बार-बार याचिका लगाने पर पटवारी पर 10 हजार का जुर्माना:हाईकोर्ट ने कहा- आपराधिक मामले में बरी होने से नौकरी बहाल नहीं होती

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक पटवारी की याचिका खारिज कर दिया है। बार-बार याचिका लगाकर न्यायालय का समय बर्बाद करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में गलत एन्ट्री कर दस्तावेज से छेड़छाड़ के मामले में बर्खास्त किए गए पटवारी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आपधारिक मामले में बरी होने का मतलब यह नहीं है कि विभागीय कार्रवाई स्वत: समाप्त हो जाती है और कर्मचारी को सेवा में बहाल करने का अधिकार स्वत: नहीं मिलता है। कोर्ट ने बार-बार याचिका लगाने पर भी नाराजगी जाहिर की है। साल 2016 में बर्खास्त हुआ था पटवारी जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने पटवारी विश्राम सिंह कुशवाह द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को सही ठहराया। याचिकाकर्ता पटवारी विश्राम सिंह को वर्ष 2016 में राजस्व अभिलेख में गलत नाम दर्ज करने का आरोप था। पटवारी जिला शिवपुरी में पदस्थ था और वहीं के एसडीओ, शिवपुरी ने विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसी मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरण में वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट से पटवारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था, जिसके आधार पर उसने पुनः सेवा में बहाली की मांग की थी। कोर्ट ने कहा- विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा की प्रकृति अलग-अलग कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दोनों अलग-अलग प्रकृति की कार्रवाई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय दंड अपने आप समाप्त नहीं होता, विशेषकर तब, जब बरी होना संदेह का लाभ मिलने के कारण हुआ हो। बार-बार याचिका पर कोर्ट ने जताई नाराजगी कोर्ट ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता बार-बार अलग-अलग याचिकाएं दायर कर एक ही राहत मांगता रहा, जबकि पहले की याचिका खारिज हो चुकी थी। इसे न्यायालय ने रचनात्मक पूर्व न्याय के सिद्धांत के विपरीत बताते हुए याचिका को अव्यवहार्य माना। साथ ही यह भी कहा गया कि बर्खास्तगी आदेश को कई वर्ष बाद चुनौती देना अनुचित देरी है।
शरीर में विटामिन-डी की कमी बढ़ा सकती है थायरॉइड कैंसर का खतरा? एक्सपर्ट ने बताया सच

Last Updated:March 16, 2026, 23:26 IST आजकल Vitamin D की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है. कई रिसर्च में यह सवाल उठाया गया है कि क्या कम Vitamin D का स्तर Thyroid Cancer के खतरे को बढ़ा सकता है. इस विषय पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि Vitamin D और Thyroid हेल्थ के बीच गहरा संबंध हो सकता है. Vitamin D की कमी Thyroid से जुड़ी. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में विटामिन-डी की कमी एक बड़ी हेल्थ समस्या बनती जा रही है. ज्यादातर लोग दिनभर घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. विटामिन-डी को अक्सर “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से सूरज की रोशनी से शरीर में बनता है. लेकिन जब शरीर में इसका स्तर कम हो जाता है, तो यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ सकता है. हाल के वर्षों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या विटामिन-डी की कमी थायरॉइड से जुड़ी गंभीर बीमारियों, यहां तक कि थायरॉइड कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकती है. बोरीवली के एचसीजी कैंसर सेंटर के सीनियर डॉक्टर डॉ. यश माथुर का कहना है कि, थायरॉइड शरीर की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हार्मोन बनाकर मेटाबॉलिज्म, एनर्जी और शरीर के कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करती है. जब थायरॉइड ठीक से काम नहीं करता तो शरीर में कई तरह की परेशानियां शुरू हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि विटामिन-डी का शरीर के इम्यून सिस्टम और हार्मोन संतुलन से गहरा संबंध होता है. यही कारण है कि इसकी कमी कई हार्मोनल समस्याओं से जुड़ सकती है. कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि जिन लोगों को थायरॉइड कैंसर होता है, उनमें अक्सर विटामिन-डी का स्तर कम पाया जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन-डी शरीर की कोशिकाओं के विकास और इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है. जब इसकी मात्रा कम होती है तो शरीर में सूजन और इम्यून असंतुलन बढ़ सकता है, जो कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि विटामिन-डी की कमी सीधे तौर पर थायरॉइड कैंसर का कारण नहीं मानी जाती. लेकिन यह कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकती है जो Thyroid से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा दें. इसलिए डॉक्टर अक्सर थायरॉइड से जुड़ी परेशानी वाले मरीजों में Vitamin D के स्तर की जांच कराने की सलाह देते हैं. विटामिन-डी की कमी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. जैसे लगातार थकान रहना, हड्डियों में दर्द, कमजोरी महसूस होना, मूड में बदलाव और बाल झड़ना. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई लक्षण थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं. यही वजह है कि कई बार दोनों स्थितियों की जांच साथ-साथ करने की जरूरत पड़ती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार विटामिन-डी के स्तर को बनाए रखने के लिए रोजाना थोड़ी देर धूप में समय बिताना जरूरी है. इसके अलावा डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए जिनमें विटामिन-डी अच्छी मात्रा में मिलता हो. जैसे फैटी फिश, अंडे, फोर्टिफाइड दूध और कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स. अगर शरीर में विटामिन-डी का स्तर बहुत कम हो तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 23:24 IST
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की:तालिबान का आरोप- काबुल में अस्पताल पर बम गिराए, इलाज करा रहे कई लोग मारे गए

पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए। उनके मुताबिक हमले के वक्त वहां इलाज करा रहे कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं। तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। PAK ने कल रात भी अफगानिस्तान में हमले किए पाकिस्तान ने रविवार रातभर कंधार प्रांत में एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। पाकिस्तान ने यह कार्रवाई ऑपरेशन गजब-लिल-हक के तहत की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप पर हमला किया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, हमले में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठन सीमा पार हमलों की तैयारी के लिए करते थे। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात अफगानिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था, जिसका मलबा गिरने से क्वेटा में दो बच्चों समेत कुछ नागरिक घायल हो गए। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। 1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। —————————– PAK-अफगान संघर्ष से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में 2 विस्फोटक ड्रोन मार गिराए:अफगानिस्तान ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया; पहले PAK ने काबुल पर एयरस्ट्राइक की पाकिस्तान में पिछले हफ्ते शुक्रवार को राजधानी इस्लामाबाद पर विस्फोटकों से भरे दो ड्रोन से हमला हुआ था, जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने मार गिराया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ड्रोन फैजाबाद इलाके के पास गिरा, जबकि दूसरा I-9 सेक्टर में गिराया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Iran War: बम से ज्यादा कहीं दवाई के बगैर मर न जाए खाड़ी देशों की जनता! सप्लाई चेन टूटने से त्राहिमाम

Last Updated:March 16, 2026, 23:04 IST Iran War Disrupt Drug Supply Chain: ईरान युद्ध ने बम, गोला-बारूद से जितनी तबाही मचा रही है, वह तो हम सबके सामने है लेकिन इस जंग की वजह से कहीं ऐसा न हो जाए कि खाड़ी देशों के लोग दवाई के बगैर मरने लगे. दरअसल, जब से अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला हुआ है तब से खाड़ी देशों में हवाई और जल मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुई है. इस कारण जरूरी दवाइयां इन देशों तक नहीं पहुंच रही है. ईरान-इजरायल, अमेरिका युद्ध के बाद ड्रग सप्लाई चेन बाधित. सांकेतिक तस्वीर. Iran War impact: ईरान युद्ध को करीब दो सप्ताह होने को है. दनदनाती मिसाइलों की गर्जना और कलस्टर बमों के शोर से जन-जीवन तो अस्त-व्यस्त हो ही चुका लेकिन आम लोगों के जीवन की डोर हिचकोले खाने लगे हैं. ऐसे में इस युद्ध में बम-बारूद से लोग मरे या न मरें दवाइयों की किल्लत से शायद जरूर मर जाएंगे. युद्ध ने जिस तरह से हवाई सेवा को प्रभावित किया है, उसमें आवश्यक दवाइयों की खेप आनी बंद हो गई. इस कारण दवाइयों का सप्लाई चेन टूट गया है. यह सिर्फ एक देश की बात नहीं है बल्कि पूरे खाड़ी देशों में दवाइयों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है. कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी ‘कोल्ड-चेन’ दवाओं की सप्लाई भी बाधित हुई है. मेडिकल उपकरण में देरी जानलेवारायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि अगर किसी मरीज की तुरंत सर्जरी होनी है और वह इलाज का इंतजार कर रहा है, तो आपको मजबूरी में हवाई मार्ग ही चुनना पड़ता है. इमरजेंसी सामान जैसे दवाइयां या मेडिकल उपकरण के लिए देरी जानलेवा हो सकती है. इसलिए महंगा और लंबा होने के बावजूद हवाई रास्ता ही चुना जा रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक कैंसर जैसी संवेदनशील दवाओं का स्टॉक आमतौर पर केवल तीन महीने का होता है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के प्रशांत यादव कहते हैं कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी दवाओं पर सबसे बड़ा खतरा है. कुछ ग्राहकों ने चेतावनी दी है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अगले 4 से 6 हफ्तों में उनके पास दवाओं की भारी कमी हो जाएगी. मूडिस के डेविड वीक्स ने चिंता जताते हुए कहा है कि कभी-कभी दवा की कमी नहीं होती, बल्कि उसे पैक करने या इस्तेमाल करने वाली चीजों की कमी हो जाती है. जैसे दवा की शीशियों के ढक्कन, आईवी बैग के प्लास्टिक और पैकेजिंग का सामान. अगर ये छोटी चीजें भी कम पड़ीं, तो दवाओं की पूरी सप्लाई चेन रुक सकती है. कैंसर मरीजों के लिए मुसीबतखाड़ी देश दवाइयों के लिए मुख्य रूप पश्चिमी देशों पर निर्भर है. बहुत सारी ऐसी दवाइयां होती है जिसकी एक्सपायरी डेट बहुत कम होती है. ऐसी दवाइयां जीवन रक्षक कैटगरी में ज्यादा आती है. यानी अगर ये दवाइयां कम होगी तो जो इन दवाइयों पर निर्भर मरीज हैं, उनके लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है. इंडस्टी के अधिकारियों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध की वजह से खाड़ी देशों तक जरूरी दवाओं की पहुंच में बाधा आ रही है. सबसे ज्यादा कैंसर के इलाज की दवाओं और अन्य ऐसी दवाओं के लिए खतरा पैदा हो गया है, जिन्हें फ्रीजिंग की जरूरत होती है. अधिकारियों का कहना है कि वे खाड़ी देशों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं. रास्ते बदलने पर विचारइस संकट के कारण कंपनियों को अपनी उड़ानों के रास्ते बदलने पड़ रहे हैं और क्षेत्र में सामान पहुंचाने के लिए जमीन के रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं. वे सऊदी अरब के जेद्दा और रियाद जैसे हवाई अड्डों से ट्रकों के जरिए दवाएं भेज रहे हैं. खाड़ी देशों से सटी है तुर्की जो इस युद्ध में शामिल नहीं है. इसलिए अधिकारी इस्तांबुल और ओमान के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि इससे केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि भोजन और ईंधन की सप्लाई भी इस युद्ध की चपेट में है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि अभी तक दवाओं की कोई बड़ी किल्लत नहीं दिखी है, लेकिन अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो स्थिति बदल सकती है. खाड़ी देश आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं और कुछ दवाओं की ‘एक्सपायरी डेट’ बहुत कम होती है, साथ ही उन्हें सख्त ‘कोल्ड-चेन स्टोरेज’ (ठंडे तापमान) की जरूरत होती है. ऐसे में जमीन के लंबे रास्तों से शिपिंग करना व्यावहारिक नहीं रह जाता. 20 प्रतिशत सप्लाई चेन प्रभावितहमले के बाद दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे इस क्षेत्र के प्रमुख हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं. दुबई और दोहा यूरोप को एशिया और अफ्रीका से जोड़ने वाले बड़े कार्गो हब हैं. एमिरेट्स, एतिहाद जैसी एयरलाइंस और डीएचएल जैसी कंपनियां उन दवाओं को लाने-ले जाने का काम करती हैं, जिन्हें सुरक्षित और असरदार बनाए रखने के लिए एक निश्चित तापमान के भीतर रखना अनिवार्य होता है. एंटवर्प मैनेजमेंट स्कूल के प्रोफेसर वाउटर ड्यूल्फ ने उद्योग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया के कुल हवाई माल ढुलाई का 20% से अधिक हिस्सा मध्य पूर्व के इस तनाव की वजह से प्रभावित हो रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि जीवन रक्षक दवाओं और टीकों की सप्लाई के लिए हवाई मार्ग ही सबसे मुख्य रास्ता होता है. चीन, सिंगापुर रास्तों की तलाशएक अधिकारी ने रायटर्स से बात करते हुए चेतावनी दी कि संवेदनशील दवाओं के लिए कोल्ड-चेन कॉरिडोर को रातों-रात तैयार नहीं किए जा सकते और ये हर जगह उपलब्ध भी नहीं होते. एक दवा कंपनी के कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं की सप्लाई को प्राथमिकता देने के लिए आंतरिक टीमें बनाई हैं. इसके साथ ही आगाह किया कि यदि सही स्टोरेज और हैंडलिंग सुनिश्चित नहीं की गई, तो तापमान-संवेदनशील दवाओं की खेप खराब हो सकती है. वहीं एक मेडिकल डिवाइस कंपनी के अधिकारी कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता अभी उन शिपमेंट की पहचान करना है जो रास्ते में हैं या निकलने के लिए तैयार हैं. इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन दवाओं का रास्ता बदलना है और किनके लिए नई योजना बनानी है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त
थांदला-तलावली मार्ग पर कार-बाइक भिड़ंत, दो युवक गंभीर:जिला अस्पताल रेफर; पुलिस ने कार सवारों को हिरासत में लिया

थांदला-तलावली मार्ग पर सोमवार देर शाम एक कार-बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार दो युवक गंभीर घायल हो गए हैं। घटना थांदला से करीब 2 किमी दूर हुई, जिसके बाद राहगीरों की सूचना पर डायल 112 की टीम ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। तेज रफ्तार कार ने बाइक को मारी टक्कर जानकारी के अनुसार, थांदला रोड निवासी आयुष पिता मनोहर राठौड़ और राहुल पिता मांगू मावी अपनी बाइक से तलावली मार्ग की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही कार (KL03AC7585) ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवक सड़क पर गिरकर लहूलुहान हो गए। दोनों गंभीर, जिला अस्पताल रेफर घायलों को तत्काल थांदला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों युवकों की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। फिलहाल दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने कार सवारों को हिरासत में लिया हादसे के बाद आरोपी कार चालक और उसमें सवार अन्य व्यक्तियों को थांदला थाने ले जाया गया है। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है और मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम घटनास्थल के आसपास के साक्ष्य भी जुटा रही है।
राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दल ने जीती 3 सीटें | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 21:58 IST ओडिशा में, भाजपा समर्थित 3 उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे – ने चार में से तीन सीटें जीतीं। 16 मार्च को पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और अन्य के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। ओडिशा और बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए, जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। ओडिशा में, भाजपा समर्थित तीन उम्मीदवारों – मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय दिलीप रे ने चार में से तीन सीटें जीतीं। शेष सीट बीजू जनता दल (बीजद) के उम्मीदवार संतरूप मिश्रा के खाते में गई। 12 साल के अंतराल के बाद चुनाव हुआ क्योंकि 2 अप्रैल को आने वाली चार रिक्तियों के लिए पांच उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। बीजद के सदस्य निरंजन बिशी और मुन्ना खान और भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल उस तारीख को समाप्त हो रहा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने परिणाम को राज्य के लिए “यादगार दिन” बताया। उन्होंने कहा, “हमारे द्वारा मैदान में उतारे गए तीन उम्मीदवार आज राज्यसभा चुनाव में जीत गए… सभी विधायकों ने, चाहे वह कांग्रेस पार्टी के हों या बीजद के, ओडिशा के विकास को आगे बढ़ाने के लिए तीनों उम्मीदवारों को भारी मतों से वोट दिया।” हालाँकि, मतदान के दिन विधानसभा में तनाव देखा गया क्योंकि बीजद और भाजपा विधायकों के बीच झड़प हो गई। बीजद प्रमुख और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भाजपा पर “खरीद-फरोख्त” का आरोप लगाया और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया, उन्होंने दावा किया कि एक विधायक को मानदंडों का उल्लंघन करके दूसरा मतपत्र जारी किया गया था। बिहार: एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की बिहार में, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए ने सभी पांच राज्यसभा सीटों पर कब्जा कर लिया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जद (यू) के रामनाथ ठाकुर, भाजपा नेता शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को विजेता घोषित किया गया। बिहार विधानसभा की सचिव और राज्यसभा चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर ख्याति सिंह ने नतीजों की पुष्टि की। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 202 सीटों के साथ अच्छा बहुमत प्राप्त है। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने नतीजों की सराहना करते हुए कहा, “एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीत गए हैं और मैं सभी को बधाई देता हूं… जिस तरह से एनडीए अब तक जीतता रहा है, वह भविष्य में भी इसी तरह जीतता रहेगा।” वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने नतीजों को गठबंधन की “चट्टान जैसी एकता” का प्रमाण बताया। हालाँकि, राजद नेता तेजस्वी यादव ने विपक्षी खेमे के भीतर विश्वासघात का आरोप लगाया और भाजपा पर चुनाव के दौरान “धन बल और प्रशासन के दुरुपयोग” का आरोप लगाया। यादव ने आरोप लगाया, “धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, धनबल और प्रशासन का दुरुपयोग भाजपा की आदत है। सिर्फ बिहार राज्य में ही नहीं। हमने सुना है कि कई राज्यों में जहां आज चुनाव हुए, ऐसी ही चीजें सामने आई हैं।” हरियाणा में मतगणना में देरी इस बीच, भाजपा और कांग्रेस द्वारा मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन का आरोप लगाने की शिकायतों के बाद हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती में देरी हुई। शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना स्थगित कर दी गई क्योंकि चुनाव आयोग ने दावों की जांच की। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने मतपत्र ठीक से नहीं मोड़े, जबकि कांग्रेस ने वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज पर वोट गोपनीयता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चुनाव की अखंडता की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की और परिणाम घोषित होने से पहले एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध किया। इससे पहले दिन में मतदान हुआ, जिसमें इंडियन नेशनल लोकदल ने मतदान में भाग नहीं लिया। मतदान से पहले हिमाचल प्रदेश चले गए कांग्रेस विधायक वोट डालने के लिए चंडीगढ़ लौट आए। भाजपा विधायकों द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल और पार्टी उम्मीदवार संजय भाटिया (भाजपा) और करमवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस) मैदान में हैं। आयोग से अनुमति मिलते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 21:43 IST समाचार चुनाव राज्यसभा चुनाव: बिहार में एनडीए की जीत से नीतीश कुमार विजयी; ओडिशा में बीजेपी और सहयोगी दलों ने जीती 3 सीटें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था
मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था
बिहार राज्यसभा चुनाव: कैसे ‘4 लापता विधायकों’ ने विपक्ष को 41 के जादुई आंकड़े से दूर रखा | व्याख्याकार समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 20:07 IST बिहार राज्यसभा चुनाव: कौन थे वो 4 विपक्षी विधायक जो वोट देने नहीं पहुंचे? कौन थे एनडीए के उम्मीदवार? नीतीश कुमार (बाएं) और नितिन नबीन मैदान में थे. (पीटीआई फ़ाइल) सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सोमवार को बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव में आसान जीत हासिल की, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित उसके उम्मीदवार शामिल थे। हालाँकि वोटों की गिनती शाम को समाप्त होने की उम्मीद थी, लेकिन एनडीए के सूत्रों ने दावा किया कि गठबंधन के “सभी 202 विधायकों” ने बिहार में मतदान में हिस्सा लिया था। इनमें कुमार की जदयू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और पांच उम्मीदवारों में से एक उपेन्द्र कुशवाह की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। इस बीच, विपक्ष का महागठबंधन चार विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति के कारण 41 प्रथम-वरीयता वोटों के जादुई आंकड़े तक पहुंचने में विफल रहा। नंबर गेम विपक्ष (राजद, कांग्रेस, वाम) के पास शुरुआत में कुल 35 विधायकों की संयुक्त ताकत थी, लेकिन वे अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए 41-वोट की सीमा तक पहुंचने के लिए अन्य दलों से छह अतिरिक्त वोट हासिल करना चाह रहे थे। राज्यसभा चुनाव परिणाम 2026 लाइव अपडेट यहां बिहार में राज्यसभा चुनाव के फॉर्मूले के अनुसार, यदि सभी 243 विधायक मतदान में भाग लेने के लिए आते, तो प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 वोटों की आवश्यकता होती। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में भाजपा के 89 विधायक हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के 85 सदस्य हैं, जबकि अन्य राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सदस्य, जिनमें चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाह की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) शामिल हैं, के पास क्रमशः 19, 5 और 4 विधायक हैं। कौन थे एनडीए के उम्मीदवार? भाजपा: नितिन नबीन, शिवेश कुमार राम जद (यू): नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर आरएलएम (एनडीए सहयोगी): उपेन्द्र कुशवाह क्यों फेल हुआ महागठबंधन? कांग्रेस के तीन विधायक और राजद का एक विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जिससे सीधे तौर पर गठबंधन की वोटिंग ताकत कम हो गई, जिससे एडी सिंह के लिए 41 तक पहुंचना असंभव हो गया। जबकि एआईएमआईएम के पांच विधायकों और एकमात्र बसपा विधायक ने कथित तौर पर राजद उम्मीदवार को वोट दिया, गठबंधन के चार विधायकों की अनुपस्थिति ने इस लाभ को खत्म कर दिया। गठबंधन, जो पहले से ही एक चुनौतीपूर्ण संख्या का सामना कर रहा है, पूर्ण उपस्थिति सुनिश्चित नहीं कर सका, जिससे नेताओं द्वारा एकता के दावों के बावजूद, आवश्यकता से कम प्रभावी ताकत बनी रही। जो 4 विधायक अनुपस्थित थे 1. सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा (कांग्रेस) निर्वाचन क्षेत्र: वाल्मिकीनगर (पश्चिमी चंपारण) वह पहली बार विधायक बने हैं, उन्होंने नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जद (यू) के मौजूदा विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ करीबी मुकाबले में सीट जीती थी। राज्यसभा मतदान के दौरान उनका मोबाइल फोन बंद बताया गया और वह पूरे दिन पार्टी नेतृत्व के संपर्क से बाहर रहे। 2. मनोज विश्वास (कांग्रेस) निर्वाचन क्षेत्र: फारबिसगंज (अररिया) 2025 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के विद्या सागर केशरी को 221 वोटों के मामूली अंतर से हराकर फारबिसगंज के विधायक चुने गए। कुशवाह की तरह, बिस्वास राज्यसभा मतदान के दौरान संपर्क में नहीं थे, जिससे कांग्रेस तिकड़ी की “लापता” स्थिति में योगदान हुआ। 3. मनोहर प्रसाद सिंह (कांग्रेस) निर्वाचन क्षेत्र: मनिहारी (कटिहार) एक अनुभवी राजनेता और पूर्व पुलिस अधिकारी, सिंह कई बार विधायक रहे हैं। 2015 में कांग्रेस में शामिल होने से पहले वह मूल रूप से जेडीयू के साथ थे। वह एसटी-आरक्षित मनिहारी सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और खरवार समुदाय से एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। हालाँकि चुनाव की सुबह वह कथित तौर पर संपर्क में थे और उन्होंने नेताओं को आने का आश्वासन दिया था, लेकिन अंततः वह वोट के लिए उपस्थित होने में विफल रहे। 4. फैसल रहमान (राजद) निर्वाचन क्षेत्र: ढाका (पूर्वी चंपारण). रहमान राजद विधायक हैं जो पहले बिहार विधानसभा में सदस्य रह चुके हैं। अनुपस्थित चार विधायकों में वह एकमात्र राजद विधायक थे। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अनुपस्थिति दिल्ली में उनकी मां के इलाज से जुड़ी एक निजी आपात स्थिति के कारण थी। पीटीआई, एजेंसी इनपुट के साथ पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 19:29 IST समाचार समझाने वाले बिहार राज्यसभा चुनाव: कैसे ‘4 लापता विधायकों’ ने विपक्ष को 41 के जादुई आंकड़े से दूर रखा? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा चुनाव बिहार(टी)बिहार सागर चुनाव(टी)एनडीए जीत(टी)एनडीए जीत(टी)नीतीश कुमार(टी)नीतीश कुमार(टी)नितिन नबीन(टी)नितिन नबीन
सिर्फ 1 चम्मच पीनट बटर से शरीर में होते हैं कई बड़े बदलाव! न्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 16, 2026, 20:00 IST पीनट बटर को अक्सर फिटनेस और हेल्दी स्नैक के रूप में देखा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोज सिर्फ एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर पर कई सकारात्मक असर डाल सकता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के मुताबिक, सही मात्रा में लिया जाए तो यह एनर्जी, हार्ट हेल्थ और मसल्स के लिए फायदेमंद हो सकता है. पीनट बटर में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. (AI image) आजकल हेल्दी डाइट की बात होती है तो पीनट बटर का नाम अक्सर सामने आता है. जिम जाने वाले लोग, फिटनेस फॉलो करने वाले और हेल्दी स्नैक की तलाश करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं. दरअसल पीनट बटर मूंगफली से बनाया जाता है और इसमें हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. दिल्ली स्थित फेलिक्स ग्लोबल की वरिष्ठ क्लिनिकल पोषण विशेषज्ञ डॉ. राधिका मेहता का कहना है कि अगर इसे सीमित मात्रा में खाया जाए तो रोज सिर्फ एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर को कई फायदे दे सकता है. सबसे पहले बात करते हैं एनर्जी की. पीनट बटर में हेल्दी फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संतुलित मिश्रण होता है. यही वजह है कि यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करता है. कई बार मीठे स्नैक्स खाने से शरीर में अचानक एनर्जी आती है और फिर जल्दी गिर जाती है, लेकिन पीनट बटर धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करता है जिससे शरीर लंबे समय तक एक्टिव बना रहता है. पीनट बटर हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट पाए जाते हैं जो दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं. ये फैट शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि मूंगफली से बने खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है. इसके अलावा पीनट बटर मसल्स हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और मजबूती के लिए जरूरी होता है. इसलिए जिम जाने वाले लोग या एक्टिव लाइफस्टाइल रखने वाले लोग अक्सर इसे अपने ब्रेकफास्ट या स्नैक में शामिल करते हैं. एक चम्मच पीनट बटर भी शरीर को जरूरी प्रोटीन देने में मदद कर सकता है. पीनट बटर का एक और फायदा यह है कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं, जिससे भूख जल्दी नहीं लगती. यही कारण है कि कई डाइट एक्सपर्ट इसे वेट मैनेजमेंट के लिए भी अच्छा स्नैक मानते हैं. साथ ही पीनट बटर में विटामिन ई, मैग्नीशियम, पोटैशियम और बी-विटामिन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. ये सभी शरीर की इम्यूनिटी, नर्व हेल्थ और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. इन पोषक तत्वों की वजह से यह दिमाग के लिए भी फायदेमंद माना जाता है और शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकता है. पीनट बटर ब्लड शुगर को स्थिर रखने में भी मदद कर सकता है. इसमें मौजूद हेल्दी फैट और प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक तेजी से नहीं बढ़ता. इसी कारण इसे संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है. हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि पीनट बटर कैलोरी में काफी ज्यादा होता है. इसलिए इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि नैचुरल पीनट बटर चुनें जिसमें ज्यादा चीनी, नमक या प्रोसेस्ड ऑयल न मिला हो. सही मात्रा में लिया गया पीनट बटर स्वाद के साथ-साथ शरीर को कई पोषण लाभ भी दे सकता है. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 16, 2026, 20:00 IST







