वित्त-मंत्री बोलीं- IT विभाग आम लोगों को परेशान न करे:अपनी ताकत से डराएं नहीं; आम जनता की भलाई के लिए काम करें

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स विभाग को आम जनता की भलाई के लिए काम करने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने अफसरों से कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर न कटवाएं। सीतारमण रविवार, 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में 13 मंजिला ‘आयकर सिंधु’ इमारत का उद्घाटन करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने यह बातें कही हैं। 13 मंजिला इमारत के क्लीयरेंस का उदाहरण दिया वित्त मंत्री ने उद्घाटन समारोह के दौरान अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारियों को खुद 1.13 लाख स्क्वायर फीट में बनी इस 13 मंजिला इमारत के निर्माण और अनुमतियों यानी क्लीयरेंस के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। सीतारमण ने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक IRS अफसर के नाम के पीछे आयकर विभाग का नाम जुड़ा होता है, जो लोगों को डराने के लिए एक शक्तिशाली ताकत जैसा काम करता है। उन्होंने कहा कि जब इतनी पावरफुल बॉडी होने के बावजूद अफसरों को खुद अनुमतियां लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, तो उन्हें समझ आना चाहिए कि एक आम नागरिक को किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि क्या यह अनुभव आपको उस आम नागरिक की स्थिति समझने के लिए प्रेरित कर सकता है जो आपके पास आता है? जहां आपके अधिकार की जरूरत है, वहां उन्हें दर-दर मत भटकाइए; उनके लिए काम कीजिए। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे पर नाराजगी जताई वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों के ढीले रवैये पर सार्वजनिक रूप से गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभागों के ढीलेपन की वजह से ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण होते हैं। सीतारमण ने बताया कि नरीमन पॉइंट स्थित जिस जमीन पर ‘आयकर सिंधु’ इमारत बनाई गई है, वह जमीन आयकर विभाग के पास साल 1973 से मौजूद थी। इसके बावजूद इतने सालों में उस जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने कहा कि हमारी संपत्ति का ध्यान रखना किसी की जिम्मेदारी थी, लेकिन जब अतिक्रमण हो जाता है तो हम बस यही कहते हैं कि हमारे पास जमीन तो है पर हम बना नहीं पा रहे हैं। यह दिखाता है कि हमारे सिस्टम में कितनी ढिलाई है। मुंबई में अधिकारियों के आवास और लंबी दूरी का मुद्दा वित्त मंत्री ने मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्रों में अधिकारियों के सरकारी आवास में न रहने और दफ्तर पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि लगभग आधे अधिकारियों को सरकारी आवास की सुविधा नहीं मिल पाती है। सीतारमण ने वादा किया कि वे इस मुद्दे को देखेंगी और इसके लिए सरकार-से-सरकार जमीन ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जमीनों के इंस्टेंट ट्रांसफर की प्रोसेस को आसान बनाएंगी। CPWD और BSNL की जमीन को लेकर निर्देश दिए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन ट्रांसफर में मदद के बाद निर्माण से जुड़े काम अधिकारियों को खुद समय पर पूरे करने होंगे। इसमें CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) से निपटना, अनुमतियां लेना, बिल्डिंग बनाना और कॉन्ट्रैक्ट व टेंडर आवंटित करना जैसे काम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि 21वीं सदी के उत्तरार्ध में अलग-अलग बिखरे ऑफिस स्पेस और महंगे किराए के मकानों में न रहना पड़े। सीतारमण ने खासतौर पर सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL का जिक्र किया और अधिकारियों से कहा कि वे BSNL की जमीनों को प्राप्त करने की कोशिश करें। इसके लिए वे खुद संबंधित केंद्रीय मंत्री से बात करेंगी। अफसरों को दी ‘इंटीग्रिटी’ बनाए रखने की सलाह वित्त मंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से नियमों को तोड़ने या आम नागरिकों के लिए कुछ आउट-ऑफ-वे करने को नहीं कह रही हैं। हालांकि, उन्होंने दुख जताया कि इस देश में लोगों को अपने जायज हक और दावों को पाने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए टैक्स कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण काम में ईमानदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए सीतारमण ने कहा कि इंटीग्रिटी यानी निष्ठा और ईमानदारी ही एकमात्र सिद्धांत है जिसकी मैं आप में से हर एक को सलाह दूंगी। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 9 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹2.74 लाख करोड़ घटा: HDFC बैंक टॉप लूजर रहा, वैल्यू ₹1.18 लाख करोड़ घटी; HUL की वैल्यू बढ़ी शेयर बाजार में गिरावट के रुख के बीच पिछले हफ्ते देश की टॉप-10 में से 9 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में टोटल ₹2.74 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट रही। इस गिरावट में HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.67%) गिरा, जबकि निफ्टी में 566.85 अंक (2.32%) की गिरावट आई। टॉप-10 की लिस्ट में से केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर ही ऐसी कंपनी रही, जिसकी वैल्यूएशन बीते हफ्ते बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें….
वित्त-मंत्री बोलीं- IT विभाग आम लोगों को परेशान न करे:अपनी ताकत से डराएं नहीं; जनता की भलाई के लिए काम करें

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स विभाग को आम जनता की भलाई के लिए काम करने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने अफसरों से कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर के चक्कर न कटवाएं। सीतारमण रविवार, 26 जुलाई को मुंबई के नरीमन पॉइंट बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में 13 मंजिला ‘आयकर सिंधु’ इमारत का उद्घाटन करने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने यह बातें कही हैं। 13 मंजिला इमारत के क्लीयरेंस का उदाहरण दिया वित्त मंत्री ने उद्घाटन समारोह के दौरान अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारियों को खुद 1.13 लाख स्क्वायर फीट में बनी इस 13 मंजिला इमारत के निर्माण और अनुमतियों यानी क्लीयरेंस के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। सीतारमण ने अधिकारियों को याद दिलाया कि एक IRS अफसर के नाम के पीछे आयकर विभाग का नाम जुड़ा होता है, जो लोगों को डराने के लिए एक शक्तिशाली ताकत जैसा काम करता है। उन्होंने कहा कि जब इतनी पावरफुल बॉडी होने के बावजूद अफसरों को खुद अनुमतियां लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ा, तो उन्हें समझ आना चाहिए कि एक आम नागरिक को किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि क्या यह अनुभव आपको उस आम नागरिक की स्थिति समझने के लिए प्रेरित कर सकता है जो आपके पास आता है? जहां आपके अधिकार की जरूरत है, वहां उन्हें दर-दर मत भटकाइए; उनके लिए काम कीजिए। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे पर नाराजगी जताई वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों के ढीले रवैये पर सार्वजनिक रूप से गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभागों के ढीलेपन की वजह से ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण होते हैं। सीतारमण ने बताया कि नरीमन पॉइंट स्थित जिस जमीन पर ‘आयकर सिंधु’ इमारत बनाई गई है, वह जमीन आयकर विभाग के पास साल 1973 से मौजूद थी। इसके बावजूद इतने सालों में उस जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने कहा कि हमारी संपत्ति का ध्यान रखना किसी की जिम्मेदारी थी, लेकिन जब अतिक्रमण हो जाता है तो हम बस यही कहते हैं कि हमारे पास जमीन तो है पर हम बना नहीं पा रहे हैं। यह दिखाता है कि हमारे सिस्टम में कितनी ढिलाई है। मुंबई में अधिकारियों के आवास और लंबी दूरी का मुद्दा वित्त मंत्री ने मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्रों में अधिकारियों के सरकारी आवास में न रहने और दफ्तर पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि लगभग आधे अधिकारियों को सरकारी आवास की सुविधा नहीं मिल पाती है। सीतारमण ने वादा किया कि वे इस मुद्दे को देखेंगी और इसके लिए सरकार-से-सरकार जमीन ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जमीनों के इंस्टेंट ट्रांसफर की प्रोसेस को आसान बनाएंगी। CPWD और BSNL की जमीन को लेकर निर्देश दिए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन ट्रांसफर में मदद के बाद निर्माण से जुड़े काम अधिकारियों को खुद समय पर पूरे करने होंगे। इसमें CPWD (सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) से निपटना, अनुमतियां लेना, बिल्डिंग बनाना और कॉन्ट्रैक्ट व टेंडर आवंटित करना जैसे काम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि 21वीं सदी के उत्तरार्ध में अलग-अलग बिखरे ऑफिस स्पेस और महंगे किराए के मकानों में न रहना पड़े। सीतारमण ने खासतौर पर सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL का जिक्र किया और अधिकारियों से कहा कि वे BSNL की जमीनों को प्राप्त करने की कोशिश करें। इसके लिए वे खुद संबंधित केंद्रीय मंत्री से बात करेंगी। अफसरों को दी ‘इंटीग्रिटी’ बनाए रखने की सलाह वित्त मंत्री ने कहा कि वे अधिकारियों से नियमों को तोड़ने या आम नागरिकों के लिए कुछ आउट-ऑफ-वे करने को नहीं कह रही हैं। हालांकि, उन्होंने दुख जताया कि इस देश में लोगों को अपने जायज हक और दावों को पाने के लिए भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। देश के लिए टैक्स कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण काम में ईमानदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए सीतारमण ने कहा कि इंटीग्रिटी यानी निष्ठा और ईमानदारी ही एकमात्र सिद्धांत है जिसकी मैं आप में से हर एक को सलाह दूंगी। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 में 9 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹2.74 लाख करोड़ घटा: HDFC बैंक टॉप लूजर रहा, वैल्यू ₹1.18 लाख करोड़ घटी; HUL की वैल्यू बढ़ी शेयर बाजार में गिरावट के रुख के बीच पिछले हफ्ते देश की टॉप-10 में से 9 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में टोटल ₹2.74 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट रही। इस गिरावट में HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.67%) गिरा, जबकि निफ्टी में 566.85 अंक (2.32%) की गिरावट आई। टॉप-10 की लिस्ट में से केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर ही ऐसी कंपनी रही, जिसकी वैल्यूएशन बीते हफ्ते बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ें….
वृंदावन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों पर भड़कीं दीपिका सिंह:इन्फ्लुएंसर से बोलीं- व्यूज के लिए भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ न करें

टीवी एक्ट्रेस दीपिका सिंह ने वृंदावन मंदिर में VIP ट्रीटमेंट मिलने के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। हाल ही में पति रोहित राज गोयल और बच्चों के साथ वृंदावन दर्शन के दौरान वायरल हुए वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच दीपिका ने रविवार को इंस्टाग्राम पर नया वीडियो शेयर कर कहा कि पूरा सच सामने है और लोगों को बिना पूरी जानकारी के आरोप नहीं लगाने चाहिए। दरअसल, दीपिका सिंह हाल ही में अपने परिवार के साथ वृंदावन दर्शन के लिए पहुंची थीं। इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में VIP ट्रीटमेंट दिया गया, जबकि उनके सामने खड़ी एक बुजुर्ग महिला की अनदेखी की गई। दीपिका सिंह ने आरोपों पर जवाब दिया विवाद बढ़ने पर दीपिका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया। साथ ही एक इन्फ्लुएंसर को टैग करते हुए लिखा, “यह सब @glam_with_nishitwins (निशा बंसल) ने मेरी और पुजारी जी की ट्रोलिंग से शुरू किया था, लेकिन मैं उन्हें पूरी सच्चाई दिखाने की कोशिश कर रही हूं। इससे उन्हें भी ज्यादा व्यूज और फॉलोअर्स मिलेंगे। बाद में मुझे धन्यवाद कह सकती हैं। सबूत सबके सामने है। माता जी का प्रसाद भी मिला।” उन्होंने आगे लिखा, “असली प्रसाद: सही सोच, शुद्ध मन, अहंकार का त्याग, किसी पर बिना जाने उंगली न उठाना, शांति और अपने हक के लिए खड़े होने की शक्ति। दो बच्चों को देखकर दिया गया प्रेम क्या पाप है? बच्चे भी तो भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल जी) का ही रूप हैं।” इन्फ्लुएंसर पर भड़कते हुए उन्होंने लिखा, “@glam_with_nishitwins, आप और आपके जैसे लोग ऐसी रील बनाकर भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जो लोग अभी-अभी भक्ति के रास्ते पर चले हैं, उनका मन इससे टूट सकता है। कृपया भक्तों की भावनाओं का सम्मान करें। सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स पाने के लिए लोगों को गुमराह न करें। राधे-राधे।” वीडियो में बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिला दीपिका ने जो वीडियो शेयर किया उसमें मंदिर के पुजारी उन्हें अंगवस्त्र, फूलों की माला और प्रसाद देते दिखाई देते हैं। साथ ही बच्चों को बांसुरी भी भेंट की जाती है। वीडियो में सामने खड़ी बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिलता हुआ दिखाई देता है। दरअसल, इंस्टाग्राम पर निशा बंसल ने दीपिका का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “कुछ तो शर्म कर लो, धर्म के ठेकेदारों। वो एक बूढ़ी मां है। उसकी उम्र खड़े होने लायक नहीं थी। इनको माला, बांसुरी, इत्र, सब सेवा, उसके नसीब प्रसाद भी नहीं।” दीपिका को ‘दीया और बाती हम’ से पहचान मिली थी दीपिका सिंह ने साल 2011 में स्टार प्लस के सुपरहिट शो ‘दीया और बाती हम’ से टीवी डेब्यू किया। इस शो में उन्होंने आईपीएस अधिकारी संध्या राठी का किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने वेब सीरीज ‘द रियल सोलमेट’ और टीवी शो ‘कवच: महाशिवरात्रि’ में काम किया। साल 2022 में फिल्म ‘टीटू अंबानी’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों ने चेतावनी दी, देश में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बॉलीवुड का रिएक्शन:प्रकाश राज बोले- आपने सरकार को घुटनों पर ला दिया'; वीर दास ने कहा- अब जश्न मनाइए

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने वाले बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता प्रकाश राज, कॉमेडियन-एक्टर वीर दास, अभिनेता अभिषेक बनर्जी और कॉमेडियन समय रैना समेत कई सेलेब्स ने छात्रों को बधाई देते हुए उनके आंदोलन का समर्थन किया। वहीं विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा और आयशा खान सहित कई कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। प्रकाश राज बोले- सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे प्यारे साथियों, आपको बहुत-बहुत बधाई। सोनम वांगचुक सर और उन सभी लोगों को भी बधाई, जो युवाओं के साथ मजबूती से खड़े रहे। आपने साबित कर दिया कि सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है।” वीर दास बोले- जीत आपकी है, अब जश्न मनाइए वीर दास ने छात्रों के नाम संदेश लिखते हुए कहा, “आपने उस छोटी-सी बात को फिर से जीवित कर दिया, जिसे हम स्कूल की किताबों में पढ़कर भूल गए थे। प्यारे बच्चों, आगे चाहे जो भी हो, जीत आपकी है। अब जाइए और इस जीत का जश्न मनाइए।” समय रैना ने लिखा- छात्रों को और ताकत मिले कॉमेडियन समय रैना ने छात्रों के समर्थन में संक्षिप्त पोस्ट करते हुए लिखा, “छात्रों को और ताकत मिले।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी बोले- एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रोफाइल फोटो बदलते हुए लिखा, “मैंने अपनी प्रोफाइल फोटो बदल ली है। नई पीढ़ी को बहुत-बहुत बधाई। साथ ही एक बात हमेशा याद रखिए- अगर हम एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे, बंट जाएंगे तो हार जाएंगे।” विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा और आयशा खान ने भी किया समर्थन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिनेता विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा, आयशा खान समेत कई कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स ने भी छात्रों की चिंताओं का समर्थन किया। इन सभी ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों की आवाज सुने जाने की जरूरत पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर इन कलाकारों के पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इसे छात्रों की एकजुटता और उनकी आवाज की जीत बता रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बॉलीवुड का रिएक्शन:प्रकाश राज बोले- आपने सरकार को घुटनों पर ला दिया'; वीर दास ने कहा- अब जश्न मनाइए

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने वाले बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता प्रकाश राज, कॉमेडियन-एक्टर वीर दास, अभिनेता अभिषेक बनर्जी और कॉमेडियन समय रैना समेत कई सेलेब्स ने छात्रों को बधाई देते हुए उनके आंदोलन का समर्थन किया। वहीं विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा और आयशा खान सहित कई कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। प्रकाश राज बोले- सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरे प्यारे साथियों, आपको बहुत-बहुत बधाई। सोनम वांगचुक सर और उन सभी लोगों को भी बधाई, जो युवाओं के साथ मजबूती से खड़े रहे। आपने साबित कर दिया कि सरकार को भी घुटनों पर झुकाया जा सकता है।” वीर दास बोले- जीत आपकी है, अब जश्न मनाइए वीर दास ने छात्रों के नाम संदेश लिखते हुए कहा, “आपने उस छोटी-सी बात को फिर से जीवित कर दिया, जिसे हम स्कूल की किताबों में पढ़कर भूल गए थे। प्यारे बच्चों, आगे चाहे जो भी हो, जीत आपकी है। अब जाइए और इस जीत का जश्न मनाइए।” समय रैना ने लिखा- छात्रों को और ताकत मिले कॉमेडियन समय रैना ने छात्रों के समर्थन में संक्षिप्त पोस्ट करते हुए लिखा, “छात्रों को और ताकत मिले।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी बोले- एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी प्रोफाइल फोटो बदलते हुए लिखा, “मैंने अपनी प्रोफाइल फोटो बदल ली है। नई पीढ़ी को बहुत-बहुत बधाई। साथ ही एक बात हमेशा याद रखिए- अगर हम एकजुट रहेंगे तो मजबूत रहेंगे, बंट जाएंगे तो हार जाएंगे।” विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा और आयशा खान ने भी किया समर्थन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिनेता विजय वर्मा, सान्या मल्होत्रा, आयशा खान समेत कई कलाकारों और डिजिटल क्रिएटर्स ने भी छात्रों की चिंताओं का समर्थन किया। इन सभी ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों की आवाज सुने जाने की जरूरत पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर इन कलाकारों के पोस्ट तेजी से वायरल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इसे छात्रों की एकजुटता और उनकी आवाज की जीत बता रहे हैं।
ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने धमकी दी कि अगर दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल ही में बीजिंग में हुई उनकी मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे किसी भी हाल में ईरान को हथियार नहीं देंगे। चीनी कंपनियों के लिए भी यही चीज लागू है। ट्रम्प ने कहा मुझे जिनपिंग पर यकीन है। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे। ट्रम्प ने कहा कि यूक्रेन जंग के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो देशों को बेचता है। नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं। उसके बाद वे इन्हें किस तरह आगे भेजते हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. नेतन्याहू अमेरिका जाएंगे, जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। वह राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ईरान जंग शुरू होने के बाद पहली बार होगी। 2. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार: ईरान-अमेरिका में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। 3. कुवैत में 3 अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत में मौजूद अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। इसमें कैंप अरिफजान, कैंप दोहा और कैंप अदैरी को निशाना बनाया गया। 4. ईरान बोला- अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं और उसकी धमकियां भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान किर्गिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया। 5. होर्मुज में 28 क्रू मेंबर्स वाले LPG टैंकर पर हमला: ईरान के जलक्षेत्र में एक LPG टैंकर पर हमला हुआ। मोजाम्बिक के झंडे वाला यह टैंकर दिशा 28 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा था। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार
वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार
बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा कि वह लंबे समय से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में डॉक्टरों ने उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से उन्हें कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है और उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लंदन दौरे पर उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा।







