Wednesday, 08 Jul 2026 | 01:10 AM

Trending :

EXCLUSIVE

ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल की:कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण के दंड आदेश अमान्य, ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जरूरी; बिजली कंपनी का फैसला रद्द

ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल की:कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण के दंड आदेश अमान्य, ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जरूरी; बिजली कंपनी का फैसला रद्द

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि बिना ठोस कारण और स्पष्ट तर्क के पारित दंड आदेश कानूनन मान्य नहीं होंगे। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिए गए दंड आदेश को निरस्त कर दिया। मामला कनिष्ठ अभियंता मोहन शर्मा से जुड़ा था, जो बड़ौदा वितरण केंद्र में पदस्थ थे। उन पर ट्रांसफार्मर खराब होने के मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए 1 दिसंबर 2010 को दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का दंड दिया गया था। बाद में अपील में इसे घटाकर एक वेतनवृद्धि रोकने तक सीमित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मोहन शर्मा को रोकी गई वेतनवृद्धियों का पूरा लाभ मिलेगा। ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ होना जरूरी हाईकोर्ट ने पाया कि मूल दंड आदेश और अपीलीय आदेश, दोनों में ही पर्याप्त कारणों का अभाव था। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई से जुड़े आदेश “स्पीकिंग ऑर्डर” होने चाहिए, यानी उनमें तथ्यों, सबूतों और कर्मचारी के जवाब को खारिज करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। विभागीय प्रक्रिया पर सवाल पीठ ने यह भी माना कि विभाग ने न तो याचिकाकर्ता के जवाब का समुचित मूल्यांकन किया और न ही अपने निर्णय के पीछे के ठोस कारण बताए। इस तरह की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
MP Board 10th 12th Result Declared

April 15, 2026/
11:52 am

उज्जैन7 मिनट पहले कॉपी लिंक उज्जैन में 12वीं कक्षा के आर्ट्स संकाय में ज्योति यादव ने 97% अंक हासिल किए...

Prime Minister Narendra Modi in West Bengal's Bankura. (ANI)

April 19, 2026/
12:06 pm

आखरी अपडेट:19 अप्रैल, 2026, 12:06 IST पीएम मोदी ने टीएमसी पर संसद में महिला आरक्षण के लिए संवैधानिक संशोधन का...

तस्वीर का विवरण

May 7, 2026/
11:36 pm

सामग्री: 1 कप बासमती चावल, 1 छोटी लौकी (कद्दूकस हुई), 1 प्याज स्ट्रॉबेरी कटा, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा सा...

रिटायर्ड डीएसपी पर दर्ज केस निरस्त करने की मांग:मंदसौर में सौंपा ज्ञापन; पन्ना में सीट बेल्ट विवाद को गंभीर अपराध बनाने का आरोप

April 13, 2026/
3:35 pm

मध्य प्रदेश पुलिस पेंशनर्स संघ के संस्थापक एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह परिहार (सेवानिवृत्त टीआई) के नेतृत्व में मंदसौर...

शादी के 10 साल बाद पिता बने सूर्यकुमार यादव:पत्नी देविशा ने बेटी को जन्म दिया; RCB के खिलाफ मैच में खेलना तय नहीं

May 7, 2026/
6:00 pm

भारतीय टी-20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी देविशा ने बेटी को जन्म दिया है।...

टीवीके नेता अधव अर्जुन ने स्कूल्सके को सार ढांचे पर कहा- स्टालिन ने अपनी बहन कनिमोजी करुणानिधि को किनारे कर दिया

April 6, 2026/
8:37 am

तमिलगा वेत्र्री कजगम (टीवीके) के चुनाव अभियान के प्रमुख अधव अर्जुन ने रविवार को तमिल के मुख्यमंत्री एम.के. स्टाल पर...

राजनीति

ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल की:कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण के दंड आदेश अमान्य, ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जरूरी; बिजली कंपनी का फैसला रद्द

ग्वालियर हाईकोर्ट ने रोकी गई वेतनवृद्धि बहाल की:कोर्ट ने कहा- बिना ठोस कारण के दंड आदेश अमान्य, ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ जरूरी; बिजली कंपनी का फैसला रद्द

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि बिना ठोस कारण और स्पष्ट तर्क के पारित दंड आदेश कानूनन मान्य नहीं होंगे। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिए गए दंड आदेश को निरस्त कर दिया। मामला कनिष्ठ अभियंता मोहन शर्मा से जुड़ा था, जो बड़ौदा वितरण केंद्र में पदस्थ थे। उन पर ट्रांसफार्मर खराब होने के मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए 1 दिसंबर 2010 को दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का दंड दिया गया था। बाद में अपील में इसे घटाकर एक वेतनवृद्धि रोकने तक सीमित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मोहन शर्मा को रोकी गई वेतनवृद्धियों का पूरा लाभ मिलेगा। ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ होना जरूरी हाईकोर्ट ने पाया कि मूल दंड आदेश और अपीलीय आदेश, दोनों में ही पर्याप्त कारणों का अभाव था। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई से जुड़े आदेश “स्पीकिंग ऑर्डर” होने चाहिए, यानी उनमें तथ्यों, सबूतों और कर्मचारी के जवाब को खारिज करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। विभागीय प्रक्रिया पर सवाल पीठ ने यह भी माना कि विभाग ने न तो याचिकाकर्ता के जवाब का समुचित मूल्यांकन किया और न ही अपने निर्णय के पीछे के ठोस कारण बताए। इस तरह की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.