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बार-बार याचिका लगाने पर पटवारी पर 10 हजार का जुर्माना:हाईकोर्ट ने कहा- आपराधिक मामले में बरी होने से नौकरी बहाल नहीं होती

बार-बार याचिका लगाने पर पटवारी पर 10 हजार का जुर्माना:हाईकोर्ट ने कहा- आपराधिक मामले में बरी होने से नौकरी बहाल नहीं होती

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक पटवारी की याचिका खारिज कर दिया है। बार-बार याचिका लगाकर न्यायालय का समय बर्बाद करने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में गलत एन्ट्री कर दस्तावेज से छेड़छाड़ के मामले में बर्खास्त किए गए पटवारी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आपधारिक मामले में बरी होने का मतलब यह नहीं है कि विभागीय कार्रवाई स्वत: समाप्त हो जाती है और कर्मचारी को सेवा में बहाल करने का अधिकार स्वत: नहीं मिलता है। कोर्ट ने बार-बार याचिका लगाने पर भी नाराजगी जाहिर की है। साल 2016 में बर्खास्त हुआ था पटवारी
जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने पटवारी विश्राम सिंह कुशवाह द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को सही ठहराया। याचिकाकर्ता पटवारी विश्राम सिंह को वर्ष 2016 में राजस्व अभिलेख में गलत नाम दर्ज करने का आरोप था। पटवारी जिला शिवपुरी में पदस्थ था और वहीं के एसडीओ, शिवपुरी ने विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसी मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरण में वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट से पटवारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था, जिसके आधार पर उसने पुनः सेवा में बहाली की मांग की थी। कोर्ट ने कहा- विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा की प्रकृति अलग-अलग कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मुकदमा दोनों अलग-अलग प्रकृति की कार्रवाई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय दंड अपने आप समाप्त नहीं होता, विशेषकर तब, जब बरी होना संदेह का लाभ मिलने के कारण हुआ हो। बार-बार याचिका पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
कोर्ट ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता बार-बार अलग-अलग याचिकाएं दायर कर एक ही राहत मांगता रहा, जबकि पहले की याचिका खारिज हो चुकी थी। इसे न्यायालय ने रचनात्मक पूर्व न्याय के सिद्धांत के विपरीत बताते हुए याचिका को अव्यवहार्य माना। साथ ही यह भी कहा गया कि बर्खास्तगी आदेश को कई वर्ष बाद चुनौती देना अनुचित देरी है।

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