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मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था

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मार्च में साइन होने वाली भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील टली:अब नया टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार होने के बाद होगी; अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ रद्द किए

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली अंतरिम ट्रेड डील अब कुछ समय के लिए टल गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह डील अब तभी साइन होगी, जब अमेरिका अपना नया ग्लोबल टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर लेगा। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में डोनाल्ड ट्रम्प की उन शक्तियों को खत्म कर दिया है। जिसके तहत वे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगा देते थे। मार्च में साइन होनी थी डील, कोर्ट के फैसले से टली भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील पहले इसी महीने यानी मार्च में साइन होने वाली थी। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पुराने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य कर दिया है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन को अब ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करना पड़ रहा है। जब तक नया स्ट्रक्चर नहीं आता, तब तक अमेरिका ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10% टैरिफ लगा दिया है। यह व्यवस्था अगले 5 महीनों तक लागू रह सकती है। तुलनात्मक फायदे देखकर ही डील साइन करेंगे एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हम डील की बारीकियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन साइन तभी होगा जब उनका नया टैरिफ आर्किटेक्चर तैयार हो जाएगा। कोई भी देश समझौता तभी करता है जब उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मार्केट में कोई एडवांटेज मिले।’ भारत ने पहले कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए 18% की रेसिप्रोकल टैरिफ दर तय की थी। अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका का नया स्ट्रक्चर पुराने जैसा ही रहता है, तो दरें वही रहेंगी, वरना इनमें बदलाव संभव है। मलेशिया जैसा हाल नहीं होगा, भारत की स्थिति अलग हाल ही में मलेशिया ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस पर सफाई देते हुए अधिकारी ने कहा कि भारत की स्थिति मलेशिया से अलग है। मलेशिया ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए थे, जो अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद बेकार हो गया। वहीं भारत ने अभी तक केवल एक ‘फ्रेमवर्क डील’ पर बात की है, किसी कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसलिए भारत के पास परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करने की गुंजाइश है। नॉन-टैरिफ बाधाओं पर भी चल रही है चर्चा टैरिफ के अलावा दोनों देश नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सेक्शन 232 के तहत लगाए गए सेक्टोरल टैरिफ को सुलझाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया, ‘हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब साइन करने का सही समय आए, तो तकनीकी मुद्दों की वजह से देरी न हो। अमेरिका द्वारा की जा रही ‘सेक्शन 301′ जांच पर भी सरकार कानूनी पहलुओं पर गौर कर रही है।’ कॉमर्स सेक्रेटरी बोले- एक्सपोर्ट का लक्ष्य 860 बिलियन डॉलर कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक-दूसरे के फायदे वाली डील के लिए बातचीत में जुटे हैं। वहीं पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि इससे लॉजिस्टिक्स और शिपिंग में कुछ चुनौतियां आई हैं। इससे भारत के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल गुड्स और सर्विसेज एक्सपोर्ट 860 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। क्या है सेक्शन 122 और सेक्शन 301? सेक्शन 122: इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) में बड़ी कमी आने पर 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 301: यह अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है, जिनकी व्यापार नीतियां अमेरिकी हितों के खिलाफ या अनुचित होती हैं। ट्रम्प ने 49 साल पुराने कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाया था

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