधायक अर्चना चिटनिस 41 डिग्री तापमान में प्रदर्शनकारियों के साथ जमीन पर बैठ गए। वर्तमान में मंत्री ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन लोग गिरफ्तारी होने तक प्रदर्शन पर अड़े हुए हैं। अंबेडकर का बैनर फाड़ने पर बवाल, 24 घंटे में नहीं हुई गिरफ्तारी जल संसाधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट शनिवार को बुरहानपुर पहुंचे थे। कलेक्ट्रेट में विकास सलाहकार समिति की बैठक और एक कार्यक्रम के बाद वे बाहर निकले। वहां बड़ी संख्या में लोग पहले से इकट्ठा थे। प्रदर्शनकारी शाहपुर के अडगांव में बाबा साहब अंबेडकर के बैनर को फाड़ने का विरोध कर रहे थे। पुलिस ने अज्ञात पर केस दर्ज कर 24 घंटे में आरोपियों को पकड़ने का आश्वासन दिया था। गिरफ्तारी नहीं होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। 41 डिग्री में जमीन पर बैठे मंत्री और विधायक, दिया आश्वासन नारेबाजी कर रहे लोगों को मनाने के लिए प्रभारी मंत्री सिलावट और बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस 41 डिग्री सेल्सियस की तेज गर्मी में उनके साथ जमीन पर बैठ गए। उन्होंने भीम आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दत्तु मेढ़े और अन्य समाजजनों को समझाया। मंत्री सिलावट ने कहा कि डॉ. अंबेडकर राष्ट्र का गौरव हैं। इस गतिविधि में जो भी लिप्त होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, भीम आर्मी ने साफ कर दिया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक वे अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश माफ नहीं करेगा प्रभारी मंत्री सिलावट कलेक्ट्रेट में नारी शक्ति वंदन अभियान के हस्ताक्षर कार्यक्रम में भी शामिल हुए। महिला आरक्षण बिल पर उन्होंने कहा कि जो लोग मां शक्ति का विरोध कर रहे हैं, उनका असली चेहरा सामने आ गया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में हो रहे इस पवित्र कार्य का विरोध करने वालों को देश और मातृ शक्ति कभी माफ नहीं कर सकती। भ्रष्टाचार की जांच होगी, मृत मछलियों पर दिए निर्देश क्रिटिकल केयर सेंटर में सामग्री खरीदी को लेकर हुए भ्रष्टाचार के आरोपों पर मंत्री ने जांच कराने की बात कही है। पिछले दिनों तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोसेस ने सीएमएचओ डॉ. आरके वर्मा पर ये आरोप लगाए थे। इसके अलावा, ताप्ती नदी के राजघाट पर तीन-चार दिनों से सैकड़ों मृत मछलियां मिलने के मामले में भी मंत्री सिलावट ने संज्ञान लिया है। उन्होंने महापौर माधुरी पटेल से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
कोई जनगणना नहीं, कोई परिसीमन नहीं: द्रमुक ने महिला आरक्षण के लिए वैकल्पिक विधेयक के साथ भाजपा का विरोध किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:18 अप्रैल, 2026, 14:24 IST प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का महिला आरक्षण पर संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया। लोकसभा की एक तस्वीर (पीटीआई) भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के संविधान (131वें संशोधन) विधेयक के संसद में बहुमत हासिल करने में असमर्थ रहने के ठीक एक दिन बाद, तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक ने इसके बजाय एक निजी सदस्य विधेयक का प्रस्ताव रखा। विधेयक का उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों की कुल संख्या और सीमाओं में किसी भी बदलाव से आरक्षण को अलग करना है। डीएमके द्वारा प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, मौजूदा 543 सीटों वाली लोकसभा में अगले चुनाव से 33 प्रतिशत आरक्षण, बिना किसी सीट वृद्धि, परिसीमन या जनगणना डेटा, नए या पुराने के। डीएमके ने विशेष रूप से महिला आरक्षण पर केंद्रित विधेयक पर बहस करने और पारित करने के लिए राज्यसभा में नोटिस दिया। डीएमके सांसद विल्सन ने लोकसभा में 543 सीटों की वर्तमान ताकत में बदलाव किए बिना, और निर्वाचन क्षेत्रों का कोई परिसीमन किए बिना या जनगणना किए बिना, अगले चुनाव से महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है। इससे पहले 2023 में, महिला कोटा मूल रूप से लगभग सभी दलों के समर्थन से पारित किया गया था; हालाँकि, विपक्ष ने सवाल उठाया कि सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर “जल्दबाजी” में परिसीमन कर रही है। परिसीमन बहस DMK विधेयक में कुल सीटों की संख्या बढ़ाए बिना और जनगणना या परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना, 2023 महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने का प्रस्ताव है। शुक्रवार को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का महिला कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में विफल हो गया क्योंकि यह आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सक्षम नहीं था। राजनीतिक गतिरोध द्रमुक के इस कदम से राजनीतिक गतिरोध तेज हो गया है, जिसके कारण विशेष संसदीय सत्र शुरू हुआ। सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर बड़े पैमाने पर परिसीमन अभ्यास के साथ महिला आरक्षण को जोड़ने के साथ-साथ लोकसभा को शुरुआत में 816 सीटों तक और भविष्य में 850 तक विस्तारित करने के लिए तीन विधेयकों के पैकेज का प्रस्ताव दिया था। विपक्ष द्वारा इन्हें खारिज करने के बाद, भाजपा की प्रतिक्रिया में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर 700 मिलियन महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया गया। यह बहस इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हो रही है। विशेष रूप से, पूरे सत्र के दौरान, विपक्षी नेताओं ने तर्क दिया कि मौजूदा 543 सीटों पर बिना किसी विवादित प्रावधान के आरक्षण लागू किया जा सकता है। सरकार ने अभी तक DMK बिल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. इसने अतीत में तर्क दिया है कि सदन का पूरी तरह से विस्तार करने से वर्तमान राजनीतिक नेताओं के हितों की रक्षा होगी, साथ ही महिलाओं के लिए अधिक स्थान भी उपलब्ध होगा। शनिवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक भी होनी है. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 18 अप्रैल, 2026, 14:18 IST समाचार राजनीति कोई जनगणना नहीं, कोई परिसीमन नहीं: द्रमुक ने महिला आरक्षण के लिए वैकल्पिक विधेयक के साथ भाजपा का विरोध किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
Green Tea Vs Black Coffee: कन्फ्यूज न हों! तेजी से वजन कम करने के लिए ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी में से कौन है बेस्ट?

Last Updated:April 18, 2026, 13:57 IST Green Tea Vs Black Coffee: वज़न घटाने और मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाने की कोशिश में, ग्रीन टी और ब्लैक कॉफ़ी दोनों को ही सेहत के लिए अहम माना जाता है. इन दोनों के बीच के सटीक अंतर को समझना आपकी फ़िटनेस के लिए बेहद फ़ायदेमंद साबित हो सकता है. Green Tea Vs Black Coffee: वज़न घटाने के सफ़र में, सही ड्रिंक्स चुनना उतना ही ज़रूरी है जितना कि सही एक्सरसाइज़ चुनना. जब मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने की बात आती है, तो ग्रीन टी और ब्लैक कॉफ़ी दो सबसे असरदार नैचुरल चीज़ों के तौर पर सामने आती हैं. हालांकि दोनों ही वज़न घटाने में मदद करती हैं, लेकिन वे अलग-अलग तरीकों से काम करती हैं. आपके फ़िटनेस लक्ष्यों के लिए कौन सा विकल्प सही रहेगा? आइए यहां जानते हैं विस्तार से… ग्रीन टी: ग्रीन टी में EGCG (एपिगैलोकैटेचिन गैलेट) नाम का एक कंपाउंड होता है, जो शरीर को फैट जलाने में मदद करता है, खासकर एक्सरसाइज़ के दौरान. इसमें कैफीन की मात्रा कम होती है और आमतौर पर इससे घबराहट या बेचैनी नहीं होती. ब्लैक कॉफी: ब्लैक कॉफी में कैफीन की मात्रा ज़्यादा होती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैफीन एनर्जी लेवल को बढ़ा सकता है और शरीर को कैलोरी ज़्यादा तेज़ी से जलाने में मदद कर सकता है. यह एक्सरसाइज़ के दौरान फिजिकल परफॉर्मेंस को भी बेहतर बना सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मेटाबॉलिज़्म और पाचन: कैफीन नैचुरल फैट को तोड़ने में मदद करता है. चूंकि ब्लैक कॉफी में ग्रीन टी की तुलना में ज़्यादा कैफीन होता है, इसलिए यह मेटाबॉलिज़्म को ज़्यादा असरदार तरीके से तेज़ कर सकती है और आराम करते समय भी कैलोरी जलाने में मदद कर सकती है. ग्रीन टी अलग तरह से काम करती है. इसमें कैफीन की मात्रा कम होती है और इसमें EGCG भी होता है, जो धीरे-धीरे पेट की चर्बी कम करने में मददगार हो सकता है. इसे रेगुलर पीना ही सफलता की कुंजी है. भूख पर कंट्रोल: ये दोनों ड्रिंक्स आपको पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकती हैं. ब्लैक कॉफी कुछ घंटों के लिए भूख को दबा सकती है; इसलिए, खाने से पहले इसे पीने से खाने की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रीन टी ब्लड शुगर लेवल को स्थिर करके लंबे समय तक वज़न कंट्रोल करने में मदद करती है. बहुत ज़्यादा कैफीन लेने से बेचैनी, घबराहट, नींद न आना और दिल की धड़कन तेज़ होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. दिन में देर से ब्लैक कॉफी पीने से नींद में खलल पड़ सकता है. ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कम होती है, जिससे यह पाचन तंत्र के लिए ज़्यादा हल्की होती है और एसिडिटी या अपच से परेशान लोगों के लिए एक सही ऑप्शन है. धीरे-धीरे और लगातार वज़न कम करने के लिए, ग्रीन टी एक बेहतरीन ऑप्शन है. अगर आप अपने मेटाबॉलिज़्म को ज़्यादा तेज़ी से बढ़ाना चाहते हैं, तो ब्लैक कॉफी ज़्यादा असरदार ऑप्शन हो सकती है. First Published : April 18, 2026, 13:54 IST
हेरा फेरी 3 फिलहाल नहीं बन रही है:अक्षय कुमार ने किया कन्फर्म; बोले- कुछ बातें ऐसी हैं, जो नहीं बता सकते

एक्टर अक्षय कुमार ने हाल ही में बताया कि फिल्म हेरा फेरी 3 फिलहाल नहीं बन रही है। यह बात अक्षय ने शुभांकर मिश्रा के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कही। इंटरव्यू में अक्षय ने माना कि इस खबर से फैंस को झटका लगा है और उन्हें खुद भी उतना ही झटका लगा था। अक्षय ने बताया कि फिल्म में देरी की वजह सिर्फ कास्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि कई और समस्याएं हैं, जिनकी वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा। एक्टर ने यह भी साफ किया कि तीनों कलाकारों के साथ आने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वेलकम टू द जंगल में वो, सुनील शेट्टी और परेश रावल एक साथ काम कर रहे हैं। कुछ बातें ऐसी हैं, जो नहीं बता सकते: अक्षय अक्षय ने आगे कहा कि कुछ बातें ऐसी हैं, जिन्हें वो कैमरे पर नहीं बता सकते। उन्होंने समझौतों और दूसरे कारणों का जिक्र किया, जो इस फिल्म को पीछे धकेल रहे हैं। हालांकि, अक्षय ने उम्मीद जताई कि जब सही समय आएगा, तब हेरा फेरी 3 जरूर बनेगी। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि उम्मीद है तब तक वे सभी बहुत बूढ़े नहीं हो जाएंगे। गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें परेश रावल का फिल्म से अलग होना भी शामिल था। हालांकि बाद में वो फिल्म से जुड़ गए। पहली फिल्म, हेरा फेरी, जिसे प्रियदर्शन ने डायरेक्ट किया था, 2000 में रिलीज हुई थी, जबकि इसके सीक्वल, फिर हेरा फेरी, जिसे नीरज वोरा ने डायरेक्ट किया था, 2006 में रिलीज हुई थी।








