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पेट गैस का इलाज: पेट की गैस का ‘इमरजेंसी’ इलाज, डॉक्टर ने दी सलाह, ये पेय पदार्थ ही मिनटों में लें आराम

पेट गैस का इलाज: पेट की गैस का 'इमरजेंसी' इलाज, डॉक्टर ने दी सलाह, ये पेय पदार्थ ही मिनटों में लें आराम

30 मार्च 2026 को 20:29 IST पर अपडेट किया गया पेट गैस के उपाय: यहां देखें भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान के कारण ब्लोटिंग या पेट में गैस रुकना एक आम समस्या बन गई है। कई बार ऐसा होता है कि गैस शरीर से बाहर नहीं निकल पाती, सीने में जलन, पेट में भारीपन और कमजोरी दिखाई देती है। अगर आप भी इस अटकी हुई गैस से परेशान हैं, तो ये कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्लोटिंग(टी)पेट गैस उपचार(टी)गैस निकालने का सबसे तेज़ तरीका(टी)गर्म पानी पीने से गैस से राहत(टी)पेट में बहुत अधिक गैस का इलाज कैसे करें(टी)वयस्कों के लिए गैस से राहत(टी)पेट से गैस को तुरंत कैसे दूर करें दवा(टी)क्या गर्म पानी पीने से गैस से राहत मिलती है(टी)पेट गैस के लिए आपातकालीन उपचार

सिवनी में भूकंप से बचाव के लिए ट्रेनिंग:एसडीईआरएफ ने कहा- आपदा के वक्त झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें

सिवनी में भूकंप से बचाव के लिए ट्रेनिंग:एसडीईआरएफ ने कहा- आपदा के वक्त झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें

सिवनी में सोमवार, 30 मार्च को जिला आपदा प्रबंधन की ओर से भूकंप से बचाव और तैयारी को लेकर एक दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया। सरकारी कर्मचारियों, स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स को मुसीबत के समय जान बचाने के तरीके सिखाए गए। होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीम ने बताया कि भूकंप आने पर घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए। ट्रेनिंग में मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया। भूकंप के दौरान सुरक्षा कैसे करें इस दौरान “Drop, Cover, Hold” तकनीक सिखाई गई—झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें। भारी सामान को दीवार से सटाकर फिक्स रखना और टॉर्च, दवाइयां, सूखा खाना जैसी जरूरी चीजों की एक इमरजेंसी किट तैयार रखना। अगर आप घर से बाहर हैं, तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर किसी खुले मैदान में चले जाएं। घर बनाते समय ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करें जिससे वह भूकंप के झटके झेल सके। घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक इलाज देने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीके भी सिखाए गए। लाइव डेमो और प्रदर्शनी ट्रेनिंग के दौरान टीम ने एक नकली अभ्यास (मॉक ड्रिल) करके दिखाया। इसमें दिखाया गया कि ऊंची बिल्डिंग में फंसे घायल व्यक्ति को रस्सी और औजारों की मदद से सुरक्षित कैसे नीचे लाया जाता है। इसके अलावा आग बुझाने वाले सिलेंडर को चलाने का सही तरीका भी बताया गया। जागरूकता ही बचाव है कार्यक्रम के आखिर में आपदा के समय काम आने वाले मशीनों और औजारों की प्रदर्शनी लगाई गई। जानकारों ने बताया कि बिजली गिरने, सांप के काटने या आग लगने जैसी घटनाओं में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। इस पूरी ट्रेनिंग का मकसद लोगों और सरकारी स्टाफ को इतना तैयार करना है कि किसी भी मुसीबत के समय कम से कम नुकसान हो और लोगों की जान बचाई जा सके।

पन्ना की सकरिया हवाई पट्टी पर भीषण आग:आग बुझाते समय फायरमैन घायल; साथियों ने पहुंचाया अस्पताल

पन्ना की सकरिया हवाई पट्टी पर भीषण आग:आग बुझाते समय फायरमैन घायल; साथियों ने पहुंचाया अस्पताल

पन्ना में नेशनल हाईवे 39 स्थित सकरिया हवाई पट्टी के पास सोमवार शाम आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि लपटें और धुएं का गुबार दूर से दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने पर नगर पालिका की दमकल टीमें आग बुझाने मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने का प्रयास जारी था। इसी दौरान, धाम मोहल्ला निवासी फायरमैन रविंद्र प्रताप सिंह (30) फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर चढ़कर आग बुझाने में लगे थे। तभी अचानक एक तेज लपट उठी, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। साथियों ने पहुंचाया अस्पताल इस हादसे में रविंद्र प्रताप सिंह के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। उनके साथी जितेंद्र यादव (चालक), प्रमोद रैकवार (फायरमैन) और उत्तम सोनकर (चालक) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल रविंद्र को उसी फायर ब्रिगेड वाहन से पन्ना के जिला चिकित्सालय पहुंचाया। रविंद्र प्रताप सिंह, जो स्वर्गीय रणमत सिंह के पुत्र हैं, फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद शहर में इस हादसे और फायरमैन के प्रयासों की चर्चा हो रही है।

रोज के खाने को हेल्दी कैसे बनाएं? पकाते वक्त क्या गलतियां न करें, एक्सपर्ट से जानें कुकिंग से जुड़ी 5 बातें

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Healthy Cooking Hacks: अधिकतर लोग इस बात पर काफी ध्यान देते हैं कि वे क्या खा रहे हैं, लेकिन इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि उन चीजों को कैसे पका रहे हैं. खाने-पीने की चीजों को पकाने का तरीका सही होगा, तो शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिल सकेंगे. न्यूट्रिशनिस्ट का मानना है कि गलत तरीके से खाना पकाने से सब्जियों और अनाज के 50% से 70% तक पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं. एक हेल्दी मील का मतलब सिर्फ सलाद खाना नहीं है, बल्कि खाना पकाने की उन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना है. कुकिंग से जुड़ी वे 5 बातें जानते हैं, जो आपके रोज के खाने को हेल्दी बना सकती हैं. यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि खाना पकाने में सबसे बड़ी गलती तेल को उसके स्मोकिंग पॉइंट से ज्यादा गर्म करना है. जब तेल से धुआं निकलने लगता है, तो वह जहरीले तत्व छोड़ने लगता है और उसके अच्छे फैट नष्ट हो जाते हैं. कुकिंग के लिए सरसों का तेल, मूंगफली का तेल या घी का उपयोग करें, क्योंकि इनका स्मोकिंग पॉइंट अधिक होता है. एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि यह सेहत के लिए खतरनाक होता है. डाइटिशियन ने बताया कि अक्सर लोग सब्जियों को काटने के बाद धोते हैं, जो पोषण के लिहाज से एक बड़ी गलती है. सब्जियों में विटामिन B और विटामिन C जैसे वॉटर सॉल्यूबल विटामिन होते हैं. अगर आप काटने के बाद सब्जियां धोते हैं, तो ये जरूरी पोषक तत्व पानी के साथ बह जाते हैं. हमेशा सब्जियों को पहले अच्छी तरह धो लें और उसके बाद ही काटें. इसके अलावा सब्जियों को बहुत छोटे टुकड़ों में काटने से भी बचें, क्योंकि हवा के संपर्क में आने से उनके एंटीऑक्सीडेंट्स कम हो जाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक तेज आंच पर खाना पकाने से खाने का स्वाद तो जल्दी आ जाता है, लेकिन उसके एंजाइम्स और विटामिन्स जल जाते हैं. हेल्दी कुकिंग के लिए स्टीमिंग, स्टिर-फ्राइंग या धीमी आंच पर ढंककर पकाना सबसे अच्छा माना जाता है. प्रेशर कुकर का उपयोग दालों और सख्त अनाज के लिए तो ठीक है, लेकिन हरी सब्जियों को खुले बर्तन में या हल्के भाप में पकाना बेहतर है ताकि उनका रंग और क्लोरोफिल बरकरार रहे. मसाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन और काली मिर्च के गुण तब सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं, जब उन्हें सही तापमान पर डाला जाए. मसालों को बहुत ज्यादा देर तक तेल में भूनने से उनके तेल उड़ जाते हैं. एक्सपर्ट का सुझाव है कि मसालों को खाना पकने के बीच में या अंत में डालें, ताकि उनके स्वास्थ्य लाभ शरीर को मिल सकें. नमक का इस्तेमाल भी अंत में करना बेहतर है, ताकि आयोडीन की मात्रा बनी रहे. आपको जानकर हैरानी होगी कि आधुनिक नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाली टेफ्लॉन कोटिंग अधिक गर्म होने पर सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. इसकी जगह पारंपरिक लोहे की कढ़ाई या मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है, जो एनीमिया से बचाता है. मिट्टी के बर्तन खाने के pH लेवल को बनाए रखते हैं और खाने की पौष्टिकता को 100% तक सुरक्षित रखते हैं. एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग कम से कम करें, क्योंकि यह शरीर में जमा होकर नुकसान पहुंचा सकता है.

धुरंधर जैसी स्पाई थ्रिलर ट्रेंड में ‘डफर’ का टीजर-पोस्टर जारी:मुख्य किरदार का चेहरा छिपा, सस्पेंस और लीड रोल ने अटकलें बढ़ाईं

धुरंधर जैसी स्पाई थ्रिलर ट्रेंड में ‘डफर’ का टीजर-पोस्टर जारी:मुख्य किरदार का चेहरा छिपा, सस्पेंस और लीड रोल ने अटकलें बढ़ाईं

धुरंधर जैसी ग्रेट लेयर्ड स्पाई थ्रिलर फिल्मों के ट्रेंड के बाद, अब बॉलीवुड में एक नई थ्रिलर की लहर देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में एलीफेंटा फिल्म्स ने अपनी पहली फिल्म ‘डफर’ का टीजर पोस्टर रिलीज किया है, जिसने रिलीज होते ही दर्शकों में उत्सुकता और सस्पेंस दोनों बढ़ा दिए हैं। पोस्टर में मुख्य किरदार का चेहरा पूरी तरह से छिपा हुआ है, जिससे फिल्म के रहस्य और बढ़ गए हैं। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, लीड रोल के लिए शाहिद कपूर और जॉन अब्राहम जैसे नाम चर्चा में हैं, हालांकि मेकर्स ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। डफर को पारंपरिक स्पाई थ्रिलर से अलग बताते हुए मेकर्स ने इसे लेयर्ड और सस्पेंस से भरपूर कहानी के रूप में पेश किया है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि किरदार की पहचान और उसकी परतें धीरे-धीरे सामने आएंगी, ठीक उसी तरह जैसे धुरंधर ने दर्शकों को हर मोड़ पर चौंकाया था। प्रोड्यूसर कोमल वर्मा का कहना है, “हमने इस स्तर पर सीमित जानकारी साझा करने का फैसला किया है। हमारा मकसद है कि दर्शक फिल्म के रहस्य के साथ खुद को जोड़ें। कई बार जो नहीं दिखाया जाता, वही ज्यादा प्रभाव छोड़ता है।” फिल्म का निर्देशन अवॉर्ड-विनिंग फिल्ममेकर नकुल देव कर रहे हैं, जो अपनी डिटेल्ड और लेयर्ड स्टोरीटेलिंग के लिए जाने जाते हैं। लेखन और क्रिएटिव डायरेक्शन सुमन दिव्या संभाल रही हैं। डफर का पोस्टर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में लॉन्च किया गया, और मेकर्स ने बताया कि आने वाले समय में कास्ट और किरदारों से जुड़ी जानकारी चरणबद्ध तरीके से सामने आएगी। धुरंधर की तरह, ‘डफर’ का सबसे बड़ा हथियार इसका सस्पेंस है। मुख्य किरदार का चेहरा अब तक सामने नहीं आया है, और यही रहस्य फिल्म की चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दर्शकों की निगाहें अब लीड एक्टर के आधिकारिक खुलासे पर टिकी हैं, जो इस प्रोजेक्ट की दिशा तय करेगा। एलीफेंटा फिल्म्स ने यह भी घोषणा की है कि ‘डफर’ के अलावा कंपनी पांच और प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिसमें विभिन्न फॉर्मेट और विषयों की स्पाई और थ्रिलर शैली की फिल्मों को आगे बढ़ाया जाएगा।

शिवपुरी में गर्लफ्रेंड को भगाने पहुंचे प्रेमी की पीट-पीटकर हत्या:परिजनों ने घर में बंधक बनाकर रात भर मारा, आज होनी थी लड़की की सगाई

शिवपुरी में गर्लफ्रेंड को भगाने पहुंचे प्रेमी की पीट-पीटकर हत्या:परिजनों ने घर में बंधक बनाकर रात भर मारा, आज होनी थी लड़की की सगाई

शिवपुरी के कोलारस कस्बे में अपनी गर्लफ्रेंड को घर से भगाकर ले जाने पहुंचे एक युवक की परिजनों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसका शव गांव के पास नाले में पड़ा मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों के बीच चल रहा था अफेयर रन्नौद थाना क्षेत्र के नेगमा गांव का रहने वाला 26 वर्षीय अर्जुन पाल का कोलारस की 20 वर्षीय युवती के साथ अफेयर चल रहा था। दोनों के परिवारों को इस संबंध की जानकारी थी। लेकिन अलग-अलग समाज के होने के कारण लड़की के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे और शादी के लिए तैयार नहीं थे। आज ही होनी थी लड़की की सगाई बताया जा रहा है कि लड़की अपने प्रेमी अर्जुन से शादी करना चाहती थी और इस बात पर अड़ी हुई थी लेकिन परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। सोमवार को उसकी सगाई होने वाली थी। इस बात की जानकारी लड़की ने फोन पर अर्जुन को दी थी। भागने की बनाई थी योजना जिसके बाद दोनों ने मिलकर घर से भाग जाने की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत अर्जुन रविवार देर शाम कोलारस पहुंचा। उसने अपने रिश्तेदार कल्ला पाल से मदद मांगी, जो कोलारस में एक फार्म हाउस पर रहकर खेती करता था। रविवार रात करीब 1 बजे अर्जुन और कल्ला, लड़की के घर के पास खेत और हाईवे किनारे पहुंच गए। लड़की को वहीं आना था, ताकि दोनों वहां से भाग सकें। लेकिन इस योजना की जानकारी लड़की के परिजनों को लग गई। लड़की के आने की जगह उसके परिजन मौके पर पहुंच गए और दोनों युवकों को पकड़ लिया। परिजनों ने कल्ला पाल को थप्पड़ मारे और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद कल्ला किसी तरह मौके से भाग निकला लेकिन अर्जुन को पकड़कर परिजन अपने घर ले गए। बंधक बनाकर बेरहमी से की मारपीट घर ले जाकर अर्जुन को बंधक बना लिया गया और उसके साथ जमकर मारपीट की गई। लगातार पिटाई के चलते अर्जुन की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद परिजनों ने सबूत छिपाने के लिए अर्जुन के शव को खेत से करीब 100 मीटर दूर नाले में फेंक दिया। सुबह ग्रामीणों ने देखा शव सोमवार सुबह ग्रामीणों ने नाले में एक शव पड़ा देखा, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान की, जिसमें मृतक अर्जुन पाल निकला। बताया गया है कि सुबह लड़की का दादा खुद थाने पहुंचा और अर्जुन के साथ मारपीट की जानकारी दी। इस मामले में कल्ला पाल की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया है। पांच लोगों पर एफआईआर कोलारस थाना प्रभारी गब्बर सिंह गुर्जर के अनुसार, लड़की के पिता, दादा और तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

हिमाचल में CAG रिपोर्ट ने खोली वित्तीय गड़बड़ियों की पोल:HPU में अयोग्य टीचर भर्ती, रिसर्च-वर्क घटा; सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

हिमाचल में CAG रिपोर्ट ने खोली वित्तीय गड़बड़ियों की पोल:HPU में अयोग्य टीचर भर्ती, रिसर्च-वर्क घटा; सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। रिपोर्ट में फंड के उपयोग में गड़बड़ियां, परियोजनाओं में देरी, राजस्व वसूली में कमी, अव्यवस्थित वित्तीय नियंत्रण और कई विभागों में अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। खनन, सिंचाई, आपदा राहत, विश्वविद्यालय और वन विभाग तक फैली इन खामियों ने शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि 2024-25 में खर्च की गई बड़ी धनराशि का पूरा हिसाब स्पष्ट नहीं है। कई विभागों ने यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट समय पर जमा नहीं किए। इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से गंभीर चूक माना गया। CAG ने पाया कि कई विभागों ने आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं किया और कुछ मामलों में बिना स्वीकृति के खर्च किया गया। खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया का पालन न होने के मामले भी सामने आए हैं। इससे सरकारी खर्च की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। CAG ने 2024-25 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई है। राजस्व विभाग में गड़बड़ी जयराम सरकार में 2019-20 में आपदा फंड में भी गड़बड़ी SDRF और NDRF फंड के उपयोग में भी बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। 2019-20 में केंद्र सरकार ने ₹61.07 करोड़ रोक लिए थे, क्योंकि राज्य ने SDRF फंड का दुरुपयोग किया था। इसके बावजूद 2019-23 के दौरान भी यह स्थिति जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार, ₹254.73 करोड़ की NDRF सहायता जारी ही नहीं हो सकी। क्योंकि राज्य के पास पहले से ही SDRF का बड़ा बैलेंस पड़ा था। इससे राहत कार्यों में 1 से 2 साल तक की देरी हुई। इसके अलावा ₹122.27 करोड़ राशि नियमों के अनुसार निवेश करने के बजाय सेविंग अकाउंट में पड़ी रही, जिससे ब्याज का नुकसान हुआ। कई जगह नियमों के खिलाफ ₹11.76 करोड़ के कार्य कर दिए गए, जैसे सामान्य मरम्मत और नए निर्माण, जो आपदा राहत के दायरे में नहीं आते। आपदा प्रबंधन सिस्टम कमजोर आपदा प्रबंधन सिस्टम भी कमजोर पाया गया। राज्य आपदा योजना अपडेट नहीं हुई, जिला योजनाओं को मंजूरी नहीं मिली और कई जगह आपदा प्रबंधन टीमें बनी ही नहीं। SDRF में स्टाफ की कमी भी सामने आई, जहां 326 पदों में से केवल 193 ही भरे गए। इसके अलावा 9,449 कार्यों (₹172.47 करोड़) का डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया और बड़ी संख्या में उपयोग प्रमाण पत्र लंबित पाए गए। वन विभाग में अनियमितताएं CAMPA फंड में ₹1.33 करोड़ की संभावित कमी वन विभाग की कार्यप्रणाली पर CAG की रिपोर्ट में सवाल उठे हैं। फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट (FCA) के तहत शिमला स्थित नोडल अधिकारी के रिकॉर्ड की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके अलावा एक अन्य मामले में वन भूमि पर मौजूद पौधों को वन घनत्व की गणना में शामिल नहीं किया गया। इस वजह से CAMPA (कंपनसेटरी एफॉरस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग ऑथोरिटी) फंड के आकलन में कमी की आशंका जताई गई है। इन गड़बड़ियों के कारण करीब ₹1.33 करोड़ की राशि की कम वसूली होने की संभावना है। CAG ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए वन विभाग की प्रक्रियाओं और आकलन प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत बताई है। खनन सेक्टर में बड़ी गड़बड़ियां CAG रिपोर्ट में उद्योग विभाग के तहत खनन सेक्टर की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। 2018-19 से 2022-23 के दौरान राज्य में 40 हजार से अधिक अवैध खनन के मामले सामने आए, जिनमें अकेले 2022-23 में ही 8,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए। खनन विभाग ने 5 साल तक एक्शन प्लान नहीं बनाया ऑडिट में पाया गया कि खनन विभाग ने पांच साल तक वार्षिक कार्ययोजना ही तैयार नहीं की, जिससे निरीक्षण, रॉयल्टी वसूली और परियोजनाओं की निगरानी प्रभावित हुई। राजस्व वसूली में भी खामियां सामने आई हैं। जांच के दौरान 27 खदानों में ₹1.81 करोड़ की रॉयल्टी कम वसूली पाई गई। इसके अलावा, ₹74.81 लाख डेड रेंट और ₹7.27 लाख सरफेस रेंट भी समय पर वसूल नहीं किया गया। जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र बेहद कमजोर पाया गया। कई जिलों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम, फ्लाइंग स्क्वॉड और टास्क फोर्स तक नहीं बनाई गई, जिससे अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका।

कटनी पीजी कॉलेज में छात्राओं को फेल करने की धमकी:अतिरिक्त फीस वसूली का विरोध किया, स्टूडेंट्स ने थाने में की शिकायत

कटनी पीजी कॉलेज में छात्राओं को फेल करने की धमकी:अतिरिक्त फीस वसूली का विरोध किया, स्टूडेंट्स ने थाने में की शिकायत

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ में स्थित श्री द्वारका प्रसाद आर्ट्स एंड साइंस पीजी कॉलेज (DPCT) की छात्राओं ने कॉलेज मैनेजमेंट पर ज्यादा फीस वसूलने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें फेल करने की धमकी दी जा रही है। सोमवार को इस मामले में पीड़ित छात्राओं ने विजयराघवगढ़ थाने में शिकायत की है। कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा भूमि पाठक ने अपनी सहेलियों खुशबू भगत, ईशू तिवारी और श्वेता के साथ मिलकर पुलिस को लिखित आवेदन दिया है। छात्राओं ने बताया कि उन्होंने साल 2024 में कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन उस वक्त स्टाफ ने फीस को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी थी। आरोप है कि छात्राओं से 8 से 10 हजार रुपए तक की फीस लेकर रसीदें थमा दी गईं। अतिरिक्त फीस का दबाव शिकायत में कहा गया है कि अब कॉलेज मैनेजमेंट बिना किसी ठोस वजह या कागज के 1,000 रुपए एक्स्ट्रा मांग रहा है। जब छात्राओं ने इस फालतू खर्चे का विरोध किया, तो कॉलेज प्रशासन उन पर दबाव बनाने लगा। फेल करने की धमकी छात्राओं का आरोप है कि उन्हें डराया जा रहा है कि अगर पैसे नहीं दिए, तो परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा और एग्जाम फॉर्म भी नहीं भरने देंगे। छात्राओं के मुताबिक, कॉलेज के इस डर की वजह से कई छात्र पहले ही यह एक्स्ट्रा पैसे जमा कर चुके हैं। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। कॉलेज प्रबंधन ने नहीं दिया कोई जवाब इस मामले में कॉलेज का पक्ष जानने के लिए जब कॉलेज प्राचार्य और संचालक दोनों से ही फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। थाना प्रभारी बोले- शिकायत मिली है विजयराघवगढ़ थाना प्रभारी रितेश शर्मा ने बताया कि छात्राओं की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में ले लिया है और आरोपों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। ​विजयराघवगढ़ एसडीएम विवेक गुप्ता ने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है। अगर शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

महिला के शरीर में कितने अंडे होते हैं? आजकल 30 साल में ही महिलाओं अंडों का रिजर्व क्यों कम होने लगता? न्यूट्रिशन ने बताई सच्ची बात

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Last Updated:March 30, 2026, 16:37 IST Why Fertility Decline: आज से सिर्फ 2 दशक पहले तक महिलाएं 40 साल की उम्र तक आराम से कंसीव कर लेती थी. मुश्किल से ही किसी महिला को इसके लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता था लेकिन आजकल 30 साल के बाद तेजी से महिलाओं में फर्टिलिटी या प्रजनन क्षमता कम होने लगती है और अधिकांश महिलाओं को आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर वह क्या कारण है कि 30 साल की उम्र से ही महिलाओं में फर्टिलिटी कम होने लगती है. एक महिला के जीवनकाल में कुल कितने अंडों का रिजर्व होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं. महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व का क्या मतलब. Why Fertility Decline: महिला का शरीर प्रकृति की कारीगरी का नायाब नमूना है. इसमें इतनी कारीगरी है कि इसे अब तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है. लेकिन कुतरत में हस्तक्षेप की वजह से महिलाओं का बायलॉजिकल चक्र कमजोर पड़ने लगा है. महज 15 से 20 साल पहले तक 40 साल की उम्र तक महिलाओं को कंसीव करने में शायद ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन आज 30 साल क्रॉस करते ही महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अधिकांश महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर ऐसा क्यों होता कि महिलाओं में अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. महिलाओं कितने अंडों का रिजर्व होताआइए पहले ये जानते हैं कि एक महिला के शरीर में कितने अंडों का रिजर्व होता है. पहले तो यह जानकर आपको हैरानी होगी कि जन्म के बाद महिला के शरीर में एक भी नया अंडा नहीं बनता. जो भी अंडा होता है वह जन्म से पहले मां के पेट में ही बन जाता है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक जब मादा भ्रुण मां के गर्भ में होता है तब दो अंडाणु बनता है. इन्हीं अंडाणु में अंडा बनता है और मादा भ्रुण एक दो महीने का होता है तभी अंडा बनना शुरू हो जाता है. गर्भ में ही महिला के शरीर में 60 लाख अंडे बन जाते हैं. इसके बाद से तेजी से इनकी संख्या घटती जाती है. जन्म के समय महिला के शरीर में 10 से 20 लाख अंडों का रिजर्व रहता है. हर दिन यह रिजर्व घटता जाता है. प्यूबर्टी यानी पहला पीरियड आते ही अंडों की संख्या घटकर 3 से 4 लाख तक रह जाती है. अब अंडों का रिजर्व एकदम सीमित हो जाता है. हर महीने पीरियड्स आने से पहले सिर्फ 1 अंडा परिपक्व होकर कंसीव के लिए तैयार होता है और इसी अंडे से अगर शुक्राणु को मिलन हो गया तो यह भ्रुण बनता है. अगर भ्रुण नहीं बना तो 28 दिनों के बाद इसका विखंडन हो जाता है और यही पीरियड्स के दौरान निकल जाता है. पीरियड शुरू होने के समय जो अंडे रिजर्व में रहता है उनमें से हर महीने करीब 1000 परिपक्व नहीं होता है और वह मर जाता है. इस तरह एक महिला के जीवन काल में 450 से 500 पीरियड्स आते हैं और हर महीने सिर्फ 1 अंडे मैच्योर होता है. लेकिन आजकल इसी रिजर्व में कमी आने लगी है. आखिर इसका क्या कारण है. क्यों घटने लगा है अंडों का रिजर्व न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे सोशल मीडिया पर बताती है कि कई शोध हुए हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ साल पहले तक महिलाओं को 40 साल की उम्र तक कंसीव करने में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन आजकल 30 साल होते ही महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं होने लगी है. उनका ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. इसके वैसे तो कई कारण है लेकिन इसके लिए लाइफस्टाइल के साथ-साथ पर्यावरण भी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अब फर्टिलिटी सिर्फ उम्र पर नहीं बल्कि शरीर की कोशिकाओं की सेहत और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है. आज भारत में करीब 10–15% दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं और शहरों में 35 साल से कम उम्र की महिलाएं भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं. ये कारण हैं जिम्मेदार आजकल कम उम्र से महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो रही है. इसके कारण प्रीडायबिटीज हो जाता है. वहीं ओवरी की बीमारी पीसीओसी बढ़ रही हैं जिससे ओव्यूलेशन और अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. देर रात तक जागना और ज्यादा स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन बिगड़ता है. मेलोटोनिन हार्मोन के कम होने से अंडों की सेहत कमजोर होती है. प्लास्टिक, प्रदूषण और हॉर्मोन को प्रभावित करने वाले केमिकल्स शरीर के सामान्य हार्मोन संतुलन को खराब करते हैं. प्रोसेस्ड खाना जैसे कि पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद फूड, फास्ट फूड, मोमोज, नूडल्स आदि से इंफ्लामेशन बढ़ता है. इससे भी ज्यादा परेशानी तनाव से है. तनाव से पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती हैं, जिससे ओवरी पर असर पड़ता है. कई महिलाएं कैरियर को प्राथमिकता देते हुए गर्भधारण में देरी करती हैं, लेकिन समय रहते अपनी सेहत (जैसे मेटाबॉलिक या थायरॉयड) की जांच नहीं करातीं. फिर क्या करना चाहिए कि कंसीव में दिक्कत न हो हर वयस्क महिला को हर साल नियमित रूप से कुछ टेस्ट कराना चाहिए. इनमें फास्टिंग इंसुलिन, HbA1c, विटामिन D, थायरॉयड और AMH, ओविरयन रिजर्व टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल आदि की जांच प्रमुख करें. अगर किसी तरह की दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर से इसका इलाज कराएं. प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें. प्लास्टिक फर्टिलिटी पर असर डाल सकता है. इसकी जगह स्टील जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं. सही तरह से कंसीव करने के लिए मांसपेशियां को मजबूत बनाना जरूरी है. मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए. साथ ही पौष्टिक फूड भी जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज से ओवरऑल हेल्थ सुधरती है. आंत की सेहत का ध्यान रखें, इससे सूजन कम होती है. वहीं हार्मोन संतुलित रहते हैं और फर्टिलिटी बेहतर होती है. इसके लिए आपको रोज हरी पत्तीदार सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, फल, सीड्स आदि का सेवन करें. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मारी, युवक की मौत:दतिया-भांडेर रोड पर हादसा; माता-पिता घायल, लुहार वाली माता के दर्शन को जा रहे थे

ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मारी, युवक की मौत:दतिया-भांडेर रोड पर हादसा; माता-पिता घायल, लुहार वाली माता के दर्शन को जा रहे थे

दतिया में भांडेर थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक सड़क हादसे में 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई।जबकि उसके माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा दतिया-भांडेर रोड पर उस समय हुआ, जब एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक को टक्कर मार दी। मृतक की पहचान संदीप अहिरवार (20) के रूप में हुई है। घायल पिता राकेश अहिरवार और मां भारती अहिरवार हैं। जो मूल रूप से शिवपुरी जिले के राजपुरदयाल गांव के निवासी हैं और वर्तमान में दतिया की सिद्धार्थ कॉलोनी में रह रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पूरा परिवार बाइक से भांडेर स्थित लुहार वाली माता के दर्शन करने जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में ट्रैक्टर और बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया।जहां डॉक्टरों ने संदीप को मृत घोषित कर दिया। वहीं पिता राकेश की हालत गंभीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया है, जबकि मां भारती का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना जा रहा है।