Friday, 25 Sep 2026 | 10:41 PM

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ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल, यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, यानी UKMTO ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज, जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते, यानी इवैक्यूएशन लेन बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर, यानी करीब ₹8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

आफताब बोले- शूटिंग से ज्यादा खाने का इंतजार रहता था:डायरेक्टर ने कहा- ऐसा लग रहा था जैसे हम फिल्म नहीं, यादें बना रहे हों

आफताब बोले- शूटिंग से ज्यादा खाने का इंतजार रहता था:डायरेक्टर ने कहा- ऐसा लग रहा था जैसे हम फिल्म नहीं, यादें बना रहे हों

‘वेलकम टू द जंगल’ की चर्चा अब तक इसकी बड़ी स्टारकास्ट और स्केल को लेकर होती रही है, लेकिन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए इसकी सबसे खास बात कुछ और थी। डायरेक्टर अहमद खान और अभिनेता आफताब शिवदासानी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान फिल्म का सेट सिर्फ काम की जगह नहीं रहा, बल्कि ऐसा स्पेस बन गया जहां कलाकारों ने साथ समय बिताया, पुरानी केमिस्ट्री दोबारा जी और कई नई यादें बनाई। दोनों ने बताया कि कई बार शूट खत्म होने के बाद भी लोग सेट पर रुके रहते थे, क्योंकि वहां का माहौल किसी फिल्म से ज्यादा एक बड़े गैदरिंग जैसा लगने लगा था। सवाल: इस फिल्म के सेट को बाकी फिल्मों से अलग क्या बनाता था? जवाब/अहमद खान:आमतौर पर लोग फिल्म पर आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं। यहां वैसा नहीं था। यहां लोगों को सेट पर रहने में मजा आ रहा था। कई बार जिन कलाकारों का शूट नहीं होता था, वो भी मौजूद रहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं कुछ मजेदार मिस न हो जाए। धीरे-धीरे ऐसा माहौल बन गया जहां काम के साथ दोस्ती और अपनापन भी जुड़ गया। सवाल: इतने सारे कलाकारों के बीच माहौल कैसे बना रहा? जवाब/अहमद खान:जब इतने लोग साथ काम करते हैं तो हर किसी की अपनी एनर्जी होती है। कोई बहुत तैयारी करके आता है, कोई मौके पर चीजें बदल देता है। मुझे लगा कि अगर सबको थोड़ा खुलने दिया जाए तो बेहतर चीजें निकलकर आएंगी। मेरा काम सिर्फ उस एनर्जी को सही दिशा देना था। सवाल: क्या कभी लगा कि लोग शूट से ज्यादा एक-दूसरे के लिए आ रहे हैं? जवाब/अहमद खान:हां, कई बार। लेकिन मुझे लगता है वही इस फिल्म की सबसे अच्छी बात थी। लोग काम करके जा नहीं रहे थे, वो वक्त भी साथ बिता रहे थे। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे कॉलेज वाले दिन वापस आ गए हों। सवाल: कॉमेडी में इम्प्रोवाइजेशन कितना काम आया? जवाब/अहमद खान:बहुत ज्यादा। कई बार सीन स्क्रिप्ट से शुरू होता था लेकिन कलाकारों की वजह से उसका रूप बदल जाता था। कॉमेडी में यही मजा होता है कि आप थोड़ा स्पेस दो तो कई अच्छी चीजें सामने आती हैं। सवाल: आफताब, इतने साल बाद इस टीम के साथ लौटना कैसा रहा? जवाब/आफताब शिवदासानी:बहुत सहज लगा। ऐसा नहीं लगा कि इतने साल निकल गए हैं। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जहां दोबारा शुरुआत नहीं करनी पड़ती। बस वहीं से बात शुरू हो जाती है जहां छोड़ी थी। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार चीज क्या रही? जवाब/आफताब शिवदासानी:मैं मजाक में कहता था कि मुझे शूट से ज्यादा लंच का इंतजार रहता था। लेकिन उसमें सच्चाई भी थी। लंच टाइम वो वक्त होता था जब सब लोग साथ बैठते थे, बातें करते थे, हंसते थे। कई यादें वहीं बनीं। सवाल: अगर इस पूरे सफर को एक लाइन में बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब/अहमद खान:कई बार ऐसा लगता था कि हम फिल्म नहीं बना रहे, यादें बना रहे हैं। इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद सबके बीच एक अलग जुड़ाव बन गया था। सवाल: इस फिल्म की सबसे बड़ी याद क्या रहेगी? जवाब/आफताब शिवदासानी:मेरे लिए यही कि इतने साल बाद भी लोगों के बीच वही अपनापन बना रहा। फिल्में खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ लोग और कुछ पल साथ रह जाते हैं। यही चीज सबसे ज्यादा याद आएगी। _________________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. दिशा बोलीं- बड़े कलाकारों से बहुत कुछ सीखा:अरशद वारसी ने कहा- शूटिंग कभी काम नहीं, दोस्तों के साथ बिताया वक्त लगा ‘वेलकम टू द जंगल’ में बड़ी स्टारकास्ट के बीच काम करने का अनुभव कलाकारों के लिए सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। दिशा पाटनी ने इसे सीखने और समझने का मौका बताया, जबकि अरशद वारसी के मुताबिक सेट का माहौल इतना सहज था कि काम का दबाव महसूस ही नहीं हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में दोनों कलाकारों ने बताया कि इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कलाकारों के बीच बना तालमेल और साथ बिताया समय रहा।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्म नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए यादों और रिश्तों का सफर भी रही। दैनिक भास्कर से बातचीत में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने फिल्म से जुड़े किस्से साझा किए। अक्षय ने बताया कि बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करना पिकनिक जैसा अनुभव था, जहां शूटिंग के साथ मस्ती भी हुई।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

आफताब बोले- शूटिंग से ज्यादा खाने का इंतजार रहता था:डायरेक्टर ने कहा- ऐसा लग रहा था जैसे हम फिल्म नहीं, यादें बना रहे हों

आफताब बोले- शूटिंग से ज्यादा खाने का इंतजार रहता था:डायरेक्टर ने कहा- ऐसा लग रहा था जैसे हम फिल्म नहीं, यादें बना रहे हों

‘वेलकम टू द जंगल’ की चर्चा अब तक इसकी बड़ी स्टारकास्ट और स्केल को लेकर होती रही है, लेकिन फिल्म से जुड़े लोगों के लिए इसकी सबसे खास बात कुछ और थी। डायरेक्टर अहमद खान और अभिनेता आफताब शिवदासानी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान फिल्म का सेट सिर्फ काम की जगह नहीं रहा, बल्कि ऐसा स्पेस बन गया जहां कलाकारों ने साथ समय बिताया, पुरानी केमिस्ट्री दोबारा जी और कई नई यादें बनाई। दोनों ने बताया कि कई बार शूट खत्म होने के बाद भी लोग सेट पर रुके रहते थे, क्योंकि वहां का माहौल किसी फिल्म से ज्यादा एक बड़े गैदरिंग जैसा लगने लगा था। सवाल: इस फिल्म के सेट को बाकी फिल्मों से अलग क्या बनाता था? जवाब/अहमद खान:आमतौर पर लोग फिल्म पर आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं। यहां वैसा नहीं था। यहां लोगों को सेट पर रहने में मजा आ रहा था। कई बार जिन कलाकारों का शूट नहीं होता था, वो भी मौजूद रहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं कुछ मजेदार मिस न हो जाए। धीरे-धीरे ऐसा माहौल बन गया जहां काम के साथ दोस्ती और अपनापन भी जुड़ गया। सवाल: इतने सारे कलाकारों के बीच माहौल कैसे बना रहा? जवाब/अहमद खान:जब इतने लोग साथ काम करते हैं तो हर किसी की अपनी एनर्जी होती है। कोई बहुत तैयारी करके आता है, कोई मौके पर चीजें बदल देता है। मुझे लगा कि अगर सबको थोड़ा खुलने दिया जाए तो बेहतर चीजें निकलकर आएंगी। मेरा काम सिर्फ उस एनर्जी को सही दिशा देना था। सवाल: क्या कभी लगा कि लोग शूट से ज्यादा एक-दूसरे के लिए आ रहे हैं? जवाब/अहमद खान:हां, कई बार। लेकिन मुझे लगता है वही इस फिल्म की सबसे अच्छी बात थी। लोग काम करके जा नहीं रहे थे, वो वक्त भी साथ बिता रहे थे। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे कॉलेज वाले दिन वापस आ गए हों। सवाल: कॉमेडी में इम्प्रोवाइजेशन कितना काम आया? जवाब/अहमद खान:बहुत ज्यादा। कई बार सीन स्क्रिप्ट से शुरू होता था लेकिन कलाकारों की वजह से उसका रूप बदल जाता था। कॉमेडी में यही मजा होता है कि आप थोड़ा स्पेस दो तो कई अच्छी चीजें सामने आती हैं। सवाल: आफताब, इतने साल बाद इस टीम के साथ लौटना कैसा रहा? जवाब/आफताब शिवदासानी:बहुत सहज लगा। ऐसा नहीं लगा कि इतने साल निकल गए हैं। कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जहां दोबारा शुरुआत नहीं करनी पड़ती। बस वहीं से बात शुरू हो जाती है जहां छोड़ी थी। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार चीज क्या रही? जवाब/आफताब शिवदासानी:मैं मजाक में कहता था कि मुझे शूट से ज्यादा लंच का इंतजार रहता था। लेकिन उसमें सच्चाई भी थी। लंच टाइम वो वक्त होता था जब सब लोग साथ बैठते थे, बातें करते थे, हंसते थे। कई यादें वहीं बनीं। सवाल: अगर इस पूरे सफर को एक लाइन में बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब/अहमद खान:कई बार ऐसा लगता था कि हम फिल्म नहीं बना रहे, यादें बना रहे हैं। इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद सबके बीच एक अलग जुड़ाव बन गया था। सवाल: इस फिल्म की सबसे बड़ी याद क्या रहेगी? जवाब/आफताब शिवदासानी:मेरे लिए यही कि इतने साल बाद भी लोगों के बीच वही अपनापन बना रहा। फिल्में खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ लोग और कुछ पल साथ रह जाते हैं। यही चीज सबसे ज्यादा याद आएगी। _________________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. दिशा बोलीं- बड़े कलाकारों से बहुत कुछ सीखा:अरशद वारसी ने कहा- शूटिंग कभी काम नहीं, दोस्तों के साथ बिताया वक्त लगा ‘वेलकम टू द जंगल’ में बड़ी स्टारकास्ट के बीच काम करने का अनुभव कलाकारों के लिए सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। दिशा पाटनी ने इसे सीखने और समझने का मौका बताया, जबकि अरशद वारसी के मुताबिक सेट का माहौल इतना सहज था कि काम का दबाव महसूस ही नहीं हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में दोनों कलाकारों ने बताया कि इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कलाकारों के बीच बना तालमेल और साथ बिताया समय रहा।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्म नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए यादों और रिश्तों का सफर भी रही। दैनिक भास्कर से बातचीत में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने फिल्म से जुड़े किस्से साझा किए। अक्षय ने बताया कि बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करना पिकनिक जैसा अनुभव था, जहां शूटिंग के साथ मस्ती भी हुई।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। आरोप लगाया गया है कि स्नैपचैट के क्विक एड और स्नैप मैप जैसे फीचर्स के जरिए हमलावर गैब्रियल जोएल वैलेंटीन-रियोस ने जेएफ नाम की लड़की को शिकार बनाया। एप की मदद से वह उससे जुड़ पाया और उसे बहला-फुसला सका। कथित तौर पर स्नैपचैट के क्विक एड फीचर ने 25 साल के वैलेंटीन-रियोस को जेएफ और उसी इलाके की अन्य नाबालिग लड़कियों से जुड़ने का सुझाव दिया। शिकायत के अनुसार, एप ने वैलेंटीन-रियोस को मिलनसार दिखने वाले लड़के के रूप में दर्शाया था। स्नैपचैट नाबालिगों को यह चेतावनी देने में विफल रहा कि ये यूजर्स अजनबी हो सकते हैं या उनसे जुड़ना खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ हजारों मामले मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक (बाइटडांस), यूट्यूब (गूगल), और स्नैपचैट (स्नैप) सहित कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की अदालतों में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लत से संबंधित दावों वाले 3,300 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। नाबालिगों के लिए उतना सुरक्षित नहीं है प्लेटफॉर्म अदालत में कहा गया है कि स्नैप के अधिकारियों को डार्क वेब पर एक पुस्तिका मिली, जिसमें स्नैपचैट के फीचर का इस्तेमाल करके युवा यूजर्स को निशाना बनाने के तरीके बताए गए हैं। हीट इनिशिएटिव नामक संगठन के एक सर्वे के मुताबिक नाबालिग यूजर्स में से आधे ने पिछले साल स्नैपचैट पर ‘असुरक्षित सामग्री या संदेश’ देखे। स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है भारत स्नैपचैट की 25 से अधिक देशों में 13 से 24 साल की आयु के 90% लोगों तक पहुंच है। भारत स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। याहू फाइनेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्नैपचैट के 25 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मंथली यूजर हैं। यह कंपनी के वैश्विक यूजर बेस का लगभग 36% है। देश में उसके यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। आरोप लगाया गया है कि स्नैपचैट के क्विक एड और स्नैप मैप जैसे फीचर्स के जरिए हमलावर गैब्रियल जोएल वैलेंटीन-रियोस ने जेएफ नाम की लड़की को शिकार बनाया। एप की मदद से वह उससे जुड़ पाया और उसे बहला-फुसला सका। कथित तौर पर स्नैपचैट के क्विक एड फीचर ने 25 साल के वैलेंटीन-रियोस को जेएफ और उसी इलाके की अन्य नाबालिग लड़कियों से जुड़ने का सुझाव दिया। शिकायत के अनुसार, एप ने वैलेंटीन-रियोस को मिलनसार दिखने वाले लड़के के रूप में दर्शाया था। स्नैपचैट नाबालिगों को यह चेतावनी देने में विफल रहा कि ये यूजर्स अजनबी हो सकते हैं या उनसे जुड़ना खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ हजारों मामले मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक (बाइटडांस), यूट्यूब (गूगल), और स्नैपचैट (स्नैप) सहित कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की अदालतों में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लत से संबंधित दावों वाले 3,300 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। नाबालिगों के लिए उतना सुरक्षित नहीं है प्लेटफॉर्म अदालत में कहा गया है कि स्नैप के अधिकारियों को डार्क वेब पर एक पुस्तिका मिली, जिसमें स्नैपचैट के फीचर का इस्तेमाल करके युवा यूजर्स को निशाना बनाने के तरीके बताए गए हैं। हीट इनिशिएटिव नामक संगठन के एक सर्वे के मुताबिक नाबालिग यूजर्स में से आधे ने पिछले साल स्नैपचैट पर ‘असुरक्षित सामग्री या संदेश’ देखे। स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है भारत स्नैपचैट की 25 से अधिक देशों में 13 से 24 साल की आयु के 90% लोगों तक पहुंच है। भारत स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। याहू फाइनेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्नैपचैट के 25 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मंथली यूजर हैं। यह कंपनी के वैश्विक यूजर बेस का लगभग 36% है। देश में उसके यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक: देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। पूरी खबर पढ़ें…

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आज यानी 25 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई में कटौती की थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड कार्गो आने की उम्मीद से लिया फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि घरेलू स्तर पर LPG के उत्पादन में सुधार और विदेशों से आने वाले LPG कार्गो के भारत पहुंचने की उम्मीद के बाद कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी रोक हटा ली गई है। इसके अलावा संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क LPG की सप्लाई को भी पहले की कुल खपत (प्री-क्राइसिस लेवल) 50% स्तर तकरूप से दोबारा शुरू कर दिया गया है, जिससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। रिलायंस जैसी कंपनियों को राहत, रोजाना 40 हजार टन घरेलू उत्पादन का लक्ष्य सप्लाई चेन सुधरने के बाद अब सरकार ने C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का फैसला किया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना कोटा वापस मिल सकेगा। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि यह ढील इस शर्त पर दी गई है कि देश में घरेलू LPG की कुल उपलब्धता प्रभावित नहीं होनी चाहिए और रोजाना उत्पादन कम से कम 40,000 टन बना रहना चाहिए। इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹1373 महंगा हुआ इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कमी होने लगी थी। इस कारण पेट्रोल-डीजल और LPG सप्लाई पर संकट आ गया था। इसके अलावा कई बार इनके दाम भी बढ़ाए गए। 28 फरवरी को दिल्ली में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 1740.50 रुपए में मिल रहा था। इसके बाद 5 बार इसके दाम बढ़ाए गए। इससे दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपए हो गई। यानी तब से इसकी कीमत 1373 रुपए बढ़ गई है। क्या होता है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’? ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर अब 70% किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली LPG आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो। ईरान-अमेरिका और इजराइल जंग से गैस की कमी ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। इस अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया और सप्लाई प्रभावित हुई। यही रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश का करीब 80-85% LPG यहीं से आता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा गैस बाहर से मंगाता है। इसी वजह से देश में LPG की कमी जैसी स्थिति बनी। हालांकि, सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा और साफ किया कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है।

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 70% से बढ़ाकर 100% किया:इंडस्ट्रीज को भी पहले की खपत का 50% मिलेगा, LPG सप्लाई में सुधार के बाद फैसला

केंद्र सरकार ने राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आज यानी 25 जून को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं। गैस संकट को देखते हुए सरकार ने कॉमर्शियल LPG सिलेंडर सप्लाई में कटौती की थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में इंडस्ट्रीज को रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है। इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है। यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है। घरेलू उत्पादन में सुधार और इंपोर्टेड कार्गो आने की उम्मीद से लिया फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि घरेलू स्तर पर LPG के उत्पादन में सुधार और विदेशों से आने वाले LPG कार्गो के भारत पहुंचने की उम्मीद के बाद कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी रोक हटा ली गई है। इसके अलावा संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क LPG की सप्लाई को भी पहले की कुल खपत (प्री-क्राइसिस लेवल) 50% स्तर तकरूप से दोबारा शुरू कर दिया गया है, जिससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। रिलायंस जैसी कंपनियों को राहत, रोजाना 40 हजार टन घरेलू उत्पादन का लक्ष्य सप्लाई चेन सुधरने के बाद अब सरकार ने C3 और C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का फैसला किया है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना कोटा वापस मिल सकेगा। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि यह ढील इस शर्त पर दी गई है कि देश में घरेलू LPG की कुल उपलब्धता प्रभावित नहीं होनी चाहिए और रोजाना उत्पादन कम से कम 40,000 टन बना रहना चाहिए। इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹1373 महंगा हुआ इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कमी होने लगी थी। इस कारण पेट्रोल-डीजल और LPG सप्लाई पर संकट आ गया था। इसके अलावा कई बार इनके दाम भी बढ़ाए गए। 28 फरवरी को दिल्ली में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर 1740.50 रुपए में मिल रहा था। इसके बाद 5 बार इसके दाम बढ़ाए गए। इससे दिल्ली में इसकी कीमत 3113.50 रुपए हो गई। यानी तब से इसकी कीमत 1373 रुपए बढ़ गई है। क्या होता है ‘प्री-क्राइसिस लेवल’? ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय से है जब देश में गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। फिलहाल राज्यों को बहुत कम सप्लाई मिल रही थी, जिसे अब बढ़ाकर अब 70% किया गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है। इसके चलते शुरुआत में होटलों जैसे कमर्शियल संस्थानों को होने वाली LPG आपूर्ति में कटौती की गई थी, ताकि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में परेशानी न हो। ईरान-अमेरिका और इजराइल जंग से गैस की कमी ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर हमला किया। दोनों देशों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों और परमाणु सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। इस अभियान को अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया और सप्लाई प्रभावित हुई। यही रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि देश का करीब 80-85% LPG यहीं से आता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा गैस बाहर से मंगाता है। इसी वजह से देश में LPG की कमी जैसी स्थिति बनी। हालांकि, सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा और साफ किया कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है।

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा।

भारत में बहुविवाह पर बहस तेज, एनसीपी विधायक सना मलिक ने स्वीकृति का समर्थन किया, विशेषज्ञों ने यूसीसी पर जोर दिया

भारत में बहुविवाह पर बहस तेज, एनसीपी विधायक सना मलिक ने स्वीकृति का समर्थन किया, विशेषज्ञों ने यूसीसी पर जोर दिया

भारत में बहुविवाह पर बहस तब तेज हो गई जब एनसीपी विधायक सना मलिक ने इस्लामिक ग्रंथों का हवाला देते हुए इसे स्वीकार करने की वकालत की। उनकी टिप्पणियों ने व्यक्तिगत कानूनों, धार्मिक व्याख्या, लैंगिक न्याय और समान नागरिक संहिता की मांग पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का तर्क है कि बहुविवाह के लिए कुरान की अनुमति संदर्भ-विशिष्ट है और सख्त शर्तों के साथ आती है, विशेष रूप से कई पत्नियों के बीच समान और न्यायपूर्ण व्यवहार की आवश्यकता के साथ। आलोचकों का कहना है कि व्यवहार में ऐसी समानता सुनिश्चित करना मुश्किल है, जिससे महिलाओं के अधिकारों, कानूनी सुरक्षा उपायों और सामाजिक न्याय पर चिंता बढ़ गई है। इस विवाद ने एक बार फिर भारत की व्यक्तिगत कानून प्रणाली और यूसीसी बहस को तीव्र फोकस में ला दिया है। n18oc_ Indian18oc_politicsn18oc_brasstacks News18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 25 जून, 2026, 19:40 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)संदर्भ विशिष्ट बहुविवाह(टी)बहुविवाह में समान व्यवहार(टी)पत्नियों के साथ न्यायसंगत व्यवहार(टी)लिंग न्याय(टी)भारत बहुविवाह पंक्ति(टी)इस्लामिक ग्रंथ बहुविवाह(टी)एकाधिक पत्नियों पर बहस(टी)मुस्लिम पर्सनल लॉ(टी)एनसीपी एमएलए ने बहुविवाह का समर्थन किया(टी)एनसीपी एमएलए सना मलिक(टी)पर्सनल लॉ डिबेट(टी)पर्सनल लॉ भारत(टी)बहुविवाह बहस(टी)भारत में बहुविवाह(टी)कुरान और बहुविवाह(टी)कुरान व्याख्या(टी)धार्मिक स्वतंत्रता(टी)सना मलिक(टी)सना मलिक बहुविवाह टिप्पणियाँ(टी)यूसीसी(टी)यूसीसी बहस भारत(टी)समान नागरिक संहिता

मछुआरों ने समुद्र से देखा वेनेजुएला का भूकंप, VIDEO:बेसबॉल मैच छोड़कर भागे प्लेयर, रोते-बिलखते लोगों से भर गई सड़कें

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दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने कुछ ही सेकेंड में लोगों की जिंदगी तहस-नहस कर दी। तेज झटकों से घबराए लोग घरों, दफ्तरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकल आए। कई शहरी इलाके मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। सड़कें रोते-बिलखते लोगों से भर गईं। इसके बाद शुरू हुई मलबे से लोगों को निकालने की जद्दोजहद। प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। आफ्टरशॉक की आशंका के कारण आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। VIDEO में देखें भूकंप के बाद का मंजर…