इजराइल में फिलिस्तीनी अपराधियों को 90 दिन में फांसी:अपील करने का अधिकार खत्म, मंत्रियों ने संसद में शैंपेन खोल जश्न मनाया

इजराइल की संसद (नैसेट) ने सोमवार को फिलिस्तीनी अपराधियों को सजा देने वाला बिल पास कर दिया है। इसके तहत वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों को इजराइली नागरिकों की हत्या करने या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने पर सीधे मौत की सजा दी जा सकेगी। इसमें अपील का भी कोई अधिकार नहीं होगा। सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के अंदर फांसी दी जाएगी। यह कानून राष्ट्रवादी या आतंकवादी इरादे से की गई हत्याओं पर लागू होगा। हालांकि, अदालत को विशेष कारणों के तहत उम्रकैद की सजा देने का भी अधिकार होगा। यह बिल राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इत्तमार बेन ग्विर ने आगे बढ़ाया था। बिल पास होने के बाद बेन ग्विर और दूसरे सांसदों ने संसद में ही शैंपेन की बोतल खोलकर जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “आज इजराइल खेल के नियम बदल रहा है, जो यहूदियों की हत्या करेगा, वह सांस नहीं ले सकेगा।” बेन ग्विर ने पहले धमकी दी थी कि अगर बिल पर वोट नहीं कराया गया तो उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। इजराइल में फिलिस्तीनियों और इजराइली यहूदियों के लिए अलग कानून इस बिल की मांग इजराइल के चरमपंथी दक्षिणपंथी गुट लंबे समय से करते आ रहे थे। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर मिलिट्री कानून लागू होता है। इस बिल के जरिए मिलिट्री कोर्ट के नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अब जज बिना सर्वसम्मति के भी मौत की सजा सुना सकेंगे। दूसरी ओर, इजराइली यहूदी बस्ती निवासी जो वेस्ट बैंक में रहते हैं, उनपर इजराइली सिविलियन कानून लागू होता है। इसका मतलब है कि उनका मुकदमा सामान्य इजराइली नागरिक अदालतों में चलता है। इसका नतीजा यह है कि एक ही इलाके में दो लोग एक ही तरह का अपराध करें, तो उन्हें अलग-अलग सजा दी जाएगी। इससे फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा की आशंका बढ़ जाएगी। इजराइली संगठनों ने बिल को भेदभाव वाला बताया मानवाधिकार संगठनों ने इसे नस्लीय भेदभावपूर्ण और बदला लेने वाली नीति बताया है। इस बिल का विरोध करते हुए इजराइल के मानवाधिकार और नागरिक समाज संगठनों ने कहा कि यह कानून फिलिस्तीनियों के खिलाफ नस्लीय हिंसा को बढ़ावा देंगे। संगठनों ने इसे फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने वाला और इजराइलियों को छूट देने वाला बताया। विपक्षी नेता यायर लापिद ने बिल की आलोचना करते हुए इसे हमास के सामने समर्पण बताया। उन्होंने कहा, “हम हमास जैसे नहीं हैं, हम हमास के बिल्कुल उलट हैं।” बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर बिल पास होने के तुरंत बाद इस बिल के खिलाफ इजराइल के सिविल राइट्स संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। साथ ही इसे असंवैधानिक बताते हुए खारिज करने की मांग की है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले इस बिल का विरोध किया था, लेकिन गाजा सीजफायर लागू होने के बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया और अंतिम वोट में इसका समर्थन किया। इजराइल में अब तक सिर्फ दो बार ही मौत की सजा दी गई इजराइल के पूरे इतिहास में केवल दो बार ही मौत की सजा दी गई। पहला मामला 1948 के अरब-इजराइली युद्ध के दौरान का है। इजराइली सेना के कैप्टन मेयर टोबियान्स्की को जासूसी के आरोप में एक सैन्य अदालत में दोषी ठहराया गया और उसी दिन फायरिंग स्क्वाड से गोली मारकर सजा दी गई। बाद में जांच में पता चला कि वे निर्दोष थे। 1950 के दशक में उन्हें मरणोपरांत बरी कर दिया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ फिर से दफनाया गया। दूसरा मामला 1962 का है, जब होलोकॉस्ट के प्रमुख वास्तुकार एडोल्फ आइचमैन को फांसी दी गई। 1960 में आइचमैन को इजराइली खुफिया एजेंटों ने अर्जेंटीना से पकड़ा था। यरुशलम में लंबे सार्वजनिक मुकदमे के बाद उन्हें नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया। इजराइल की सर्वोच्च अदालत ने अपील खारिज कर दी और 31 मई 1962 की रात को उन्हें यरुशलम की जेल में फांसी दी गई। इसके बाद इजराइल में मौत की सजा लगभग पूरी तरह से बंद रही। जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने बिल पर चिंता जताई इस बिल को लेकर जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि यह कानून इजराइल के लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र पहले ही वेस्ट बैंक के सैन्य अदालतों की आलोचना कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीनियों के लिए सही जांच प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का उल्लंघन है। यह कानून 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में शामिल आतंकियों पर लागू नहीं होगा, इसके लिए सरकार एक अलग ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव कर रही है। —————————- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी: ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल की:कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण के दंड आदेश अमान्य, ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जरूरी; बिजली कंपनी का फैसला रद्द

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि बिना ठोस कारण और स्पष्ट तर्क के पारित दंड आदेश कानूनन मान्य नहीं होंगे। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिए गए दंड आदेश को निरस्त कर दिया। मामला कनिष्ठ अभियंता मोहन शर्मा से जुड़ा था, जो बड़ौदा वितरण केंद्र में पदस्थ थे। उन पर ट्रांसफार्मर खराब होने के मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए 1 दिसंबर 2010 को दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का दंड दिया गया था। बाद में अपील में इसे घटाकर एक वेतनवृद्धि रोकने तक सीमित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मोहन शर्मा को रोकी गई वेतनवृद्धियों का पूरा लाभ मिलेगा। ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ होना जरूरी हाईकोर्ट ने पाया कि मूल दंड आदेश और अपीलीय आदेश, दोनों में ही पर्याप्त कारणों का अभाव था। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई से जुड़े आदेश “स्पीकिंग ऑर्डर” होने चाहिए, यानी उनमें तथ्यों, सबूतों और कर्मचारी के जवाब को खारिज करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। विभागीय प्रक्रिया पर सवाल पीठ ने यह भी माना कि विभाग ने न तो याचिकाकर्ता के जवाब का समुचित मूल्यांकन किया और न ही अपने निर्णय के पीछे के ठोस कारण बताए। इस तरह की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…
PCB ने गेंदबाज नसीम शाह पर जुर्माना लगाया:मुख्यमंत्री मरियम नवाज पर कमेंट किया था; बोर्ड ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज नसीम शाह पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई मरियम नवाज की आलोचना वाले ट्वीट के बाद हुई, जिसे नसीम के अकाउंट से पोस्ट होने के कुछ देर बाद डिलीट कर दिया गया। PCB ने इसे सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों का उल्लंघन माना। क्या था पूरा मामला विवाद की शुरुआत PSL के पहले मैच के बाद हुई। PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने पहले घोषणा की थी कि ईंधन बचाने और पश्चिमी एशिया संकट के कारण टूर्नामेंट बिना दर्शकों के होगा। लेकिन मैच के दौरान पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज गद्दाफी स्टेडियम पहुंचीं और खिलाड़ियों से मिलीं। नसीम शाह के अकाउंट से PCB के एक पोस्ट को कोट-ट्वीट करते हुए लिखा गया ‘उन्हें लॉर्ड्स की रानी की तरह ट्रीट क्यों किया जा रहा है?’ नसीम ने मीडिया टीम की गलती बताई विवादित ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही उसे डिलीट कर दिया गया। इसके बाद नसीम ने एक और पोस्ट कर सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हो गया था। सोमवार को उन्होंने एक नया बयान जारी कर कहा, ‘मेरे अकाउंट से पिछला पोस्ट मेरी मैनेजमेंट टीम ने किया था, वह मेरे विचार नहीं हैं। मैं अपने प्लेटफॉर्म की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं और सोशल मीडिया मैनेजर को हटा दिया है। मैं इस गलती के लिए माफी मांगता हूं।’ PCB ने मैनेजर को किया ब्लैकलिस्ट PCB की तीन सदस्यीय अनुशासन समिति ने इस मामले में सुनवाई की। नसीम ने बिना शर्त माफी मांगी और अपने सोशल मीडिया मैनेजर को बर्खास्त कर दिया। PCB ने न केवल नसीम पर भारी जुर्माना लगाया, बल्कि उनके मैनेजर को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया है। अब वह मैनेजर PCB के दायरे में आने वाले किसी भी अन्य खिलाड़ी के साथ काम नहीं कर पाएगा। पहले भी एक्शन हो चुका है PCB इससे पहले भी खिलाड़ियों के राजनीतिक बयान पर सख्त कार्रवाई कर चुका है। पिछले साल आमेर जमाल पर भी एक नारे को लेकर 10 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन नसीम शाह पर लगा जुर्माना उससे करीब 16 गुना ज्यादा है। PSL में सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल नसीम शाह इस सीजन PSL ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक रहे। उन्हें रावलपिंडी टीम ने करीब 8.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपए में खरीदा था। ———————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… वैभव की राजस्थान के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के लिए दूसरी सबसे तेज फिफ्टी लगाकर टीम को जीत दिलाई। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराया। पूरी खबर…
पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 13 सीटों की चौथी लिस्ट, इस सीट से है परिवर्तनशील विधानसभा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने दलितों की चौथी सूची जारी की है, जिसमें 13 आदिवासियों के नाम शामिल हैं. (31 मार्च, 2026) मंगलवार को जारी की गई सूची में शामिल की गई कास्ट के लिए रेलवे बागदा सीट से पार्टी ने सोमा ठाकुर को इंटीरियरवार बनाया है तो वहीं दूसरी ओर नाटा बाबा से गिरजा शंकर रॉय को पार्टिकलवार घोषित किया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने दूसरी सूची में घोषित एक पार्टिवार को भी बदला है। बीजेपी ने मयनागुड़ी के पूर्व में घोषित खिलाड़ी को बदल दिया है। पार्टी की नई सूची के अनुसार सीट से आशुतोष वर्मा नाता बबी से गिरिजा शंकर रॉय, बागदा से सोमा ठाकुर और मगराहाट पूर्व से उत्तम कुमारिक को अपना अयोग्य घोषित किया गया है। फाल्टा से देबांगशु पांडा को टिकटबीजेपी की इस चौथी लिस्ट में फाल्टा से देबांगशु पांडा को टिकट दिया गया है तो वहीं सोनारपुर उत्तर से देबाशीष पाठक और भालू दक्षिण से श्यामल हाटी को फाइनैंस बनाया गया है। इसके अलावा पंचला सीट से रंजन कुमार पॉल, चांदीपुर से पीयूष कांति दास, गार्बेटा से प्रदीप लोढ़ा, मेमरी सीट से मानव गुला और बाराबनी सीट से अरिजीत रॉय बीजेपी के उम्मीदवार बने हैं। भाजपा ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी की, मयनागुड़ी निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवार की जगह भी ली। pic.twitter.com/m36vrRsTQA – एएनआई (@ANI) 31 मार्च 2026 5 अप्रैल को बंगाल में पीएम मोदी की पहली रैलीइस बार बंगाल चुनाव में बीजेपी और शेयर बाजार के बीच टक्कर है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए भाजपा पूरी कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पूरे देश में बीजेपी के बड़े नेता बंगाल का दौरा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अप्रैल को बंगाल के कूज बिहार में रैली को बताएंगे। बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर मोदी की ये पहली रैली होगी। बंगाल में विलय करने को लेकर बीजेपी की योजना है कि पहले 2 नामांकन चरण के लिए नामांकन किया जाए जिसके बाद 9 अप्रैल से पूरे राज्य में चुनाव प्रचार किया जाए और तेज किया जाए। बीजेपी के लिए बिहार का विशेष महत्व है क्योंकि 2021 में बीजेपी ने वहां 9 से 8 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. ये भी पढ़ें ईरान के युद्ध के बीच रुपये को मारा ‘लकवा’, राहुल बोले- पीएम ने देश के भविष्य का अनुमान लगाया (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)उम्मीदवार सूची(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)उम्मीदवार(टी)आवेदन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)टीएमसी
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कैसे ‘स्ट्रीट फाइटर’ ममता बनर्जी ने अपनी ‘दीदी’ शक्ति का इस्तेमाल किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 09:50 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: जैसे-जैसे राज्य 2026 विधानसभा चुनावों के करीब पहुंच रहा है, बनर्जी को अपने राजनीतिक करियर की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक का सामना करना पड़ रहा है। “दीदी” के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध बनाया है। (एएफपी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: साधारण सफेद साड़ी और रबर की चप्पल पहने ममता बनर्जी ने लंबे समय से भारतीय राजनीति में एक बाहरी व्यक्ति की छवि बनाई है। दशकों से, वह बाहरी व्यक्ति सिस्टम के सबसे टिकाऊ शक्ति केंद्रों में से एक बन गया है, जिसने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया है और एक प्रमुख विपक्षी आवाज के रूप में एक राष्ट्रीय भूमिका निभाई है। जैसा कि राजनीतिक विश्लेषक और इतिहासकार संजय कुमार अक्सर कहते हैं, उनका उदय “एक ऐसे नेता का एक दुर्लभ उदाहरण है जिसने संस्थागत समर्थन के बजाय लगभग पूरी तरह से सड़क पर लामबंदी से सत्ता बनाई”। स्ट्रीट पावर से पावर सेंटर तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में बनर्जी का प्रारंभिक राजनीतिक जीवन आंदोलन और दृश्यता से चिह्नित था। उन्होंने उस समय पश्चिम बंगाल में तत्कालीन प्रभुत्वशाली वाम मोर्चे का मुकाबला करने के लिए ख्याति अर्जित की, जब कुछ ही लोगों ने ऐसा करने का साहस किया था। यह भी पढ़ें | वह वोट देती है, वह निर्णय लेती है: कैसे महिलाएं चुपचाप बंगाल का चुनाव चला रही हैं 1998 में कांग्रेस छोड़ने और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाने का उनका निर्णय एक जुआ था जो न केवल बनर्जी के करियर के लिए बल्कि राज्य के लिए भी एक निर्णायक क्षण साबित होगा। सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ के विद्वानों सहित कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, बनर्जी की सफलता स्थानीय शिकायतों को एक निरंतर राजनीतिक आंदोलन में परिवर्तित करने में निहित है। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सिंगुर और नंदीग्राम विरोध प्रदर्शन उनके राजनीतिक करियर के निर्णायक क्षण बन गए। सीएसडीएस-आधारित विश्लेषक ने कहा, “ये सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं थे, ये राजनीतिक मोड़ थे।” “ममता बनर्जी किसानों के गुस्से को शासन बदलने वाली ताकत में बदलने में कामयाब रहीं।” 2011 में, उन्होंने वाम मोर्चे के 34 वर्षों के शासन को समाप्त कर दिया – एक ऐसा परिणाम जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। ‘दीदी’ होना बनर्जी का व्यक्तित्व उनकी राजनीति के केंद्र में है। “दीदी” के नाम से मशहूर उन्होंने मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक संबंध बनाया है। उनकी व्यक्तिगत मितव्ययिता की छवि आकस्मिक नहीं, राजनीतिक है। जैसा कि राजनीतिक टिप्पणीकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने कहा है, “उनकी सादगी उनका सबसे मजबूत राजनीतिक संदेश है। यह अभिजात्य राजनीति और मजबूत पार्टी संरचनाओं दोनों के साथ एक विरोधाभास पैदा करती है।” साथ ही, आलोचकों का तर्क है कि उनकी शासन शैली अत्यधिक केंद्रीकृत है, जिसमें शक्ति उनके कार्यालय के आसपास केंद्रित है। कल्याण, पहचान और नियंत्रण बनर्जी का शासन मॉडल राजनीतिक संदेश के साथ कल्याण विस्तार को जोड़ता है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों और ग्रामीण गरीबों को लक्षित करने वाली कल्याणकारी योजनाएं बनर्जी की राजनीतिक रणनीति के प्रमुख तत्व रहे हैं। सीएसडीएस जैसे थिंक टैंक द्वारा उद्धृत डेटा और फील्ड रिसर्च से संकेत मिलता है कि इन योजनाओं ने बनर्जी को मतदाताओं के बीच वफादारी हासिल करने में मदद की है। राजनीतिक वैज्ञानिक मिलन वैष्णव ने कहा, “उन्होंने वह बनाया है जिसे आप ‘कल्याण-समर्थित राजनीतिक गठबंधन’ कह सकते हैं।” “यह सिर्फ पहचान की राजनीति नहीं है; यह वितरण प्लस पहचान है।” राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएँ हाल के दिनों में बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख आलोचकों में से एक बनकर उभरी हैं और उन्होंने खुद को विपक्षी राजनीति की धुरी के रूप में स्थापित किया है। भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने के उनके प्रयास पूरी तरह से सफल नहीं रहे हैं, लेकिन उनकी दृढ़ता ने यह सुनिश्चित किया है कि वह भारत के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनी रहें। राजनीतिक विश्लेषक सुहास पल्शिकर ने कहा, “ममता बनर्जी केंद्रीय प्रभुत्व के लिए क्षेत्रीय प्रतिरोध के एक मॉडल का प्रतिनिधित्व करती हैं।” “लेकिन उस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाना कहीं अधिक जटिल है।” पश्चिम बंगाल से परे उनकी पार्टी के विस्तार प्रयासों के अब तक सीमित परिणाम मिले हैं, जो क्षेत्रीय प्रभुत्व को राष्ट्रीय प्रभाव में बदलने की चुनौती को रेखांकित करता है। इस मॉडल ने उन्हें 2021 के पश्चिम बंगाल चुनावों में भारतीय जनता पार्टी द्वारा पेश की गई तीव्र चुनौती का सामना करने में मदद की, जहां उन्होंने हाई-वोल्टेज अभियान के बावजूद निर्णायक जीत हासिल की। विवाद और आलोचना बनर्जी के कार्यकाल को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी सरकार को बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में जांच का सामना करना पड़ा है, विशेष रूप से स्कूल भर्ती घोटाला, जिसके कारण पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी हुई। कानून और व्यवस्था भी आलोचना का एक आवर्ती क्षेत्र रहा है। बीरभूम हिंसा, जहां स्थानीय राजनीतिक झड़प के बाद कई लोग मारे गए थे, 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव के बाद की हिंसा और आरजी कर मामले जैसी घटनाओं को विरोधियों द्वारा राजनीतिक असहिष्णुता और कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण के सबूत के रूप में उद्धृत किया गया है। बनर्जी पर असहमति को रोकने के आरोप भी लगे हैं। नागरिक समाज और विपक्षी दलों के वर्गों सहित आलोचकों ने ऐसे मामलों की ओर इशारा किया है जहां विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित थे या जहां राजनीतिक विरोधियों ने डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। विश्लेषकों का कहना है कि उनकी राजनीतिक शैली प्रभावी होने के साथ-साथ ध्रुवीकरण भी कर सकती है। कोलकाता स्थित एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, ”वह टकराव में पनपती है।” “लेकिन वही दृष्टिकोण आम सहमति बनाना कठिन बना सकता है।” फिर भी, संकटों से निपटने की उनकी क्षमता उल्लेखनीय बनी हुई है। बार-बार, बनर्जी राजनीतिक क्षति को रोकने और अपने मूल समर्थन आधार को बनाए रखने में कामयाब रही हैं। आगे का रास्ता जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल 2026 के विधानसभा चुनावों के करीब आ रहा है, बनर्जी को अपने राजनीतिक करियर की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक का सामना करना पड़ रहा है। एक दशक से अधिक समय तक राज्य में अपना दबदबा बनाए रखने के बाद, अब उनका मुकाबला न केवल सत्ता विरोधी लहर से है, बल्कि 2021 की हार
सतना में नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाया:महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने जेल भेजा

सतना में एक नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस ने एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोलगवां थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि बीते 11 फरवरी को एक 17 वर्षीय नाबालिग ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पिता की सूचना पर मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पिंटू डोहर उर्फ पुरुषोत्तम (25 वर्ष) और लल्ली वर्मा (21 वर्ष) काफी समय से नाबालिग को परेशान कर रहे थे। वहीं, मोहल्ले में रहने वाली लक्षमिनिया चौधरी (43 वर्ष) उसके बारे में आपत्तिजनक बातें कहकर उसे बदनाम कर रही थी। पुलिस ने तीन पर केस दर्ज किया इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया। सोमवार सुबह तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
हिमाचल विधानसभा में गूंजेगा एपल इम्पोर्ट ड्यूटी का मामला:3 लाख परिवारों की रोजी पर संकट, केंद्र ने अमेरिका-न्यूजीलैंड-EU के लिए शुल्क घटाया

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली सेब इंडस्ट्री पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से मंडरा रहे संकट का मुद्दा आज विधानसभा में उठेगा। ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में की गई कटौती का मामला सदन में उठाने जा रहे हैं। यह मामला प्रदेश की 5500 करोड़ रुपए की सेब आर्थिकी और लगभग 3 लाख बागवान परिवारों की आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। दरअसल, केंद्र सरकार ने अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन (EU) के लिए 20 प्रतिशत कर दी है। इम्पोर्ट ड्यूटी कम होने से अब विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में उपलब्ध होगा। इससे हिमाचल के साथ साथ जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर भी संकट खड़ा हो गया है। हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह होगा प्रभावित कुलदीप राठौर ने बताया कि वाशिंगटन एपल के भारतीय बाजार में आने से हिमाचल का प्रीमियम सेब बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे न केवल प्रीमियम सेब के दाम गिरेंगे, बल्कि कोल्ड स्टोर में रखे सेब पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। अभी अमेरिका-न्यूजीलैंड और EU के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई गई गई है। अब इनकी आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव डालेंगे। मोदी ने किया था इम्पोर्ट ड्यूटी 100% का वादा राठौर ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का भरोसा दिया था। हकीकत में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बजाय कम की जा रही है। इससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि सदन में यह मामला उठाकर केंद्र सरकार से इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध जताएंगे और यह फैसला वापस लेने की मांग की जाएगी। हिमाचल के बागवान सचिवालय का घेराव कर चुके बता दें कि हिमाचल के बागवान इस फैसले के खिलाफ दो महीने पहले सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों का आरोप है कि केंद्र सरकार आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग देशों के लिए इसे कम कर रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इस वजह से बागवान ज्यादा चिंतित बागवानों की चिंता की एक बड़ी वजह उत्पादन लागत और उत्पादकता में अंतर भी है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होता है, जबकि अमेरिका, न्यूजीलैंड और चीन जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है। वहीं, हिमाचल में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब उत्पादन की लागत करीब 27 रुपए आती है। ऐसे में बागवानों को लाभ तभी मिल पाता है, जब उनका सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का बनाएंगे दबाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और EU को दी गई रियायतों के बाद अब अन्य देश भी भारत पर आयात शुल्क कम करने का दबाव बना सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में विदेशी सेब की हिस्सेदारी बढ़ेगी और स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी।
लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग:36 हजार फीट ऊंचाई पर पायलट को धुआं महसूस हुआ; पैसेंजरों ने मास्क लगाए

लखनऊ में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। सोमवार शाम फ्लाइट पश्चिम बंगाल के बागडोगरा से दिल्ली जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट यूपी के अंबेडकरनगर के ऊपर थी, तभी पायलट के केबिन में धुआं महसूस हुआ। उस समय विमान 36 हजार फीट की ऊंचाई पर था। पायलट ने धुआं महसूस होते ही लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे कॉल किया। मेडे कॉल के बाद यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क उपलब्ध करा दिए गए। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति लेकर विमान को शाम 5:17 बजे सुरक्षित लैंड कराया। तब से फ्लाइट लखनऊ के टर्मिनल-3 पर खड़ी है। फ्लाइट में 148 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। सभी सुरक्षित हैं। कई यात्रियों को दूसरी फ्लाइट्स से दिल्ली भेज दिया गया, जबकि कुछ को होटल में ठहराया गया है। सिक्योरिटी और टेक्निकल टीमें फ्लाइट में जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में धुएं या आग का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। ‘मेडे कॉल’ के साथ ही ऑक्सीजन मास्क खुल गए सूत्रों के अनुसार, पायलटों को केबिन के एवियोनिक पैनलों (कॉकपिट के इलेक्ट्रिक पैनल) से धुआं निकलने की आशंका हुई। पायलट ने ‘मेडे कॉल’ किया। इसके साथ ही फ्लाइट में लगे ऑक्सीजन मास्क अपने आप खुल गए। केबिन क्रू ने यात्रियों को मास्क इस्तेमाल करने का तरीका बताया, जिसके बाद यात्रियों ने मास्क लगा लिए। यात्री कर रहे कंपनी से शिकायत फ्लाइट में सवार कई यात्री सोशल मीडिया पर कंपनी से शिकायत कर रहे हैं। हेमरॉन माइकल नाम के एक यात्री ने लिखा- मैं बागडोगरा से दिल्ली जा रही फ्लाइट IX-1523 में यात्रा कर रहा था। तकनीकी समस्या के कारण विमान को लखनऊ में उतार दिया गया। पिछले ढाई घंटे से कोई संशोधित टिकट नहीं दिया गया है। मुझे सुबह 6:30 बजे तक दिल्ली पहुंचना था, लेकिन अब 7:23 बज चुके हैं। अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।” मेडे कॉल क्या होता है, जानिए MAYDAY शब्द फ्रेंच शब्द ‘m’aider’ से लिया गया है। इसका मतलब है ‘help me’ यानी ‘मुझे बचाओ’। MAYDAY कॉल आमतौर पर रेडियो के माध्यम से ATC या आसपास के अन्य विमानों को भेजा जाता है। इस सिग्नल का उपयोग तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए किया जाता है, ताकि इमरजेंसी से निपटा जा सके और समय पर मदद मिल सके। अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…
यूरिक एसिड के मरीज क्या खाएं और क्या न खाएं? डाइटिशियन ने बताई फूड लिस्ट, तुरंत कर लें चेक

Last Updated:March 31, 2026, 08:15 IST Tips To Control Uric Acid: यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन के टूटने से बनता है. इस वजह से हाई यूरिक एसिड के मरीजों को प्यूरीन वाले फूड्स अवॉइड करने की सलाह दी जाती है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार रेड मीट, सीफूड, बीयर और मीठी ड्रिंक्स यूरिक एसिड के स्तर को तेजी से बढ़ाती हैं, इसलिए इनका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए. यूरिक एसिड के मरीजों को रेड मीट और सीफूड से दूरी बना लेनी चाहिए. Best Diet To Control Uric Acid: आजकल यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है. खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान के कारण शरीर में यूरिक एसिड बढ़ रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जब हमारे शरीर में प्यूरीन नामक तत्व टूटता है, तो यूरिक एसिड बनता है. सामान्य स्थिति में किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो यह जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है, जिससे जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन और गाउट जैसी बीमारियां पैदा हो जाती हैं. दवा के साथ सही डाइट लेने से यूरिक एसिड की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. यूरिक एसिड के मरीज क्या न खाएं? नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि यूरिक एसिड के मरीजों को सबसे पहले उन चीजों से दूरी बनानी चाहिए, जिनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है. इसमें रेड मीट, ऑर्गन मीट और सीफूड शामिल हैं. अगर आप चाहें, तो कुछ सप्ताह के लिए नॉन वेज से ही दूरी बना लें. इसके अलावा मीठी ड्रिंक्स जैसे सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फ्रूट जूस यूरिक एसिड के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं. शराब और बीयर का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह यूरिक एसिड के उत्सर्जन को रोक देती है. जंक फूड और ट्रांस फैट वाले बेकरी प्रोडक्ट्स से भी परहेज करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. किन फूड्स का सेवन फायदेमंद? डाइटिशियन ने बताया कि यूरिक एसिड को कम करने के लिए फाइबर से भरपूर डाइट लेनी चाहिए. ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और हरी सब्जियां बेहतरीन विकल्प हैं. हालांकि पालक और मशरूम से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा, नींबू, कीवी और आंवला यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं. चेरी और जामुन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल जोड़ों की सूजन कम करने में सहायक होते हैं. लो-फैट डेयरी उत्पाद जैसे स्किम्ड मिल्क और दही भी सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं. 8-10 गिलास पानी पीना भी जरूरी एक्सपर्ट की मानें तो यूरिक एसिड कंट्रोल करने में पानी अहम भूमिका निभाता है. यूरिक एसिड के मरीजों को दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए. पर्याप्त पानी पीने से किडनी बेहतर तरीके से यूरिक एसिड को डाइल्यूट कर पाती है और उसे पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है. नारियल पानी और बिना चीनी वाला नींबू पानी भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने और यूरिक एसिड के स्तर को सामान्य बनाए रखने में बहुत मदद करते हैं. इसके अलावा रोज कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या पैदल चलना वजन को कंट्रोल करता है और यूरिक एसिड भी कम होता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 31, 2026, 08:15 IST






