पहले किया प्रेम विवाह, फिर दूसरी शादी, अब होगी FIR:इंदौर जिला कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पति के तलाक का केस किया खारिज

इंदौर जिला कोर्ट ने एक पति द्वारा पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने के मामले में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि युवक ने पहले प्रेम विवाह किया, लेकिन बाद में पारिवारिक सहमति से दूसरी शादी कर ली। जब पहली पत्नी को इसकी जानकारी मिली तो उसने आपत्ति दर्ज कराई। इसी दौरान पति ने तलाक का केस लगाया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट अधिवक्ता पवन राय के अनुसार, नंदानगर निवासी नितिन एक व्यापारी है। उसने अप्रैल 2016 में रीना नाम की महिला से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद कुछ वर्षों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन दंपती को संतान नहीं हुई। वर्ष 2018 के बाद नितिन, रीना से अलग रहने लगा। 2021 में कर ली दूसरी शादी इसी बीच वर्ष 2021 में नितिन ने सोनम से दूसरी शादी कर ली। सोनम को नितिन की पहली शादी की जानकारी थी, इसके बावजूद पारिवारिक सहमति से दोनों का विवाह हुआ। जब रीना को इसकी जानकारी मिली तो उसने आपत्ति जताई। इस दौरान नितिन ने कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन दिया, जिसकी सूचना नोटिस के माध्यम से रीना को मिली। बाद में रीना ने अधिवक्ता पवन राय के माध्यम से कोर्ट में जवाब पेश करते हुए कहा कि उसे बिना तलाक दिए ही नितिन ने दूसरी शादी की है। साथ ही यह भी बताया गया कि नितिन का एक बच्चा भी है, जबकि नितिन ने कोर्ट में दूसरी शादी से इंकार किया। कोर्ट के सामने साक्ष्य पेश किए रीना की ओर से वकीलों ने नितिन और सोनम की शादी के फोटो, बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र तथा अस्पताल व नगर निगम से संबंधित दस्तावेज जुटाकर कोर्ट में पेश किए। इन सबूतों के आधार पर यह साबित किया गया कि नितिन और सोनम ने जानकारी होने के बावजूद विवाह किया और रीना के साथ धोखाधड़ी की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने रीना के पक्ष में प्रस्तुत साक्ष्यों को सही मानते हुए नितिन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 494 के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। क्या है धारा 494 आईपीसी भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते और पहला विवाह वैध होने के बावजूद दूसरा विवाह करता है, तो इसे द्विविवाह (बिगैमी) माना जाता है। यह अपराध जमानती है और इसमें अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
स्वप्निल असनोदकर ने पहले सीजन में 311 रन बनाए:10 हजार रन बनाने वाले गोवा के पहले क्रिकेटर; एक चोट ने करियर बर्बाद किया

जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा और सूर्यकुमार यादव ऐसे नाम हैं, जो IPL में चमके और भारतीय टीम में जगह बनाई। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे, जिन्हें फैंस धीरे-धीरे भूल गए। IPL के अनसंग हीरोज सीरीज में ऐसे ही क्रिकेटर्स की स्टोरी पढ़िए… पहला नाम गोवा के स्वप्निल असनोदकर का है। स्वप्निल 2008 में पहला टाइटल जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। उन्हें पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। स्वप्निल ने कोलकाता के खिलाफ 34 गेंदों पर 60 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 1 सिक्स शामिल था। स्वप्निल ने उस सीजन के 9 मैचों में 311 रन बनाए और टीम को चैंपियन बनाया। वे वर्तमान में केरल की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच हैं। स्वप्निल असनोदकर ने दैनिक भास्कर से अपनी कहानी साझा की। उन्होंने अपने सफर, IPL की चकाचौंध और टीम से बाहर किए जाने का दर्द बताया… गोवा में फुटबॉल का माहौल, पर क्रिकेट का भूत सवार था स्वप्निल गोवा से हैं, जहां फुटबॉल सबसे लोकप्रिय खेल है। उनके पिता और चाचा क्लब लेवल पर फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे। स्वप्निल ने बताया- मेरे परिवार में पांचों भाई स्पोर्ट्स में थे। बुआ स्टेट लेवल एथलीट थीं। घर में खेल का माहौल बचपन से ही था। स्वप्निल ने बताया- मैंने टेनिस बॉल से गली क्रिकेट शुरू किया और वहीं से क्रिकेट का भूत सवार हो गया। 9वीं क्लास में लगातार तीन मैचों में तीन शतक लगाए, तब लगा कि मैं लेदर बॉल से खेल सकता हूं। पिता ने कोचिंग कैंप भेजा और वहीं से करियर बदल गया। मैच से 4 घंटे पहले शेन वॉर्न ने कहा- ‘तुम यह मैच खेल रहे हो’ 2008 के पहले सीजन को याद करते हुए स्वप्निल ने बताया कि शुरुआती चार मैचों में मौका नहीं मिला था। लेकिन शेन वॉर्न ने कहा था- कभी न कभी मौका आएगा, तैयार रहना। 1 मई 2008 को KKR के खिलाफ दोपहर 12 बजे मीटिंग थी। वॉर्न ने अचानक कहा- ‘यू आर प्लेइंग टुडे’। स्वप्निल तैयार थे। इसी मैच में उन्होंने पहली IPL फिफ्टी लगा दी और 60 रन बनाए। चैंपियन बनाने का क्रेडिट वॉर्न को दिया, ‘गोवा की तोप’ नाम मिला था राजस्थान रॉयल्स उस साल चैंपियन बनी। स्वप्निल को Goan Cannon नाम मिला। उन्होंने 9 मैचों में 2 फिफ्टी के साथ 311 रन बनाए। स्वप्निल और ग्रीम स्मिथ की ओपनिंग जोड़ी ने 418 रन जोड़े, जो सीजन की सबसे बेहतरीन जोड़ी थी। स्वप्निल ने कहा- टीम में बड़े स्टार नहीं थे, लेकिन शेन वॉर्न और डेरेन बेरी ने ऐसा माहौल बनाया कि हम सबने अपना बेस्ट दिया। पहले तीन मैच हारने के बाद हमने कमबैक किया। लक भी साथ रहा और हम चैंपियन बने। पूरा क्रेडिट वॉर्न और सपोर्ट स्टाफ को जाता है। उंगली की चोट से प्रदर्शन खराब हुआ, मौके मिलना कम हो गए पहला सीजन शानदार रहा, लेकिन दूसरे सीजन में इंजरी ने झटका दिया। साउथ अफ्रीका में IPL के दौरान फील्डिंग में उंगली में लिगामेंट टियर हो गया। 10 दिन के कैंप का फायदा नहीं मिला। बाउंस वाली पिचों पर एडजस्ट नहीं हो पाए और प्रदर्शन प्रभावित रहा। 2009 के सीजन में स्वप्निल को 8 मैचों में मौका मिला, लेकिन वे 98 रन ही बना सके। उसके बाद 2010 और 2011 के सीजन में उन्हें मौके कम मिले। स्वप्निल ने 2011 में अपना आखिरी मैच खेला। उन्होंने किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के खिलाफ 21 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में 9 गेंद पर 9 रन बनाए थे। इस पारी में एक चौका शामिल रहा। स्वप्निल ने अपने IPL करियर में कुल 20 मैच खेले और इनमें दो फिफ्टी के सहारे 423 रन बनाए। स्वप्निल ने कहा- मेरी मेहनत जारी रही, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। मैं पॉजिटिव माइंडेड हूं। लाखों लोग IPL खेलने का सपना देखते हैं, मैंने वहां जाकर अपना जलवा दिखाया। लोग आज भी 2008 की वजह से मुझे याद करते हैं। यही मेरे लिए संतोष की बात है। 10 हजार रन बनाए, फिर भी संभावितों में जगह नहीं मिली गोवा के लिए 17 साल खेलने वाले स्वप्निल ने बताया- 2017-18 में मैं तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज था। रणजी और वनडे में शतक लगाए थे, फिर भी अगले साल संभावित खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली। मैं गोवा का पहला खिलाड़ी था, जिसने सभी फॉर्मेट मिलाकर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए थे। यह फैसला एसोसिएशन का था, जिसमें मैं कुछ नहीं कर सकता था। 33 साल की उम्र में यह फैसला समझ नहीं आया, लेकिन मैंने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया। अब कोचिंग के जरिए टीम इंडिया के रडार पर हैं स्वप्निल 2019 में स्वप्निल ने खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया और कोचिंग शुरू की। उन्होंने गोवा की अंडर-23 टीम को 4 साल कोचिंग दी। नागालैंड की सीनियर टीम के बैटिंग कोच रहे, जहां टीम प्लेट ग्रुप से एलीट ग्रुप में पहुंची। स्वप्निल को BCCI के NCA असाइनमेंट भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा- क्रिकेट ने मुझे जो दिया, उसे वापस लौटाना चाहता हूं। खिलाड़ियों को अपना अनुभव शेयर करना है। मेरा लक्ष्य अंडर-19 इंडिया या उससे आगे कोचिंग करना है। मेहनत जारी रहेगी। ——————————————————————
स्वप्निल असनोदकर ने पहले सीजन में 311 रन बनाए:10 हजार रन बनाने वाले गोवा के पहले क्रिकेटर; एक चोट ने करियर बर्बाद किया

जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, रवींद्र जडेजा और सूर्यकुमार यादव ऐसे नाम हैं, जो IPL में चमके और भारतीय टीम में जगह बनाई। लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे, जिन्हें फैंस धीरे-धीरे भूल गए। IPL के अनसंग हीरोज सीरीज में ऐसे ही क्रिकेटर्स की स्टोरी पढ़िए… पहला नाम गोवा के स्वप्निल असनोदकर का है। स्वप्निल 2008 में पहला टाइटल जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा रहे। उन्हें पहले ही मैच में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। स्वप्निल ने कोलकाता के खिलाफ 34 गेंदों पर 60 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 1 सिक्स शामिल था। स्वप्निल ने उस सीजन के 9 मैचों में 311 रन बनाए और टीम को चैंपियन बनाया। वे वर्तमान में केरल की अंडर-23 टीम के मुख्य कोच हैं। स्वप्निल असनोदकर ने दैनिक भास्कर से अपनी कहानी साझा की। उन्होंने अपने सफर, IPL की चकाचौंध और टीम से बाहर किए जाने का दर्द बताया… गोवा में फुटबॉल का माहौल, पर क्रिकेट का भूत सवार था स्वप्निल गोवा से हैं, जहां फुटबॉल सबसे लोकप्रिय खेल है। उनके पिता और चाचा क्लब लेवल पर फुटबॉल और क्रिकेट खेलते थे। स्वप्निल ने बताया- मेरे परिवार में पांचों भाई स्पोर्ट्स में थे। बुआ स्टेट लेवल एथलीट थीं। घर में खेल का माहौल बचपन से ही था। स्वप्निल ने बताया- मैंने टेनिस बॉल से गली क्रिकेट शुरू किया और वहीं से क्रिकेट का भूत सवार हो गया। 9वीं क्लास में लगातार तीन मैचों में तीन शतक लगाए, तब लगा कि मैं लेदर बॉल से खेल सकता हूं। पिता ने कोचिंग कैंप भेजा और वहीं से करियर बदल गया। मैच से 4 घंटे पहले शेन वॉर्न ने कहा- ‘तुम यह मैच खेल रहे हो’ 2008 के पहले सीजन को याद करते हुए स्वप्निल ने बताया कि शुरुआती चार मैचों में मौका नहीं मिला था। लेकिन शेन वॉर्न ने कहा था- कभी न कभी मौका आएगा, तैयार रहना। 1 मई 2008 को KKR के खिलाफ दोपहर 12 बजे मीटिंग थी। वॉर्न ने अचानक कहा- ‘यू आर प्लेइंग टुडे’। स्वप्निल तैयार थे। इसी मैच में उन्होंने पहली IPL फिफ्टी लगा दी और 60 रन बनाए। चैंपियन बनाने का क्रेडिट वॉर्न को दिया, ‘गोवा की तोप’ नाम मिला था राजस्थान रॉयल्स उस साल चैंपियन बनी। स्वप्निल को Goan Cannon नाम मिला। उन्होंने 9 मैचों में 2 फिफ्टी के साथ 311 रन बनाए। स्वप्निल और ग्रीम स्मिथ की ओपनिंग जोड़ी ने 418 रन जोड़े, जो सीजन की सबसे बेहतरीन जोड़ी थी। स्वप्निल ने कहा- टीम में बड़े स्टार नहीं थे, लेकिन शेन वॉर्न और डेरेन बेरी ने ऐसा माहौल बनाया कि हम सबने अपना बेस्ट दिया। पहले तीन मैच हारने के बाद हमने कमबैक किया। लक भी साथ रहा और हम चैंपियन बने। पूरा क्रेडिट वॉर्न और सपोर्ट स्टाफ को जाता है। उंगली की चोट से प्रदर्शन खराब हुआ, मौके मिलना कम हो गए पहला सीजन शानदार रहा, लेकिन दूसरे सीजन में इंजरी ने झटका दिया। साउथ अफ्रीका में IPL के दौरान फील्डिंग में उंगली में लिगामेंट टियर हो गया। 10 दिन के कैंप का फायदा नहीं मिला। बाउंस वाली पिचों पर एडजस्ट नहीं हो पाए और प्रदर्शन प्रभावित रहा। 2009 के सीजन में स्वप्निल को 8 मैचों में मौका मिला, लेकिन वे 98 रन ही बना सके। उसके बाद 2010 और 2011 के सीजन में उन्हें मौके कम मिले। स्वप्निल ने 2011 में अपना आखिरी मैच खेला। उन्होंने किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के खिलाफ 21 अप्रैल को खेले गए मुकाबले में 9 गेंद पर 9 रन बनाए थे। इस पारी में एक चौका शामिल रहा। स्वप्निल ने अपने IPL करियर में कुल 20 मैच खेले और इनमें दो फिफ्टी के सहारे 423 रन बनाए। स्वप्निल ने कहा- मेरी मेहनत जारी रही, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। मैं पॉजिटिव माइंडेड हूं। लाखों लोग IPL खेलने का सपना देखते हैं, मैंने वहां जाकर अपना जलवा दिखाया। लोग आज भी 2008 की वजह से मुझे याद करते हैं। यही मेरे लिए संतोष की बात है। 10 हजार रन बनाए, फिर भी संभावितों में जगह नहीं मिली गोवा के लिए 17 साल खेलने वाले स्वप्निल ने बताया- 2017-18 में मैं तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज था। रणजी और वनडे में शतक लगाए थे, फिर भी अगले साल संभावित खिलाड़ियों में जगह नहीं मिली। मैं गोवा का पहला खिलाड़ी था, जिसने सभी फॉर्मेट मिलाकर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए थे। यह फैसला एसोसिएशन का था, जिसमें मैं कुछ नहीं कर सकता था। 33 साल की उम्र में यह फैसला समझ नहीं आया, लेकिन मैंने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया। अब कोचिंग के जरिए टीम इंडिया के रडार पर हैं स्वप्निल 2019 में स्वप्निल ने खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया और कोचिंग शुरू की। उन्होंने गोवा की अंडर-23 टीम को 4 साल कोचिंग दी। नागालैंड की सीनियर टीम के बैटिंग कोच रहे, जहां टीम प्लेट ग्रुप से एलीट ग्रुप में पहुंची। स्वप्निल को BCCI के NCA असाइनमेंट भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा- क्रिकेट ने मुझे जो दिया, उसे वापस लौटाना चाहता हूं। खिलाड़ियों को अपना अनुभव शेयर करना है। मेरा लक्ष्य अंडर-19 इंडिया या उससे आगे कोचिंग करना है। मेहनत जारी रहेगी। ——————————————————————
ग्वालियर में टीआई ने किया महिला से रेप:बुटीक संचालक महिला से फेसबुक पर दोस्ती, प्यार फिर किया दुष्कर्म, खुद को बताया था कुंआरा

ग्वालियर में एक इंस्पेक्टर (टीआई, पीटीएस तिघरा) के खिलाफ झांसी रोड थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत 38 वर्षीय विधवा महिला ने दर्ज कराई है। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने फेसबुक के जरिए महिला से दोस्ती की, खुद को अविवाहित बताया और शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए, जबकि वह पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता है। मामला झांसी रोड थाना क्षेत्र के हरिशंकरपुरम इलाके का है। महिला शहर की एक पॉश कॉलोनी में बुटीक संचालित करती है। उसके पति का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका है और उसका एक बच्चा भी है। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर उसकी पहचान टीआई रूपेश शर्मा से हुई। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने अपनी शादी छिपाकर महिला को भरोसे में लिया और उससे शादी करने का वादा किया। महिला के अनुसार, इसी दौरान इंस्पेक्टर उसके घर आया और शादी के नाम पर उसके साथ संबंध बनाए। जब उसने विरोध किया तो आरोपी ने शादी का आश्वासन देकर उसे शांत किया। बाद में जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाया तो इंस्पेक्टर टालमटोल करने लगा। संदेह होने पर महिला ने जानकारी जुटाई, जिसमें पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है। सच्चाई सामने आने के बाद महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने उसे धमकाया। इसके बाद महिला ने झांसी रोड थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। थाना प्रभारी ने मामले की जांच कर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। जांच के बाद रविवार देर रात करीब 12 बजे आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
इंदौर में कंपनी के कर्मचारियों ने पार्सल में की हेराफेरी:कंपनी के सीनियर एक्जीकेटिव की शिकायत पर एफआईआर

चंदन नगर थाना पुलिस ने एक कंपनी की शिकायत पर उसके ही दो कर्मचारियों के खिलाफ माल में हेराफेरी (गबन) का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों कर्मचारी लंबे समय से कंपनी को नुकसान पहुंचा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, नीरज जायसवाल, एनटेक्स ट्रांसपोर्टेशन कंपनी में लायजनिंग सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने शिकायत में बताया कि उनकी कंपनी Amazon के लिए अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर का काम करती है। कंपनी में सुपरवाइजर रहे दीपक मोहरे (निवासी पालदा) और डिलीवरी बॉय प्रवीण सिंह (निवासी जालोर, राजस्थान) सितंबर 2024 से जनवरी 2026 तक कार्यरत थे। आरोप है कि ग्राहक द्वारा पार्सल न लेने पर जो सामान वापस भेजा जाता था, उसमें दोनों कर्मचारियों ने हेराफेरी की। जब कंपनी ने पार्सल चेक किए तो उनमें मूल (ओरिजिनल) सामान नहीं मिला। इस तरह करीब 10 लाख 90 हजार रुपए का माल कंपनी को वापस नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डिलीवरी के दौरान सामान बदल देते थे और बाद में उसे ग्राहक द्वारा लौटाया गया बताकर कंपनी को धोखा देते थे। कंपनी द्वारा नोटिस देने के बाद दोनों से पूछताछ की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।
इंदौर में 12 वर्षीय छात्रा से दोस्ती के बाद रेप:जेवर और नकदी भी लेकर रख लिए; परिजनों ने पूछताछ की तब हुआ खुलासा

इंदौर की हीरानगर पुलिस ने रविवार को 12 साल की एक छात्रा से दोस्ती के बाद उसके साथ रेप के मामले में FIR दर्ज की है। आरोपी के घर पर रात में पुलिस ने दबिश दी और उसे हिरासत में ले लिया। लड़के के पिता सेल्स टैक्स में कार्यरत हैं। टीआई सुशील पटेल के मुताबिक, इलाके में रहने वाली छात्रा अपने पिता और मां के साथ रविवार रात थाने पहुंची। उसने बताया कि सेल्स टैक्स कॉलोनी निवासी आरव ने उसके साथ रेप किया। वहीं, उसे धमकाकर नकदी और जेवर भी अपने पास रख लिए। छात्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम पर दोनों की बातचीत हुई। इसके बाद आरव उससे मिलने आया और उसके साथ गलत काम किया। 9 अप्रैल को भी उसने छात्रा को दोबारा संबंध बनाने के लिए राजी किया। आरव ने छात्रा से कहा कि उसे किसी को रुपए देना है। इसके चलते उसने छात्रा के घर से जेवर और नकदी लेकर अपने पास रख लिए। छात्रा के परिजनों को जब घर पर जेवर और नकदी नहीं मिले, तो उन्होंने उससे पूछताछ की, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। हालांकि पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर छात्रा को साथ लेकर आरोपी के घर पहुंचकर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है।
10 रुपए के लिए किया बुकिंग क्लर्क को बर्खास्त:जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- विभागीय जांच निष्पक्ष होनी चाहिए; 25 साल बाद मिला न्याय

रेलवे में नौकरी के दौरान एक बुकिंग क्लर्क को सिर्फ 10 रुपए अधिक लेने के आरोप में विजिलेंस ने पकड़कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की। बुकिंग क्लर्क ने टीम के सामने अपने आपको बेकसूर करने का बहुत प्रयास किया। वह बार-बार कह रहे थे कि जिस दौरान यात्री काउंटर में टिकट लेने आया था, उस समय भीड़ बहुत थी, हो सकता है भूल हो गई। इसके बाद भी बिना सुनवाई के कार्रवाई की और रेलवे से उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। मामला जनवरी 2001 का है। बुकिंग क्लर्क नारायण नायर ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पहले केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (केट) और फिर जबलपुर हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और आखिरकार 25 साल बाद शनिवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विजिलेंस की कार्रवाई की गलत पाया। मामले पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए विजिलेंस विभाग की पूरी कार्रवाई को अवैध और नियमों के खिलाफ ठहरा दिया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच के इस फैसले पर 25 साल बाद टीटी की बहाली का रास्ता साफ हुआ है। 31 रुपए वापस करने थे, 21 रुपए लौटाए 4 जनवरी 2002 को रेलवे में पदस्थ बुकिंग क्लर्क नारायण नायर की श्रीधाम स्टेशन पर टिकट काउंटर में ड्यूटी लगी थी। इसी दौरान विजिलेंस की टीम आ गई। जांच के दौरान एक शख्स सामने आया, जिसका कहना था कि नारायण नायर को 31 रुपए वापस करने थे, पर उन्होंने 21 रुपए लौटाए। विजिलेंस टीम का कहना था कि नारायण नायर के पास 450 रुपए अतिरिक्त थे, जिस पर उनका कहना था कि यह रुपए पत्नी की दवा लाने के लिए रखे थे। विजिलेंस को मौके पर टिकट का बंडल भी मिला था, जिसको लेकर कहा गया कि वो जमीन पर पड़ा था, जिसको लेकर उन्हें जानकारी नहीं है। इसके अलावा 778 रुपए अतिरिक्त थे, जो कि बाद में सिर्फ 7 रुपए पाए गए। पहले सस्पेंड किया, फिर बर्खास्त विजिलेंस टीम ने नारायण नायर पर चार केस के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरु कर दी। जांच के दौरान नारायण नायर को दोषी पाते हुए पहले निलंबित कर दिया गया, उसके बाद 15 मार्च 2002 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नारायण नायर ने विजिलेंस की कार्रवाई के विरोध में वरिष्ठ अधिकारी सहायक मंडल रेलवे प्रबंधक के समक्ष अपील की, कोई आरोप भी सिद्ध नहीं हुआ,इसके बाद भी उन्हें वहां से राहत नहीं मिली, तो वर्ष 2002 में ही केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (CAT) में केस दायर किया। विजिलेंस की जांच में गंभीर खामियां मिलीं केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (CAT) ने मामले पर सुनवाई करते हुए 16 जुलाई 2004 को नारायण नायर को राहत देते हुए उनकी सेवा से हुई बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया। केट के आदेश को रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए 2005 में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान टीटी नारायण नायर की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी ने दलीलें रखी। लगातार कई सालों तक चले इस केस में आखिरकार अप्रैल 2026 में फैसला आया, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच सुनवाई के बाद दिए फैसले में विजिलेंस की जांच में गंभीर खामियां पाईं। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा अभियोजन की भूमिका निभाने को गलत बताया और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया जो कि अवैध माना गया है। बुकिंग क्लर्क नारायण नायर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने CAT के फैसले को सही ठहराते हुए रेलवे की अपील खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद टीटी नारायण नायर की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। उन्हें पिछले 25 सालों के अन्य लाभ भी मिल सकते हैं। छोटे आरोपों में भी न्याय के सिद्धांत का पालन जरूरी कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी मे कहा कि विभागीय जांच निष्पक्ष और नियम सम्मत होनी चाहिए। छोटे आरोपों में भी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। आर्डर में कोर्ट ने कहा कि जांच में अनेक अनियमितताएं हैं, और अधिकांश आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हुए हैं। इसलिए, न्यायालय ने यह सही माना है कि आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। इन निर्णयों में स्थापित सिद्धांतों को लागू करते हुए, यह न्यायालय न्यायाधिकरण के इस निष्कर्ष से सहमत है कि प्रतिवादी के विरुद्ध जांच प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण थी और प्राकृतिक न्याय का पालन करने में विफल रही। तदनुसार, भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के अंतर्गत प्रस्तुत याचिका खारिज की जाती है, और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के 16 जुलाई 2004 को पारित आदेश को बरकरार रखा जाता है।
थमने का नाम नहीं ले रहा वंदे मातरम् विवाद:मालिनी गौड़ बोलीं- हम ऐसे लोगों से वोट ही नहीं मांगते, आकाश विजयवर्गीय ने कहा-ऐसे लोग देशद्रोही

इंदौर में नगर निगम बजट परिषद के दौरान शुरू हुआ वंदे मातरम् का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इंदौर में बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने ऐलान किया है कि वह उन जगहों पर वोट मांगने भी नहीं जाती, जहां लोग वंदे मातरम् नहीं बोलते हैं। वहीं आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो लोग वंदेमातरम नहीं बोलते वो लोग आतंकी से कम नहीं है, ये लोग देशद्रोही हैं। बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि जो इस देश में रहेगा, उसे “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” बोलना ही होगा। यह देशभक्ति से जुड़ा विषय है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने दिवंगत नेता लखन दादा का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी यही कहते थे और वह स्वयं भी उसी विचारधारा पर चलती हैं। मुझे उनके वोट भी नहीं चाहिए जो वंदे मातरम् नहीं बोलते और भारत माता की जय नहीं बोलते। वहीं पूर्व मंत्री व विधायक ऊषा ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। ऐसे लोगों के वोट नहीं चाहिए मालिनी गौड़ ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् या भारत माता की जय बोलने से परहेज करते हैं, उनके वोट की उन्हें आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वे चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं जातीं। विधायक के इस बयान के बाद पहले से चल रहा वंदे मातरम् विवाद और तेज हो गया है। राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विवाद में आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि ये तो भाजपा का शासन, मोदी जी की सरकार है। आरएसएस जैसी संस्था है। वरना वंदे मातरम् पर आपत्ति लेने वाले लोग अवसर मिलने पर देश और समाज का बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इस देश में रहना है तो वंदे मातरम् बोलना होगा इधर, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि इस देश में रहना होगा तो वंदे मातरम् कहना होगा। इस्लाम इजाजत नहीं देता, तो ये इस्लामिक कंट्री तो है नहीं, भारत स्वतंत्र एक देश है जो संविधान के सिद्धांतों पर चलता है। तुम्हें गाड़ने की जो अनुमति मिली है वह भी भारत माता की असीम कृपा से ही मिली है, जिसकी गोद में आप समाहित होते हैं उसकी प्रार्थना करने से आपको परहेज है। भारत में रहना है तो वंदे मातरम् गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। खामनेई की मौत पर छाती पीटने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के भाई-बहन इस देश में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और सबसे ज्यादा योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं और उसके बाद इनके लोगों के भीतर इतनी राष्ट्रद्रोहिता बसी हुई है। मामले को लेकर परिवाद दायर सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने एडवोकेट आकाश शर्मा के माध्यम से जिला कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षदों ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बयान दिया कि इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ गाना प्रतिबंधित है। शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई है। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर की पार्षद रुबीना खान का वंदे मातरम् गाते VIDEO इंदौर नगर निगम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद में नया मोड़ आ गया है। जिस गीत को इस्लाम का हवाला देकर पार्षद रुबीना खान ने गाने से इनकार किया था, अब उसी को गाते हुए उनके दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो 2023-24 बजट सत्र का है, दूसरा 2026-27 का। दोनों में रुबीना वंदे मातरम् गाते और नारे लगाते दिख रही हैं।
हॉकी में उभरा MP, सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन:बेटियों के बाद बेटों ने भी रचा इतिहास, दोनों टीमों ने जीता रजत

मध्यप्रदेश हॉकी में नई ताकत बनकर उभर रहा है। रांची में आयोजित 16वीं हॉकी इंडिया सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026 में प्रदेश की महिला और पुरुष दोनों टीमों ने शानदार खेल दिखाते हुए रजत पदक अपने नाम किए। दोनों टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित रणनीति, आक्रामक खेल और बेहतरीन टीमवर्क का प्रदर्शन कर प्रदेश का मान बढ़ाया। फाइनल में महिला टीम ने झारखंड को हराया मध्यप्रदेश महिला हॉकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय बनाए रखी। फाइनल में मेजबान झारखंड के खिलाफ टीम ने 2–1 के करीबी मुकाबले में अंत तक संघर्ष किया। गीताश्री ने शुरुआती गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई और मैच के दौरान दबाव बनाए रखा। सेमीफाइनल में ओडिशा जैसी मजबूत टीम को हराकर फाइनल तक पहुंचना टीम की तैयारी और संयम का बड़ा प्रमाण रहा। युवा जोश और प्रतिभा से भरी महिला टीम टीम में महक परिहार, साजेदा बेगम, शालिनी सिंह, स्नेहा दवाड़े, मानसी, प्रियंशी केश्त्रे, सुदीप्ता, नौसीन नाज़, गीता श्री, भाविका, जागृति, आक्शा खान, सादफ खान और मुस्कान रघुवंशी सहित कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। यह टीम भविष्य की बड़ी उम्मीद के रूप में उभर रही है। पुरुष टीम ने भी दिखाया दम, आक्रामक खेल से जीता दिल मध्यप्रदेश पुरुष हॉकी टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। फाइनल में उत्तर प्रदेश के खिलाफ टीम ने 5–2 का स्कोर खड़ा कर दमदार खेल दिखाया। गाजी खान ने शुरुआती गोल कर टीम को बढ़त दिलाई, इसके बाद करण गौतम ने बढ़त को मजबूत किया। पूरी टीम ने सटीक पासिंग, तेज अटैक और शानदार तालमेल का प्रदर्शन किया। पुरुष टीम में युवा प्रतिभाओं का दमदार प्रदर्शन राजक आयुष, अंश बहुतरा (कप्तान), अवि माणिकपुरी, अली गुफरान, करण गौतम, गाजी खान, हर्षित धोते (गोलकीपर) सहित टीम के सभी खिलाड़ियों ने एकजुट होकर खेला और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खेल मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दोनों टीमों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, कोचिंग स्टाफ के मार्गदर्शन और राज्य में विकसित खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के खिलाड़ी आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी सफलताएं हासिल करेंगे।
सुबह उठते ही मुंह का स्वाद कड़वा? नजरअंदाज न करें, हो सकती है ये बड़ी बीमारी

Last Updated:April 12, 2026, 23:30 IST अगर सुबह उठते ही मुंह का स्वाद कड़वा या अजीब लगता है, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. यह आपके पाचन या लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. समय रहते ध्यान देना जरूरी है, वरना यह परेशानी बढ़ सकती है. ख़बरें फटाफट मुंह का स्वाद बिगड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सुबह उठते ही मुंह का स्वाद कड़वा, कसैला या अजीब लगना एक आम समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. यह शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. अक्सर लोग इसे छोटी समस्या समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन अगर रोज ऐसा हो रहा है तो यह पाचन तंत्र या लिवर से जुड़ी परेशानी का इशारा हो सकता है. इसलिए समय रहते इसके कारण को समझना जरूरी है. मुंह का स्वाद बिगड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे खराब पाचन, मुंह की सही सफाई न होना, ज्यादा गैस बनना या शरीर में टॉक्सिन्स का बढ़ना. जब खाना ठीक से पचता नहीं है, तो उसका असर मुंह के स्वाद पर भी पड़ता है. कई बार खट्टी डकारें आना, मुंह से बदबू आना और भूख कम लगना भी इसी वजह से होता है. इसलिए इस समस्या को सिर्फ मुंह तक सीमित न समझें, बल्कि इसे पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जोड़कर देखें. पाचन खराब होने से बदलता है स्वादजब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो खाना सही तरीके से नहीं पचता. इससे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जो मुंह के स्वाद को खराब कर देते हैं. खासकर सुबह के समय यह समस्या ज्यादा महसूस होती है. इसलिए पाचन को सही रखना बहुत जरूरी है. लिवर की समस्या भी हो सकती है कारणलिवर हमारे शरीर को डिटॉक्स करने और पाचन में मदद करने का काम करता है. अगर लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो खून की सफाई प्रभावित होती है और पाचन भी कमजोर हो जाता है. इसका असर सीधे मुंह के स्वाद पर पड़ता है. इसलिए बार-बार स्वाद बिगड़ना लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है. मुंह की सफाई न करना भी है वजहकई लोग रात में खाना खाने के बाद ठीक से ब्रश या कुल्ला नहीं करते. खासकर तला-भुना और मसालेदार खाना खाने के बाद मुंह की सफाई बहुत जरूरी होती है. अगर ऐसा नहीं किया जाए, तो बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं, जिससे मुंह का स्वाद खराब हो जाता है और बदबू भी आने लगती है. कब्ज और गैस से भी होती है समस्याअगर आपको कब्ज या गैस की समस्या है, तो इसका असर भी मुंह के स्वाद पर पड़ता है. पेट साफ न होने पर शरीर में गंदगी जमा होती है, जिससे सुबह उठते ही मुंह का स्वाद खराब और बदबूदार हो जाता है. इसलिए पेट का साफ रहना बेहद जरूरी है. ऐसे पाएं राहतइस समस्या से राहत पाने के लिए पाचन को मजबूत बनाना जरूरी है. रात में त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से पेट साफ रहता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं. इसके अलावा मीठी सौंफ खाने से भी फायदा मिलता है. यह पाचन को बेहतर बनाती है और मुंह का स्वाद भी अच्छा रखती है. साथ ही, रोजाना सही तरीके से ब्रश करना, पानी ज्यादा पीना और हेल्दी डाइट लेना भी बहुत जरूरी है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 12, 2026, 23:30 IST







